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CBSE • कक्षा XII • Biology • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मानव जनन (Human Reproduction)

मानव जनन (Human Reproduction) स्तनधारियों (Mammals) के सबसे जटिल, परिष्कृत एवं हार्मोन-नियंत्रित शारीरिक प्रक्रमों में से एक है। मानव एकलिंगी (Dioecious / Unisexual), लैंगिक रूप से द्विरूपी (Sexually Dimorphic) तथा जरायुज (Viviparous) प्राणी हैं, अर्थात वे संतानों को सीधे जन्म देते हैं। प्रस्तुत अध्याय मानव जनन तंत्र की सूक्ष्म शारीरिकी, अंतःस्रावी नियमन, युग्मक निर्माण तथा गर्भावधीय विकास का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत करता है। नर जनन तंत्र में वृषण (Testes) जो उदर गुहा के बाहर वृषणकोष (Scrotum) में स्थित होते हैं (शुक्राणुजनन हेतु आवश्यक 2 से 2.5°C कम तापमान बनाए रखने के लिए), शुक्रजनक नलिकाएं (Seminiferous tubules), सर्टोली कोशिकाएं (पोषक कोशिकाएं) तथा लीडिग कोशिकाएं (एंड्रोजन / टेस्टोस्टेरोन स्रावक), सहायक नलिकाएं एवं ग्रंथियाँ सम्मिलित हैं। मादा जनन तंत्र में अंडाशय (Ovaries), अंडवाहिनी (Fallopian tubes), गर्भाशय (Uterus - तीन परतें: पेरीमेट्रियम, मायोमेट्रियम एवं एंडोमेट्रियम), तथा स्तन ग्रंथियाँ शामिल हैं। इसके उपरांत शुक्रजनन (Spermatogenesis) द्वारा एक शुक्राणु मातृ कोशिका से 4 क्रियाशील शुक्राणुओं का निर्माण, तथा अंडजनन (Oogenesis) की असंतुलित व असतत प्रक्रिया (जन्म से पूर्व प्रारंभ, प्रोफेज-I में अवरोध, तथा निषेचन के समय पूर्ण) का तुलनात्मक अध्ययन होता है। अध्याय में 28-दिवसीय आर्तव चक्र (Menstrual Cycle) का हार्मोनल नियमन (GnRH, FSH, LH, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन तथा 14वें दिन LH Surge), फैलोपियन नलिका के एम्पुला (Ampulla) में निषेचन (Fertilization), कॉर्टिकल प्रतिक्रिया द्वारा बहुशुक्राणुता (Polyspermy) का निवारण, विदलन (Cleavage) द्वारा कोरकपुटी (Blastocyst) का निर्माण एवं गर्भाशय में अंतरोपण (Implantation), अपरा (Placenta) का अंतःस्रावी कार्य (hCG, hPL, रिलैक्सिन), तथा ऑक्सीटोसिन-प्रेरित प्रसव (Parturition) एवं दुग्धस्रवण (Lactation - कोलोस्ट्रम व IgA एंटीबॉडी) का संपूर्ण सैद्धांतिक व सचित्र निरूपण किया गया है।

एक एकल कोशिका से 37 ट्रिलियन कोशिकाओं का जीवित चमत्कार: गर्भावस्था का 280 दिनों का महाकाव्य!

