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WBB • कक्षा 7 • Geography & Environment (আমাদের পৃথিবী) • अध्याय 7
अनुमानित समय: 55 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

जल प्रदूषण

पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 भूगोल एवं पर्यावरण (আমাদের পৃথিবী) के अध्याय 8 "जल प्रदूषण" (Water Pollution) में आपका स्वागत है। जल ही जीवन का मूल आधार है, परंतु अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों से हमारी जल संपदा निरंतर प्रदूषित हो रही है। इस अध्याय में जल प्रदूषण की वैज्ञानिक परिभाषा, शुद्ध जल बनाम प्रदूषित जल के भौतिक-रासायनिक मापदंड (घुलित ऑक्सीजन DO, जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग BOD, COD), प्रदूषण के प्राथमिक स्रोत (घरेलू सीवेज, औद्योगिक विषाक्त अपशिष्ट व कृषि रसायन), सुपोषण (Eutrophication) एवं शैवाल प्रस्फुटन (Algal Bloom), खाद्य श्रृंखला में विषाक्तता का जैव आवर्धन (Biomagnification), ऐतिहासिक वैश्विक आपदाएँ (मिनामाटा पारा विषाक्तता व इटाई-इटाई रोग), पश्चिम बंगाल का गंभीर भूजल आर्सेनिक संकट (ब्लैक फुट रोग) व फ्लोरोसिस, आधुनिक 3-चरणीय सीवेज उपचार संयंत्र (STP) तथा वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का विशद विश्लेषण किया गया है।

💧 क्या कांच के गिलास का बिल्कुल साफ, गंधहीन पानी भी जानलेवा जहर हो सकता है?

क्या आप जानते हैं कि नल से निकला पानी देखने में बिल्कुल शीशे जैसा साफ, पारदर्शी और गंधहीन हो, तब भी वह एक भयानक जहर हो सकता है?

पश्चिम बंगाल के मालदा, नदिया और उत्तर 24 परगना के गहरे नलकूपों के ऐसे साफ पानी में छिपा होता है एक भूगर्भीय अदृश्य जहर—आर्सेनिक (Arsenic)! वर्षों तक ऐसा पानी पीने से हथेलियों और पैरों के तलवों पर काले धब्बे, मोटी गांठे और छाले पड़ जाते हैं, जिसे ब्लैक फुट रोग (Black Foot Disease) कहते हैं और यह अंततः कैंसर का रूप ले लेता है।

दूसरी ओर, खेतों के उर्वरक तालाबों में जाकर लाखों मछलियों की जान कैसे ले लेते हैं? जल प्रदूषण के इस चक्र और इससे बचने के वैज्ञानिक उपायों को आइए विस्तार से समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 भूगोल एवं पर्यावरण (আমাদের পৃথিবী) के अध्याय 8 "जल प्रदूषण" (Water Pollution) में आपका स्वागत है। जल ही जीवन का मूल आधार है, परंतु अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों से हमारी जल संपदा निरंतर प्रदूषित हो रही है। इस अध्याय में जल प्रदूषण की वैज्ञानिक परिभाषा, शुद्ध जल बनाम प्रदूषित जल के भौतिक-रासायनिक मापदंड (घुलित ऑक्सीजन DO, जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग BOD, COD), प्रदूषण के प्राथमिक स्रोत (घरेलू सीवेज, औद्योगिक विषाक्त अपशिष्ट व कृषि रसायन), सुपोषण (Eutrophication) एवं शैवाल प्रस्फुटन (Algal Bloom), खाद्य श्रृंखला में विषाक्तता का जैव आवर्धन (Biomagnification), ऐतिहासिक वैश्विक आपदाएँ (मिनामाटा पारा विषाक्तता व इटाई-इटाई रोग), पश्चिम बंगाल का गंभीर भूजल आर्सेनिक संकट (ब्लैक फुट रोग) व फ्लोरोसिस, आधुनिक 3-चरणीय सीवेज उपचार संयंत्र (STP) तथा वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का विशद विश्लेषण किया गया है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • जल चक्र (वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण) एवं पृथ्वी पर स्वच्छ मीठे जल की सीमितता की जानकारी।
  • नदी द्रोणी, जलभृत (एक्विफर) एवं भूजल के संचलन की आधारभूत समझ।
  • कृषि में रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के सामान्य प्रभाव।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • जल प्रदूषण की वैज्ञानिक परिभाषा देना तथा DO एवं BOD के पारस्परिक व्युत्क्रमानुपाती संबंध की व्याख्या करना।
  • घरेलू अपशिष्ट, औद्योगिक भारी धातुओं एवं कृषि रसायनों द्वारा जल स्रोतों के संदूषण का विश्लेषण करना।
  • सुपोषण (यूट्रोफिकेशन) व एल्गल ब्लूम द्वारा जलीय जीवों में दम घुटने की प्रक्रिया को समझना।
  • खाद्य श्रृंखला में डीडीटी एवं पारे जैसे अविघटनीय विषैले तत्वों के जैव आवर्धन (Biomagnification) को सिद्ध करना।
  • पश्चिम बंगाल के जिलों में आर्सेनिक व फ्लोराइड संकट के कारण, लक्षण तथा आधुनिक STP व वर्षा जल संचयन का मूल्यांकन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. जल प्रदूषण की मूल परिभाषा, गुणवत...
2 2. जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत: घरेल...
3 3. जैव-रासायनिक आपदाएँ: सुपोषण (यूट...
4 4. पश्चिम बंगाल में भूजल संकट: आर्स...
5 5. जल शोधन तकनीक, आधुनिक 3-चरणीय ST...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. जल प्रदूषण की मूल परिभाषा, गुणवत्ता मानक एवं जैव-रासायनिक सूचकांक

