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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Mathematics • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 गणित का प्रथम अध्याय "परिमेय संख्याएँ" (Rational Numbers) आधुनिक अंकगणित एवं बीजगणित की आधारशिला है। पिछली कक्षाओं में हमने प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं तथा पूर्णांकों का अध्ययन किया था। परिमेय संख्याएँ वह व्यापक संख्या प्रणाली हैं जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा q ≠ 0 है। इस अध्याय में परिमेय संख्याओं के संवृत (Closure), क्रमविनिमेय (Commutative), साहचर्य (Associative) एवं गुणन के योग पर वितरण (Distributive) गुणधर्मों, योज्य तत्समक व प्रतिलोम, गुणात्मक तत्समक व प्रतिलोम (व्युत्क्रम), संख्या रेखा पर निरूपण तथा दो दी गई परिमेय संख्याओं के मध्य अपरिमित रूप से अनेक परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने की वैज्ञानिक विधियों का विस्तृत एवं परीक्षा-उपयोगी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

🍕 3 पिज्जा को 4 मित्रों में बराबर कैसे बाँटें, जब कोई भी पूर्णांक काम न आए?

कल्पना कीजिए कि आपके पास 3 सेब हैं और आपको उन्हें 4 दोस्तों में ठीक बराबर बाँटना है। क्या प्राकृत संख्याएँ (1, 2, 3...) या पूर्ण संख्याएँ आपकी सहायता कर सकती हैं? बिल्कुल नहीं! यहाँ हमें अंश और हर वाली संख्याओं की आवश्यकता होती है—प्रत्येक को मिलेगा 3/4 भाग। यदि तापमान शून्य से नीचे गिरकर आधा डिग्री सेल्सियस कम हो जाए, तो उसे -1/2°C लिखते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि 0 का कोई व्युत्क्रम क्यों नहीं होता? और किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच कितनी संख्याएँ छिपी होती हैं? आइए, संख्याओं के इस अनंत और आकर्षक ब्रह्मांड में प्रवेश करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखण्ड के दैनिक जीवन, बाजार में क्रय-विक्रय, भूमि मापन (डिसमिल, एकड़), वैज्ञानिक अनुसंधानों, सिविल इंजीनियरिंग के नक्शों और बैंकिंग वित्तीय गणनाओं में परिमेय संख्याओं का निरंतर प्रयोग होता है। यह अध्याय कक्षा 9 और 10 के वास्तविक संख्याओं (Real Numbers), अपरिमेय संख्याओं (Irrational Numbers) और उच्च बीजगणित का अनिवार्य आधार है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्राकृत संख्याएँ (N = {1, 2, 3...}) तथा पूर्ण संख्याएँ (W = {0, 1, 2...})।
  • पूर्णांक (Integers, Z = {..., -2, -1, 0, 1, 2...}) एवं उन पर धन व ऋण संक्रियाएँ।
  • साधारण भिन्न (Fractions: अंश और हर) तथा उनके ल.स.प. (LCM) द्वारा जोड़-घटाव।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • परिमेय संख्याओं की मानक परिभाषा (p/q, q ≠ 0) तथा धनात्मक व ऋणात्मक परिमेय संख्याओं की पहचान कर सकेंगे।
  • योग, व्यवकलन, गुणन और विभाजन संक्रियाओं के लिए संवृत, क्रमविनिमेय और साहचर्य गुणधर्मों का परीक्षण कर सकेंगे।
  • योज्य तत्समक (0), योज्य प्रतिलोम (-a/b), गुणात्मक तत्समक (1) तथा व्युत्क्रम (b/a) की सटीक गणना कर सकेंगे।
  • गुणन के योग पर वितरण नियम [a(b + c) = ab + ac] का प्रयोग कर जटिल व्यंजकों को सुगमता से हल कर सकेंगे।
  • संख्या रेखा पर परिमेय संख्याओं को निरूपित कर सकेंगे तथा किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच अभीष्ट संख्या में परिमेय संख्याएँ ज्ञात कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. परिमेय संख्या की अवधारणा, मानक र...
2 2. परिमेय संख्याओं के बीजगणितीय गुण...
3 3. तत्समक, प्रतिलोम एवं व्युत्क्रम...
4 4. संख्या रेखा पर निरूपण एवं दो संख...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. परिमेय संख्या की अवधारणा, मानक रूप एवं वर्गीकरण

