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CBSE • कक्षा XII • Biology • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन

पुष्पी पादप (आवृतबीजी / Angiosperms) पादप जगत के सबसे उन्नत, प्रभावी एवं विविधतापूर्ण समूह हैं, जिनमें लैंगिक जनन की प्रक्रिया अत्यधिक परिष्कृत एवं विशिष्ट अंगों—पुष्पों (Flowers)—द्वारा संपन्न होती है। पुष्प वास्तव में रूपांतरित प्ररोह (Modified Shoot) हैं, जिनमें जनन अंग—नर जनन अंग पुमंग (Androecium / Stamens) तथा मादा जनन अंग जायांग (Gynoecium / Pistil / Carpel) सघन रूप से विन्यस्त होते हैं। प्रस्तुत अध्याय आवृतबीजी पौधों के संपूर्ण लैंगिक जीवन चक्र के तीनों प्रमुख चरणों का विस्तृत, विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत करता है: 1. निषेचन-पूर्व घटनाएं (Pre-fertilization Events): पुंकेसर एवं परागकोश की आंतरिक संरचना, 4-परतीय भित्ति (बाह्यत्वचा, अंतस्थीसियम, मध्य परतें एवं पोषक टेपीटम), लघुबीजाणुजनन (Microsporogenesis) द्वारा अगुणित परागकणों का निर्माण, परागकण भित्ति (स्पोरोपोलेनिन युक्त बाह्यचोल एवं सेलुलोस-पेक्टिन युक्त अंतश्चोल), तथा जायांग में बीजांड (Megasporangium / Ovule) की संरचना एवं गुरुबीजाणुजनन (Megasporogenesis) द्वारा 7-कोशिकीय व 8-केंद्रकीय भ्रूणकोष (Embryo Sac) का निर्माण; 2. परागण एवं निषेचन (Pollination & Fertilization): स्वपरागण (ऑटोगैमी, गिटोनोगैमी) व परपरागण (ज़ीनोगैमी), परागण के जैविक व अजैविक कारक, बहिःप्रजनन युक्तियाँ (Outbreeding Devices), पराग-स्त्रीकेसर संकर्षण (Pollen-Pistil Interaction), तथा आवृतबीजीयों का सबसे अद्वितीय लक्षण—दोहरा निषेचन (Double Fertilization) एवं त्रिसंलयन (Triple Fusion), जहाँ एक नर युग्मक अंड से मिलकर द्विगुणित युग्मनज ($2n$) बनाता है तथा दूसरा नर युग्मक दो ध्रुवीय केंद्रकों से मिलकर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN, $3n$) का निर्माण करता है; 3. निषेचन-पश्च घटनाएं (Post-fertilization Events): भ्रूणपोष (Endosperm) का विकास (मुक्त केंद्रकीय व कोशिकीय), द्विबीजपत्री व एकबीजपत्री भ्रूण का विकास, सत्य फल, आभासी फल (False fruits like Apple), अनिषेकफलन (Parthenocarpy), तथा आधुनिक कृषि एवं संकर बीज उद्योग का चमत्कारी साधन—असंगजनन (Apomixis) एवं बहुभ्रूणता (Polyembryony) का संपूर्ण वैज्ञानिक एवं परीक्षा-उन्मुख निरूपण किया गया है।

करोड़ों वर्षों से पृथ्वी को महकाने वाले फूल और संकर बीजों की जादुई क्रांति: असंगजनन का वरदान!

