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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Social Science • अध्याय 14
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

वायु (Air)

कक्षा 7 भूगोल का यह अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय "वायु" (Air) हमारे ग्रह के गैसीय आवरण यानी वायुमंडल की वैज्ञानिक संरचना और मौसमी परिघटनाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस अध्याय में वायुमंडल का गैसीय संघटन (नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, कार्बन डाइऑक्साइड व ग्रीनहाउस प्रभाव), वायुमंडल की 5 परतें—क्षोभमंडल, समतापमंडल (ओजोन परत व हवाई जहाज), मध्यमंडल (उल्कापिंड), बाह्य वायुमंडल (आयनमंडल व रेडियो संचार) और बहिर्मंडल, मौसम बनाम जलवायु का अंतर, आतपन (सूर्यताप), वायुदाब की कार्यप्रणाली, तथा पवनों के प्रकार (स्थायी, मौसमी व स्थानीय पवनें जैसे लू) और वर्षा के तीन रूपों का विस्तृत व प्रामाणिक अध्ययन शामिल है।

💨 क्या आपने कभी सोचा है?

✈️ हवाई जहाज हमेशा बादलों के ऊपर ही क्यों उड़ते हैं, और अंतरिक्ष से गिरते हुए आग के गोले (उल्कापिंड) जमीन तक पहुँचने से पहले ही हवा में जलकर भस्म कैसे हो जाते हैं?

यह सब हमारी पृथ्वी के वायुमंडल की जादुई परतों का कमाल है! हमारे ऊपर 13 किलोमीटर तक का क्षोभमंडल है जहाँ वर्षा, कुहासा और आंधी-तूफान आते हैं; उसके ठीक ऊपर 50 किमी तक का शांत समतापमंडल है जहाँ पायलट हवाई जहाज उड़ाते हैं और ओजोन गैस हमें सूरज की जानलेवा किरणों से बचाती है। वहीं 80 किमी ऊपर का मध्यमंडल किसी अभेद्य ढाल की तरह अंतरिक्ष के उल्कापिंडों को जला देता है। आइए जानें कि कैसे अदृश्य हवा हमारे हर सांस और हर पल को नियंत्रित करती है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन), चक्रवात, मानसून और वायु प्रदूषण जैसी समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने के लिए वायुमंडल का अध्ययन अनिवार्य है। यह अध्याय छात्रों को मौसम के पूर्वानुमान, विमानन सुरक्षा, संचार उपग्रहों के संचालन तथा ग्रीनहाउस गैसों के वैज्ञानिक संतुलन को समझने में सक्षम बनाता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड गैसों का प्रारंभिक ज्ञान।
  • सूर्य के प्रकाश, गर्मी और तापमान की बुनियादी अवधारणा।
  • हवा के चलने (पवन) और वर्षा का सामान्य अनुभव।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • वायुमंडल के गैसीय संघटन (नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, CO2) और ग्रीनहाउस प्रभाव को समझना।
  • वायुमंडल की 5 परतों—क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, बाह्य वायुमंडल और बहिर्मंडल की ऊंचाई व विशेषताओं की तुलना करना।
  • मौसम (Weather) और जलवायु (Climate) के मध्य मौलिक अंतर को स्पष्ट करना।
  • आतपन (सूर्यताप / Insolation) और वायुदाब (Air Pressure) के वितरण का विश्लेषण करना।
  • पवनों के वर्गीकरण (स्थायी पवनें, मानसूनी पवनें और स्थानीय पवनें जैसे लू) को सीखना।
  • वर्षा के तीन प्रकारों—संवहनी, पर्वतीय और चक्रवाती वर्षा की कार्यप्रणाली को समझना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. वायुमंडल का संघटन: नाइट्रोजन, ऑक...
2 2. वायुमंडल की संरचना: 5 परतें एवं...
3 3. मौसम, जलवायु, आतपन (सूर्यताप) एव...
4 4. पवनों के प्रकार एवं वर्षा के तीन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. वायुमंडल का संघटन: नाइट्रोजन, ऑक्सीजन एवं ग्रीनहाउस प्रभाव

