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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Social Science • अध्याय 18
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

समानता (On Equality) (On Equality)

इस अध्याय में हम भारतीय लोकतंत्र की केंद्रीय विशेषता—"समानता" (Equality)—की अवधारणा, इसके संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 15 व 17), समाज में व्याप्त वास्तविक असमानताओं (जातिगत, धार्मिक एवं आर्थिक), मानवीय गरिमा (Dignity), मध्याह्न भोजन योजना तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिक अधिकार आंदोलन का गहन विश्लेषण करेंगे।

क्या वोट की लाइन में खड़ा हर भारतीय अस्पताल और समाज की कतार में भी उतना ही समान है?

भारत का संविधान देश के हर वयस्क नागरिक को—चाहे वह एक विशाल उद्योगपति हो या घरों में झाड़ू-पोंछा करने वाली कांता—समान रूप से एक वोट का अधिकार देता है। लेकिन जब वही कांता अपनी बीमार बेटी का इलाज कराने सरकारी अस्पताल की अंतहीन कतार में खड़ी होती है या जब ओमप्रकाश वाल्मीकि को दलित होने के कारण स्कूल में झाड़ू लगाने पर मजबूर किया जाता है, तो सवाल उठता है: हमारे लोकतंत्र में समानता केवल कागजों पर है या यथार्थ में भी?

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

समानता किसी भी जीवंत लोकतंत्र की आत्मा है। इस अध्याय को समझकर विद्यार्थी अपने अधिकारों, कानून के समक्ष समानता, जातिगत व धार्मिक पूर्वाग्रहों के उन्मूलन तथा वंचित वर्गों के उत्थान हेतु सरकारी नीतियों (जैसे मिड-डे मील योजना) की आवश्यकता को आत्मसात कर सकते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कक्षा 6 के सामाजिक विज्ञान से लोकतंत्र के मुख्य तत्वों (भागीदारी, संघर्षों का समाधान व समानता) की जानकारी।
  • भारतीय संविधान और मौलिक अधिकारों की प्रारंभिक अवधारणा।
  • मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया की बुनियादी समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) का अर्थ और लोकतंत्र में इसके महत्व को स्पष्ट करना।
  • कांता, ओमप्रकाश वाल्मीकि ("जूठन") और अंसारी दंपत्ति के जीवन प्रसंगों के माध्यम से आर्थिक, जातिगत व धार्मिक असमानता को पहचानना।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 17 में उल्लिखित समानता के विधिक प्रावधानों को समझना।
  • मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme - 2001) के ऐतिहासिक उद्भव और इसके बहुआयामी सामाजिक-शैक्षणिक प्रभावों का विश्लेषण करना।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में रोजा पार्क्स की ऐतिहासिक घटना और नागरिक अधिकार अधिनियम 1964 (Civil Rights Act) की तुलना भारतीय समानता के संघर्ष से करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मताधिकार की समानता बनाम वास्तविक...
2 2. जातिगत एवं धार्मिक भेदभाव : मानव...
3 3. भारतीय संविधान में समानता के प्र...
4 4. मध्याह्न भोजन योजना एवं अमेरिकी...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मताधिकार की समानता बनाम वास्तविक असमानता (Equality in Voting vs Real Inequality)

भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ शासन की शक्ति जनता में निहित है। लोकतंत्र का सबसे पहला और अनिवार्य आधार है—सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का सिद्धांत

  • नियम : 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय नागरिक को बिना किसी धर्म, जाति, लिंग, साक्षरता स्तर या आर्थिक स्थिति के भेद के मतदान का अधिकार है।
  • मूल आधार : 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' (One Person, One Vote, One Value)। चुनाव की कतार में करोड़पति उद्योगपति (जैसे जैन साहब) और घरेलू सहायिका (कांता) एक ही पंक्ति में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हैं।

दैनिक जीवन में वास्तविक असमानता (कांता का यथार्थ)

यद्यपि कांता को वोट देने का समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त है, परंतु उसका दैनिक जीवन घोर असमानताओं से घिरा है:

