Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Political Science • अध्याय 15
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (The Crisis of Democratic Order)

झारखण्ड बोर्ड (JAC) कक्षा 12 राजनीति विज्ञान का पंचदश अध्याय "लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट" (The Crisis of Democratic Order) 1970 के दशक के आर्थिक संकट, 1974 का गुजरात छात्र आंदोलन (नवनिर्माण आंदोलन) व बिहार छात्र आंदोलन (जयप्रकाश नारायण - JP का 'संपूर्ण क्रांति' / Total Revolution का आह्वान), 1974 की ऐतिहासिक देशव्यापी रेलवे हड़ताल (जॉर्ज फर्नांडीस), 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला (न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा), 25 जून 1975 की मध्यरात्रि को अनुच्छेद 352 के तहत 'आंतरिक अशांति' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) की घोषणा, प्रेस सेंसरशिप, मीसा (MISA) कानून, 42वां संविधान संशोधन, शाह आयोग (Shah Commission) तथा 1977 के ऐतिहासिक चुनाव में जनता पार्टी की विजय और भारतीय लोकतंत्र की लचीलापन व सीखों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

🚨 क्या आप जानते हैं: 25 जून 1975 की आधी रात को जब पूरा देश सो रहा था, तब भारत के सभी विपक्षी नेताओं को अचानक जेलों में क्यों ठूंस दिया गया और अखबारों की बिजली क्यों काट दी गई?

12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रायबरेली चुनाव को 'अवैध' घोषित कर दिया और उनके 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी! इसके जवाब में जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों लोगों के सामने सेना और पुलिस से अपील की कि 'सरकार के गैर-कानूनी आदेशों को न मानें!' बस फिर क्या था—25 जून 1975 की रात को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से देश में 'आपातकाल' (Emergency) के कागजात पर दस्तखत करवा लिए गए! मौलिक अधिकार छीन लिए गए, सुप्रीम कोर्ट के पर कतर दिए गए और प्रेस पर ताले लगा दिए गए। 21 महीने के इस काले दौर के बाद जब 1977 में चुनाव हुए तो जनता ने कैसे तानाशाहों को सत्ता से उखाड़ फेंका? आपातकाल से हमारे लोकतंत्र ने क्या 3 बड़े सबक सीखे? आइए इस अध्याय में विस्तार से समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेद 352 (आपातकाल) के सुरक्षा उपायों (44वां संशोधन) को समझने के लिए आपातकाल का अध्ययन अनिवार्य है। बोर्ड परीक्षा में आपातकाल के कारण, शाह आयोग, 1977 के चुनाव परिणाम और आपातकाल के 3 लोकतांत्रिक सबकों पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • 1971 का भारत-पाक युद्ध, बांग्लादेश शरणार्थी संकट और अंतरराष्ट्रीय तेल संकट (1973)।
  • संविधान के आपातकालीन प्रावधान (अनुच्छेद 352, 356, 360)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • 1973-75 की आर्थिक पृष्ठभूमि (महंगाई, बेरोजगारी, सूखा) और जन-असंतोष के कारणों की पहचान कर सकेंगे।
  • गुजरात नवनिर्माण आंदोलन और बिहार आंदोलन में जयप्रकाश नारायण (JP) की 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में मई 1974 की ऐतिहासिक राष्ट्रीय रेलवे हड़ताल की समीक्षा कर सकेंगे।
  • 12 जून 1975 के इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसले और 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा के घटनाक्रम को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों के हनन, निवारक नजरबंदी (MISA), प्रेस सेंसरशिप और 42वें संशोधन का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • शाह जांच आयोग (1977) के निष्कर्षों और 1977 के चुनाव में जनता पार्टी की ऐतिहासिक विजय का विश्लेषण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. आपातकाल की पृष्ठभूमि: छात्र आंदो...
2 2. 25 जून 1975 का आपातकाल: ज्यादतिय...
3 3. 1977 का चुनाव, शाह आयोग एवं लोकत...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. आपातकाल की पृष्ठभूमि: छात्र आंदोलन, रेलवे हड़ताल व न्यायिक टकराव (Background to Emergency)

1973-1975 का संकट: बांग्लादेश युद्ध के 80 लाख शरणार्थियों का बोझ, 1973 का वैश्विक तेल संकट, 30% तक महंगाई दर और औद्योगिक ठहराव ने भारी जनाक्रोश को जन्म दिया।

