(क) लेखक द्वारा सेकंड क्लास का टिकट लेने का कारण
लेखक को पास के ही स्टेशन तक जाना था। गाड़ी छूट रही थी। यद्यपि सेकंड क्लास का किराया अधिक था, फिर भी लेखक ने दो विशेष कारणों से सेकंड क्लास का टिकट खरीदा:
- भीड़-भाड़ से बचकर एकांत में यात्रा करना ताकि वे नई कहानी के संबंध में सोच सकें।
- खिड़की से प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकें।
(ख) डिब्बे में नवाब साहब की उपस्थिति एवं असहजता:
लेखक यह सोचकर डिब्बे में चढ़ा था कि वह खाली होगा, किंतु डिब्बे में पहले से ही एक सज्जन बैठे थे। वे एक सफेदपोश लखनवी नवाब थे, जो पालथी मारे बर्थ पर विराजमान थे। उनके सामने एक तौलिए पर दो ताजे, चिकने खीरे रखे हुए थे।
लेखक के अचानक आ जाने से नवाब साहब की आंखों में एकांत-चिंतन में विघ्न का गहरा असंतोष छा गया। लेखक ने तुरंत भांप लिया कि नवाब साहब को उनका आना अच्छा नहीं लगा। इसके दो मनोवैज्ञानिक कारण थे:
- संभवतः वे भी एकांत में नई कहानी जैसी किसी बात पर विचार कर रहे थे।
- या फिर वे 'खीरे' जैसी साधारण और सस्ती खाद्य-वस्तु को अकेले में खाने की फिराक में थे और अब किसी भद्र व्यक्ति के सामने खीरा खाने में उन्हें 'संकोच और हेठी' (झूठी शर्म) महसूस हो रही थी।
नवाब साहब ने लेखक से कोई बातचीत नहीं की, न संगति के लिए कोई उत्साह दिखाया। वे खिड़की से बाहर देखते रहे। लेखक ने भी उनके प्रति बेरुखी दिखाकर अपने आत्मसम्मान में आंखें चुरा लीं।