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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Political Science • अध्याय 7
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

समकालीन विश्व में सुरक्षा (Security in the Contemporary World)

झारखण्ड बोर्ड (JAC) कक्षा 12 राजनीति विज्ञान का सप्तम अध्याय "समकालीन विश्व में सुरक्षा" (Security in the Contemporary World) सुरक्षा के पारंपरिक दृष्टिकोण (बाहरी व आंतरिक खतरे, सैन्य संतुलन, सामूहिक सुरक्षा, अपरोध) तथा गैर-पारंपरिक दृष्टिकोण (मानव सुरक्षा, वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद, महामारियां, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक गरीबी) का संपूर्ण तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें भारत की चार-घटक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का भी गहन विश्लेषण शामिल है।

🛡️ क्या आप जानते हैं: 1990 के बाद दुनिया में युद्धों से जितने लोग नहीं मरे, उससे कहीं ज्यादा लोग मलेरिया, एड्स और गरीबी से मारे गए?

जब हम 'सुरक्षा' शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में बंदूकें, तोपें, सीमाएं और सेनाएं आती हैं। इसे 'पारंपरिक सुरक्षा' कहते हैं। लेकिन आज की 21वीं सदी में दुनिया को सबसे बड़ा खतरा सीमाओं के पार से नहीं, बल्कि ऐसे खतरों से है जिसका कोई पासपोर्ट या वीजा नहीं होता—जैसे वैश्विक आतंकवाद, कोविड-19 जैसी घातक महामारियां, ग्लोबल वार्मिंग और साइबर हमले! जब देश के अंदर आम नागरिक भूख, बीमारी और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित नहीं हैं, तो क्या देश सुरक्षित कहला सकता है? 'मानव सुरक्षा' (Human Security) क्या है और भारत अपनी सुरक्षा के लिए कौन से 4 तरीके अपनाता है? आइए इस अध्याय में विस्तार से समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

राष्ट्रीय संप्रभुता, आतंकवाद-रोधी रणनीतियों, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को समझने के लिए आधुनिक सुरक्षा अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। बोर्ड परीक्षा में पारंपरिक बनाम गैर-पारंपरिक सुरक्षा के अंतर, नए खतरों और भारत की सुरक्षा रणनीति पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • राष्ट्र-राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की अवधारणा।
  • शीतयुद्ध में महाशक्तियों के बीच सैन्य संतुलन।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • सुरक्षा की बुनियादी परिभाषा (खतरों से आजादी / Freedom from threats) को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • पारंपरिक सुरक्षा की बाहरी (अपरोध, रक्षा, शक्ति संतुलन, गठबंधन) और आंतरिक धारणाओं को समझ सकेंगे।
  • गैर-पारंपरिक सुरक्षा (मानव सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा) के नए खतरों का वर्गीकरण कर सकेंगे।
  • आतंकवाद, मानवाधिकार हनन, वैश्विक निर्धनता, शरणार्थी संकट और महामारियों के प्रभाव का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • भारत की चार-घटक सुरक्षा रणनीति का आलोचनात्मक मूल्यांकन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. सुरक्षा की पारंपरिक धारणा: बाहरी...
2 2. सुरक्षा की गैर-पारंपरिक धारणा: न...
3 3. भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. सुरक्षा की पारंपरिक धारणा: बाहरी एवं आंतरिक (Traditional Notion of Security)

सुरक्षा का मूल अर्थ: खतरों से मुक्ति (Freedom from threats)। पारंपरिक सुरक्षा का मुख्य सरोकार सैन्य खतरों और राज्य की संप्रभुता व अखंडता की रक्षा से होता है।

