पृथ्वी का धरातल सर्वत्र एकसमान या स्थिर नहीं है। कहीं ऊँचे शिखर हैं, कहीं ऊँचे-सपाट पठार और कहीं दूर-दूर तक फैले समतल मैदान। धरातल के इस विविध स्वरूप को स्थलरूप (Landform) कहते हैं। ये स्थलरूप मुख्य रूप से दो विरोधी प्राकृतिक बलों के संघर्ष से बनते हैं: अंतर्जात बल (Endogenic Forces) और बहिर्जात बल (Exogenic Forces)।
अंतर्जात प्रक्रियाएँ (Endogenic Processes) एवं विवर्तनिकी
पृथ्वी के आंतरिक भाग में उपस्थित रेडियोधर्मी तत्वों के विखंडन और अत्यधिक भू-गर्भीय ऊष्मा के कारण दुर्बलता मंडल (Asthenosphere) में संवहन धाराएँ उत्पन्न होती हैं। ये आंतरिक बल विवर्तनिक प्लेटों को गतिमान करते हैं:
- दीर्घकालिक मंद संचलन (Slow Movements): करोड़ों वर्षों में मंद गति से होते हैं। इसमें पर्वत निर्माणकारी हलचल (Orogenic Movement) क्षैतिज संपीड़न बल द्वारा अवसादों को मोड़कर वलित पर्वत बनाती है, जबकि महादेश जनक हलचल (Epeirogenic Movement) लंबवत रूप से महाद्वीपों का उत्थान या धंसाव करती है।
- आकस्मिक हलचल (Sudden Movements): कुछ ही सेकंड या मिनटों में भारी तबाही और तीव्र भू-आकृतिक परिवर्तन लाते हैं; जैसे भूकंप (Earthquakes) एवं ज्वालामुखी उद्गार (Volcanism)।
बहिर्जात प्रक्रियाएँ (Exogenic Processes) एवं समतलन
सौर ऊर्जा एवं गुरुत्वाकर्षण बल से संचालित होकर धरातल के ऊपर सक्रिय रहने वाले प्राकृतिक कारक—नदियाँ, पवन, हिमनद, समुद्री तरंगें तथा अपक्षय (Weathering)—उठे हुए भागों को काट-छाँटकर नीचा करते हैं (अपरदन / निम्नीकरण - Degradation) तथा कटे हुए मलबे को निचले गड्ढों में भरकर समतल करते हैं (निक्षेपण / अधिवृद्धि - Aggradation)। इन दोनों की सम्मिलित प्रक्रिया को समतलन या क्रमबद्धता (Gradation) कहते हैं।
तुंगतामिति वर्गीकरण (Hypsometric Classification)
समुद्र तल से ऊँचाई, ढाल और उच्चावच के आधार पर स्थलरूपों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
- पर्वत (Mountain): समुद्र तल से 900 या 1,000 मीटर से अधिक ऊँचा, तीव्र ढाल और नुकीले शिखरों वाला विशाल शैल समूह। (300 से 900 मीटर की ऊँचाई वाली भूमियों को सामान्यतः पहाड़ या पहाड़ी कहा जाता है)।
- पठार (Plateau): समुद्र तल से प्रायः 300 से 900 मीटर ऊँचा, सपाट एवं विस्तृत शीर्ष और खड़े किनारों वाला स्थलरूप—जिसे टेबल लैंड भी कहते हैं।
- मैदान (Plain): समुद्र तल से 300 मीटर से कम ऊँचाई पर स्थित प्रायः समतल अथवा मंद तरंगित विस्तृत भूभाग।
प्लेट विवर्तनिकी एवं स्थलरूपों का विकास
जब दो विवर्तनिक प्लेटें आमने-सामने टकराती हैं (अभिसारी प्लेट सीमा), तो उनके बीच का मलबा संपीडित होकर विशाल वलित पर्वत बन जाता है। जब प्लेटें एक-दूसरे से विपरीत दिशा में खिंचती हैं (अपसारी प्लेट सीमा), तो तनाव बल से भ्रंश और भ्रंश घाटियाँ बनती हैं।
परीक्षक टिप एवं मुख्य निष्कर्ष
याद रखें: अंतर्जात बल प्राथमिक स्थलरूप (पर्वत व पठार) बनाकर विषमता पैदा करते हैं, जबकि बहिर्जात बल अपरदन व निक्षेपण द्वारा द्वितीयक स्थलरूप (मैदान) बनाकर धरातल को समतल करने का सतत प्रयास करते हैं।