आर्थिक एवं आवासीय विषमता :

कांता एक बदबूदार बस्ती में रहती है जहाँ खुली नालियों के कारण गंदगी और बीमारियाँ फैलती हैं, जबकि उसके मालिक स्वच्छ पॉश कॉलोनी में रहते हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं की असमानता :

कांता की बीमार बेटी को सरकारी अस्पताल की लंबी कतार में घंटों खड़ा रहना पड़ता है क्योंकि उसके पास निजी अस्पताल की महंगी फीस के पैसे नहीं हैं।

2. जातिगत एवं धार्मिक भेदभाव : मानवीय गरिमा पर आघात (Caste, Religion & Dignity)

भारत में आर्थिक विषमता के अलावा असमानता का सबसे कटु रूप जाति व्यवस्था (Caste System) और धार्मिक पूर्वाग्रह हैं।

ओमप्रकाश वाल्मीकि और "जूठन" (Joothan)

प्रसिद्ध दलित लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपनी आत्मकथा 'जूठन' में अपने स्कूल के दिनों के दर्दनाक अनुभव लिखे हैं। जब वे चौथी कक्षा में थे, तो हेडमास्टर कलिराम ने उन्हें बाकी बच्चों से अलग बैठाकर पूरे स्कूल और खेल के मैदान में झाड़ू लगाने का हुक्म दिया। धूल से उनका पूरा चेहरा और मुँह भर गया, उन्हें पानी तक पीने नहीं दिया गया। जाति के आधार पर उनके आत्मसम्मान को कुचला गया, जब तक कि उनके पिता ने हेडमास्टर का साहसपूर्वक विरोध नहीं किया।

अंसारी दंपत्ति का अनुभव : धार्मिक पूर्वाग्रह

मिस्टर और मिसेज अंसारी शहर में किराए पर मकान तलाश रहे थे। उनके पास किराया देने के पूरे पैसे थे। प्रॉपर्टी डीलर उन्हें कई मकान दिखाता है, पर जैसे ही मकान मालकिनों को उनका मुस्लिम नाम पता चलता, वे बहाना बना देतीं कि 'हम मांसाहारी लोगों को मकान नहीं देते' (जबकि उसी समय पड़ोस से मछली पकने की गंध आ रही होती थी)। डीलर ने उन्हें नाम बदलकर 'कुमार' रखने की सलाह दी, परंतु अपने आत्मसम्मान (Self-respect) के कारण उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

मानवीय गरिमा (Human Dignity)

जब व्यक्तियों के साथ उनकी जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर असमान व्यवहार किया जाता है, तो उनकी गरिमा (Dignity) को गहरी चोट पहुँचती है। प्रत्येक व्यक्ति को समान आदर और सम्मान पाने का उतना ही अधिकार है जितना किसी अन्य को।

3. भारतीय संविधान में समानता के प्रावधान (Constitutional Provisions on Equality)

भारतीय संविधान सभी व्यक्तियों को समान मानता है। इसका अर्थ है कि देश का प्रत्येक व्यक्ति—पुरुष या महिला, किसी भी जाति, धर्म, जनजाति, शैक्षिक व आर्थिक पृष्ठभूमि का हो—कानून की नजर में बराबर है।

संवैधानिक सिद्धांत विधिक प्रावधान (Legal Provision) व्यावहारिक प्रभाव
1. विधि के समक्ष समानता अनुच्छेद 14 : देश के राष्ट्रपति से लेकर घरेलू कामगार कांता तक सभी को एक ही कानून का पालन करना होगा। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
2. भेदभाव का प्रतिषेध अनुच्छेद 15 : किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद नहीं किया जाएगा। दुकानों, होटलों, कुओं, तालाबों और सार्वजनिक स्थानों पर सभी की समान पहुंच।
3. अवसरों की समानता अनुच्छेद 16 : राज्य के अधीन किसी भी पद पर नियोजन या नियुक्ति में सभी नागरिकों के लिए समान अवसर। सरकारी नौकरियों में सभी को आवेदन का समान अधिकार।
4. अस्पृश्यता का उन्मूलन अनुच्छेद 17 : अस्पृश्यता (छुआछूत / Untouchability) का पूर्णतः उन्मूलन कर दिया गया है और इसका किसी भी रूप में आचरण दंडनीय अपराध है। दलितों और वंचितों के विरुद्ध छुआछूत करने पर कानूनी सजा।