क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर की प्रत्येक 37 ट्रिलियन कोशिकाएं केवल एक एकल सूक्ष्म कोशिका—युग्मनज (Zygote)—की संतान हैं, जिसका आकार मात्र 0.1 मिलीमीटर था? निषेचन के समय लगभग 30 करोड़ शुक्राणुओं की मैराथन दौड़ में से केवल एक ही विजेता शुक्राणु अंडाणु की रक्षा दीवार (जोना पेल्युसिडा) को भेद पाता है! जैसे ही वह प्रवेश करता है, अंडाणु एक अभेद्य विद्युत-रासायनिक पर्दा गिरा देता है ताकि कोई दूसरा शुक्राणु न घुस सके। इतना ही नहीं, माँ के गर्भ में पल रहा भ्रूण एक परजीवी की भांति माँ के इम्यून सिस्टम से खुद को बचाता है और अपरा (Placenta) नामक एक अस्थायी महा-अंग बनाकर माँ के रक्त से ऑक्सीजन व भोजन खींचता है! मानव जीवन की इस चमत्कारी शुरुआत को समझना विज्ञान का सबसे विस्मयकारी अनुभव है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE तथा CBSE 12वीं जीव विज्ञान बोर्ड परीक्षा एवं NEET-UG में यह अध्याय 6 से 8 अंकों का स्थायी आधार है: 1. 5-अंकीय दीर्घ उत्तरीय सचित्र प्रश्न: शुक्रजनन बनाम अंडजनन का रेखाचित्र (Spermatogenesis vs Oogenesis Flowchart), नर अथवा मादा जनन तंत्र का नामांकित आरेख, अथवा आर्तव चक्र का हार्मोनल आरेखीय निरूपण। 2. NEET-UG के अनिवार्य 3-4 प्रश्न: सर्टोली कोशिकाओं का कार्य, लीडिग कोशिकाओं द्वारा टेस्टोस्टेरोन, एक्रोसोम की उत्पत्ति (गॉल्जीकाय), LH Surge, तथा कॉर्पस ल्यूटियम का प्रोजेस्टेरोन स्राव। 3. अपरा एवं प्रसव हार्मोन: केवल गर्भावस्था में स्रावित होने वाले हार्मोन (hCG, hPL, Relaxin) तथा फीटो-इजेक्शन रिफ्लेक्स (Fetal Ejection Reflex)। 4. कोलोस्ट्रम का महत्व: प्रथम स्तन दुग्ध में उपस्थित IgA प्रतिरक्षी की नवजात शिशु को निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity) प्रदान करने की भूमिका।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System): पीयूष ग्रंथि (FSH, LH) तथा हाइपोथैलेमस (GnRH)।
  • अर्धसूत्री विभाजन I एवं II की अवस्थाएं (विशेषकर पूर्वावस्था-I / Prophase-I)।
  • कोशिकांगों के कार्य (गॉल्जीकाय, माइटोकॉन्ड्रिया, सेंट्रिओल)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • नर एवं मादा जनन तंत्र के विभिन्न अंगों, सहायक ग्रंथियों एवं उनके विशिष्ट कार्यों की व्याख्या करना।
  • शुक्रजनन एवं अंडजनन की प्रक्रियाओं का तुलनात्मक प्रवाह-चित्र (Flowchart) बनाकर गुणसूत्र संख्या ($2n$ से $n$) स्पष्ट करना।
  • मानव शुक्राणु एवं ग्राफियन पुटक की आंतरिक सूक्ष्म संरचना का नामांकित चित्र बनाना।
  • आर्तव चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं तथा पीयूष व अंडाशयी हार्मोनों के उतार-चढ़ाव का आरेखीय विश्लेषण करना।
  • निषेचन, विदलन, ब्लास्टोसिस्ट निर्माण एवं अंतरोपण की घटनाओं का कालक्रम समझाना।
  • अपरा के अंतःस्रावी कार्यों, प्रसव की तंत्रिका-अंतःस्रावी क्रियाविधि तथा कोलोस्ट्रम के महत्व का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. नर जनन तंत्र एवं शुक्राणु की सूक...
2 2. मादा जनन तंत्र एवं अंडाशयी चक्र...
3 3. युग्मकजनन: शुक्रजनन बनाम अंडजनन...
4 4. आर्तव चक्र एवं हार्मोनल नियमन (M...
5 5. निषेचन, अंतरोपण, गर्भावस्था एवं...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. नर जनन तंत्र एवं शुक्राणु की सूक्ष्म संरचना (Male Reproductive System & Sperm)

1.1 नर जनन तंत्र के प्रमुख अंग

नर जनन तंत्र श्रोणि क्षेत्र (Pelvic Region) में स्थित होता है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित अंग आते हैं:

  • वृषण (Testes): प्राथमिक नर जनन अंग। प्रत्येक वयस्क में एक जोड़ी अंडाकार वृषण होते हैं जो उदर गुहा के बाहर एक त्वचा की थैली वृषणकोष (Scrotum) में स्थित होते हैं। वृषणकोष का तापमान शरीर के आंतरिक तापमान से 2 से 2.5°C कम रहता है, जो शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • वृषण की आंतरिक संरचना: प्रत्येक वृषण में लगभग 250 कक्ष होते हैं जिन्हें वृषण पालिकाएं (Testicular Lobules) कहते हैं। प्रत्येक पालिका में 1 से 3 अत्यधिक कुंडलित शुक्रजनक नलिकाएं (Seminiferous Tubules) होती हैं।
  • शुक्रजनक नलिकाओं की कोशिकाएं:
    1. नर जनन कोशिकाएं (शुक्राणुजन / Spermatogonia, $2n$): अर्धसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणु बनाती हैं।
    2. सर्टोली कोशिकाएं (Sertoli Cells / Sustentacular cells): विकासशील शुक्राणु कोशिकाओं को पोषण प्रदान करती हैं (अतः इन्हें धाय कोशिकाएं / Nurse Cells भी कहते हैं), तथा हार्मोन इन्हिबिन (Inhibin) का स्राव करती हैं जो FSH को नियंत्रित करता है।
  • अंतराली कोशिकाएं या लीडिग कोशिकाएं (Leydig Cells): शुक्रजनक नलिकाओं के बीच के अंतराली अवकाश (Interstitial Spaces) में स्थित होती हैं। ये ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) की प्रेरणा से नर हार्मोन एंड्रोजन (मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन) का संश्लेषण एवं स्राव करती हैं।
  • सहायक नलिकाएं (Accessory Ducts): वृषण जालिकाएं (Rete Testis) $\to$ शुक्र वाहिकाएं (Vasa Efferentia) $\to$ अधिवृषण (Epididymis - शुक्राणुओं का परिपक्वता व अस्थायी भंडारण स्थल) $\to$ शुक्रवाहक (Vas Deferens) $\to$ स्खलनीय वाहिनी (Ejaculatory Duct) $\to$ मूत्रमार्ग (Urethra)।
  • सहायक ग्रंथियाँ (Accessory Glands):
    • शुक्राशय (Seminal Vesicles - एक जोड़ी): वीर्य के 60-70% क्षारीय द्रव का स्राव करती हैं, जिसमें फ्रक्टोज (शुक्राणुओं का ऊर्जा स्रोत), कैल्शियम तथा प्रोस्टाग्लैंडिंस होते हैं। (फ्रक्टोज की उपस्थिति का उपयोग बलात्कार परीक्षण / Forensic Rape Test में किया जाता है)।
    • पुरःस्थ ग्रंथि (Prostate Gland - एकल): दूधिया, हल्का अम्लीय द्रव स्रावित करती है।
    • बल्बोयूरेथ्रल या काउपर ग्रंथियाँ (Bulbourethral / Cowper's Glands - एक जोड़ी): संभोग के दौरान मूत्रमार्ग के स्नेहन (Lubrication) हेतु क्षारीय श्लेष्म स्रावित करती हैं।

