1.1 नर जनन तंत्र के प्रमुख अंग
नर जनन तंत्र श्रोणि क्षेत्र (Pelvic Region) में स्थित होता है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित अंग आते हैं:
- वृषण (Testes): प्राथमिक नर जनन अंग। प्रत्येक वयस्क में एक जोड़ी अंडाकार वृषण होते हैं जो उदर गुहा के बाहर एक त्वचा की थैली वृषणकोष (Scrotum) में स्थित होते हैं। वृषणकोष का तापमान शरीर के आंतरिक तापमान से 2 से 2.5°C कम रहता है, जो शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- वृषण की आंतरिक संरचना: प्रत्येक वृषण में लगभग 250 कक्ष होते हैं जिन्हें वृषण पालिकाएं (Testicular Lobules) कहते हैं। प्रत्येक पालिका में 1 से 3 अत्यधिक कुंडलित शुक्रजनक नलिकाएं (Seminiferous Tubules) होती हैं।
- शुक्रजनक नलिकाओं की कोशिकाएं:
- नर जनन कोशिकाएं (शुक्राणुजन / Spermatogonia, $2n$): अर्धसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणु बनाती हैं।
- सर्टोली कोशिकाएं (Sertoli Cells / Sustentacular cells): विकासशील शुक्राणु कोशिकाओं को पोषण प्रदान करती हैं (अतः इन्हें धाय कोशिकाएं / Nurse Cells भी कहते हैं), तथा हार्मोन इन्हिबिन (Inhibin) का स्राव करती हैं जो FSH को नियंत्रित करता है।
- अंतराली कोशिकाएं या लीडिग कोशिकाएं (Leydig Cells): शुक्रजनक नलिकाओं के बीच के अंतराली अवकाश (Interstitial Spaces) में स्थित होती हैं। ये ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) की प्रेरणा से नर हार्मोन एंड्रोजन (मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन) का संश्लेषण एवं स्राव करती हैं।
- सहायक नलिकाएं (Accessory Ducts): वृषण जालिकाएं (Rete Testis) $\to$ शुक्र वाहिकाएं (Vasa Efferentia) $\to$ अधिवृषण (Epididymis - शुक्राणुओं का परिपक्वता व अस्थायी भंडारण स्थल) $\to$ शुक्रवाहक (Vas Deferens) $\to$ स्खलनीय वाहिनी (Ejaculatory Duct) $\to$ मूत्रमार्ग (Urethra)।
- सहायक ग्रंथियाँ (Accessory Glands):
- शुक्राशय (Seminal Vesicles - एक जोड़ी): वीर्य के 60-70% क्षारीय द्रव का स्राव करती हैं, जिसमें फ्रक्टोज (शुक्राणुओं का ऊर्जा स्रोत), कैल्शियम तथा प्रोस्टाग्लैंडिंस होते हैं। (फ्रक्टोज की उपस्थिति का उपयोग बलात्कार परीक्षण / Forensic Rape Test में किया जाता है)।
- पुरःस्थ ग्रंथि (Prostate Gland - एकल): दूधिया, हल्का अम्लीय द्रव स्रावित करती है।
- बल्बोयूरेथ्रल या काउपर ग्रंथियाँ (Bulbourethral / Cowper's Glands - एक जोड़ी): संभोग के दौरान मूत्रमार्ग के स्नेहन (Lubrication) हेतु क्षारीय श्लेष्म स्रावित करती हैं।
1.2 शुक्राणु की सूक्ष्म संरचना (Structure of Human Sperm)
शुक्राणु एक सूक्ष्म, अगुणित ($n$), कशाभिकायुक्त गतिशील नर युग्मक है जिसके चार भाग होते हैं:
- शीर्ष (Head): इसमें एक लंबा अगुणित केंद्रक होता है। शीर्ष का अग्र भाग एक टोपीनुमा संरचना से ढका होता है जिसे एक्रोसोम (Acrosome) कहते हैं। एक्रोसोम का निर्माण गॉल्जीकाय (Golgi Apparatus) से होता है और इसमें जल-अपघटकीय एंजाइम (स्पर्म लाइसिन, जैसे हाइल्यूरोनिडेज) भरे होते हैं जो अंडाणु के आवरण को भेदने में सहायता करते हैं।
- ग्रीवा (Neck): इसमें दो सेंट्रिओल होते हैं—समीपस्थ सेंट्रिओल (निषेचित अंड के विदलन में प्रयुक्त) तथा दूरस्थ सेंट्रिओल (पूंछ का अक्षीय तंतु बनाता है)।
- मध्य खंड (Middle Piece): इसमें अक्षीय तंतु के चारों ओर सर्पिलाकार रूप से लिपटे अनगिनत माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondrial Spiral / Nebenkern) होते हैं, जो शुक्राणु की पूंछ को तैरने हेतु ऊर्जा (ATP) प्रदान करते हैं। इसे शुक्राणु का 'पावरहाउस' कहते हैं।
- पूंछ (Tail): एक लंबा कशाभ जो शुक्राणु को मादा जनन मार्ग में तैरने हेतु तीव्र गतिशीलता प्रदान करता है।