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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Science • अध्याय 12
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

कुछ प्राकृतिक परिघटनाएं (Some Natural Phenomena)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 विज्ञान का बारहवाँ अध्याय "कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ" (Some Natural Phenomena) भू-भौतिकी और वायुमंडलीय विद्युत का अत्यंत ज्ञानवर्धक व जीवन-रक्षक अध्याय है। प्रकृति में जहाँ कई घटनाएँ नियमित व सुखद होती हैं, वहीं कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ जान-माल का भारी विनाश कर सकती हैं। इस अध्याय में घर्षण द्वारा आवेशन (Charging by Rubbing), आवेशों के दो प्रकार (धनावेश व ऋणावेश), आवेशों के अंतःक्रिया नियम (सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षण, विजातीय में आकर्षण), स्वर्ण-पत्र विद्युतदर्शी (Electroscope) द्वारा आवेश की पहचान, भू-संपर्कन (Earthing), तड़ित (Lightning) की उत्पत्ति का वैज्ञानिक रहस्य (मेघों में विद्युत विसर्जन / Electric Discharge), तड़ित से सुरक्षा के नियम, भवनों की सुरक्षा हेतु तड़ित चालक (Lightning Conductor), तथा भूकंप (Earthquakes) के कारण (पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों / Tectonic Plates की गति), भ्रंश क्षेत्र, रिक्टर पैमाना (Richter Scale), भूकंपलेखी (Seismograph) एवं आपदा प्रबंधन व बचाव के व्यावहारिक उपायों का गहन वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।

⚡ बादलों में करोड़ों वोल्ट की बिजली कैसे पैदा होती है और पेड़ तड़ित से क्यों जल जाते हैं?

क्या आपने कभी गौर किया है कि सर्दियों में जब आप ऊनी स्वेटर उतारते हैं, तो चट-चट की आवाज के साथ चिंगारियाँ क्यों दिखाई देती हैं? प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठकर उठने के बाद किसी धातु के दरवाजे को छूने पर हल्का बिजली का झटका क्यों लगता है? आकाश में गर्जन के साथ कौंधने वाली आसमानी बिजली (तड़ित) और आपके स्वेटर की चिंगारी में क्या कोई वैज्ञानिक संबंध है? और जब धरती अचानक कुछ सेकंड के लिए काँपने लगती है, तो बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह क्यों ढह जाती हैं? आइए, प्रकृति के इन विनाशकारी और रहस्यमयी रूपों के पीछे के विज्ञान को समझें और जानें कि विज्ञान कैसे हमें इनसे सुरक्षित रखता है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखण्ड भारत के सर्वाधिक तड़ित-प्रभावित (Lightning-prone) राज्यों में से एक है। राँची, लोहरदगा, गुमला, लातेहार और पलामू के पठारी क्षेत्रों में प्रतिवर्ष आकाशीय बिजली गिरने से अनेक लोगों और पशुओं की असमय मृत्यु हो जाती है। इसके अतिरिक्त, झारखण्ड का कुछ भाग भूकंपीय जोन II और III में आता है। तड़ित और भूकंप के वैज्ञानिक नियमों तथा बचाव के सुरक्षा प्रोटोकॉल (तड़ित चालक, सुरक्षित मुद्रा) का ज्ञान होना प्रत्येक छात्र और नागरिक के जीवन की रक्षा के लिए अपरिहार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पदार्थ की मूल परमाणु संरचना: प्रोटॉन (धनावेशित), इलेक्ट्रॉन (ऋणावेशित) और न्यूट्रॉन।
  • घर्षण (Friction) द्वारा ऊष्मा व संपर्क प्रभाव का प्राथमिक ज्ञान।
  • पृथ्वी की आंतरिक परतों (क्रस्ट, मैंटल, कोर) की सामान्य समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • घर्षण द्वारा आवेशन की क्रियाविधि तथा धनावेश व ऋणावेश के आकर्षण-प्रतिकर्षण नियमों को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • विद्युतदर्शी (Electroscope) की बनावट एवं कार्यप्रणाली समझाकर आवेश के स्थानांतरण व भू-संपर्कन को निरूपित कर सकेंगे।
  • मेघों में आवेश संचयन और तड़ित (Lightning) के विद्युत विसर्जन की वैज्ञानिक प्रक्रिया का वर्णन कर सकेंगे।
  • तड़ित चालक (Lightning Conductor) की स्थापना व कार्यविधि तथा तड़ित झंझा के समय जीवन-रक्षक सुरक्षा नियमों का पालन कर सकेंगे।
  • भूकंप की उत्पत्ति (टेक्टॉनिक प्लेटों की गति), रिक्टर पैमाने की लघुगणकीय प्रकृति तथा भूकंप के समय आत्मरक्षा के उपाय बता सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. घर्षण द्वारा आवेशन, आवेशों के प्...
2 2. तड़ित (Lightning) की कहानी एवं व...
3 3. तड़ित से सुरक्षा एवं तड़ित चालक...
4 4. भूकंप (Earthquakes): उत्पत्ति, र...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. घर्षण द्वारा आवेशन, आवेशों के प्रकार एवं विद्युतदर्शी