1.2 शुक्राणु की सूक्ष्म संरचना (Structure of Human Sperm)

शुक्राणु एक सूक्ष्म, अगुणित ($n$), कशाभिकायुक्त गतिशील नर युग्मक है जिसके चार भाग होते हैं:

  1. शीर्ष (Head): इसमें एक लंबा अगुणित केंद्रक होता है। शीर्ष का अग्र भाग एक टोपीनुमा संरचना से ढका होता है जिसे एक्रोसोम (Acrosome) कहते हैं। एक्रोसोम का निर्माण गॉल्जीकाय (Golgi Apparatus) से होता है और इसमें जल-अपघटकीय एंजाइम (स्पर्म लाइसिन, जैसे हाइल्यूरोनिडेज) भरे होते हैं जो अंडाणु के आवरण को भेदने में सहायता करते हैं।
  2. ग्रीवा (Neck): इसमें दो सेंट्रिओल होते हैं—समीपस्थ सेंट्रिओल (निषेचित अंड के विदलन में प्रयुक्त) तथा दूरस्थ सेंट्रिओल (पूंछ का अक्षीय तंतु बनाता है)।
  3. मध्य खंड (Middle Piece): इसमें अक्षीय तंतु के चारों ओर सर्पिलाकार रूप से लिपटे अनगिनत माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondrial Spiral / Nebenkern) होते हैं, जो शुक्राणु की पूंछ को तैरने हेतु ऊर्जा (ATP) प्रदान करते हैं। इसे शुक्राणु का 'पावरहाउस' कहते हैं।
  4. पूंछ (Tail): एक लंबा कशाभ जो शुक्राणु को मादा जनन मार्ग में तैरने हेतु तीव्र गतिशीलता प्रदान करता है।

2. मादा जनन तंत्र एवं अंडाशयी चक्र (Female Reproductive System & Ovarian Cycle)

2.1 मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंग

  • अंडाशय (Ovaries): प्राथमिक मादा जनन अंग (एक जोड़ी, लंबाई 2-4 सेमी), जो मादा युग्मक (अंडाणु) तथा स्टेरॉयड हार्मोन (एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन) उत्पन्न करते हैं।
  • अंडवाहिनी / फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube - 10-12 सेमी लंबी): इसके तीन भाग होते हैं:
    1. कीपक (Infundibulum): अंडाशय के निकट स्थित कीप के आकार का भाग, जिसके किनारों पर अंगुलीनुमा प्रवर्ध झल्लरी (Fimbriae) होते हैं जो अंडोत्सर्ग के बाद अंडाणु को ग्रहण करते हैं।
    2. तुंबिका (Ampulla): चौड़ा मुड़ा हुआ भाग। यहीं पर वास्तविक निषेचन (Fertilization) संपन्न होता है!
    3. संकीर्ण पथ (Isthmus): गर्भाशय से जुड़ने वाला संकीर्ण भाग।
  • गर्भाशय (Uterus / Womb): उल्टी नाशपाती के आकार का एकल पेशीय अंग। इसकी भित्ति में तीन परतें होती हैं:
    1. पेरीमेट्रियम (Perimetrium): सबसे बाहरी पतली सुरक्षात्मक झिल्ली।
    2. मायोमेट्रियम (Myometrium): मध्यवर्ती मोटी अरेखित पेशी परत, जो प्रसव के दौरान ऑक्सीटोसिन के प्रभाव में तीव्र संकुचन उत्पन्न करती है।
    3. एंडोमेट्रियम (Endometrium): सबसे भीतरी ग्रंथिल परत, जो आर्तव चक्र के दौरान चक्रीय परिवर्तनों से गुजरती है और निषेचित ब्लास्टोसिस्ट के अंतरोपण का स्थल है।
  • ग्रीवा (Cervix) एवं योनि (Vagina): ग्रीवा नाल तथा योनि मिलकर जन्म नाल (Birth Canal) का निर्माण करती हैं।

3. युग्मकजनन: शुक्रजनन बनाम अंडजनन (Gametogenesis: Spermatogenesis vs Oogenesis)

3.1 शुक्रजनन (Spermatogenesis)

