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JAC • Class 7 • Social Science • Ch 15
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Water

कक्षा 7 भूगोल का यह अनिवार्य अध्याय "जल" (Water) पृथ्वी के जलमंडल, इसके वैश्विक वितरण तथा महासागरीय गतियों का वैज्ञानिक व शैक्षणिक विवरण प्रस्तुत करता है। इस अध्याय में जल चक्र (वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण व थैलेरियम), अलवण जल बनाम लवणीय जल का वितरण (महासागर 97.3%, मृत सागर की लवणता), महासागरीय परिसंचरण के तीन रूप—तरंगें व सुनामी (2004 हिंद महासागर त्रासदी), सूर्य-चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न वृहत् व लघु ज्वार-भाटा (Spring & Neap Tides), तथा गर्म व ठंडी महासागरीय धाराओं (गल्फ स्ट्रीम व लैब्राडोर) और विश्व के सर्वोत्तम मत्स्यन क्षेत्रों का विस्तृत व प्रामाणिक अध्ययन शामिल है।

🌊 क्या आपने कभी सोचा है?

💧 जिस पानी से आज आप मुंह धो रहे हैं, संभव है कि करोड़ों साल पहले उसी पानी की बूंदों को किसी डायनासोर ने पिया हो?

पृथ्वी पर मौजूद जल कभी नष्ट नहीं होता! यह जल चक्र (Water Cycle) के माध्यम से बादलों, नदियों और समुद्रों के बीच अनंत काल से घूम रहा है। हमारी पृथ्वी पर 71% जल होने के बावजूद हमारे पीने योग्य मीठा पानी 1% से भी कम है! क्या आप जानते हैं कि इजराइल के "मृत सागर" में कोई व्यक्ति चाहकर भी नहीं डूब सकता, और अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर दूर मौजूद चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण हमारे समुद्र के विशाल पानी को अपनी ओर खींचकर दिन में दो बार ज्वार-भाटा पैदा करता है? आइए जल के इन चमत्कारों को समझें!

Why This Chapter Matters

जल संकट, भूजल का गिरता स्तर, समुद्री संसाधनों का दोहन और सुनामी जैसी आपदाओं के दौर में जल और महासागरों की समझ अत्यंत आवश्यक है। यह अध्याय छात्रों को जल संरक्षण (Water Conservation), ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy), समुद्री नौपरिवहन और 22 मार्च को "विश्व जल दिवस" मनाने के महत्व को व्यावहारिक रूप से सिखाता है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • जल के तीन रूपों (ठोस-बर्फ, द्रव-पानी, गैस-भाप) का प्रारंभिक ज्ञान।
  • महासागरों, नदियों और झीलों की सामान्य भौगोलिक स्थिति।
  • चंद्रमा की कलाओं (अमावस्या व पूर्णिमा) की बुनियादी समझ।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • जल चक्र (वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण) की संपूर्ण कार्यप्रणाली को समझना।
  • पृथ्वी पर खारे (97.3%) और अलवण (मीठे) जल के सटीक वितरण का विश्लेषण करना।
  • महासागरीय लवणता (Salinity) और मृत सागर (Dead Sea) के घनत्व की व्याख्या करना।
  • सुनामी की उत्पत्ति (2004 हिंद महासागर केस स्टडी) के कारणों को स्पष्ट करना।
  • सूर्य व चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण द्वारा वृहत् ज्वार (Spring Tide) और लघु ज्वार (Neap Tide) के निर्माण को समझना।
  • गर्म (गल्फ स्ट्रीम) और ठंडी (लैब्राडोर) धाराओं के मिलन से बनने वाले मत्स्यन क्षेत्रों का मूल्यांकन करना।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. जल चक्र एवं पृथ्वी पर जल का वितर...
2 2. महासागरीय परिसंचरण: तरंगें एवं 2...
3 3. ज्वार-भाटा (Tides): वृहत् एवं लघ...
4 4. महासागरीय धाराएं (Ocean Currents...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. जल चक्र एवं पृथ्वी पर जल का वितरण

