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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Science • अध्याय 10
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

ध्वनि (Sound)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 विज्ञान का दसवां अध्याय "ध्वनि" (Sound) तरंग गति, संचार और मानव संवेदी तंत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। हमारे दैनिक जीवन में संचार, संगीत, चेतावनी और आपसी संवाद का माध्यम ध्वनि ही है। इस अध्याय में ध्वनि की उत्पत्ति (कंपित वस्तुओं द्वारा / Vibrating Bodies), मानव वाक-यंत्र (कंठ / Larynx), ध्वनि संचरण के लिए भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव एवं गैस) की अनिवार्यता, निर्वात में ध्वनि का अश्रव्य होना, मानव कर्ण (Human Ear) की त्रि-स्तरीय संरचना एवं कार्यप्रणाली, ध्वनि तरंगों के अभिलक्षण—आयाम (Amplitude), आवृत्ति (Frequency), आवर्तकाल (Time Period), ध्वनि की प्रबलता (Loudness) बनाम तारत्व (Pitch/Shrillness), श्रव्य व अश्रव्य परास (20 Hz - 20,000 Hz, अवश्रव्य व पराश्रव्य ध्वनि), संगीत बनाम शोर तथा ध्वनि प्रदूषण के कारण, दुष्परिणाम व रोकथाम का सर्वांगीण वैज्ञानिक विवेचन किया गया है।

🚀 अंतरिक्ष में यदि कोई बड़ा विस्फोट हो, तो हमें उसकी आवाज क्यों नहीं सुनाई देती?

क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप बोलते हैं, तो अपने गले पर हाथ रखने पर आपको कंपन क्यों महसूस होता है? स्कूल की घंटी बजते समय उसे छूने पर हाथ में झनझनाहट क्यों होती है? मच्छर के भिनभिनाने की आवाज तीखी (Shrill) क्यों लगती है, जबकि शेर की दहाड़ गंभीर व भारी (Deep Bass) क्यों होती है? और हॉलीवुड की अंतरिक्ष फिल्मों में दिखाए जाने वाले विशाल धमाकों की आवाज वास्तव में अंतरिक्ष में किसी भी अंतरिक्ष यात्री को कभी क्यों नहीं सुनाई दे सकती? आइए, ध्वनि के इस अद्भुत संसार और कंपन से कानों तक के वैज्ञानिक सफर को गहराई से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

ध्वनि विज्ञान (Acoustics) आधुनिक संचार, ऑडियो इंजीनियरिंग, चिकित्सा में अल्ट्रासाउंड (USG / Sonography), नौसेना में सोनार (SONAR) तथा झारखण्ड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों (माँदर, ढोल, नगाड़ा, बाँसुरी, सारंगी) के निर्माण की मूल प्रेरणा है। ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते संकट से निपटने और कानों की सुरक्षा के लिए ध्वनि के भौतिक नियमों का ज्ञान हर नागरिक व विद्यार्थी के लिए अनिवार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कंपन (Vibration) की मूल अवधारणा: किसी वस्तु का अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर या आगे-पीछे गति करना (To-and-fro motion)।
  • पदार्थ की तीन अवस्थाएँ: ठोस (Solid), द्रव (Liquid) और गैस (Gas)।
  • समय (सेकंड) और आवधिक गति की सामान्य समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • सप्रमाण सिद्ध कर सकेंगे कि ध्वनि सदैव कंपित वस्तुओं द्वारा ही उत्पन्न होती है।
  • प्रयोगों द्वारा प्रमाणित कर सकेंगे कि ध्वनि संचरण के लिए द्रव्यमान माध्यम अनिवार्य है और यह निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।
  • मानव कर्ण के तीन भागों (बाह्य, मध्य, आंतरिक) की संरचना एवं सुनने की यांत्रिकी का सचित्र वर्णन कर सकेंगे।
  • आयाम से प्रबलता (Loudness) तथा आवृत्ति से तारत्व (Pitch) के वैज्ञानिक संबंध का गणितीय विश्लेषण कर सकेंगे।
  • श्रव्य (Audible: 20 Hz - 20,000 Hz), अवश्रव्य (Infrasonic) और पराश्रव्य (Ultrasonic) ध्वनियों में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावों की पहचान कर इसके निवारण के व्यावहारिक उपाय सुझा सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. ध्वनि का उत्पादन एवं संचरण का भौ...
2 2. मानव कर्ण (Human Ear) की संरचना...
3 3. कंपन के अभिलक्षण: आयाम, आवृत्ति,...
4 4. श्रव्य परास, संगीत बनाम शोर एवं...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. ध्वनि का उत्पादन एवं संचरण का भौतिक माध्यम

ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो हमारे कानों में श्रवण की संवेदना उत्पन्न करती है। ध्वनि सदैव किसी वस्तु के कंपन (Vibration) से उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर या आगे-पीछे तेजी से गति करती है, तो उसे कंपन कहते हैं।

  • कंपित वस्तुओं के उदाहरण: सितार या वीणा का तानित तार, तबले या ढोलक की तानित झिल्ली (Diaphragm), बाँसुरी या शहनाई का वायु-स्तंभ, तथा स्कूल की घंटी का पीतल का कटोरा। जब कंपन रुक जाता है, तो ध्वनि का उत्पादन भी तुरंत बंद हो जाता है।
  • मानवों में ध्वनि उत्पादन: मनुष्यों में ध्वनि वाक-यंत्र या कंठ (Larynx / Voice Box) द्वारा उत्पन्न होती है। यह श्वासनली के ऊपरी सिरे पर स्थित होता है। इसके आर-पार दो वाक-तंतु (Vocal Cords) इस प्रकार तने होते हैं कि उनके बीच वायु के निकलने के लिए एक संकीर्ण झिरी (Slit) बनी होती है। जब फेफड़े वायु को बलपूर्वक झिरी से बाहर निकालते हैं, तो वाक-तंतु कंपित होते हैं और ध्वनि उत्पन्न होती है। पुरुषों में वाक-तंतुओं की लंबाई लगभग 20 मिमी और महिलाओं में लगभग 15 मिमी होती है।

ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की अनिवार्यता:

ध्वनि के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने को ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound) कहते हैं। ध्वनि के संचरण के लिए किसी द्रव्यमान माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की अनिवार्य आवश्यकता होती है:

माध्यम ध्वनि की चाल (अनुमानित) प्रायोगिक साक्ष्य
ठोस (Solids) सर्वाधिक तीव्र (~5000 m/s लोहे में) रेलवे पटरी पर कान लगाकर बहुत दूर से आ रही ट्रेन की आवाज पहले सुनाई देती है; लकड़ी की मेज के एक सिरे पर खरोंचने की आवाज दूसरे सिरे पर स्पष्ट सुनाई देती है।
द्रव (Liquids) मध्यम (~1500 m/s जल में) जल में घंटी बजाकर बाल्टी के बाहर कान सटाने पर आवाज स्पष्ट आती है; डॉल्फिन व व्हेल जल में मीलों दूर तक संवाद करती हैं।
गैस (Gases / वायु) धीमी (~343 m/s वायु में 20°C पर) कक्षा में शिक्षक की आवाज छात्रों तक सामान्य वायु द्वारा पहुँचती है।
निर्वात (Vacuum) शून्य (0 m/s - कोई संचरण नहीं) बेल-जार प्रयोग: जब काँच के जार से वैक्यूम पंप द्वारा वायु पूरी निकाल ली जाती है, तो भीतर बजने वाली विद्युत घंटी का हथौड़ा टकराता दिखाई देता है, परंतु कोई आवाज बाहर नहीं आती।

2. मानव कर्ण (Human Ear) की संरचना एवं कार्यप्रणाली

मानव कान एक अत्यंत संवेदनशील जैव-यांत्रिकीय अंग है जो वायु में उपस्थित ध्वनि कंपनों को ग्रहण कर उन्हें तंत्रिका संकेतों में परिवर्तित करता है। संरचनात्मक दृष्टि से कान को तीन प्रमुख भागों में बाँटा गया है:

