rDNA तकनीक कई सुनियोजित चरणों का एक जटिल प्रक्रम है:
चरण 1: आनुवंशिक पदार्थ (डीएनए) का विलगन (Isolation of DNA):
कोशिका भित्ति को तोड़ने हेतु विशिष्ट एंजाइम प्रयुक्त होते हैं: जीवाणु हेतु लाइसोजाइम, पादप कोशिका हेतु सेल्युलेज, तथा कवक हेतु काइटिनेज। आरएनए को राइबोन्यूक्लिएज द्वारा तथा प्रोटीन को प्रोटीऐज द्वारा पचाया जाता है। अंत में अत्यधिक शीतित एथेनॉल (Chilled Ethanol) मिलाने पर शुद्ध डीएनए महीन धागों के रूप में अवक्षेपित हो जाता है। इन धागों को चम्मच या छड़ द्वारा बाहर निकालना स्पूलिंग (Spooling) कहलाता है।
चरण 2: एगरोज जेल वैद्युतकणसंचलन (Agarose Gel Electrophoresis):
प्रतिबंधन एंजाइम द्वारा काटे गए डीएनए खंडों को उनके आकार अनुसार पृथक करने की सर्वमान्य विधि:
- डीएनए अणु ऋणावेशित (Negatively charged - फॉस्फेट समूह के कारण) होते हैं, अतः विद्युत क्षेत्र में वे एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) की ओर गति करते हैं।
- समुद्री घास (Seaweed) से प्राप्त प्राकृतिक बहुलक एगरोज जेल छन्नी (Sieving effect) का कार्य करता है। डीएनए का खंड जितना छोटा होगा, वह जेल के छिद्रों से उतनी ही अधिक दूर तक गति करेगा।
- डीएनए खंड रंगहीन होते हैं। इन्हें देखने हेतु जेल को एथीडियम ब्रोमाइड (Ethidium Bromide - EtBr) से अभिरंजित किया जाता है तथा पराबैंगनी (UV) प्रकाश के संपर्क में लाया जाता है। इससे डीएनए चमकीले नारंगी रंग की पट्टियों (Bright orange bands) के रूप में दिखाई देते हैं।
- क्षालन (Elution): एगरोज जेल से वांछित डीएनए बैंड को काटकर निकालना तथा जेल के टुकड़े से डीएनए को निष्कर्षित करना क्षालन कहलाता है।
चरण 3: पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (Polymerase Chain Reaction - PCR):
1985 में कैरी मुलिस (Kary Mullis) द्वारा विकसित। यह इन विट्रो (In vitro - परखनली में) विधि है जिसके द्वारा डीएनए के किसी विशिष्ट खंड की अरबों प्रतियों का कुछ ही घंटों में प्रवर्धन (Amplification) किया जाता है। इसके तीन मुख्य चरण हैं:
- विकृतीकरण (Denaturation): उच्च तापमान (लगभग $94^\circ\text{C}$ से $96^\circ\text{C}$) पर डीएनए को गर्म किया जाता है, जिससे दोनों रज्जुकों के बीच के हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं और दोनों रज्जुक अलग-अलग हो जाते हैं।
- तापानुशीलन (Annealing): तापमान को घटाकर लगभग $50^\circ\text{C}$ से $60^\circ\text{C}$ किया जाता है। दो सेट छोटे रासायनिक संश्लेषित ऑलिगोन्यूक्लियोटाइड प्राइमर्स (Primers) दोनों अलग हुए सांचा रज्जुकों के 3'-सिरों पर जुड़ते हैं।
- प्रसार / विस्तार (Extension): तापमान $72^\circ\text{C}$ किया जाता है। यहाँ एक विशेष थर्मोस्टेबल (उष्णता-सहनशील) एंजाइम Taq डीएनए पॉलीमरेज (जो गर्म जल के तापीय जीवाणु Thermus aquaticus से निकाला जाता है) माध्यम में उपस्थित डीऑक्सीन्यूक्लियोटाइड्स (dNTPs) का उपयोग कर प्राइमर को आगे बढ़ाकर नए पूरक रज्जुक का संश्लेषण करता है।
यदि यह चक्र 30 बार दोहराया जाए, तो डीएनए खंड का 1 अरब गुना ($10^9$ गुना) प्रवर्धन हो जाता है!
चरण 4: बायोरिएक्टर एवं अनुप्रवाह संसाधन (Bioreactors & Downstream Processing):
- बायोरिएक्टर (Bioreactors): 100 से 1000 लीटर क्षमता वाले विशाल बर्तन जिनमें सूक्ष्मजीवों, पादप या जंतु कोशिकाओं को वांछित उत्पाद प्राप्त करने हेतु इष्टतम परिस्थितियों (तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन) में संवर्धित किया जाता है। प्रायः विलोड़ित हौज बायोरिएक्टर (Stirred-tank bioreactor) प्रयुक्त होता है जिसमें एक विलोड़क (Agitator) लगा होता है जो पूरे बर्तन में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का समान मिश्रण सुनिश्चित करता है।
- अनुप्रवाह संसाधन (Downstream Processing): जैव-संश्लेषण के बाद उत्पाद को बाजार में भेजने से पूर्व किए जाने वाले पृथक्करण (Separation) एवं शोधन (Purification) के प्रक्रमों को सामूहिक रूप से अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं। इसमें परिरक्षकों को जोड़ना, गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण (QC) तथा औषधियों के मामले में कड़े नैदानिक परीक्षण (Clinical trials) शामिल होते हैं।