जल का सार्वत्रिक विलायक गुण एवं भौतिक लक्षण
जल (H₂O): पृथ्वी के लगभग तीन-चौथाई भाग पर फैला यह पारदर्शी द्रव जीव जगत के अस्तित्व का मुख्य आधार है। अपनी विशिष्ट ध्रुवीय आणविक संरचना के कारण यह अकार्बनिक और अधिकांश कार्बनिक पदार्थों को अपने भीतर घोलने की अद्वितीय क्षमता रखता है, इसलिए इसे सार्वत्रिक विलायक (Universal Solvent) कहा जाता है। जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा धारिता ($1\text{ cal/g}\cdot^\circ\text{C}$ अथवा $4200\text{ J/kg}\cdot\text{K}$) वैश्विक तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव को रोककर प्राकृतिक जलवायु नियामक (Thermostat) की भूमिका निभाती है।
जल का असामान्य प्रसार (Anomalous Expansion of Water)
साधारणतया किसी भी द्रव को ठंडा करने पर उसका आयतन घटता है और घनत्व बढ़ता है। किंतु जल को $0^\circ\text{C}$ से $4^\circ\text{C}$ तक गर्म करने पर यह प्रसारित होने के बजाय संकुचित होता है, और $4^\circ\text{C}$ से $0^\circ\text{C}$ तक ठंडा करने पर संकुचित होने के स्थान पर फैलता है। इस अनोखी प्रकृति को जल का असामान्य या व्यतिक्रांत प्रसार कहते हैं। $4^\circ\text{C}$ तापमान पर जल का घनत्व अधिकतम ($1.000\text{ g/cm}^3$ या $1000\text{ kg/m}^3$) तथा आयतन न्यूनतम होता है।
शीत प्रदेशों में जलीय जीवों का जीवन संरक्षण
सर्दियों में जब वायुमंडलीय तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, तो झीलों या तालाबों की सतह का जल ठंडा होकर $4^\circ\text{C}$ पर पहुँचता है और भारी होकर तलहटी में बैठ जाता है। इसके बाद ऊपरी सतह का जल $0^\circ\text{C}$ पर पहुँचकर बर्फ में जम जाता है। बर्फ जल से हल्की होने के कारण ऊपर तैरती है और ऊष्मा की कुचालक होने से भीतरी ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती। फलस्वरूप झील के तल का जल $4^\circ\text{C}$ पर द्रव अवस्था में बना रहता है, जहाँ मछलियाँ और अन्य जलीय जीव कड़ाके की ठंड में भी जीवित रहते हैं।
परीक्षक की चेतावनी: जल के पाइप फटने का कारण
सावधानी: अत्यधिक ठंड में पानी के पाइप या बंद काँच की बोतलें क्यों फट जाती हैं? $4^\circ\text{C}$ से जल जब जमकर $0^\circ\text{C}$ की बर्फ बनता है, तो इसके आयतन में लगभग $9\%$ की वृद्धि होती है। इस बढ़े हुए आयतन द्वारा डाला गया भयंकर बाहरी दबाव धातु के मजबूत पाइपों और काँच की बोतलों को फाड़ देता है!
व्यावहारिक विज्ञान एवं वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा
जल के वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा अत्यंत उच्च ($537\text{ cal/g}$) होती है। गर्मियों में पसीने के वाष्पीकरण द्वारा शरीर से ऊष्मा अवशोषित होकर शीतलता मिलती है। साथ ही महासागर सौर विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी के तापीय संतुलन को स्थिर बनाए रखते हैं।