हमारी पृथ्वी चारों ओर से वायु की एक विशाल चादर से घिरी हुई है जिसे वायुमंडल कहते हैं। वायु अनेक गैसों का मिश्रण है:

  • नाइट्रोजन (78%): वायु में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है। यह पौधों के जीवित रहने के लिए आवश्यक है। पौधे सीधे वायु से नाइट्रोजन नहीं ले सकते; मृदा और कुछ पौधों (दलहनों) की जड़ों में रहने वाले जीवाणु वायु से नाइट्रोजन लेकर उसका रूप बदलते हैं जिससे पौधे उसका उपयोग कर सकें।
  • ऑक्सीजन (21%): प्रचुरता में मिलने वाली दूसरी गैस है। मनुष्य तथा जीव-जंतु सांस लेने के लिए इसका उपयोग करते हैं। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं, जिससे इसका संतुलन बना रहता है।
  • कार्बन डाइऑक्साइड (0.03%): हरे पादप अपने भोजन के निर्माण के लिए इसका उपयोग करते हैं और ऑक्सीजन वापस छोड़ते हैं।
ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) एवं ग्लोबल वार्मिंग: कार्बन डाइऑक्साइड पृथ्वी द्वारा छोड़ी गई ऊष्मा को अंतरिक्ष में जाने से रोककर पृथ्वी को गर्म रखती है। इसे ग्रीनहाउस गैस कहते हैं। इसके बिना पृथ्वी इतनी ठंडी हो जाती कि जीवन असंभव होता। किंतु जब कारखानों, बिजलीघरों और वाहनों के धुएं से CO2 की मात्रा वायुमंडल में अत्यधिक बढ़ जाती है, तो पृथ्वी का औसत तापमान खतरनाक रूप से बढ़ने लगता है, जिसे "ग्लोबल वार्मिंग" (वैश्विक तापन) कहते हैं। इससे ध्रुवों के ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है।

2. वायुमंडल की संरचना: 5 परतें एवं उनकी विशिष्टताएं

हमारा वायुमंडल 5 परतों में विभाजित है जो पृथ्वी की सतह से आरंभ होती हैं:

परत का नाम ऊंचाई सीमा प्रमुख विशेषताएं व वैज्ञानिक महत्व
1. क्षोभमंडल (Troposphere) धरातल से औसत 13 किलोमीटर यह वायुमंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत है। हम इसी मंडल की हवा में सांस लेते हैं। मौसम की लगभग सभी परिघटनाएं—वर्षा, कुहासा (कोहरा), ओलावृष्टि एवं तूफान इसी परत के अंदर घटित होते हैं।
2. समतापमंडल (Stratosphere) 13 किमी से 50 किलोमीटर तक यह बादलों और मौसमी हलचलों से पूर्णतः मुक्त होता है, जिसके कारण यह हवाई जहाज उड़ाने के लिए सर्वोत्तम है। इसमें ओजोन गैस (Ozone Layer) की परत होती है जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV rays) को सोखकर हमारी रक्षा करती है।
3. मध्यमंडल (Mesosphere) 50 किमी से 80 किलोमीटर तक यह तीसरी परत है। अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर प्रवेश करने वाले उल्कापिंड (Meteors) वायुमंडलीय घर्षण के कारण इसी परत में जलकर भस्म हो जाते हैं।
4. बाह्य वायुमंडल (Thermosphere) 80 किमी से 400 किलोमीटर तक ऊंचाई के साथ तापमान अत्यधिक तीव्रता से बढ़ता है। इसका निचला भाग आयनमंडल (Ionosphere) कहलाता है। यह परत रेडियो संचार (Radio Waves) के लिए उत्तरदायी है; पृथ्वी से प्रसारित रेडियो तरंगें इसी परत द्वारा पुनः परावर्तित की जाती हैं।
5. बहिर्मंडल (Exosphere) 400 किमी से ऊपर अंतरिक्ष तक यह वायुमंडल की सबसे ऊपरी और सबसे पतली परत है। यहाँ वायु अत्यंत विरल होती है तथा हीलियम एवं हाइड्रोजन जैसी हल्की गैसें अंतरिक्ष में तैरती रहती हैं।

