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WBB • कक्षा 7 • Environment & Science (পরিবেশ ও বিজ্ঞান) • अध्याय 4
अनुमानित समय: 50 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

पर्यावरण निर्माण में पदार्थों की भूमिका

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 "पर्यावरण एवं विज्ञान" का अनिवार्य अध्याय "पर्यावरण निर्माण में पदार्थों की भूमिका"। इस अध्याय में जल का असामान्य प्रसार व जलीय जीवन संरक्षण, अम्ल-क्षारक एवं उदासीनीकरण, साधारण नमक व दैनिक रासायनिक यौगिक, सजीवों में आवश्यक धातुओं (Fe, Ca, Mg) की जैविक भूमिका तथा भारी धातुओं (आर्सेनिक, लेड, पारा) की विषाक्तता व रोकथाम का संपूर्ण और परीक्षा-उन्मुख विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

भीषण ठंड में झील की ऊपरी सतह बर्फ बन जाने पर भी नीचे मछलियाँ कैसे जीवित रहती हैं?

शीत प्रदेशों में जब बाहरी तापमान शून्य से काफी नीचे गिर जाता है, तब झीलों और नदियों की ऊपरी सतह ठोस बर्फ में बदल जाती है। परंतु जल के पास एक जादुई गुण है — असामान्य प्रसार! 4°C पर जल का घनत्व सबसे अधिक होने से तलहटी का भारी जल तरल ही बना रहता है। ऊपर जमी बर्फ भीतर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देती, जिससे 4°C के जल में मछलियाँ पूरी सर्दी सुरक्षित जीवित रहती हैं!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 "पर्यावरण एवं विज्ञान" का अनिवार्य अध्याय "पर्यावरण निर्माण में पदार्थों की भूमिका"। इस अध्याय में जल का असामान्य प्रसार व जलीय जीवन संरक्षण, अम्ल-क्षारक एवं उदासीनीकरण, साधारण नमक व दैनिक रासायनिक यौगिक, सजीवों में आवश्यक धातुओं (Fe, Ca, Mg) की जैविक भूमिका तथा भारी धातुओं (आर्सेनिक, लेड, पारा) की विषाक्तता व रोकथाम का संपूर्ण और परीक्षा-उन्मुख विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पदार्थ की तीन भौतिक अवस्थाएँ (ठोस, द्रव, गैस) एवं भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन।
  • विलयन, विलेय, विलायक तथा संतृप्त विलयन की प्राथमिक समझ।
  • सामान्य तत्वों व यौगिकों के रासायनिक सूत्र (H₂O, NaCl, CO₂, Fe, Ca, Mg)।
  • स्वाद के अंतर (खट्टा, कड़वा, नमकीन) तथा अम्ल-क्षारक का प्रारंभिक परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • जल के असामान्य प्रसार की वैज्ञानिक क्रियाविधि समझाना तथा जलीय जीवों के जीवन में इसके महत्व का विश्लेषण करना।
  • प्राकृतिक व खनिज अम्लों, क्षारकों तथा विभिन्न सूचकों (लिटमस, फिनॉल्फथलीन) के रंग परिवर्तन की सही पहचान करना।
  • उदासीनीकरण अभिक्रिया का समीकरण लिखना तथा दैनिक जीवन में पेट की अम्लता दूर करने में इसके अनुप्रयोग को समझना।
  • मानव शरीर एवं पादपों में आवश्यक धातुओं (Fe, Ca, Mg, Na, K) के शारीरिक महत्व को रेखांकित करना।
  • भारी धातुओं की विषाक्तता (विशेषकर पश्चिम बंगाल में भूजल आर्सेनिक संकट) तथा प्लास्टिक प्रदूषण के निवारण उपाय सुझाना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 अवधारणा 1: जल — सार्वत्रिक विलायक,...
2 अवधारणा 2: अम्ल, क्षारक, सूचक एवं उ...
3 अवधारणा 3: साधारण नमक एवं दैनिक जीव...
4 अवधारणा 4: सजीवों में आवश्यक जैव-धा...
5 अवधारणा 5: पर्यावरण प्रदूषण, भारी ध...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