जिस प्रक्रम में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागरों, वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता रहता है, उसे जल चक्र (Water Cycle) कहते हैं:

  • सूर्य के ताप के कारण जल वाष्पीकृत (Evaporation) होकर ऊपर उठता है।
  • ऊंचाई पर ठंडा होने पर जलवाष्प संघनित (Condensation) होकर बादलों का रूप ले लेती है।
  • यहाँ से यह वर्षा, हिम अथवा सहिम वृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरती है जिसे वर्षण (Precipitation) कहते हैं।
  • थैलेरियम (Terrarium): यह छोटे घर के पौधे रखने का एक कृत्रिम अहाता होता है जो कांच के जार में ठीक पृथ्वी के जल चक्र की तरह काम करता है।
पृथ्वी पर जल का प्रतिशत वितरण:
स्रोत जल का प्रतिशत प्रकृति
महासागर 97.3% खारा / लवणीय जल (Saline Water - पीने योग्य नहीं)
बर्फ छत्रक (Ice-caps/ग्लेशियर) 02.0% अलवण जल (जमा हुआ मीठा पानी)
भूमिगत जल (Groundwater) 0.68% अलवण जल (पीने व सिंचाई योग्य)
झीलों का अलवण जल 0.009% अलवण जल
स्थलीय समुद्र एवं नमकीन झीलें 0.009% लवणीय जल
वायुमंडल (जलवाष्प) 0.0019% अलवण जल
नदियां (Rivers) 0.0001% अलवण जल
महासागरीय लवणता: 1000 ग्राम (1 किग्रा) जल में मौजूद नमक की मात्रा को लवणता कहते हैं। महासागरों की औसत लवणता 35 भाग प्रति हजार (35 ppt) है। इसमें अधिकांश खाने वाला नमक (सोडियम क्लोराइड) होता है। इजराइल के मृत सागर (Dead Sea) की लवणता 340 ग्राम प्रति लीटर है। इतना अधिक नमक होने से इसका घनत्व इतना बढ़ जाता है कि तैराक इसमें बिना डूबे तैरते रहते हैं।

2. महासागरीय परिसंचरण: तरंगें एवं 2004 की सुनामी

शांत झील के विपरीत महासागरों का जल कभी स्थिर नहीं रहता। महासागरीय गतियों को तीन वर्गों में बांटा जाता है: तरंगें, ज्वार-भाटा एवं धाराएं।

तरंगें (Waves):

जब समुद्री सतह पर पवन का घर्षण होता है, तो जल बारी-बारी से ऊपर उठता और नीचे गिरता है, इन्हें तरंगें कहते हैं। जितनी तेज हवा चलेगी, तरंगें उतनी ही विशाल होंगी। तूफान में तेज हवाएं विनाशकारी तरंगें पैदा करती हैं।

सुनामी (Tsunami - पोताश्रय तरंगें):

भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या समुद्र के नीचे भारी भूस्खलन के कारण जब महासागरीय जल का विशाल विस्थापन होता है, तो 15 मीटर या उससे भी ऊंची विशालकाय समुद्री तरंगें उठती हैं जिन्हें सुनामी कहते हैं:

  • सुनामी जापानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ "पोताश्रय तरंगें" (Harbour Waves) है, क्योंकि जब सुनामी आती है तो बंदरगाह नष्ट हो जाते हैं।
  • 26 दिसंबर 2004 की हिंद महासागर सुनामी: सुमात्रा (इंडोनेशिया) के निकट 9.0 तीव्रता के भूकंप के कारण उठी सुनामी ने भारत के तटीय क्षेत्रों (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल) में भारी तबाही मचाई। भारत का दक्षिणतम बिंदु "इंदिरा पॉइंट" (अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह) इस सुनामी में पूरी तरह समुद्र में डूब गया।

3. ज्वार-भाटा (Tides): वृहत् एवं लघु ज्वार

दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना ज्वार-भाटा कहलाता है। जब सर्वाधिक ऊंचाई तक उठकर जल तट के बड़े हिस्से को डुबो देता है, उसे ज्वार (High Tide) कहते हैं। जब जल अपने निम्नतम स्तर तक पीछे हट जाता है, उसे भाटा (Low Tide) कहते हैं:

उत्पत्ति का कारण:

सूर्य एवं चंद्रमा के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी के धरातल पर ज्वार-भाटा आते हैं। चूंकि चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट है, इसलिए इसका गुरुत्वाकर्षण खिंचाव अधिक प्रभावी होता है।

(A) वृहत् ज्वार (Spring Tides)

पूर्णिमा और अमावस्या के दिनों में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक सीधी रेखा में होते हैं। इस समय दोनों का संयुक्त गुरुत्वाकर्षण बल जल को अत्यधिक खींचता है, जिससे सबसे ऊंचे ज्वार उठते हैं। इन्हें वृहत् ज्वार कहते हैं।

(B) लघु ज्वार (Neap Tides)

जब चंद्रमा अपने प्रथम एवं अंतिम चतुर्थांश (Quarter) में होता है, तो सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के समकोण (90°) पर विपरीत दिशाओं से लगता है। इससे जल का खिंचाव कम हो जाता है और निम्नतम ज्वार आते हैं। इन्हें लघु ज्वार-भाटा कहते हैं।

उच्च ज्वार के आर्थिक लाभ:
  • नौसंचालन (Navigation): उच्च ज्वार के समय जलस्तर बढ़ जाता है जिससे बड़े-बड़े व्यापारिक जहाज बंदरगाह (जैसे कोलकाता का हुगली बंदरगाह) पर सुरक्षित पहुँच जाते हैं।
  • मत्स्यन (Fishing): उच्च ज्वार के दौरान मछलियां तट के बहुत निकट आ जाती हैं जिससे मछुआरों को भारी मात्रा में मछलियां मिलती हैं।
  • ज्वारीय विद्युत: ज्वार-भाटे के पानी के उतार-चढ़ाव का उपयोग टरबाइन चलाकर स्वच्छ बिजली बनाने में किया जाता है।

4. महासागरीय धाराएं (Ocean Currents) एवं विश्व के मत्स्यन क्षेत्र

महासागर की सतह पर निश्चित दिशा में नियमित रूप से बहने वाली जल की धाराओं को महासागरीय धाराएं कहते हैं। ये गर्म या ठंडी हो सकती हैं:

  • गर्म महासागरीय धाराएं (Warm Currents): ये सामान्यतः भूमध्य रेखा के निकट उत्पन्न होती हैं और ध्रुवों की ओर बहती हैं। उदाहरण: गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream)। ये जिस तट से गुजरती हैं, वहां के तापमान को बढ़ा देती हैं।
  • ठंडी महासागरीय धाराएं (Cold Currents): ये ध्रुवों या उच्च अक्षांशों से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की ओर बहती हैं। उदाहरण: लैब्राडोर धारा (Labrador Current)।
विश्व के सर्वश्रेष्ठ मत्स्यन क्षेत्र (Fishing Grounds): जहाँ गर्म और ठंडी जलधाराएं आपस में मिलती हैं, वह स्थान विश्व भर में मछली पकड़ने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है; जैसे—जापान के आसपास का समुद्र तथा उत्तरी अमेरिका का पूर्वी तटीय क्षेत्र (न्यूफाउंडलैंड)। यहाँ मछलियों के लिए अनुकूल पोषक प्लवक (Plankton) प्रचुरता में पनपते हैं। यद्यपि ऐसे क्षेत्रों में घना कोहरा (Fog) भी पड़ता है जिससे जहाजों के नौपरिवहन में बाधा आती है।