जब दो उपयुक्त पदार्थों को आपस में रगड़ा जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण दोनों वस्तुएँ आवेशित हो जाती हैं। इसे घर्षण द्वारा आवेशन (Charging by Friction / Rubbing) कहते हैं:

  • उदाहरण: जब प्लास्टिक के रिफिल को पॉलीथीन से रगड़ा जाता है, तो दोनों पर विद्युत आवेश आ जाता है। जब कंघी को सूखे बालों से रगड़ा जाता है, तो कंघी आवेशित होकर कागज के छोटे टुकड़ों को आकर्षित करने लगती है।
  • आवेशों के दो प्रकार: 1. धनावेश (Positive Charge, +) तथा 2. ऋणावेश (Negative Charge, −)।
    • परंपरानुसार, रेशम से रगड़ी गई काँच की छड़ के आवेश को धनावेश माना जाता है।
    • पॉलीथीन या ऊन से रगड़े गए प्लास्टिक स्ट्रॉ के आवेश को ऋणावेश माना जाता है।
  • आवेशों का मौलिक नियम: सजातीय (समान) आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (Repel) करते हैं, जबकि विजातीय (असमान) आवेश एक-दूसरे को आकर्षित (Attract) करते हैं। (+ और + प्रतिकर्षण; + और − आकर्षण)।

विद्युतदर्शी (Electroscope) एवं भू-संपर्कन (Earthing):

स्वर्ण-पत्र विद्युतदर्शी (Gold-leaf Electroscope):

यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग यह परीक्षण करने के लिए किया जाता है कि कोई वस्तु आवेशित है या नहीं। इसमें काँच की बोतल में एक धातु की छड़ लगी होती है, जिसके ऊपरी सिरे पर धातु की चकती और निचले सिरे पर सोने या एल्युमिनियम की दो पतली पन्नियाँ लटकी होती हैं। जब किसी आवेशित वस्तु को धातु की चकती से छुआ जाता है, तो आवेश छड़ से होकर दोनों पन्नियों में पहुँच जाता है। समान आवेश पाने के कारण पन्नियाँ एक-दूसरे से दूर फैल (अपसरित हो) जाती हैं।

भू-संपर्कन (Earthing):

किसी आवेशित वस्तु से आवेश को पृथ्वी में भेजने की प्रक्रिया को भू-संपर्कन कहते हैं। जब हम विद्युतदर्शी की चकती को उंगली से छूते हैं, तो पन्नियों का आवेश हमारे शरीर से होकर पृथ्वी में चला जाता है और पन्नियाँ सिकुड़ जाती हैं। हमारे घरों में विद्युत उपकरणों को करंट के झटके से बचाने के लिए भू-संपर्कन किया जाता है।

2. तड़ित (Lightning) की कहानी एवं वैज्ञानिक क्रियाविधि

प्राचीन काल में लोग आकाश में कौंधने वाली बिजली से भयभीत होकर इसे ईश्वर का प्रकोप मानते थे। परंतु सन् 1752 में अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन (Benjamin Franklin) ने पतंग के प्रसिद्ध प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि आकाश की तड़ित और हमारे कपड़ों से निकलने वाली चिंगारी वास्तव में एक ही भौतिक परिघटना—विद्युत आवेश का विसर्जन है।

