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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 8 • Science • अध्याय 11
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical Effects of Electric Current)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) एवं NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा 8 विज्ञान का ग्यारहवाँ अध्याय "विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव" (Chemical Effects of Electric Current) विद्युत-रसायन (Electrochemistry) और आधुनिक औद्योगिक धातुकर्म की आधारशिला है। हम जानते हैं कि ताँबा, लोहा और एल्युमिनियम जैसे ठोस धातु विद्युत का सुचालन करते हैं, परंतु क्या द्रव भी विद्युत चालन कर सकते हैं? इस अध्याय में द्रवों में विद्युत चालन की वैज्ञानिक जाँच (सुचालक बनाम हीन चालक), दुर्बल धाराओं के संसूचन हेतु एलईडी (LED) टेस्टर का उपयोग, विद्युत अपघटन (Electrolysis) की रासायनिक परिघटनाएँ (इलेक्ट्रोडों पर गैसों के बुलबुले, धातुओं का निक्षेपण, विलयन के रंग में परिवर्तन) तथा आधुनिक उद्योगों में विद्युतलेपन (Electroplating) के बहुआयामी अनुप्रयोगों का अत्यंत प्रामाणिक, विश्लेषणात्मक व परीक्षा-उपयोगी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

🚲 नई साइकिल की चमचमाती घंटी और कार के बंपर पर कभी जंग क्यों नहीं लगती?

क्या आपने कभी गौर किया है कि बाजार में मिलने वाले सस्ते आभूषण सोने और चाँदी की तरह जगमगाते कैसे हैं? बाथरूम के नल और साइकिल के हैंडल पर स्टील जैसी चमकदार परत कैसे चढ़ाई जाती है? जब शुद्ध आसुत जल में विद्युत प्रवाहित की जाती है तो बल्ब नहीं जलता, परंतु उसमें चुटकी भर साधारण नमक डालते ही बल्ब तेज रोशनी से क्यों चमक उठता है? और एक आलू में दो तार चुभोकर विद्युत गुजारने पर धन सिरे वाले तार के चारों ओर एक हरा-नीला धब्बा क्यों बन जाता है? यह कोई जादुई चमत्कार नहीं, बल्कि विद्युत धारा का वह अद्भुत रासायनिक प्रभाव है जो अणुओं को तोड़कर नए रूप में ढाल देता है। आइए, विद्युत और रसायन के इस अनूठे संगम को गहराई से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

झारखण्ड भारत की औद्योगिक राजधानी है, जहाँ जमशेदपुर, राँची, धनबाद और बोकारो में भारी इंजीनियरिंग और मेटल प्लेटिंग इकाइयाँ कार्यरत हैं। लोहे के विशाल पुलों और वाहनों को संक्षारण (Rusting) से बचाने के लिए यशदलेपन (Galvanization) और क्रोमियम प्लेटिंग अनिवार्य है। मोबाइल बैटरियों, सोलर सेलों और इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसरों के विकास में विद्युत धारा के रासायनिक प्रभावों का मौलिक ज्ञान होना हर तकनीकी छात्र के लिए अनिवार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • विद्युत परिपथ (Electric Circuit) के मौलिक घटक: सेल, स्विच, संयोजक तार और बल्ब।
  • विद्युत के चालक (Conductors) तथा कुचालक (Insulators) की प्राथमिक समझ।
  • अम्ल (Acids), क्षारक (Bases) और लवण (Salts) की मूलभूत रासायनिक प्रकृति।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विभिन्न द्रवों (आसुत जल, नल का जल, नींबू का रस, सिरका, लवण घोल) की विद्युत चालकता का प्रायोगिक परीक्षण कर सकेंगे।
  • दुर्बल विद्युत धाराओं के परीक्षण के लिए एलईडी (LED) तथा चुंबकीय सुई टेस्टर की कार्यप्रणाली समझा सकेंगे।
  • जल के विद्युत अपघटन (Electrolysis of Water) में हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के विमुक्तीकरण को सप्रमाण निरूपित कर सकेंगे।
  • विद्युतलेपन (Electroplating) की वैज्ञानिक क्रियाविधि, परिपथ व्यवस्था और औद्योगिक अनुप्रयोगों का विशद विश्लेषण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. क्या द्रव विद्युत का चालन करते ह...
2 2. दुर्बल धाराओं का परीक्षण: LED एव...
3 3. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव...
4 4. विद्युतलेपन (Electroplating): सि...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. क्या द्रव विद्युत का चालन करते हैं? चालक बनाम हीन चालक

