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WBB • कक्षा 7 • Geography & Environment (আমাদের পৃথিবী) • अध्याय 6
अनुमानित समय: 55 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

चट्टान और मिट्टी

पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 भूगोल एवं पर्यावरण (আমাদের পৃথিবী) के अध्याय 6 "शैल एवं मृदा" (Rock and Soil) में आपका स्वागत है। पृथ्वी की ठोस भूपर्पटी विभिन्न खनिजों के प्राकृतिक समुच्चय से बनी है जिसे शैल या चट्टान कहते हैं। इस अध्याय में प्राथमिक आग्नेय शैल (पातालीय ग्रेनाइट एवं ज्वालामुखीय बेसाल्ट), स्तरीकृत अवसादी शैल व जीवाश्म, अत्यधिक ताप-दाब से रूपांतरित कायांतरित शैल (नीस, संगमरमर, क्वार्ट्जाइट, स्लेट), भूगर्भीय शैल चक्र, अपक्षय से मृदा निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया (डोकुचेव का नियम), मृदा परिच्छेदिका के संस्तर (A, B, C, R संस्तर), मृदा की बनावट (बलुई, चिकनी, दोमट) तथा मृदा संरक्षण के व्यावहारिक उपायों का विशद विश्लेषण किया गया है।

🪨 ताजमहल चमचमाते सफेद संगमरमर का और लाल किला खुरदुरे लाल बलुआ पत्थर का क्यों बना है?

क्या आप जानते हैं कि आगरा के ताजमहल का संगमरमर और दिल्ली के लाल किले का लाल बलुआ पत्थर भूगर्भीय दृष्टि से पूरी तरह अलग हैं?

करोड़ों वर्ष पूर्व उथले समुद्र की तलहटी में बालू के बारीक कणों के जमने से लाल बलुआ पत्थर (अवसादी शैल) बना। वहीं दूसरी ओर, समुद्री जीवों के खोल से बना चूना पत्थर जब पृथ्वी के भीतर भयंकर ताप और दबाव से पूरी तरह बदल गया, तब चमकदार संगमरमर (कायांतरित शैल) का जन्म हुआ!

और जिस उपजाऊ मिट्टी पर हम खेती करते हैं, वह भी कठोर पत्थरों के हजारों वर्षों के चूर्ण से ही बनी है! आइए जानें शैलों और मिट्टी का यह अद्भुत विज्ञान।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 भूगोल एवं पर्यावरण (আমাদের পৃথিবী) के अध्याय 6 "शैल एवं मृदा" (Rock and Soil) में आपका स्वागत है। पृथ्वी की ठोस भूपर्पटी विभिन्न खनिजों के प्राकृतिक समुच्चय से बनी है जिसे शैल या चट्टान कहते हैं। इस अध्याय में प्राथमिक आग्नेय शैल (पातालीय ग्रेनाइट एवं ज्वालामुखीय बेसाल्ट), स्तरीकृत अवसादी शैल व जीवाश्म, अत्यधिक ताप-दाब से रूपांतरित कायांतरित शैल (नीस, संगमरमर, क्वार्ट्जाइट, स्लेट), भूगर्भीय शैल चक्र, अपक्षय से मृदा निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया (डोकुचेव का नियम), मृदा परिच्छेदिका के संस्तर (A, B, C, R संस्तर), मृदा की बनावट (बलुई, चिकनी, दोमट) तथा मृदा संरक्षण के व्यावहारिक उपायों का विशद विश्लेषण किया गया है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पृथ्वी की आंतरिक परतों (भूपर्पटी, मेंटल, क्रोड) की आधारभूत जानकारी।
  • भूगर्भ के गलित मैग्मा एवं धरातल पर प्रकट होने वाले लावे में मूलभूत अंतर।
  • सौर ताप, वर्षा एवं वायु द्वारा चट्टानों के अपक्षय (टूटने-फूटने) की सामान्य समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • खनिजों एवं बहु-खनिज शैलों के मध्य संबंध व तीन प्रमुख शैल प्रकारों की उत्पत्ति स्पष्ट करना।
  • पातालीय ग्रेनाइट एवं बहिर्वेधी बेसाल्ट के कणों के आकार व उपयोगिता की तुलना करना।
  • अवसादी शैलों में परतदार संरचना, सिमेंटीकरण एवं जीवाश्म निर्माण की व्याख्या करना।
  • शैल चक्र के माध्यम से आग्नेय, अवसादी एवं कायांतरित शैलों के चक्रीय रूपांतरण को समझना।
  • डोकुचेव के नियम से मृदा निर्माण के कारक, मृदा संस्तर (A, B, C, R) एवं मृदा संरक्षण की समीक्षा करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. खनिज एवं शैल की मूल अवधारणा तथा...
2 2. आग्नेय शैल: मैग्मा का शीतलन, पात...
3 3. अवसादी शैल: तलछट निक्षेपण, स्तरी...
4 4. कायांतरित शैल एवं निरंतर चलने वा...
5 5. मृदा निर्माण, मृदा परिच्छेदिका (...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. खनिज एवं शैल की मूल अवधारणा तथा तीन प्रमुख शैल परिवार