Key Historical Terms, Chronology & Administrative Principles

जल चक्र के तीन चरण
वाष्पीकरण (Evaporation) ➔ संघनन (Condensation) ➔ वर्षण (Precipitation)
जल का सार्वभौमिक संतुलन
औसत महासागरीय लवणता
35 ग्राम प्रति 1,000 ग्राम (35 ppt)
मृत सागर: 340 ग्राम/लीटर (अति सघन)
वृहत् ज्वार की स्थिति
सूर्य + चंद्रमा + पृथ्वी = 180° सीधी रेखा (पूर्णिमा व अमावस्या)
सर्वोच्च ज्वार तरंगें
लघु ज्वार की स्थिति
सूर्य ⊥ चंद्रमा = 90° समकोण (प्रथम व अंतिम चतुर्थांश)
न्यूनतम ज्वार स्तर
विश्व जल दिवस
22 मार्च (प्रतिवर्ष)
अलवण जल संरक्षण संकल्प

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
Q1 (जल वितरण समस्या): "पृथ्वी को नीला ग्रह कहते हैं क्योंकि इस पर 71% पानी है, फिर भी हम गंभीर जल संकट का सामना क्यों करते हैं?" व्याख्या कीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर:
1. खारे जल की अत्यधिक प्रचुरता: पृथ्वी पर मौजूद कुल जल का लगभग 97.3 प्रतिशत भाग महासागरों और समुद्रों में है, जो अत्यधिक खारा (लवणीय) होने के कारण पीने, घरेलू उपयोग और खेती के बिल्कुल अयोग्य है।
2. अलवण जल की सीमितता: पृथ्वी पर मीठा (अलवण) पानी 3 प्रतिशत से भी कम (2.7%) है। इस अलवण जल का भी लगभग 2% भाग ध्रुवों और ऊंचे पहाड़ों पर ग्लेशियर (बर्फ छत्रक) के रूप में जमा है जिसे हम सीधे उपयोग नहीं कर सकते।
3. उपलब्ध उपयोगी जल: नदियों, झीलों और भूमिगत जल के रूप में केवल 0.7 प्रतिशत से भी कम जल मानव के लिए उपलब्ध है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, प्रदूषण और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण इस सीमित जल की भारी कमी हो रही है।

Example 2
Q2 (खगोलीय कारण): "वृहत् ज्वार" (Spring Tides) और "लघु ज्वार" (Neap Tides) कब और क्यों उत्पन्न होते हैं? दोनों की खगोलीय स्थिति स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर:
1. वृहत् ज्वार (Spring Tides):
- खगोलीय स्थिति: पूर्णिमा (Full Moon) और अमावस्या (New Moon) के दिनों में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों अंतरिक्ष में एक सीधी रेखा (180°) में स्थित होते हैं।
- कारण: सूर्य और चंद्रमा दोनों का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव एक ही दिशा में संयुक्त रूप से लगता है, जिससे समुद्र का जल अपनी अधिकतम ऊंचाई तक ऊपर उठता है। इसे वृहत् ज्वार कहते हैं।
2. लघु ज्वार (Neap Tides):
- खगोलीय स्थिति: महीने के प्रथम और अंतिम चतुर्थांश (सातवें-आठवें दिन) में सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के केंद्र से समकोण (90°) पर होते हैं।
- कारण: सूर्य का गुरुत्वाकर्षण जल को एक दिशा में खींचता है और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण ठीक उसके लंबवत दूसरी दिशा में खींचकर उसके प्रभाव को कमजोर कर देता है। फलस्वरूप सबसे कम ऊंचाई वाला मंद ज्वार आता है जिसे लघु ज्वार कहते हैं।

Example 3
Q3 (व्यावहारिक भूगोल): उच्च ज्वार (High Tide) मानव जीवन और अर्थव्यवस्था के लिए किस प्रकार लाभदायक सिद्ध होता है? किन्हीं तीन बिंदुओं में उत्तर दीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर:
उच्च ज्वार मानव के लिए अत्यंत उपयोगी होता है:
1. नौपरिवहन में सहायक: उच्च ज्वार के समय समुद्र का जलस्तर कई मीटर ऊपर उठ जाता है। इससे बड़े-बड़े मालवाहक जहाज उथले प्रवेश द्वारों को पार करके बंदरगाहों तक सुरक्षित पहुँच जाते हैं (जैसे पश्चिम बंगाल में हुगली नदी पर स्थित कोलकाता बंदरगाह)।
2. मत्स्य पालन और मछली पकड़ना: ज्वार के पानी के तेज प्रवाह के साथ लाखों मछलियां तट और खाड़ियों के निकट आ जाती हैं, जिससे तटीय मछुआरों को गहरे समुद्र में जाए बिना प्रचुर मछलियां मिल जाती हैं।
3. ज्वारीय विद्युत ऊर्जा (Tidal Power): ज्वार के समय ऊपर चढ़ते और भाटे के समय उतरते पानी के तेज वेग से टरबाइन चलाकर प्रदूषण-मुक्त जल-विद्युत उत्पन्न की जाती है।