वे पदार्थ जो अपने में से विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित होने देते हैं, उन्हें विद्युत के सुचालक (Good Conductors) कहते हैं, तथा जो आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते, उन्हें हीन चालक (Poor Conductors) कहते हैं। ठोसों की तरह कई द्रव भी विद्युत का चालन करते हैं:

परीक्षण द्रव विद्युत धारा का संवहन चालकता की श्रेणी वैज्ञानिक कारण
आसुत जल (Distilled Water) बल्ब नहीं जलता हीन चालक / कुचालक इसमें कोई घुले हुए खनिज लवण या मुक्त आयन ($H^+, OH^-$ को छोड़कर) नहीं होते।
नल / कुएँ / तालाब का जल बल्ब जलता है सुचालक इसमें अल्प मात्रा में प्राकृतिक खनिज लवण घुले होते हैं जो मुक्त आयन प्रदान करते हैं।
नींबू का रस / सिरका बल्ब जलता है सुचालक साइट्रिक अम्ल और एसीटिक अम्ल जल में वियोजित होकर आयन बनाते हैं।
नमक का जलीय घोल (NaCl) बल्ब बहुत तेज जलता है उत्कृष्ट सुचालक सोडियम ($Na^+$) और क्लोराइड ($Cl^-$) आयनों की प्रचुरता के कारण।
वनस्पति तेल / शहद / चीनी का घोल बल्ब नहीं जलता हीन चालक ये सहसंयोजक यौगिक हैं और जल में आयनों में नहीं टूटते।

सर्वव्यापी निष्कर्ष (Universal Principle):

विद्युत का चालन करने वाले अधिकांश द्रव अम्लों (Acids), क्षारकों (Bases) तथा लवणों (Salts) के जलीय विलयन होते हैं, क्योंकि इनमें स्वतंत्र रूप से गति करने वाले धनायन (Cations) और ऋणायन (Anions) उपस्थित होते हैं।

2. दुर्बल धाराओं का परीक्षण: LED एवं चुंबकीय सुई टेस्टर

कभी-कभी द्रव में से विद्युत धारा तो प्रवाहित होती है, परंतु वह इतनी दुर्बल (Weak) होती है कि साधारण टॉर्च के बल्ब का फिलामेंट पर्याप्त गर्म नहीं हो पाता और बल्ब प्रदीप्त नहीं होता। ऐसे में हमें अधिक संवेदनशील परीक्षकों (Testers) की आवश्यकता होती है:

A. प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED - Light Emitting Diode) टेस्टर:

एलईडी एक ऐसा अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक अवयव है जो अत्यंत दुर्बल विद्युत धारा प्रवाहित होने पर भी दीप्त हो उठता है:

  • एलईडी से दो तार (लीड्स / Leads) जुड़े होते हैं। एक तार दूसरे की तुलना में थोड़ा लंबा होता है।
  • ध्रुवता नियम (Polarity Rule): परिपथ में जोड़ते समय लंबे तार को सदैव बैटरी के धन टर्मिनल (+ve) से तथा छोटे तार को बैटरी के ऋण टर्मिनल (-ve) से जोड़ा जाता है। उल्टा जोड़ने पर एलईडी प्रकाश उत्सर्जित नहीं करेगी।