ऐसी संख्या जिसे $\frac{p}{q}$ के रूप में व्यक्त किया जा सके, जहाँ $p$ और $q$ दोनों पूर्णांक (Integers) हों तथा $q \neq 0$ हो, परिमेय संख्या (Rational Number) कहलाती है। शब्द "परिमेय" (Rational) की उत्पत्ति "अनुपात" (Ratio) शब्द से हुई है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • सभी प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ और पूर्णांक परिमेय संख्याएँ हैं; जैसे $5 = \frac{5}{1}$, $0 = \frac{0}{1}$, $-7 = \frac{-7}{1}$।
  • शून्य (0) एक परिमेय संख्या है, क्योंकि इसे $\frac{0}{1}, \frac{0}{2}, \frac{0}{-5}$ के रूप में लिखा जा सकता है (यहाँ $p = 0$ तथा $q \neq 0$ है)।
  • शून्य से विभाजन अपरिभाषित (Undefined) है, इसलिए हर $q$ कभी भी शून्य नहीं हो सकता (जैसे $\frac{5}{0}$ कोई परिमेय संख्या नहीं है)।

धनात्मक बनाम ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ:

A. धनात्मक परिमेय संख्याएँ (Positive):

जब अंश और हर दोनों के चिह्न समान हों (दोनों धनात्मक या दोनों ऋणात्मक); जैसे—$\frac{3}{5}, \frac{-7}{-9} = \frac{7}{9}$।

B. ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ (Negative):

जब अंश और हर में से कोई एक ऋणात्मक हो; जैसे—$\frac{-4}{7}, \frac{5}{-8} = -\frac{5}{8}$।

परिमेय संख्या का मानक रूप (Standard Form):

किसी परिमेय संख्या $\frac{p}{q}$ को मानक रूप में कहा जाता है यदि:

  1. उसका हर ($q$) धनात्मक पूर्णांक हो।
  2. अंश ($p$) और हर ($q$) में 1 के अतिरिक्त कोई अन्य सार्व गुणनखंड न हो (अर्थात $p$ और $q$ सह-अभाज्य / Co-prime हों, HCF = 1)।
  3. उदाहरण: $\frac{36}{-54} = \frac{36 \div (-18)}{-54 \div (-18)} = \frac{-2}{3}$ (मानक रूप)।

2. परिमेय संख्याओं के बीजगणितीय गुणधर्म (Properties)

परिमेय संख्याओं के चार मौलिक गुणधर्म गणितीय संक्रियाओं के आधार हैं:

गुणधर्म (Property) योग (+) व्यवकलन (−) गुणन (×) विभाजन (÷)
1. संवृत गुणधर्म (Closure) हाँ ($a+b \in \mathbb{Q}$) हाँ ($a-b \in \mathbb{Q}$) हाँ ($a \times b \in \mathbb{Q}$) नहीं (शून्य से भाग संभव नहीं)
2. क्रमविनिमेयता (Commutative) हाँ ($a+b = b+a$) नहीं ($a-b \neq b-a$) हाँ ($ab = ba$) नहीं ($a \div b \neq b \div a$)
3. साहचर्यता (Associative) हाँ [$(a+b)+c = a+(b+c)$] नहीं हाँ [$(ab)c = a(bc)$] नहीं

4. गुणन का योग एवं व्यवकलन पर वितरण नियम (Distributive Property):