क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे महंगे संकर बीजों (Hybrid Seeds) को किसान हर साल दोबारा क्यों खरीदते हैं? क्योंकि यदि वे संकर फसल के बीजों को दोबारा बोएँगे, तो मेंडल के नियमों के अनुसार उनके उत्कृष्ट लक्षण संतानों में बिखर (Segregate) जाएंगे! लेकिन प्रकृति ने आवृतबीजी पौधों को एक ऐसा गुप्त हथियार दिया है जिसे असंगजनन (Apomixis) कहते हैं—बिना निषेचन के ही सीधे द्विगुणित भ्रूण बना लेना! यदि वैज्ञानिक संकर फसलों में असंगजनन की जीन डाल दें, तो किसान अपने ही खेत के बीजों को बार-बार बिना गुण खोए बो सकेंगे, जिससे वैश्विक भुखमरी समाप्त हो सकती है! इतना ही नहीं, कीटों को आकर्षित करने वाली फूलों की मनमोहक सुगंध, चमकीले रंग और मीठा मकरंद कोई सजावट नहीं, बल्कि पौधों द्वारा परागण कराने के लिए रचा गया प्रकृति का सबसे चालाक मार्केटिंग तंत्र है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE बोर्ड, CBSE तथा NEET-UG मेडिकल प्रवेश परीक्षा में यह अध्याय वनस्पति विज्ञान (Botany) इकाई का रीढ़ की हड्डी (6 से 8 अंक) है: 1. 5-अंकीय दीर्घ उत्तरीय सचित्र प्रश्न: परिपक्व भ्रूणकोष (7-कोशिकीय, 8-केंद्रकीय) का नामांकित चित्र, अथवा बीजांड की अनुदैर्ध्य काट, अथवा दोहरे निषेचन की प्रक्रिया का विस्तृत सचित्र वर्णन। 2. गुणसूत्र स्तर (Ploidy Level) पर 1-अंकीय व 2-अंकीय प्रश्न: युग्मनज ($2n$), भ्रूणपोष ($3n$), सहायक कोशिकाएं ($n$), तथा बीजांडकाय ($2n$) की सूत्रगुणता ज्ञात करना। 3. NEET-UG का सर्वाधिक पसंदीदा अध्याय: स्पोरोपोलेनिन के गुण, टेपीटम के कार्य, क्लिस्टोगैमी (अनुन्मीलिय परागण), तथा नारियल पानी (मुक्त केंद्रकीय भ्रूणपोष) पर प्रतिवर्ष 3 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं। 4. लघु उत्तरीय विभेद: वास्तविक फल बनाम आभासी फल, पेरिस्पर्म बनाम एंडोस्पर्म, तथा ऑटोगैमी बनाम गिटोनोगैमी।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कक्षा 11वीं की पादप आकारिकी (पुष्प के भाग: बाह्यदलपुंज, दलपुंज, पुमंग, जायांग)।
  • कोशिका विभाजन के नियम: समसूत्री विभाजन (Mitosis) तथा अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)।
  • अगुणित ($n$) एवं द्विगुणित ($2n$) गुणसूत्र अवस्थाओं की मूलभूत समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • परागकोश एवं बीजांड की आंतरिक ऊतकीय संरचना का सटीक नामांकित आरेख बनाना।
  • लघुबीजाणुजनन एवं गुरुबीजाणुजनन के चरणबद्ध प्रक्रम तथा 7-कोशिकीय, 8-केंद्रकीय भ्रूणकोष की उत्पत्ति को समझाना।
  • स्वपरागण एवं परपरागण के विभिन्न प्रकारों तथा पौधों द्वारा अपनाई जाने वाली बहिःप्रजनन युक्तियों की व्याख्या करना।
  • दोहरा निषेचन (Double Fertilization) एवं त्रिसंलयन (Triple Fusion) के जैविक महत्व एवं सूत्रगुणता (Ploidy) को स्पष्ट करना।
  • भ्रूणपोष एवं भ्रूण के क्रमिक विकास का तुलनात्मक विश्लेषण करना।
  • असंगजनन (Apomixis) एवं अनिषेकफलन (Parthenocarpy) के मध्य अंतर स्पष्ट कर कृषि में इनके महत्व का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पुंकेसर, लघुबीजाणुधानी एवं परागक...
2 2. जायांग, बीजांड एवं भ्रूणकोष का व...
3 3. परागण की क्रियाविधि एवं बहिःप्रज...
4 4. दोहरा निषेचन एवं पश्च-निषेचन घटन...
5 5. असंगजनन, बहुभ्रूणता एवं फल निर्म...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पुंकेसर, लघुबीजाणुधानी एवं परागकण की संरचना (Stamen, Microsporangium & Pollen Grain)

1.1 पुंकेसर की संरचना (Structure of Stamen)

पुमंग पुष्प का नर जनन चक्र है, जिसकी प्रत्येक इकाई को पुंकेसर (Stamen) कहते हैं। पुंकेसर के दो मुख्य भाग होते हैं:

  • तंतु (Filament): यह एक लंबा एवं पतला डंठलनुमा भाग है जिसका समीपस्थ छोर पुष्प के पुष्पासन (Thalamus) या दलपत्र (Petal) से जुड़ा होता है।
  • परागकोश (Anther): तंतु के शीर्ष पर स्थित फूला हुआ भाग। प्ररूपी आवृतबीजी परागकोश द्विपालिक (Bilobed) तथा द्विकोष्ठकी (Ditothecous) होता है, जिसमें कुल 4 लघुबीजाणुधानियां (Tetrasporangiate) पाई जाती हैं।

1.2 लघुबीजाणुधानी की भित्ति परतें (Microsporangial Wall Layers)

एक परिपक्व लघुबीजाणुधानी बाहर से अंदर की ओर चार संकेंद्री परतों द्वारा घिरी होती है:

  1. बाह्यत्वचा (Epidermis): सबसे बाहरी, एकल सुरक्षात्मक परत।
  2. अंतस्थीसियम (Endothecium): अल्फा-सेलुलोस के रेशेदार पट्टियों वाली परत, जो आर्द्रताग्राही होती है तथा परागकोश के प्रस्फुटन (Dehiscence) में सहायता करती है।
  3. मध्य परतें (Middle Layers): 1 से 3 कोशिकीय परतें, जो अल्पकालिक होती हैं तथा परिपक्वता पर नष्ट हो जाती हैं।
  4. टेपीटम (Tapetum - सर्वाधिक महत्वपूर्ण): यह सबसे आंतरिक पोषक परत है। इसकी कोशिकाएं सघन कोशिकाद्रव्य युक्त तथा बहुकेंद्रकीय (Multinucleate / Polyploid) होती हैं। टेपीटम विकासशील परागकणों को पोषण प्रदान करती है, स्पोरोपोलिनिन पूर्वगामी (Ubisch Bodies) का स्राव करती है, तथा पराग किट (Pollen Kitt) का निर्माण करती है।

1.3 लघुबीजाणुजनन (Microsporogenesis)

लघुबीजाणुधानी के केंद्र में स्थित बीजाणुजन ऊतक (Sporogenous Tissue) की प्रत्येक कोशिका एक पराग मातृ कोशिका (Pollen Mother Cell - PMC / MMC, $2n$) की भांति कार्य करने में सक्षम होती है।

