Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Social Science • अध्याय 22
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

औरतों ने बदली दुनिया (Women Change the World)

इस अध्याय में हम महिलाओं के प्रति समाज की रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़ने वाली ऐतिहासिक व समकालीन वीरांगनाओं—झारखंड की प्रथम महिला लोको पायलट लक्ष्मी लाकड़ा, प्रथम आत्मकथा लेखिका राससुंदरी देवी ("अमार जीबोन"), रुकैया सखावत हुसैन ("सुल्ताना का सपना") तथा पंडिता रमाबाई (शारदा सदन/मुक्ति मिशन)—के संघर्षों, महिला शिक्षा के क्रांतिकारी इतिहास तथा महिला आंदोलन की रणनीतियों (अभियान, जागरूकता, विरोध व एकजुटता) का समग्र अध्ययन करेंगे।

जब 1905 में महिलाओं का बाहर निकलना मना था, तब एक 25 वर्षीय भारतीय महिला ने सौर ऊर्जा से उड़ने वाले हवाई जहाजों के 'लेडीलैंड' का सपना कैसे देखा?

एक समय था जब समाज का मानना था कि अगर कोई लड़की पढ़ेगी तो उसके पति की असमय मृत्यु हो जाएगी! उस घोर अंधकार में राससुंदरी देवी ने रसोई के धुएं और दीये की मद्धिम लौ में छिपकर अक्षर सीखे और भारत की पहली महिला आत्मकथा लिखी। वहीं रुकैया सखावत हुसैन ने 1905 में 'सुल्ताना का सपना' लिखकर पुरुषों के वर्चस्व को हिला दिया। महिलाओं ने केवल घर की चारदीवारी नहीं तोड़ी, बल्कि शिक्षा और आंदोलन के बल पर पूरी दुनिया का इतिहास बदल दिया।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह अध्याय विद्यार्थियों को यह सिखाता है कि आज लड़कियां जो स्कूल जा रही हैं, तकनीकी शिक्षा पा रही हैं और विभिन्न पेशों में शीर्ष पर पहुँच रही हैं, वह कोई सहज उपहार नहीं बल्कि पीढ़ियों के कठिन त्याग और महिला आंदोलन के विधिक संघर्षों (जैसे 2006 का घरेलू हिंसा कानून और विशाखा गाइडलाइन्स) का परिणाम है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कक्षा 6 और 7 के समानता, भेदभाव और मौलिक अधिकारों के सिद्धांतों की समझ।
  • 19वीं और 20वीं सदी के भारतीय सामाजिक सुधार आंदोलनों की सामान्य पृष्ठभूमि।
  • रूढ़िवादिता (Stereotyping) और पूर्वाग्रह (Prejudice) के मध्य अंतर।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • व्यवसायों और क्षमताओं के संदर्भ में प्रचलित लैंगिक रूढ़िवादिता (Stereotypes) का आलोचनात्मक विश्लेषण करना।
  • झारखंड के आदिवासी समाज से निकली उत्तरी रेलवे की प्रथम महिला ट्रेन चालक लक्ष्मी लाकड़ा के प्रेरणादायी संघर्ष को समझना।
  • राससुंदरी देवी ("अमार जीबोन"), रुकैया सखावत हुसैन ("सुल्ताना का सपना") और पंडिता रमाबाई के शिक्षा सुधारों का मूल्यांकन करना।
  • जनगणना आंकड़ों (1961 बनाम 2011) के माध्यम से अनुसूचित जाति/जनजाति की बालिकाओं में स्कूल ड्रॉपआउट के सामाजिक व आर्थिक कारणों को पहचानना।
  • महिला आंदोलन की चार प्रमुख रणनीतियों—अभियान (विधिक सुधार जैसे 2006 घरेलू हिंसा कानून), जन-जागरूकता, विरोध प्रदर्शन तथा अंतरराष्ट्रीय एकजुटता—की कार्यप्रणाली को समझना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. लैंगिक रूढ़िवादिता एवं रूढ़ियों...
2 2. शिक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष :...
3 3. स्कूली शिक्षा और असमानता के आंकड...
4 4. महिला आंदोलन एवं उसकी रणनीतियाँ...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. लैंगिक रूढ़िवादिता एवं रूढ़ियों को तोड़ती वीरांगना : लक्ष्मी लाकड़ा (Stereotypes & Laxmi Lakra)