बादलों में आवेश का संचयन (Accumulation of Charges):

तड़ित झंझा (तूफान) के समय वायु की धाराएँ तीव्र गति से ऊपर की ओर उठती हैं, जबकि जल की सूक्ष्म बूँदें व ओले नीचे की ओर गिरते हैं:

  1. इन कणों के तीव्र पारस्परिक घर्षण और संघट्ट के कारण बादलों में व्यापक पैमाने पर आवेश का पृथक्करण हो जाता है।
  2. मेघों के ऊपरी किनारे के निकट धनावेश (+) संचित हो जाता है।
  3. मेघों के निचले किनारे के निकट विशाल ऋणावेश (−) संचित हो जाता है।
  4. प्रेरण (Induction) द्वारा धरती की सतह, ऊँचे पेड़ों और भवनों के शीर्ष पर धनावेश (+) प्रेरित हो जाता है।

विद्युत विसर्जन (Electric Discharge) और तड़ित आघात:

सामान्यतः वायु विद्युत की कुचालक होती है। परंतु जब बादलों में संचित आवेश का परिमाण करोड़ों वोल्ट तक अत्यधिक बढ़ जाता है, तो वायु अपनी कुचालकता खो देती है और आवेशों के प्रवाह के लिए एक चालक पथ बन जाता है:

  • ऋणात्मक और धनात्मक आवेश अत्यंत तीव्र गति से मिलते हैं, जिससे प्रकाश की चमकीली लकीर (Flash) और प्रचंड ध्वनि (Thunder) उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया को विद्युत विसर्जन कहते हैं।
  • जब यह विसर्जन बादलों और पृथ्वी के बीच होता है, तो इसे आकाशीय बिजली गिरना (Lightning Strike) कहते हैं। इससे अत्यधिक ताप (लगभग 30,000°C, जो सूर्य की सतह से 5 गुना अधिक है) उत्पन्न होता है, जो वृक्षों को भस्म कर देता है और भवनों को नष्ट कर देता है।

3. तड़ित से सुरक्षा एवं तड़ित चालक (Lightning Conductor)

A. तड़ित झंझा के समय सुरक्षा नियम (Do’s and Don’ts during Lightning):

यदि आप खुले क्षेत्र में हैं:
  • खुले मैदान, ऊँचे वृक्षों, बिजली के खंभों, टेलीफोन टावरों और धातु के शेडों से तुरंत दूर हटें।
  • छाता लेकर कदापि न चलें, क्योंकि उसकी धातु की डंडी तड़ित को आकर्षित करती है।
  • यदि कोई सुरक्षित आश्रय न मिले, तो जमीन पर सीधे न लेटें; बल्कि घुटनों के बल बैठकर सिर को घुटनों और हाथों के बीच झुका लें (तड़ित सुरक्षित मुद्रा)। इससे आप लक्ष्य का सबसे छोटा बिंदु बन जाते हैं।
  • कार या बस के भीतर हैं, तो खिड़कियाँ पूरी बंद करके भीतर ही रहें (धातु की बॉडी फैराडे पिंजरे का कार्य करती है)।
यदि आप घर के भीतर हैं:
  • तार वाले टेलीफोन, टीवी के केबल और कंप्यूटर का उपयोग न करें (मोबाइल व कॉर्डलेस सुरक्षित हैं)।
  • नल के बहते पानी से स्नान न करें और बर्तनों को न धोएँ, क्योंकि धातु के पाइप विद्युत चालन कर सकते हैं।
  • बिजली के सभी मुख्य उपकरणों के प्लग सॉकेट से निकाल दें।
  • खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें।

B. तड़ित चालक (Lightning Conductor):

तड़ित चालक एक ऐसी युक्ति है जिसका उपयोग भवनों को तड़ित के विनाशकारी प्रभाव से बचाने के लिए किया जाता है:

  • संरचना: इसमें ताँबे या लोहे की एक भारी छड़ होती है, जिसका ऊपरी सिरा नुकीले त्रिशूल के आकार का होता है और भवन की सबसे ऊँची छत से ऊपर निकला रहता है।
  • छड़ का निचला सिरा धातु की एक चौड़ी पट्टी द्वारा जमीन में कई फीट गहराई में दबी ताँबे की प्लेट से जुड़ा (Earth किया) रहता है।
  • कार्यप्रणाली: जब आकाशीय बिजली भवन की ओर गिरती है, तो नुकीले सिरे उसे आकर्षित कर बिना भवन को स्पर्श किए सीधे भूमि के भीतर सुरक्षित विसर्जित कर देते हैं। इस प्रकार भवन को कोई क्षति नहीं पहुँचती।

4. भूकंप (Earthquakes): उत्पत्ति, रिक्टर पैमाना एवं बचाव

पृथ्वी की पपड़ी (Crust) के भीतर अचानक होने वाले तीव्र कंपन या झटके को भूकंप (Earthquake) कहते हैं। तड़ित या चक्रवात के विपरीत, भूकंप की सटीक पूर्व-भविष्यवाणी करना आधुनिक विज्ञान के लिए आज भी संभव नहीं है।

भूकंप की उत्पत्ति का वैज्ञानिक कारण:

पृथ्वी की सबसे बाहरी परत, जिसे भू-पर्पटी (Crust) कहते हैं, एक अखंड टुकड़ा नहीं है। यह अनेक बड़े-बड़े टुकड़ों में विभाजित है, जिन्हें विवर्तनिक प्लेटें (Tectonic Plates) कहते हैं:

  • ये प्लेटें पृथ्वी के भीतर पिघले मैग्मा पर निरंतर अत्यंत धीमी गति से तैरती रहती हैं।
  • जब दो प्लेटें परस्पर टकराती हैं या एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे खिसकती है (Subduction), तो उनके किनारों पर घर्षण के कारण विशाल तनाव उत्पन्न होता है।
  • जब यह तनाव अचानक मुक्त होता है, तो भू-पर्पटी में प्रघाती तरंगें (Seismic Waves) उत्पन्न होती हैं, जो सतह पर भूकंप के रूप में कंपन करती हैं।
  • प्लेटों की सीमाओं को दुर्बल क्षेत्र (Weak Zones) अथवा भूकंपी / भ्रंश क्षेत्र (Fault Zones) कहते हैं। भारत में कश्मीर, पश्चिमी व मध्य हिमालय, कच्छ का रण और पूर्वोत्तर भारत सर्वाधिक संवेदी क्षेत्र हैं।

भूकंप की माप: रिक्टर पैमाना एवं भूकंपलेखी

मापक उपकरण / पैमाना प्रकृति एवं कार्यप्रणाली तीव्रता व प्रभाव
1. भूकंपलेखी (Seismograph) यह एक ऐसा उपकरण है जिसमें एक कंपायमान लोलक या छड़ पर पेन लगा होता है। भूकंप आने पर लोलक कंपित होता है और घूमते हुए ड्रम पर लगे कागज पर तरंगों का लेखा-चित्र (Seismogram) बना देता है। तरंगों के आगमन समय और आयाम को रिकॉर्ड करता है।
2. रिक्टर पैमाना (Richter Scale) भूकंप की शक्ति का परिमाण मापने वाला पैमाना। यह रैखिक नहीं बल्कि लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है। परिमाण में 2 इकाई की वृद्धि का अर्थ है 1000 गुना अधिक विनाशकारी ऊर्जा! ($10^3$) परिमाण < 4: नगण्य झटका
परिमाण 5 - 6: मध्यम क्षति
परिमाण > 7: अत्यंत विनाशकारी (भुज 2001, कश्मीर 2005)

भूकंप के झटके लगने पर सुरक्षात्मक कदम:

  • यदि आप घर के भीतर हैं: झुको, ढको और पकड़ो (Drop, Cover, and Hold on)—किसी मजबूत मेज के नीचे बैठें और उसके पैरों को कसकर पकड़ें; भारी अलमारी और गिर सकने वाले शीशों से दूर रहें; यदि बिस्तर पर हैं तो सिर को तकिए से ढँक लें।
  • यदि आप खुले में हैं: भवनों, बिजली के तारों और पेड़ों से दूर खुले मैदान में जाएँ और जमीन पर बैठ जाएँ।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

