जिस प्रक्रम में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागरों, वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता रहता है, उसे जल चक्र (Water Cycle) कहते हैं:
- सूर्य के ताप के कारण जल वाष्पीकृत (Evaporation) होकर ऊपर उठता है।
- ऊंचाई पर ठंडा होने पर जलवाष्प संघनित (Condensation) होकर बादलों का रूप ले लेती है।
- यहाँ से यह वर्षा, हिम अथवा सहिम वृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरती है जिसे वर्षण (Precipitation) कहते हैं।
- थैलेरियम (Terrarium): यह छोटे घर के पौधे रखने का एक कृत्रिम अहाता होता है जो कांच के जार में ठीक पृथ्वी के जल चक्र की तरह काम करता है।
पृथ्वी पर जल का प्रतिशत वितरण:
| स्रोत | जल का प्रतिशत | प्रकृति |
|---|---|---|
| महासागर | 97.3% | खारा / लवणीय जल (Saline Water - पीने योग्य नहीं) |
| बर्फ छत्रक (Ice-caps/ग्लेशियर) | 02.0% | अलवण जल (जमा हुआ मीठा पानी) |
| भूमिगत जल (Groundwater) | 0.68% | अलवण जल (पीने व सिंचाई योग्य) |
| झीलों का अलवण जल | 0.009% | अलवण जल |
| स्थलीय समुद्र एवं नमकीन झीलें | 0.009% | लवणीय जल |
| वायुमंडल (जलवाष्प) | 0.0019% | अलवण जल |
| नदियां (Rivers) | 0.0001% | अलवण जल |