Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Beng (বাংলা) Hindi (हिन्दी)
WBB • कक्षा 7 • Geography & Environment (আমাদের পৃথিবী) • अध्याय 3
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

वायुदाब

पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 के "हमारी पृथ्वी" (Our Earth) पाठ्यक्रम का तृतीय अध्याय "वायुदाब" (Air Pressure)। इस अध्याय में वायु के भार एवं वायुदाब की आधारभूत संकल्पना, समुद्र तल पर मानक वायुदाब (1013.25 मिलीबार / 76 सेमी पारा स्तंभ), टोरिसेली का पारद एवं एनीरॉयड बैरोमीटर, समदाब रेखाएँ (Isobars), ऊँचाई के साथ वायुदाब ह्रास दर (प्रति 10 मीटर पर 1 मिलीबार), तापमान एवं जलवाष्प के साथ वायुदाब का विपरीत संबंध (नम वायु का शुष्क वायु से हल्का होना), पृथ्वी की 7 स्थायी वायुदाब पेटियों की उत्पत्ति एवं वितरण (डोलड्रम या विषुवतीय शांत कटिबंध, अश्व अक्षांश या उपोष्ण उच्चदाब पेटी, उपध्रुवीय निम्नदाब एवं ध्रुवीय उच्चदाब पेटी), सूर्य के आभासी संचलन के साथ वायुदाब पेटियों का 5°-10° खिसकना तथा भूमध्यसागरीय शीतकालीन वर्षा पर उसका प्रभाव, एवं दाब प्रवणता, चक्रवात (Cyclone) बनाम प्रतिचक्रवात (Anticyclone) के मौसम का सांगोपांग वैज्ञानिक विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

हमारे शरीर पर हाथी जितना भारी हवा का बोझ है, फिर भी हम पिचकते क्यों नहीं?

क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर के प्रत्येक वर्ग सेंटीमीटर पर 1.033 किलोग्राम का वायुमंडलीय भार लगातार पड़ रहा है? एक वयस्क व्यक्ति की त्वचा पर वायुमंडल का कुल भार लगभग 15 टन (15,000 किग्रा) होता है—जो एक विशाल हाथी के भार से भी अधिक है! फिर भी हम धरती पर पिचक कर चपटे क्यों नहीं हो जाते? क्योंकि हमारे शरीर के भीतर बहने वाले रक्त और कोशिकाओं का आंतरिक रक्तचाप (Blood Pressure) बाहर के वायुमंडलीय दाब को पूर्णतः संतुलित कर देता है। किंतु जब कोई पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट जैसी ऊँचाई पर जाता है, तो बाहर का वायुदाब इतना गिर जाता है कि शरीर का आंतरिक दबाव नसों को फाड़कर नाक-मुंह से खून निकाल देता है! वायु की यह अदृश्य शक्ति मौसम और हवाओं को कैसे चलाती है—आइए इस पाठ में जानें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

वायु अदृश्य है, किंतु हमारे सिर पर खड़े वायुस्तंभ का भार कई क्विंटल के बराबर होता है! बैरोमीटर में पारे का अचानक गिरना तूफान का संकेत क्यों देता है, पर्वतों पर नाक से खून क्यों आता है और हवाई जहाज में पेन से स्याही क्यों रिसती है—यह समझने की वैज्ञानिक कुंजी यही अध्याय है। मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनी और वैश्विक जलवायु को समझने के लिए यह अनिवार्य ज्ञान है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पदार्थ के मूलभूत गुण (वायु का निश्चित द्रव्यमान व भार होता है तथा यह स्थान घेरती है) एवं गुरुत्वाकर्षण की समझ।
  • वायुमंडल के प्रमुख घटक (नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%) एवं जलवाष्प की प्राथमिक जानकारी।
  • पृथ्वी का घूर्णन, कोरिओलिस प्रभाव तथा गर्म करने पर गैसों का प्रसार एवं ठंडा करने पर संकुचन।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • वायुदाब की परिभाषा, मानक समुद्रतलीय मान (1013.25 mb / 76 सेमी पारा स्तंभ) एवं बैरोमीटर व समदाब रेखाओं का महत्व समझना।
  • ऊँचाई, तापमान, जलवाष्प एवं पृथ्वी के घूर्णन के आधार पर वायुदाब के अंतर का विश्लेषण करना (विशेषतः नम वायु का शुष्क वायु से हल्का होना)।
  • पृथ्वी की 7 स्थायी वायुदाब पेटियों की स्थिति, तापीय बनाम गतिजन्य उत्पत्ति एवं डोलड्रम व अश्व अक्षांश के लक्षणों की व्याख्या करना।
  • उत्तरायण व दक्षिणायन के कारण पेटियों के 5°-10° खिसकाव तथा भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शीतकालीन वर्षा के कारणों को सिद्ध करना।
  • दाब प्रवणता एवं पवन वेग के संबंध को समझना तथा चक्रवात (Cyclone) व प्रतिचक्रवात (Anticyclone) की संरचना व मौसम में अंतर स्पष्ट करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. वायु का भार एवं वायुदाब की प्रकृ...
2 2. वायुदाब के नियंत्रक कारक: ऊँचाई,...
3 3. पृथ्वी की 7 स्थायी वायुदाब पेटिय...
4 4. वायुदाब पेटियों का खिसकना एवं भू...
5 5. दाब प्रवणता, चक्रवात (Cyclone) ब...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. वायु का भार एवं वायुदाब की प्रकृति: मानक दाब, बैरोमीटर एवं समदाब रेखाएँ

