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WBB • कक्षा 7 • Geography & Environment (আমাদের পৃথিবী) • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

पृथ्वी का परिक्रमण

पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 के "हमारी पृथ्वी" (Our Earth) पाठ्यक्रम का प्रथम अध्याय "पृथ्वी का परिक्रमण" (Earth's Revolution)। इस अध्याय में पृथ्वी की परिक्रमण गति (वार्षिक गति), दीर्घवृत्ताकार कक्षा, उपसौर एवं अपसौर स्थितियाँ, पृथ्वी का स्थायी अक्षीय झुकाव (66½°), रविमार्ग एवं सूर्य की आभासी वार्षिक गति, विषुव (वसंत विषुव एवं शरद विषुव), संक्रांति (कर्क संक्रांति एवं मकर संक्रांति), दिन-रात की अवधि में परिवर्तन, ऋतु परिवर्तन के वैज्ञानिक कारण, तथा ध्रुवीय परिघटनाएं जैसे मध्यरात्रि के सूर्य का देश (हैमरफेस्ट, नॉर्वे), 6 महीने का दिन व 6 महीने की रात, एवं सुमेरु व कुमेरु ज्योति (अरोरा) का विस्तृत एवं गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

जनवरी में जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है, तब हमारे यहाँ कड़ाके की ठंड क्यों पड़ती है?

हममें से अधिकांश लोग यही सोचते हैं कि जब पृथ्वी सूर्य के पास आती है तो गर्मी होती है, और जब दूर जाती है तो सर्दी होती है! लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट (मात्र 14.7 करोड़ किमी दूर, जिसे 'उपसौर' कहते हैं) होती है? इसके बावजूद जनवरी में पश्चिम बंगाल और पूरे उत्तर भारत में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ती है! वहीं दूसरी ओर 4 जुलाई को पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर (15.2 करोड़ किमी दूर, जिसे 'अपसौर' कहते हैं) होती है, फिर भी जुलाई में हमारे यहाँ भीषण गर्मी और उमस भरा मानसून होता है! अगर दूरी ही तापमान तय करती, तो जनवरी में हमें गर्मी से झुलस जाना चाहिए था! ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ऋतु परिवर्तन सूर्य की दूरी से नहीं, बल्कि पृथ्वी के अक्ष के 66½° झुकाव और सूर्य की किरणों के आपतन कोण से होता है। आइए इस खगोलीय रहस्य को गहराई से समझें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

ऋतुएं क्यों बदलती हैं, जून में जब भारत में भीषण गर्मी होती है तब ऑस्ट्रेलिया में कड़ाके की ठंड क्यों पड़ती है, और हमारे ग्रह की जलवायु अंतरिक्षीय गतियों से कैसे संचालित होती है—यह समझने के लिए यह अध्याय भूगोल का आधारस्तंभ है। कृषि चक्र, पंचांग व कैलेंडर निर्धारण, तथा नौवहन व अंतरिक्ष विज्ञान के लिए यह ज्ञान अनिवार्य है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पृथ्वी का आकार (लध्वक्ष गोलाभ / Geoid) एवं घूर्णन गति (दैनिक गति - 24 घंटे में अपनी धुरी पर घूमना, जिससे दिन और रात बनते हैं) की मूल समझ।
  • प्रमुख अक्षांश रेखाएँ (भूमध्य रेखा 0°, कर्क रेखा 23½°N, मकर रेखा 23½°S, आर्कटिक वृत्त 66½°N, अंटार्कटिक वृत्त 66½°S) एवं देशांतर रेखाओं का ज्ञान।
  • सौरमंडल में सूर्य के चारों ओर ग्रहों की परिक्रमा एवं गुरुत्वाकर्षण बल की प्राथमिक समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पृथ्वी के घूर्णन एवं परिक्रमण में अंतर स्पष्ट करना तथा परिक्रमण अवधि (365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड) और अधिवर्ष (Leap Year) की गणितीय गणना समझाना।
  • दीर्घवृत्ताकार कक्षा एवं उपसौर (3 जनवरी - 14.7 करोड़ किमी) व अपसौर (4 जुलाई - 15.2 करोड़ किमी) स्थितियों का वैज्ञानिक महत्व समझना।
  • कक्षा-तल के साथ अक्ष के 66½° स्थायी झुकाव एवं ध्रुवतारे की ओर निरंतर संरेखण को ऋतु परिवर्तन के मुख्य कारण के रूप में सिद्ध करना।
  • विषुव (21 मार्च एवं 23 सितंबर) तथा संक्रांति (21 जून एवं 22 दिसंबर) के दौरान सूर्य की किरणों के आपतन कोण एवं दिन-रात की लंबाई का विश्लेषण करना।
  • मध्यरात्रि के सूर्य का देश (नॉर्वे का हैमरफेस्ट), ध्रुवों पर 6 माह दिन व 6 माह रात, तथा ध्रुवीय ज्योति (अरोरा) के भौगोलिक कारणों को स्पष्ट करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. परिक्रमण गति, कक्षीय वेग एवं अधि...
2 2. दीर्घवृत्ताकार कक्षा: उपसौर एवं...
3 3. कक्षा-तल पर 66½° अक्षीय झुकाव एव...
4 4. सूर्य की आभासी वार्षिक गति (रविम...
5 5. आपतन कोण, मध्यरात्रि का सूर्य एव...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. परिक्रमण गति, कक्षीय वेग एवं अधिवर्ष (Leap Year) के नियम