अवधारणा 1: जल — सार्वत्रिक विलायक, असामान्य प्रसार एवं जलीय जीवन

चरण 1
जल का सार्वत्रिक विलायक गुण एवं भौतिक लक्षण

जल (H₂O): पृथ्वी के लगभग तीन-चौथाई भाग पर फैला यह पारदर्शी द्रव जीव जगत के अस्तित्व का मुख्य आधार है। अपनी विशिष्ट ध्रुवीय आणविक संरचना के कारण यह अकार्बनिक और अधिकांश कार्बनिक पदार्थों को अपने भीतर घोलने की अद्वितीय क्षमता रखता है, इसलिए इसे सार्वत्रिक विलायक (Universal Solvent) कहा जाता है। जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा धारिता ($1\text{ cal/g}\cdot^\circ\text{C}$ अथवा $4200\text{ J/kg}\cdot\text{K}$) वैश्विक तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव को रोककर प्राकृतिक जलवायु नियामक (Thermostat) की भूमिका निभाती है।

चरण 2
जल का असामान्य प्रसार (Anomalous Expansion of Water)

साधारणतया किसी भी द्रव को ठंडा करने पर उसका आयतन घटता है और घनत्व बढ़ता है। किंतु जल को $0^\circ\text{C}$ से $4^\circ\text{C}$ तक गर्म करने पर यह प्रसारित होने के बजाय संकुचित होता है, और $4^\circ\text{C}$ से $0^\circ\text{C}$ तक ठंडा करने पर संकुचित होने के स्थान पर फैलता है। इस अनोखी प्रकृति को जल का असामान्य या व्यतिक्रांत प्रसार कहते हैं। $4^\circ\text{C}$ तापमान पर जल का घनत्व अधिकतम ($1.000\text{ g/cm}^3$ या $1000\text{ kg/m}^3$) तथा आयतन न्यूनतम होता है।

चरण 3
शीत प्रदेशों में जलीय जीवों का जीवन संरक्षण

सर्दियों में जब वायुमंडलीय तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, तो झीलों या तालाबों की सतह का जल ठंडा होकर $4^\circ\text{C}$ पर पहुँचता है और भारी होकर तलहटी में बैठ जाता है। इसके बाद ऊपरी सतह का जल $0^\circ\text{C}$ पर पहुँचकर बर्फ में जम जाता है। बर्फ जल से हल्की होने के कारण ऊपर तैरती है और ऊष्मा की कुचालक होने से भीतरी ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती। फलस्वरूप झील के तल का जल $4^\circ\text{C}$ पर द्रव अवस्था में बना रहता है, जहाँ मछलियाँ और अन्य जलीय जीव कड़ाके की ठंड में भी जीवित रहते हैं।

चरण 4
परीक्षक की चेतावनी: जल के पाइप फटने का कारण

सावधानी: अत्यधिक ठंड में पानी के पाइप या बंद काँच की बोतलें क्यों फट जाती हैं? $4^\circ\text{C}$ से जल जब जमकर $0^\circ\text{C}$ की बर्फ बनता है, तो इसके आयतन में लगभग $9\%$ की वृद्धि होती है। इस बढ़े हुए आयतन द्वारा डाला गया भयंकर बाहरी दबाव धातु के मजबूत पाइपों और काँच की बोतलों को फाड़ देता है!