1. बाह्य कर्ण (Outer Ear)
  • कर्ण पल्लव (Pinna): कान का बाहरी कीपदार (Funnel-shaped) भाग जो चारों ओर से ध्वनि तरंगों को एकत्रित करता है।
  • कर्ण नलिका (Ear Canal): लगभग 2.5 सेमी लंबी नलिका जिससे होकर ध्वनि आगे बढ़ती है।
2. मध्य कर्ण (Middle Ear)
  • कर्ण पटह (Eardrum): नलिका के अंत में एक अत्यंत पतली व तानित झिल्ली होती है। ध्वनि के संपीड़न इससे टकराकर इसे कंपित करते हैं।
  • तीन सूक्ष्म अस्थियाँ: मैलियस (हथौड़ा), इनकस (निहाई) और स्टेप्स (रकाब)। ये कंपनों को 20 गुना प्रवर्धित (Amplify) करती हैं। (स्टेप्स मानव शरीर की सबसे छोटी हड्डी है)।
3. आंतरिक कर्ण (Inner Ear)
  • कर्णावर्त (Cochlea): घोंघे के खोल जैसी घुमावदार द्रव से भरी नलिका। यह यांत्रिक कंपनों को विद्युत संकेतों में बदलती है।
  • श्रवण तंत्रिका (Auditory Nerve): यह विद्युत संकेतों को मस्तिष्क (Brain) तक पहुँचाती है, जहाँ हम ध्वनि को पहचानते हैं।

⚠️ कान की सुरक्षा चेतावनी: कान में कभी भी कोई नुकीली, तीखी वस्तु (जैसे आलपिन, माचिस की तीली या चाबी) नहीं डालनी चाहिए। इससे कर्ण पटह (Eardrum) फट सकता है और व्यक्ति स्थायी रूप से बहरा हो सकता है।

3. कंपन के अभिलक्षण: आयाम, आवृत्ति, प्रबलता एवं तारत्व

किसी ध्वनि तरंग की पहचान उसके तीन मुख्य भौतिक अभिलक्षणों से होती है:

  1. आवर्तकाल (Time Period, $T$): एक पूर्ण दोलन या कंपन पूरा करने में वस्तु द्वारा लिए गए समय को आवर्तकाल कहते हैं। इसका SI मात्रक सेकंड ($s$) है।
  2. आवृत्ति (Frequency, $\nu$ या $f$): प्रति सेकंड होने वाले दोलनों या कंपनों की कुल संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
    • आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hertz, Hz) है। ($1 \text{ Hz} = 1 \text{ कंपन प्रति सेकंड}$)
    • संबंध सूत्र: $f = \frac{1}{T}$ अथवा $T = \frac{1}{f}$।
  3. आयाम (Amplitude, $A$): अपनी माध्य स्थिति से किसी कंपित वस्तु के अधिकतम विस्थापन को आयाम कहते हैं। इसका मात्रक मीटर ($m$) है।

ध्वनि के दो महत्वपूर्ण गुण: प्रबलता बनाम तारत्व

ध्वनि का गुण निर्भरता कारक वैज्ञानिक संबंध व मात्रक व्यावहारिक प्रभाव
1. प्रबलता (Loudness) कंपन के आयाम (Amplitude) पर प्रबलता $\propto (\text{आयाम})^2$
मात्रक: डेसिबल (Decibel, dB)
यदि आयाम दोगुना कर दिया जाए, तो प्रबलता 4 गुना बढ़ जाएगी। शेर की दहाड़ का आयाम बहुत बड़ा होता है, अतः उसकी प्रबलता अत्यधिक होती है। सामान्य फुसफुसाहट (~30 dB), सामान्य बातचीत (~60 dB), व्यस्त सड़क (~70 dB), 80 dB से अधिक ध्वनि कष्टदायक होती है।
2. तारत्व या तीखापन (Pitch / Shrillness) कंपन की आवृत्ति (Frequency) पर तारत्व $\propto \text{आवृत्ति } (f)$
मात्रक: हर्ट्ज़ (Hz)
आवृत्ति जितनी अधिक होगी, ध्वनि उतनी ही तीखी (Shrill / High Pitch) होगी; जैसे—सीटी की आवाज, मच्छर की भिनभिनाहट, महिलाओं व बच्चों की आवाज। निम्न आवृत्ति वाली ध्वनि गंभीर व भारी (Flat / Bass) होती है; जैसे—ढोलक की मंद थाप, पुरुषों की भारी आवाज।

