Follow Us
Select Medium / माध्यम चुनें:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
JAC • Class XII • Political Science • Ch 10
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Challenges of Nation Building

झारखण्ड बोर्ड (JAC) कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के 'स्वतंत्र भारत में राजनीति' भाग का प्रथम अध्याय "राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ" (Challenges of Nation Building) 14-15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के समय भारत के समक्ष उपस्थित तीन प्रमुख चुनौतियों (एकता व अखंडता, लोकतंत्र की स्थापना, समतामूलक विकास), देश के रक्तरंजित विभाजन और शरणार्थी पुनर्वास, 565 देशी रियासतों के भारत संघ में ऐतिहासिक एकीकरण (सरदार वल्लभभाई पटेल की कूटनीति, जूनागढ़, हैदराबाद व मणिपुर का विलय) तथा भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन (राज्य पुनर्गठन आयोग - SRC 1953) का विस्तृत प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत करता है।

🇮🇳 क्या आप जानते हैं: 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को जब दुनिया सो रही थी, तब भारत के सामने 565 अलग-अलग देश बनने का भयानक खतरा मंडरा रहा था?

पंडित नेहरू ने 'भाग्यवधू से चिर-प्रतीक्षित भेंट' (Tryst with Destiny) भाषण दिया। लेकिन आजादी के साथ ही देश ने विभाजन का वह दंश झेला जिसमें 80 लाख लोग बेघर हुए और 5 से 10 लाख निर्दोषों का कत्लेआम हुआ! अंग्रेजों ने 565 राजा-रजवाड़ों को छूट दे दी थी कि वे चाहें तो भारत में मिलें, पाकिस्तान में जाएं या खुद को स्वतंत्र देश घोषित कर लें। त्रावणकोर और हैदराबाद के निजाम ने तुरंत स्वतंत्र रहने का ऐलान कर दिया! यदि उस समय 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी सूझबूझ और दृढ़ता न दिखाई होती, तो आज भारत एक देश नहीं बल्कि यूरोप की तरह दर्जनों छोटे-छोटे देशों का टुकड़ा होता! सरदार पटेल ने इन 565 रियासतों को कैसे जोड़ा? भाषा के आधार पर आंध्र प्रदेश के लिए पोट्टी श्रीरामुलु के 56 दिन के अनशन की क्या कहानी है? आइए इस अध्याय में विस्तार से समझें।

Why This Chapter Matters

भारत की राष्ट्रीय एकता, संविधान के संघीय ढांचे, भाषाई राज्यों के गठन और कश्मीर व पूर्वोत्तर के ऐतिहासिक संदर्भ को समझने के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। बोर्ड परीक्षा में राष्ट्र-निर्माण की 3 चुनौतियाँ, विभाजन के परिणाम, रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका और राज्य पुनर्गठन आयोग (1953) पर बार-बार प्रश्न आते हैं।

Before You Begin (Prerequisites)

  • 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और द्वि-राष्ट्र सिद्धांत (Two Nation Theory)।
  • ब्रिटिश भारत के प्रांत बनाम देशी रियासतें (Princely States)।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • स्वतंत्रता के समय भारत के समक्ष तीन प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • द्वि-राष्ट्र सिद्धांत, विभाजन की त्रासदी और शरणार्थी समस्या के सामाजिक-आर्थिक परिणामों की व्याख्या कर सकेंगे।
  • देशी रियासतों के विलय में सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक भूमिका और 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (Instrument of Accession) को समझ सकेंगे।
  • हैदराबाद (ऑपरेशन पोलो) और मणिपुर के भारतीय संघ में विलय की प्रक्रिया का वर्णन कर सकेंगे।
  • पोट्टी श्रीरामुलु के बलिदान और राज्य पुनर्गठन आयोग (1953) की सिफारिशों का मूल्यांकन कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. आजादी के समय भारत के समक्ष तीन प...
2 2. देश का विभाजन: त्रासदी, प्रक्रिय...
3 3. 565 देशी रियासतों का विलय एवं सर...
4 4. भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठ...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. आजादी के समय भारत के समक्ष तीन प्रमुख चुनौतियाँ (Three Challenges of Nation Building)

14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को संविधान सभा के विशेष सत्र में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण 'भाग्यवधू से चिर-प्रतीक्षित भेंट' (Tryst with Destiny) दिया। स्वतंत्र भारत के सामने 3 विकट चुनौतियाँ थीं:

चुनौतीप्रकृति एवं स्वरूपसमाधान का मार्ग
1. एकता एवं अखंडता की चुनौतीविविध भाषाओं, धर्मों, जातियों और संस्कृतियों से भरे भारत को एक सूत्र में बांधना तथा क्षेत्रीय अलगाववाद को रोकना।संवैधानिक संघवाद और विविधता का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय पहचान का निर्माण।
2. लोकतंत्र की स्थापना की चुनौतीसंविधान में मौलिक अधिकार और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार देकर वास्तविक बहुदलीय चुनावी लोकतंत्र को जमीन पर उतारना।संसदीय शासन प्रणाली और स्वतंत्र चुनाव आयोग का गठन।
3. समतामूलक विकास एवं जनकल्याणकेवल कुछ वर्गों का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज (विशेषकर गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों) का आर्थिक उत्थान करना और गरीबी मिटाना।कल्याणकारी राज्य, राज्य के नीति निदेशक तत्व और पंचवर्षीय योजनाएं।

2. देश का विभाजन: त्रासदी, प्रक्रिया और परिणाम (Partition of India: Consequences)

द्वि-राष्ट्र सिद्धांत (Two-Nation Theory): मुस्लिम लीग (मुहम्मद अली जिन्ना) ने यह प्रतिपादित किया कि भारत किसी एक कौम का नहीं बल्कि दो कौमों—हिंदू और मुस्लिम—का देश है, अतः मुसलमानों के लिए अलग देश 'पाकिस्तान' होना चाहिए।

विभाजन के 4 प्रमुख परिणाम:

  1. सांप्रदायिक हिंसा और नरसंहार: धर्म के नाम पर लाहौर, अमृतसर, कोलकाता और दिल्ली में भीषण दंगे हुए; अनुमानतः 5 से 10 लाख लोग मारे गए।
  2. इतिहास का सबसे बड़ा और दर्दनाक स्थानांतरण: लगभग 80 लाख लोगों को सीमा के आर-पार अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़कर शरणार्थी शिविरों में जाना पड़ा।
  3. महिलाओं पर अत्याचार: हजारों महिलाओं का अपहरण हुआ, जबरन धर्मांतरण और शादियां हुईं; कई परिवारों ने 'कुल की इज्जत' के नाम पर अपनी ही बेटियों को मार डाला।
  4. संपत्ति और संसाधनों का विभाजन: न केवल जमीन और रेल लाइनों का, बल्कि सरकारी कुर्सियों, मेजों, टाइपराइटरों और पुलिस बैंड तक का बंटवारा हुआ।

3. 565 देशी रियासतों का विलय एवं सरदार पटेल (Integration of Princely States)

ब्रिटिश भारत दो भागों में बंटा था: ब्रिटिश प्रांत और 565 देशी रियासतें। अंग्रेजों ने घोषणा की कि आजादी के बाद ये रियासतें भारत में मिल सकती हैं, पाकिस्तान में जा सकती हैं या स्वतंत्र रह सकती हैं।

भारत के उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल (लौह पुरुष) ने ऐतिहासिक कूटनीति और दृढ़ता से अधिकांश राजाओं को 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (Instrument of Accession) सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर भारत में शामिल किया।

कठिन रियासतशासकविलय की प्रक्रिया
हैदराबादनिजाम मीर उस्मान अलीनिजाम के अर्ध-सैनिक बल (रजाकार) द्वारा जनता पर अत्याचार करने पर सितंबर 1948 में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन पोलो' (सैन्य कार्रवाई) कर हैदराबाद को भारत में मिलाया।
मणिपुरमहाराजा बोधचंद्र सिंहजून 1948 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर भारत का पहला चुनाव मणिपुर में हुआ। बाद में सितंबर 1949 में भारत में पूर्ण विलय हुआ।
जूनागढ़नवाब (जो पाकिस्तान जाना चाहता था)जनता के विद्रोह और फरवरी 1948 में हुए जनमत संग्रह (Plebiscite) के आधार पर भारत में विलय।

4. भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन (Reorganisation of States & SRC 1953)

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने वादा किया था कि आजादी के बाद भाषा के आधार पर राज्यों का गठन होगा। लेकिन विभाजन के बाद केंद्र को डर था कि इससे देश टूट सकता है।