प्रत्येक PMC में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा 4 अगुणित ($n$) लघुबीजाणुओं का समूह बनता है, जिसे लघुबीजाणु चतुष्क (Microspore Tetrad) कहते हैं। परागकोश के शुष्क होने पर ये चतुष्क अलग होकर परागकणों (Pollen Grains) में रूपांतरित हो जाते हैं।

1.4 परागकण: नर युग्मकोद्भिद (Pollen Grain: Male Gametophyte)

परागकण नर युग्मकोद्भिद की प्रथम कोशिका का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी भित्ति द्वि-स्तरीय होती है:

  • बाह्यचोल (Exine): यह बाहरी कठोर परत है जो स्पोरोपोलेनिन (Sporopollenin) की बनी होती है। स्पोरोपोलेनिन पृथ्वी पर ज्ञात सर्वाधिक प्रतिरोधी कार्बनिक पदार्थों में से एक है; यह उच्च तापमान, प्रबल अम्लों तथा क्षारों को सहन कर सकता है और कोई भी ज्ञात एंजाइम इसे अपघटित नहीं कर सकता। इसी कारण परागकण करोड़ों वर्षों तक जीवाश्म (Fossils) के रूप में सुरक्षित रहते हैं। बाह्यचोल पर जहाँ स्पोरोपोलेनिन अनुपस्थित होता है, वहाँ छोटे छिद्र पाए जाते हैं जिन्हें जनन छिद्र (Germ Pores) कहते हैं (जहाँ से पराग नलिका बाहर निकलती है)।
  • अंतश्चोल (Intine): यह भीतरी पतली, सतत परत है जो सेलुलोस एवं पेक्टिन की बनी होती है।
  • परागकण की कोशिकीय अवस्था: लगभग 60% आवृतबीजीयों में परागकण 2-कोशिकीय अवस्था में झड़ते हैं—एक बड़ी कायिक कोशिका (Vegetative Cell) जिसमें प्रचुर खाद्य भंडार होता है, तथा एक छोटी धुरीनुमा जनन कोशिका (Generative Cell)। शेष 40% पौधों में जनन कोशिका समसूत्री विभाजन द्वारा दो नर युग्मक बनाकर 3-कोशिकीय अवस्था में मुक्त होती है।

2. जायांग, बीजांड एवं भ्रूणकोष का विकास (Pistil, Ovule & Embryo Sac Development)

2.1 जायांग एवं बीजांड की संरचना (Structure of Ovule / Megasporangium)

जायांग पुष्प का मादा जनन अंग है। इसके तीन भाग होते हैं: परागकणों को ग्रहण करने वाला वर्तिकाग्र (Stigma), लंबा पतला वर्तिका (Style), तथा आधार पर फूला हुआ अंडाशय (Ovary) जिसमें बीजांड उपस्थित होते हैं।

एक प्ररूपी प्रतीप बीजांड (Anatropous Ovule - 82% आवृतबीजीयों में पाया जाने वाला) के प्रमुख भाग:

  • बीजांडवृंत (Funicle): डंठल जिसके द्वारा बीजांड जरायु (Placenta) से जुड़ा होता है।
  • नाभिका (Hilum): वह संधि स्थल जहाँ बीजांड की काया बीजांडवृंत से जुड़ती है।
  • अध्यावरण (Integuments): बीजांडकाय को घेरने वाली सुरक्षात्मक परतें (बाह्य एवं अंतः अध्यावरण)।
  • बीजांडद्वार (Micropyle): अध्यावरणों के शीर्ष पर स्थित एक संकीर्ण छिद्र, जिसके द्वारा पराग नलिका प्रवेश करती है।
  • निभाग (Chalaza): बीजांडद्वार के ठीक विपरीत स्थित बीजांड का आधारभूत भाग।
  • बीजांडकाय (Nucellus, $2n$): अध्यावरणों से घिरा केंद्रीय मृदूतकीय पोषक ऊतक।

2.2 गुरुबीजाणुजनन (Megasporogenesis)

बीजांडकाय की बीजांडद्वारीय छोर की एक कोशिका विभेदित होकर गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (Megaspore Mother Cell - MMC, $2n$) बनाती है। MMC में अर्धसूत्री विभाजन होने से 4 अगुणित गुरुबीजाणुओं की एक रैखिक श्रृंखला बनती है।

अधिकांश आवृतबीजीयों में निभाग (Chalaza) की ओर का केवल 1 गुरुबीजाणु क्रियाशील (Functional) रहता है, जबकि बीजांडद्वार की ओर के शेष 3 गुरुबीजाणु अपह्रासित (Degenerate) हो जाते हैं। एकल क्रियाशील गुरुबीजाणु से भ्रूणकोष के विकास को एकबीजाणुज विकास (Monosporic Development) कहते हैं।

2.3 7-कोशिकीय एवं 8-केंद्रकीय मादा युग्मकोद्भिद (Embryo Sac)

क्रियाशील गुरुबीजाणु का केंद्रक तीन क्रमिक मुक्त-केंद्रकीय समसूत्री विभाजनों (Free-nuclear Mitotic Divisions) द्वारा 8 केंद्रक बनाता है। कोशिका भित्ति निर्माण के उपरांत यह 7-कोशिकीय एवं 8-केंद्रकीय संरचना में सुव्यवस्थित होता है:

  • अंड उपकरण (Egg Apparatus - बीजांडद्वारीय छोर पर, 3 कोशिकाएं): एक मध्यवर्ती अंड कोशिका (Egg cell, $n$) तथा दो सहायक कोशिकाएं (Synergids, $n$)। सहायक कोशिकाओं के बीजांडद्वारीय सिरे पर एक विशेष अंगुलिनुमा कोशिकीय स्थूलन होता है जिसे तंतुरूप समुच्चय (Filiform Apparatus) कहते हैं, जो पराग नलिका को भ्रूणकोष में प्रवेश हेतु रासायनिक दिशा-निर्देश देता है।
  • प्रतिव्यासांत कोशिकाएं (Antipodal Cells - निभागीय छोर पर, 3 कोशिकाएं, $n$): ये तीन कोशिकाएं पोषण में सहायक होती हैं और निषेचन से पूर्व या तुरंत बाद नष्ट हो जाती हैं।
  • केंद्रीय कोशिका (Central Cell - सबसे बड़ी कोशिका): इसमें दो अगुणित ध्रुवीय केंद्रक (Polar Nuclei, $n + n$) उपस्थित होते हैं, जो संलयित होकर द्वितीयक केंद्रक ($2n$) बनाते हैं।

3. परागण की क्रियाविधि एवं बहिःप्रजनन युक्तियाँ (Pollination & Outbreeding Devices)

3.1 परागण के प्रकार (Types of Pollination)

  1. स्वयुग्मन (Autogamy): परागकणों का उसी पुष्प के परागकोश से उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण। इसके लिए परागकोश व वर्तिकाग्र का एक साथ परिपक्व होना (समकालपक्वता) आवश्यक है।
    विशेष पादप: वायोला (सामान्य पैंसी), ऑक्जैलिस तथा कोमेलिना (कनकौआ) में दो प्रकार के पुष्प पाए जाते हैं:
    • उन्मील परागणी पुष्प (Chasmogamous Flowers): सामान्य खिले हुए पुष्प जिनके जनन अंग अनावृत होते हैं।
    • अनुन्मीलिय पुष्प (Cleistogamous Flowers): वे पुष्प जो कभी नहीं खिलते (सदैव बंद रहते हैं)। इनमें पर-परागण असंभव है, अतः ये बिना किसी परागण कारक के शत-प्रतिशत निश्चित बीज उत्पादन सुनिश्चित करते हैं।
  2. सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy): एक ही पौधे के एक पुष्प के परागकणों का उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण। क्रियात्मक रूप से यह पर-परागण है (कारक की आवश्यकता होती है), परंतु आनुवंशिक रूप से यह स्वयुग्मन के समान है क्योंकि दोनों पुष्प एक ही जनक के होते हैं।
  3. परनिषेचन (Xenogamy / Cross-pollination): भिन्न पौधों के पुष्पों के मध्य परागण। केवल इसी विधि द्वारा आनुवंशिक पुनर्योजन (Genetic Recombination) एवं विविधता उत्पन्न होती है।

3.2 परागण के कर्मक (Agents of Pollination)

  • वायु परागण (Anemophily): परागकण हल्के, शुष्क व चिपचिपाहट रहित होते हैं; पुंकेसर हवा में खुले तथा वर्तिकाग्र पंखदार (Feathery) होते हैं ताकि उड़ते परागकणों को आसानी से पकड़ सकें। प्रत्येक अंडाशय में केवल एक बीजांड होता है (उदा. मक्का के भुट्टे के बाल / Tassels, घास)।
  • जल परागण (Hydrophily): अत्यंत दुर्लभ (केवल लगभग 30 वंशों में, मुख्य रूप से एकबीजपत्री)। उदा. वैलिसनेरिया, हाइड्रिला (ताजे पानी में) तथा जोस्टेरा (समुद्री घास)। नोट: कमल और जलकुंभी (Water Hyacinth) जलीय पौधे होने के बावजूद कीटों या वायु द्वारा परागित होते हैं!
  • कीट परागण (Entomophily): पुष्प बड़े, चमकीले, सुगंधित तथा मकरंद (Nectar) से भरपूर होते हैं। मधुमक्खियाँ मुख्य परागणकर्ता हैं। परागकण चिपचिपे (Pollen Kitt युक्त) होते हैं।

3.3 बहिःप्रजनन युक्तियाँ (Outbreeding Devices)

निरंतर स्वपरागण से पौधों में अंतःप्रजनन अवनमन (Inbreeding Depression) उत्पन्न होता है, जिससे बचने तथा परपरागण को बढ़ावा देने के लिए पौधों ने निम्नलिखित अनुकूलन विकसित किए हैं:

  • भिन्नकालपक्वता (Dichogamy): पराग विमुक्ति तथा वर्तिकाग्र ग्राह्यता का समय भिन्न होना (उदा. पुंपूर्वता / Protandry अथवा स्त्रीपूर्वता / Protogyny)।
  • विषमवर्तिकात्व (Heterostyly): परागकोश एवं वर्तिकाग्र का भिन्न-भिन्न ऊंचाइयों पर स्थित होना।
  • स्व-असामंजस्यता (Self-incompatibility): यह एक आनुवंशिक क्रियाविधि है जो उसी पुष्प या पौधे के परागकणों को वर्तिका में अंकुरित होने अथवा पराग नलिका की वृद्धि को रोककर निषेचन से रोकती है।
  • एकलिंगता (Dioecy): नर व मादा पुष्पों का अलग-अलग पौधों पर होना (उदा. पपीता / Papaya, जिसमें स्वयुग्मन व सजातपुष्पी दोनों रुक जाते हैं)।