समाज में यह रूढ़िवादी धारणा गहराई से बैठी है कि कुछ विशेष प्रकार के काम महिलाओं के लिए उपयुक्त हैं और कुछ पुरुषों के लिए। सर्वेक्षणों में अधिकांश लोग नर्स, शिक्षिका और घरेलू सहायिका के रूप में महिलाओं की कल्पना करते हैं, जबकि वैज्ञानिक, पायलट, इंजीनियर और भारी कारखाने के मजदूर के रूप में पुरुषों को देखते हैं।

रूढ़िवादिता का मनोवैज्ञानिक षड्यंत्र

माना जाता है कि महिलाएं कोमल, सहनशील और आज्ञाकारी होती हैं, इसलिए वे देखभाल संबंधी व्यवसायों के उपयुक्त हैं। इसके विपरीत, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए तकनीकी व तार्किक बुद्धि की आवश्यकता मानी जाती है जिसे समाज पुरुषों का एकाधिकार मान बैठता है। इस रूढ़ि के कारण लाखों प्रतिभाशाली बालिकाओं को इंजीनियरिंग या विज्ञान पढ़ने से रोका जाता है।

लक्ष्मी लाकड़ा : रूढ़ियों की पटरी पर दौड़ती ट्रेन

झारखंड के एक अत्यंत गरीब आदिवासी परिवार की 27 वर्षीय लक्ष्मी लाकड़ा ने उत्तर रेलवे (Northern Railways) की प्रथम महिला इंजन चालक (First Woman Engine Driver) बनकर इतिहास रच दिया।

  • कठिन पारिवारिक परिस्थितियों में सरकारी स्कूल से पढ़ाई की, घर का काम संभाला और फिर इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा हासिल किया।
  • रेलवे बोर्ड की कठिन परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि ट्रेन का इंजन चलाने के लिए पुरुष होना जरूरी नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता और संकल्प अनिवार्य है।
  • उनका प्रेरणादायी संदेश है: "मुझे जोखिम भरे काम पसंद हैं। जब भी लोग कहते हैं कि यह काम लड़कियों के लिए नहीं है, मैं उसे करके दिखाती हूँ।"

2. शिक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष : राससुंदरी देवी, रुकैया हुसैन एवं पंडिता रमाबाई

19वीं शताब्दी में बालिकाओं को पढ़ाना समाज में अपशकुन माना जाता था। ऐसी दकियानूसी सोच के विरुद्ध तीन महान महिलाओं ने शिक्षा का दीप जलाया।

राससुंदरी देवी (1800-1890)

पश्चिम बंगाल की एक कुलीन गृहिणी। 19वीं सदी के अंधकार में जब स्त्रियों की पढ़ाई वर्जित थी, उन्होंने रसोई के धुएं और रात के दीये की लौ में गुप्त रूप से पढ़ना सीखा।

60 वर्ष की आयु में उन्होंने 'अमार जीबोन' (Amar Jiban) लिखी, जो किसी भारतीय महिला द्वारा रचित प्रथम आत्मकथा है।

रुकैया सखावत हुसैन (1880-1932)

धनी परिवार में जन्म के बावजूद अंग्रेजी सीखने से रोका गया। भाई-बहन के सहयोग से अंग्रेजी सीखी।

1905 में 25 वर्ष की उम्र में 'सुल्ताना का सपना' (Sultana’s Dream) लिखा जिसमें सौर-ऊर्जा चालित विमानों वाले 'लेडीलैंड' की कल्पना की। 1910 में कोलकाता में लड़कियों का स्कूल खोला।

पंडिता रमाबाई (1858-1922)

संस्कृत की असाधारण विदुषी होने के कारण 'पंडिता' और 'सरस्वती' की उपाधि से विभूषित।

1898 में पुणे के खेडगांव में 'मुक्ति मिशन' और 'शारदा सदन' खोला, जहाँ विधवाओं को छापाखाना (Printing Press), बढ़ईगिरी व स्वतंत्र आजीविका सिखाई जाती थी।

3. स्कूली शिक्षा और असमानता के आंकड़े (Schooling & Learning Gaps Today)