B. चुंबकीय सुई (Compass Needle) टेस्टर:

जब किसी चालक तार में से थोड़ी-सी भी विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है (विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव)।

  • माचिस की खाली डिब्बी में छोटी चुंबकीय दिक्सूचक सुई रखकर उसके ऊपर विद्युत तार के कई फेरे लपेटे जाते हैं।
  • जब परीक्षक के दोनों स्वतंत्र सिरों को किसी हीन चालक द्रव में डुबोया जाता है, तो अत्यंत सूक्ष्म धारा बहने पर भी चुंबकीय सुई में तुरंत विक्षेप (Deflection) उत्पन्न होता है।

3. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव एवं जल का विद्युत अपघटन

जब किसी चालक विलयन में से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह विलयन में रासायनिक अभिक्रियाएँ उत्पन्न करती है। इसे विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव (Chemical Effect of Electric Current) कहते हैं। इसके मुख्य रासायनिक साक्ष्य निम्नलिखित हैं:

  1. इलेक्ट्रोडों पर गैस के बुलबुले बनना: सन् 1800 में ब्रिटिश रसायनज्ञ विलियम निकोलसन (William Nicholson) ने दर्शाया कि जब अम्लीकृत जल में डूबे कार्बन/प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो:
    • बैटरी के ऋण टर्मिनल से जुड़े इलेक्ट्रोड (कैथोड) पर हाइड्रोजन गैस ($H_2$) के बुलबुले बनते हैं।
    • बैटरी के धन टर्मिनल से जुड़े इलेक्ट्रोड (एनोड) पर ऑक्सीजन गैस ($O_2$) के बुलबुले बनते हैं। ($2H_2O \xrightarrow{\text{विद्युत}} 2H_2 \uparrow + O_2 \uparrow$)
  2. इलेक्ट्रोडों पर धातुओं का निक्षेपण: कॉपर सल्फेट विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर ताँबे की लाल-भूरी परत जमा हो जाती है।
  3. विलयन के रंग में परिवर्तन: रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप विद्युत अपघट्य के रंग में परिवर्तन आ जाता है।
  4. आलू का रासायनिक परीक्षण: ताजे कटे आलू में दो ताँबे के तार चुभोकर बैटरी से जोड़ने पर, धन टर्मिनल (+ve) से जुड़े तार के चारों ओर आलू में हरा-नीला धब्बा (Greenish-blue spot) बन जाता है। यह रासायनिक अभिक्रिया किसी छिपी हुई बैटरी के धन सिरे की पहचान करने में भी उपयोगी है।

4. विद्युतलेपन (Electroplating): सिद्धांत, परिपथ एवं औद्योगिक अनुप्रयोग

विद्युत धारा द्वारा किसी वांछित धातु की परत किसी अन्य पदार्थ या धातु की वस्तु पर निक्षेपित (चढ़ाने) करने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन (Electroplating) कहते हैं। यह विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और व्यापक औद्योगिक अनुप्रयोग है।

विद्युतलेपन की कार्यविधि (ताँबे का लेपन):

  • विद्युत अपघट्य (Electrolyte): बीकर में कॉपर सल्फेट ($CuSO_4$) का जलीय विलयन लिया जाता है, जिसमें चालकता बढ़ाने के लिए कुछ बूँदें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ($H_2SO_4$) की मिलाई जाती हैं।
  • एनोड (+ve इलेक्ट्रोड): शुद्ध ताँबे की प्लेट को बैटरी के धन टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
  • कैथोड (-ve इलेक्ट्रोड): जिस वस्तु पर लेपन करना है (जैसे चम्मच, चाबी या लोहे की प्लेट), उसे बैटरी के ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
  • अभिक्रिया: धारा प्रवाहित करने पर $CuSO_4$ अपने आयनों में वियोजित होता है: $$CuSO_4 \rightleftharpoons Cu^{2+} + SO_4^{2-}$$ धनायनित कॉपर ($Cu^{2+}$) ऋण इलेक्ट्रोड (कैथोड) की ओर आकर्षित होकर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है और धातु के रूप में उस पर चिपक जाता है। साथ ही, शुद्ध ताँबे के एनोड से ठीक उतनी ही मात्रा में कॉपर घुलकर विलयन में आता रहता है, जिससे विलयन की सांद्रता स्थिर बनी रहती है।