यह प्रक्रिया यौवनारंभ (Puberty) पर GnRH, LH तथा FSH हार्मोनों के स्राव से प्रारंभ होती है और जीवनपर्यंत चलती है:

$$\text{शुक्राणुजन (Spermatogonia, } 2n) \xrightarrow{\text{समसूत्री विभाजन}} \text{प्राथमिक शुक्रकोशिका (Primary Spermatocyte, } 2n)$$$$\xrightarrow{\text{अर्धसूत्री-I}} 2 \text{ द्वितीयक शुक्रकोशिकाएं (Secondary Spermatocytes, } n)$$$$\xrightarrow{\text{अर्धसूत्री-II}} 4 \text{ शुक्राणुप्रसु (Spermatids, } n) \xrightarrow{\text{शुक्राणुकायांतरण / Spermiogenesis}} 4 \text{ शुक्राणु (Spermatozoa, } n)$$

शुक्राणुमुक्ति (Spermiation): शुक्राणु का शीर्ष सर्टोली कोशिकाओं में धंसा रहता है; वहाँ से शुक्रजनक नलिका की गुहा में मुक्त होने की प्रक्रिया को शुक्राणुमुक्ति कहते हैं।

3.2 अंडजनन (Oogenesis)

अंडजनन शुक्रजनन से सर्वथा भिन्न है; इसकी शुरुआत मादा के भ्रूणीय परिवर्धन काल (Embryonic Stage) में ही हो जाती है (जन्म के बाद कोई नया अंडाणुजन नहीं बनता):

  1. भ्रूण में लगभग 20 लाख अंडाणुजन (Oogonia, $2n$) विभाजित होकर प्राथमिक अंडक (Primary Oocyte, $2n$) बनाते हैं, जो अर्धसूत्री विभाजन-I की पूर्वावस्था-I (Prophase-I) की डिप्लोटीन अवस्था में निलंबित (Arrested) हो जाते हैं।
  2. यौवनारंभ तक अधिकांश पुटक नष्ट हो जाते हैं (पुटक ह्रास / Follicular Atresia); केवल 60,000 से 80,000 प्राथमिक पुटक ही प्रत्येक अंडाशय में शेष बचते हैं।
  3. यौवनारंभ पर प्राथमिक अंडक अपना अर्धसूत्री-I पूर्ण करता है जो असममित (Unequal) होता है: एक बड़ी द्वितीयक अंडक (Secondary Oocyte, $n$) तथा एक अत्यंत छोटी प्रथम ध्रुवीय काय (First Polar Body, $n$) बनती है।
  4. द्वितीयक अंडक अर्धसूत्री विभाजन-II प्रारंभ करता है परंतु मध्यावस्था-II (Metaphase-II) पर पुनः रुक जाता है। इसी अवस्था में 14वें दिन अंडोत्सर्ग (Ovulation) होता है!
  5. अर्धसूत्री विभाजन-II केवल तभी पूर्ण होता है जब शुक्राणु अंडाणु के संपर्क में आकर प्रवेश करता है! शुक्राणु के प्रवेश से द्वितीयक अंडक एक बड़े अंडाणु (Ootid / Ovum, $n$) तथा द्वितीय ध्रुवीय काय (Second Polar Body, $n$) में विभाजित होता है।

4. आर्तव चक्र एवं हार्मोनल नियमन (Menstrual Cycle & Hormonal Regulation)

4.1 आर्तव चक्र की चार प्रमुख प्रावस्थाएं (28-दिवसीय चक्र)

  1. आर्तव प्रावस्था (Menstrual Phase / Bleeding - दिन 1 से 5):
    यदि निषेचन नहीं होता, तो प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिर जाता है। इसके फलस्वरूप गर्भाशय की एंडोमेट्रियम परत टूट जाती है और रक्त, श्लेष्म व अनिषेचित अंडाणु योनि मार्ग से स्रावित होते हैं (3-5 दिन)।
  2. पुटिकीय या प्रचुरोद्भवन प्रावस्था (Follicular / Proliferative Phase - दिन 6 से 13):
    अग्र पीयूष से FSH और LH का स्राव बढ़ता है। FSH अंडाशय में प्राथमिक पुटक को परिपक्व ग्राफियन पुटक (Graafian Follicle) में विकसित करता है। विकासशील पुटक की कोशिकाएं एस्ट्रोजन का स्राव करती हैं, जो टूटी हुई एंडोमेट्रियम परत का तेजी से पुनर्निर्माण (प्रचुरोद्भवन) करता है।
  3. अंडोत्सर्ग प्रावस्था (Ovulatory Phase - दिन 14):
    चक्र के मध्य (14वें दिन) LH तथा FSH अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच जाते हैं। विशेष रूप से LH का तीव्रतम स्राव (LH Surge) परिपक्व ग्राफियन पुटक को फाड़कर द्वितीयक अंडक को अंडाशय से बाहर मुक्त (अंडोत्सर्ग) कर देता है!
  4. पीत प्रावस्था या स्रावी प्रावस्था (Luteal / Secretory Phase - दिन 15 से 28):
    फटा हुआ ग्राफियन पुटक एक पीले रंग की अंतःस्रावी संरचना पीत पिंड (Corpus Luteum) में रूपांतरित हो जाता है। कॉर्पस ल्यूटियम भारी मात्रा में प्रोजेस्टेरोन (गर्भावस्था हार्मोन) स्रावित करता है, जो एंडोमेट्रियम को अत्यधिक संवहनीय व ग्रंथिल बनाकर अंतरोपण हेतु तैयार रखता है। यदि निषेचन न हो, तो कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट होकर श्वेत पिंड (Corpus Albicans) बन जाता है और नया चक्र प्रारंभ हो जाता है।