चरण 5
व्यावहारिक विज्ञान एवं वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा

जल के वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा अत्यंत उच्च ($537\text{ cal/g}$) होती है। गर्मियों में पसीने के वाष्पीकरण द्वारा शरीर से ऊष्मा अवशोषित होकर शीतलता मिलती है। साथ ही महासागर सौर विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी के तापीय संतुलन को स्थिर बनाए रखते हैं।

अवधारणा 2: अम्ल, क्षारक, सूचक एवं उदासीनीकरण अभिक्रिया

चरण 1
प्राकृतिक अम्ल एवं खनिज अम्ल

अम्ल (Acid): वे रासायनिक पदार्थ जो स्वाद में खट्टे होते हैं, नीले लिटमस को लाल करते हैं तथा क्षारक से क्रिया करके लवण व जल बनाते हैं।
• प्राकृतिक/कार्बनिक अम्ल: साइट्रिक अम्ल (नींबू, संतरा), टार्टरिक अम्ल (इमली), लैक्टिक अम्ल (दही), मैलिक अम्ल (सेब), ऑक्सालिक अम्ल (टमाटर), फॉर्मिक/मेथेनॉइक अम्ल (चींटी का डंक)।
• खनिज/अकार्बनिक अम्ल: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$), सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$, अम्लों का राजा), नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$)।

चरण 2
क्षारक एवं क्षार (Bases and Alkalis)

क्षारक (Base): वे धातु ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड जो स्वाद में कड़वे/कसैले होते हैं, स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं और अम्ल से क्रिया कर लवण व जल बनाते हैं (उदा. $\text{CaO}, \text{CuO}, \text{NaOH}, \text{Ca(OH)}_2$)।
क्षार (Alkali): वे क्षारक जो जल में पूर्णतः घुलनशील होते हैं, उन्हें क्षार कहते हैं (उदा. $\text{NaOH}, \text{KOH}, \text{Ca(OH)}_2$)।
"सभी क्षार क्षारक होते हैं, परंतु सभी क्षारक क्षार नहीं होते" — क्योंकि कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) एक क्षारक है किंतु जल में अघुलनशील होने के कारण क्षार नहीं है।

चरण 3
सूचक (Indicators) एवं रंग परिवर्तन
सूचक (Indicator)उदासीन माध्यम में रंगअम्लीय माध्यम में रंगक्षारीय माध्यम में रंग
लिटमस (Litmus)बैंगनी (Purple)लाल (Red)नीला (Blue)
फिनॉल्फथलीन (Phenolphthalein)रंगहीन (Colorless)रंगहीन (Colorless)गुलाबी (Pink)
मिथाइल ऑरेंज (Methyl Orange)नारंगी (Orange)गुलाबी-लालपीला (Yellow)
हल्दी पाउडर (Turmeric)पीलापीला (अपरिवर्तित)लाल-भूरा
चरण 4
उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction)

जब किसी अम्ल और क्षारक को निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है, तो वे एक-दूसरे के अम्लीय व क्षारीय गुणों को पूर्णतः समाप्त करके उदासीन लवण और जल बनाते हैं:
$$\text{HCl} + \text{NaOH} \to \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{ऊष्मा}$$
यह अभिक्रिया सदैव ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है, जिसमें अम्ल के $\text{H}^+$ आयन और क्षारक के $\text{OH}^-$ आयन मिलकर जल का निर्माण करते हैं।

चरण 5
दैनिक जीवन में उदासीनीकरण का अनुप्रयोग

1. अम्लता (Acidity) का उपचार: पेट में अत्यधिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल स्रावित होने पर एंटासिड के रूप में मिल्क ऑफ मैग्नीशिया [$\text{Mg(OH)}_2$] दिया जाता है जो अम्ल को उदासीन करता है।
2. कीटों का डंक: मधुमक्खी के डंक में फॉर्मिक अम्ल होता है, जिसे बेकिंग सोडा या चूना लगाकर उदासीन किया जाता है। ततैया के डंक में क्षारीय द्रव होता है, जिसे सिरके (एसीटिक अम्ल) से ठीक किया जाता है।

अवधारणा 3: साधारण नमक एवं दैनिक जीवन के प्रमुख रासायनिक यौगिक

चरण 1
साधारण खाद्य नमक (Sodium Chloride - NaCl)