यद्यपि भारत में साक्षरता दर 1961 में 40% (पुरुष) व 15% (महिला) से बढ़कर 2011 में 82% (पुरुष) व 65% (महिला) हो गई है, परंतु आज भी बालक-बालिका साक्षरता में लगभग 17% का भारी अंतर बना हुआ है।

दलित एवं आदिवासी बालिकाओं में स्कूल छोड़ने (Drop-out) के मूल कारण

  • गरीबी एवं संसाधनों का अभाव : गरीब परिवारों के पास जब पढ़ाई के सीमित पैसे होते हैं, तो वे लड़कों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं और बेटियों की पढ़ाई बंद करा देते हैं।
  • दूरी एवं परिवहन की कमी : ग्रामीण व दूरदराज इलाकों में मिडिल व हाई स्कूल कई किलोमीटर दूर होते हैं। सुरक्षित स्कूल बस या परिवहन के अभाव में माता-पिता लड़कियों को स्कूल नहीं भेजते।
  • स्कूलों में बुनियादी ढांचे का अभाव : अलग शौचालय (Separate Toilets) की कमी बालिकाओं के स्कूल छोड़ने का एक सबसे बड़ा कारण है।
  • जातिगत व सामाजिक भेदभाव : स्कूलों में शिक्षकों और सहपाठियों द्वारा दलित व आदिवासी बच्चों के साथ किया जाने वाला भेदभाव (जैसे ओमप्रकाश वाल्मीकि का अनुभव)।

4. महिला आंदोलन एवं उसकी रणनीतियाँ (The Women’s Movement & Strategies)

वर्तमान में महिलाओं के अधिकारों, कानूनी सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान के लिए जो बदलाव दिखते हैं, वे किसी एक व्यक्ति के नहीं बल्कि सामूहिक महिला आंदोलन (Women’s Movement) की देन हैं।

रणनीति (Strategy) कार्यप्रणाली एवं साधन प्रमुख ऐतिहासिक उपलब्धियां / कानून
1. अभियान (Campaigning) संसद और सरकार पर विधिक व कानूनी सुधार हेतु सामूहिक दबाव बनाना। • घरेलू हिंसा कानून (2006) : घर में शारीरिक/मानसिक प्रताड़ना के विरुद्ध विधिक सुरक्षा।
• विशाखा गाइडलाइन्स (1997) : कार्यस्थल व शिक्षण संस्थानों में यौन उत्पीड़न के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट के नियम।
• 1980 के दशक में दहेज हत्याओं के खिलाफ सख्त कानून।
2. जागरूकता बढ़ाना (Raising Awareness) गीत, नुक्कड़ नाटक, वृत्तचित्र, पोस्टर और सार्वजनिक रैलियों के माध्यम से समाज की मानसिकता बदलना। बेटी बचाओ, बाल-विवाह रोकथाम तथा कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध व्यापक जन-चेतना का प्रसार।
3. विरोध प्रकट करना (Protesting) जब सरकार या समाज अन्याय करता है, तो धरने, सार्वजनिक जुलूस और मोमबत्ती मार्च निकालना। रेप पीड़िताओं को न्याय दिलाने और कानून के लचर क्रियान्वयन के विरुद्ध व्यवस्था को जगाना।
4. बंधुत्व व एकजुटता (Showing Solidarity) अन्य महिलाओं और मानवाधिकार आंदोलनों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़े होना। • 8 मार्च : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विश्वव्यापी एकता।
• भारत-पाकिस्तान वाघा सीमा पर शांति एवं भाईचारे की मशालें जलाना।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण कानून 2006
घरेलू हिंसा अधिनियम 2006 ➔ साझा घर में रहने का अधिकार + शारीरिक/मानसिक/आर्थिक प्रताड़ना पर गैर-जमानती रोक
महिला आंदोलन के दशकों के निरंतर विधिक अभियानों की सबसे बड़ी जीत।
विशाखा गाइडलाइन्स (1997 सुप्रीम कोर्ट निर्देश)
कार्यस्थल / शिक्षण संस्थान ➔ अनिवार्य आंतरिक शिकायत समिति (ICC) + यौन उत्पीड़न से शून्य सहनशीलता
भंवरी देवी प्रकरण के बाद 1997 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा हेतु नियम।
अमार जीबोन प्रथम आत्मकथा समीकरण
राससुंदरी देवी (गुप्त स्वाध्याय) ➔ 'अमार जीबोन' (1876) = भारतीय महिला द्वारा रचित प्रथम आत्मकथा
19वीं सदी के बंगाल में रूढ़ियों को तोड़कर साहित्य के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज घटना।
सुल्ताना का सपना नारीवादी विज्ञान कथा (1905)
रुकैया सखावत हुसैन ➔ 'लेडीलैंड' (Sultana’s Dream) = सौर ऊर्जा विमान + वैज्ञानिक नारीवादी समाज
एशिया की पहली आधुनिक विज्ञान गल्प (Sci-Fi) कहानी जो महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बनी।
महिला आंदोलन की चतुष्कोणीय कार्यप्रणाली
महिला आंदोलन = अभियान (कानून) + जन-जागरूकता (नाटक/गीत) + विरोध प्रदर्शन (मार्च) + बंधुत्व एकजुटता
सामूहिक आवाज द्वारा सामाजिक, विधिक और आर्थिक न्याय हासिल करने का लोकतांत्रिक ढांचा।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
लक्ष्मी लाकड़ा कौन हैं और उनकी उपलब्धि समाज की किस गहरी रूढ़िवादिता पर सीधा प्रहार करती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. परिचय : लक्ष्मी लाकड़ा झारखंड के एक गरीब आदिवासी परिवार की महिला हैं, जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा पूरा कर उत्तर रेलवे (Northern Railways) की प्रथम महिला लोको पायलट (ट्रेन इंजन चालक) बनने का गौरव हासिल किया।

