जीवन काल की वह अवधि जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है, किशोरावस्था (Adolescence) कहलाती है। यह लगभग 11 वर्ष की आयु से प्रारंभ होकर 18 या 19 वर्ष की आयु तक रहती है। किशोरों को टीनेजर्स (Teens) भी कहा जाता है। किशोरावस्था के दौरान होने वाले परिवर्तनों की शुरुआत को यौवनारंभ (Puberty) कहते हैं:
- 1. लंबाई में तीव्र वृद्धि: हाथ और पैरों की लंबी अस्थियों (हड्डियों) की लंबाई तेजी से बढ़ती है। 18 वर्ष की आयु तक व्यक्ति अपनी अधिकतम संभावित लंबाई प्राप्त कर लेता है।
- 2. शारीरिक आकृति में परिवर्तन: लड़कों के कंधे चौड़े और सीना विस्तृत हो जाता है, जबकि लड़कियों में कमर का निचला भाग (कूल्हे) चौड़ा हो जाता है।
- 3. स्वर में परिवर्तन (एडम्स ऐपल): लड़कों का स्वरयंत्र (Larynx) बड़ा होकर गले के सामने उभरे हुए भाग के रूप में दिखाई देने लगता है, जिसे एडम्स ऐपल (कंठमणी) कहते हैं। इससे लड़कों की आवाज भारी और गहरी हो जाती है, जबकि लड़कियों का स्वरयंत्र छोटा रहता है और उनकी आवाज उच्च तारत्व (High pitch) वाली व महीन होती है।
- 4. स्वेद एवं तैल ग्रंथियों की सक्रियता: पसीने और तेल (सिबेसियस) ग्रंथियों का स्राव बढ़ जाता है, जिससे कई किशोरों के चेहरे पर कील-मुंहासे (Acne/Pimples) निकल आते हैं।
- 5. मानसिक एवं बौद्धिक परिपक्वता: सोचने की क्षमता में तीव्र विकास होता है और किशोर अधिक स्वतंत्र व आत्म-सचेत हो जाते हैं।