समुद्री जल के वाष्पीकरण या सेंधा नमक की खदानों से प्राप्त सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$) हमारे भोजन का अनिवार्य घटक है। यह शरीर में परासरण दाब (Osmoregulation), तंत्रिका आवेग और रक्तचाप को संतुलित रखता है। प्राचीन काल से इसका उपयोग मांस व मछली के संरक्षण (Preservation) में होता आ रहा है। घेंघा (Goitre) रोग की रोकथाम के लिए इसमें पोटेशियम आयोडेट ($\text{KIO}_3$) मिलाकर आयोडीनयुक्त नमक तैयार किया जाता है।

चरण 2
बेकिंग सोडा एवं धावन सोडा

• बेकिंग सोडा (Baking Soda, $\text{NaHCO}_3$): सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट। इसे गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है: $$2\text{NaHCO}_3 \xrightarrow{\Delta} \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\uparrow$$ यह $\text{CO}_2$ गैस डबलरोटी व केक को छिद्रयुक्त एवं स्पंजी बनाती है।
• धावन सोडा (Washing Soda, $\text{Na}_2\text{CO}_3\cdot 10\text{H}_2\text{O}$): सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट। इसका उपयोग कपड़ों की धुलाई और कठोर जल को मृदु करने में होता है।

चरण 3
ब्लीचिंग पाउडर एवं रोगाणुनाशी क्रिया

शुष्क बुझे चूने पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके ब्लीचिंग पाउडर [$\text{CaOCl}_2$ या $\text{CaOCl(Cl)}$] का निर्माण किया जाता है: $$\text{Ca(OH)}_2 + \text{Cl}_2 \to \text{CaOCl}_2 + \text{H}_2\text{O}$$ यह वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड से क्रिया करके क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) मुक्त करता है। मुक्त क्लोरीन की तीव्र ऑक्सीकरण क्षमता पेयजल और नालियों के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देती है।

चरण 4
चूना एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस

• बिना बुझा चूना (Quick Lime, $\text{CaO}$): चूना पत्थर को गर्म करने से बनता है। इसमें जल मिलाने पर अत्यधिक ऊष्मा के साथ बुझा हुआ चूना [Slaked Lime, $\text{Ca(OH)}_2$] बनता है, जो सफेदी करने तथा अम्लीय मृदा सुधार में प्रयुक्त होता है।
• प्लास्टर ऑफ पेरिस [$\text{CaSO}_4\cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O}$]: जिप्सम को $100^\circ\text{C}$ पर गर्म करके तैयार किया जाता है। जल मिलाने पर यह तेजी से ठोस जिप्सम में बदल जाता है, जिसका उपयोग टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने तथा मूर्तियाँ बनाने में होता है।

चरण 5
परीक्षक जाल: प्रस्वेदी एवं आर्द्रताग्राही लवण

सावधानी: बरसात के मौसम में साधारण नमक गीला क्यों हो जाता है? शुद्ध $\text{NaCl}$ आर्द्रताग्राही नहीं होता, किंतु साधारण नमक में मैग्नीशियम क्लोराइड ($\text{MgCl}_2$) और कैल्शियम क्लोराइड ($\text{CaCl}_2$) की अशुद्धियाँ पाई जाती हैं जो वायुमंडल से नमी सोखकर नमक को गीला कर देती हैं।

अवधारणा 4: सजीवों में आवश्यक जैव-धातुओं एवं खनिजों की भूमिका

चरण 1
सजीवों के मौलिक जैव-तत्व

किसी भी सजीव के शुष्क भार का लगभग 96% भाग मात्र चार अधातु तत्वों से बना है: कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O) तथा नाइट्रोजन (N)। ये मिलकर प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और न्यूक्लिक अम्ल (DNA ও RNA) का निर्माण करते हैं। इसके अतिरिक्त फॉस्फोरस (P) और सल्फर (S) कोशिकाओं की आनुवंशिक एवं ऊर्जा संरचना में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

