9वीं सदी में प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग (वर्तमान केरल) में महोदयपुरम का चेर साम्राज्य स्थापित हुआ। चेर राजाओं ने अपने शासकीय अभिलेखों में मलयालम भाषा और लिपि का प्रयोग प्रारंभ किया:
- यह भारतीय उपमहाद्वीप में सरकारी अभिलेखों में किसी स्थानीय क्षेत्रीय भाषा के प्रयोग के सबसे आरंभिक उदाहरणों में से एक है।
- संस्कृत से आदान-प्रदान: चेरों ने संस्कृत की कई परंपराओं को अपनाया। केरल का प्रसिद्ध मंदिर रंगमंच (कूथु) संस्कृत महाकाव्यों पर आधारित था। मलयालम की आरंभिक साहित्यिक कृतियां प्रत्यक्ष रूप से संस्कृत की ऋणी हैं।
- लीलातिलकम और मणिप्रवालम शैली: 14वीं सदी में लिखा गया प्रसिद्ध ग्रंथ "लीलातिलकम" (Lilatilakam) व्याकरण और काव्यशास्त्र की उत्कृष्ट रचना है। इसे "मणिप्रवालम" (Manipravalam) शैली में लिखा गया था। मणिप्रवालम का शाब्दिक अर्थ "हीरा और मूंगा" है, जो दो भिन्न भाषाओं—संस्कृत और क्षेत्रीय मलयालम भाषा के सुंदर मणिकांचन संयोग को दर्शाता है।