4. दोहरा निषेचन एवं पश्च-निषेचन घटनाएं (Double Fertilization & Post-fertilization)

4.1 दोहरा निषेचन एवं त्रिसंलयन (Double Fertilization & Triple Fusion)

पराग नलिका वर्तिका से होते हुए बीजांडद्वार द्वारा एक सहायक कोशिका के कोशिकाद्रव्य में प्रवेश करती है और अपने दोनों अगुणित नर युग्मकों को मुक्त कर देती है। इसके उपरांत दो संलयन संपन्न होते हैं:

  1. युग्मक संलयन (Syngamy): एक अगुणित नर युग्मक ($n$), अगुणित अंड कोशिका ($n$) के केंद्रक से संलयित होकर एक द्विगुणित कोशिका बनाता है जिसे युग्मनज (Zygote, $2n$) कहते हैं। यह आगे चलकर भ्रूण (Embryo) में विकसित होता है।
  2. त्रिसंलयन (Triple Fusion): दूसरा अगुणित नर युग्मक ($n$), केंद्रीय कोशिका में स्थित दो ध्रुवीय केंद्रकों ($n + n$) से संलयित होकर एक त्रिगुणित केंद्रक बनाता है जिसे प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (Primary Endosperm Nucleus - PEN, $3n$) कहते हैं, तथा केंद्रीय कोशिका प्राथमिक भ्रूणपोष कोशिका (PEC) बन जाती है।

चूँकि भ्रूणकोष के भीतर दो प्रकार के संलयन (युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन) संपन्न होते हैं, अतः इस परिघटना को दोहरा निषेचन (Double Fertilization) कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम एस. जी. नवाश्चिन (S.G. Nawaschin, 1898) ने लिलियम तथा फ्रिटिलेरिया में की थी।

4.2 भ्रूणपोष का विकास (Endosperm Development)

भ्रूण के विकास से पूर्व भ्रूणपोष का विकास प्रारंभ हो जाता है ताकि विकासशील भ्रूण को सुनिश्चित पोषण मिल सके।

  • मुक्त केंद्रकीय भ्रूणपोष (Free-nuclear Endosperm): PEN में लगातार मुक्त समसूत्री विभाजन होते हैं बिना किसी कोशिका भित्ति निर्माण के। उदाहरण: नारियल का पानी (Coconut water) हजारों मुक्त केंद्रकों से बना द्रव भ्रूणपोष है।
  • कोशिकीय भ्रूणपोष: बाद में परिधि से केंद्र की ओर भित्ति निर्माण होता है। उदाहरण: नारियल का सफेद गूदा (सफेद गिरी / Kernel)।
  • अभ्रूणपोषी बीज (Non-albuminous / Exalbuminous): जिनमें बीज परिपक्वता से पूर्व भ्रूणपोष पूरी तरह उपभोग हो जाता है (उदा. मटर, चना, सेम, मूंगफली)।
  • भ्रूणपोषी बीज (Albuminous): जिनमें परिपक्व बीज में भी भ्रूणपोष शेष रहता है (उदा. गेहूं, मक्का, अरंडी, जौ, नारियल)।
  • परिभ्रूणपोष (Perisperm): कुछ बीजों में बीजांडकाय (Nucellus) का कुछ भाग स्थायी रूप से शेष रह जाता है (उदा. काली मिर्च / Black Pepper, चुकंदर / Beet)।

5. असंगजनन, बहुभ्रूणता एवं फल निर्माण (Apomixis, Polyembryony & Fruit Formation)

5.1 फल एवं बीज का निर्माण

  • सत्य फल (True Fruits): जो केवल अंडाशय (Ovary) के परिपक्व होने से बनते हैं (उदा. आम, टमाटर)।
  • आभासी फल (False Fruits / Pseudocarps): जिनमें अंडाशय के अतिरिक्त पुष्प के अन्य भाग (विशेष रूप से पुष्पासन / Thalamus) भी फल निर्माण में भाग लेते हैं (उदा. सेब / Apple, नाशपाती / Pear, काजू / Cashew, स्ट्रॉबेरी)।
  • अनिषेकफलन (Parthenocarpy): बिना निषेचन के ही अंडाशय का फल में रूपांतरित होना। ऐसे फल प्राकृतिक रूप से बीजरहित (Seedless) होते हैं (उदा. केला / Banana)। इन्हें ऑक्सिन व जिबरेलिन छिड़क कर प्रेरित किया जा सकता है।

5.2 असंगजनन (Apomixis)

असंगजनन अलैंगिक जनन की एक ऐसी विधा है जो लैंगिक जनन का अनुहरण (Mimicry) करती है, अर्थात इसमें बिना अर्धसूत्री विभाजन और बिना युग्मक संलयन (निषेचन) के ही बीज का निर्माण हो जाता है (उदा. एस्टेरेसी कुल तथा घासों में)।

