क. पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं संघर्ष:
एक संभ्रांत परिवार की मां प्राचीन कुलीन संस्कारों और परंपराओं की प्रबल समर्थक है। उसका बड़ा पुत्र अविनाश अपनी पसंद से एक विजातीय (बंगाली) कन्या उमा से प्रेम-विवाह कर लेता है। रूढ़िवादी मां इसे अपने संस्कारों का अपमान मानती है और अविनाश को घर से निष्कासित कर देती है। छोटा बेटा अतुल अपनी मां और बड़े भाई के बीच पिसता रहता है।
ख. चरमोत्कर्ष एवं हृदय-परिवर्तन:
- अविनाश गंभीर रूप से हैजे (कॉलरा) का शिकार हो जाता है और जीवन-मृत्यु के बीच झूलता है।
- उमा बिना सोए, बिना खाए-पिए दिन-रात एक करके अपने पति की सेवा करती है और अपने प्राणों की बाजी लगाकर अविनाश को मौत के मुंह से खींच लाती है। सेवा करते-करते उमा स्वयं बीमार पड़ जाती है।
- जब मां को पता चलता है कि जिस विजातीय बहू को उसने ठुकरा दिया था, उसने अपने पति के प्राण बचाने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, तो मां की ममता की अंतःसलिला फूट पड़ती है।
- मां के मन में प्राचीन "संस्कारों" और मातृत्व की "भावना" के बीच भीषण द्वंद्व होता है। अंततः भावना की विजय होती है। मां कहती है: "संस्कार भावना के आगे हार गए... मैं अपनी बहू को घर लाऊंगी।"