5. निषेचन, अंतरोपण, गर्भावस्था एवं प्रसव (Fertilization, Implantation & Parturition)

5.1 निषेचन एवं कॉर्टिकल प्रतिक्रिया (Fertilization)

संभोग के दौरान वीर्य योनि में स्खलित होता है। गतिशील शुक्राणु गर्भाशय से होते हुए फैलोपियन नलिका के तुंबिका (Ampulla) में पहुँचते हैं।

  • अंडाणु के चारों ओर जोना पेल्युसिडा (Zona Pellucida) तथा कोरोना रेडिएटा की परतें होती हैं।
  • जब शुक्राणु एक्रोसोम के एंजाइमों द्वारा जोना पेल्युसिडा के संपर्क में आता है, तो यह परत में रासायनिक परिवर्तन (कॉर्टिकल प्रतिक्रिया) प्रेरित करता है जो अन्य अतिरिक्त शुक्राणुओं के प्रवेश को पूर्णतः अवरुद्ध (पॉलिसपर्मी की रोकथाम / Block to Polyspermy) कर देता है।
  • नर व मादा प्राक-केंद्रकों के संलयन से द्विगुणित युग्मनज (Zygote, $2n$) का निर्माण होता है।

5.2 विदलन एवं अंतरोपण (Cleavage & Implantation)

युग्मनज फैलोपियन नलिका से गर्भाशय की ओर गति करते हुए समसूत्री विदलन (Cleavage) द्वारा 2, 4, 8, 16 संतति कोशिकाओं (ब्लास्टोमियर्स) में विभाजित होता है।

  • 8 से 16 ब्लास्टोमियर्स वाली शहतूत के समान ठोस गेंद को मोरुला (Morula) कहते हैं।
  • मोरुला रूपांतरित होकर कोरकपुटी (Blastocyst) बनता है, जिसमें बाहरी परत पोषकोरक (Trophoblast) तथा भीतरी कोशिकाओं का समूह अंतः कोशिका समूह (Inner Cell Mass - ICM) कहलाता है। ICM की कोशिकाएं 'स्टेम कोशिकाएं' (Stem Cells) हैं जो आगे चलकर भ्रूण के सभी ऊतकों व अंगों को जन्म देती हैं।
  • निषेचन के लगभग 7वें दिन पोषकोरक गर्भाशय की एंडोमेट्रियम में धंस जाता है; इस प्रक्रिया को अंतरोपण (Implantation) कहते हैं, जिससे गर्भावस्था (Pregnancy) स्थापित होती है।

5.3 अपरा (Placenta) एवं प्रसव (Parturition)

  • अपरा (Placenta): पोषकोरक पर अंगुलीनुमा जरायु अंकुरक (Chorionic Villi) तथा गर्भाशयी ऊतक मिलकर अपरा बनाते हैं। यह भ्रूण को पोषण व ऑक्सीजन प्रदान करता है तथा $CO_2$ व उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालता है।
  • अपरा के हार्मोन: अपरा एक अंतःस्रावी ग्रंथि के रूप में hCG (मानव जरायुज गोनाडोट्रोपिन), hPL (मानव अपरा लैक्टोजेन), एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन तथा रिलैक्सिन (Relaxin) स्रावित करती है। (hCG, hPL और रिलैक्सिन केवल गर्भावस्था में ही उत्पन्न होते हैं; मूत्र में hCG की उपस्थिति गर्भ परीक्षण किट का आधार है)।
  • प्रसव (Parturition): पूर्ण विकसित भ्रूण एवं अपरा हल्के गर्भाशयी संकुचन प्रेरित करते हैं जिसे गर्भ उत्क्षेपण प्रतिवर्त (Fetal Ejection Reflex) कहते हैं। यह पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटोसिन (Oxytocin / Birth Hormone) के स्राव को प्रेरित करता है। ऑक्सीटोसिन मायोमेट्रियम में तीव्र संकुचन कराता है जिससे शिशु जन्म नाल से बाहर आ जाता है।
  • दुग्धस्रवण एवं कोलोस्ट्रम: प्रसव के प्रारंभिक कुछ दिनों तक स्रावित पीले रंग के गाढ़े दूध को खीस या कोलोस्ट्रम (Colostrum) कहते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में IgA प्रतिरक्षी (Antibodies) होती हैं, जो नवजात शिशु में विभिन्न संक्रमणों के विरुद्ध निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity) स्थापित करने हेतु अत्यंत अनिवार्य हैं।