4. मध्याह्न भोजन योजना एवं अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन (Midday Meal & Civil Rights Movement)

शासन द्वारा समानता स्थापित करने के दो प्रमुख माध्यम हैं—पहला कानून बनाकर और दूसरा उन समुदायों के लिए विशेष योजनाएं चलाकर जो सदियों से उपेक्षित रहे हैं।

मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme)

यह भारत सरकार का एक क्रांतिकारी कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को दोपहर का पका हुआ पौष्टिक भोजन निःशुल्क प्रदान किया जाता है।

  • सर्वप्रथम शुरुआत : वर्ष 2001 में तमिलनाडु राज्य में इसे सबसे पहले लागू किया गया। बाद में 2001 में ही सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को इसे 6 महीने के भीतर लागू करने का ऐतिहासिक आदेश दिया।
  • नामांकन व उपस्थिति में वृद्धि : गरीब बच्चों का स्कूल में दाखिला बढ़ा और दोपहर में भोजन के लिए घर जाकर वापस न लौटने की समस्या समाप्त हुई।
  • जातिगत पूर्वाग्रहों में कमी : उच्च और निम्न जातियों के बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और अनेक स्थानों पर दलित महिलाओं को भोजन पकाने का काम सौंपा गया है।
  • माताओं को राहत : गरीब कामकाजी माताओं को दोपहर में काम छोड़कर बच्चों को खाना खिलाने नहीं आना पड़ता।

अन्य लोकतंत्रों में समानता का संघर्ष : अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन (1964)

समानता की लड़ाई केवल भारत तक सीमित नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकन लोगों के साथ अत्यधिक नस्लीय भेदभाव होता था (बसों में पीछे बैठना या गोरे व्यक्ति के आने पर सीट छोड़ना अनिवार्य था)।

रोजा पार्क्स (1 दिसंबर 1955) :

एक थकी हुई अफ्रीकी-अमेरिकन महिला रोजा पार्क्स ने बस में एक गोरे पुरुष को अपनी सीट देने से साफ इनकार कर दिया। उनके इस ऐतिहासिक इनकार ने एक राष्ट्रव्यापी क्रांति की चिंगारी सुलगा दी।

नागरिक अधिकार अधिनियम 1964 :

मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद 1964 के कानून द्वारा नस्ल, धर्म और राष्ट्रीय मूल के आधार पर भेदभाव को पूर्णतः गैर-कानूनी घोषित किया गया।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार समीकरण (Universal Adult Franchise)
आयु ≥ 18 वर्ष + भारतीय नागरिकता = 1 व्यक्ति + 1 वोट + 1 समान मूल्य (One Person, One Vote, One Value)
यह बिना किसी जाति, धर्म, लिंग या संपत्ति के भेदभाव के सभी को समान राजनीतिक शक्ति प्रदान करता है।
अनुच्छेद 15 विभेद-प्रतिषेध सूत्र (Article 15 Anti-Discrimination)
राज्य ≠ विभेद (धर्म + मूलवंश + जाति + लिंग + जन्मस्थान) ➔ सार्वजनिक स्थानों पर पूर्ण समान अधिकार
दुकानों, भोजनालयों, होटलों, कुओं और सड़कों पर सभी नागरिकों की बिना भेदभाव के समान पहुँच सुनिश्चित करता है।
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन मानक (Article 17 Untouchability Abolition)
अस्पृश्यता का आचरण = पूर्णतः प्रतिबंधित + विधि अनुसार संज्ञेय दंडनीय अपराध (Punishable Offence)
डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान में जोड़ा गया सबसे क्रांतिकारी समतावादी प्रावधान।
मध्याह्न भोजन योजना त्रिपक्षीय प्रभाव (Midday Meal Impact Equation)
निःशुल्क पौष्टिक भोजन ➔ उच्च छात्र नामांकन + शून्य भुखमरी + जातिगत भेदभाव का न्यूनीकरण
सर्वप्रथम 2001 में तमिलनाडु में लागू हुआ, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी आदेश दिया।
नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement 1964)
रोजा पार्क्स इनकार (1955) + MLK Jr. अहिंसक सत्याग्रह ➔ नागरिक अधिकार अधिनियम 1964 (समानता की विधिक जीत)
संयुक्त राज्य अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकन नागरिकों को नस्लीय समानता दिलाने वाला ऐतिहासिक मोड़।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) क्या है? यह एक लोकतांत्रिक देश के लिए क्यों अनिवार्य है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. अर्थ : सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का तात्पर्य है कि देश के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्राप्त है, चाहे उनकी जाति, धर्म, भाषा, लिंग, शिक्षा का स्तर या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।