विद्युतलेपन के प्रमुख औद्योगिक एवं दैनिक अनुप्रयोग:

1. क्रोमियम प्लेटिंग (Chromium Plating)

कार के बंपर, साइकिल के हैंडल, पहियों के रिम, स्नानघर के नल और गैस बर्नर पर क्रोमियम का लेपन किया जाता है।

कारण: क्रोमियम अत्यंत चमकदार होता है, संक्षारित (जंग नहीं लगता) नहीं होता तथा खरोंचों का प्रतिरोध करता है। पूरी वस्तु क्रोमियम की बनाना अत्यधिक महँगा होता है, अतः सस्ती धातु पर इसकी पतली परत चढ़ाई जाती है।

2. कृत्रिम आभूषण (Jewelry Plating)

ताँबे, पीतल या निकल की सस्ती धातुओं के आभूषणों पर सोने (Gold) अथवा चाँदी (Silver) की अत्यंत पतली परत चढ़ाई जाती है।

कारण: ये आभूषण देखने में बिल्कुल असली सोने-चाँदी जैसे लगते हैं, परंतु अत्यंत सस्ते और किफायती होते हैं।

3. खाद्य डिब्बों पर टिन का लेपन (Tin Cans)

खाद्य पदार्थों के भंडारण के लिए उपयोग किए जाने वाले डिब्बे लोहे के बने होते हैं, जिन पर टिन (Tin) का विद्युतलेपन किया जाता है।

कारण: टिन लोहे की तुलना में बहुत कम क्रियाशील होता है। अतः भोजन सीधे लोहे के संपर्क में नहीं आता और खराब होने व विषैला होने से बच जाता है।

4. लोहे पर जिंक का लेपन (यशदलेपन / Galvanization)

पुलों, वाहनों के चेसिस, रेलवे पटरियों और निर्माण सरियों में प्रयुक्त लोहे पर जिंक (जस्ते) की परत चढ़ाई जाती है।

कारण: जिंक वायु और नमी को लोहे तक पहुँचने से रोकता है, जिससे लोहे में संक्षारण और जंग (Rusting) नहीं लगती।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

फैराडे का विद्युत अपघटन का प्रथम नियम (Faraday’s 1st Law of Electrolysis)
m = Z · I · t
जहाँ m = निक्षेपित धातु का द्रव्यमान (kg), Z = विद्युत-रासायनिक तुल्यांक, I = विद्युत धारा (A), t = समय (सेकंड)। धारा और समय बढ़ाने पर अधिक धातु जमा होती है।
जल का विद्युत अपघटन समीकरण (Electrolysis of Water)
2H₂O(l) ──[विद्युत धारा]──> 2H₂(g) [कैथोड] + O₂(g) [एनोड]
उत्पन्न हाइड्रोजन गैस का आयतन ऑक्सीजन गैस के आयतन का ठीक दोगुना (2:1 के अनुपात में) होता है।
कॉपर सल्फेट का आयनन (Dissociation of Copper Sulphate)
CuSO₄(aq) ⇌ Cu²⁺ + SO₄²⁻
Cu²⁺ आयन कैथोड (-ve) पर जाकर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं (Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu) और शुद्ध धातु के रूप में जमते हैं।
एलईडी ध्रुवता नियम (LED Polarity Rule)
Long Lead = +ve (Anode), Short Lead = -ve (Cathode)
एलईडी केवल अग्र अभिनति (Forward Bias) में ही प्रकाश उत्सर्जित करती है।
विद्युत अपघट्य चालकता क्रम (Electrolyte Conductivity Order)
प्रबल अम्ल / लवण विलयन > दुर्बल अम्ल > नल का जल >> आसुत जल
आयन सांद्रता जितनी अधिक होगी, विलयन की विद्युत चालकता उतनी ही उच्च होगी।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
शुद्ध आसुत जल (Distilled Water) में से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती, परंतु उसमें थोड़ा-सा साधारण नमक (NaCl) घोलने पर परिपथ का बल्ब क्यों जल उठता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. आसुत जल अत्यंत शुद्ध होता है जिसमें कोई घुलित लवण या स्वतंत्र आयन नहीं होते, अतः यह विद्युत का हीन चालक (कुचालक) है।\n2. जब साधारण नमक ($NaCl$) को आसुत जल में घोला जाता है, तो वह सोडियम धनायनों ($Na^+$) और क्लोराइड ऋणायनों ($Cl^-$) में वियोजित हो जाता है।\n3. ये स्वतंत्र गतिमान आयन विद्युत आवेश के वाहक का कार्य करते हैं, जिससे जल सुचालक बन जाता है और परिपथ पूर्ण होकर बल्ब जल उठता है।
उदाहरण 2
विद्युतलेपन (Electroplating) करते समय जिस वस्तु पर धातु की परत चढ़ानी हो, उसे बैटरी के किस टर्मिनल से जोड़ना चाहिए और क्यों?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