Foundation वायु हमारे चारों ओर फैला हुआ एक अदृश्य गैसीय आवरण है। क्योंकि वायु एक पदार्थ है, इसलिए इसमें निश्चित द्रव्यमान और भार होता है। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल वायुमंडलीय गैसों को धरातल की ओर आकर्षित करता है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण वायुमंडल की गैसों द्वारा धरातल की प्रति इकाई क्षेत्रफल पर पड़ने वाले ऊर्ध्वाधर बल या भार को वायुमंडलीय दाब या वायुदाब (Atmospheric Pressure) कहते हैं।

Scientific Phenomenon मानक समुद्रतलीय वायुदाब (Standard Sea-Level Pressure):
समुद्र तल पर 45° अक्षांश पर 0°C तापमान पर वायुमंडल जो औसत भार डालता है, उसे मानक वायुदाब कहा जाता है:

  • पारा स्तंभ के आधार पर: 76 सेंटीमीटर (या 760 मिलीमीटर) पारे के स्तंभ के बराबर दाब।
  • अंतरराष्ट्रीय इकाई (SI Unit): 1013.25 मिलीबार (mb) या 1013.25 हेक्टोपास्कल (hPa)।
  • भार के आधार पर: धरातल के प्रति 1 वर्ग सेमी क्षेत्र पर लगभग 1.033 किलोग्राम भार (प्रति वर्ग इंच लगभग 14.7 पाउंड)।

Mechanism वायुदाब मापक यंत्र: बैरोमीटर (Barometer):
1643 ईस्वी में इटली के भौतिकविज्ञानी इवानजेलिस्टा टोरिसेली (Evangelista Torricelli) ने सर्वप्रथम काँच की नली में पारे का उपयोग करके पारद बैरोमीटर का आविष्कार किया था। बाद में बिना किसी तरल के धातु की कमानी से निर्मित सुवाह्य एनीरॉयड बैरोमीटर (Aneroid Barometer) बनाया गया, जिसका उपयोग विमानों में ऊँचाई मापने वाले अल्टीमीटर (Altimeter) के रूप में होता है।

Analysis समदाब रेखाएँ (Isobars):
मौसम मानचित्र पर समुद्र तल के संदर्भ में समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक वक्र रेखाओं को समदाब रेखाएँ (Isobars) कहते हैं (ग्रीक शब्द 'Isos' = समान तथा 'Baros' = भार)।

Application बैरोमीटर के पाठ्यांक द्वारा मौसम का पूर्वानुमान:

  1. पारे का धीरे-धीरे ऊपर चढ़ना: स्वच्छ, शुष्क एवं शांत मौसम का सूचक है (उच्चदाब की स्थापना)।
  2. पारे का धीरे-धीरे नीचे गिरना: वर्षा एवं नमी के आगमन का सूचक है।
  3. पारे का अचानक और तेजी से गिरना: उस स्थान पर गहरा निम्नदाब बन गया है और अतिशीघ्र भयानक आंधी, तूफान या चक्रवात आने वाला है!

2. वायुदाब के नियंत्रक कारक: ऊँचाई, तापमान, जलवाष्प एवं घूर्णन गति

Foundation संपूर्ण पृथ्वी पर वायुदाब कभी भी एक समान नहीं रहता। भौगोलिक स्थिति और समय के अनुसार इसमें बड़ा परिवर्तन होता है। मुख्य रूप से चार प्राकृतिक कारक वायुदाब को नियंत्रित करते हैं।

Scientific Phenomenon 1. ऊँचाई (Altitude):
गुरुत्वाकर्षण के कारण वायु के अधिकांश अणु धरातल के निकट सघन रहते हैं। जैसे-जैसे हम समुद्र तल से ऊपर उठते हैं, वायुस्तंभ की ऊँचाई घटती है और वायु विरल (पतली) होती जाती है। अतः ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब तेजी से घटता है। सामान्यतः प्रति 10 मीटर की ऊँचाई पर लगभग 1 मिलीबार (mb) वायुदाब घटता है (अथवा प्रति 300 मीटर पर लगभग 34 मिलीबार / प्रति 110 मीटर पर 1 सेमी पारा स्तंभ कम होता है)।
उदाहरण: दार्जिलिंग (2134 मी) में वायुदाब कोलकाता की तुलना में बहुत कम होता है। माउंट एवरेस्ट (8848 मी) पर वायुदाब समुद्र तल का केवल एक-तिहाई (लगभग 314 mb) रह जाता है!