4. श्रव्य परास, संगीत बनाम शोर एवं ध्वनि प्रदूषण

A. मानव की श्रव्यता परास (Audible Range of Humans):

मानव कान सभी आवृत्तियों की ध्वनियों को नहीं सुन सकते। आवृत्ति के आधार पर ध्वनियों का वर्गीकरण:

1. अवश्रव्य ध्वनि (Infrasonic)

आवृत्ति: < 20 Hz। मानव कान इसे नहीं सुन सकते। हाथी, व्हेल, गैंडे (5 Hz) तथा भूकंप से उत्पन्न तरंगे अवश्रव्य होती हैं।

2. श्रव्य ध्वनि (Audible Sound)

आवृत्ति: 20 Hz से 20,000 Hz। एक सामान्य स्वस्थ मानव कान केवल इसी परास की ध्वनियों को सुन सकता है।

3. पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic)

आवृत्ति: > 20,000 Hz (20 kHz)। चमगादड़, कुत्ते, डॉल्फिन सुन सकते हैं। चिकित्सा में अल्ट्रासाउंड व सोनार में प्रयुक्त।

B. संगीत (Music) बनाम शोर (Noise):

  • संगीत: नियमित आवर्ती कंपनों से उत्पन्न सुखद व कर्णप्रिय ध्वनि को संगीत कहते हैं; जैसे—सितार, बाँसुरी व सुरीले गायन की ध्वनि।
  • शोर: अनियमित, अनियंत्रित कंपनों से उत्पन्न अप्रिय, कष्टप्रद ध्वनि को शोर कहते हैं; जैसे—निर्माण स्थलों की गड़गड़ाहट, वाहनों के तेज हॉर्न, भारी मशीनों की आवाज। यदि संगीत की प्रबलता अत्यधिक बढ़ जाए, तो वह भी शोर बन जाता है।

C. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution): कारण, हानियाँ एवं रोकथाम

वातावरण में अत्यधिक या अवांछित ध्वनियों की उपस्थिति को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं:

स्वास्थ्य पर हानियाँ:

  • अनिद्रा (Insomnia) और सिरदर्द।
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension / High BP)।
  • चिड़चिड़ापन, तनाव और एकाग्रता में कमी।
  • लंबे समय तक तेज शोर में रहने से स्थायी अथवा अस्थायी बहरापन (Hearing Impairment)।

रोकथाम के प्रभावी उपाय:

  • विमान इंजनों, वाहनों व औद्योगिक मशीनों में रवशामक (Silencers) लगाना।
  • आवासीय क्षेत्रों में लाउडस्पीकर व पटाखों पर प्रतिबंध।
  • सड़कों और भवनों के किनारे वृक्षारोपण (Green Muffler) करना, क्योंकि पेड़ ध्वनि को अवशोषित कर लेते हैं।
  • उद्योगों को रिहायशी बस्तियों से दूर स्थापित करना।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

