भारतीय मॉडल का मूल दर्शन: भारत का दृष्टिकोण यूरोपीय देशों जैसा नहीं है जहाँ विविधता को राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा माना जाता था। भारत ने 'विविधता में एकता' के सिद्धांत को अपनाया—अर्थात क्षेत्रीय आकांक्षाओं को दबाने के बजाय संवैधानिक स्वायत्तता और लोकतांत्रिक बातचीत द्वारा हल करना।
| राज्य / क्षेत्र | मुख्य तनाव का मुद्दा | संवैधानिक / कूटनीतिक समाधान |
|---|---|---|
| जम्मू और कश्मीर | विशेष स्वायत्तता की मांग, सीमा पार आतंकवाद और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता। | 1947 विलय पत्र, अनुच्छेद 370 (5 अगस्त 2019 को निष्प्रभावी कर 2 केंद्र शासित प्रदेश—J&K और लद्दाख बनाए गए)। |
| पंजाब | जल बंटवारा, चंडीगढ़ का हस्तांतरण, स्वायत्तता (आनंदपुर साहिब प्रस्ताव 1973) और उग्रवाद। | ऑपरेशन ब्लू स्टार (जून 1984); 1985 का राजीव गांधी-हरचंद सिंह लोंगोवाल पंजाब समझौता। |
| तमिलनाडु (द्रविड़ आंदोलन) | उत्तर भारतीय/हिंदी भाषा का विरोध और क्षेत्रीय पहचान। | ई. वी. रामास्वामी 'पेरियार' द्वारा आत्म-सम्मान आंदोलन; DMK का उदय और द्वि-भाषी फॉर्मूला। |