Mechanism 2. तापमान (Temperature):
तापमान और वायुदाब में विपरीत (व्युत्क्रमानुपाती) संबंध होता है। जब वायु गर्म होती है, तो उसके अणु फैलते हैं और वायु का घनत्व घट जाता है। हल्की होकर गर्म वायु संवहनीय धाराओं के रूप में ऊपर उठ जाती है, जिससे धरातल पर निम्नदाब (Low Pressure) बन जाता है। इसके विपरीत, ठंडी वायु संकुचित होकर भारी हो जाती है और नीचे बैठती है, जिससे उच्चदाब (High Pressure) बनता है।

Analysis 3. वायु में जलवाष्प की उपस्थिति (Water Vapor / Humidity):
अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक नियम: जनसामान्य सोचता है कि नम वायु भारी होती है, किंतु यथार्थ में नम (आर्द्र) वायु शुष्क वायु की तुलना में हल्की होती है!
रसायन विज्ञान के अनुसार जलवाष्प ($H_2O$) का अणुभार $2 imes 1 + 16 = 18$ होता है। जबकि शुष्क वायु में मुख्यतः नाइट्रोजन ($N_2$, अणुभार 28) और ऑक्सीजन ($O_2$, अणुभार 32) होती हैं, जिनका औसत अणुभार लगभग 28.96 (लगभग 29) होता है।
अतः जब वायु में जलवाष्प मिलती है, तो भारी नाइट्रोजन व ऑक्सीजन के अणु हल्के जलवाष्प (18) द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं। इससे नम वायु हल्की होकर ऊपर उठती है और धरातल पर निम्नदाब बनाती है। शुष्क शीतकालीन वायु भारी होने से उच्चदाब बनाती है।

Application 4. पृथ्वी की घूर्णन गति (Earth's Rotation & Coriolis Force):
पृथ्वी के तीव्र अक्षीय घूर्णन से उत्पन्न अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force) विषुवत रेखा एवं उपध्रुवीय क्षेत्रों की वायु को बाहर अंतरिक्ष की ओर विक्षेपित करता है, जिससे वहां निम्नदाब का निर्माण होता है।

3. पृथ्वी की 7 स्थायी वायुदाब पेटियां: विषुवतीय शांत कटिबंध (डोलड्रम) एवं अश्व अक्षांश

Foundation तापमान के वैश्विक अंतर और पृथ्वी की घूर्णन गति के संयुक्त प्रभाव से संपूर्ण ग्लोब पर सात समानांतर स्थायी वायुदाब पेटियों (Pressure Belts) का निर्माण होता है। इनमें से कुछ पेटियां तापीय (Thermal) हैं और कुछ गतिजन्य (Dynamic)।

Scientific Phenomenon पृथ्वी की 7 स्थायी वायुदाब पेटियों का वर्गीकरण:

  1. विषुवतीय निम्नदाब पेटी या शांत कटिबंध (Equatorial Low Pressure Belt / Doldrums): भूमध्य रेखा के दोनों ओर 0° से 5° उत्तर व दक्षिण अक्षांशों के मध्य स्थित। वर्ष भर सूर्य की सीधी किरणें पड़ने से वायु अत्यधिक गर्म व आर्द्र होकर संवहन धाराओं के रूप में लंबवत ऊपर उठ जाती है। यहाँ क्षैतिज पवन प्रवाह बिल्कुल नगण्य रहता है। इस शांत क्षेत्र को नाविकों ने डोलड्रम (Doldrums) नाम दिया। यह एक तापीय पेटी है।
  2. उत्तरी उपोष्ण उच्चदाब पेटी (Subtropical High - North): कर्क रेखा के दोनों ओर 25° से 35° उत्तर अक्षांश।
  3. दक्षिणी उपोष्ण उच्चदाब पेटी (Subtropical High - South): मकर रेखा के दोनों ओर 25° से 35° दक्षिण अक्षांश।
    उत्पत्ति: विषुवत रेखा से ऊपर उठी गर्म वायु ऊपरी क्षोभमंडल में ठंडी होकर कोरिओलिस बल से विक्षेपित होती है और 25°-35° अक्षांशों पर नीचे उतरती है (अवतलन)। वायु के नीचे बैठने से यहाँ स्थायी उच्चदाब बनता है। यह एक गतिजन्य पेटी है।
  4. उत्तरी उपध्रुवीय निम्नदाब पेटी (Sub-polar Low - North): 60° से 70° उत्तर अक्षांश।
  5. दक्षिणी उपध्रुवीय निम्नदाब पेटी (Sub-polar Low - South): 60° से 70° दक्षिण अक्षांश।
    उत्पत्ति: पृथ्वी के घूर्णन के अपकेंद्रीय प्रभाव से यहाँ की वायु ध्रुवों की अपेक्षा तेजी से बाहर छिटकती है और ऊपर उठती है, जिससे गतिजन्य निम्नदाब बनता है।
  6. उत्तरी ध्रुवीय उच्चदाब पेटी (Polar High - North): 80° से 90° उत्तर अक्षांश।
  7. दक्षिणी ध्रुवीय उच्चदाब पेटी (Polar High - South): 80° से 90° दक्षिण अक्षांश।
    उत्पत्ति: अत्यधिक हिमाच्छादित ठंड एवं सूर्य की किरणों की अनुपस्थिति के कारण वायु निरंतर ठंडी, भारी व घनी होकर धरातल पर बैठी रहती है, जिससे स्थायी तापीय उच्चदाब बनता है।