जल संपूर्ण जीवमंडल की जीवनरेखा है। किंतु मानव जनित प्रदूषण ने हमारे स्वच्छ जल स्रोतों को संकट में डाल दिया है। जल प्रदूषण के सही मूल्यांकन के लिए भौतिक एवं जैव-रासायनिक सूचकांकों को समझना अनिवार्य है।

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जल प्रदूषण की वैज्ञानिक परिभाषा

जल में अवांछनीय भौतिक, रासायनिक या जैविक पदार्थों का इस सीमा तक मिल जाना जिससे उसकी प्राकृतिक गुणवत्ता नष्ट हो जाए और वह जीवों के लिए हानिकारक बन जाए, जल प्रदूषण कहलाता है।

2

शुद्ध जल के मानक एवं वैश्विक संकट

पेयजल पारदर्शी, गंधहीन, हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त और 6.5 से 8.5 के बीच $pH$ वाला होना चाहिए। पृथ्वी के कुल जल का मात्र 1% ही मीठे जल के रूप में उपलब्ध है।

3

घुलित ऑक्सीजन (DO - Dissolved Oxygen)

जल में घुली स्वतंत्र ऑक्सीजन जो जलीय जीवों के श्वसन हेतु आवश्यक है। स्वस्थ जल में DO कम से कम $6\text{ mg/L}$ होना चाहिए; $4\text{ mg/L}$ से नीचे जाने पर मछलियों का दम घुटने लगता है।

4

जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग (BOD)

जल के जैविक कचरे को सड़ाने के लिए वायवीय जीवाणुओं को जितनी ऑक्सीजन चाहिए, उसे BOD कहते हैं। प्रदूषण बढ़ने पर BOD बढ़ता है और घुलित ऑक्सीजन (DO) शून्य हो जाती है।

5

रासायनिक ऑक्सीजन माँग (COD)

जल के सभी कार्बनिक व अकार्बनिक यौगिकों को रासायनिक रूप से ऑक्सीकृत करने हेतु आवश्यक कुल ऑक्सीजन को COD कहा जाता है।

2. जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत: घरेलू सीवेज, औद्योगिक विषाक्त अपशिष्ट व कृषि रसायन

नगरों के सीवेज, औद्योगिक इकाइयों के रासायनिक कचरे तथा कीटनाशक-युक्त कृषि बहाव ने जल स्रोतों को सर्वाधिक क्षति पहुंचाई है।