3. मौसम, जलवायु, आतपन (सूर्यताप) एवं वायुदाब

मौसम बनाम जलवायु:
  • मौसम (Weather): वायुमंडल की प्रत्येक घंटे तथा दिन-प्रतिदिन की अल्पकालिक स्थिति है। मौसम नाटकीय रूप से दिन में कई बार बदल सकता है (जैसे अचानक धूप से मूसलाधार बारिश होना)।
  • जलवायु (Climate): किसी विस्तृत भूभाग पर एक लंबे समय (लगभग 30 वर्ष या अधिक) के मौसम की औसत दशा को उस स्थान की जलवायु कहते हैं।
आतपन / सूर्यताप (Insolation):

सूर्य से आने वाली वह सौर ऊर्जा जिसे पृथ्वी रोक लेती है, आतपन कहलाती है। आतपन की मात्रा भूमध्य रेखा (Equator) से ध्रुवों की ओर घटती जाती है, क्योंकि सूर्य की किरणें ध्रुवों पर तिरछी पड़ती हैं। यही कारण है कि ध्रुव हमेशा बर्फ से ढके रहते हैं।

वायुदाब (Air Pressure) का नियम:

पृथ्वी की सतह पर वायु के भार द्वारा लगाया गया दबाव वायुदाब कहलाता है। समुद्र तल पर वायुदाब सबसे अधिक होता है और ऊंचाई पर जाने पर यह घटता जाता है। गर्म होने पर वायु ऊपर उठती है और निम्न दाब क्षेत्र (बादलयुक्त आकाश व नम मौसम) बनाती है। ठंडी वायु भारी होकर नीचे बैठती है और उच्च दाब क्षेत्र (स्पष्ट व शांत मौसम) बनाती है।

पवन का सार्वभौमिक नियम: वायु हमेशा उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर गति करती है। इस गतिशील वायु को ही पवन (Wind) कहा जाता है।

4. पवनों के प्रकार एवं वर्षा के तीन स्वरूप

पवनों को तीन प्रमुख प्रकारों में बांटा जाता है:
  1. स्थायी पवनें (Permanent Winds): व्यापारिक पवनें (Trade Winds), पछुआ पवनें (Westerlies) तथा ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ये वर्ष भर लगातार एक निश्चित दिशा में चलती रहती हैं।
  2. सामयिक / मौसमी पवनें (Seasonal Winds): ये पवनें विभिन्न ऋतुओं में अपनी दिशा बदलती रहती हैं; जैसे—भारत में ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन मानसूनी पवनें।
  3. स्थानीय पवनें (Local Winds): ये किसी छोटे क्षेत्र में वर्ष या दिन के किसी विशेष समय चलती हैं; जैसे—स्थल एवं समुद्र समीर। भारत के उत्तरी मैदानों में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली अत्यधिक गर्म व शुष्क हवा को "लू" (Loo) कहते हैं।
वर्षा के 3 प्रकार (Types of Rainfall):

जब जलवाष्प ऊपर उठती है, तो ठंडी होकर संघनित होती है और जल की बूंदें बनकर बादलों का रूप लेती हैं। जब ये बूंदें बहुत भारी हो जाती हैं, तो वर्षा के रूप में गिरती हैं:

  • 1. संवहनी वर्षा (Convectional Rainfall): अत्यधिक गर्मी के कारण गर्म व नम हवा तेजी से ऊपर उठती है और मूसलाधार बारिश कराती है (भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में दैनिक वर्षा)।
  • 2. पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall): जब नम हवा किसी ऊंचे पर्वत से टकराकर ऊपर उठने को विवश होती है, तो पर्वत के ढाल पर भारी वर्षा होती है।
  • 3. चक्रवाती वर्षा (Cyclonic Rainfall): जब गर्म और ठंडी वायु राशियां आपस में मिलती हैं, तो चक्रवात के कारण होने वाली वर्षा को चक्रवाती वर्षा कहते हैं।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

