हरितगृह प्रभाव का भौतिक सिद्धांत (Greenhouse Physics)
सूर्य से आने वाली लघु तरंगदैर्घ्य वाली किरणें वायुमंडल को पार कर पृथ्वी को गर्म करती हैं। गर्म पृथ्वी जब दीर्घ तरंगदैर्घ्य वाली अवरक्त किरणों (Infrared) के रूप में अंतरिक्ष में ऊष्मा लौटाती है, तो वायुमंडल की कुछ गैसें इस ऊष्मा को अवशोषित कर पुनः पृथ्वी की ओर परावर्तित कर देती हैं। इस प्राकृतिक ताप-नियंत्रण प्रक्रिया को हरितगृह प्रभाव (Greenhouse Effect) कहते हैं।
प्रमुख हरितगृह गैसें एवं योगदान (Greenhouse Gases Spectrum)
• कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$): कुल तापन के 60% हेतु उत्तरदायी; कोयला, पेट्रोल दहन व वनों की कटाई से उत्पन्न।
• मीथेन ($CH_4$): लगभग 20% उत्तरदायी; जलमग्न धान के खेतों, सड़े कचरे व जुगाली करने वाले पशुओं से उत्सर्जित।
• क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC): फ्रिज व एसी से निकलने वाली घातक गैस जो ओजोन परत को भी नष्ट करती है।
• नाइट्रस ऑक्साइड ($N_2O$) एवं जलवाष्प: रासायनिक उर्वरकों व औद्योगिकीकरण से उत्पन्न।
ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणाम (Consequences of Global Warming)
• ध्रुवीय बर्फ का पिघलना: ग्लेशियर पिघलने से समुद्र स्तर प्रतिवर्ष 3-4 मिमी बढ़ रहा है।
• सुंदरवन के द्वीप जलमग्न: बंगाल की खाड़ी का जलस्तर बढ़ने से सुंदरवन का लोहाचरा द्वीप पूरी तरह डूब चुका है तथा घोड़ापारा द्वीप का आधा हिस्सा जलमग्न हो चुका है।
• चरम मौसमी आपदाएं: अम्फान, यास जैसे भयंकर चक्रवात, भीषण सूखा व असमय बाढ़ का प्रकोप बढ़ गया है।
केस स्टडी — सुंदरवन का संकट (Sundarbans Case Study)
समुद्र का खारा पानी नदियों के मुहाने में घुसने से मीठे पानी के सुंदरी वृक्ष सूख रहे हैं। प्राकृतिक तूफानी ढाल रूपी मैंग्रोव वन नष्ट होने से चक्रवातों का प्रकोप कई गुना बढ़ गया है।
बोर्ड परीक्षा सतर्कता (क्या हरितगृह प्रभाव पूरी तरह बुरा है?)
परीक्षा स्पष्टीकरण: प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव यदि न होता, तो पृथ्वी का औसत तापमान $-18^\circ ext{C}$ होता और पूरी पृथ्वी बर्फ का गोला बन जाती जहां जीवन असंभव होता! मानव जनित प्रदूषण से इस प्रभाव का अत्यधिक बढ़ जाना ही "ग्लोबल वार्मिंग" संकट कहलाता है।