1

घरेलू सीवेज व डिटर्जेंट अपशिष्ट

घरों का मलमूत्र युक्त काला जल, रसोई का गंदा जल तथा सोडियम फॉस्फेट युक्त डिटर्जेंट का झाग नालियों द्वारा सीधे नदियों में गिरता है, जिससे हैजा व टाइफाइड के रोगाणु फैलते हैं।

2

औद्योगिक अपशिष्ट व भारी धातुएँ

चमड़ा उद्योग, कपड़ा रंगाई व दवा कारखानों से निकलने वाले तेजाब और घातक भारी धातुएँ: पारा ($Hg$), सीसा ($Pb$), कैडमियम ($Cd$), क्रोमियम ($Cr$) सीधे गंगा व हुगली में बहा दी जाती हैं।

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विद्युत संयंत्रों का तापीय प्रदूषण

बिजलीघरों के कंडेनसर से निकलने वाला खौलता गर्म पानी सीधे नदियों में छोड़े जाने से पानी का तापमान बढ़ता है और ऑक्सीजन सोखने की क्षमता नष्ट होती है, इसे तापीय प्रदूषण कहते हैं।

4

कृषि अपशिष्ट व कीटनाशक

फसलों में अत्यधिक डाले गए रासायनिक उर्वरक (नाइट्रेट, फॉस्फेट) और अविघटनीय कीटनाशक (डीडीटी, एंडोसल्फान) वर्षा के जल में घुलकर नदियों और तालाबों को विषैला बनाते हैं।

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समुद्री तेल रिसाव (Oil Spills)

तेल के जहाजों की दुर्घटनाओं व पाइपलाइनों से समुद्र पर तेल की मोटी परत फैल जाती है, जो वायुमंडल की ऑक्सीजन जल में जाने से रोकती है और समुद्री पक्षियों व मूंगों को मार डालती है।

3. जैव-रासायनिक आपदाएँ: सुपोषण (यूट्रोफिकेशन), जैव आवर्धन एवं ऐतिहासिक रोग

पोषक तत्वों की अत्यधिक वृद्धि और खाद्य श्रृंखला में विषैले रसायनों का प्रवेश संपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी को नष्ट कर देता है।

1

सुपोषण (Eutrophication)

खेतों के उर्वरक जब तालाबों और झीलों में जमा होते हैं, तो पानी में नाइट्रेट और फॉस्फेट पोषक तत्वों की सांद्रता अत्यधिक बढ़ जाती है, जिसे सुपोषण कहते हैं।

2

एल्गल ब्लूम एवं सूर्य प्रकाश अवरोध

पोषक तत्व पाकर शैवाल और काई अत्यधिक तेजी से फैलकर जल की सतह पर मोटी हरी चादर बना लेते हैं, जिसे एल्गल ब्लूम कहते हैं। यह सूर्य के प्रकाश को नीचे जाने से रोक देता है।

3

ऑक्सीजन की समाप्ति व मत्स्य संहार

शैवाल के मरने पर अपघटक बैक्टीरिया उन्हें सड़ाने में जल की सारी घुलित ऑक्सीजन (DO = 0 mg/L) समाप्त कर देते हैं, जिससे मछलियां तड़प-तड़प कर सामूहिक रूप से मर जाती हैं।

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खाद्य श्रृंखला में जैव आवर्धन (Biomagnification)

डीडीटी व पारे जैसे अविघटनीय विष वसा में घुलकर खाद्य श्रृंखला के हर उच्च स्तर पर लाखों गुना सांद्रित होते हैं: जल ($0.000003\text{ ppm}$) $\to$ प्लवक $\to$ छोटी मछली $\to$ बड़ी मछली $\to$ शीर्ष शिकारी मानव ($25-50\text{ ppm}$)।

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ऐतिहासिक आपदाएँ: मिनामाटा व इटाई-इटाई

जापान की मिनामाटा खाड़ी में पारे से दूषित मछलियाँ खाने से तंत्रिका तंत्र नष्ट होकर मिनामाटा रोग हुआ; तथा कैडमियम से हड्डियों के गलने का इटाई-इटाई रोग फैला था।