किन्हीं भी तीन परिमेय संख्याओं $a, b, c$ के लिए:

$$a \times (b + c) = (a \times b) + (a \times c)$$ $$a \times (b - c) = (a \times b) - (a \times c)$$

वितरण नियम जटिल गणनाओं को बहुत सरल बना देता है; जैसे कॉमन संख्या को बाहर लेकर कोष्ठक के भीतर योग ज्ञात करना।

3. तत्समक, प्रतिलोम एवं व्युत्क्रम की अवधारणा

A. योज्य तत्समक एवं योज्य प्रतिलोम:

  • योज्य तत्समक (Additive Identity): शून्य (0) परिमेय संख्याओं के लिए योज्य तत्समक है, क्योंकि किसी भी संख्या में 0 जोड़ने पर उसका मान अपरिवर्तित रहता है: $$a + 0 = 0 + a = a$$
  • योज्य प्रतिलोम (Additive Inverse / ऋण): किसी परिमेय संख्या $\frac{a}{b}$ का योज्य प्रतिलोम $-\frac{a}{b}$ होता है, क्योंकि दोनों का योग शून्य होता है: $$\frac{a}{b} + \left(-\frac{a}{b}\right) = 0$$ उदाहरण: $\frac{2}{8}$ का योज्य प्रतिलोम $-\frac{2}{8}$ है; और $-\frac{5}{9}$ का योज्य प्रतिलोम $\frac{5}{9}$ है।

B. गुणात्मक तत्समक एवं गुणात्मक प्रतिलोम (व्युत्क्रम):

  • गुणात्मक तत्समक (Multiplicative Identity): एक (1) परिमेय संख्याओं के लिए गुणात्मक तत्समक है, क्योंकि किसी भी संख्या को 1 से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है: $$a \times 1 = 1 \times a = a$$
  • गुणात्मक प्रतिलोम या व्युत्क्रम (Multiplicative Inverse / Reciprocal): किसी शून्येतर परिमेय संख्या $\frac{a}{b}$ का व्युत्क्रम $\frac{b}{a}$ होता है, क्योंकि उनका गुणनफल 1 होता है: $$\frac{a}{b} \times \frac{b}{a} = 1$$ उदाहरण: $-\frac{13}{19}$ का व्युत्क्रम $-\frac{19}{13}$ है।
  • विशेष सावधानियाँ:
    • शून्य (0) का कोई व्युत्क्रम नहीं होता, क्योंकि $\frac{1}{0}$ अपरिभाषित है।
    • संख्याएँ 1 और -1 अपने स्वयं के व्युत्क्रम हैं ($1 \times 1 = 1$, $-1 \times -1 = 1$)।

4. संख्या रेखा पर निरूपण एवं दो संख्याओं के मध्य परिमेय संख्याएँ

A. संख्या रेखा पर निरूपण:

संख्या रेखा पर 0 के दाईं ओर धनात्मक तथा बाईं ओर ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ स्थित होती हैं:

  • यदि किसी परिमेय संख्या $\frac{p}{q}$ को संख्या रेखा पर दर्शाना हो, तो संख्या रेखा के प्रत्येक इकाई अंतराल (जैसे 0 से 1, 1 से 2) को हर ($q$) के बराबर $q$ समान भागों में विभाजित करते हैं।
  • उदाहरण: $\frac{7}{4}$ को दर्शाने के लिए प्रत्येक इकाई दूरी को 4 बराबर भागों में बाँटेंगे और 0 से दाईं ओर 7वें बिंदु पर $\frac{7}{4}$ (या $1\frac{3}{4}$) अंकित करेंगे।

B. दो परिमेय संख्याओं के मध्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना (सघनता गुणधर्म):

किन्हीं दो प्राकृत संख्याओं या पूर्णांकों के बीच सीमित संख्याएँ होती हैं (जैसे 2 और 5 के बीच केवल 3 और 4), परंतु किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के मध्य अपरिमित रूप से अनेक (Infinitely Many) परिमेय संख्याएँ होती हैं। इसे परिमेय संख्याओं का सघनता गुणधर्म (Density Property) कहते हैं।