Foundation पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर 24 घंटे में एक चक्कर लगाने (घूर्णन / दैनिक गति) के साथ-साथ एक निश्चित अंडाकार कक्षा में सूर्य के चारों ओर निरंतर चक्कर लगाती है। सूर्य के चारों ओर घूमने की इस गति को ‘परिक्रमण गति’ या ‘वार्षिक गति’ (Earth's Revolution) कहते हैं। जिस मार्ग पर पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, उसे कक्षा (Orbit) तथा कक्षा जिस काल्पनिक तल में स्थित है, उसे कक्षा-तल (Orbital Plane) कहते हैं। पृथ्वी की कक्षा की कुल लंबाई लगभग 96 करोड़ किलोमीटर है।

Scientific Phenomenon परिक्रमण के दौरान पृथ्वी अंतरिक्ष में अत्यंत तीव्र गति से चलती है। पृथ्वी का औसत कक्षीय वेग लगभग 30 किलोमीटर प्रति सेकंड (लगभग 1,07,000 किमी/घंटा) होता है। सूर्य का एक पूरा चक्कर लगाने में पृथ्वी को 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (लगभग 365 दिन 6 घंटे या 365¼ दिन) का समय लगता है। इस अवधि को एक सौर वर्ष (Solar Year) कहा जाता है।

Mechanism सामान्य कैलेंडर में 1 वर्ष को ठीक 365 दिन माना जाता है। इससे प्रत्येक वर्ष लगभग 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (लगभग 6 घंटे) की समय-गणना छूट जाती है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए प्रत्येक 4 वर्ष में (4 × 6 = 24 घंटे = 1 दिन) एक अतिरिक्त दिन जोड़कर उस वर्ष को 366 दिन गिना जाता है। इस वर्ष को अधिवर्ष या लीप ईयर (Leap Year) कहा जाता है। यह अतिरिक्त 29वाँ दिन फरवरी माह में जोड़ा जाता है।

Analysis लीप ईयर की गणना का सटीक गणितीय नियम:

  1. जो सामान्य वर्ष 4 से पूर्णतः विभाजित होते हैं, वे लीप ईयर होते हैं (जैसे: 2024, 2028)।
  2. किंतु जिन वर्षों के अंत में दो शून्य होते हैं (अर्थात शताब्दी वर्ष / Century Years, जैसे: 1800, 1900, 2000, 2100), उन्हें केवल 4 से नहीं बल्कि 400 से पूर्णतः विभाजित होना आवश्यक है। इसका कारण यह है कि अतिरिक्त समय ठीक 6 घंटे नहीं, बल्कि 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (6 घंटे से 11 मिनट 14 सेकंड कम) होता है। प्रति 4 वर्ष में लगभग 45 मिनट अधिक जुड़ जाते हैं, जो 400 वर्षों में लगभग 3 अतिरिक्त दिनों के बराबर हो जाते हैं। अतः 1600 और 2000 लीप ईयर थे, किंतु 1800, 1900 और 2100 सामान्य वर्ष हैं।

