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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Science • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु (Microorganisms: Friend and Foe)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT कक्षा 8 विज्ञान का द्वितीय अध्याय "सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु" (Microorganisms: Friend and Foe) जीवन के उस अदृश्य संसार का उद्घाटन करता है, जिसे हम नग्न आँखों से नहीं देख सकते। सूक्ष्मजीव सर्वव्यापी हैं—बर्फ से लेकर गर्म जल के झरनों तथा मरुस्थल से लेकर दलदल तक। इस अध्याय में सूक्ष्मजीवों के चार मुख्य वर्गों (जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, शैवाल), विषाणु (Virus) की विचित्र प्रकृति, हमारे दैनिक जीवन व उद्योगों में उनके लाभकारी उपयोग (किण्वन, प्रतिजैविक, टीका, नाइट्रोजन चक्र) तथा उनसे होने वाले विनाशकारी संक्रामक रोगों व खाद्य परिरक्षण का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

🔬 एक बूँद तालाब के पानी में तैरता अदृश्य ब्रह्मांड!

क्या आप जानते हैं कि आपकी हथेली पर जितने सूक्ष्मजीव मौजूद हैं, उनकी संख्या पूरी पृथ्वी की कुल मानव आबादी से भी अधिक हो सकती है? कुछ सूक्ष्मजीव दूध को स्वादिष्ट दही में बदलते हैं और जीवन-रक्षक दवाइयाँ बनाते हैं, जबकि कुछ अदृश्य विषाणु पूरी दुनिया में महामारी फैला सकते हैं। ये सूक्ष्मजीव हमारे सच्चे मित्र हैं या घातक शत्रु? आइए, सूक्ष्मदर्शी की आँख से इस रहस्यमयी दुनिया को देखें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) का ज्ञान आधुनिक चिकित्सा, कृषि, जैव-प्रौद्योगिकी और पर्यावरण संरक्षण का आधार है। कोविड-19 जैसी महामारियों के उपरांत यह समझना और भी आवश्यक हो गया है कि टीके (Vaccines) कैसे काम करते हैं, एंटीबायोटिक्स का सही उपयोग क्या है, और खाद्य पदार्थों को खराब होने से कैसे बचाया जाए। यह अध्याय विद्यार्थियों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और वैज्ञानिक चेतना का विकास करता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • सजीवों की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई कोशिका (Cell) होती है।
  • कुछ जीव एककोशिकीय (Unicellular) होते हैं जबकि कुछ बहुकोशिकीय (Multicellular)।
  • रोग संक्रामक (एक व्यक्ति से दूसरे में फैलने वाले) और असंक्रामक हो सकते हैं।
  • दूध का दही जमना, ब्रेड का फूलना और भोजन का बासी होना रासायनिक व जैविक परिवर्तन हैं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • सूक्ष्मजीवों के चारों मुख्य वर्गों (जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, शैवाल) और विषाणु की संरचनात्मक विशेषताओं का वर्गीकरण कर सकेंगे।
  • किण्वन (Fermentation), एंटीबायोटिक्स और टीकाकरण (Vaccination) की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली समझा सकेंगे।
  • नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) के सभी चरणों का रेखाचित्र सहित निरूपण कर सकेंगे।
  • खाद्य परिरक्षण की विभिन्न रासायनिक व भौतिक विधियों (पाश्चुरीकरण, निर्जलीकरण, शीतलन) का वैज्ञानिक विश्लेषण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. सूक्ष्मजीवों का वर्गीकरण एवं विष...
2 2. मित्रवत सूक्ष्मजीव: वाणिज्यिक, औ...
3 3. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)...
4 4. हानिकारक सूक्ष्मजीव, रोग एवं खाद...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. सूक्ष्मजीवों का वर्गीकरण एवं विषाणु (Viruses)

वे अतिसूक्ष्म जीव जिन्हें हम बिना सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की सहायता से नग्न आँखों से नहीं देख सकते, सूक्ष्मजीव (Microorganisms) कहलाते हैं। इन्हें मुख्य रूप से चार बड़े वर्गों में विभाजित किया गया है:

  • 1. जीवाणु (Bacteria): ये सरलतम एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव हैं। आकार के आधार पर ये गोलाकार (कोकाई), दंडाकार (बैसिली) या सर्पिलाकार (स्पाइरिला) होते हैं; जैसे—लैक्टोबैसिलस, राइजोबियम, ई. कोलाई।
  • 2. कवक (Fungi): ये पर्णहरित (क्लोरोफिल) रहित विषमपोषी जीव हैं, जो मृत व सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं; जैसे—यीस्ट (एककोशिकीय), पेनिसिलियम, राइजोपस (ब्रेड मोल्ड), एस्परजिलस।
  • 3. प्रोटोजोआ (Protozoa): ये एककोशिकीय यूकेरियोटिक प्राणी-सम पोषण करने वाले जीव हैं; जैसे—अमीबा, पैरामीशियम, प्लास्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।
  • 4. शैवाल (Algae): ये क्लोरोफिल युक्त स्वपोषी, पादप-सदृश जीव हैं जो प्रकाश-संश्लेषण करते हैं; जैसे—क्लैमाइडोमोनास, स्पाइरोगाइरा, नीले-हरे शैवाल।

विषाणु (Viruses) की विचित्र प्रकृति:

विषाणु अन्य सूक्ष्मजीवों से भिन्न होते हैं। ये सजीव और निर्जीव के बीच की योजक कड़ी हैं। जब तक ये किसी जीवित कोशिका (परपोषी - जीवाणु, पौधा या जन्तु) के बाहर होते हैं, निर्जीव कण की तरह निष्क्रिय रहते हैं। लेकिन परपोषी कोशिका में प्रवेश करते ही ये उसकी मशीनरी पर अधिकार कर तेजी से गुणन (Replication) करने लगते हैं; जैसे—इन्फ्लूएंजा वायरस, पोलियो वायरस, एचआईवी, कोरोना वायरस।

2. मित्रवत सूक्ष्मजीव: वाणिज्यिक, औषधीय एवं कृषि उपयोग

सूक्ष्मजीव हमारे दैनिक जीवन और अर्थव्यवस्था में अत्यंत कल्याणकारी भूमिका निभाते हैं:

  • दही एवं ब्रेड निर्माण: दूध में पाया जाने वाला लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) जीवाणु दूध की शर्करा (लैक्टोज) को लैक्टिक अम्ल में बदलकर दूध को दही में जमा देता है। यीस्ट (Yeast) श्वसन के दौरान तेजी से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस उत्पन्न करता है, जिससे गैस के बुलबुले मैदे के खमीर को फुलाकर ब्रेड, केक और पेस्ट्री को स्पंजी बना देते हैं।
  • किण्वन (Fermentation): शर्करा (चीनी) को यीस्ट द्वारा अल्कोहल (शराब) में परिवर्तित करने की जैविक प्रक्रिया को किण्वन कहते हैं। इसकी खोज लुई पाश्चर ने 1857 में की थी।
  • प्रतिजैविक (Antibiotics): जीवाणुओं और कवकों से प्राप्त वे औषधियाँ जो बीमारी पैदा करने वाले हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देती हैं या उनकी वृद्धि रोक देती हैं, एंटीबायोटिक्स कहलाती हैं; जैसे—पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन, टेट्रासाइक्लिन। अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1929 में पेनिसिलियम नोटेटम नामक कवक से विश्व की प्रथम एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज की थी।
  • टीकाकरण (Vaccination): जब कोई दुर्बल या मृत सूक्ष्मजीव शरीर में प्रविष्ट कराए जाते हैं, तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उनसे लड़ने के लिए विशिष्ट प्रतिरक्षी (Antibodies) बनाती है। यह प्रतिरक्षी जीवन भर हमारे शरीर में बनी रहती है और भविष्य में होने वाले संक्रमण से रक्षा करती है। चेचक के टीके की खोज एडवर्ड जेनर ने 1798 में की थी। पोलियो, हैजा, क्षय (टीबी), हेपेटाइटिस के टीके इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।

3. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) एवं मृदा उर्वरता

वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन गैस है, जो प्रोटीन, पर्णहरित (क्लोरोफिल), न्यूक्लिक अम्ल और विटामिन का मुख्य घटक है। पौधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन का सीधा उपयोग नहीं कर सकते। इसे उपयोगी यौगिकों में बदलने की प्रक्रिया नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) कहलाती है:

  • जैविक स्थिरीकरण: फलीदार पौधों (चना, मटर, मूंग) की जड़ों की ग्रंथियों में वास करने वाले राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु तथा मिट्टी में स्वतंत्र रहने वाले नीले-हरे शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) वायुमंडलीय N2 को घुलनशील नाइट्रेट्स में बदल देते हैं।
  • पादप अवशोषण: पौधे जड़ों द्वारा इन नाइट्रेट्स को अवशोषित कर पादप प्रोटीन का निर्माण करते हैं। शाकाहारी जन्तु इन पौधों को खाकर प्रोटीन प्राप्त करते हैं।
  • विनाइट्रीकरण (Denitrification): पौधों व जंतुओं की मृत्यु के बाद मिट्टी में मौजूद विशिष्ट जीवाणु व कवक अपशिष्टों को नाइट्रोजन यौगिकों में बदलते हैं, तथा कुछ विशेष जीवाणु (जैसे स्यूडोमोनास) इन यौगिकों को पुनः स्वतंत्र नाइट्रोजन गैस में बदलकर वायुमंडल में छोड़ देते हैं। इस प्रकार वायुमंडल में नाइट्रोजन की प्रतिशत मात्रा सदैव 78% स्थिर बनी रहती है।

4. हानिकारक सूक्ष्मजीव, रोग एवं खाद्य परिरक्षण

रोग उत्पन्न करने वाले हानिकारक सूक्ष्मजीवों को रोगजनक (Pathogens) कहते हैं। ये संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में वायु, जल, भोजन या शारीरिक संपर्क द्वारा फैलते हैं:

रोग का नाम कारक सूक्ष्मजीव संचरण का माध्यम / वाहक रोकथाम के उपाय
क्षय रोग (Tuberculosis) जीवाणु (Bacteria) वायु (Air) BCG का टीका, रोगी को अलग रखना।
हैजा व टायफाइड जीवाणु (Bacteria) दूषित जल एवं बासी भोजन उबला पानी पीना, व्यक्तिगत स्वच्छता।
मलेरिया (Malaria) प्रोटोजोआ (Plasmodium) मादा एनोफिलीज़ मच्छर (वाहक) मच्छरदानी, जल जमाव रोकना।
डेंगू (Dengue) विषाणु (Virus) मादा एडीज मच्छर (वाहक) कूलर व बर्तनों में जल एकत्र न होने देना।
सिट्रस कैंकर (पादप रोग) जीवाणु (Bacteria) वायु द्वारा नीबू में फैलता है संक्रमित शाखाओं की छंटाई।

खाद्य परिरक्षण की प्रमुख विधियाँ (Food Preservation):

भोजन को सूक्ष्मजीवों द्वारा संदूषित होने से बचाने के लिए उपयोग की जाने वाली विधियाँ:

  • नमक व चीनी द्वारा: नमक मांस व मछली में तथा चीनी जैम व जेली में नमी कम करके जीवाणुओं की वृद्धि रोकती है।
  • तेल व सिरके द्वारा: अचार में सिरका और तेल ऐसा वातावरण बनाते हैं जिसमें जीवाणु जीवित नहीं रह सकते।
  • पाश्चुरीकरण (Pasteurisation): दूध को 70°C पर 15 से 30 सेकंड तक गर्म करके एकाएक ठंडा कर थैलियों में भर लिया जाता है। इससे रोगकारक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इसकी खोज लुई पाश्चर ने की थी।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