Example 4
Q4 (समुद्री धाराएं व मत्स्यन): विश्व के सबसे समृद्ध और सर्वोत्तम मछली पकड़ने वाले क्षेत्र किन समुद्री इलाकों में पाए जाते हैं और क्यों? उदाहरण दीजिए।
Step-by-Step Solution:

उत्तर:
1. मिलन क्षेत्र: विश्व के सर्वश्रेष्ठ मत्स्यन क्षेत्र उन समुद्री भागों में पाए जाते हैं जहाँ गर्म महासागरीय धारा और ठंडी महासागरीय धारा आपस में मिलती हैं।
2. कारण: दोनों विपरीत तापमान वाली धाराओं के मिलने से जल का तापमान न तो अत्यधिक गर्म रहता है और न ही बहुत ठंडा। इस आदर्श तापमान में "प्लवक" (Plankton) नामक सूक्ष्म जलीय पौधे और जीव भारी मात्रा में पनपते हैं, जो मछलियों का मुख्य और पसंदीदा भोजन हैं। अतः लाखों मछलियां वहां झुंड बनाकर रहती हैं।
3. प्रमुख उदाहरण:
- जापान के पास (जहाँ गर्म क्यूरोशियो और ठंडी ओयाशियो धारा मिलती है)।
- उत्तरी अमेरिका का पूर्वी तट (न्यूफाउंडलैंड के निकट, जहाँ गर्म गल्फ स्ट्रीम और ठंडी लैब्राडोर धारा मिलती है)।

Example 5
Q5 (आपदा विश्लेषण): 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सुनामी का मूल कारण क्या था? इसने भारत के किस भौगोलिक बिंदु को जलमग्न कर दिया?
Step-by-Step Solution:

उत्तर:
1. मूल कारण: 26 दिसंबर 2004 की सुबह इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पश्चिमी तट के निकट हिंद महासागर की तलहटी में 9.0 तीव्रता का महाविनाशकारी भूकंप आया। बर्मा प्लेट के नीचे भारतीय प्लेट के अचानक धंस जाने से समुद्र की तलहटी में भारी विस्थापन हुआ और अरबों टन पानी ऊपर उछलकर 15 से 20 मीटर ऊंची विशाल सुनामी तरंगों में बदल गया।
2. जलमग्न भौगोलिक बिंदु: इन 800 किमी/घंटा की गति वाली सुनामी तरंगों ने भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित "इंदिरा पॉइंट" (Indira Point - भारत संघ का सबसे दक्षिणतम बिंदु) को पूरी तरह समुद्र में जलमग्न कर दिया।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

ज्वार-भाटा को केवल हवा या आंधी-तूफान के कारण उठने वाली तरंगें समझना।

Scientific Reality & Correction

हवा से सामान्य तरंगें (Waves) बनती हैं; ज्वार-भाटा (Tides) सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण दिन में दो बार नियम से आते हैं।

Common Misconception

मृत सागर (Dead Sea) में किसी व्यक्ति के डूबने की आशंका व्यक्त करना।

Scientific Reality & Correction

मृत सागर में लवणता 340 ग्राम प्रति लीटर होने से जल का घनत्व अत्यधिक भारी होता है, जिससे कोई भी व्यक्ति इसमें डूब नहीं सकता बल्कि ऊपर तैरता रहता है।