2. लोकतंत्र के लिए अनिवार्यता के कारण :

  • राजनीतिक समानता : यह 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत पर आधारित है, जिससे देश के सबसे गरीब नागरिक का वोट भी सबसे अमीर नागरिक के वोट के बराबर शक्तिशाली होता है।
  • जनता की संप्रभुता : सरकार का चुनाव और बदलाव जनता की सामूहिक इच्छा पर निर्भर करता है, जिससे शासक जनता के प्रति उत्तरदायी रहते हैं।
  • नागरिकों में आत्मसम्मान : यह प्रत्येक नागरिक को यह एहसास कराता है कि देश के निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भी समान भागीदारी है।
उदाहरण 2
ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा 'जूठन' और अंसारी दंपत्ति की घटना भारत में किस प्रकार की असमानताओं को उजागर करती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

ये दोनों वास्तविक घटनाएँ दर्शाती हैं कि राजनीतिक समानता मिलने के बावजूद भारतीय समाज में गहरी सामाजिक और सांस्कृतिक असमानता विद्यमान है:

1. ओमप्रकाश वाल्मीकि (जातिगत भेदभाव) : एक निर्दोष बच्चे को केवल दलित जाति में जन्म लेने के कारण स्कूल में फर्श पर बैठाया गया और पढ़ाई के बदले झाड़ू लगवाई गई। यह साबित करता है कि जातिगत पूर्वाग्रह बच्चों की मानवीय गरिमा और शिक्षा के मौलिक अधिकार को कुचलते हैं।

2. अंसारी दंपत्ति (धार्मिक पूर्वाग्रह) : किराया चुकाने में पूरी तरह सक्षम होने के बावजूद केवल मुस्लिम उपनाम होने के कारण उन्हें मकान देने से मना कर दिया गया। यह दर्शाता है कि आधुनिक शहरों में भी धार्मिक संकीर्णता लोगों के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाती है।

उदाहरण 3
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 में समानता सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या मुख्य बिंदु निर्धारित किए गए हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 नागरिकों को भेदभाव के विरुद्ध मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इसके प्रमुख बिंदु हैं:

  • विभेद का निषेध : राज्य किसी भी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
  • सार्वजनिक स्थलों पर समान पहुंच : किसी भी नागरिक को दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता।
  • सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग : पूर्णतः या अंशतः राज्य निधि से पोषित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग पर किसी नागरिक पर कोई निर्योग्यता या शर्त नहीं लगाई जा सकती।
उदाहरण 4
मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme) ने स्कूलों में जातिगत पूर्वाग्रहों को कम करने और नामांकन बढ़ाने में क्या भूमिका निभाई है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

सर्वप्रथम 2001 में तमिलनाडु से प्रारंभ हुई इस योजना ने भारतीय प्राथमिक शिक्षा में ऐतिहासिक सामाजिक बदलाव लाए हैं:

  • नामांकन और नियमित उपस्थिति : दोपहर का गर्म पौष्टिक भोजन मिलने से गरीब परिवारों ने बच्चों को नियमित स्कूल भेजना शुरू किया। भोजन अवकाश में घर जाकर वापस न आने की ड्रॉपआउट समस्या समाप्त हुई।
  • जातिगत पूर्वाग्रहों का टूटना : स्कूल में उच्च जाति और निम्न जाति (दलित/आदिवासी) के बच्चे एक ही पंक्ति में एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जिससे बचपन से ही भेदभाव की भावना दूर होती है।
  • दलित महिलाओं का सशक्तीकरण : कई स्कूलों में रसोइया और सहायिका के रूप में दलित व वंचित वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ी है।
  • एकाग्रता में सुधार : खाली पेट पढ़ने आने वाले गरीब बच्चों की भूख मिटने से वे पढ़ाई में बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
उदाहरण 5
रोजा पार्क्स कौन थीं और 1 दिसंबर 1955 को उनके द्वारा किए गए विरोध ने संयुक्त राज्य अमेरिका में क्या परिवर्तन ला दिया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. परिचय : रोजा पार्क्स (1913-2005) एक अफ्रीकी-अमेरिकन महिला थीं जो अलबामा के मोंटगोमरी में सीमस्ट्रेस (दर्जी) का काम करती थीं।

2. 1 दिसंबर 1955 की ऐतिहासिक घटना : दिनभर के कठिन परिश्रम से थककर जब वे बस में बैठी थीं, तो तत्कालीन नस्लीय कानून के अनुसार एक गोरे पुरुष ने उनसे सीट खाली करने को कहा। रोजा पार्क्स ने अपनी सीट छोड़ने से दृढ़तापूर्वक इनकार कर दिया।

3. परिणाम : उनके इस साहसपूर्ण इनकार ने अफ्रीकी-अमेरिकनों में भारी आक्रोश भर दिया और डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नेतृत्व में विशाल नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement) छिड़ गया। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी संसद ने नागरिक अधिकार अधिनियम 1964 पारित किया, जिसने नस्ल, रंग, धर्म और राष्ट्रीय मूल के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को पूरी तरह गैर-कानूनी बना दिया।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि वोट देने का अधिकार (राजनीतिक समानता) मिल जाने से समाज में सभी प्रकार की असमानताएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

राजनीतिक समानता (वोट का अधिकार) केवल शुरुआत है; आर्थिक, जातिगत और सामाजिक असमानता को मिटाने के लिए निरंतर कानूनों, जन-जागरूकता और सरकारी योजनाओं की आवश्यकता होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मध्याह्न भोजन योजना को केवल एक 'मुफ्त खाना वितरण' योजना समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मिड-डे मील योजना केवल भूख मिटाने की योजना नहीं है, बल्कि यह जातिगत पूर्वाग्रहों को तोड़ने, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन व ठहराव बढ़ाने का एक क्रांतिकारी सामाजिक उपकरण है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 17 को एक जैसा मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव का सामान्य निषेध करता है; जबकि अनुच्छेद 17 विशेष रूप से छुआछूत (अस्पृश्यता) को पूर्णतः गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित करता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

लोकतंत्र में समानता : संवैधानिक स्तंभ एवं सामाजिक वास्तविकता 1. विधि के समक्ष समता • अनुच्छेद 14 • राष्ट्रपति से कांता तक समान कानून कानून का शासन 2. विभेद का निषेध • अनुच्छेद 15 • जाति, धर्म, लिंग पर भेदभाव निषिद्ध सार्वजनिक स्थलों की समता 3. अस्पृश्यता अंत • अनुच्छेद 17 • छुआछूत का पूर्ण उन्मूलन संज्ञेय दंडनीय अपराध 4. सामाजिक उत्थान • मिड-डे मील योजना • 2001 तमिलनाडु • जाति भेद में कमी पोषण + शिक्षा समता समानता का वैश्विक संघर्ष : रोजा पार्क्स (1955) ➔ यूएसए नागरिक अधिकार अधिनियम (1964) "समानता कोई दी हुई वस्तु नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समाज का एक निरंतर चलने वाला जीवंत संघर्ष है।"

