पारितंत्र के चार प्रमुख प्रकार्यात्मक घटक होते हैं: उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह तथा पोषक चक्रण।
A. पारितंत्र की उत्पादकता (Productivity):
जैवभार (Biomass) या कार्बनिक पदार्थ के उत्पादन की दर को उत्पादकता कहते हैं। इसे $\text{g/m}^2/\text{year}$ अथवा $\text{kcal/m}^2/\text{year}$ में मापा जाता है।
- 1. प्राथमिक उत्पादकता (Primary Productivity): प्रकाश-संश्लेषण द्वारा पादपों द्वारा प्रति इकाई क्षेत्रफल में एक निश्चित समयावधि में उत्पादित जैवभार की मात्रा।
• सकल प्राथमिक उत्पादकता (Gross Primary Productivity - GPP): प्रकाश-संश्लेषण के दौरान कार्बनिक पदार्थ के निर्माण की कुल दर।
• शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (Net Primary Productivity - NPP): उत्पादकों द्वारा अपनी श्वसन क्रिया (Respiration - $R$) में उपभोग करने के बाद बची हुई कुल उपलब्ध जैवभार ऊर्जा: $$NPP = GPP - R$$ यह शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP) ही शाकाहारियों (उपभोक्ताओं) एवं अपघटकों के भोजन हेतु उपलब्ध होती है। - 2. द्वितीयक उत्पादकता (Secondary Productivity): उपभोक्ताओं (शाकाहारी व मांसाहारी जीवों) द्वारा नए कार्बनिक पदार्थ के निर्माण की दर।
- जीवमंडल की वार्षिक उत्पादकता: संपूर्ण जीवमंडल की कुल वार्षिक शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता लगभग 170 अरब टन (170 Billion Tons) शुष्क भार है। पृथ्वी का लगभग 70% भाग समुद्र होने के बावजूद महासागरों की वार्षिक उत्पादकता केवल 55 अरब टन (लगभग 32%) है, जबकि शेष 115 अरब टन उत्पादकता स्थल (जमीन) से प्राप्त होती है।
B. अपघटन प्रक्रम (Decomposition):
अपघटक (जीवाणु एवं कवक) मृत कार्बनिक पदार्थों (अपरद / Detritus - मृत पत्तियां, छाल, पुष्प, जंतुओं के मृत अवशेष व मल-मूत्र) को अकार्बनिक तत्वों ($CO_2, H_2O$ तथा पोषक तत्वों) में विखंडित करते हैं। अपघटन के 5 मुख्य चरण हैं:
- खंडन (Fragmentation): अपरदाहारी (Detritivores) जैसे केंचुआ (Earthworm) अपरद को खाकर छोटे-छोटे कणों में तोड़ देते हैं, जिससे पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ जाता है।
- निक्षालन (Leaching): जल-विलेय अकार्बनिक पोषक तत्व मृदा के संस्तर (Horizon) में नीचे चले जाते हैं और लवणों के रूप में अनुपलब्ध होकर अवक्षेपित हो जाते हैं।
- अपचयन (Catabolism): जीवाणु तथा कवक के एंजाइम अपरद को सरल अकार्बनिक पदार्थों में विखंडित करते हैं।
- ह्युमीफिकेशन (Humification): इसके फलस्वरूप एक गहरे रंग के क्रिस्टल-विहीन (अमोर्फस / Amorphous) पदार्थ का निर्माण होता है जिसे ह्यूमस (Humus) कहते हैं। ह्यूमस के गुण: यह सूक्ष्मजीवों की क्रिया के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होता है, इसका अपघटन अत्यंत धीमी दर से होता है, यह कोलाइडल प्रकृति का होता है और पोषक तत्वों के विशाल भंडार (Reservoir of nutrients) का कार्य करता है।
- खनिजीभवन (Mineralization): कुछ सूक्ष्मजीवों द्वारा ह्यूमस का और आगे अपघटन किया जाता है जिससे अकार्बनिक पोषक तत्व ($N, P, K, Ca$) मृदा में मुक्त हो जाते हैं।
अपघटन को प्रभावित करने वाले कारक:
• यदि अपरद में काइटिन तथा लिग्निन प्रचुर हो तो अपघटन बहुत धीमा होता है; यदि अपरद में नाइट्रोजन तथा शर्करा प्रचुर हो तो अपघटन तीव्र होता है।
• गर्म तथा नम वातावरण अपघटन को तीव्र करता है, जबकि निम्न तापमान तथा अवायवीयता अपघटन को धीमा करती है।