वायुमंडलीय गैस संघटन
नाइट्रोजन (78%) + ऑक्सीजन (21%) + आर्गन (0.93%) + CO2 (0.03%)
पृथ्वी की जीवनदायिनी गैसें
वायुदाब व पवन प्रवाह
पवन = उच्च दाब (High Pressure) ➔ निम्न दाब (Low Pressure)
प्राकृतिक संतुलन की दिशा
वायुमंडल की 5 परतें
क्षोभमंडल (13km) ➔ समतापमंडल (50km) ➔ मध्यमंडल (80km) ➔ बाह्य (400km) ➔ बहिर्मंडल
धरातल से अंतरिक्ष की ओर
समतापमंडल की सुरक्षा
ओजोन परत (O3) = सूर्य की पराबैंगनी किरणों का अवशोषण
हवाई जहाज उड़ने का आदर्श क्षेत्र
वर्षा के 3 स्वरूप
संवहनी वर्षा + पर्वतीय वर्षा + चक्रवाती वर्षा
जल चक्र का संघनन प्रतिरूप

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
Q1 (परत तुलना): "क्षोभमंडल" (Troposphere) और "समतापमंडल" (Stratosphere) में क्या अंतर है? हवाई जहाज उड़ाने के लिए समतापमंडल ही सबसे उपयुक्त क्यों माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. क्षोभमंडल (धरातल से 13 किमी): यह सबसे निचली परत है जहाँ हम सांस लेते हैं। यहाँ जलवाष्प और धूलकण मौजूद होते हैं, जिससे बादल, आंधी, तूफान, कोहरा और भारी वर्षा जैसी सभी मौसमी हलचलें इसी परत में होती हैं।
2. समतापमंडल (13 से 50 किमी): यह क्षोभमंडल के ठीक ऊपर फैला है। इसमें जलवाष्प और धूलकण नहीं होते, इसलिए यह बादलों और मौसमी विक्षोभों से पूरी तरह मुक्त होता है। इसमें तापमान लगभग समान रहता है और ओजोन गैस की परत पाई जाती है।
3. हवाई जहाज के लिए उपयुक्तता: चूंकि समतापमंडल में कोई बादल, तूफान या वर्षा नहीं होती और दृश्यता बिल्कुल साफ रहती है, इसलिए वायुमंडलीय अशांति (Turbulence) से बचने के लिए जेट विमान समतापमंडल के शांत वातावरण में उड़ना पसंद करते हैं।

उदाहरण 2
Q2 (जलवायु विज्ञान): "ग्लोबल वार्मिंग" (वैश्विक तापन) क्या है? इसके मुख्य कारण और पृथ्वी पर इसके संभावित विनाशकारी प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. ग्लोबल वार्मिंग की परिभाषा: मानवीय क्रियाकलापों (उद्योगों, बिजलीघरों, वाहनों) द्वारा वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों—विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और मीथेन की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी के औसत तापमान में निरंतर होने वाली वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) कहते हैं।
2. कारण: जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोल) का अंधाधुंध दहन, जंगलों की कटाई (जिससे CO2 का अवशोषण कम हो गया है), और औद्योगिक प्रदूषण।
3. विनाशकारी प्रभाव:
- ध्रुवीय क्षेत्रों और हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
- समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है जिससे मुंबई, मालदीव और बांग्लादेश जैसे तटीय निचले इलाके डूबने के खतरे में हैं।
- अत्यधिक सूखा, अनपेक्षित बाढ़ और चक्रवातों जैसी चरम मौसमी आपदाओं की आवृत्ति बढ़ गई है।