4. पश्चिम बंगाल में भूजल संकट: आर्सेनिक महामारी एवं फ्लोरोसिस आपदा

पश्चिम बंगाल की भूमि के नीचे दो गंभीर भूगर्भीय आपदाएँ सक्रिय हैं: डेल्टा के मैदानों में आर्सेनिक विष और पश्चिमी पठार पर फ्लोराइड संकट।

1

बंगाल आर्सेनिक की भूगर्भीय उत्पत्ति

बंगाल डेल्टा की तलछट में आयरन पाइराइट में आर्सेनिक प्राकृतिक रूप से बंधा होता है। बोरों धान हेतु नलकूपों से अंधाधुंध भूजल निकालने से वायु की ऑक्सीजन प्रवेश कर आर्सेनिक को जल में घोल देती है।

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सुरक्षित मानक एवं प्रभावित जिले

WHO की सुरक्षित सीमा 0.01 mg/L (10 ppb) है; भारत का मानक 0.05 mg/L है। अत्यधिक प्रभावित जिले: मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, बर्दवान, हावड़ा व हुगली।

3

आर्सेनिकोसिस एवं ब्लैक फुट रोग

आर्सेनिक युक्त पानी पीने से त्वचा पर काले धब्बे (मेलानोसिस), हथेलियों व तलवों पर खुरदुरी गांठे (केराटोसिस), अंगों का सड़ना व ब्लैक फुट रोग तथा कैंसर हो जाता है।

4

पश्चिमी पठार का फ्लोराइड संकट

बांकुड़ा, पुरुलिया एवं बीरभूम की प्राचीन चट्टानों से भूजल में फ्लोराइड घुलता है। 1.5 mg/L से अधिक होने पर फ्लोरोसिस होता है, जिससे बच्चों के दांत सड़ते हैं और रीढ़ व हड्डियां टेढ़ी हो जाती हैं।

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निवारण एवं सतही जल आपूर्ति

पानी उबालने से आर्सेनिक समाप्त नहीं होता। इसके निवारण हेतु एल्युमिना फिल्टर तथा भूजल का दोहन रोककर नदियों के शुद्ध जल को पाइपलाइन द्वारा घरों तक पहुंचाना अनिवार्य है।

5. जल शोधन तकनीक, आधुनिक 3-चरणीय STP एवं वर्षा जल संचयन

जल संकट और प्रदूषण से निपटने के लिए आधुनिक सीवेज उपचार संयंत्र (STP) तथा वर्षा जल संचयन सबसे प्रभावी वैज्ञानिक उपाय हैं।

1

आधुनिक 3-चरणीय STP: प्राथमिक भौतिक उपचार

लोहे की जाली (Bar screens) द्वारा तैरते प्लास्टिक व कचरे को छाना जाता है; ग्रिट कक्ष में भारी बालू-कंकड़ बैठाए जाते हैं और प्राथमिक क्लेरिफायर में जैविक गाद बैठाई जाती है।

2

द्वितीयक जैविक उपचार (BOD में 90% की गिरावट)

वातन टैंकों (Aeration tanks) में भारी मात्रा में ऑक्सीजन पंप कर वायवीय बैक्टीरिया बढ़ाए जाते हैं, जो सीवेज के सारे जैविक कचरे को खाकर BOD 85-90% तक कम कर देते हैं।

3

तृतीयक उन्नत रासायनिक निस्संक्रमण

फॉस्फेट को रासायनिक रूप से हटाने के बाद सभी हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए पराबैंगनी (UV) किरणें अथवा क्लोरीन गैस का प्रयोग किया जाता है।

4

वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting)

छतों पर गिरने वाले वर्षा जल को फिल्टर कर भूमिगत टैंकों में जमा करना अथवा रिचार्ज कुओं द्वारा भूजल स्तर बढ़ाना। संचित जल सूत्र: $V = A \times R \times C$ ($A$=क्षेत्रफल, $R$=वर्षा, $C$=गुणांक)।

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पर्यावरण कानून एवं नमामि गंगे

भारत का जल प्रदूषण निवारण अधिनियम 1974, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नियम, और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे) जल सुरक्षा की वैधानिक रीढ़ हैं।