आवृत्ति और आवर्तकाल संबंध (Frequency and Time Period Relation)
f = 1 / T तथा T = 1 / f
जहाँ f = आवृत्ति (हर्ट्ज़, Hz), T = आवर्तकाल (सेकंड, s)। 1 Hz = 1 दोलन प्रति सेकंड।
ध्वनि की प्रबलता और आयाम संबंध (Loudness-Amplitude Relation)
Loudness ∝ (Amplitude)²
प्रबलता आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है। यदि आयाम को 3 गुना कर दिया जाए, तो प्रबलता 9 गुना बढ़ जाएगी।
ध्वनि तरंग चाल सूत्र (Sound Wave Speed Formula)
v = f · λ
जहाँ v = ध्वनि की चाल (m/s), f = आवृत्ति (Hz), λ (लैम्ब्डा) = तरंगदैर्ध्य (Wavelength, m)।
मानव श्रव्यता परास (Human Hearing Range)
20 Hz ≤ f ≤ 20,000 Hz
20 हर्ट्ज़ से कम आवृत्ति अवश्रव्य (Infrasonic) तथा 20,000 हर्ट्ज़ से अधिक आवृत्ति पराश्रव्य (Ultrasonic) कहलाती है।
वायु में ध्वनि की चाल (Speed of Sound in Air at 20°C)
v_air ≈ 343 m/s (0°C पर ≈ 331 m/s)
माध्यम का तापमान व घनत्व बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ जाती है। ठोसों में चाल वायु की तुलना में लगभग 15 गुना अधिक होती है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
एक लोलक 4 सेकंड में 40 दोलन पूरे करता है। इसका आवर्तकाल ($T$) तथा आवृत्ति ($f$) ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nदिया गया है:\nकुल दोलनों की संख्या = 40\nकुल समय ($t$) = 4 सेकंड\n\n1. आवर्तकाल ($T$):\nएक दोलन में लगा समय:\n$$T = \frac{\text{कुल समय}}{\text{दोलनों की संख्या}} = \frac{4}{40} = 0.1 \text{ सेकंड}$$\n\n2. आवृत्ति ($f$):\nप्रति सेकंड दोलनों की संख्या:\n$$f = \frac{\text{दोलनों की संख्या}}{\text{कुल समय}} = \frac{40}{4} = 10 \text{ Hz}$$\n(अथवा सूत्र $f = 1/T = 1/0.1 = 10 \text{ Hz}$)\n\nउत्तर: आवर्तकाल = 0.1 s तथा आवृत्ति = 10 Hz।
उदाहरण 2
एक मच्छर अपने पंखों को 500 कंपन प्रति सेकंड की औसत दर से कंपित करके ध्वनि उत्पन्न करता है। कंपन का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए। क्या यह ध्वनि मानव कान सुन सकते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nदिया गया है:\nआवृत्ति ($f$) = 500 कंपन/सेकंड = 500 Hz\n\nआवर्तकाल का सूत्र:\n$$T = \frac{1}{f} = \frac{1}{500} = 0.002 \text{ सेकंड}$$\n\nश्रव्यता परीक्षण:\nमानव श्रव्यता परास 20 Hz से 20,000 Hz है।\nचूँकि 500 Hz इस सीमा के भीतर है (20 < 500 < 20000),\nअतः हाँ, यह ध्वनि मानव कानों द्वारा स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है।
उदाहरण 3
यदि किसी कंपित वस्तु का आयाम तीन गुना ($3 \times$) कर दिया जाए, तो उसकी ध्वनि की प्रबलता (Loudness) कितने गुना बढ़ जाएगी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nहम जानते हैं कि ध्वनि की प्रबलता आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है:\n$$\text{प्रबलता } (L) \propto A^2$$\n\nमाना प्रारंभिक आयाम $A_1 = A$, अतः प्रारंभिक प्रबलता $L_1 \propto A^2$\nनया आयाम $A_2 = 3A$\nनयी प्रबलता $L_2 \propto (3A)^2 = 9A^2$\n\nअतः:\n$$\frac{L_2}{L_1} = \frac{9A^2}{A^2} = 9$$\n\nउत्तर: ध्वनि की प्रबलता 9 गुना बढ़ जाएगी।
उदाहरण 4
आकाशीय बिजली की चमक (Lightning) पहले दिखाई देती है और बादलों की गड़गड़ाहट (Thunder) कुछ सेकंड बाद क्यों सुनाई देती है, जबकि दोनों एक ही समय उत्पन्न होते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nकारण:\n1. वायु में प्रकाश की चाल अत्यंत तीव्र होती है ($c \approx 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ या 3 लाख किमी/सेकंड)।\n2. जबकि वायु में ध्वनि की चाल बहुत धीमी होती है ($v \approx 343 \text{ m/s}$)।\n3. अत्यधिक तीव्र चाल के कारण प्रकाश की चमक पृथ्वी पर लगभग तात्कालिक (पलक झपकते) पहुँच जाती है, जबकि ध्वनि को वही दूरी तय करने में कई सेकंड का समय लगता है।
उदाहरण 5
चमगादड़ घने अंधेरे में बिना किसी पेड़ या दीवार से टकराए तेजी से कैसे उड़ लेते हैं और अपना शिकार कैसे पकड़ते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. चमगादड़ उड़ते समय उच्च आवृत्ति वाली पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic waves, आवृत्ति > 20,000 Hz) उत्सर्जित करते हैं।\n2. ये तरंगें आगे किसी अवरोध या कीट-पतंगे से टकराकर परावर्तित होकर वापस चमगादड़ के कानों तक लौटती हैं (इकोलोकेशन / प्रतिध्वनि-स्थान-निर्धारण)।\n3. परावर्तित तरंगों के लौटने के समय व प्रकृति से चमगादड़ अवरोध की सटीक दूरी, दिशा और आकार का पता लगा लेते हैं और बिना टकराए उड़ते हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर ध्वनि की प्रबलता (Loudness) और तारत्व (Pitch) में भ्रमित हो जाते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रबलता का संबंध आयाम से है (धीमी आवाज बनाम तेज आवाज), जबकि तारत्व का संबंध आवृत्ति से है (मोटी/भारी आवाज बनाम तीखी/पतली आवाज)। शेर की दहाड़ प्रबल है पर तारत्व कम है, जबकि मच्छर की भिनभिनाहट दुर्बल है पर तारत्व बहुत अधिक है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि ध्वनि ठोस में धीमी और वायु में सबसे तेज चलती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वास्तव में यह ठीक उल्टा है; ध्वनि ठोसों में सर्वाधिक तेज (~5000 m/s लोहे में), द्रवों में मध्यम (~1500 m/s) और वायु में सबसे धीमी (~343 m/s) चलती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह गलत धारणा कि ध्वनि अंतरिक्ष (Space) में भी यात्रा कर सकती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अंतरिक्ष में निर्वात (Vacuum) है, जहाँ वायु या कोई द्रव्यमान माध्यम नहीं होता। ध्वनि बिना माध्यम के संचरित नहीं हो सकती, अतः अंतरिक्ष में कोई आवाज सुनाई नहीं देती।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