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान मतदान शक्ति देता है।
मुख्य बिंदु 2
राजनीतिक समानता के बावजूद कांता का जीवन आर्थिक अभावों, गंदी बस्ती और सरकारी अस्पतालों की अंतहीन कतारों की वास्तविक असमानता को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु 3
भारत में असमानता का सबसे कटु रूप जातिगत भेदभाव है, जिसे प्रसिद्ध लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपनी आत्मकथा "जूठन" में वर्णित किया है।
मुख्य बिंदु 4
अंसारी दंपत्ति को केवल मुस्लिम उपनाम के कारण मकान न मिलना दर्शाता है कि आधुनिक शहरों में भी धार्मिक पूर्वाग्रह मानवीय गरिमा को चोट पहुँचाते हैं।
मुख्य बिंदु 5
मानवीय गरिमा (Dignity) प्रत्येक व्यक्ति का वह जन्मसिद्ध अधिकार है जिसके तहत वह समाज से समान आदर और सम्मान पाने का हकदार है।
मुख्य बिंदु 6
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समानता, अनुच्छेद 15 विभेद का प्रतिषेध तथा अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का पूर्ण उन्मूलन करता है।
मुख्य बिंदु 7
मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme) 2001 में तमिलनाडु से शुरू हुई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पूरे देश में लागू की गई।
मुख्य बिंदु 8
मिड-डे मील ने गरीब बच्चों का स्कूलों में दाखिला बढ़ाया, ड्रॉपआउट दर घटाई और सभी जातियों के बच्चों को एक साथ भोजन कराकर पूर्वाग्रह तोड़े।
मुख्य बिंदु 9
1 दिसंबर 1955 को रोजा पार्क्स द्वारा बस में गोरे व्यक्ति को सीट देने से इनकार ने अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन को जन्म दिया।
मुख्य बिंदु 10
अमेरिकी नागरिक अधिकार अधिनियम 1964 ने नस्ल, धर्म व राष्ट्रीय मूल के भेदभाव को गैर-कानूनी बनाया; समानता लोकतंत्र में निरंतर चलने वाला संघर्ष है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के तहत मतदान का अधिकार प्राप्त करने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 18 वर्ष।
भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी जाति, धर्म, लिंग या संपत्ति के भेदभाव के एक वोट देने का संवैधानिक अधिकार है।
2
प्रसिद्ध आत्मकथा 'जूठन' के लेखक कौन हैं जिसमें स्कूल में जातिगत भेदभाव का मार्मिक वर्णन है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ओमप्रकाश वाल्मीकि।
प्रसिद्ध दलित साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपनी आत्मकथा "जूठन" में चौथी कक्षा में अपने साथ हुए अमानवीय जातिगत भेदभाव का चित्रण किया है।
3
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद द्वारा छुआछूत (अस्पृश्यता) को पूर्णतः समाप्त और दंडनीय अपराध घोषित किया गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अनुच्छेद 17 (Article 17)।
संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का पूर्णतः उन्मूलन करता है और इसका किसी भी रूप में आचरण विधि के अनुसार दंडनीय अपराध बनाता है।
4
भारत के किस राज्य में मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme) सबसे पहले लागू की गई थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: तमिलनाडु (वर्ष 2001 में)।
तमिलनाडु में सफलता के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 2001 में सभी राज्य सरकारों को इसे 6 महीने के भीतर अपने प्राथमिक स्कूलों में लागू करने का आदेश दिया था।
5
1 दिसंबर 1955 को अमेरिका में किस अफ्रीकी-अमेरिकन महिला के साहस ने नागरिक अधिकार आंदोलन की शुरुआत की?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रोजा पार्क्स (Rosa Parks)।
रोजा पार्क्स ने बस में एक गोरे पुरुष को अपनी सीट देने से इनकार कर दिया, जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐतिहासिक नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement) शुरू हुआ।
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