चरण 2
रक्त में आयरन एवं हीमोग्लोबिन

मानव की लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में उपस्थित श्वसन वर्णक हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) के केंद्र में फेरस आयन ($\text{Fe}^{2+}$) विद्यमान होता है। यह आयरन फेफड़ों से प्रत्येक ऊतक तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है। भोजन में लोहे की कमी से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिससे रक्तअल्पता (Anemia) रोग होता है।

चरण 3
कैल्शियम व फॉस्फोरस द्वारा अस्थि निर्माण

शरीर के कुल कैल्शियम का 99% भाग हड्डियों और दाँतों में सुरक्षित रहता है। कैल्शियम और फॉस्फोरस मिलकर हाइड्रॉक्सीएपेटाइट [$\text{Ca}_{10}(\text{PO}_4)_6(\text{OH})_2$] नामक मजबूत खनिज का निर्माण करते हैं। इसके अलावा रक्त का थक्का जमने (Blood Clotting) और पेशी संकुचन के लिए कैल्शियम आयन ($\text{Ca}^{2+}$) अनिवार्य है।

चरण 4
पादपों में मैग्नीशियम एवं प्रकाश संश्लेषण

पौधों के हरे लवक (Chloroplast) में स्थित क्लोरोफिल (Chlorophyll) अणु के केंद्र में मैग्नीशियम आयन ($\text{Mg}^{2+}$) रासायनिक रूप से आबंधित रहता है। मैग्नीशियम की कमी होने पर पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं, जिसे हरिमहीनता (Chlorosis) कहते हैं और पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता नष्ट हो जाती है।

चरण 5
तंत्रिका तंत्र में सोडियम व पोटेशियम

तंत्रिका कोशिकाओं की झिल्ली के आर-पार सोडियम ($\text{Na}^+$) और पोटेशियम ($\text{K}^+$) आयनों का तीव्र संचरण तंत्रिका आवेगों व संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाता है। थायरॉइड ग्रंथि के थायरोक्सिन हार्मोन निर्माण हेतु आयोडीन (I) आवश्यक है, जिसकी कमी से घेंघा (Goitre) रोग होता है।

अवधारणा 5: पर्यावरण प्रदूषण, भारी धातुओं की विषाक्तता एवं आर्सेनिक संकट

चरण 1
भारी धातुओं की विषाक्तता का स्वरूप

वे धातुएँ जिनका घनत्व $5\text{ g/cm}^3$ से अधिक होता है और जो सजीवों के शरीर में प्रवेश कर हानिकारक विषैला प्रभाव उत्पन्न करती हैं, उन्हें भारी धातुएँ (Heavy Metals) कहते हैं। ये शरीर के प्रमुख एंजाइमों के सल्फाहाइड्रिल ($-SH$) समूहों से जुड़कर जैविक उपापचय को ठप कर देती हैं और खाद्य श्रृंखला में जैव-आवर्धन (Biomagnification) प्रदर्शित करती हैं।

चरण 2
पश्चिम बंगाल में भूजल आर्सेनिक संकट

पश्चिम बंगाल के मालदा, नदिया, मुर्शिदाबाद, उत्तर व दक्षिण 24 परगना सहित 8 से अधिक जिलों में उथले नलकूपों के जल में विषैले आर्सेनिक यौगिक (आर्सेनाइट $\text{AsO}_3^{3-}$ व आर्सेनेट $\text{AsO}_4^{3-}$) घुले मिलते हैं।
• विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानक सुरक्षित सीमा: $0.01\text{ mg/L}$ ($10\text{ ppb}$); भारत में अधिकतम स्वीकार्य सीमा $0.05\text{ mg/L}$ है।
• आर्सेनिक युक्त जल पीने से हथेलियों व तलवों पर काले धब्बे, खुरदरे छाले तथा अंततः घातक ब्लैक फुट रोग (Black Foot Disease) एवं त्वचा का कैंसर हो जाता है।