पारंपरिक सुरक्षा के घटकअर्थ एवं व्यावहारिक रणनीति
1. अपरोध (Deterrence)युद्ध की आशंका को रोकना; विरोधी को यह जताना कि युद्ध की कीमत जीत के लाभ से कहीं अधिक विनाशकारी होगी।
2. रक्षा (Defense)यदि युद्ध छिड़ ही जाए, तो हमलावर को हराना और उसके उद्देश्यों को विफल करना।
3. शक्ति संतुलन (Balance of Power)पड़ोसी या प्रतिद्वंद्वी देश के मुकाबले अपनी आर्थिक व सैन्य शक्ति को लगातार मजबूत रखना।
4. गठबंधन निर्माण (Alliance Building)समान विचारधारा या हितों वाले देशों के साथ सैन्य संधि करना (जैसे NATO)।
5. निःशस्त्रीकरण व अस्त्र नियंत्रणविनाशकारी हथियारों (परमाणु, जैविक, रासायनिक) के निर्माण और प्रयोग को संधियों द्वारा सीमित करना (BWC, CWC, NPT)।

2. सुरक्षा की गैर-पारंपरिक धारणा: नए खतरे (Non-Traditional Security: New Threats)

गैर-पारंपरिक सुरक्षा: इसमें केवल राज्यों की सुरक्षा नहीं, बल्कि व्यक्तियों और पूरी मानव जाति की सुरक्षा (Human Security & Global Security) को केंद्र में रखा जाता है। इसे 'अभाव से मुक्ति' (Freedom from Want) और 'भय से मुक्ति' (Freedom from Fear) कहा जाता है।

नया वैश्विक खतरास्वरूप एवं वैश्विक प्रभाव
1. आतंकवाद (Terrorism)राजनीतिक या धार्मिक लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु निर्दोष नागरिकों पर सुनियोजित हिंसा व भय पैदा करना (उदा. 9/11 हमला, 26/11 मुंबई हमला)।
2. मानवाधिकारों का हननजातीय संहार, तानाशाही उत्पीड़न और नागरिक अधिकारों का हनन (उदा. रवांडा नरसंहार, म्यांमार रोहिंग्या संकट)।
3. वैश्विक निर्धनता एवं असमानताउत्तरी (अमीर) और दक्षिणी (गरीब) गोलार्ध के बीच गहरी खाई; कुपोषण, भुखमरी और अशिक्षा।
4. शरणार्थी एवं प्रवासन संकटयुद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या उत्पीड़न के कारण लाखों लोगों का अपने देश से पलायन।
5. महामारियां (Epidemics)बर्ड फ्लू, एचआईवी-एड्स, इबोला और कोविड-19 जैसी संक्रामक बीमारियां जो सीमाओं को नहीं मानतीं।
6. जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंगसमुद्र स्तर में वृद्धि, ग्लेशियरों का पिघलना और अत्यधिक मौसमी आपदाएं।

3. भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के चार घटक (India's Security Strategy)

भारत ने अपनी संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि की रक्षा हेतु एक व्यापक चार-घटक सुरक्षा रणनीति अपनाई है:

  1. सैन्य क्षमता का सुदृढ़ीकरण: पड़ोसी देशों (पाकिस्तान व चीन) से युद्धों के अनुभव के आधार पर आधुनिक मिसाइलों, परमाणु निवारक (1974 व 1998 पोखरण परीक्षण) और तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण।
  2. अंतर्राष्ट्रीय नियमों व संस्थाओं को मजबूत करना: संयुक्त राष्ट्र, गुटनिरपेक्षता (NAM), एशियाई एकता, वैश्विक निःशस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का निरंतर समर्थन।
  3. आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता: पूर्वोत्तर (नागालैंड, मिजोरम), कश्मीर और पंजाब में अलगाववादी आंदोलनों का लोकतांत्रिक बातचीत और संविधान के दायरे में समाधान।
  4. तीव्र आर्थिक विकास एवं गरीबी उन्मूलन: ऐसी आर्थिक नीतियों को लागू करना जिससे देश से गरीबी, भुखमरी और क्षेत्रीय विषमता दूर हो और नागरिकों का जीवन स्तर सुधरे।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