हल:\nवस्तु को सदैव बैटरी के ऋण टर्मिनल (-ve / कैथोड) से जोड़ना चाहिए।\n\nकारण:\n1. विद्युत अपघट्य विलयन में धातु के आयन धनावेशित (धनायन, जैसे $Cu^{2+}, Ag^+, Au^{3+}$) होते हैं।\n2. स्थिरवैद्युत आकर्षण के नियमानुसार विपरीत आवेश परस्पर आकर्षित होते हैं।\n3. अतः धनावेशित धातु आयन ऋण टर्मिनल से जुड़ी वस्तु (कैथोड) की ओर आकर्षित होकर पहुँचेंगे और इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर शुद्ध धातु की परत के रूप में वस्तु पर समान रूप से निक्षेपित हो जाएँगे।

उदाहरण 3
आग लगने की स्थिति में फायरमैन (दमकलकर्मी) पानी के होज-पाइप का उपयोग करने से पहले उस क्षेत्र की मुख्य विद्युत आपूर्ति (Main Power Supply) को क्यों बंद कर देते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\nकारण:\n1. होज-पाइप से छिड़का जाने वाला सामान्य जल शुद्ध आसुत जल नहीं होता, बल्कि उसमें कई प्रकार के खनिज लवण घुले होते हैं, जिसके कारण वह विद्युत का अच्छा सुचालक होता है।\n2. यदि मुख्य विद्युत लाइन चालू रहे, तो पानी के संपर्क में आने से पूरे गीले क्षेत्र में तीव्र विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है।\n3. इससे दमकलकर्मियों और वहाँ उपस्थित लोगों को जानलेवा विद्युत झटका (Severe Electric Shock) लग सकता है। अतः सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य विद्युत आपूर्ति बंद की जाती है।
उदाहरण 4
खाद्य पदार्थों के भंडारण के लिए उपयोग होने वाले लोहे के डिब्बों पर टिन (Tin) का विद्युतलेपन क्यों किया जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. लोहा एक अत्यधिक क्रियाशील धातु है जो भोजन में उपस्थित अम्लों, लवणों और वायु की नमी से अभिक्रिया करके जंग बना सकता है या विषैले यौगिक उत्पन्न कर सकता है।\n2. टिन ($Sn$) लोहे की तुलना में काफी कम क्रियाशील धातु है और सामान्य खाद्य अम्लों से अभिक्रिया नहीं करता।\n3. टिन का विद्युतलेपन करने से भोजन सीधे लोहे के संपर्क में नहीं आता, जिससे भोजन सुरक्षित रहता है और खराब नहीं होता।
उदाहरण 5
जल के विद्युत अपघटन में कैथोड पर एकत्रित होने वाली गैस का आयतन एनोड पर एकत्रित होने वाली गैस से दोगुना क्यों होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:\n1. जल का रासायनिक सूत्र $H_2O$ है, जिसका अर्थ है कि जल के प्रत्येक अणु में हाइड्रोजन के 2 परमाणु और ऑक्सीजन का 1 परमाणु होता है (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात 2:1 है)।\n2. विद्युत अपघटन की संतुलित अभिक्रिया है:\n$$2H_2O(l) \xrightarrow{\text{विद्युत}} 2H_2(g) \text{ [कैथोड]} + O_2(g) \text{ [एनोड]}$$\n3. रासायनिक समीकरण से स्पष्ट है कि जल के 2 अणुओं के टूटने पर हाइड्रोजन के 2 अणु और ऑक्सीजन का केवल 1 अणु बनता है।\nअतः कैथोड पर एकत्रित हाइड्रोजन गैस का आयतन एनोड पर एकत्रित ऑक्सीजन से ठीक दोगुना होता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र अक्सर सोचते हैं कि सभी तरल विद्युत के कुचालक होते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