चरण 3
अन्य विषैली धातुएँ: लेड, पारा एवं कैडमियम
धातुप्रदूषण का स्रोतउत्पन्न रोग एवं विषाक्तता के लक्षण
आर्सेनिक (As)भूगर्भीय चट्टानों का क्षरण, कीटनाशकआर्सेनिकोसिस, ब्लैक फुट रोग, त्वचा व फेफड़ों का कैंसर
लेड / सीसा (Pb)बैटरी, पेंट, वार्निश, लेडेड पेट्रोलएनीमिया, बच्चों के मानसिक विकास में अवरोध, मस्तिष्क क्षति
मर्करी / पारा (Hg)औद्योगिक अपशिष्ट, थर्मामीटर, कवकनाशीमीनामाटा रोग (Minamata Disease), अंधापन व तंत्रिका पक्षाघात
कैडमियम (Cd)इलेक्ट्रोप्लेटिंग, प्लास्टिक, बैटरी उद्योगइटाई-इटाई रोग (Itai-Itai Disease), हड्डियों की कमजोरी व वृक्क क्षति
चरण 4
आर्सेनिक निवारण की घातक भूल एवं उपाय

घातक भूल: बहुत से लोग समझते हैं कि आर्सेनिक युक्त पानी को उबालने से वह शुद्ध हो जाता है। जल उबालने से आर्सेनिक नष्ट नहीं होता; बल्कि वाष्पीकरण के कारण जल की मात्रा घटने से आर्सेनिक की सांद्रता और अधिक खतरनाक हो जाती है! उपाय: एलम (फिटकरी) व आयरन फिल्टर का प्रयोग अथवा 150 मीटर से अधिक गहरे नलकूपों के आर्सेनिक-मुक्त जल का उपयोग करना।

चरण 5
सिंथेटिक बहुलक एवं माइक्रोप्लास्टिक संकट

पॉलिथीन और प्लास्टिक कृत्रिम पॉलीमर हैं जो प्राकृतिक रूप से सैकड़ों वर्षों में भी अपघटित नहीं होते (Non-biodegradable)। इन्हें जलाने पर विषैली डाइऑक्सिन गैस निकलती है और नालियाँ जाम होकर कृत्रिम बाढ़ आती है। सूक्ष्म माइक्रोप्लास्टिक कण जल और मछलियों के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचकर आंतरिक अंगों को क्षति पहुँचा रहे हैं। इसका एकमात्र विकल्प जूट के थैले और पुनःचक्रण योग्य सामग्रियों का प्रयोग है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