  • आंध्र प्रदेश का गठन: मद्रास प्रांत के तेलुगु भाषी क्षेत्रों को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर स्वतंत्रता सेनानी पोट्टी श्रीरामुलु ने अनशन शुरू किया और 56 दिनों के भूख हड़ताल के बाद 15 दिसंबर 1952 को उनका निधन हो गया। भारी जन-विद्रोह के बाद दिसंबर 1952 में प्रधानमंत्री नेहरू ने आंध्र प्रदेश को भाषा के आधार पर पहला राज्य घोषित किया (गठन: अक्टूबर 1953)।
  • राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC 1953): केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति फजल अली की अध्यक्षता में 1953 में आयोग बनाया (अन्य सदस्य: के. एम. पणिक्कर और हृदयनाथ कुंजरू)।
  • राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956: आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1956 में संसद ने कानून पारित किया जिसके तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।

Key Constitutional Articles, Doctrines & Political Formulas

14-15 Aug 1947
भारत की स्वतंत्रता एवं विभाजन; पं. नेहरू का 'भाग्यवधू से चिर-प्रतीक्षित भेंट' भाषण।
565
स्वतंत्रता के समय भारत में देशी रियासतों (Princely States) की कुल संख्या।
Sept 1948
ऑपरेशन पोलो - हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में सैन्य कार्रवाई द्वारा विलय।
1953
भाषा के आधार पर पहले राज्य (आंध्र प्रदेश) का गठन एवं फजल अली की अध्यक्षता में SRC की स्थापना।
1956
राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित (14 राज्य + 6 केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आए)।

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (JAC Board 5 Marks)
Step-by-Step Solution:
उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारत में 565 देशी रियासतें थीं जिनके स्वतंत्र रहने के अधिकार से देश के खंड-खंड होने का खतरा था। सरदार पटेल ने निम्नलिखित कुशल रणनीतियों से देश को एकजुट किया:
1. दृढ़ कूटनीति और राष्ट्रभक्ति की अपील: उन्होंने राजाओं को समझाया कि एक साझा संविधान और भारतीय संघ में शामिल होना ही उनके और उनकी प्रजा के दीर्घकालिक हित में है।
2. लचीला दृष्टिकोण एवं प्रिवी पर्स: उन्होंने स्वायत्तता के मामलों में लचीलापन दिखाया और राजाओं के लिए 'प्रिवी पर्स' (राजभत्ता) की व्यवस्था की।
3. कठोर निर्णय लेने का साहस: जूनागढ़ में जनमत संग्रह, हैदराबाद में 'ऑपरेशन पोलो' द्वारा रजाकारों का दमन, और मणिपुर में विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर उन्होंने अलगाववाद को जड़ से खत्म किया।
निष्कर्ष: सरदार पटेल के इस अदम्य योगदान के कारण ही उन्हें 'भारत का लौह पुरुष' और 'भारत का बिस्मार्क' कहा जाता है।
Example 2
राज्य पुनर्गठन आयोग (1953) के गठन के कारण और इसकी प्रमुख सिफारिशें क्या थीं? (JAC Board 4 Marks)
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
गठन का कारण: पोट्टी श्रीरामुलु के अनशन और मृत्यु के बाद भाषाई आधार पर आंध्र प्रदेश के गठन से देश के अन्य भाषाई क्षेत्रों में भी अलग राज्यों की तीव्र मांग उठने लगी।
प्रमुख सिफारिशें:
1. राज्यों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण वहाँ बोली जाने वाली भाषा और प्रशासनिक सुविधा के आधार पर होना चाहिए।
2. इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम बना जिसके तहत देश में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश स्थापित किए गए।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

आंध्र प्रदेश को भाषा के आधार पर पहला राज्य न मानकर किसी अन्य राज्य का नाम लिखना।

Scientific Reality & Correction

स्वतंत्र भारत में भाषा के आधार पर बनने वाला पहला राज्य आंध्र प्रदेश (1953) था, जो तेलुगु भाषियों के लिए मद्रास प्रांत से अलग हुआ था।

Common Misconception

'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' को अंतिम संविधान मानना।

Scientific Reality & Correction

इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (Instrument of Accession) वह कानूनी सहमति पत्र था जिस पर हस्ताक्षर करके देशी रियासतों ने भारत संघ में विलय की औपचारिक सहमति दी थी।
Finished Studying This Chapter?
READY TO PRACTICE?

Timed CBT Practice Tests (Exam Simulator)

Put your concepts to the test with official curriculum-aligned Foundation and Advanced practice tests. Get instant accuracy scores, time metrics, and step-by-step verified explanations.