विधि 1: समान हर विधि (Same Denominator)

सर्वप्रथम दोनों संख्याओं के हरों को ल.स.प. द्वारा समान बनाते हैं। यदि अभीष्ट संख्याएँ न मिलें, तो अंश और हर में 10, 100 आदि से गुणा कर अंतराल बड़ा कर लेते हैं।

उदाहरण: $-\frac{2}{5}$ और $\frac{1}{2}$ के बीच 10 संख्याएँ ज्ञात करने हेतु हर को 20 या 40 बना लेते हैं।

विधि 2: माध्य / औसत विधि (Mean Method)

किन्हीं दो परिमेय संख्याओं $a$ और $b$ के ठीक बीच की परिमेय संख्या उनका औसत होती है:

$$c = \frac{a + b}{2}$$

इस प्रक्रिया को $a$ और $c$, तथा $c$ और $b$ के बीच दोहराकर जितनी चाहें उतनी संख्याएँ प्राप्त की जा सकती हैं।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

परिमेय संख्या की मानक परिभाषा (Standard Rational Number Form)
p / q (जहाँ p, q ∈ ℤ तथा q ≠ 0, HCF(p,q) = 1)
संख्या रेखा पर प्रत्येक परिमेय संख्या एक अद्वितीय बिंदु को निरूपित करती है।
गुणन का वितरण नियम (Distributive Property of Multiplication)
a · (b + c) = a·b + a·c तथा a · (b - c) = a·b - a·c
जहाँ a, b, c कोई भी तीन परिमेय संख्याएँ हैं।
योज्य एवं गुणात्मक प्रतिलोम (Additive & Multiplicative Inverse)
Additive: a/b + (-a/b) = 0 ; Multiplicative: (a/b) · (b/a) = 1
0 का कोई गुणात्मक प्रतिलोम नहीं होता; 1 और -1 स्वयं के व्युत्क्रम होते हैं।
माध्य विधि द्वारा मध्यस्थ परिमेय संख्या (Mean Method for In-between Rational Number)
Mid = (a + b) / 2
संख्या Mid सदैव a और b के ठीक बीच में स्थित होती है (a < Mid < b)।
समान हर रूपांतरण (Equal Denominator Scale Factor)
(p · k) / (q · k) = p / q (तुल्य भिन्न / Equivalent Fractions)
अंश और हर में समान शून्येतर पूर्णांक k से गुणा करने पर मान अपरिवर्तित रहता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
उचित गुणधर्मों के उपयोग से मान ज्ञात कीजिए:\n$$-\frac{2}{3} \times \frac{3}{5} + \frac{5}{2} - \frac{3}{5} \times \frac{1}{6}$$
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nदी गई व्यंजक:\n$$-\frac{2}{3} \times \frac{3}{5} + \frac{5}{2} - \frac{3}{5} \times \frac{1}{6}$$\n\nक्रमविनिमेयता गुणधर्म से पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:\n$$= -\frac{2}{3} \times \frac{3}{5} - \frac{3}{5} \times \frac{1}{6} + \frac{5}{2}$$\n\nवितरण नियम [$a(b + c) = ab + ac$] से $\frac{3}{5}$ को उभयनिष्ठ (Common) लेने पर:\n$$= \frac{3}{5} \left[ -\frac{2}{3} - \frac{1}{6} \right] + \frac{5}{2}$$\n\nकोष्ठक के भीतर 3 और 6 का ल.स.प. = 6:\n$$-\frac{2}{3} - \frac{1}{6} = \frac{-4 - 1}{6} = \frac{-5}{6}$$\n\nअब गुणा करने पर:\n$$= \frac{3}{5} \times \left(\frac{-5}{6}\right) + \frac{5}{2}$$\n$$= \frac{-15}{30} + \frac{5}{2} = -\frac{1}{2} + \frac{5}{2}$$\n$$= \frac{-1 + 5}{2} = \frac{4}{2} = 2$$\n\nउत्तर: मान 2 है।
उदाहरण 2
निम्नांकित के योज्य प्रतिलोम (Additive Inverse) तथा गुणात्मक प्रतिलोम (Multiplicative Inverse) ज्ञात कीजिए:\n(i) $\frac{2}{8}$ (ii) $-\frac{5}{9}$ (iii) $-13$ (iv) $-\frac{5}{8} \times \left(-\frac{3}{7}\right)$