कृषि में महत्व: संकर बीज (Hybrid seeds) अत्यधिक उत्पादन देते हैं किंतु अगली पीढ़ी में उनके लक्षण पृथक हो जाते हैं। यदि संकर फसलों को असंगजनिक (Apomictic) बना दिया जाए, तो संकर किस्मों के गुण कई पीढ़ियों तक स्थिर बने रहेंगे और किसानों को हर साल महंगे संकर बीज नहीं खरीदने पड़ेंगे।

5.3 बहुभ्रूणता (Polyembryony)

एक ही बीज में एक से अधिक भ्रूणों की उपस्थिति को बहुभ्रूणता कहते हैं। नींबू वंश (Citrus) तथा आम (Mango) में बीजांडकाय (Nucellus) की द्विगुणित कोशिकाएं विभाजित होकर भ्रूणकोष के भीतर धंस जाती हैं और कई भ्रूणों में विकसित हो जाती हैं।

महत्वपूर्ण जैविक संकल्पनाएँ, प्रक्रियाएँ एवं आरेख

युग्मनज की सूत्रगुणता (Ploidy of Zygote)
Ploidy = 2n \; (द्विगुणित / Diploid)
प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक की सूत्रगुणता (PEN Ploidy)
Ploidy = 3n \; (त्रिगुणित / Triploid)
आवृतबीजी भ्रूणकोष संरचना सूत्र
संरचना = 7-कोशिकीय, \; 8-केंद्रकीय
बीज निर्माण गणितीय संबंध
100 बीज हेतु = 100 PMC अर्धसूत्रण + 100 MMC अर्धसूत्रण = 25 + 100 = 125 अर्धसूत्री विभाजन
सहायक एवं प्रतिव्यासांत कोशिकाओं की सूत्रगुणता
Ploidy = n \; (अगुणित / Haploid)
बीजांडकाय एवं अध्यावरण की सूत्रगुणता
Ploidy = 2n \; (द्विगुणित / Diploid)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
एक आवृतबीजी पौधे के 200 बीज बनने के लिए कितने पराग मातृ कोशिकाओं (PMC) तथा कितने गुरुबीजाणु मातृ कोशिकाओं (MMC) में अर्धसूत्री विभाजनों की आवश्यकता होगी? कुल अर्धसूत्री विभाजनों की संख्या भी परिकलित कीजिए। [CBSE Board 2018, 2022 / CBSE 2020]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: परागकणों (नर युग्मकों) हेतु आवश्यक अर्धसूत्री विभाजनों की गणना:
हम जानते हैं कि प्रत्येक पराग मातृ कोशिका (PMC) में 1 अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) होने से 4 क्रियाशील परागकण बनते हैं।
अतः 200 परागकण प्राप्त करने हेतु आवश्यक PMC की संख्या:
$$\text{अर्धसूत्री विभाजन (नर पक्ष)} = \frac{200}{4} = 50$$

चरण 2: क्रियाशील अंड कोशिकाओं (मादा पक्ष) हेतु अर्धसूत्री विभाजनों की गणना:
प्रत्येक गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (MMC) में 1 अर्धसूत्री विभाजन होने से 4 गुरुबीजाणु बनते हैं, परंतु उनमें से 3 अपह्रासित (Degenerate) हो जाते हैं और केवल 1 ही क्रियाशील गुरुबीजाणु (अंड युक्त भ्रूणकोष) बनता है।
अतः 200 क्रियाशील अंड प्राप्त करने हेतु आवश्यक MMC की संख्या:
$$\text{अर्धसूत्री विभाजन (मादा पक्ष)} = \frac{200}{1} = 200$$

चरण 3: कुल अर्धसूत्री विभाजनों का योग:
$$\text{कुल अर्धसूत्री विभाजन} = 50 (\text{नर}) + 200 (\text{मादा}) = 250$$
उत्तर: 50 PMC अर्धसूत्री विभाजन तथा 200 MMC अर्धसूत्री विभाजन; कुल 250 अर्धसूत्री विभाजनों की आवश्यकता होगी।
उदाहरण 2
दोहरा निषेचन (Double Fertilization) क्या है? इसके दोनों संलयनों के नाम, उत्पाद तथा उनकी सूत्रगुणता (Ploidy) स्पष्ट कीजिए। पुष्पी पादपों में इसका क्या जैविक महत्व है? [CBSE 2019, 2023 - 5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: दोहरे निषेचन की परिभाषा:
आवृतबीजी पादपों के भ्रूणकोष में पराग नलिका द्वारा मुक्त किए गए दोनों नर युग्मकों द्वारा दो भिन्न-भिन्न संलयन संपन्न करने की परिघटना को दोहरा निषेचन कहते हैं।