Mechanism अश्व अक्षांश (Horse Latitudes):
30° से 35° उत्तर एवं दक्षिण अक्षांशों की उपोष्ण उच्चदाब पेटी को 'अश्व अक्षांश' कहते हैं। यहाँ वायु ऊपर से नीचे बैठती है, अतः क्षैतिज पवनें शांत रहती हैं। मध्यकाल में पालदार जहाजों में स्पैनिश व्यापारी अमेरिका के लिए घोड़े ले जाते थे। अटलांटिक महासागर की इस शांत पेटी में हवा न चलने से जहाज हफ्तों फंसे रहते थे। जल व भोजन की कमी होने पर जहाज को हल्का करने हेतु नाविक जीवित घोड़ों को समुद्र में फेंक देते थे। इसी ऐतिहासिक घटना से इसे 'अश्व अक्षांश' कहा जाने लगा।

Analysis कुल 7 पेटियों में 3 तापीय (1 विषुवतीय निम्न + 2 ध्रुवीय उच्च) तथा 4 गतिजन्य (2 उपोष्ण उच्च + 2 उपध्रुवीय निम्न) हैं।

Application ये पेटियां ही विश्व की प्रमुख सनातनी पवनों (व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें एवं ध्रुवीय पवनें) की दिशा तय करती हैं।

4. वायुदाब पेटियों का खिसकना एवं भूमध्यसागरीय शीतकालीन वर्षा

Foundation वायुदाब पेटियां धरातल पर स्थायी तो हैं, किंतु वे स्थिर नहीं हैं। पृथ्वी के 66½° अक्षीय झुकाव और सूर्य के आभासी संचलन (उत्तरायण एवं दक्षिणायन) के कारण तापीय विषुवत रेखा का स्थान बदलता रहता है।

Scientific Phenomenon पेटियों का मौसमी खिसकाव (Shifting of Pressure Belts):

  • उत्तरायण के समय (मई-जून-जुलाई): सूर्य कर्क रेखा की ओर बढ़ता है, जिससे सभी पेटियां अपने सामान्य स्थान से 5° से 10° उत्तर की ओर खिसक जाती हैं।
  • दक्षिणायन के समय (नवंबर-दिसंबर-जनवरी): सूर्य मकर रेखा की ओर बढ़ता है, जिससे सभी पेटियां 5° से 10° दक्षिण की ओर खिसक जाती हैं।

Mechanism भूमध्यसागरीय जलवायविक प्रभाव:
भूमध्य सागर के तटवर्ती देश (इटली, स्पेन, ग्रीस) 30° से 45° उत्तर अक्षांश के बीच स्थित हैं।

  1. ग्रीष्मकाल में: पेटियों के उत्तर खिसकने से उपोष्ण उच्चदाब पेटी भूमध्यसागर पर आ जाती है। यहाँ से शुष्क स्थलीय व्यापारिक पवनें बहती हैं, अतः ग्रीष्मकाल बिल्कुल शुष्क और वर्षाविहीन रहता है।
  2. शीतकाल में: पेटियों के दक्षिण खिसकने से भूमध्यसागर पर अटलांटिक महासागर से आने वाली आर्द्र पछुआ पवनें आ जाती हैं, जो शीतकाल में मूसलाधार वर्षा कराती हैं।

Analysis विश्व के अधिकांश भागों में ग्रीष्मकाल में वर्षा होती है, किंतु भूमध्यसागरीय जलवायु विश्व की एकमात्र जलवायु है जहाँ ग्रीष्मकाल सूखा रहता है और शीतकाल में वर्षा होती है!

Application शीतकालीन वर्षा और धूप वाले शुष्क ग्रीष्मकाल के कारण यह क्षेत्र विश्व का 'फलों का बगीचा' कहलाता है, जहाँ अंगूर, जैतून, संतरे और नींबू प्रचुर मात्रा में होते हैं और वाइन उद्योग विकसित है।

5. दाब प्रवणता, चक्रवात (Cyclone) बनाम प्रतिचक्रवात (Anticyclone)

Foundation जब दो स्थानों के वायुदाब में अंतर होता है, तो वायुमंडल में संतुलन बनाने के लिए हवा चलने लगती है। धरातल के समानांतर क्षैतिज गतिमान वायु को पवन (Wind) कहते हैं। पवन सदैव उच्चदाब से निम्नदाब की ओर बहती है।

Scientific Phenomenon दाब प्रवणता बल (Pressure Gradient Force):
दो स्थानों के बीच दूरी के अनुपात में वायुदाब में होने वाले परिवर्तन की दर को दाब प्रवणता कहते हैं। यह समदाब रेखाओं के लंबवत होती है।

  • तीव्र प्रवणता: समदाब रेखाएँ पास-पास हों ⟹ दाब में तीव्र अंतर ⟹ प्रचंड आंधी, तूफान व तेज पवनें।
  • मंद प्रवणता: समदाब रेखाएँ दूर-दूर हों ⟹ मंद अंतर ⟹ शांत व धीमी समीर।

Mechanism चक्रवात बनाम प्रतिचक्रवात:

  1. चक्रवात (Cyclone): केंद्र में अत्यधिक गहरा निम्नदाब (Low Pressure Core) और चारों ओर उच्चदाब होता है। बाहर से तेज पवनें केंद्र की ओर सर्पिलाकार रूप में झपटती हैं। कोरिओलिस प्रभाव से यह दिशा उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त (Anti-clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त (Clockwise) होती है। केंद्र में वायु तीव्र गति से ऊपर उठकर घनीभूत होती है, जिससे कपासी-वर्षी मेघ, भयंकर गर्जन, आंधी और मूसलाधार वर्षा होती है (जैसे बंगाल की खाड़ी के अम्फान, यास चक्रवात)।
  2. प्रतिचक्रवात (Anticyclone): केंद्र में प्रबल उच्चदाब (High Pressure Core) और बाहर निम्नदाब होता है। केंद्र से ठंडी भारी पवनें बाहर की ओर फैलती हैं (उत्तरी गोलार्ध में Clockwise एवं दक्षिणी गोलार्ध में Anti-clockwise)। केंद्र में वायु नीचे उतरती है, जिससे बादल नहीं बनते और आकाश स्वच्छ, धूपयुक्त व मौसम शांत रहता है।

Analysis चक्रवात विनाशकारी मौसम लाते हैं, जबकि प्रतिचक्रवात अत्यंत सुहावना व शांत मौसम प्रदान करते हैं।

Application मौसम विभाग चक्रवातों की चेतावनी जारी करने हेतु समदाब रेखाओं के दबाव व वायुदाब प्रवणता का निरंतर विश्लेषण करता है।

महत्वपूर्ण भौगोलिक अवधारणाएँ, नियम एवं निर्देशांक

वायुदाब के मानक मान एवं निर्देशांक (Standard Pressure Metrics)
मानक समुद्रतलीय दाब 1013.25 मिलीबार (mb) या 1013.25 hPa
पारा स्तंभ ऊँचाई 76 सेंटीमीटर (या 760 मिलीमीटर)
भार का मान 1.033 किलोग्राम / वर्ग सेंटीमीटर
बैरोमीटर आविष्कारक इवानजेलिस्टा टोरिसेली (1643 ई.)
मौसम मानचित्र पर समान दाब वाले स्थानों को समदाब रेखाओं (Isobars) द्वारा दर्शाया जाता है।
ऊँचाई के साथ दाब ह्रास की दर (Lapse Rate of Pressure)
सामान्य ह्रास दर प्रति 10 मीटर की ऊँचाई पर लगभग 1 मिलीबार (mb) कमी
300 मीटर ऊँचाई पर लगभग 34 मिलीबार वायुदाब घटता है
110 मीटर ऊँचाई पर लगभग 1 सेमी पारा स्तंभ घटता है
एवरेस्ट शिखर पर (8848 मी) वायुदाब समुद्र तल का मात्र एक-तिहाई (~314 mb)
ऊँचाई पर वायु विरल होने से ऑक्सीजन की कमी, श्वासरोग एवं नाक से रक्तस्राव होता है।
तापमान एवं आर्द्रता के व्युत्क्रम नियम (Temp & Humidity Laws)
तापमान वृद्धि वायु गर्म होकर फैलती व ऊपर उठती है ⟹ निम्नदाब (Low)
तापमान ह्रास वायु संकुचित व भारी होकर नीचे बैठती है ⟹ उच्चदाब (High)
जलवाष्प ($H_2O$) अणुभार 18 (शुष्क वायु के औसत अणुभार 29 से काफी कम!)
आर्द्र बनाम शुष्क वायु आर्द्र वायु हल्की (निम्नदाब) • शुष्क वायु भारी (उच्चदाब)
तापमान तथा आर्द्रता दोनों का वायुदाब के साथ व्युत्क्रमानुपाती (उलटा) संबंध है।
पृथ्वी की 7 स्थायी वायुदाब पेटियां (7 Global Pressure Belts)
विषुवतीय निम्नदाब पेटी 0° से 5° उत्तर व दक्षिण (तापीय / डोलड्रम शांत कटिबंध)
उपोष्ण उच्चदाब पेटियां (2) 25° से 35° उत्तर व दक्षिण (गतिजन्य / अश्व अक्षांश)
उपध्रुवीय निम्नदाब पेटियां (2) 60° से 70° उत्तर व दक्षिण (गतिजन्य अपकेंद्रीय विक्षेपण)
ध्रुवीय उच्चदाब पेटियां (2) 80° से 90° उत्तर व दक्षिण (तापीय अत्यधिक शीतलन)
कुल 7 पेटियों में 3 तापीय उत्पत्ति की हैं तथा 4 पृथ्वी के घूर्णन की गतिजन्य हैं।
डोलड्रम बनाम अश्व अक्षांश (Doldrums vs Horse Latitudes)
डोलड्रम (Doldrums) 0°-5° N/S • आरोही संवहनीय वायु • शांत क्षैतिज क्षेत्र
अश्व अक्षांश 30°-35° N/S • अवरोही अवतलित वायु • शांत उच्चदाब
ऐतिहासिक कारण जहाज को हल्का करने हेतु घोड़ों को समुद्र में फेंकना
पेटियों का खिसकाव सूर्य के उत्तरायण/दक्षिणायन से 5°-10° उत्तर/दक्षिण खिसकाव
पेटियों के खिसकाव से ही भूमध्यसागरीय क्षेत्र में केवल शीतकाल में वर्षा होती है।
दाब प्रवणता, चक्रवात एवं प्रतिचक्रवात (Gradient & Cyclones)
पवन का प्रवाह सदैव उच्चदाब से निम्नदाब की ओर क्षैतिज गति
तीव्र दाब प्रवणता समदाब रेखाएँ पास-पास ⟹ प्रचंड आंधी एवं तूफान
चक्रवात (Cyclone) केंद्र में गहरा निम्नदाब • उत्तरी गोलार्ध में Anti-clockwise • भयंकर वर्षा
प्रतिचक्रवात (Anticyclone) केंद्र में उच्चदाब • उत्तरी गोलार्ध में Clockwise • स्वच्छ शांत आकाश
कोरिओलिस बल के कारण पवनें सीधी न जाकर चक्राकार रूप में विक्षेपित होती हैं।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
माउंट एवरेस्ट या दार्जिलिंग जैसे ऊँचे पर्वतों पर जाने पर पर्वतारोहियों को सांस लेने में कठिनाई क्यों होती है और कभी-कभी नाक से खून क्यों बहने लगता है? हवाई जहाज में फाउंटेन पेन से स्याही क्यों रिसती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. ऊँचाई पर सांस लेने में कठिनाई:
गुरुत्वाकर्षण के कारण वायुमंडलीय गैसें धरातल के निकट सबसे सघन रहती हैं। ऊँचाई बढ़ने पर वायुस्तंभ छोटा होता जाता है और वायु विरल (पतली) हो जाती है। समुद्र तल पर वायुदाब 1013.25 mb होता है, जबकि 8848 मीटर ऊँचे एवरेस्ट पर यह घटकर केवल एक-तिहाई (~314 mb) रह जाता है। वायु पतली होने से प्रति सांस में फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे सांस फूलने लगती है।