2. रूढ़िवादिता पर प्रहार :

  • समाज मानता था कि भारी मशीनें, तकनीकी उपकरण और रेलवे इंजन चलाना केवल पुरुषों के बस की बात है और महिलाएं केवल शिक्षण या नर्सिंग जैसे देखभाल के कामों के उपयुक्त हैं।
  • लक्ष्मी लाकड़ा ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परीक्षा पहले प्रयास में पास करके यह साबित कर दिया कि कोई भी पेशा किसी एक लिंग की जागीर नहीं है; अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी तकनीकी चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकती हैं।
उदाहरण 2
राससुंदरी देवी ने 19वीं सदी के अंधकार में पढ़ना-लिखना कैसे सीखा और उनकी आत्मकथा 'अमार जीबोन' का क्या ऐतिहासिक महत्व है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. सीखने का कठिन संघर्ष : 19वीं सदी के बंगाल में बालिकाओं को पढ़ाना अशुभ माना जाता था। राससुंदरी देवी का विवाह बाल्यकाल में एक धनी जमींदार परिवार में हो गया था। उन्होंने दिनभर के अथक चूल्हे-चौके और घरेलू कामकाज के बाद रात के अंधेरे में रसोई के धुएं और दीये की मद्धिम लौ में अपने बेटे की पुस्तक और चैतन्य भागवत के पन्नों से अक्षरों का मिलान कर गुप्त रूप से पढ़ना सीखा।

2. 'अमार जीबोन' का ऐतिहासिक महत्व : 60 वर्ष की आयु में उन्होंने बांग्ला भाषा में 'अमार जीबोन' (मेरा जीवन) पुस्तक लिखी। यह किसी भी भारतीय महिला द्वारा लिखी गई पहली आत्मकथा है। इस पुस्तक ने तत्कालीन भारतीय समाज में महिलाओं के घरेलू जीवन की दासता, उनके कष्टों और उनके सपनों को पहली बार दुनिया के सामने उजागर किया।

उदाहरण 3
रुकैया सखावत हुसैन द्वारा 1905 में लिखी गई कहानी 'सुल्ताना का सपना' (Sultana’s Dream) की मुख्य बातें क्या थीं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

मात्र 25 वर्ष की उम्र में लिखी गई यह कहानी विश्व साहित्य की सबसे शुरुआती और क्रांतिकारी नारीवादी विज्ञान-कथाओं में से एक है:

  • लेडीलैंड की कल्पना : कहानी में सुल्ताना सपने में 'लेडीलैंड' नामक एक ऐसे देश में पहुँचती है जहाँ सभी वैज्ञानिक खोजें और शासन महिलाओं के हाथों में है।
  • उन्नत तकनीक : लेडीलैंड की महिलाएं सौर ऊर्जा से चलने वाले उड़ने वाले वाहन (Flying Cars) चलाती हैं, वर्षा के बादलों को नियंत्रित करती हैं और युद्ध के हथियारों को समाप्त कर ज्ञान की शक्ति से देश की रक्षा करती हैं।
  • पर्दा प्रथा का उलटफेर : लेडीलैंड में आक्रामक और झगड़ालू पुरुषों को घरों के अंदर पर्दे में बंद रखा गया है जबकि महिलाएं बाहर स्वतंत्र होकर आकाश में उड़ती हैं। यह व्यंग्य उस समय महिलाओं पर थोपे गए पर्दे और पाबंदियों पर तीखा प्रहार था।
उदाहरण 4
पंडिता रमाबाई को 'पंडिता' की उपाधि क्यों दी गई और उन्होंने महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए क्या कार्य किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

1. उपाधि का कारण : उस दौर में जब महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार बंद थे, रमाबाई ने अपने माता-पिता से प्राचीन संस्कृत भाषा का गहन ज्ञान प्राप्त किया। वे बिना किसी औपचारिक स्कूल के संस्कृत पढ़ने-लिखने में इतनी पारंगत हो गईं कि कलकत्ता विश्वविद्यालय के विद्वानों ने उन्हें 'पंडिता' और 'सरस्वती' की सर्वोच्च उपाधियों से सम्मानित किया।

2. आर्थिक स्वावलंबन हेतु कार्य :

  • 1898 में पुणे के निकट खेडगांव में उन्होंने 'मुक्ति मिशन' और 'शारदा सदन' की स्थापना की।
  • यहाँ विधवाओं, बेसहारा और प्रताड़ित महिलाओं को केवल साक्षर ही नहीं बनाया जाता था, बल्कि उन्हें छपाईखाना (Printing Press) चलाना, बढ़ईगिरी (Carpentry), सिलाई-कढ़ाई और कई तकनीकी हुनर सिखाए जाते थे ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
उदाहरण 5
महिला आंदोलन की चार प्रमुख रणनीतियाँ कौन सी हैं? विशाखा गाइडलाइन्स और 2006 के घरेलू हिंसा कानून के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

महिला आंदोलन ने अपने अधिकारों को पाने के लिए निम्नलिखित चार सशक्त रणनीतियों का प्रयोग किया है:

  • 1. अभियान (Campaigning) : इसके तहत संसद और न्यायपालिका पर नए कानून बनाने का दबाव डाला गया। 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से रक्षा हेतु ऐतिहासिक विशाखा गाइडलाइन्स जारी कीं। इसी तरह महिलाओं के निरंतर अभियान से 2006 में घरेलू हिंसा कानून पारित हुआ, जिसने घर में होने वाली मार-पीट और मानसिक प्रताड़ना को संज्ञेय अपराध बनाया।
  • 2. जागरूकता बढ़ाना : समाज के रूढ़िवादी विचारों को बदलने के लिए नुक्कड़ नाटकों, गीतों, पोस्टरों और रैलियों का आयोजन किया जाता है।
  • 3. विरोध प्रकट करना : महिलाओं के साथ बलात्कार या हिंसा की घटनाओं में पुलिस की लचर कार्रवाई के खिलाफ धरने, मोमबत्ती मार्च और सामूहिक प्रदर्शन किए जाते हैं।
  • 4. बंधुत्व व एकजुटता : 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पूरी दुनिया की महिलाएं एक साथ आकर एकता का प्रदर्शन करती हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि विज्ञान, गणित और तकनीकी विषयों में पुरुष स्वाभाविक रूप से महिलाओं से बेहतर होते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वैज्ञानिक शोध सिद्ध करते हैं कि बौद्धिक क्षमता में लिंग के आधार पर कोई अंतर नहीं होता; यह समाज के पूर्वाग्रह हैं जो बालिकाओं को तकनीकी शिक्षा और संसाधनों के अवसर नहीं देते।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

राससुंदरी देवी की आत्मकथा 'अमार जीबोन' को हिंदी भाषा की पहली आत्मकथा समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