उदाहरण 3
Q3 (भौतिक भूगोल): "आतपन" (Insolation) किसे कहते हैं? भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर तापमान क्यों घटता जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. आतपन की परिभाषा: सूर्य से आने वाली वह सौर विकिरण ऊर्जा जिसे पृथ्वी अपनी सतह द्वारा अवशोषित कर रोक लेती है, उसे आतपन या सूर्यताप (Insolation) कहते हैं।
2. तापमान घटने का कारण:
- पृथ्वी का आकार गोलाकार (Geoid) है।
- भूमध्य रेखा (0° अक्षांश) पर सूर्य की किरणें वर्ष भर लगभग सीधी (लंबवत) पड़ती हैं, जिससे सौर ऊर्जा कम क्षेत्रफल में केंद्रित होती है और अत्यधिक गर्मी पैदा करती है।
- जैसे-जैसे हम भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाते हैं, सूर्य की किरणें अत्यंत तिरछी (Slanting) होती जाती हैं। तिरछी किरणों को वायुमंडल की मोटी परतों से गुजरना पड़ता है और वे विस्तृत क्षेत्र में बिखर जाती हैं, जिससे ताप की तीव्रता बहुत कम हो जाती है। इसीलिए ध्रुवों पर हमेशा जमा देने वाली ठंड रहती है।

उदाहरण 4
Q4 (पवन वर्गीकरण): पवनों के तीन मुख्य प्रकार कौन-से हैं? उत्तर भारत में गर्मियों में चलने वाली स्थानीय पवन "लू" (Loo) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. पवनों के तीन प्रकार:
- स्थायी पवनें: जो वर्ष भर निश्चित दिशा में चलती हैं; जैसे—व्यापारिक व पछुआ पवनें।
- सामयिक पवनें: जो ऋतुओं के अनुसार दिशा बदलती हैं; जैसे—भारतीय मानसूनी पवनें।
- स्थानीय पवनें: जो किसी छोटे क्षेत्र में वर्ष या दिन के विशेष समय चलती हैं; जैसे—समुद्र समीर व लू।
2. लू (Loo): मई और जून के महीनों में उत्तर और पश्चिमोत्तर भारत (राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड) के मैदानी भागों में दोपहर के समय चलने वाली अत्यधिक गर्म, धूल भरी और शुष्क हवाओं को "लू" कहा जाता है। इसके सीधे संपर्क में आने से हीटस्ट्रोक (लू लगना) हो सकता है जो प्राणघातक भी हो सकता है।

उदाहरण 5
Q5 (संचार व विज्ञान): वायुमंडल का "आयनमंडल" (Ionosphere) आधुनिक रेडियो संचार के लिए किस प्रकार वरदान सिद्ध होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. आयनमंडल की स्थिति: यह बाह्य वायुमंडल (Thermosphere) का निचला भाग है जो धरातल से 80 से 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है।
2. विद्युत आवेशित कण: सूर्य की पराबैंगनी किरणों और एक्स-रे के प्रभाव से इस परत में मौजूद गैसों के अणु आवेशित कणों यानी आयनों (Ions) में बदल जाते हैं।
3. रेडियो परावर्तन: जब पृथ्वी की सतह पर स्थित रेडियो ट्रांसमीटर स्टेशन से उच्च-आवृत्ति वाली रेडियो तरंगें अंतरिक्ष की ओर भेजी जाती हैं, तो आयनमंडल की यह आवेशित परत उन तरंगों को अंतरिक्ष में जाने से रोककर एक दर्पण की तरह वापस पृथ्वी की ओर परावर्तित कर देती है। इसी कारण हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोग बिना किसी तार के स्पष्ट रेडियो प्रसारण सुन पाते हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मौसम (Weather) और जलवायु (Climate) को पर्यायवाची मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मौसम दिन-प्रतिदिन और घंटे-दर-घंटे की अल्पकालिक वायुमंडलीय स्थिति है; जबकि जलवायु कम से कम 30 वर्षों के मौसम का औसत दीर्घकालिक प्रतिरूप होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हवाई जहाज को क्षोभमंडल में उड़ाना सबसे सुरक्षित समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

क्षोभमंडल में बादल, तूफान और बारिश होती है; हवाई जहाज हमेशा बादलों से मुक्त शांत "समतापमंडल" (Stratosphere) में उड़ाए जाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पवन को निम्न दाब से उच्च दाब की ओर बहता हुआ मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पवन का सार्वभौमिक प्राकृतिक नियम है: हवा हमेशा "उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब" (High Pressure to Low Pressure) की ओर ही गति करती है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