2. नाक से रक्तस्राव का कारण:
हमारे शरीर के भीतर का रक्तचाप समुद्र तल के सामान्य वायुदाब के अनुसार संतुलित रहता है। अचानक अत्यधिक ऊँचाई पर जाने पर बाहर का वायुदाब बहुत कम हो जाता है, जबकि शरीर के भीतर का रक्तचाप वही रहता है। इस आंतरिक दबाव के आधिक्य से नाक के भीतर की अति सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं (Capillaries) फट जाती हैं और रक्त बहने लगता है।

3. फाउंटेन पेन से स्याही रिसना:
पेन की रिफिल में स्याही के ऊपर समुद्र तल की हवा का दबाव बंद रहता है। जब विमान अत्यधिक ऊँचाई पर उड़ता है, तो केबिन के भीतर वायुदाब कम हो जाता है। अतः पेन के भीतर की बंद हवा फैलकर स्याही को बाहर धकेल देती है।
उदाहरण 2
जलवाष्प युक्त नम वायु शुष्क वायु की तुलना में हल्की क्यों होती है? वर्षा ऋतु में निम्नदाब क्यों बनता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. आणविक भार की वैज्ञानिक तुलना:
सामान्य धारणा के विपरीत नम वायु शुष्क वायु से हल्की होती है:
• जलवाष्प ($H_2O$) का आणविक भार = $(2 imes 1) + 16 = 18$।
• शुष्क वायु के प्रमुख घटक नाइट्रोजन ($N_2$ अणुभार 28) और ऑक्सीजन ($O_2$ अणुभार 32) हैं, जिनका औसत आणविक भार लगभग 28.96 (लगभग 29) होता है।

2. अवोगाद्रो का नियम एवं निम्नदाब:
अवोगाद्रो के नियमानुसार समान तापमान व दाब पर गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। जब वायु में जलवाष्प मिलती है, तो हल्के जलवाष्प के अणु (18) भारी नाइट्रोजन व ऑक्सीजन के अणुओं (28 व 32) को हटाकर उनका स्थान ले लेते हैं।
अतः जलवाष्प युक्त वायु का घनत्व एवं भार शुष्क वायु से कम हो जाता है। हल्की होने के कारण यह वायु आसानी से ऊपर उठती है और धरातल पर कम भार डालती है। इसीलिए ग्रीष्म व वर्षा ऋतु में नम वायु के कारण निम्नदाब का निर्माण होता है।
उदाहरण 3
चक्रवात (Cyclone) और प्रतिचक्रवात (Anticyclone) में तीन प्रमुख अंतर लिखिए। प्रतिचक्रवात में आकाश मेघमुक्त क्यों रहता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. चक्रवात बनाम प्रतिचक्रवात के तीन अंतर:
• दाब का वितरण: चक्रवात के केंद्र में गहरा निम्नदाब तथा परिधि पर उच्चदाब होता है। जबकि प्रतिचक्रवात के केंद्र में प्रबल उच्चदाब तथा परिधि पर निम्नदाब होता है।
• पवन प्रवाह की दिशा: चक्रवात में पवनें बाहर से तेजी से घूमते हुए केंद्र की ओर झपटती हैं (उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त / Anti-clockwise)। प्रतिचक्रवात में पवनें केंद्र से बाहर की ओर धीरे-धीरे फैलती हैं (उत्तरी गोलार्ध में दक्षिणावर्त / Clockwise)।
• मौसम की दशा: चक्रवात में मूसलाधार वर्षा, भयंकर आंधी, घने काले बादल व वज्रपात होता है। प्रतिचक्रवात में आकाश पूरी तरह मेघमुक्त, शांत व सुहावना रहता है।