Common Misconception

गल्फ स्ट्रीम को ठंडी और लैब्राडोर को गर्म धारा मान लेना।

Scientific Reality & Correction

गल्फ स्ट्रीम भूमध्य रेखा से आने वाली गर्म धारा है, जबकि लैब्राडोर ध्रुवों से आने वाली ठंडी धारा है।

Visual Learning & Conceptual Map

जल चक्र एवं महासागरीय परिसंचरण का वैज्ञानिक प्रवाह
वाष्पीकरण (Evaporation) ➔ संघनन (बादल) ➔ वर्षण (वर्षा/हिम) || ज्वार-भाटा (सूर्य-चंद्र गुरुत्व) ➕ धाराएं (गल्फ स्ट्रीम व लैब्राडोर)

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
जल चक्र वह निरंतर प्रक्रिया है जिसमें जल वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण द्वारा महासागर, वायुमंडल और भूमि में घूमता है।
Takeaway 2
पृथ्वी पर 97.3% जल महासागरों में लवणीय (खारा) है; पीने योग्य अलवण जल 1% से भी कम है।
Takeaway 3
महासागरों की औसत लवणता 35 भाग प्रति हजार है; इजराइल के मृत सागर में 340 ग्राम/लीटर लवणता होने से तैराक तैरते रहते हैं।
Takeaway 4
प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को संपूर्ण विश्व में "विश्व जल दिवस" (World Water Day) मनाया जाता है।
Takeaway 5
हवा के घर्षण से समुद्र की सतह पर तरंगें बनती हैं; भूकंप से उत्पन्न विनाशकारी तरंगों को "सुनामी" कहते हैं।
Takeaway 6
26 दिसंबर 2004 की सुनामी से अंडमान-निकोबार का "इंदिरा पॉइंट" पूरी तरह समुद्र में डूब गया।
Takeaway 7
दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का ऊपर उठना ज्वार तथा गिरना भाटा कहलाता है।
Takeaway 8
पूर्णिमा और अमावस्या को जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं, तो "वृहत् ज्वार" (Spring Tides) आते हैं।
Takeaway 9
प्रथम व अंतिम चतुर्थांश में जब सूर्य और चंद्रमा समकोण पर होते हैं, तो "लघु ज्वार" (Neap Tides) आते हैं।
Takeaway 10
गर्म (गल्फ स्ट्रीम) और ठंडी (लैब्राडोर) धाराओं के मिलन क्षेत्र विश्व के सर्वोत्तम मत्स्यन (मछली पकड़ने के) क्षेत्र हैं।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
पृथ्वी पर मौजूद कुल जल का कितने प्रतिशत भाग महासागरों में खारे जल के रूप में पाया जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: पृथ्वी पर मौजूद कुल जल का लगभग "97.3 प्रतिशत" भाग महासागरों में खारे जल के रूप में पाया जाता है।
2
प्रतिवर्ष "विश्व जल दिवस" किस तारीख को मनाया जाता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: प्रतिवर्ष "22 मार्च" को पूरे विश्व में विश्व जल दिवस (World Water Day) मनाया जाता है।
3
26 दिसंबर 2004 की सुनामी में भारत का कौन-सा प्रसिद्ध दक्षिणतम भौगोलिक बिंदु समुद्र में डूब गया था?
Reveal Answer & Explanation
Answer: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित भारत का दक्षिणतम बिंदु "इंदिरा पॉइंट" (Indira Point) समुद्र में डूब गया था।
4
पूर्णिमा और अमावस्या के दिनों में आने वाले अत्यधिक ऊंचे ज्वार को क्या कहते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: पूर्णिमा और अमावस्या के दिनों में आने वाले सर्वोच्च ज्वार को "वृहत् ज्वार" (Spring Tides) कहते हैं।
5
अटलांटिक महासागर में बहने वाली प्रसिद्ध गर्म और ठंडी जलधारा का एक-एक नाम बताइए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: गर्म जलधारा: "गल्फ स्ट्रीम" (Gulf Stream); ठंडी जलधारा: "लैब्राडोर धारा" (Labrador Current)।
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