अम्लों, क्षारकों और लवणों के जलीय विलयन विद्युत के बहुत अच्छे सुचालक होते हैं। केवल शुद्ध आसुत जल, तेल, शराब और चीनी का घोल हीन चालक हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विद्युतलेपन में जिस वस्तु पर लेप चढ़ाना है, उसे बैटरी के धन टर्मिनल से जोड़ देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह एक गंभीर त्रुटि है। जिस वस्तु पर लेप चढ़ाना है उसे सदैव ऋण टर्मिनल (कैथोड) से जोड़ा जाता है, क्योंकि धनावेशित धातु आयन ऋण टर्मिनल की ओर ही आकर्षित होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह भ्रम होना कि विद्युतलेपन से उत्पन्न अपशिष्ट जल को सीधे नाली या नदी में बहाया जा सकता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विद्युतलेपन कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट जल अत्यधिक विषैले भारी रसायनों और अम्लों से युक्त होता है। इसे बिना विशेष रासायनिक उपचार के बहाना पर्यावरण प्रदूषण का गंभीर अपराध है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical Effects & Electroplating) A. विद्युतलेपन परिपथ (Electroplating Circuit) + − बैटरी (DC Source) कॉपर सल्फेट विलयन (CuSO₄ aq) ताँबे की प्लेट एनोड (+) लोहे की चम्मच कैथोड (−) Cu²⁺ Cu²⁺ Cu²⁺ Cu²⁺ आयन कैथोड (−) पर निक्षेपित होते हैं B. जल अपघटन व एलईडी परीक्षक LED: दुर्बल धारा संसूचक लंबा तार = धन (+ve) बैटरी से छोटा तार = ऋण (−ve) बैटरी से कैथोड (−): 2H₂ एनोड (+): O₂ आयतन अनुपात H₂ : O₂ = 2 : 1 विलियम निकोलसन (1800) 2H₂O ──[विद्युत धारा]──> 2H₂ + O₂