2. प्रतिचक्रवात में आकाश मेघमुक्त रहने का कारण:
प्रतिचक्रवात के केंद्र में वायु ऊपर से धीरे-धीरे नीचे धरातल की ओर बैठती है (अवतलन)। नीचे आने पर वायु संकुचित होकर गर्म होती है, जिससे उसकी नमी धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप वायु का संघनन नहीं हो पाता और कोई बादल नहीं बनते; अतः आकाश पूरी तरह साफ व धूपयुक्त रहता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि जल होने के कारण नम वायु शुष्क वायु से भारी होती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: जलवाष्प का आणविक भार (18) शुष्क वायु (29) से काफी कम होता है। अतः नम वायु हमेशा शुष्क वायु से हल्की होती है और निम्नदाब बनाती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

डोलड्रम (Doldrums) और अश्व अक्षांश (Horse Latitudes) को एक ही शांत पेटी मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: डोलड्रम विषुवत रेखा (0°-5° N/S) पर स्थित तापीय निम्नदाब शांत पेटी है जहाँ वायु ऊपर उठती है। जबकि अश्व अक्षांश (30°-35° N/S) गतिजन्य उच्चदाब शांत पेटी है जहाँ वायु नीचे बैठती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चक्रवात के केंद्र में उच्चदाब मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: चक्रवात के केंद्र में हमेशा गहरा निम्नदाब होता है जिसके कारण चारों ओर से पवनें झपटती हैं। प्रतिचक्रवात के केंद्र में उच्चदाब होता है।