जल के अधिकतम घनत्व का नियम
$$\rho_{\text{max}} = 1.000\text{ g/cm}^3 \; (1000\text{ kg/m}^3) \quad \text{at } 4^\circ\text{C}$$
असामान्य प्रसार के कारण $0^\circ\text{C}$ बर्फ का घनत्व ($0.917\text{ g/cm}^3$) जल से कम होता है, अतः बर्फ जल पर तैरती है।
अम्ल-क्षारक उदासीनीकरण समीकरण
$$\text{Acid} + \text{Base} \to \text{Salt} + \text{Water} + \Delta H$$
अम्ल के $\text{H}^+$ तथा क्षारक के $\text{OH}^-$ परस्पर मिलकर उदासीन जल बनाते हैं; यह अभिक्रिया सदैव ऊष्माक्षेपी होती है।
बिना बुझे चूने से बुझा चूना निर्माण
$$CaO + H_2O → Ca(OH)_2 + ऊष्मा$$
सफेदी के लिए प्रयुक्त क्षारीय घोल; यह कृषि भूमि की अत्यधिक अम्लता को दूर करने में भी प्रयुक्त होता है।
बेकिंग सोडा का ऊष्मीय अपघटन
$$2\text{NaHCO}_3 \xrightarrow{\Delta} \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\uparrow$$
गर्म करने पर निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस बेकरी उद्योग में केक और डबलरोटी को स्पंजी बनाती है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस का जलयोजन व जमना
$$\text{CaSO}_4\cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} + 1\frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \to \text{CaSO}_4\cdot 2\text{H}_2\text{O}$$
जल के संपर्क में आने पर यह ठोस होकर आयतन में हल्का प्रसारित होता है, जिससे यह टूटी हड्डियों के प्लास्टर हेतु आदर्श है।
पेयजल में आर्सेनिक की WHO मानक सीमा
$$\text{Concentration} \le 0.01\text{ mg/L} \; (10\text{ ppb})$$
इस सीमा से अधिक आर्सेनिक युक्त जल के निरंतर सेवन से ब्लैक फुट रोग तथा त्वचा का कैंसर होना निश्चित है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
एक बर्तन में $10^\circ\text{C}$ ताप पर जल रखा गया है। इसे धीरे-धीरे ठंडा करके $0^\circ\text{C}$ तक लाया जाता है। इसके आयतन एवं घनत्व में क्या परिवर्तन होंगे? स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

जल के असामान्य प्रसार के कारण परिवर्तन दो चरणों में घटित होगा:
• प्रथम चरण ($10^\circ\text{C}$ से $4^\circ\text{C}$ तक): सामान्य द्रवों की भाँति तापमान घटने पर जल का आयतन घटेगा तथा घनत्व निरंतर बढ़ेगा। ठीक $4^\circ\text{C}$ पर जल का घनत्व अधिकतम ($1.0\text{ g/cm}^3$) तथा आयतन न्यूनतम होगा।
• द्वितीय चरण ($4^\circ\text{C}$ से $0^\circ\text{C}$ तक): असामान्य व्यवहार के कारण तापमान और कम होने पर जल संकुचित होने के बजाय फैलना शुरू कर देता है। अतः आयतन में वृद्धि होगी तथा घनत्व घटने लगेगा। $0^\circ\text{C}$ की बर्फ का घनत्व ($0.917\text{ g/cm}^3$) जल से कम होने के कारण बर्फ जल पर तैरती है।

उदाहरण 2
पेट में अत्यधिक अम्लता (Acidity) होने पर व्यक्ति सीने में जलन से पीड़ित होता है। चिकित्सक उसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया [$\text{Mg(OH)}_2$] लेने का परामर्श देते हैं। इसका रासायनिक कारण समीकरण सहित समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

• आमाशय में भोजन पचाने हेतु स्वाभाविक रूप से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) स्रावित होता है। अनियमित खानपान से अम्ल की अधिकता होने पर अम्लता व जलन होती है।
• मिल्क ऑफ मैग्नीशिया दुर्बल क्षारक मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [$\text{Mg(OH)}_2$] का निलंबन है। यह पेट के अतिरिक्त अम्ल के साथ उदासीनीकरण अभिक्रिया करता है:

$$\text{Mg(OH)}_2 + 2\text{HCl} \to \text{MgCl}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + \text{ऊष्मा}$$


अभिक्रिया में बना मैग्नीशियम क्लोराइड (लवण) और जल पूर्णतः उदासीन होते हैं, जिससे सीने की जलन तुरंत शांत हो जाती है।

उदाहरण 3
बिना बुझे चूने तथा बुझे हुए चूने का रासायनिक नाम व सूत्र लिखिए। सफेदी करने के 2-3 दिन बाद दीवारें अत्यधिक चमकदार व दूधिया क्यों दिखाई देती हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