महत्वपूर्ण भौगोलिक अवधारणाएँ, नियम एवं निर्देशांक

घुलित ऑक्सीजन व BOD का व्युत्क्रमानुपाती नियम (DO vs BOD)
जैविक कचरे का प्रवाह -> जीवाणु अपघटन -> BOD में भारी वृद्धि -> घुलित ऑक्सीजन (DO) समाप्त
स्वच्छ जल हेतु DO > 6 mg/L आवश्यक; DO < 4 mg/L होने पर जलीय जीवों का दम घुटने लगता है।
सुपोषण (यूट्रोफिकेशन) का 5-चरणीय अनुक्रम
पोषक तत्व (N, P) -> एल्गल ब्लूम -> सूर्य प्रकाश अवरोध -> जीवाणु वृद्धि -> शून्य DO -> मत्स्य संहार
खेतों के उर्वरक से जलाशयों में उत्पन्न होने वाला विनाशकारी प्राकृतिक चक्र।
जैव आवर्धन गुणक नियम (Biomagnification Multiplier)
जल (0.000003 ppm) -> प्लवक (0.04 ppm) -> छोटी मछली (0.5 ppm) -> बड़ी मछली (2 ppm) -> मानव (25 ppm)
खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक उच्च स्तर पर अविघटनीय वसा-घुलनशील विषों की सांद्रता में लाखों गुना वृद्धि।
पेयजल विषाक्तता की अंतर्राष्ट्रीय मानक सीमाएँ (WHO / BIS)
आर्सेनिक: सुरक्षित < 0.01 mg/L (अधिकतम 0.05 mg/L) | फ्लोराइड: सुरक्षित < 1.0 mg/L (अधिकतम 1.5 mg/L)
पश्चिम बंगाल के नलकूपों में यह सीमा पार होने पर आर्सेनिकोसिस व फ्लोरोसिस उत्पन्न होता है।
आधुनिक 3-चरणीय STP शोधन संरचना (3-Stage Sewage Treatment)
प्राथमिक (भौतिक छानना/बैठाना) -> द्वितीयक (जैविक वातन/BOD -90%) -> तृतीयक (UV/क्लोरीन निस्संक्रमण)
सीवेज के गंदे जल को शुद्ध करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत वैज्ञानिक चरण।
छत वर्षा जल संचयन क्षमता सूत्र (Rainwater Harvesting Formula)
V = A x R x C
V = संचित जल (लीटर), A = छत का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर), R = वार्षिक वर्षा (मिमी), C = अपवाह गुणांक (~0.85)।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
किसी नगर का अनुपचारित सीवेज एक स्वच्छ नदी में गिराए जाने के कुछ दूरी बाद लाखों मछलियाँ मरी हुई पाई गईं। इसका सटीक जैव-रासायनिक कारण स्पष्ट करें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
चरणबद्ध जैव-रासायनिक विश्लेषण:
1) जैविक कचरे का भार: अनुपचारित सीवेज में भारी मात्रा में मलमूत्र और कार्बनिक अपशिष्ट होता है।
2) जीवाणुओं का विस्फोट: नदी के वायवीय बैक्टीरिया (Aerobic bacteria) इस कार्बनिक कचरे को सड़ाने और पचाने के लिए तेजी से बढ़ते हैं।
3) ऑक्सीजन का क्षय व BOD वृद्धि: बैक्टीरिया द्वारा सांस लेने में जल की घुलित ऑक्सीजन (DO) अत्यंत तेजी से खर्च होती है, जिससे नदी की BOD (जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग) बहुत अधिक बढ़ जाती है और DO का स्तर $8\text{ mg/L}$ से गिरकर लगभग शून्य ($<1\text{ mg/L}$) हो जाता है।
4) दम घुटना: पानी में सांस न ले पाने के कारण मछलियां और अन्य जलीय जीव सामूहिक रूप से दम घुटने से मर जाते हैं, तथा अवायवीय सड़ांध से दुर्गंधयुक्त गैसें निकलती हैं।
उदाहरण 2
पश्चिम बंगाल के मालदा और नदिया जिलों के ग्रामीणों की हथेलियों और तलवों पर काले धब्बे व मोटी गांठे (ब्लैक फुट रोग) क्यों हो जाती हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भूगर्भीय एवं स्वास्थ्यगत कारण:
1) भूगर्भीय स्रोत: बंगाल डेल्टा की भूजल परतों में आयरन पाइराइट खनिजों में प्राकृतिक रूप से विषैला आर्सेनिक बंधा होता है।
2) अत्यधिक दोहन: बोरों धान की खेती के लिए नलकूपों से अनियंत्रित भूजल निकालने से जलस्तर गिर जाता है और उसमें हवा की ऑक्सीजन प्रवेश कर जाती है, जिससे आर्सेनिक जल में घुल जाता है।
3) दीर्घकालिक विषाक्तता: पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा WHO की सुरक्षित सीमा ($0.01\text{ mg/L}$) से कई गुना अधिक होने पर वर्षों तक इसे पीने से आर्सेनिकोसिस (Arsenicosis) हो जाता है।
4) लक्षण: शरीर के केराटिन ऊतकों में आर्सेनिक जमने से त्वचा पर काले धब्बे (मेलानोसिस), हथेलियों पर कड़े छाले (केराटोसिस) और रक्त धमनियां बंद होकर ब्लैक फुट रोग व कैंसर बन जाता है।
उदाहरण 3
खेत में छिड़का गया थोड़ा सा डीडीटी (0.000003 ppm) झील की मछलियाँ खाने वाले पक्षियों के शरीर में 25 ppm तक कैसे पहुंच जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
जैव आवर्धन (Biomagnification) का तंत्र:
1) अविघटनीय प्रकृति: डीडीटी पानी में नहीं घुलता, बल्कि वसा (Fat) में घुलता है और जीवों के शरीर से बाहर नहीं निकल पाता।
2) प्राथमिक उपभोक्ता: सूक्ष्म जलीय प्लवक पानी से डीडीटी सोखते हैं ($0.04\text{ ppm}$)।
3) द्वितीयक उपभोक्ता: हजारों प्लवकों को खाने वाली छोटी मछलियों में यह सांद्रता बढ़कर $0.5\text{ ppm}$ हो जाती है। सैकड़ों छोटी मछलियों को खाने वाली बड़ी मछलियों में यह $2.0\text{ ppm}$ पहुंच जाती है।
4) शीर्ष उपभोक्ता: जीवन भर ऐसी मछलियाँ खाने वाले बगुले या बाज जैसे पक्षियों में डीडीटी की सांद्रता लगभग 25 से 50 ppm (लाखों गुना वृद्धि) हो जाती है। इसके प्रभाव से पक्षियों के अंडों के छिलके पतले व कमजोर हो जाते हैं, जो उनके बैठने पर ही टूट जाते हैं और उनकी वंशवृद्धि रुक जाती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि पानी यदि बिल्कुल साफ, पारदर्शी और ठंडा है, तो वह 100% सुरक्षित पीने योग्य है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे जानलेवा जहर पानी में घुले होने पर भी पानी बिल्कुल शीशे जैसा साफ और गंधहीन रहता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

