14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को संविधान सभा के विशेष सत्र में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण 'भाग्यवधू से चिर-प्रतीक्षित भेंट' (Tryst with Destiny) दिया। स्वतंत्र भारत के सामने 3 विकट चुनौतियाँ थीं:
| चुनौती | प्रकृति एवं स्वरूप | समाधान का मार्ग |
|---|---|---|
| 1. एकता एवं अखंडता की चुनौती | विविध भाषाओं, धर्मों, जातियों और संस्कृतियों से भरे भारत को एक सूत्र में बांधना तथा क्षेत्रीय अलगाववाद को रोकना। | संवैधानिक संघवाद और विविधता का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय पहचान का निर्माण। |
| 2. लोकतंत्र की स्थापना की चुनौती | संविधान में मौलिक अधिकार और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार देकर वास्तविक बहुदलीय चुनावी लोकतंत्र को जमीन पर उतारना। | संसदीय शासन प्रणाली और स्वतंत्र चुनाव आयोग का गठन। |
| 3. समतामूलक विकास एवं जनकल्याण | केवल कुछ वर्गों का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज (विशेषकर गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों) का आर्थिक उत्थान करना और गरीबी मिटाना। | कल्याणकारी राज्य, राज्य के नीति निदेशक तत्व और पंचवर्षीय योजनाएं। |