चरण 2: दोनों संलयनों का विस्तृत विवरण:
  1. युग्मक संलयन (Syngamy / Generative Fertilization):
    • संलयन: प्रथम अगुणित नर युग्मक ($n$) + अगुणित अंड कोशिका ($n$)
    • उत्पाद: युग्मनज (Zygote)
    • सूत्रगुणता: द्विगुणित ($2n$)
    • भविष्य: यह आगे चलकर भ्रूण (Embryo) और नए पौधे का निर्माण करता है।
  2. त्रिसंलयन (Triple Fusion / Vegetative Fertilization):
    • संलयन: द्वितीय अगुणित नर युग्मक ($n$) + दो अगुणित ध्रुवीय केंद्रक ($n + n$)
    • उत्पाद: प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN)
    • सूत्रगुणता: त्रिगुणित ($3n$)
    • भविष्य: यह पोषक ऊतक भ्रूणपोष (Endosperm) में विकसित होता है।
चरण 3: दोहरे निषेचन का जैविक महत्व:
1. यह सुनिश्चित करता है कि पोषक ऊतक (भ्रूणपोष) का निर्माण केवल तभी हो जब अंड का सफल निषेचन हो चुका हो, जिससे पौधे की ऊर्जा व्यर्थ नष्ट नहीं होती।
2. त्रिगुणित भ्रूणपोष में मातृक एवं पैतृक दोनों जीनों का संगम होने से यह विकासशील भ्रूण को अत्यधिक पौष्टिक एवं सक्षम पोषण प्रदान करता है।
उदाहरण 3
एक परिपक्व 7-कोशिकीय एवं 8-केंद्रकीय भ्रूणकोष (मादा युग्मकोद्भिद) की संरचना का स्पष्ट एवं नामांकित आरेख बनाइए तथा इसके प्रमुख भागों का संक्षिप्त कार्य लिखिए। [CBSE 2017, 2021, 2024 - 5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: भ्रूणकोष का संगठनात्मक ढांचा:
एक प्रारूपिक परिपक्व भ्रूणकोष में 7 कोशिकाएं तथा 8 केंद्रक होते हैं जो तीन क्षेत्रों में व्यवस्थित होते हैं:

1. अंड उपकरण (Egg Apparatus - बीजांडद्वारीय छोर):
• अंड कोशिका (1 Egg Cell, $n$): वास्तविक मादा युग्मक जो नर युग्मक से संलयित होकर द्विगुणित युग्मनज बनाती है।
• सहायक कोशिकाएं (2 Synergids, $n$): इनके आधार पर 'तंतुरूप समुच्चय' (Filiform apparatus) पाया जाता है, जो रसायनों का स्राव कर पराग नलिका को भ्रूणकोष के भीतर आकर्षित और निर्देशित करता है।

2. केंद्रीय कोशिका (Central Cell - मध्य भाग):
• यह सबसे बड़ी कोशिका है जिसमें दो ध्रुवीय केंद्रक ($n + n$) पाए जाते हैं।
• यह द्वितीय नर युग्मक के साथ त्रिसंलयन कर त्रिगुणित भ्रूणपोष ($3n$) बनाती है।

3. प्रतिव्यासांत कोशिकाएं (3 Antipodal Cells - निभागीय छोर):
• ये तीन अगुणित ($n$) कोशिकाएं हैं जो निभाग की ओर स्थित होती हैं तथा भ्रूणकोष के पोषण में अल्पकालिक सहायता करती हैं।
उदाहरण 4
सेब को 'आभासी फल' (False Fruit) क्यों कहते हैं? पुष्प का कौन-सा भाग फल की रचना करता है? अनिषेकफलन (Parthenocarpy) से इसका क्या अंतर है? [NCERT Exemplar / CBSE 2020]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: आभासी फल का कारण:
अधिकांश पादपों में फल केवल अंडाशय (Ovary) के निषेचन एवं परिपक्व होने से बनता है (जिन्हें सत्य फल कहते हैं)।
परंतु सेब (Apple), नाशपाती तथा काजू में फल निर्माण में अंडाशय के साथ-साथ पुष्प का पुष्पासन (Thalamus) भी प्रमुख रूप से भाग लेता है और मांसल खाद्य भाग बनाता है।
अतः अंडाशय के अतिरिक्त अन्य पुष्पीय अंग (पुष्पासन) से निर्मित होने के कारण सेब को आभासी फल (False Fruit / Pseudocarp) कहा जाता है।

चरण 2: अनिषेकफलन से अंतर:
• आभासी फल (False Fruit): इसमें निषेचन सामान्य रूप से होता है और बीज बनते हैं, किंतु फल में अंडाशय के अतिरिक्त पुष्पासन भी शामिल होता है (उदा. सेब)।
• अनिषेकफलन (Parthenocarpy): इसमें बिना किसी निषेचन के अंडाशय स्वतः फल में विकसित हो जाता है, जिससे फल पूर्णतः बीजरहित (Seedless) होता है (उदा. केला)।
उदाहरण 5
असंगजनन (Apomixis) क्या है? यह परिघटना संकर बीज (Hybrid Seed) उद्योग में क्यों क्रांतिकारी मानी जाती है? [CBSE 2018, 2023]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: असंगजनन की परिभाषा:
लैंगिक जनन के स्थान पर बिना युग्मक संलयन (निषेचन) और बिना अर्धसूत्री विभाजन के सीधे बीज निर्माण की प्रक्रिया को असंगजनन (Apomixis) कहते हैं।
यह वास्तव में अलैंगिक जनन का एक ऐसा रूप है जो लैंगिक जनन का अनुहरण (Mimicry) करता है (उदा. एस्टेरेसी कुल व घास)।