आवेशों का मौलिक अंतःक्रिया नियम (Fundamental Law of Electric Charges)
Like Charges Repel (+ ↔ + , − ↔ −) ; Unlike Charges Attract (+ → ← −)
सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित तथा विजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
रिक्टर पैमाने की लघुगणकीय ऊर्जा वृद्धि (Richter Scale Energy Multiplication)
ΔE = 10^(1.5 · ΔM) (लगभग 31.6 गुना प्रति इकाई वृद्धि)
परिमाण में 2 की वृद्धि (जैसे 5 से 7) होने पर विमुक्त विनाशकारी ऊर्जा लगभग 1000 गुना ($31.6 \times 31.6$) बढ़ जाती है।
तड़ित के समय विद्युत विसर्जन विभव (Lightning Potential Difference)
V ≈ 10⁷ to 10⁸ Volts (करोड़ों वोल्ट)
तड़ित के दौरान विद्युत धारा का मान 10,000 से 2,00,000 एम्पीयर तक हो सकता है।
तड़ित ताप विमुक्ति (Lightning Temperature Generation)
T ≈ 30,000 K (~27,000°C)
तड़ित चैनल का तापमान सूर्य की बाह्य सतह (6,000 K) से लगभग 5 गुना अधिक तप्त हो जाता है।
आवेश संरक्षण का सिद्धांत (Principle of Conservation of Charge)
$$Q_total = Constant (q_pos + q_neg = 0)$$
घर्षण द्वारा आवेशन में कोई नया आवेश उत्पन्न या नष्ट नहीं होता, केवल इलेक्ट्रॉनों का पुनर्वितरण होता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
रिक्टर पैमाने पर किसी भूकंप का परिमाण 3 दर्ज किया गया। क्या यह भूकंप अधिक विनाशकारी होगा? क्या इसे भूकंपलेखी (Seismograph) द्वारा रिकॉर्ड किया जा सकेगा?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. विनाशकारिता का आकलन:\nरिक्टर पैमाने पर 7 से अधिक परिमाण वाले भूकंप ही अत्यंत विनाशकारी होते हैं।\nपरिमाण 3 का भूकंप अत्यंत दुर्बल झटका होता है, जो शायद ही सामान्य रूप से मनुष्यों द्वारा महसूस किया जाए। इससे किसी प्रकार की जन-धन की क्षति नहीं होगी।\n\n2. भूकंपलेखी द्वारा रिकॉर्डिंग:\nहाँ, अत्यंत संवेदनशील भूकंपलेखी यंत्र परिमाण 3 (तथा इससे भी कम परिमाण) की सूक्ष्म तरंगों को भी भली-भाँति रिकॉर्ड कर लेते हैं।
उदाहरण 2
जब एक फूले हुए गुब्बारे को ऊनी कपड़े से रगड़कर दीवार पर दबाया जाता है, तो वह दीवार से क्यों चिपक जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. गुब्बारे को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर घर्षण के कारण गुब्बारा ऋणावेशित हो जाता है।\n2. जब इस आवेशित गुब्बारे को दीवार के पास लाया जाता है, तो यह प्रेरण (Induction) द्वारा दीवार की सतह के पास धनावेश प्रेरित कर देता है।\n3. विजातीय आवेशों (गुब्बारे का ऋणावेश और दीवार का प्रेरित धनावेश) के मध्य शक्तिशाली स्थिरवैद्युत आकर्षण बल कार्य करता है।\n4. इस आकर्षण बल के कारण गुब्बारा दीवार से चिपक जाता है।
उदाहरण 3
तड़ित झंझा (आकाशीय बिजली के तूफान) के समय खुले मैदान में छाता लेकर निकलना अत्यधिक खतरनाक क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. छाते की डंडी और उसकी ऊपर निकली हुई नोक धातु (प्रायः एल्युमिनियम या स्टील) की बनी होती है, जो विद्युत की उत्तम सुचालक होती है।\n2. खुले मैदान में छाता लेकर चलने वाला व्यक्ति मैदान में सबसे ऊँचा बिंदु बन जाता है।\n3. बादलों का विशाल विद्युत विसर्जन सदैव भू-सतह के सबसे ऊँचे और सुचालक बिंदु की ओर आकर्षित होता है।\n4. अतः तड़ित सीधे छाते की धातु की डंडी पर गिर सकती है और घातक विद्युत झटका देकर व्यक्ति की जान ले सकती है।
उदाहरण 4
तड़ित चालक (Lightning Conductor) किसी ऊँची इमारत को आकाशीय बिजली से किस प्रकार सुरक्षित रखता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nकार्यप्रणाली:\n1. तड़ित चालक की धातु की नुकीली छड़ भवन के सबसे ऊँचे भाग पर लगाई जाती है।\n2. जब तड़ित गिरती है, तो वह भवन की ईंट-कंक्रीट की दीवारों के बजाय धातु के नुकीले सिरे पर गिरती है।\n3. छड़ से जुड़ी मोटी ताँबे की पट्टी उस विशाल विद्युत आवेश को भवन को छुए बिना सीधे जमीन की गहराई में सुरक्षित पहुँचा (Earth कर) देती है।\nइस प्रकार भवन किसी भी प्रकार की आग या संरचनात्मक क्षति से पूरी तरह सुरक्षित बच जाता है।
उदाहरण 5
रिक्टर पैमाने पर परिमाण 7 का भूकंप परिमाण 5 के भूकंप की तुलना में कितने गुना अधिक विनाशकारी ऊर्जा विमुक्त करता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nरिक्टर पैमाना एक लघुगणकीय पैमाना है, जिसमें परिमाण में 1 इकाई की वृद्धि पर आयाम 10 गुना और विमुक्त ऊर्जा लगभग 31.6 गुना बढ़ जाती है।\nपरिमाण का अंतर = $7 - 5 = 2$ इकाई।\n\nविमुक्त ऊर्जा में वृद्धि:\n$$\text{ऊर्जा अनुपात} \approx 31.6 \times 31.6 \approx 1000 \text{ गुना}$$\n\nनिष्कर्ष: परिमाण 7 का भूकंप परिमाण 5 के भूकंप की तुलना में लगभग 1,000 गुना अधिक विनाशकारी ऊर्जा मुक्त करता है!