ध्वनि विज्ञान (Sound): तरंग अभिलक्षण, मानव कर्ण एवं तारत्व A. तरंग अभिलक्षण (Wave) t आयाम (A) आवर्तकाल T (1 दोलन) प्रबलता ∝ (आयाम)² तारत्व (Pitch) ∝ आवृत्ति (f) आवृत्ति f = 1 / T (मात्रक: Hz) ध्वनि = कंपनों का संचरण B. मानव कर्ण (Human Ear) कर्ण पल्लव कर्ण नलिका कर्ण पटह अस्थियाँ (3) कर्णावर्त (Cochlea) मस्तिष्क को 1. कर्ण पटह में कंपन 2. अस्थियों द्वारा 20x प्रवर्धन 3. कर्णावर्त ⇒ तंत्रिका संकेत संवेदी जैव-यांत्रिकी तंत्र C. तारत्व (Pitch Comparison) 1. मंद तारत्व (ढोलक / पुरुष) कम आवृत्ति (Low Frequency) 2. उच्च तारत्व (सीटी / महिला) उच्च आवृत्ति (High Frequency) श्रव्य परास: 20 Hz – 20,000 Hz < 20 Hz अवश्रव्य | > 20 kHz पराश्रव्य तीखापन आवृत्ति पर निर्भर

