भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ शासन की शक्ति जनता में निहित है। लोकतंत्र का सबसे पहला और अनिवार्य आधार है—सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का सिद्धांत
- नियम : 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय नागरिक को बिना किसी धर्म, जाति, लिंग, साक्षरता स्तर या आर्थिक स्थिति के भेद के मतदान का अधिकार है।
- मूल आधार : 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' (One Person, One Vote, One Value)। चुनाव की कतार में करोड़पति उद्योगपति (जैसे जैन साहब) और घरेलू सहायिका (कांता) एक ही पंक्ति में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हैं।
दैनिक जीवन में वास्तविक असमानता (कांता का यथार्थ)
यद्यपि कांता को वोट देने का समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त है, परंतु उसका दैनिक जीवन घोर असमानताओं से घिरा है:
कांता एक बदबूदार बस्ती में रहती है जहाँ खुली नालियों के कारण गंदगी और बीमारियाँ फैलती हैं, जबकि उसके मालिक स्वच्छ पॉश कॉलोनी में रहते हैं।
कांता की बीमार बेटी को सरकारी अस्पताल की लंबी कतार में घंटों खड़ा रहना पड़ता है क्योंकि उसके पास निजी अस्पताल की महंगी फीस के पैसे नहीं हैं।