महत्वपूर्ण जैविक संकल्पनाएँ, प्रक्रियाएँ एवं आरेख

शुक्रजनन दक्षता सूत्र (Spermatogenesis Yield)
1 \; प्राथमिक शुक्रकोशिका (2n) →{Meiosis} 4 \; शुक्राणु (n)
अंडजनन दक्षता सूत्र (Oogenesis Yield)
1 \; प्राथमिक अंडक (2n) →{Meiosis} 1 \; अंडाणु (n) + 2-3 \; ध्रुवीय काय (Polar Bodies)
वृषण तापमान नियमन शर्त
$$T_{\text{Scrotum}} = T_{\text{Body}} - (2\text{ to } 2.5^\circ\text{C})$$
अंडोत्सर्ग हार्मोनल संकेत (Ovulation Trigger)
$$\text{LH Surge at Day 14} \implies \text{Rupture of Graafian Follicle}$$
गर्भावस्था विशिष्ट बायोमार्कर
$$\text{Biomarkers} = \text{hCG, hPL, Relaxin}$$
कोलोस्ट्रम प्रतिरक्षी (Colostrum Antibody)
$$\text{Immunity} = \text{IgA Antibodies (Passive Immunity)}$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
शुक्रजनन (Spermatogenesis) तथा अंडजनन (Oogenesis) की प्रक्रियाओं के मध्य किन्हीं चार प्रमुख अंतरों को एक तुलनात्मक सारणी द्वारा स्पष्ट कीजिए। [CBSE Board 2018, 2021 / CBSE 2023 - 4 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
शुक्रजनन तथा अंडजनन में प्रमुख तुलनात्मक अंतर:

लक्षण (Feature)शुक्रजनन (Spermatogenesis)अंडजनन (Oogenesis)
1. प्रारंभ होने का समययह यौवनारंभ (Puberty, 13-14 वर्ष) पर प्रारंभ होता है तथा वृद्धावस्था तक अनवरत चलता है।यह मादा के भ्रूणीय परिवर्धन काल (माता के गर्भ में) ही प्रारंभ हो जाता है; जन्म के बाद नए अंडक नहीं बनते।
2. विभाजन की प्रकृतिअर्धसूत्री विभाजन सममित (Equal) होता है; कोशिकाद्रव्य चारों कोशिकाओं में बराबर बंटता है।अर्धसूत्री विभाजन अत्यधिक असममित (Unequal) होता है; लगभग संपूर्ण कोशिकाद्रव्य एक ही अंडाणु में रहता है।
3. उत्पाद (Yield)एक प्राथमिक शुक्रकोशिका ($2n$) से 4 क्रियाशील शुक्राणु ($n$) बनते हैं।एक प्राथमिक अंडक ($2n$) से केवल 1 क्रियाशील अंडाणु ($n$) तथा 2-3 निष्प्रभावी ध्रुवीय काय बनते हैं।
4. निरंतरता व समापनयह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें कोई ठहराव (Arrest) नहीं होता।यह असतत है; प्रोफेज-I तथा मेटाफेज-II में विभाजन रुकता है और लगभग 50 वर्ष की आयु में रजोनिवृत्ति (Menopause) पर समाप्त हो जाता है।
उदाहरण 2
एक महिला के 28-दिवसीय आर्तव चक्र में 14वें दिन होने वाली प्रमुख घटना क्या है? इसके लिए कौन-से हार्मोन उत्तरदायी हैं तथा इसके उपरांत फटे हुए पुटक का क्या भविष्य होता है? [CBSE 2019, 2022 - 5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: 14वें दिन की प्रमुख घटना:
28-दिवसीय सामान्य आर्तव चक्र के ठीक मध्य (14वें दिन) अंडोत्सर्ग (Ovulation) की परिघटना होती है, जिसमें परिपक्व ग्राफियन पुटक फटकर द्वितीयक अंडक (अंडाणु) को उदर गुहा/फैलोपियन नलिका में मुक्त कर देता है।

चरण 2: उत्तरदायी हार्मोन:
  1. LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) एवं FSH: चक्र के मध्य में दोनों गोनाडोट्रोपिन अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचते हैं। विशेष रूप से LH का अत्यधिक तीव्र स्राव (LH Surge) अंडोत्सर्ग को प्रेरित करने वाला मुख्य प्रेरक कारक है।
  2. एस्ट्रोजन: विकसित हो रहे पुटक द्वारा स्रावित उच्च एस्ट्रोजन स्तर हाइपोथैलेमस को धनात्मक पुनर्भरण (Positive Feedback) देकर LH Surge को सक्रिय करता है।
चरण 3: फटे हुए ग्राफियन पुटक का भविष्य:
अंडोत्सर्ग के उपरांत फटा हुआ ग्राफियन पुटक ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) के प्रभाव में एक पीले रंग के अंतःस्रावी पिंड में रूपांतरित हो जाता है जिसे पीत पिंड (Corpus Luteum) कहते हैं।
• यदि निषेचन होता है: कॉर्पस ल्यूटियम बना रहता है और भारी मात्रा में प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है जो एंडोमेट्रियम को बनाए रखकर गर्भावस्था की रक्षा करता है।
• यदि निषेचन नहीं होता: लगभग 10-12 दिनों बाद कॉर्पस ल्यूटियम अपह्रासित होकर एक रेशेदार श्वेत पिंड (Corpus Albicans) में बदल जाता है, जिससे प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिर जाता है और नया आर्तव स्राव प्रारंभ हो जाता है।
उदाहरण 3
अपरा (Placenta) क्या है? गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के पोषण एवं अंतःस्रावी ग्रंथि के रूप में इसके प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए। [NCERT / CBSE 2020, 2024 - 5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: अपरा की परिभाषा एवं निर्माण:
गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के पोषकोरक से निकलने वाले अंगुलीनुमा जरायु अंकुरक (Chorionic Villi) तथा माता के गर्भाशयी ऊतक परस्पर गुंथकर एक सघन शारीरिक व क्रियात्मक संरचना बनाते हैं, जिसे अपरा (Placenta) कहते हैं। यह नाभि-रज्जु (Umbilical Cord) द्वारा भ्रूण से जुड़ी होती है।