वायुदाब एवं वैश्विक वायुदाब पेटियां संरचना

💨 वायुदाब एवं वैश्विक वायुदाब पेटियां संरचना पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 भूगोल (हमारी पृथ्वी) • अध्याय 3 1. वायुदाब की संकल्पना एवं मापन • मानक समुद्रतलीय दाब: 1013.25 मिलीबार (76 सेमी पारा स्तंभ / 1.033 किग्रा/वर्ग सेमी) • बैरोमीटर: टोरिसेली द्वारा आविष्कृत (1643); पारद एवं एनीरॉयड बैरोमीटर • समदाब रेखाएँ (Isobars): समान समुद्रतलीय वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ • ऊँचाई पर दाब ह्रास: प्रति 10 मीटर की ऊँचाई पर लगभग 1 मिलीबार वायुदाब घटता है मानक दाब: 1013.25 mb • बैरोमीटर • प्रति 10 मीटर 1 mb कमी 2. वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारक • ऊँचाई: ऊँचाई बढ़ने पर वायु का घनत्व एवं स्तंभ घटता है ⟹ वायुदाब कम होता है • तापमान: वायु गर्म होकर फैलती है, हल्की होकर ऊपर उठती है ⟹ निम्नदाब बनता है • जलवाष्प: जलवाष्प का अणुभार (18) शुष्क वायु (29) से कम होता है ⟹ नम वायु हल्की होती है! • घूर्णन गति: कोरिओलिस प्रभाव से विषुवत व उपध्रुवीय क्षेत्रों की वायु बाहर छिटकती है ऊँचाई (विपरीत) • तापमान (विपरीत) • जलवाष्प (नम वायु हल्की) 3. पृथ्वी की 7 स्थायी वायुदाब पेटियां • विषुवतीय निम्नदाब पेटी (0°-5° N/S): डोलड्रम (शांत कटिबंध); संवहनीय वायु प्रवाह • उपोष्ण उच्चदाब पेटी (25°-35° N/S): अश्व अक्षांश (Horse Latitudes); अवरोही वायु • उपध्रुवीय निम्नदाब पेटी (60°-70° N/S): घूर्णनजनित विक्षेपण एवं चक्रवातीय केंद्र • ध्रुवीय उच्चदाब पेटी (80°-90° N/S): अत्यधिक ठंड एवं भारी सघन अवतलन 1 विषुवतीय निम्न • 2 उपोष्ण उच्च • 2 उपध्रुवीय निम्न • 2 ध्रुवीय उच्च 4. दाब प्रवणता, पवनें एवं चक्रवात • दाब प्रवणता (Gradient): दूरी के साथ दाब में परिवर्तन; वायु की गति निर्धारित करता है • प्रवाह नियम: पवन सदैव उच्चदाब से निम्नदाब की ओर क्षैतिज रूप से बहती है • चक्रवात (Cyclone): केंद्र में गहरा निम्नदाब; चारों ओर से तीव्र घुमावदार पवनें • प्रतिचक्रवात (Anticyclone): केंद्र में उच्चदाब; बाहर की ओर पवनें; शांत स्वच्छ मौसम उच्च ⟹ निम्न • चक्रवात (निम्न केंद्र) • प्रतिचक्रवात (उच्च केंद्र) TARGETEXAMS • WBBSE कक्षा 7 भूगोल (हमारी पृथ्वी)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
धरातल की प्रति इकाई क्षेत्रफल पर वायु के भार को वायुदाब कहते हैं; मानक मान 1013.25 mb या 76 सेमी पारा स्तंभ है।
मुख्य बिंदु 2
1643 ई. में टोरिसेली ने बैरोमीटर का आविष्कार किया; मौसम मानचित्र पर समान वायुदाब वाले स्थानों को समदाब रेखाएं (Isobars) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 3
ऊँचाई बढ़ने पर वायु विरल होती है; सामान्यतः प्रति 10 मीटर की ऊँचाई पर 1 मिलीबार वायुदाब घटता है।
मुख्य बिंदु 4
तापमान बढ़ने पर वायु फैलकर हल्की होती है और निम्नदाब बनता है; ठंडी वायु भारी होकर उच्चदाब बनाती है।
मुख्य बिंदु 5
जलवाष्प का अणुभार (18) शुष्क वायु (29) से कम होने के कारण नम वायु सदैव शुष्क वायु से हल्की होती है।
मुख्य बिंदु 6
पृथ्वी पर 7 स्थायी वायुदाब पेटियां हैं: 1 विषुवतीय निम्न, 2 उपोष्ण उच्च, 2 उपध्रुवीय निम्न तथा 2 ध्रुवीय उच्चदाब पेटी।
मुख्य बिंदु 7
सूर्य के आभासी संचलन से पेटियां 5°-10° खिसकती हैं, जिससे भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शीतकाल में वर्षा होती है।
मुख्य बिंदु 8
पवन हमेशा उच्चदाब से निम्नदाब की ओर बहती है; चक्रवात में केंद्र में निम्नदाब तथा प्रतिचक्रवात में केंद्र में उच्चदाब होता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. वायुमंडलीय दाब किसे कहते हैं? समुद्र तल पर मानक वायुदाब का मान क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: धरातल की प्रति इकाई क्षेत्रफल पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण वायुमंडल द्वारा लगाए गए ऊर्ध्वाधर बल या भार को वायुमंडलीय दाब या वायुदाब कहते हैं। समुद्र तल पर 45° अक्षांश पर 0°C तापमान पर इसका मानक मान 1013.25 मिलीबार (mb) अथवा 76 सेंटीमीटर (760 मिमी) पारे के स्तंभ के बराबर होता है (प्रति वर्ग सेमी 1.033 किग्रा)।
वायु का भार, 1013.25 मिलीबार तथा 76 सेमी पारा स्तंभ का उल्लेख करें।
2
2. ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब क्यों घटता है? इसके घटने की सामान्य दर क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण वायु की सघनता धरातल के निकट सबसे अधिक होती है। जैसे-जैसे हम ऊपर जाते हैं, वायुस्तंभ की ऊँचाई कम होती जाती है और वायु विरल (पतली) हो जाती है, जिससे प्रति इकाई आयतन में वायु का भार घट जाता है। सामान्यतः प्रति 10 मीटर की ऊँचाई पर लगभग 1 मिलीबार (mb) वायुदाब घट जाता है।
गुरुत्वाकर्षण, विरल वायु तथा प्रति 10 मीटर 1 mb ह्रास दर लिखें।
3
3. अश्व अक्षांश (Horse Latitudes) किसे कहते हैं और इसके नामकरण का ऐतिहासिक कारण क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 30° से 35° उत्तर एवं दक्षिण अक्षांशों में स्थित उपोष्ण उच्चदाब शांत पेटी को ‘अश्व अक्षांश’ कहते हैं। यहाँ वायु ऊपर से नीचे बैठती है, अतः क्षैतिज पवनें शांत रहती हैं। प्राचीन काल में स्पैनिश पालदार जहाजों में अमेरिका घोड़े ले जाते समय जहाज हवा न होने से हफ्तों फंसे रहते थे। पीने के पानी व चारे की कमी होने पर जहाज को हल्का करने के लिए नाविक घोड़ों को समुद्र में फेंक देते थे; इसीलिए इसका नाम अश्व अक्षांश पड़ा।
30°-35° अक्षांश, शांत उच्चदाब एवं घोड़ों को समुद्र में फेंकने की घटना का उल्लेख करें।
4
4. भूमध्यसागरीय क्षेत्र में ग्रीष्मकाल सूखा क्यों रहता है और शीतकाल में वर्षा क्यों होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: सूर्य के आभासी संचलन से वायुदाब पेटियां 5°-10° खिसकती हैं। ग्रीष्मकाल में उत्तरायण के समय उपोष्ण उच्चदाब पेटी उत्तर खिसककर भूमध्यसागर (30°-45°N) पर आ जाती है, जिससे वहां शुष्क व्यापारिक पवनें चलती हैं और ग्रीष्मकाल सूखा रहता है। शीतकाल में दक्षिणायन के समय पेटियां दक्षिण खिसकती हैं, जिससे भूमध्यसागर पर अटलांटिक की नम पछुआ पवनें आ जाती हैं जो शीतकाल में मूसलाधार वर्षा कराती हैं।
पेटियों का 5°-10° खिसकाव, ग्रीष्म में व्यापारिक पवनें एवं शीत में पछुआ पवनें लिखें।
5
5. चक्रवात और प्रतिचक्रवात के केंद्र के दाब में क्या अंतर है और चक्रवात में वर्षा क्यों होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: चक्रवात (Cyclone) के केंद्र में गहरा निम्नदाब होता है, जबकि प्रतिचक्रवात (Anticyclone) के केंद्र में प्रबल उच्चदाब होता है। चक्रवात में चारों ओर से नम पवनें तेजी से केंद्र की ओर आकर ऊपर उठती हैं और संघनित होकर कपासी-वर्षी बादल बनाकर भीषण तूफान व मूसलाधार वर्षा कराती हैं।
निम्नदाब बनाम उच्चदाब तथा वायु के ऊपर उठने व संघनन का उल्लेख करें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।