BOD के मान का बढ़ना जल की अच्छी सेहत का लक्षण मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

BOD अधिक होने का मतलब है कि पानी में कचरा बहुत अधिक है और बैक्टीरिया उसे सड़ाने में सारी ऑक्सीजन खत्म कर रहे हैं; अतः पानी अत्यधिक प्रदूषित है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आर्सेनिक और फ्लोराइड संकट को एक ही समझना या उनके जिलों को मिला देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आर्सेनिक डेल्टा के मैदानी जिलों (मालदा, नदिया, 24 परगना) में होता है और ब्लैक फुट रोग करता है; जबकि फ्लोराइड पश्चिमी पठार (बांकुड़ा, पुरुलिया) में होता है और हड्डियों व दांतों को टेढ़ा करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि पानी को उबालने से आर्सेनिक या सीसा जैसे रासायनिक जहर नष्ट हो जाते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

उबालने से बैक्टीरिया मरते हैं, लेकिन रासायनिक धातुएँ नष्ट नहीं होतीं; बल्कि पानी भाप बनकर उड़ने से आर्सेनिक और गाढ़ा हो जाता है!

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

तालाब में हरी काई की घनी चादर को स्वस्थ जलीय जीवन का संकेत मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह एल्गल ब्लूम है, जो सूर्य के प्रकाश को रोककर और ऑक्सीजन समाप्त करके पूरे तालाब के जीवों को मार डालता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