चरण 2: संकर बीज उद्योग में क्रांतिकारी महत्व:
  1. लक्षणों के पृथक्करण (Segregation) की रोकथाम: सामान्य संकर (Hybrid) फसलों से प्राप्त बीजों को यदि अगली पीढ़ी में बोया जाए, तो मेंडेलियन पृथक्करण के कारण संकर ओज (Hybrid Vigour) नष्ट हो जाता है और पैदावार घट जाती है।
  2. किसानों के भारी खर्च की बचत: वर्तमान में किसानों को प्रत्येक वर्ष महंगे संकर बीज बाजार से दोबारा खरीदने पड़ते हैं। यदि संकर किस्मों में असंगजनन के जीन प्रवेश करा दिए जाएं, तो बीज अपनी मातृ पादप के 100% आनुवंशिक रूप से समरूप (Clonal) होंगे।
  3. किसान अपने ही खेत की उपज से प्राप्त बीजों को वर्ष-दर-वर्ष बिना किसी उपज में कमी के पुनः बो सकेंगे।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझ लेना कि जलकुंभी (Water Hyacinth) और कमल (Water Lily) जल-परागित पौधे हैं क्योंकि वे पानी में उगते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जलकुंभी और कमल के पुष्प जल की सतह से ऊपर उभरे रहते हैं और इनका परागण कीटों (Insects) अथवा वायु (Wind) द्वारा होता है, जल द्वारा नहीं!

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भ्रूणपोष की सूत्रगुणता (Ploidy) को 2n लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आवृतबीजीयों में भ्रूणपोष त्रिसंलयन (n नर युग्मक + n ध्रुवीय + n ध्रुवीय) से बनता है, अतः इसकी सूत्रगुणता सदैव त्रिगुणित (3n) होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

100 बीज बनने के लिए अर्धसूत्री विभाजनों की संख्या 100 मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

100 बीजों के लिए 100 अंड (100 अर्धसूत्रण) + 100 परागकण (25 अर्धसूत्रण) = 125 अर्धसूत्री विभाजन आवश्यक होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अनिषेकफलन (Parthenocarpy) और असंगजनन (Apomixis) को एक ही समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अनिषेकफलन में 'बीजरहित फल' बनता है, जबकि असंगजनन में 'बिना निषेचन के बीज' बनता है।

आवृतबीजी पुष्प में दोहरा निषेचन एवं 7-कोशिकीय, 8-केंद्रकीय भ्रूणकोष संरचना

आवृतबीजी मादा युग्मकोद्भिद: 7-कोशिकीय, 8-केंद्रकीय भ्रूणकोष (Embryo Sac)निभागीय छोर (Chalazal End)बीजांडद्वारीय छोर (Micropylar End)3 प्रतिव्यासांत कोशिकाएं (Antipodals, n)2 ध्रुवीय केंद्रक (Polar Nuclei, n+n)केंद्रीय कोशिका (Central Cell - 1 कोशिका)अंड कोशिका (Egg Cell, n)सहायक कोशिका (Synergid, n)दोहरा निषेचन1. युग्मक संलयन:नर युग्मक(n) + अंड(n)= युग्मनज (2n)2. त्रिसंलयन:नर(n) + ध्रुवीय(n+n)= PEN (3n भ्रूणपोष)कुल: 7 कोशिका, 8 केंद्रक

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
प्ररूपी परागकोश द्विपालिक, द्विकोष्ठकी एवं चतुर्लघुबीजाणुधानी युक्त होता है।
मुख्य बिंदु 2
लघुबीजाणुधानी की चार भित्तियां: बाह्यत्वचा, अंतस्थीसियम, मध्य परतें एवं पोषक टेपीटम (बहुकेंद्रकीय)।
मुख्य बिंदु 3
परागकण का बाह्यचोल अत्यधिक प्रतिरोधी स्पोरोपोलेनिन का तथा अंतश्चोल सेलुलोस-पेक्टिन का बना होता है।
मुख्य बिंदु 4
प्ररूपी आवृतबीजी बीजांड प्रतीप (Anatropous) तथा एकबीजाणुज विकास वाला होता है।
मुख्य बिंदु 5
परिपक्व भ्रूणकोष 7-कोशिकीय एवं 8-केंद्रकीय होता है (3 अंड उपकरण, 3 प्रतिव्यासांत, 1 केंद्रीय कोशिका)।
मुख्य बिंदु 6
सहायक कोशिकाओं का तंतुरूप समुच्चय (Filiform apparatus) पराग नलिका को प्रवेश हेतु निर्देशित करता है।
मुख्य बिंदु 7
अनुन्मीलिय पुष्प (Cleistogamous flowers) कभी नहीं खिलते और निश्चित स्वपरागण करते हैं।
मुख्य बिंदु 8
दोहरा निषेचन = युग्मक संलयन (नर युग्मक + अंड = 2n युग्मनज) + त्रिसंलयन (नर युग्मक + 2 ध्रुवीय केंद्रक = 3n PEN)।
मुख्य बिंदु 9
नारियल का पानी मुक्त केंद्रकीय भ्रूणपोष तथा सफेद गिरी कोशिकीय भ्रूणपोष का उदाहरण है।
मुख्य बिंदु 10
असंगजनन बिना निषेचन के बीज निर्माण है, जो संकर बीज उद्योग में क्रांतिकारी साधन है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
आवृतबीजी पादपों में प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) की सूत्रगुणता (Ploidy) क्या होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
2
परागकण का बाह्यचोल (Exine) किस अत्यधिक प्रतिरोधी पदार्थ का बना होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
3
निम्नलिखित में से कौन-सा फल एक 'आभासी फल' (False Fruit) है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
4
अनुन्मीलिय परागणी पुष्प (Cleistogamous Flowers) की क्या विशेषता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
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