हमारे पैरों के नीचे स्थित ठोस भूपर्पटी विभिन्न शैलों का एक विशाल भंडार है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार भूपर्पटी का 98% भाग मात्र 8 प्रमुख तत्वों (ऑक्सीजन, सिलिकॉन, एल्युमिनियम, लोहा, आदि) से बना है। ये तत्व मिलकर खनिज बनाते हैं, और खनिजों के समुच्चय से शैलें बनती हैं।

1

खनिज एवं शैल की परिभाषा

निश्चित रासायनिक संगठन और आंतरिक क्रिस्टल संरचना वाले अकार्बनिक पदार्थ खनिज (Mineral) कहलाते हैं। एक या अधिक खनिजों के प्राकृतिक समुच्चय को शैल (Rock) कहते हैं।

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एकल खनिज एवं बहु-खनिज शैलें

चूना पत्थर और संगमरमर केवल कैल्साइट खनिज से बने होते हैं (एकल खनिज शैल)। वहीं ग्रेनाइट क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार और अभ्रक का मिश्रण होता है (बहु-खनिज शैल)।

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आग्नेय शैल (प्राथमिक शैल)

भूगर्भ के तप्त गलित मैग्मा या लावे के ठंडा होकर जमने से बनने वाली पहली चट्टान। यह कठोर व क्रिस्टलीय होती है तथा इसमें जीवाश्म नहीं पाए जाते।

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अवसादी शैल (परतदार शैल)

अपक्षय से टूटे बारीक शैल कण जब नदियों व वायु द्वारा जल बेसिनों में परतों के रूप में जमा होते हैं। केवल इसी शैल में जीवाश्म (Fossils) मिलते हैं।

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कायांतरित शैल (रूपांतरित शैल)

भूगर्भ के अत्यधिक तापमान (200°-800°C) और दबाव के प्रभाव से जब पूर्व निर्मित शैलों के गुण पूरी तरह बदल जाते हैं, तो कायांतरित शैलें बनती हैं।

2. आग्नेय शैल: मैग्मा का शीतलन, पातालीय ग्रेनाइट एवं ज्वालामुखीय बेसाल्ट

आग्नेय शैलें (Igneous Rocks) पृथ्वी की सबसे प्राचीन शैलें हैं। लैटिन शब्द 'Ignis' (अग्नि) से इसका नामकरण हुआ है। ये तप्त गलित मैग्मा के शीतलन से बनती हैं।

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मैग्मा बनाम लावा एवं शीतलन गति

भूगर्भ का गलित शैल पदार्थ मैग्मा है; ज्वालामुखी उद्गार से बाहर निकलने पर इसे लावा कहते हैं। शीतलन की दर क्रिस्टल के आकार को तय करती है।

2

पातालीय या अंतर्वेधी शैल (ग्रेनाइट)

मैग्मा धरातल के नीचे अत्यधिक गहराई में अत्यंत मंद गति से ठंडा होता है, जिससे खनिजों के क्रिस्टल बड़े आकार के बनते हैं। प्रमुख उदाहरण: ग्रेनाइट एवं गैब्रो।