• बिना बुझा चूना: कैल्शियम ऑक्साइड, सूत्र $\text{CaO}$।
• बुझा हुआ चूना: कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, सूत्र $\text{Ca(OH)}_2$।
• दीवारों के चमकने का कारण: सफेदी करते समय दीवार पर बुझे चूने [$\text{Ca(OH)}_2$] का पतला लेप लगाया जाता है। यह वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस से धीरे-धीरे अभिक्रिया करके अघुलनशील सफेद कैल्शियम कार्बोनेट [$\text{CaCO}_3$] की चमकदार क्रिस्टलीय परत बना लेता है:

$$\text{Ca(OH)}_2 + \text{CO}_2 \to \text{CaCO}_3 + \text{H}_2\text{O}$$


इसी ठोस कैल्शियम कार्बोनेट परत के कारण 2-3 दिन बाद दीवार पर अद्भुत दूधिया चमक आ जाती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि जल के बर्फ बनने पर उसका आयतन घट जाता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जल के असामान्य प्रसार के कारण $4^\circ\text{C}$ से $0^\circ\text{C}$ पर बर्फ बनने पर आयतन लगभग 9% बढ़ जाता है। इसी कारण शीतकाल में पाइप फटते हैं और बर्फ जल पर तैरती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सभी क्षारकों को क्षार (Alkali) मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सभी धातु ऑक्साइड व हाइड्रॉक्साइड क्षारक हैं, परंतु केवल जल में घुलनशील क्षारकों को ही "क्षार" कहते हैं। जैसे $\text{NaOH}$ क्षारक और क्षार दोनों है; किंतु $\text{CuO}$ क्षारक है पर अघुलनशील होने से क्षार नहीं है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आर्सेनिक युक्त जल को उबालकर शुद्ध करने का प्रयास करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आर्सेनिक कोई जीवाणु नहीं है, यह एक रासायनिक विषैला तत्व है! पानी उबालने से आर्सेनिक नष्ट नहीं होता; बल्कि भाप बनकर पानी उड़ने से आर्सेनिक की सांद्रता और खतरनाक रूप से बढ़ जाती है!

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

पर्यावरण निर्माण में पदार्थों की भूमिका एवं संतुलन 1. जल का असामान्य प्रसार एवं जलीय जीवन ❄ बर्फ की परत (0°C) 1°C ~ 2°C ~ 3°C 4°C (ρ = 1.0 g/cm³) • तापमान प्रवणता: 1°C, 2°C, 3°C • तल का जल: 4°C (अधिकतम घनत्व 1 g/cm³) বরফ তাপরোধক হিসেবে কাজ করে • मछलियाँ एवं जलीय जीव सुरक्षित रहते हैं ৪°C জলের ঘনত্ব সর্বাধিক হওয়ায় নিচে থাকে 2. अम्ल-क्षार उदासीनीकरण एवं सूचक HCl Acid (pH < 7) + NaOH Base (pH > 7) → NaCl+H₂O Neutral (pH = 7) Acid: Red Litmus Neutral: pH 7 Base: Blue Litmus HCl + NaOH → NaCl + H₂O + তাপ (Heat) অ্যাসিড + ক্ষারক → প্রশমিত লবণ + জল (প্রশমন বিক্রিয়া) 3. सजीवों में आवश्यक जैव-धातुएँ व खनिज • आयरन (Fe): हीमोग्लोबिन एवं O₂ परिवहन • कैल्शियम (Ca/P): अस्थि एवं दंत निर्माण • मैग्नीशियम (Mg): क्लोरोफिल एवं प्रकाश संश्लेषण • सोडियम/पोटेशियम: तंत्रिका आवेग व जल संतुलन 4. भारी धातुओं की विषाक्तता व आर्सेनिक संकट ☣ भूजल आर्सेनिक प्रदूषण (ब्लैक फुट रोग) ⚖ WHO मानक सीमा: 0.01 mg/L (10 ppb) ⚠️ उबालने से आर्सेनिक नष्ट नहीं होता, सांद्रता बढ़ती है! निवारण: एलम व आयरन निस्यंदन तथा गहरे नलकूप
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