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n(i) $\frac{2}{8}$:\n- योज्य प्रतिलोम = $-\frac{2}{8} = -\frac{1}{4}$\n- गुणात्मक प्रतिलोम = $\frac{8}{2} = 4$\n\n(ii) $-\frac{5}{9}$:\n- योज्य प्रतिलोम = $\frac{5}{9}$\n- गुणात्मक प्रतिलोम = $-\frac{9}{5}$\n\n(iii) $-13 = -\frac{13}{1}$:\n- योज्य प्रतिलोम = $13$\n- गुणात्मक प्रतिलोम = $-\frac{1}{13}$\n\n(iv) $-\frac{5}{8} \times \left(-\frac{3}{7}\right) = \frac{15}{56}$:\n- योज्य प्रतिलोम = $-\frac{15}{56}$\n- गुणात्मक प्रतिलोम = $\frac{56}{15}$
उदाहरण 3
$-\frac{2}{5}$ और $\frac{1}{2}$ के मध्य 10 परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nदी गई संख्याएँ हैं: $-\frac{2}{5}$ और $\frac{1}{2}$\n\nचरण 1: हर 5 और 2 का ल.स.प. = 10 है।\n$$-\frac{2}{5} = -\frac{2 \times 2}{5 \times 2} = -\frac{4}{10}$$\n$$\frac{1}{2} = \frac{1 \times 5}{2 \times 5} = \frac{5}{10}$$\n\n$-4$ और $5$ के बीच केवल 8 पूर्णांक (-3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, 4) हैं, जबकि हमें 10 संख्याएँ चाहिए।\n\nचरण 2: अंश और हर दोनों में 2 से गुणा करके हर को 20 बना लेते हैं:\n$$-\frac{4}{10} = \frac{-4 \times 2}{10 \times 2} = -\frac{8}{20}$$\n$$\frac{5}{10} = \frac{5 \times 2}{10 \times 2} = \frac{10}{20}$$\n\nचरण 3: $-8$ और $10$ के बीच कोई भी 10 पूर्णांक चुनते हैं:\n$$-7, -6, -5, -4, -3, -2, -1, 0, 1, 2$$\n\nअतः अभीष्ट 10 परिमेय संख्याएँ हैं:\n$$-\frac{7}{20}, -\frac{6}{20}, -\frac{5}{20}, -\frac{4}{20}, -\frac{3}{20}, -\frac{2}{20}, -\frac{1}{20}, 0, \frac{1}{20}, \frac{2}{20}$$
उदाहरण 4
सत्यापित कीजिए कि $-(-x) = x$ निम्नलिखित के लिए सत्य है:\n(i) $x = \frac{11}{15}$ (ii) $x = -\frac{13}{17}$
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n(i) $x = \frac{11}{15}$:\n$x$ का योज्य प्रतिलोम $-x = -\frac{11}{15}$ है।\nअब $-x$ का योज्य प्रतिलोम $-(-x)$ होगा।\nचूँकि $-\frac{11}{15} + \frac{11}{15} = 0$, अतः $-(-x) = \frac{11}{15} = x$।\nसत्यापित हुआ।\n\n(ii) $x = -\frac{13}{17}$:\n$-x = -\left(-\frac{13}{17}\right) = \frac{13}{17}$\nअब $-(-x) = -\left(\frac{13}{17}\right) = -\frac{13}{17} = x$।\nसत्यापित हुआ।
उदाहरण 5
माध्य (औसत) विधि का प्रयोग करके $\frac{1}{4}$ और $\frac{1}{2}$ के ठीक मध्य की परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nसूत्र:\n$$\text{मध्यस्थ संख्या } = \frac{a + b}{2}$$\n\nयहाँ $a = \frac{1}{4}$ तथा $b = \frac{1}{2}$:\n$$a + b = \frac{1}{4} + \frac{1}{2} = \frac{1 + 2}{4} = \frac{3}{4}$$\n\nअतः:\n$$\text{मध्यस्थ संख्या} = \frac{3/4}{2} = \frac{3}{4 \times 2} = \frac{3}{8}$$\n\nजाँच:\n$\frac{1}{4} = \frac{2}{8}$ तथा $\frac{1}{2} = \frac{4}{8}$। स्पष्ट है कि $\frac{2}{8} < \frac{3}{8} < \frac{4}{8}$।\nउत्तर: अभीष्ट संख्या $\frac{3}{8}$ है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर 0 का व्युत्क्रम (Multiplicative Inverse) 0 या 1/0 लिख देते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