चरण 2: अपरा के शारीरिक एवं पोषण संबंधी कार्य:
1. पोषण: माता के रक्त से ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लिपिड, विटामिन आदि भ्रूण को उपलब्ध कराना।
2. श्वसन: माता के रक्त से ऑक्सीजन ($O_2$) भ्रूण को देना तथा भ्रूण से कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) माता के रक्त में विसरित करना।
3. उत्सर्जन: भ्रूण द्वारा उत्पादित नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पदार्थों (यूरिया) को माता के परिसंचरण में निष्कासित करना।

चरण 3: अंतःस्रावी ग्रंथि के रूप में अपरा के स्राव:
अपरा एक शक्तिशाली अस्थायी अंतःस्रावी ग्रंथि है जो निम्नलिखित हार्मोन स्रावित करती है:
• hCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन): कॉर्पस ल्यूटियम को सक्रिय रखकर प्रारंभिक गर्भावस्था को बनाए रखता है।
• hPL (ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजेन): भ्रूण की वृद्धि तथा स्तन ग्रंथियों के विकास को नियंत्रित करता है।
• प्रोजेस्टेरोन एवं एस्ट्रोजन: गर्भाशय एंडोमेट्रियम का रखरखाव करते हैं तथा मायोमेट्रियम के असमय संकुचन को रोकते हैं।
• रिलैक्सिन (Relaxin): प्रसव के समय श्रोणि स्नायुओं को शिथिल कर जन्म नाल को चौड़ा करता है।
उदाहरण 4
प्रसव (Parturition) क्या है? प्रसव को प्रेरित करने वाली 'गर्भ उत्क्षेपण प्रतिवर्त' (Fetal Ejection Reflex) की तंत्रिका-अंतःस्रावी क्रियाविधि समझाइए। [CBSE 2017, 2023]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: प्रसव की परिभाषा:
गर्भकाल (लगभग 9 माह या 280 दिन) पूरा होने पर गर्भाशय के तीव्र संकुचनों द्वारा पूर्ण विकसित शिशु का माता के गर्भ से बाहर निष्कासन प्रसव (Parturition) कहलाता है।

चरण 2: तंत्रिका-अंतःस्रावी क्रियाविधि (Neuroendocrine Mechanism):
  1. गर्भ उत्क्षेपण प्रतिवर्त की शुरुआत: प्रसव के संकेत पूर्ण विकसित भ्रूण तथा अपरा (Placenta) द्वारा उत्पन्न होते हैं, जो गर्भाशय की पेशियों में हल्के संकुचन प्रेरित करते हैं। इसे गर्भ उत्क्षेपण प्रतिवर्त (Fetal Ejection Reflex) कहते हैं।
  2. ऑक्सीटोसिन का स्राव: यह प्रतिवर्त माता की पश्च पीयूष ग्रंथि (Posterior Pituitary) को तंत्रिका संकेत भेजकर ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) हार्मोन मुक्त करने के लिए प्रेरित करता है।
  3. धनात्मक पुनर्भरण चक्र (Positive Feedback Loop): ऑक्सीटोसिन गर्भाशय की मायोमेट्रियम पेशियों पर कार्य कर तीव्र संकुचन कराता है। यह तीव्र संकुचन पुनः अधिक मात्रा में ऑक्सीटोसिन के स्राव को उद्दीप्त करता है।
  4. गर्भाशयी संकुचन एवं ऑक्सीटोसिन स्राव के बीच यह प्रगामी चक्र तब तक बढ़ता रहता है जब तक कि शिशु ग्रीवा व योनि (जन्म नाल) से होकर सुरक्षित बाहर नहीं निकल जाता।
उदाहरण 5
कोलोस्ट्रम (Colostrum / खीस) क्या है? नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए इसे प्रथम आहार के रूप में पिलाना अनिवार्य क्यों माना जाता है? [CBSE 2018, 2022]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरण 1: कोलोस्ट्रम की परिभाषा:
शिशु जन्म (प्रसव) के उपरांत माता की स्तन ग्रंथियों से प्रारंभिक 2 से 3 दिनों तक स्रावित होने वाले गाढ़े, पीले रंग के प्रथम दुग्ध को खीस या कोलोस्ट्रम (Colostrum) कहते हैं।