1972
जैविक हथियार संधि (BWC - Biological Weapons Convention)।
1974
भारत का प्रथम भूमिगत शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण (पोखरण-I)।
1992
रासायनिक हथियार संधि (CWC - Chemical Weapons Convention)।
1998
भारत द्वारा पोखरण-II में 5 सफल परमाणु परीक्षण (परमाणु शक्ति राष्ट्र घोषित)।
Human Security
मानव सुरक्षा = भय से मुक्ति (Freedom from Fear) + अभाव से मुक्ति (Freedom from Want)।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा की अवधारणा में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए। (JAC Board 5 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
आधारपारंपरिक सुरक्षागैर-पारंपरिक सुरक्षा
सुरक्षा का केंद्रराज्य और उसकी क्षेत्रीय सीमाएं।मानव व्यक्ति और संपूर्ण मानव जाति (Human Security)।
खतरे का स्रोतविदेशी सेना, सैन्य आक्रमण, युद्ध।आतंकवाद, महामारियां, गरीबी, ग्लोबल वार्मिंग, मानवाधिकार हनन।
निपटने के साधनसैन्य शक्ति, गठबंधन, शक्ति संतुलन।वैश्विक सहयोग, गरीबी उन्मूलन, अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ, संयुक्त राष्ट्र।
उदाहरण 2
भारत की सुरक्षा रणनीति के चार प्रमुख घटकों का उल्लेख कीजिए। (JAC Board 4 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
1. सैन्य क्षमता को मजबूत करना: अपनी सीमाओं की सुरक्षा हेतु परमाणु व पारंपरिक सैन्य बलों का आधुनिकीकरण करना।
2. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को बढ़ावा: संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को सशक्त बनाकर वैश्विक शांति स्थापित करना।
3. आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान: देश के भीतर अलगाववाद, नक्सलवाद और क्षेत्रीय असंतोष को लोकतांत्रिक संवाद से दूर करना।
4. आर्थिक विकास और समानता: नागरिकों को गरीबी और भुखमरी से मुक्त कर गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सुरक्षा को केवल 'सेना और सीमा की सुरक्षा' तक सीमित मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आधुनिक राजनीति में सुरक्षा व्यापक है; इसमें सेना के अलावा मानव स्वास्थ्य, भुखमरी, पर्यावरण और मानवाधिकार (गैर-पारंपरिक सुरक्षा) भी शामिल हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

शरणार्थी (Refugee) और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति (IDP) में अंतर न समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

शरणार्थी वह है जो हिंसा/उत्पीड़न के कारण अपना देश छोड़कर दूसरे देश में शरण लेता है; जबकि IDP वह है जो अपने ही देश की सीमा के भीतर विस्थापित होता है।
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कक्षा 12 Political Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: शीतयुद्ध काल (The Cold War Era) अध्याय 2: दो ध्रुवीयता का अंत (The End of Bipolarity) अध्याय 3: विश्व राजनीति में अमेरिकी आधिपत्य (US Hegemony in World Politics) अध्याय 4: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र (Alternative Centres of Power) अध्याय 5: समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) अध्याय 6: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations) अध्याय 7: समकालीन विश्व में सुरक्षा (Security in the Contemporary World) अध्याय 8: पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन (Environment and Natural Resources) अध्याय 9: वैश्वीकरण (Globalisation) (Globalisation) अध्याय 10: राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ (Challenges of Nation Building) अध्याय 11: एक दल के प्रभुत्व का दौर (Era of One-Party Dominance) अध्याय 12: नियोजित विकास की राजनीति (Politics of Planned Development) अध्याय 13: भारत के विदेश संबंध (India's External Relations) अध्याय 14: कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियां और पुनर्स्थापना (Challenges to and Restoration of the Congress System) अध्याय 15: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (The Crisis of Democratic Order) अध्याय 16: क्षेत्रीय आकांक्षाएं (Regional Aspirations) अध्याय 17: भारतीय राजनीति: नए बदलाव (Recent Developments in Indian Politics)

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