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर सोचते हैं कि रिक्टर पैमाना 1 से 10 तक का एक साधारण रैखिक (Linear) पैमाना है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

रिक्टर पैमाना लघुगणकीय है; परिमाण 6 का भूकंप परिमाण 5 से 1 गुना नहीं बल्कि लगभग 31.6 गुना अधिक ऊर्जावान और परिमाण 7 परिमाण 5 से 1000 गुना अधिक ऊर्जावान होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

तड़ित झंझा के समय खुले मैदान में सीधे जमीन पर लेट जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जमीन पर सीधा लेटना अत्यंत खतरनाक है क्योंकि धरती पर फैलने वाला करंट पूरे शरीर से गुजर सकता है। सही तरीका है घुटनों के बल बैठकर सिर को दोनों घुटनों के बीच झुका लेना (तड़ित सुरक्षित मुद्रा)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि भूकंप की पूर्व-चेतावनी मौसम विभाग द्वारा चक्रवात की तरह कई दिन पहले दी जा सकती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भूकंप की सटीक भविष्यवाणी (तारीख, समय और स्थान) करना वर्तमान वैज्ञानिक तकनीकों से संभव नहीं है। केवल भूकंप-रोधी संरचना और जागरूकता ही एकमात्र बचाव है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ: तड़ित विसर्जन एवं भूकंपीय विवर्तनिकी A. तड़ित विसर्जन व तड़ित चालक + + + + + − − − − − − तड़ित चालक भू-संपर्कन + + + + + (प्रेरित धनावेश) आवेश का भूमि में सुरक्षित विसर्जन B. भूकंप उत्पत्ति: उद्गम केंद्र व अधिकेंद्र पृथ्वी की सतह (Earth Surface) भ्रंश रेखा (Fault Line) उद्गम केंद्र (Focus) अधिकेंद्र (Epicenter) क्षतिग्रस्त भवन प्लेट विवर्तनिकी (Tectonic Motion) ⇒ प्रघाती तरंगें