शून्य (0) का कोई व्युत्क्रम नहीं होता है, क्योंकि किसी भी संख्या को 0 से गुणा करने पर 1 प्राप्त नहीं हो सकता तथा 1/0 अपरिभाषित है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

योज्य प्रतिलोम (Additive Inverse) और गुणात्मक प्रतिलोम (Reciprocal) में भ्रमित होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

योज्य प्रतिलोम में केवल चिह्न बदलता है (जैसे 3/4 का -3/4), जबकि गुणात्मक प्रतिलोम में अंश और हर आपस में बदल जाते हैं (जैसे 3/4 का 4/3)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

व्यवकलन (घटाव) और विभाजन में क्रमविनिमेय नियम लागू करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

परिमेय संख्याओं में व्यवकलन और भाग क्रमविनिमेय नहीं होते; a - b ≠ b - a तथा a ÷ b ≠ b ÷ a (जैसे 5 - 2 = 3 परंतु 2 - 5 = -3)।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers): गुणधर्म, संख्या रेखा एवं सघनता A. संख्या रेखा पर परिमेय संख्याओं का निरूपण (Number Line) -2 -1 0 +1 +2 -1/2 +3/4 +5/3 किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के मध्य अपरिमित रूप से अनेक परिमेय संख्याएँ स्थित होती हैं 1. बीजगणितीय गुणधर्म • संवृत: +, −, × में संवृत • भाग (÷) में संवृत नहीं (0 से भाग) • क्रमविनिमेय: a + b = b + a • साहचर्य: (a+b)+c = a+(b+c) व्यवकलन व भाग में क्रमविनिमेय नहीं 2. तत्समक व प्रतिलोम • योज्य तत्समक = 0 (a + 0 = a) • योज्य प्रतिलोम: a/b ⇒ -a/b • गुणात्मक तत्समक = 1 (a × 1 = a) • व्युत्क्रम (Reciprocal): a/b ⇒ b/a 0 का कोई व्युत्क्रम नहीं होता 3. वितरण नियम (Distributivity) a(b + c) = a·b + a·c • a(b − c) = a·b − a·c • माध्य विधि: Mid = (a + b)/2 जटिल गणनाओं का तीव्र सरलीकरण