किण्वन का रासायनिक समीकरण
C6H12O6 (ग्लूकोज) —[यीस्ट / ज़ाइमेज़]→ 2 C2H5OH (एथेनॉल) + 2 CO2 ↑ + ऊर्जा
लुई पाश्चर द्वारा 1857 में खोजी गई अवायवीय श्वसन प्रक्रिया।
पाश्चुरीकरण मानक ताप-समय
70°C पर 15-30 सेकंड तापन → त्वरित प्रशीतन (Instant Chilling) ≤ 4°C
दूध को बिना उबाले सुरक्षित रखने की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक विधि।
वायुमंडलीय नाइट्रोजन संतुलन
N2 स्थिरीकरण दर = विनाइट्रीकरण दर (स्थिर 78% सान्द्रता)
जैव-भू-रासायनिक चक्र द्वारा पृथ्वी के वायुमंडल का संतुलन।
प्रमुख ऐतिहासिक खोजें
जेनर (1798: टीका) | पाश्चर (1857: किण्वन) | कोच (1876: एंथ्रेक्स) | फ्लेमिंग (1929: पेनिसिलिन)
सूक्ष्मजीव विज्ञान के चार युगान्तकारी मील के पत्थर।
एंटीबायोटिक्स की सीमा
केवल जीवाणु जनित रोगों में प्रभावी; विषाणु (Viral) रोगों में पूर्णतः अप्रभावी
सर्दी-जुकाम और फ्लू वायरस जनित होने के कारण एंटीबायोटिक्स से ठीक नहीं होते।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: विषाणु (Virus) को सजीव और निर्जीव के बीच की सीमा-रेखा क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: विषाणु में सजीव और निर्जीव दोनों के लक्षण पाए जाते हैं:\n1. निर्जीव लक्षण: जब तक विषाणु किसी जीवित जीव के बाहर वायु, जल या मिट्टी में होते हैं, वे निर्जीव रासायनिक कणों की भाँति अक्रिय रहते हैं। उनमें कोई उपापचयी क्रिया, श्वसन या वृद्धि नहीं होती और उन्हें रवे (Crystals) के रूप में बोतलों में वर्षों सुरक्षित रखा जा सकता है।\n2. सजीव लक्षण: जैसे ही वे किसी परपोषी (Host) कोशिका में प्रवेश करते हैं, वे सजीवों की भाँति जनन व गुणन करने लगते हैं। अतः इन्हें सजीव व निर्जीव की सीमा-रेखा कहा जाता है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: प्रतिजैविक (Antibiotics) क्या हैं और इन्हें लेते समय कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: प्रतिजैविक वे औषधियाँ हैं जो सूक्ष्मजीवों (जीवाणु व कवक) से तैयार की जाती हैं और रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को नष्ट करती हैं (जैसे पेनिसिलिन)।\nसावधानियाँ:\n1. एंटीबायोटिक्स केवल योग्य डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।\n2. डॉक्टर द्वारा निर्धारित पूरा कोर्स समाप्त करना चाहिए, बीच में छोड़ना नहीं चाहिए।\n3. अनावश्यक रूप से एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए, अन्यथा भविष्य में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।\n4. यह फ्लू या सामान्य जुकाम जैसे वायरल रोगों में काम नहीं करती।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: दूध से दही जमने की वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: हल्के गुनगुने दूध में थोड़ा-सा जामन (दही) मिलाने पर उसमें उपस्थित लाखों "लैक्टोबैसिलस" (Lactobacillus) जीवाणु अनुकूल तापमान पाकर तेजी से गुणन करते हैं। ये जीवाणु दूध में उपस्थित लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित कर देते हैं। इस अम्ल के कारण दूध का कैसीन प्रोटीन जम जाता है और दूध गाढ़े, स्वादिष्ट दही में बदल जाता है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: पाश्चुरीकरण (Pasteurisation) क्या है और यह खाद्य संरक्षण में किस प्रकार उपयोगी है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: पाश्चुरीकरण दूध के परिरक्षण की एक वैज्ञानिक विधि है, जिसकी खोज लुई पाश्चर ने की थी। इसमें दूध को लगभग 70°C ताप पर 15 से 30 सेकंड के लिए गर्म किया जाता है और फिर एकाएक अत्यधिक ठंडा करके थैलियों में पैक कर दिया जाता है। इस तीव्र ताप परिवर्तन से रोगजनक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे दूध बिना उबाले भी कई दिनों तक सुरक्षित व पीने योग्य बना रहता है।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: मलेरिया और डेंगू के संचरण को रोकने के लिए अपने आस-पास जल भराव क्यों नहीं होने देना चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: मलेरिया का वाहक "मादा एनोफिलीज़ मच्छर" और डेंगू का वाहक "मादा एडीज मच्छर" होता है। सभी मच्छर रुके हुए ताजे या गंदे जल (जैसे कूलर, टायरों, खुले बर्तनों, नालियों) में ही अंडे देते हैं। यदि हम आस-पास पानी जमा नहीं होने देंगे और सफाई रखेंगे, तो मच्छरों का प्रजनन चक्र टूट जाएगा और मलेरिया तथा डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रसार रुक जाएगा।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सभी सूक्ष्मजीवों को केवल हानिकारक और बीमारी फैलाने वाला समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अधिकांश सूक्ष्मजीव हमारे मित्र हैं; वे दही, ब्रेड, दवाइयों, अपशिष्ट अपघटन और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अपरिहार्य हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सर्दी-जुकाम या वायरल बुखार में एंटीबायोटिक गोलियाँ खाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एंटीबायोटिक्स केवल जीवाणुओं (Bacteria) के विरुद्ध प्रभावी होती हैं; विषाणु (Virus) जनित सर्दी-जुकाम पर इनका कोई प्रभाव नहीं होता।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मच्छर को मलेरिया का रोगाणु मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मच्छर रोगाणु नहीं, केवल "वाहक (Carrier/Vector)" है; मलेरिया का वास्तविक रोगजनक "प्लास्मोडियम" नामक प्रोटोजोआ है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

