रोगजनकों के 4 मुख्य प्रकार (Four Classes of Pathogens)
• 1. जीवाणु (Bacteria): एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव; जैसे—*Vibrio cholerae* (हैजा), *Mycobacterium tuberculosis* (टीबी), *Salmonella typhi* (टाइफाइड)।
• 2. विषाणु (Virus): अकोशिकीय, केवल जीवित कोशिका में गुणन करने वाले; जैसे—पोलियो वायरस, डेंगू वायरस, इन्फ्लूएंजा।
• 3. प्रोटोजोआ (Protozoa): एककोशिकीय यूकैरियोट; जैसे—*Plasmodium vivax* (मलेरिया), *Entamoeba histolytica* (अमीबीय पेचिश)।
• 4. कवक (Fungi): दाद (Ringworm) एवं खुजली पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव।
संक्रमण के संचरण मार्ग (Modes of Disease Transmission)
• वायु जनित (बिंदुक संक्रमण): छींकने व खांसने से टीबी व जुकाम के विषाणु हवा में फैलते हैं।
• जल एवं भोजन जनित: दूषित पानी व बासी खुले भोजन से हैजा, टाइफाइड व दस्त फैलते हैं।
• संपर्क जनित: रोगी के तौलिए व कपड़ों से दाद व त्वचा रोग फैलते हैं।
• वाहक जनित: मच्छरों व मक्खियों द्वारा मलेरिया, डेंगू व फाइलेरिया का संचरण।
एंटीबायोटिक की सीमाएं (Antibiotic Specificity)
एंटीबायोटिक केवल जीवाणुओं (Bacteria) की कोशिका भित्ति को नष्ट करते हैं। विषाणु (Virus) पर एंटीबायोटिक का कोई असर नहीं होता; अतः जुकाम या डेंगू में एंटीबायोटिक लेना व्यर्थ है।
संक्रमण रोकने की आदतें (Hygiene Habits)
साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोना, खांसते समय मुंह ढकना तथा उबला पानी पीना 80% संक्रामक बीमारियों से बचाता है।
बोर्ड परीक्षा सतर्कता (विषाणु जनित रोगों में एंटीबायोटिक)
परीक्षा चेतावनी: वायरल बुखार में बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक खाने से पेट के अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं और शरीर में दवा-प्रतिरोधी सुपरबग पैदा होते हैं।