💧 जल प्रदूषण: संदूषण चक्र, जैव-रासायनिक संकट एवं उपचार WBBSE Class 7 Geography (আমাদের পৃথিবী) • TargetExams Gold Standard Chapter 8 Notes 1. जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत घरेलू सीवेज, औद्योगिक विषाक्त अपशिष्ट व कृषि रसायन 🏠 Domestic Municipal Blackwater घरेलू अपशिष्ट व डिटर्जेंट (फॉस्फेट) 🏭 Industrial Chemical Effluents भारी धातुएँ (सीसा, पारा, कैडमियम) 🌾 Agricultural Non-Point Runoff कृषि उर्वरक व कीटनाशक (DDT/कीटनाशी) Alters pH, Dissolved Oxygen, Turbidity, Coliform Count & Aquatic Toxicity 2. सुपोषण (यूट्रोफिकेशन) व शैवाल प्रस्फुटन पोषक तत्व (N, P) → शैवाल वृद्धि → ऑक्सीजन क्षय → मत्स्य संहार 1. नाइट्रेट/फॉस्फेट का जल में मिश्रण 2. शैवाल की अनियंत्रित वृद्धि (एल्गल ब्लूम) 3. सूर्य का प्रकाश अवरुद्ध, पौधों का विनाश 4. जीवाणुओं द्वारा घुलित ऑक्सीजन (DO) समाप्त 5. एनोक्सिया व मछलियों की मृत्यु ☠️ DO < 2 mg/L • High BOD 3. जैव आवर्धन व बंगाल भूजल संकट खाद्य श्रृंखला में सांद्रता वृद्धि; आर्सेनिक व फ्लोराइड संकट 🔬 Biomagnification (Toxin Amplification): जैव आवर्धन: जल (0.000003) → प्लवक → छोटी मछली → बड़ी मछली → मानव (25 ppm) ⚠️ Arsenicosis (আর্সেনিক) Limit: > 0.05 mg/L Malda, Nadia, 24 Pgs Black Foot Disease Skin Keratosis & Cancers ⚠️ Fluorosis (ফ্লোরাইড) Limit: > 1.5 mg/L Bankura, Purulia, Birbhum Dental & Skeletal Damage Joint Crippling & Brittleness 4. 3-चरणीय सीवेज उपचार (STP) व संरक्षण भौतिक, जैविक एवं रासायनिक शुद्धिकरण व वर्षा जल संचयन 1. प्राथमिक भौतिक उपचार (छानना व तलछटन) 2. द्वितीयक जैविक उपचार (सक्रिय आपंक/बैक्टीरिया) BOD -90% 3. तृतीयक रासायनिक उपचार (क्लोरीनीकरण / UV) Safe Effluent 🌧️ वर्षा जल संचयन (RWH) व भूजल पुनर्भरण Harvested Yield: V = Area × Rainfall × Runoff Coeff (V = A × R × C)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
जल के प्राकृतिक भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों का हानिकारक पतन ही जल प्रदूषण है।
मुख्य बिंदु 2
स्वस्थ जलीय जीवन हेतु DO > 6 mg/L आवश्यक है; प्रदूषण बढ़ने पर BOD बढ़ता है और DO जानलेवा स्तर तक घट जाता है।
मुख्य बिंदु 3
सीवेज का मलमूत्र व डिटर्जेंट, कारखानों की भारी धातुएँ (पारा, सीसा, कैडमियम) और कृषि उर्वरक मुख्य प्रदूषण स्रोत हैं।
मुख्य बिंदु 4
उर्वरकों से जलाशयों में एल्गल ब्लूम होकर ऑक्सीजन शून्य हो जाती है, इस विनाशकारी प्रक्रिया को सुपोषण (यूट्रोफिकेशन) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 5
खाद्य श्रृंखला के पोषण स्तरों में अविघटनीय विषैले रसायनों की सांद्रता में निरंतर वृद्धि को जैव आवर्धन कहते हैं।
मुख्य बिंदु 6
जापान में पारे से मिनामाटा रोग और कैडमियम के विष से हड्डियों का इटाई-इटाई रोग फैला था।
मुख्य बिंदु 7
पश्चिम बंगाल के डेल्टा में आर्सेनिक से ब्लैक फुट रोग तथा पश्चिमी पठारी जिलों में फ्लोराइड से फ्लोरोसिस की महामारी है।
मुख्य बिंदु 8