वायुमंडल की 5 परतों की ऊर्ध्वाधर संरचना
क्षोभमंडल (13km - मौसम परिघटनाएं) ➔ समतापमंडल (50km - ओजोन व विमान) ➔ मध्यमंडल (80km - उल्कापिंड रक्षा) ➔ आयनमंडल (400km - रेडियो संचार) ➔ बहिर्मंडल (हल्की गैसें)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
वायुमंडल में नाइट्रोजन (78%) सर्वाधिक और ऑक्सीजन (21%) दूसरी प्रमुख गैस है।
मुख्य बिंदु 2
कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीनहाउस प्रभाव द्वारा पृथ्वी को गर्म रखती है; इसकी अत्यधिक वृद्धि से ग्लोबल वार्मिंग होती है।
मुख्य बिंदु 3
क्षोभमंडल (औसत 13 किमी) सबसे महत्वपूर्ण परत है जहाँ वर्षा, कुहासा और तूफान जैसी सभी मौसमी घटनाएं होती हैं।
मुख्य बिंदु 4
समतापमंडल (50 किमी) बादलों से मुक्त है, हवाई जहाज उड़ाने हेतु सर्वोत्तम है और इसमें ओजोन परत पाई जाती है।
मुख्य बिंदु 5
मध्यमंडल (80 किमी) में अंतरिक्ष से आने वाले उल्कापिंड घर्षण से जलकर नष्ट हो जाते हैं।
मुख्य बिंदु 6
बाह्य वायुमंडल का आयनमंडल (80-400 किमी) रेडियो तरंगों को पृथ्वी पर वापस परावर्तित कर संचार संभव बनाता है।
मुख्य बिंदु 7
मौसम अल्पकालिक दैनिक स्थिति है जबकि जलवायु कम से कम 30 वर्षों का दीर्घकालिक औसत मौसम है।
मुख्य बिंदु 8
सूर्य से आने वाली रोकी गई ऊर्जा को आतपन (Insolation) कहते हैं, जो भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर घटती है।
मुख्य बिंदु 9
पवन हमेशा उच्च वायुदाब क्षेत्र से निम्न वायुदाब क्षेत्र की ओर गति करती है।
मुख्य बिंदु 10
उत्तर भारत में गर्मियों में चलने वाली स्थानीय शुष्क हवा को "लू" कहते हैं; वर्षा संवहनी, पर्वतीय और चक्रवाती तीन प्रकार की होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में कौन-सी गैस पाई जाती है और इसका प्रतिशत कितना है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में "नाइट्रोजन" गैस पाई जाती है, जिसका अनुपात लगभग 78 प्रतिशत है।
2
हवाई जहाज उड़ाने के लिए वायुमंडल की कौन-सी परत सबसे आदर्श मानी जाती है और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हवाई जहाज उड़ाने के लिए "समतापमंडल" (Stratosphere) सबसे आदर्श है क्योंकि यह बादलों, तूफानों और मौसमी हलचलों से पूरी तरह मुक्त होता है।
3
सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा कौन-सी गैस की परत करती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: समतापमंडल में स्थित "ओजोन परत" (Ozone Layer / O3) पराबैंगनी किरणों को सोखकर हमारी रक्षा करती है।
4
उत्तर भारत के मैदानी भागों में गर्मियों में चलने वाली गर्म व शुष्क स्थानीय पवन को क्या कहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उत्तर भारत में गर्मियों के महीनों में चलने वाली गर्म और शुष्क स्थानीय हवा को "लू" (Loo) कहा जाता है।
5
पृथ्वी से प्रसारित रेडियो तरंगों को पुनः पृथ्वी पर परावर्तित करने वाली वायुमंडलीय परत कौन-सी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रेडियो तरंगों को परावर्तित करने वाली परत बाह्य वायुमंडल में स्थित "आयनमंडल" (Ionosphere) है।
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