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो कंपित वस्तुओं (Vibrating Bodies) द्वारा उत्पन्न होती है।
मुख्य बिंदु 2
  1. मनुष्यों में ध्वनि वाक-यंत्र (कंठ / Larynx) में स्थित वाक-तंतुओं के कंपन द्वारा उत्पन्न होती है।
मुख्य बिंदु 3
  1. ध्वनि के संचरण के लिए द्रव्यमान माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) अनिवार्य है; यह निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।
मुख्य बिंदु 4
  1. ध्वनि की चाल ठोसों में सर्वाधिक, द्रवों में मध्यम और गैसों में सबसे कम होती है (वायु में लगभग 343 m/s)।
मुख्य बिंदु 5
  1. मानव कान के तीन भाग होते हैं: बाह्य कर्ण (कर्ण पल्लव व नलिका), मध्य कर्ण (कर्ण पटह व 3 अस्थियाँ) और आंतरिक कर्ण (कर्णावर्त व श्रवण तंत्रिका)।
मुख्य बिंदु 6
  1. प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं; इसका SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है।
मुख्य बिंदु 7
  1. ध्वनि की प्रबलता कंपन के आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है ($L \propto A^2$) और इसे डेसिबल (dB) में मापा जाता है।
मुख्य बिंदु 8
  1. ध्वनि का तीखापन या तारत्व (Pitch) कंपन की आवृत्ति पर निर्भर करता है; उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि अधिक तीखी होती है।
मुख्य बिंदु 9
  1. मानव कर्ण की श्रव्यता परास 20 Hz से 20,000 Hz तक होती है; 20 Hz से कम अवश्रव्य तथा 20,000 Hz से अधिक पराश्रव्य ध्वनि कहलाती है।
मुख्य बिंदु 10
  1. अवांछित कष्टप्रद ध्वनि को शोर कहते हैं; ध्वनि प्रदूषण से अनिद्रा, उच्च रक्तचाप व बहरापन हो सकता है। इसकी रोकथाम हेतु रवशामक (Silencer) व वृक्षारोपण (Green Muffler) आवश्यक है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
ध्वनि निर्वात (Vacuum) में संचरित क्यों नहीं हो सकती?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जिसे आगे बढ़ने के लिए माध्यम के कणों के संघट्ट (टक्कर) और दोलन की आवश्यकता होती है।
निर्वात में पदार्थ का कोई कण मौजूद नहीं होता, अतः कंपन आगे संचरित नहीं हो पाते।
2
शेर की दहाड़ और मच्छर की भिनभिनाहट में प्रबलता और तारत्व की तुलना कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: शेर की दहाड़ में आयाम अधिक होने से प्रबलता अत्यधिक होती है परंतु आवृत्ति कम होने से तारत्व कम होता है। इसके विपरीत, मच्छर की भिनभिनाहट में आयाम कम होने से प्रबलता कम होती है परंतु आवृत्ति बहुत अधिक होने से तारत्व बहुत तीखा होता है।
प्रबलता आयाम पर तथा तारत्व आवृत्ति पर निर्भर करता है।
3
मानव कर्ण में कर्ण पटह (Eardrum) का क्या कार्य है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कर्ण पटह एक तानित रबर जैसी झिल्ली है जो वायु से आने वाली ध्वनि तरंगों के टकराने पर कंपित होती है और इन कंपनों को मध्य कर्ण की तीन अस्थियों तक पहुँचाती है।
कर्ण पटह ध्वनि तरंगों के यांत्रिक संपीड़न को कंपन में बदलने का प्राथमिक संवेदी अंग है।
4
पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic sound) क्या है और इसके दो प्रमुख वैज्ञानिक अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 20,000 हर्ट्ज़ (20 kHz) से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि को पराश्रव्य ध्वनि कहते हैं।\nअनुप्रयोग: 1. चिकित्सा में भ्रूण व आंतरिक अंगों की जाँच के लिए अल्ट्रासोनोग्राफी। 2. समुद्र की गहराई व पनडुब्बी की स्थिति मापने के लिए सोनार (SONAR)।
उच्च आवृत्ति के कारण यह तरंग बिना अधिक फैले सीधी दिशा में गहरे तक प्रवेश कर सकती है।
5
सड़क के दोनों किनारों पर हरे पेड़ लगाने (Green Muffler) से ध्वनि प्रदूषण कैसे नियंत्रित होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पेड़ों की पत्तियाँ, शाखाएँ और तने वाहनों से उत्पन्न होने वाली उच्च तीव्रता की ध्वनि तरंगों को अवशोषित व विसरित (Scatter) कर लेते हैं।
घने पेड़ों की कतार ध्वनि की तीव्रता को 10 से 15 डेसिबल तक कम कर आवासीय बस्तियों तक पहुँचने से रोकती है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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