जल संपूर्ण जीवमंडल की जीवनरेखा है। किंतु मानव जनित प्रदूषण ने हमारे स्वच्छ जल स्रोतों को संकट में डाल दिया है। जल प्रदूषण के सही मूल्यांकन के लिए भौतिक एवं जैव-रासायनिक सूचकांकों को समझना अनिवार्य है।
जल प्रदूषण की वैज्ञानिक परिभाषा
जल में अवांछनीय भौतिक, रासायनिक या जैविक पदार्थों का इस सीमा तक मिल जाना जिससे उसकी प्राकृतिक गुणवत्ता नष्ट हो जाए और वह जीवों के लिए हानिकारक बन जाए, जल प्रदूषण कहलाता है।
शुद्ध जल के मानक एवं वैश्विक संकट
पेयजल पारदर्शी, गंधहीन, हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त और 6.5 से 8.5 के बीच $pH$ वाला होना चाहिए। पृथ्वी के कुल जल का मात्र 1% ही मीठे जल के रूप में उपलब्ध है।
घुलित ऑक्सीजन (DO - Dissolved Oxygen)
जल में घुली स्वतंत्र ऑक्सीजन जो जलीय जीवों के श्वसन हेतु आवश्यक है। स्वस्थ जल में DO कम से कम $6\text{ mg/L}$ होना चाहिए; $4\text{ mg/L}$ से नीचे जाने पर मछलियों का दम घुटने लगता है।
जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग (BOD)
जल के जैविक कचरे को सड़ाने के लिए वायवीय जीवाणुओं को जितनी ऑक्सीजन चाहिए, उसे BOD कहते हैं। प्रदूषण बढ़ने पर BOD बढ़ता है और घुलित ऑक्सीजन (DO) शून्य हो जाती है।
रासायनिक ऑक्सीजन माँग (COD)
जल के सभी कार्बनिक व अकार्बनिक यौगिकों को रासायनिक रूप से ऑक्सीकृत करने हेतु आवश्यक कुल ऑक्सीजन को COD कहा जाता है।