चरण 2: नवजात शिशु के लिए अनिवार्यता के कारण:
  1. प्रतिरक्षी प्रचुरता (Rich in IgA Antibodies): कोलोस्ट्रम में इम्युनोग्लोबुलिन-ए (IgA) प्रतिरक्षी अत्यधिक उच्च सांद्रता में पाई जाती है। नवजात शिशु का प्रतिरक्षा तंत्र जन्म के समय अविकसित होता है; कोलोस्ट्रम शिशु को प्राकृतिक निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity) प्रदान करता है।
  2. संक्रमणों से सुरक्षा: यह शिशु की श्वसन नली तथा आहार नाल की आंतरिक श्लेष्म परत पर एक सुरक्षात्मक आवरण बनाकर उसे जीवाणु एवं विषाणु संक्रमणों से बचाता है।
  3. पाचन एवं पोषण: इसमें सुपाच्य प्रोटीन, विटामिन-A तथा अल्प वसा होती है, जो नवजात शिशु के संवेदनशील पाचन तंत्र के लिए सर्वोत्तम प्राकृतिक आहार है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि अंडजनन (Oogenesis) यौवनारंभ पर प्रारंभ होता है जैसे शुक्रजनन होता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अंडजनन मादा के जन्म से पहले ही भ्रूणीय अवस्था में प्रारंभ हो जाता है और जन्म के समय लाखों प्राथमिक अंडक प्रोफेज-I में निलंबित रहते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

निषेचन का स्थल गर्भाशय (Uterus) लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मानव में वास्तविक निषेचन फैलोपियन नलिका के तुंबिका (Ampulla) भाग में होता है, गर्भाशय में केवल ब्लास्टोसिस्ट का अंतरोपण होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कोलोस्ट्रम में उपस्थित एंटीबॉडी को IgG लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कोलोस्ट्रम में मुख्य प्रतिरक्षी IgA होती है, जबकि अपरा (Placenta) को पार करने वाली प्रतिरक्षी IgG होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अंडोत्सर्ग के समय मुक्त होने वाली कोशिका को परिपक्व अंडाणु (Ovum) लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अंडोत्सर्ग के समय जो कोशिका मुक्त होती है वह 'द्वितीयक अंडक' (Secondary Oocyte) होती है जो मेटाफेज-II में रुकी होती है। पूर्ण अंडाणु केवल शुक्राणु के प्रवेश के बाद बनता है।

मानव जनन: आर्तव चक्र का हार्मोनल नियमन एवं शुक्राणु की सूक्ष्म संरचना

मानव जनन: शुक्राणु की संरचना एवं आर्तव चक्र हार्मोन्स (LH Surge)मानव शुक्राणु (Human Sperm)एक्रोसोम (Acrosome)केंद्रक (n)ग्रीवा (Neck)माइटोकॉन्ड्रिया(ऊर्जा स्रोत / ATP)पूंछ (Tail - गतिशीलता)आर्तव चक्र: 14वें दिन LH Surgeदिन114 (अंडोत्सर्ग)28LH Surge (शिखर)FSHप्रोजेस्टेरोन (पीत प्रावस्था)LH Surge ⇒ अंडोत्सर्ग ⇒ कॉर्पस ल्यूटियम ⇒ प्रोजेस्टेरोन

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
वृषण उदर गुहा के बाहर वृषणकोष में शुक्राणुजनन हेतु 2-2.5°C कम तापमान पर स्थित होते हैं।
मुख्य बिंदु 2
सर्टोली कोशिकाएं शुक्राणुओं को पोषण देती हैं; लीडिग कोशिकाएं टेस्टोस्टेरोन (एंड्रोजन) स्रावित करती हैं।
मुख्य बिंदु 3
शुक्राणु के एक्रोसोम का निर्माण गॉल्जीकाय से होता है; मध्य खंड में ऊर्जा हेतु माइटोकॉन्ड्रियल सर्पिल होता है।
मुख्य बिंदु 4
अंडजनन भ्रूणीय अवस्था में प्रारंभ होकर प्रोफेज-I में निलंबित रहता है; अंडोत्सर्ग पर द्वितीयक अंडक मुक्त होता है।
मुख्य बिंदु 5
निषेचन फैलोपियन नलिका के तुंबिका (Ampulla) में होता है; कॉर्टिकल प्रतिक्रिया पॉलिसपर्मी रोकती है।
मुख्य बिंदु 6
आर्तव चक्र के 14वें दिन LH Surge के कारण अंडोत्सर्ग (Ovulation) होता है।
मुख्य बिंदु 7
फटा हुआ ग्राफियन पुटक कॉर्पस ल्यूटियम बनाता है जो गर्भावस्था को बनाए रखने वाला प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है।
मुख्य बिंदु 8
ब्लास्टोसिस्ट का पोषकोरक (Trophoblast) एंडोमेट्रियम में धंसकर अंतरोपण (Implantation) करता है।
मुख्य बिंदु 9
अपरा hCG, hPL, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन तथा रिलैक्सिन हार्मोन स्रावित करती है।
मुख्य बिंदु 10
प्रसव फीटो-इजेक्शन रिफ्लेक्स तथा ऑक्सीटोसिन द्वारा होता है; प्रथम दुग्ध कोलोस्ट्रम में IgA एंटीबॉडी होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मानव में शुक्राणु के एक्रोसोम (Acrosome) का निर्माण किस कोशिकांग द्वारा होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
2
28-दिवसीय आर्तव चक्र में अंडोत्सर्ग (Ovulation) मुख्य रूप से किसके प्रभाव में होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
3
मानव में वास्तविक निषेचन (Fertilization) कहाँ संपन्न होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
4
प्रसव के बाद प्रथम स्तन दुग्ध (Colostrum) में कौन-सी प्रतिरक्षी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
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