'अमार जीबोन' (1876) बांग्ला भाषा में लिखी गई थी, और यह किसी भी भारतीय भाषा में किसी महिला द्वारा रचित प्रथम पूर्ण आत्मकथा है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

महिला आंदोलन को केवल महिलाओं का पुरुषों के खिलाफ विरोध समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

महिला आंदोलन पुरुषों के खिलाफ नहीं बल्कि समाज में व्याप्त रूढ़ियों, पितृसत्तात्मक हिंसा और गैर-बराबरी के खिलाफ है, जिसमें हजारों संवेदनशील पुरुष भी बराबरी के हक के लिए महिलाओं के साथ संघर्ष करते हैं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

औरतों ने बदली दुनिया : रूढ़ियों को तोड़ती वीरांगनाएँ एवं महिला आंदोलन लक्ष्मी लाकड़ा • झारखंड की आदिवासी बेटी • उत्तर रेलवे की प्रथम महिला ट्रेन चालक • तकनीकी रूढ़ियों का अंत लोको पायलट प्रेरणा राससुंदरी देवी • 1800-1890 बंगाल • रसोई की लौ में पढ़ाई • 'अमार जीबोन' (1876) • भारत की प्रथम आत्मकथा अक्षर ज्ञान का संकल्प रुकैया सखावत • 1880-1932 समाज सुधारक • 'सुल्ताना का सपना' 1905 • लेडीलैंड : सौर विमान • 1910 कोलकाता बालिका स्कूल नारीवादी विज्ञान कथा पंडिता रमाबाई • संस्कृत विदुषी उपाधि • 1898 'मुक्ति मिशन' पुणे • शारदा सदन विधवा आश्रम • छापाखाना व बढ़ईगिरी आर्थिक आत्मनिर्भरता महिला आंदोलन की 4 रणनीतियाँ : अभियान (2006 कानून) + जन-जागरूकता + विरोध प्रदर्शन + बंधुत्व "शिक्षा और संघर्ष ने रूढ़ियों की जंजीरें तोड़ी हैं; समानता अब केवल एक मांग नहीं, हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।"

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
समाज में यह रूढ़िवादी धारणा गहराई से बैठी है कि तकनीकी व वैज्ञानिक काम पुरुषों के लिए और देखभाल के काम महिलाओं के लिए हैं।
मुख्य बिंदु 2
झारखंड के गरीब आदिवासी परिवार की बेटी लक्ष्मी लाकड़ा ने उत्तर रेलवे की प्रथम महिला इंजन चालक (लोको पायलट) बनकर रूढ़ियों को तोड़ा।
मुख्य बिंदु 3
19वीं सदी में बालिकाओं की शिक्षा को समाज में अशुभ और विधवापन का कारण मानने का गहरा अंधविश्वास व्याप्त था।
मुख्य बिंदु 4
राससुंदरी देवी ने रसोई के धुएं और दीये की लौ में छिपकर अक्षर सीखे और 60 वर्ष की उम्र में "अमार जीबोन" लिखी, जो भारत की पहली महिला आत्मकथा है।
मुख्य बिंदु 5
रुकैया सखावत हुसैन ने 1905 में मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजी में "सुल्ताना का सपना" लिखकर सौर-ऊर्जा विमानों वाले लेडीलैंड की कल्पना की।
मुख्य बिंदु 6
रुकैया हुसैन ने 1910 में कोलकाता में मुस्लिम बालिकाओं के लिए एक स्कूल स्थापित किया जो आज भी संचालित है।
मुख्य बिंदु 7
पंडिता रमाबाई ने असाधारण संस्कृत ज्ञान के लिए "पंडिता" की उपाधि पाई और 1898 में पुणे के खेडगांव में "मुक्ति मिशन" व शारदा सदन स्थापित किया।
मुख्य बिंदु 8
मुक्ति मिशन में बेसहारा महिलाओं को छापाखाना (प्रिंटिंग प्रेस) चलाने और बढ़ईगिरी जैसे आत्मनिर्भर हुनर सिखाए जाते थे।
मुख्य बिंदु 9
महिला आंदोलन की चार प्रमुख रणनीतियाँ हैं—अभियान (विधिक सुधार), जन-जागरूकता, विरोध प्रदर्शन तथा बंधुत्व/एकजुटता।
मुख्य बिंदु 10
महिला अभियानों के फलस्वरूप 2006 में घरेलू हिंसा संरक्षण कानून तथा 1997 में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने हेतु विशाखा गाइडलाइन्स बनीं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
उत्तरी रेलवे (Northern Railways) की प्रथम महिला रेल इंजन चालक (लोको पायलट) कौन बनीं और वे किस राज्य से हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लक्ष्मी लाकड़ा, झारखंड राज्य से।
लक्ष्मी लाकड़ा झारखंड के एक गरीब आदिवासी परिवार से हैं जिन्होंने रूढ़ियों को तोड़कर उत्तर रेलवे की पहली महिला इंजन चालक का पद संभाला।
2
भारतीय भाषा (बांग्ला) में किसी महिला द्वारा लिखी गई प्रथम आत्मकथा का क्या नाम है और इसकी लेखिका कौन थीं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 'अमार जीबोन' (Amar Jiban), लेखिका: राससुंदरी देवी।
राससुंदरी देवी ने 1876 में अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा "अमार जीबोन" (मेरा जीवन) प्रकाशित की जो भारतीय महिला द्वारा रचित पहली आत्मकथा है।
3
1905 में प्रसिद्ध नारीवादी विज्ञान कथा 'सुल्ताना का सपना' (Sultana’s Dream) किसने लिखी थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रुकैया सखावत हुसैन।
रुकैया सखावत हुसैन ने 25 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी में यह कहानी लिखी जिसमें सौर ऊर्जा चालित विमानों वाले देश 'लेडीलैंड' की कल्पना की गई थी।
4
पुणे के खेडगांव में 1898 में 'मुक्ति मिशन' और 'शारदा सदन' की स्थापना किस समाज सुधारक विदुषी ने की थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पंडिता रमाबाई।
पंडिता रमाबाई ने विधवाओं और बेसहारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुक्ति मिशन खोला जहाँ उन्हें छपाई और बढ़ईगिरी सिखाई जाती थी।
5
महिलाओं को घर के भीतर होने वाली शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना से सुरक्षा देने वाला 'घरेलू हिंसा कानून' किस वर्ष लागू हुआ?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वर्ष 2006 में।
महिला आंदोलन के विधिक अभियानों के परिणामस्वरूप 2006 में 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम' अस्तित्व में आया।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