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. वे पदार्थ जो अपने से होकर विद्युत धारा प्रवाहित होने देते हैं, सुचालक कहलाते हैं; जो प्रवाहित नहीं होने देते, हीन चालक कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 2
  1. आसुत जल विद्युत का हीन चालक होता है, परंतु उसमें नमक, अम्ल या क्षार मिलाने पर वह उत्तम सुचालक बन जाता है।
मुख्य बिंदु 3
  1. विद्युत चालन करने वाले अधिकांश द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के जलीय विलयन होते हैं, जिनमें मुक्त आयन प्रवाहित होते हैं।
मुख्य बिंदु 4
  1. दुर्बल विद्युत धाराओं का संसूचन करने के लिए एलईडी (LED) या चुंबकीय सुई युक्त टेस्टर का उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु 5
  1. एलईडी के लंबे तार को बैटरी के धन (+ve) टर्मिनल से और छोटे तार को ऋण (-ve) टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
मुख्य बिंदु 6
  1. किसी चालक विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं, जिन्हें विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।
मुख्य बिंदु 7
  1. जल के विद्युत अपघटन में ऋण टर्मिनल (कैथोड) पर हाइड्रोजन गैस और धन टर्मिनल (एनोड) पर ऑक्सीजन गैस 2:1 के अनुपात में मुक्त होती है।
मुख्य बिंदु 8
  1. विद्युत धारा द्वारा किसी इच्छित धातु की पतली परत दूसरी वस्तु पर चढ़ाने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन (Electroplating) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 9
  1. विद्युतलेपन में जिस वस्तु पर परत चढ़ानी हो उसे कैथोड (-ve) तथा जिस धातु की परत चढ़ानी हो उसे एनोड (+ve) बनाया जाता है।
मुख्य बिंदु 10
  1. क्रोमियम का लेपन संक्षारण व खरोंच रोकने हेतु, सोने-चाँदी का लेपन सस्ते आभूषणों पर, तथा टिन का लेपन लोहे के खाद्य डिब्बों पर किया जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
आसुत जल में विद्युत प्रवाहित करने पर टेस्टर का बल्ब क्यों नहीं जलता, और इसे सुचालक कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि आसुत जल में कोई मुक्त खनिज आयन उपस्थित नहीं होते। इसमें चुटकी भर साधारण नमक, नींबू का रस (अम्ल) या कास्टिक सोडा (क्षार) मिलाने पर यह सुचालक बन जाता है।
द्रवों में विद्युत चालन स्वतंत्र धनायनों और ऋणायनों की गति द्वारा ही संभव होता है।
2
एलईडी (LED) को परिपथ में जोड़ते समय उसके लंबे और छोटे तारों का क्या नियम है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लंबे तार को सदैव बैटरी के धन टर्मिनल (+ve) से तथा छोटे तार को बैटरी के ऋण टर्मिनल (-ve) से जोड़ा जाता है।
एलईडी केवल अग्र अभिनति (Forward Bias) में ही विद्युत धारा प्रवाहित कर प्रकाश देती है।
3
जल के विद्युत अपघटन में किस इलेक्ट्रोड पर कौन सी गैस मुक्त होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऋण इलेक्ट्रोड (कैथोड) पर हाइड्रोजन गैस ($H_2$) तथा धन इलेक्ट्रोड (एनोड) पर ऑक्सीजन गैस ($O_2$) मुक्त होती है।
जल अणु ($H_2O$) में हाइड्रोजन धनावेशित ($H^+$) होकर कैथोड की ओर तथा ऑक्सीजन ऋणायन ($O^{2-}$) एनोड की ओर जाते हैं।
4
साइकिल के हैंडल और कार के बंपर पर क्रोमियम का विद्युतलेपन क्यों किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि क्रोमियम चमकदार होता है, इस पर जंग नहीं लगती और यह खरोंचों का प्रतिरोध करता है।
पूरी वस्तु क्रोमियम की बनाना बहुत महँगा होता है, अतः लोहे पर क्रोमियम की पतली परत चढ़ा दी जाती है।
5
आलू में दो तार चुभोकर विद्युत धारा प्रवाहित करने पर धन टर्मिनल के तार के चारों ओर हरा-नीला धब्बा क्यों बन जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि ताँबे के धन तार से निकलने वाले कॉपर आयन आलू के स्टार्च और रसायनों के साथ विद्युत रासायनिक अभिक्रिया करते हैं।
यह परीक्षण विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव को सिद्ध करता है तथा किसी अज्ञात बैटरी के धन सिरे की पहचान करने में उपयोगी है।
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