ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो हमारे कानों में श्रवण की संवेदना उत्पन्न करती है। ध्वनि सदैव किसी वस्तु के कंपन (Vibration) से उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर या आगे-पीछे तेजी से गति करती है, तो उसे कंपन कहते हैं।
- कंपित वस्तुओं के उदाहरण: सितार या वीणा का तानित तार, तबले या ढोलक की तानित झिल्ली (Diaphragm), बाँसुरी या शहनाई का वायु-स्तंभ, तथा स्कूल की घंटी का पीतल का कटोरा। जब कंपन रुक जाता है, तो ध्वनि का उत्पादन भी तुरंत बंद हो जाता है।
- मानवों में ध्वनि उत्पादन: मनुष्यों में ध्वनि वाक-यंत्र या कंठ (Larynx / Voice Box) द्वारा उत्पन्न होती है। यह श्वासनली के ऊपरी सिरे पर स्थित होता है। इसके आर-पार दो वाक-तंतु (Vocal Cords) इस प्रकार तने होते हैं कि उनके बीच वायु के निकलने के लिए एक संकीर्ण झिरी (Slit) बनी होती है। जब फेफड़े वायु को बलपूर्वक झिरी से बाहर निकालते हैं, तो वाक-तंतु कंपित होते हैं और ध्वनि उत्पन्न होती है। पुरुषों में वाक-तंतुओं की लंबाई लगभग 20 मिमी और महिलाओं में लगभग 15 मिमी होती है।
ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की अनिवार्यता:
ध्वनि के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने को ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound) कहते हैं। ध्वनि के संचरण के लिए किसी द्रव्यमान माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की अनिवार्य आवश्यकता होती है:
| माध्यम | ध्वनि की चाल (अनुमानित) | प्रायोगिक साक्ष्य |
|---|---|---|
| ठोस (Solids) | सर्वाधिक तीव्र (~5000 m/s लोहे में) | रेलवे पटरी पर कान लगाकर बहुत दूर से आ रही ट्रेन की आवाज पहले सुनाई देती है; लकड़ी की मेज के एक सिरे पर खरोंचने की आवाज दूसरे सिरे पर स्पष्ट सुनाई देती है। |
| द्रव (Liquids) | मध्यम (~1500 m/s जल में) | जल में घंटी बजाकर बाल्टी के बाहर कान सटाने पर आवाज स्पष्ट आती है; डॉल्फिन व व्हेल जल में मीलों दूर तक संवाद करती हैं। |
| गैस (Gases / वायु) | धीमी (~343 m/s वायु में 20°C पर) | कक्षा में शिक्षक की आवाज छात्रों तक सामान्य वायु द्वारा पहुँचती है। |
| निर्वात (Vacuum) | शून्य (0 m/s - कोई संचरण नहीं) | बेल-जार प्रयोग: जब काँच के जार से वैक्यूम पंप द्वारा वायु पूरी निकाल ली जाती है, तो भीतर बजने वाली विद्युत घंटी का हथौड़ा टकराता दिखाई देता है, परंतु कोई आवाज बाहर नहीं आती। |