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बहिर्वेधी या ज्वालामुखीय शैल (बेसाल्ट)

लावा धरातल पर आकर वायु व जल के संपर्क में तेजी से जमता है, जिससे इसके क्रिस्टल सूक्ष्म बनते हैं। प्रमुख उदाहरण: बेसाल्ट, जिसने दक्कन का पठार बनाया है।

4

प्यूमिस: पानी पर तैरने वाला पत्थर

ज्वालामुखी विस्फोट के समय लावे में गैस के बुलबुले फंस जाने से असंख्य सूक्ष्म छिद्र बन जाते हैं। इसका घनत्व जल से कम होने के कारण प्यूमिस जल में तैरता है।

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इंजीनियरिंग व आर्थिक उपयोग

रेल की पटरियों के नीचे बैलास्ट पत्थर के रूप में बेसाल्ट बिछाया जाता है; स्मारकों, मूर्तियों व किचन स्लैब में पॉलिशयुक्त ग्रेनाइट काम आता है।

3. अवसादी शैल: तलछट निक्षेपण, स्तरीभवन, सिमेंटीकरण एवं जीवाश्म

अवसादी शैलें (Sedimentary Rocks) पृथ्वी के इतिहास की खुली पुस्तक हैं। लैटिन शब्द 'Sedimentum' (तलछट बैठना) से इसका नाम पड़ा है। यह जल बेसिनों में तलछट के जमाव से बनती हैं।

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तलछटीकरण एवं सिमेंटीकरण (Lithification)

शैल कणों के परतों में जमा होने के बाद ऊपरी परतों के भार और कैल्साइट व सिलिका के प्राकृतिक रासायनिक गोंद से जुड़कर कठोर शैल बनती है।

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स्तरीभवन एवं परतें

अवसादी शैलों में स्पष्ट क्षैतिज परतें होती हैं जिन्हें बेडिंग प्लेन कहते हैं। इसमें प्राचीन लहरों के निशान और कीचड़ के सूखने की दरारें सुरक्षित रहती हैं।

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जीवाश्मों का संरक्षण (Fossils)

तलछट की परतों में दबने वाले मृत जीवों के अवशेष ऑक्सीजन के अभाव में सड़ने से बच जाते हैं और युगों-युगों तक जीवाश्म के रूप में सुरक्षित रह जाते हैं।

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त्रि-स्तरीय वर्गीकरण

यांत्रिक रूप से निर्मित: बलुआ पत्थर व शेल; जैविक रूप से निर्मित: चूना पत्थर व कोयला; रासायनिक रूप से निर्मित: सेंधा नमक व जिप्सम।

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स्थापत्य व ऊर्जा संपदा

दिल्ली का लाल किला और आगरा का किला लाल बलुआ पत्थर से बने हैं; विद्युत उत्पादन में कोयला और सीमेंट उद्योग में चूना पत्थर अपरिहार्य अवसादी शैलें हैं।

4. कायांतरित शैल एवं निरंतर चलने वाला भूगर्भीय शैल चक्र

ग्रीक शब्द 'Meta' (परिवर्तन) और 'Morphe' (रूप) से कायांतरित शैल (Metamorphic Rock) शब्द बना है। भूगर्भ के भीषण ताप, दाब व रासायनिक द्रवों से इनका पुनर्संगठन होता है।

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कायांतरण के प्रमुख कारक

भीषण भूगर्भीय तापमान (200°-800°C), विवर्तनिक संपीड़न दबाव और रासायनिक रूप से सक्रिय गर्म द्रव खनिजों का पुनःक्रिस्टलीकरण करते हैं।

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पत्रण एवं धारीदार बनावट (Foliation)

अत्यधिक दबाव के कारण खनिज कण दबाव की दिशा के लंबवत समानांतर पट्टियों में सज जाते हैं। इसे पत्रण कहते हैं, जो नीस और स्लेट में देखा जाता है।

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प्रमुख रूपांतरण सारणी

ग्रेनाइट $\to$ नीस, बेसाल्ट $\to$ एम्फीबोलाइट, चूना पत्थर $\to$ संगमरमर, बलुआ पत्थर $\to$ क्वार्ट्जाइट, शेल $\to$ स्लेट, और कोयला $\to$ ग्रेफाइट/हीरा।

