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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Political Science • अध्याय 8
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन (Environment and Natural Resources)

झारखण्ड बोर्ड (JAC) कक्षा 12 राजनीति विज्ञान का अष्टम अध्याय "पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन" (Environment and Natural Resources) वैश्विक पर्यावरण संकट, 1992 के ऐतिहासिक रियो पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit), एजेंडा-21, 'साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व' (CBDR) के सिद्धांत, क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol), वैश्विक संपदा (Global Commons) के संरक्षण तथा खनिज तेल व स्वच्छ जल जैसे रणनीतिक संसाधनों की भू-राजनीति का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें पर्यावरण संरक्षण में मूलनिवासियों (Indigenous Peoples) और भारत के कानूनी-संवैधानिक योगदान का भी विश्लेषण शामिल है।

🌍 क्या आप जानते हैं: 1992 में जब ब्राजील के रियो डी जेनेरो में 170 देशों के नेता मिले, तो अमीर देशों और गरीब देशों के बीच पर्यावरण को लेकर भारी झगड़ा क्यों हो गया?

उत्तरी गोलार्ध के अमीर देशों (अमेरिका, यूरोप) ने 150 सालों तक अंधाधुंध फैक्ट्रियां चलाकर वायुमंडल में कार्बन भर दिया। लेकिन जब पृथ्वी गर्म होने लगी और ओजोन परत में छेद हो गया, तो वे गरीब विकासशील देशों से कहने लगे कि 'तुम भी अपनी फैक्ट्रियां बंद करो और पेड़ लगाओ!' इस पर भारत और विकासशील देशों ने कहा—'प्रदूषण तुमने ज्यादा फैलाया है, तो बिल भी तुम्हें ही ज्यादा भरना होगा!' इसे राजनीति में 'साझा परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियां' (CBDR) कहा गया। पानी और तेल के लिए भविष्य में युद्ध क्यों हो सकते हैं? जंगल और जमीन की रक्षा में हमारे आदिवासी भाई-बहनों का क्या योगदान है? आइए इस अध्याय में विस्तार से समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

ग्लोबल वार्मिंग, पेरिस जलवायु समझौता, कार्बन क्रेडिट, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास (Sustainable Development) को समझने के लिए पर्यावरण राजनीति का ज्ञान अनिवार्य है। बोर्ड परीक्षा में रियो सम्मेलन, क्योटो प्रोटोकॉल, साझी संपदा और मूलनिवासियों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • ग्रीनहाउस प्रभाव, ओजोन परत का क्षरण और वनों की कटाई के बुनियादी वैज्ञानिक कारण।
  • विकसित देश बनाम विकासशील देशों का आर्थिक अंतर।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पर्यावरण के क्षरण के प्रमुख वैश्विक कारणों (कृषि योग्य भूमि की कमी, जल प्रदूषण, ओजोन क्षरण) की पहचान कर सकेंगे।
  • 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit), रियो घोषणापत्र और एजेंडा-21 के मुख्य प्रस्तावों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • 'साझी संपदा' (Global Commons) और 'साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व' (CBDR) के सिद्धांत को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • क्योटो प्रोटोकॉल (1997) और भारत द्वारा 2002 में इसके अनुमोदन के महत्व का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • संसाधन भू-राजनीति (खनिज तेल और जल युद्ध) तथा मूलनिवासियों (Indigenous People) के अधिकारों की समीक्षा कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. वैश्विक पर्यावरण संकट एवं रियो प...
2 2. साझी संपदा एवं साझा परंतु विभेदि...
3 3. संसाधन भू-राजनीति एवं मूलनिवासिय...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. वैश्विक पर्यावरण संकट एवं रियो पृथ्वी सम्मेलन 1992 (Earth Summit & Agenda 21)

पर्यावरण के मुद्दे वैश्विक राजनीति में क्यों आए? 1972 में 'क्लब ऑफ रोम' ने 'लिमिट्स टू ग्रोथ' (Limits to Growth) नामक पुस्तक प्रकाशित की। 1987 में ब्रंटलैंड रिपोर्ट 'हमारा साझा भविष्य' (Our Common Future) आई जिसने सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा दी।

ऐतिहासिक सम्मेलनस्थान एवं वर्षप्रमुख परिणाम एवं उपलब्धियां
रियो पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit)जून 1992, रियो डी जेनेरो (ब्राजील)170 देश, हजारों NGOs और बहुराष्ट्रीय निगम शामिल हुए। जलवायु परिवर्तन (UNFCCC), जैव विविधता (CBD) और वानिकी के सिद्धांतों पर ऐतिहासिक समझौते।
एजेंडा 21 (Agenda 21)1992 (रियो सम्मेलन)21वीं सदी में सतत विकास प्राप्त करने हेतु विकास और पर्यावरण संरक्षण की 21 सूत्रीय वैश्विक कार्ययोजना।
क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol)1997 (क्योटो, जापान)औद्योगिक (विकसित) देशों द्वारा ग्रीनहाउस गैसों (CO2, मीथेन) के उत्सर्जन में बाध्यकारी कटौती का अंतर्राष्ट्रीय समझौता। भारत ने 2002 में इस पर हस्ताक्षर किए।

2. साझी संपदा एवं साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व (Global Commons & CBDR)

साझी संपदा (Global Commons): वे संसाधन जिन पर किसी एक देश का संप्रभु अधिकार नहीं होता, बल्कि संपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का साझा अधिकार व दायित्व होता है। उदाहरण: (1) पृथ्वी का वायुमंडल, (2) अंटार्कटिका महाद्वीप, (3) समुद्री सतह/गहरा समुद्र, (4) बाहरी अंतरिक्ष।