1. जीवाणु (Bacteria) लैक्टोबैसिलस, राइजोबियम 2. कवक (Fungi) यीस्ट, पेनिसिलियम 3. प्रोटोजोआ अमीबा, प्लास्मोडियम 4. शैवाल (Algae) स्पाइरोगाइरा, क्लैमाइडोमोनास VIRUS सजीव-निर्जीव योजक कड़ी अध्याय 2: सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु (MICROORGANISMS) मित्रवत: किण्वन, N2-चक्र, टीका • शत्रुवत: मलेरिया, टीबी, भोजन विषाक्तन

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. वे अतिसूक्ष्म जीव जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है, सूक्ष्मजीव कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 2
  1. सूक्ष्मजीवों के 4 मुख्य वर्ग हैं: जीवाणु (Bacteria), कवक (Fungi), प्रोटोजोआ (Protozoa), और शैवाल (Algae)।
मुख्य बिंदु 3
  1. विषाणु (Virus) केवल किसी जीवित परपोषी (पौधे, जन्तु या जीवाणु) की कोशिका में ही गुणन करते हैं।
मुख्य बिंदु 4
  1. लैक्टोबैसिलस जीवाणु दूध को दही में जमाता है; यीस्ट ब्रेड और केक को स्पंजी व हल्का बनाता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. शर्करा का यीस्ट द्वारा अल्कोहल में रूपांतरण किण्वन (Fermentation) कहलाता है (खोज: लुई पाश्चर, 1857)।
मुख्य बिंदु 6
  1. अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1929 में पेनिसिलियम कवक से प्रथम एंटीबायोटिक "पेनिसिलिन" की खोज की थी।
मुख्य बिंदु 7
  1. टीका (Vaccine) शरीर में प्रतिरक्षी (Antibodies) उत्पन्न कर संक्रामक रोगों से आजीवन सुरक्षा देता है (जेनर, 1798)।
मुख्य बिंदु 8
  1. राइजोबियम जीवाणु व नीले-हरे शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मृदा उर्वरता बढ़ाते हैं।
मुख्य बिंदु 9
  1. मादा एनोफिलीज़ मच्छर मलेरिया की तथा मादा एडीज मच्छर डेंगू वायरस की संवाहक होती है।
मुख्य बिंदु 10
  1. खाद्य परिरक्षण नमक, चीनी, तेल, सिरका और पाश्चुरीकरण (70°C पर 15-30 सेकंड) द्वारा किया जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
दही जमाने में किस जीवाणु की मुख्य भूमिका होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus)।
यह दूध की लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलकर दूध को दही में जमा देता है।
2
विश्व की प्रथम एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक) कौन-सी थी और इसके खोजकर्ता कौन थे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पेनिसिलिन (Penicillin); इसकी खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1929 में की थी।
यह पेनिसिलियम नोटेटम नामक फफूंद (कवक) से आकस्मिक रूप से खोजी गई थी।
3
मलेरिया रोग किस प्रोटोजोआ के कारण होता है और इसका वाहक कौन है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रोगजनक: प्लास्मोडियम (Plasmodium); वाहक: मादा एनोफिलीज़ मच्छर।
मादा एनोफिलीज़ मच्छर रोगी के रक्त से प्लास्मोडियम लेकर स्वस्थ व्यक्ति में पहुँचाती है।
4
फलीदार पौधों की जड़ों में कौन-सा सहजीवी जीवाणु नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: राइजोबियम (Rhizobium)।
यह वायुमंडलीय N2 को नाइट्रेट्स में बदलकर पौधों को उपलब्ध कराता है।
5
पाश्चुरीकरण विधि में दूध को कितने तापमान और समय तक गर्म किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लगभग 70°C पर 15 से 30 सेकंड तक।
इसके तुरंत बाद दूध को तेजी से ठंडा कर थैलियों में भर लिया जाता है ताकि रोगाणु नष्ट हो जाएँ।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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