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. परिमेय संख्या वह संख्या है जिसे p/q के रूप में व्यक्त किया जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा q ≠ 0 है।
मुख्य बिंदु 2
  1. परिमेय संख्याएँ योग, व्यवकलन तथा गुणन के अंतर्गत संवृत हैं, परंतु विभाजन के अंतर्गत संवृत नहीं हैं (क्योंकि शून्य से भाग अपरिभाषित है)।
मुख्य बिंदु 3
  1. योग और गुणन परिमेय संख्याओं के लिए क्रमविनिमेय तथा साहचर्य हैं, परंतु व्यवकलन और भाग क्रमविनिमेय या साहचर्य नहीं हैं।
मुख्य बिंदु 4
  1. शून्य (0) परिमेय संख्याओं के लिए योज्य तत्समक है; किसी संख्या a/b का योज्य प्रतिलोम -a/b होता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. संख्या एक (1) परिमेय संख्याओं के लिए गुणात्मक तत्समक है; किसी शून्येतर संख्या a/b का गुणात्मक प्रतिलोम (व्युत्क्रम) b/a होता है।
मुख्य बिंदु 6
  1. शून्य (0) का कोई व्युत्क्रम नहीं होता; 1 तथा -1 स्वयं के व्युत्क्रम हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. गुणन का योग तथा व्यवकलन पर वितरण नियम: a(b + c) = ab + ac तथा a(b - c) = ab - ac।
मुख्य बिंदु 8
  1. परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित किया जा सकता है; प्रत्येक परिमेय संख्या संख्या रेखा के एक अद्वितीय बिंदु से संबंधित होती है।
मुख्य बिंदु 9
  1. किन्हीं दो दी गई परिमेय संख्याओं के मध्य अपरिमित रूप से अनेक परिमेय संख्याएँ स्थित होती हैं।
मुख्य बिंदु 10
  1. दो परिमेय संख्याओं a और b के मध्य परिमेय संख्या ज्ञात करने के लिए समान हर विधि अथवा माध्य विधि [(a + b)/2] का प्रयोग किया जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
क्या शून्य (0) एक परिमेय संख्या है? इसे p/q के रूप में कैसे लिखा जा सकता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हाँ, शून्य एक परिमेय संख्या है। इसे 0/1, 0/2 या 0/-5 के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p = 0 और q ≠ 0 दोनों पूर्णांक हैं।
परिमेय संख्या की शर्त है कि हर शून्य नहीं होना चाहिए (q ≠ 0), अंश शून्य हो सकता है।
2
शून्य (0) का व्युत्क्रम (Reciprocal) क्यों नहीं होता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि यदि हम 0 = 0/1 का व्युत्क्रम करें तो 1/0 प्राप्त होगा, और शून्य से विभाजन गणित में अपरिभाषित (Undefined) है।
किसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने पर कभी 1 प्राप्त नहीं हो सकता।
3
संख्याओं 1 और -1 के व्युत्क्रम क्या हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 का व्युत्क्रम 1 है तथा -1 का व्युत्क्रम -1 है। ये दोनों संख्याएँ स्वयं के व्युत्क्रम हैं।
1 × 1 = 1 तथा (-1) × (-1) = 1, अतः दोनों का गुणनफल गुणात्मक तत्समक (1) देता है।
4
परिमेय संख्याओं के लिए कौन सी दो संक्रियाएँ क्रमविनिमेय (Commutative) नहीं हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: व्यवकलन (घटाव) और विभाजन (भाग) परिमेय संख्याओं के लिए क्रमविनिमेय नहीं हैं।
a - b ≠ b - a (जैसे 3 - 2 ≠ 2 - 3) तथा a ÷ b ≠ b ÷ a (जैसे 6 ÷ 2 ≠ 2 ÷ 6)।
5
किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच कितनी परिमेय संख्याएँ होती हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच अपरिमित रूप से अनेक (Infinitely Many) परिमेय संख्याएँ होती हैं।
इसे परिमेय संख्याओं का सघनता गुणधर्म (Density Property) कहते हैं; माध्य विधि द्वारा निरंतर नई संख्याएँ निकाली जा सकती हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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