आधुनिक STP में प्राथमिक भौतिक, द्वितीयक जैविक (BOD -90%) और तृतीयक रासायनिक UV निस्संक्रमण द्वारा जल शुद्ध किया जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
जब किसी नदी में BOD का मान अचानक बहुत बढ़ जाता है, तो मछलियों की क्या दशा होती है और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: BOD बढ़ने का अर्थ है कि पानी में भारी जैविक कचरा आ गया है, जिसे सड़ाने के लिए बैक्टीरिया जल की सारी घुलित ऑक्सीजन (DO) सोख लेते हैं। जब DO $4\text{ mg/L}$ से नीचे गिर जाती है या शून्य हो जाती है, तो मछलियां सांस न ले पाने के कारण दम घुटने से सामूहिक रूप से मर जाती हैं।
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क्या नलकूप के आर्सेनिक युक्त पानी को उबालने से वह पीने योग्य हो जाता है? वैज्ञानिक तर्क दें।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नहीं, पानी उबालने से आर्सेनिक समाप्त नहीं होता। आर्सेनिक एक अकार्बनिक भारी धातु तत्व है, कोई जीवित कीटाणु नहीं जो ताप से मर जाए। पानी उबालने से पानी भाप बनकर उड़ता है, जिससे बर्तन के शेष पानी में आर्सेनिक की सांद्रता और अधिक बढ़ जाती है। इसे हटाने के लिए विशेष एल्युमिना फिल्टर की आवश्यकता होती है।
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1950 के दशक में जापान की मिनामाटा खाड़ी के किनारे रहने वाले लोगों में तंत्रिका तंत्र का पक्षाघात क्यों हुआ था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रासायनिक कारखाने द्वारा मिनामाटा खाड़ी में मिथाइल पारा (Mercury) बहाया गया था। जैव आवर्धन द्वारा यह पारा खाड़ी की मछलियों में भारी मात्रा में जमा हो गया। उन विषैली मछलियों को खाने से लोगों का मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र नष्ट हो गया, जिसे मिनामाटा रोग कहते हैं।
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पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा और पुरुलिया जिलों के लोगों में दांतों का पीलापन व हड्डियों के मुड़ने की समस्या अधिक क्यों है?
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उत्तर: बांकुड़ा और पुरुलिया प्राचीन ग्रेनाइट व नीस चट्टानी पठार पर स्थित हैं। इन चट्टानों से भूजल में अत्यधिक फ्लोराइड खनिज घुल जाता है। फ्लोराइड युक्त पानी पीने से लोग फ्लोरोसिस रोग के शिकार हो जाते हैं, जिससे दांतों पर गड्ढे पड़ते हैं और हड्डियां व रीढ़ टेढ़ी हो जाती हैं।
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आधुनिक सीवेज उपचार संयंत्र (STP) में द्वितीयक (जैविक) चरण का क्या महत्व है?
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उत्तर: द्वितीयक चरण एक जैविक उपचार है। वातन टैंकों में हवा पंप करके सक्रिय वायवीय जीवाणुओं को बढ़ाया जाता है, जो गंदे पानी के समस्त घुलनशील कार्बनिक कचरे को खाकर समाप्त कर देते हैं। इससे सीवेज का BOD लगभग 85% से 90% तक कम हो जाता है और पानी स्वच्छ हो जाता है।
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