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सतत भूगर्भीय शैल चक्र (Rock Cycle)

मैग्मा $\to$ आग्नेय शैल $\to$ अपक्षय से अवसादी शैल $\to$ ताप-दाब से कायांतरित शैल $\to$ भूगर्भ में गलकर पुनः मैग्मा। शैलों का यह सतत प्रवाह शैल चक्र कहलाता है।

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ऐतिहासिक स्थापत्य व उपयोग

आगरा का ताजमहल और कोलकाता का विक्टोरिया मेमोरियल सफेद मकराना संगमरमर से बने हैं; छत की टाइल और ब्लैकबोर्ड बनाने में स्लेट का प्रयोग होता है।

5. मृदा निर्माण, मृदा परिच्छेदिका (संस्तर A, B, C, R) एवं मृदा संरक्षण

मृदा (Soil) भूपर्पटी की सबसे ऊपरी पतली एवं सजीव परत है। कठोर चट्टानों के अपक्षय से रेगोलिथ बनता है और उसमें ह्यूमस, जल व जलवायु की सदियों की क्रिया से उपजाऊ मिट्टी बनती है।

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चट्टान से रेगोलिथ और मिट्टी

अपक्षय से चट्टानों के बारीक चूर्ण की ढीली परत को रेगोलिथ (Regolith) कहते हैं। जब इसमें ह्यूमस, जल, वायु और सूक्ष्म जीवाणु मिलते हैं, तब यह उपजाऊ मिट्टी बनती है।

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डोकुचेव का सार्वभौमिक मृदा समीकरण

रूसी वैज्ञानिक वी. वी. डोकुचेव ने सिद्ध किया: $S = f(P, Cl, O, R, T)$ जहाँ $P$=मूल शैल, $Cl$=जलवायु (सर्वाधिक सक्रिय), $O$=जीव व ह्यूमस, $R$=ढाल, और $T$=समय। 1 इंच मिट्टी बनने में 500-1000 वर्ष लगते हैं।

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मृदा परिच्छेदिका के संस्तर (Soil Horizons)

पूर्ण विकसित मिट्टी के लंबवत कटाव में 4 संस्तर होते हैं: A संस्तर (शीर्ष मृदा, ह्यूमस युक्त व पौधों की जड़ें), B संस्तर (उपमृदा, निक्षालित खनिज संचयन), C संस्तर (रेगोलिथ), और R संस्तर (ठोस आधार शैल)।

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मृदा बनावट के प्रकार

बलुई मिट्टी (बालू अधिक, जल न टिकना); चिकनी मिट्टी (कण अति सूक्ष्म, जल भराव); और दोमट मिट्टी (40% बालू : 40% सिल्ट : 20% चिकनी मिट्टी, खेती के लिए सर्वश्रेष्ठ)।

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मृदा अपरदन व वैज्ञानिक संरक्षण

पहाड़ी ढालों पर सीढ़ीदार खेती (Terrace farming) व समोच्च रेखीय जुताई (Contour ploughing), शुष्क क्षेत्रों में वायु अवरोधक वृक्षारोपण और व्यापक वनीकरण मृदा संरक्षण के मुख्य उपाय हैं।