आंदोलन / घटनावर्ष / नेतृत्वघटनाक्रम एवं मांगें
गुजरात आंदोलन (नवनिर्माण आंदोलन)जनवरी 1974 (छात्र)खाद्यान्न व तेल की महंगाई तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन; मोरारजी देसाई के अनशन के बाद विधानसभा भंग की गई और जून 1975 में चुनाव हुए।
बिहार आंदोलन व 'संपूर्ण क्रांति'मार्च 1974, जयप्रकाश नारायण (JP)छात्रों के निमंत्रण पर जेपी ने आंदोलन का नेतृत्व संभाला और राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक व्यवस्था के आमूलचूल परिवर्तन हेतु 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का नारा दिया।
राष्ट्रव्यापी रेलवे हड़तालमई 1974, जॉर्ज फर्नांडीसबोनस और सेवा शर्तों को लेकर 20 दिनों तक देश की समूची जीवनरेखा ठप रही; सरकार ने इसे अवैध घोषित कर कठोरता से कुचला।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला12 जून 1975, न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हाराजनारायण की याचिका पर फैसला सुनाते हुए इंदिरा गांधी के 1971 के रायबरेली चुनाव को 'सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग' के आधार पर अवैध घोषित कर दिया।

2. 25 जून 1975 का आपातकाल: ज्यादतियां एवं 42वां संशोधन (Emergency & Excesses)

25 जून 1975 की रात को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) के आधार पर देशव्यापी आपातकाल लागू किया।

आपातकाल के प्रमुख परिणाम एवं दमनकारी कदम:

  • विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी: जेपी, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीस आदि हजारों नेताओं को मीसा (MISA - Maintenance of Internal Security Act) के तहत बिना मुकदमा चलाए जेलों में डाल दिया गया।
  • प्रेस सेंसरशिप: अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई; सरकारी अनुमति के बिना कोई भी खबर छापने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया (द इंडियन एक्सप्रेस और द स्टेट्समैन ने विरोध में संपादकीय पृष्ठ खाली छोड़ दिए)।
  • संजय गांधी का 5 सूत्रीय कार्यक्रम: जबरन नसबंदी (Sterilization), दिल्ली के तुर्कमान गेट पर झुग्गियों को बुलडोजर से उजाड़ना।
  • 42वां संविधान संशोधन (1976): इसे 'लघु संविधान' (Mini Constitution) कहा जाता है। इसके द्वारा लोकसभा का कार्यकाल 5 से बढ़ाकर 6 वर्ष किया गया, न्यायपालिका की शक्तियां सीमित की गईं, और प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।

3. 1977 का चुनाव, शाह आयोग एवं लोकतंत्र के सबक (1977 Elections & Lessons)

जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने अचानक आपातकाल समाप्त कर चुनाव (मार्च 1977) कराने की घोषणा की।

दल / मोर्चासीटेंऐतिहासिक महत्व
जनता पार्टी एवं सहयोगी330 सीटें (अकेले जनता पार्टी: 295)स्वतंत्र भारत में पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी; मोरारजी देसाई पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।
कांग्रेस154 सीटें (उत्तर भारत में सूपड़ा साफ)इंदिरा गांधी स्वयं रायबरेली से और संजय गांधी अमेठी से चुनाव हार गए। यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा में कांग्रेस शून्य पर सिमट गई।

शाह जांच आयोग (मई 1977): जनता पार्टी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे. सी. शाह की अध्यक्षता में आपातकाल की ज्यादतियों की जांच हेतु आयोग गठित किया।

📘 आपातकाल से भारतीय लोकतंत्र ने क्या 3 बड़े सबक सीखे?
  1. लोकतंत्र को समाप्त नहीं किया जा सकता: 21 महीने की तानाशाही के बाद भी जनता ने शांतिपूर्ण मतपेटी से लोकतंत्र को वापस बहाल कर दिया।
  2. संविधान में सुधार (44वां संशोधन 1978): अब आपातकाल केवल 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) की स्थिति में ही लगाया जा सकता है, 'आंतरिक अशांति' पर नहीं; और इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश अनिवार्य है।
  3. नागरिक स्वतंत्रता और न्यायपालिका की जागरूकता: नागरिक अधिकार संगठनों (PUCL) का जन्म हुआ और न्यायपालिका ने मूल अधिकारों की रक्षा हेतु 'जनहित याचिका' (PIL) का मार्ग प्रशस्त किया।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