कक्षा 7 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: हज़ार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल (Tracing Changes Through a Thousand Years) अध्याय 2: नए राजा और साम्राज्य (New Kings and Kingdoms) अध्याय 3: दिल्ली के सुल्तान (The Delhi Sultans) अध्याय 4: मुगल साम्राज्य (The Mughal Empire) अध्याय 5: शासक और इमारतें (Rulers and Buildings) अध्याय 6: नगर, व्यापारी और शिल्पकार (Towns, Traders and Craftspersons) अध्याय 7: जनजातियां, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय (Tribes, Nomads and Settled Communities) अध्याय 8: ईश्वर से अनुराग (Devotional Paths to the Divine) अध्याय 9: क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण (The Making of Regional Cultures) अध्याय 10: अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन (Eighteenth-Century Political Formations) अध्याय 11: पर्यावरण (Environment) अध्याय 12: हमारी पृथ्वी के अंदर (Inside Our Earth) अध्याय 13: हमारी बदलती पृथ्वी (Our Changing Earth) अध्याय 14: वायु (Air) अध्याय 15: जल (Water) अध्याय 16: मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Human-Environment Interactions: The Tropical and the Subtropical Region) अध्याय 17: रेगिस्तान में जीवन (Life in the Deserts) अध्याय 18: समानता (On Equality) (On Equality) अध्याय 19: स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका (Role of the Government in Health) अध्याय 20: राज्य शासन कैसे काम करता है (How the State Government Works) अध्याय 21: लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना (Growing Up as Boys and Girls) अध्याय 22: औरतों ने बदली दुनिया (Women Change the World) अध्याय 23: संचार माध्यमों को समझना (Understanding Media) अध्याय 24: हमारे आस-पास के बाज़ार (Markets Around Us) अध्याय 25: बाज़ार में एक कमीज़ (A Shirt in the Market) अध्याय 26: समानता के लिए संघर्ष (Struggles for Equality)

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

औरतों ने बदली दुनिया (Women Change the World) में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।