महत्वपूर्ण भौगोलिक अवधारणाएँ, नियम एवं निर्देशांक

शैलों का त्रि-स्तरीय वर्गीकरण (Three Rock Families)
आग्नेय शैल (मैग्मा से) | अवसादी शैल (तलछट/जीवाश्म) | कायांतरित शैल (ताप-दाब)
उत्पत्ति के आधार पर संपूर्ण शैल मंडल का वैज्ञानिक वर्गीकरण।
शैल रूपांतरण का नियम (Metamorphic Transformation Law)
ग्रेनाइट -> नीस | चूना पत्थर -> संगमरमर | बलुआ पत्थर -> क्वार्ट्जाइट | शेल -> स्लेट
उच्च ताप (200°-800°C) एवं दबाव में खनिजों का पुनर्संगठन।
डोकुचेव का सार्वभौमिक मृदा समीकरण (Dokuchaev Equation)
S = f(P, Cl, O, R, T)
मृदा (S) = मूल शैल (P), जलवायु (Cl), जीव/ह्यूमस (O), ढाल (R) व समय (T) का फलन।
मृदा परिच्छेदिका संस्तर (Soil Profile Horizons)
A संस्तर (शीर्षमृदा/ह्यूमस) -> B संस्तर (उपमृदा) -> C संस्तर (रेगोलिथ) -> R संस्तर (आधार शैल)
परिपक्व मिट्टी में विकसित होने वाले चार स्पष्ट लंबवत संस्तर।
आदर्श मृदा बनावट अनुपात (Soil Texture Index)
दोमट मिट्टी = 40% बालू : 40% गाद (सिल्ट) : 20% चिकनी मिट्टी (क्ले)
कृषि फसलों की पैदावार के लिए सबसे उपयुक्त एवं उपजाऊ बनावट।
मोहोस कठोरता मापक (Mohs Scale of Hardness)
टैल्क (1) -> जिप्सम (2) -> कैल्साइट (3) -> ... -> क्वार्ट्ज (7) -> हीरा (10 - कठोरतम)
खनिजों की खरोंच प्रतिरोधक क्षमता मापने का अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैमाना।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
ग्रेनाइट और बेसाल्ट दोनों ही आग्नेय शैलें हैं, फिर भी इनके कणों के आकार और रंग में भारी अंतर क्यों होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरणबद्ध भूगर्भीय कारण:
1) कणों का आकार: ग्रेनाइट एक पातालीय (अंतर्वेधी) शैल है, जो भूगर्भ की अत्यधिक गहराई में धीरे-धीरे ठंडी होती है। मंद शीतलन के कारण खनिजों के क्रिस्टल बड़े आकार में विकसित हो पाते हैं। बेसाल्ट एक ज्वालामुखीय (बहिर्वेधी) शैल है, जो लावे के रूप में धरातल पर आकर हवा व जल के संपर्क में तेजी से ठंडी होती है, जिससे इसके क्रिस्टल अत्यंत बारीक रह जाते हैं।
2) रंग: ग्रेनाइट में हल्के रंग के क्वार्ट्ज और फेल्डस्पार अधिक होते हैं; जबकि बेसाल्ट में भारी, गहरे रंग के लोहे व मैग्नीशियम के खनिज अधिक होते हैं।
उदाहरण 2
जीवाश्म केवल अवसादी शैलों में ही क्यों मिलते हैं, आग्नेय या कायांतरित शैलों में क्यों नहीं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
वैज्ञानिक कारण:
1) आग्नेय शैल: यह 1000°C से भी अधिक तप्त गलित मैग्मा या लावे से बनती है। इस प्रचंड ताप में किसी भी मृत जीव या पौधे का अवशेष तुरंत भस्म हो जाता है।
2) कायांतरित शैल: यह भूगर्भ में अत्यधिक ताप और संपीड़न दबाव के कारण पुनः पिघलकर या क्रिस्टलीकृत होकर बनती है, जिससे पूर्व उपस्थित जीवाश्म नष्ट हो जाते हैं।
3) अवसादी शैल: यह जल बेसिनों में शांत वातावरण में परतों के रूप में धीरे-धीरे जमा होती है। मृत जीव इन परतों में दबकर ऑक्सीजन के अभाव में सड़ने से बच जाते हैं और कालांतर में जीवाश्म के रूप में सुरक्षित रह जाते हैं।
उदाहरण 3
किसी खदान में चट्टान का चूर्ण बिखरा पड़ा है। क्या इस चूर्ण को सीधे "उपजाऊ मिट्टी" कहा जा सकता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
वैज्ञानिक विश्लेषण: नहीं, इसे मिट्टी नहीं कहा जा सकता।
केवल चट्टान के चूर्ण को रेगोलिथ (Regolith) कहते हैं। रेगोलिथ मिट्टी निर्माण की कच्ची सामग्री मात्र है। उपजाऊ मिट्टी बनने के लिए इसमें सैकड़ों वर्षों तक जलवायु की क्रिया, सूक्ष्म जीवाणुओं की गतिविधि तथा पौधों व जीवों के सड़ने-गलने से बना जैविक पदार्थ या ह्यूमस (Humus) मिलना अनिवार्य है। बिना ह्यूमस और संतुलित जल-वायु के कोई भी शैल चूर्ण मिट्टी नहीं बन सकता।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि पत्थर का अर्थ केवल कठोर वस्तु है और कोयला भी अन्य पत्थरों की तरह भवन निर्माण में उपयोग हो सकता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कोयला एक जैविक अवसादी शैल है जो ज्वलनशील है और ऊर्जा देती है; जबकि ग्रेनाइट एक ठोस क्रिस्टलीय आग्नेय शैल है जो भवन निर्माण में काम आती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चूना पत्थर और संगमरमर को पूरी तरह अलग व असंबद्ध मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