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. घर्षण द्वारा वस्तुओं को परस्पर रगड़ने पर वे आवेशित हो जाती हैं, जिसे घर्षण द्वारा आवेशन कहते हैं।
मुख्य बिंदु 2
  1. विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं: धनावेश (+) और ऋणावेश (−)।
मुख्य बिंदु 3
  1. सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा विजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
मुख्य बिंदु 4
  1. किसी वस्तु पर आवेश की उपस्थिति का पता लगाने के लिए स्वर्ण-पत्र विद्युतदर्शी का उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. किसी आवेशित वस्तु से आवेश को पृथ्वी में भेजने की प्रक्रिया को भू-संपर्कन (Earthing) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 6
  1. तड़ित झंझा के समय बादलों के ऊपरी भाग में धनावेश तथा निचले भाग में भारी ऋणावेश संचित हो जाता है।
मुख्य बिंदु 7
  1. विपरीत आवेशों के तीव्र मिलन से वायु में होने वाले विद्युत विसर्जन को तड़ित (Lightning) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 8
  1. भवनों को आकाशीय बिजली से सुरक्षित रखने के लिए तड़ित चालक (Lightning Conductor) लगाया जाता है।
मुख्य बिंदु 9
  1. पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों (Tectonic Plates) की परस्पर गति व घर्षण के कारण अचानक उत्पन्न कंपनों को भूकंप कहते हैं।
मुख्य बिंदु 10
  1. भूकंप की तीव्रता को रिक्टर पैमाने पर मापा जाता है (परिमाण > 7 अत्यंत विनाशकारी होता है) तथा तरंगों को भूकंपलेखी द्वारा रिकॉर्ड किया जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
सर्दियों में ऊनी स्वेटर उतारते समय चट-चट की ध्वनि और चिंगारियाँ क्यों निकलती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: स्वेटर और हमारे शरीर (या अंतःवस्त्रों) के बीच घर्षण के कारण विशाल स्थिरवैद्युत आवेश उत्पन्न हो जाता है।
उतारते समय विपरीत आवेशों का वायु में सूक्ष्म विद्युत विसर्जन होता है, जो चिंगारी और ध्वनि के रूप में प्रकट होता है।
2
स्वर्ण-पत्र विद्युतदर्शी की चकती को आवेशित वस्तु से छूने पर उसकी पन्नियाँ क्यों फैल जाती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि छड़ से होकर दोनों पन्नियों में समान (सजातीय) आवेश पहुँचता है, और समान आवेश परस्पर प्रतिकर्षित करते हैं।
प्रतिकर्षण बल के कारण दोनों पन्नियाँ एक-दूसरे से दूर हट जाती हैं।
3
तड़ित झंझा के समय यदि आप खुले मैदान में फँस जाएँ, तो आपको कौन सी शारीरिक मुद्रा अपनानी चाहिए?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: घुटनों के बल नीचे बैठकर, सिर को दोनों घुटनों और हाथों के बीच झुका लेना चाहिए (तड़ित सुरक्षित मुद्रा)।
इस मुद्रा से आप मैदान में न्यूनतम ऊँचाई वाला बिंदु बन जाते हैं, जिससे बिजली गिरने की संभावना सबसे कम हो जाती है।
4
भूकंप के उद्गम केंद्र (Focus) और अधिकेंद्र (Epicenter) में क्या अंतर है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथ्वी की गहराई में जिस स्थान पर भ्रंश की गति से भूकंपीय ऊर्जा उत्पन्न होती है, उसे उद्गम केंद्र (Focus) कहते हैं; और उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र (Epicenter) कहते हैं।
अधिकेंद्र पर भूकंपीय झटके सबसे पहले पहुँचते हैं और वहीं सर्वाधिक क्षति होती है।
5
रिक्टर पैमाने की माप रैखिक क्यों नहीं है, और परिमाण 6 का भूकंप परिमाण 4 से कितना शक्तिशाली है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रिक्टर पैमाना लघुगणकीय है; परिमाण में 2 इकाई की वृद्धि (6 - 4 = 2) होने पर विमुक्त विनाशकारी ऊर्जा लगभग 1,000 गुना अधिक होती है।
प्रत्येक इकाई वृद्धि पर ऊर्जा लगभग 31.6 गुना बढ़ती है (31.6 × 31.6 ≈ 1000)।
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