⚖️ साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व (Common But Differentiated Responsibilities - CBDR):
रियो घोषणापत्र के सिद्धांत-7 के अनुसार, पृथ्वी के पर्यावरण की रक्षा करना सभी देशों की 'साझा जिम्मेदारी' है, लेकिन विकसित देशों ने ऐतिहासिक रूप से औद्योगीकरण के माध्यम से सर्वाधिक प्रदूषण फैलाया है और उनके पास अधिक वित्तीय व तकनीकी संसाधन हैं। अतः उत्सर्जन में कटौती करने और विकासशील देशों को वित्तीय सहायता देने का 'अधिक दायित्व' विकसित देशों का है, जबकि विकासशील देशों की पहली प्राथमिकता गरीबी उन्मूलन है।

3. संसाधन भू-राजनीति एवं मूलनिवासियों के अधिकार (Resource Geopolitics & Indigenous Rights)

संसाधन भू-राजनीति (Resource Geopolitics):

  • खनिज तेल (Petroleum): वैश्विक अर्थव्यवस्था का रक्त। विश्व के ज्ञात तेल भंडार का अधिकांश भाग मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) में केंद्रित है। खाड़ी युद्धों और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का मुख्य कारण तेल भंडारों पर नियंत्रण रहा है।
  • जल युद्ध (Water Wars): 21वीं सदी में स्वच्छ मीठे पानी के साझा स्रोतों (नदियों जैसे नील, जॉर्डन, यूफ्रेट्स, सिंधु) को लेकर देशों के बीच युद्ध की आशंका को 'जल युद्ध' कहा गया है।

मूलनिवासी (Indigenous Peoples) और उनके अधिकार:

  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मूलनिवासी वे लोग हैं जो किसी भूभाग पर उस समय से रहते आ रहे हैं जब वहाँ दूसरे मूल या संस्कृति के लोग नहीं पहुंचे थे। भारत में इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (आदिवासी) कहा जाता है।
  • मूलनिवासी अपनी जल, जंगल और जमीन (प्राकृतिक आवास) पर पारंपरिक अधिकारों, सांस्कृतिक स्वायत्तता और विस्थापन से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। 1975 में 'वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इंडिजिनस पीपल्स' का गठन हुआ।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

1972
क्लब ऑफ रोम की पुस्तक 'लिमिट्स टू ग्रोथ' (Limits to Growth) का प्रकाशन।
1987
ब्रंटलैंड आयोग की रिपोर्ट 'हमारा साझा भविष्य' (Our Common Future) - सतत विकास की परिभाषा।
June 1992
रियो पृथ्वी सम्मेलन (Rio Earth Summit) - एजेंडा 21 एवं CBDR सिद्धांत पारित।
1997
क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) अंगीकृत (ग्रीनहाउस गैस कटौती संधि)।
2002
भारत द्वारा क्योटो प्रोटोकॉल का औपचारिक अनुमोदन (Ratification)।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
'साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व' (CBDR) से क्या अभिप्राय है? इसे पर्यावरण संरक्षण में क्यों अपनाया गया? (JAC Board 5 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: 'साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व' का अर्थ है कि वैश्विक पर्यावरण की रक्षा करना पूरी दुनिया के सभी देशों का साझा कर्तव्य है, लेकिन ऐतिहासिक कारणों और आर्थिक क्षमता के आधार पर जिम्मेदारी का स्तर अलग-अलग होना चाहिए।
अपनाने के कारण:
1. ऐतिहासिक प्रदूषण: विकसित देशों ने पिछले 150 वर्षों के अनियंत्रित औद्योगीकरण से वायुमंडल में सर्वाधिक कार्बन और ग्रीनहाउस गैसें छोड़ी हैं।
2. संसाधनों में अंतर: विकसित देशों के पास आधुनिक हरित तकनीक और विपुल वित्तीय संसाधन हैं, जबकि विकासशील देशों के पास संसाधनों का अभाव है।
3. विकास की प्राथमिकता: विकासशील देशों की पहली आवश्यकता अपने नागरिकों को गरीबी और भुखमरी से निकालना है, इसलिए उन पर विकसित देशों जैसी सख्त उत्सर्जन सीमाएं नहीं थोपी जा सकतीं।
उदाहरण 2
वैश्विक संपदा (Global Commons) क्या है? इसके कोई चार उदाहरण दीजिए। (JAC Board 3 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: वैश्विक संपदा वे प्राकृतिक संसाधन और क्षेत्र हैं जिन पर किसी एक राष्ट्र की संप्रभुता नहीं होती, बल्कि संपूर्ण मानवता का साझा अधिकार और प्रबंधन होता है।
चार प्रमुख उदाहरण:
1. पृथ्वी का वायुमंडल (Earth's Atmosphere)
2. अंटार्कटिका महाद्वीप (Antarctica)
3. समुद्री सतह व अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र (Ocean Floor)
4. बाहरी अंतरिक्ष (Outer Space)

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एजेंडा 21 को कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एजेंडा 21 सतत विकास प्राप्त करने के लिए 1992 के रियो सम्मेलन में स्वीकृत एक स्वैच्छिक वैश्विक कार्ययोजना (Non-binding Action Plan) है, न कि कोई दंडात्मक कानून।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

क्योटो प्रोटोकॉल में भारत पर भी ग्रीनहाउस गैसों की कटौती बाध्यकारी मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

क्योटो प्रोटोकॉल में भारत और चीन जैसे विकासशील देशों को अनिवार्य कटौती से छूट दी गई थी, क्योंकि उनका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन विकसित देशों की तुलना में बहुत कम था।
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