संगमरमर वास्तव में चूना पत्थर का ही कायांतरित रूप है। ताप और दबाव से चूना पत्थर ही संगमरमर में परिवर्तित होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

रेगोलिथ और परिपक्व मिट्टी को एक ही समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

रेगोलिथ में ह्यूमस और सूक्ष्म जीवों का पूर्ण अभाव होता है; जबकि मिट्टी में ह्यूमस, जल, वायु और पोषक तत्व होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि बलुई मिट्टी में पानी तुरंत छन जाता है, इसलिए वह फसलों के लिए सबसे अच्छी है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बलुई मिट्टी में पानी और पोषक तत्व टिकते ही नहीं, जिससे पौधे सूख जाते हैं; दोमट मिट्टी सबसे आदर्श होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सभी पत्थरों को पानी में डूबने वाला मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्यूमिस पत्थर में गैस के बुलबुले फंस जाने के कारण उसका घनत्व पानी से कम होता है, इसलिए वह जल पर तैरता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

🌍 शैलों का वर्गीकरण, भूगर्भीय शैल चक्र एवं मृदा संस्तर WBBSE Class 7 Geography (আমাদের পৃথিবী) • TargetExams Gold Standard Chapter 6 Notes 1. तीन प्रमुख शैल प्रकार व शैल चक्र आग्नेय, अवसादी एवं कायांतरित शैलों का चक्र आग्नेय शैल (प्राथमिक शैल) अवसादी शैल (परतदार/जीवाश्म) कायांतरित शैल (क्रिस्टलीय) Magma ম্যাগমা Weathering • Lithification • Heat & Lithostatic Pressure • Melting 2. आग्नेय एवं अवसादी शैल संरचना पातालीय ग्रेनाइट, ज्वालामुखीय बेसाल्ट व जीवाश्म Pluton: Granite Lava: Basalt पातालीय: ग्रेनाइट (मोटे कण) Sandstone (বেলেপাথর) Shale (কাদাশিলা) • Fossils 🐚 Limestone (চুনাপাথর) स्तरीकृत अवसादी परतें व जीवाश्म 3. शैल कायांतरण (रूपांतरण) ताप एवं दाब से रूपांतरण: नीस, संगमरमर व स्लेट ग्रेनाइट → नीस (धारीदार) चूना पत्थर → संगमरमर (मार्बल) बलुआ पत्थर → क्वार्ट्जाइट (कठोर) शेल → स्लेट (पट्टिका शैल) Metamorphism Drivers (রূপান্তরের প্রধান চালিকাশক্তি) 🔥 High Temperature (200°C - 800°C) + ⚙️ Directional & Lithostatic Pressure Mineral Recrystallization • Foliation (পত্রায়ণ) • Non-Porous Crystal Matrix 4. मृदा परिच्छेदिका (संस्तर) शीर्ष मृदा (ह्यूमस), उपमृदा, रेगोलिथ व आधार शैल A संस्तर: शीर्ष मृदा (उपजाऊ ह्यूमस) 🌱 Plant Root Zone B संस्तर: उपमृदा (संचित खनिज) Illuviation (সঞ্চয়) C संस्तर: रेगोलिथ (खंडित शैल) Weathered Debris R संस्तर: ठोस मूल आधार शैल Impermeable Rock मृदा संरचना: बलुई, चिकनी व दोमट (Sand:Silt:Clay Ratio)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
भूपर्पटी खनिजों से बनी है; खनिज निश्चित रासायनिक यौगिक हैं तथा शैलें खनिजों का प्राकृतिक समुच्चय हैं।
मुख्य बिंदु 2
उत्पत्ति के आधार पर तीन प्रमुख शैलें हैं: आग्नेय (प्राथमिक), अवसादी (परतदार), और कायांतरित (रूपांतरित)।
मुख्य बिंदु 3