12 Jun 1975
इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा द्वारा इंदिरा का चुनाव रद्द)।
25 Jun 1975
अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) की मध्यरात्रि को घोषणा।
1976
42वां संविधान संशोधन (लघु संविधान / Mini Constitution) पारित।
March 1977
छठा लोकसभा चुनाव - जनता पार्टी की विजय; मोरारजी देसाई प्रथम गैर-कांग्रेसी PM बने।
1978
44वां संविधान संशोधन - आपातकाल नियमों को अत्यधिक कठोर बनाया गया।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
1975 में आपातकाल लागू किए जाने के किन्हीं चार मुख्य कारणों का विश्लेषण कीजिए। (JAC Board 5 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण थे:
1. आर्थिक संकट और महंगाई: 1971 के बांग्लादेश युद्ध, तेल संकट और सूखे के कारण 1973-74 में देश में 30% महंगाई और भीषण बेरोजगारी थी जिससे भारी जन-असंतोष फैला।
2. गुजरात एवं बिहार छात्र आंदोलन: गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन और बिहार में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में 'संपूर्ण क्रांति' के आह्वान ने केंद्र सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी माहौल बनाया।
3. 1974 की रेलवे हड़ताल: जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में 20 दिनों की देशव्यापी रेलवे हड़ताल से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था ठप हो गई जिसे सरकार ने कानून-व्यवस्था के लिए खतरा माना।
4. इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: 12 जून 1975 को हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द किए जाने और विपक्ष द्वारा उनके इस्तीफे की मांग के बाद सरकार ने सत्ता बनाए रखने हेतु आपातकाल का सहारा लिया।
उदाहरण 2
आपातकाल के बाद भारतीय लोकतंत्र को मिले किन्हीं तीन महत्वपूर्ण सबकों का उल्लेख कीजिए। (JAC Board 3 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
1. लोकतंत्र की अमरता: भारत से लोकतंत्र को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता; संकट के बाद जनता ने मतपेटी के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूती से बहाल किया।
2. संविधान के आपातकालीन प्रावधानों का कड़ा होना: 44वें संशोधन (1978) द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द को हटाकर 'सशस्त्र विद्रोह' किया गया और मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश अनिवार्य की गई।
3. नागरिक अधिकारों व मीडिया का सशक्तीकरण: नागरिकों और अदालतों में मूल अधिकारों (अनुच्छेद 21) के प्रति गहरी सतर्कता आई और मानवाधिकार संगठनों का उदय हुआ।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

42वें और 44वें संविधान संशोधन के प्रभाव में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

42वां संशोधन (1976, इंदिरा सरकार) ने सरकार को असीमित शक्तियां दीं, जबकि 44वां संशोधन (1978, जनता पार्टी सरकार) ने आपातकाल की शक्तियों को सीमित कर लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों को मजबूत किया।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आपातकाल के समय राष्ट्रपति का नाम गलत लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले भारत के राष्ट्रपति 'फखरूद्दीन अली अहमद' थे।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

कक्षा 12 Political Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: शीतयुद्ध काल (The Cold War Era) अध्याय 2: दो ध्रुवीयता का अंत (The End of Bipolarity) अध्याय 3: विश्व राजनीति में अमेरिकी आधिपत्य (US Hegemony in World Politics) अध्याय 4: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र (Alternative Centres of Power) अध्याय 5: समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) अध्याय 6: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations) अध्याय 7: समकालीन विश्व में सुरक्षा (Security in the Contemporary World) अध्याय 8: पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन (Environment and Natural Resources) अध्याय 9: वैश्वीकरण (Globalisation) (Globalisation) अध्याय 10: राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ (Challenges of Nation Building) अध्याय 11: एक दल के प्रभुत्व का दौर (Era of One-Party Dominance) अध्याय 12: नियोजित विकास की राजनीति (Politics of Planned Development) अध्याय 13: भारत के विदेश संबंध (India's External Relations) अध्याय 14: कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियां और पुनर्स्थापना (Challenges to and Restoration of the Congress System) अध्याय 15: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (The Crisis of Democratic Order) अध्याय 16: क्षेत्रीय आकांक्षाएं (Regional Aspirations) अध्याय 17: भारतीय राजनीति: नए बदलाव (Recent Developments in Indian Politics)

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (The Crisis of Democratic Order) में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।