मंद गति से ठंडी होने वाली अंतर्वेधी शैल ग्रेनाइट (मोटे कण) है, और तीव्र गति से ठंडी होने वाली बहिर्वेधी शैल बेसाल्ट (सूक्ष्म कण) है।
मुख्य बिंदु 4
जीवाश्म, क्षैतिज परतें और कोयला-पेट्रोलियम केवल अवसादी शैलों में ही पाए जाते हैं।
मुख्य बिंदु 5
कायांतरण द्वारा ग्रेनाइट नीस में, चूना पत्थर संगमरमर में, बलुआ पत्थर क्वार्ट्जाइट में और शेल स्लेट में बदलता है।
मुख्य बिंदु 6
शैल चक्र करोड़ों वर्षों की वह सतत भूगर्भीय प्रक्रिया है जिसमें सभी शैलें एक-दूसरे में चक्रीय रूप से परिवर्तित होती रहती हैं।
मुख्य बिंदु 7
अपक्षय से शैलें रेगोलिथ बनती हैं और डोकुचेव के नियम $S = f(P, Cl, O, R, T)$ के तहत ह्यूमस के मेल से मिट्टी बनती है।
मुख्य बिंदु 8
मृदा परिच्छेदिका में A (शीर्षमृदा), B (उपमृदा), C (रेगोलिथ) और R (आधार शैल) संस्तर होते हैं; दोमट मिट्टी कृषि के लिए सर्वोत्तम है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
कौन सी आग्नेय शैल जल पर तैरती है और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्यूमिस (Pumice) पत्थर जल पर तैरता है। ज्वालामुखी विस्फोट के समय लावे में अत्यधिक गैस के बुलबुले फंस जाते हैं, जिससे यह अत्यंत सरंध्र और झागदार बन जाता है। इसका घनत्व पानी से कम ($<1.0\text{ g/cm}^3$) हो जाने के कारण यह जल में तैरता है।
2
दक्कन के पठार की मिट्टी काली क्यों है और यह किस शैल के अपक्षय से बनी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: दक्कन का पठार प्राचीन काल में दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट लावे के जमने से बना था। लाखों वर्षों तक बेसाल्ट शैल के अपक्षय से लौह व मैग्नीशियम युक्त उपजाऊ काली मिट्टी बनी, जिसे रेगुर कहते हैं और यह कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
3
अवसादी शैल को स्तरीकृत (परतदार) शैल क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नदियों व पवनों द्वारा लाई गई तलछट जल बेसिनों में युगों-युगों तक एक के ऊपर एक क्षैतिज परतों के रूप में जमा होती रहती है। बाद में दबकर ठोस शैल बन जाने पर भी उसकी ये परतें (Bedding planes) स्पष्ट दिखाई देती हैं, इसलिए इसे स्तरीकृत शैल कहते हैं।
4
मृदा परिच्छेदिका का कौन सा संस्तर कृषि उत्पादन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: A संस्तर (शीर्ष मृदा / Topsoil) सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें सड़े-गले जैविक अवशेषों से बना काला ह्यूमस (Humus) सर्वाधिक मात्रा में होता है, जो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व और नमी प्रदान करता है।
5
फसलों की पैदावार के लिए दोमट मिट्टी को सबसे उत्तम क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: दोमट मिट्टी में लगभग 40% बालू, 40% सिल्ट (गाद) और 20% चिकनी मिट्टी का आदर्श संतुलन होता है। इससे जड़ों को पर्याप्त वायु मिलती है, पानी का ठहराव नहीं होता, और पौधों के लिए जरूरी नमी व पोषक तत्व लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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