Application यदि लीप ईयर का यह समायोजन न किया जाए, तो प्रत्येक 100 वर्ष में ऋतुएं लगभग 24 दिन आगे खिसक जाएंगी। कुछ ही शताब्दियों में हमारा कैलेंडर ऋतुओं से पूरी तरह अलग हो जाएगा और भीषण अव्यवस्था फैल जाएगी।

2. दीर्घवृत्ताकार कक्षा: उपसौर एवं अपसौर (दूरी में परिवर्तन)

Foundation खगोलशास्त्री जोहान्स केपलर के प्रथम नियमानुसार, सौरमंडल के किसी भी ग्रह की कक्षा पूर्ण गोल (वृत्ताकार) नहीं है। पृथ्वी की कक्षा भी थोड़ी अंडाकार या दीर्घवृत्ताकार (Elliptical Orbit) है, जिसके एक केंद्र (Focus) पर सूर्य स्थित है।

Scientific Phenomenon दीर्घवृत्ताकार कक्षा के कारण पूरे वर्ष में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी एक समान नहीं रहती:

  • सूर्य और पृथ्वी की औसत दूरी 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर (लगभग 15 करोड़ किमी) है, जिसे 1 खगोलीय इकाई (1 AU - Astronomical Unit) कहा जाता है।
  • उपसौर (Perihelion): प्रत्येक वर्ष 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है। इस दिन यह दूरी घटकर लगभग 14 करोड़ 70 लाख किलोमीटर (147 मिलियन किमी) रह जाती है। ग्रीक शब्द 'Peri' (निकट) तथा 'Helios' (सूर्य) से पेरिहेलियन बना है।
  • अपसौर (Aphelion): प्रत्येक वर्ष 4 जुलाई को पृथ्वी सूर्य से सबसे अधिक दूर होती है। इस दिन दूरी बढ़कर लगभग 15 करोड़ 20 लाख किलोमीटर (152 मिलियन किमी) हो जाती है। ग्रीक शब्द 'Apo' (दूर) तथा 'Helios' (सूर्य) से एफेलियन बना है।

Mechanism केपलर के द्वितीय नियम के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य के निकट (उपसौर) होती है तो गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण उसका कक्षीय वेग थोड़ा बढ़कर लगभग 30.3 किमी/सेकंड हो जाता है। जब वह दूर (अपसौर) होती है तो उसका वेग थोड़ा घटकर लगभग 29.3 किमी/सेकंड रह जाता है।

Analysis महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य: 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के निकटतम होती है, फिर भी उत्तरी गोलार्ध (भारत) में कड़ाके की ठंड क्यों पड़ती है? और 4 जुलाई को दूरी अधिकतम होने पर गर्मी क्यों होती है?
सच्चाई यह है कि उपसौर और अपसौर के बीच की दूरी का अंतर मात्र 50 लाख किलोमीटर (कुल दूरी का केवल 3%) है। यह अल्प अंतर वैश्विक तापमान पर नगण्य प्रभाव डालता है। ऋतु परिवर्तन का वास्तविक कारण पृथ्वी का 66½° अक्षीय झुकाव तथा सूर्य की किरणों का आपतन कोण है! 3 जनवरी को उत्तरी गोलार्ध सूर्य से विपरीत दिशा में झुका होता है, जिससे वहां किरणें बहुत तिरछी पड़ती हैं और दिन छोटे होते हैं; अतः निकटतम दूरी के बावजूद शीत ऋतु होती है।

Application उपसौर में पृथ्वी की तेज गति के कारण उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु की अवधि (लगभग 89 दिन) ग्रीष्म ऋतु की अवधि (लगभग 93 दिन) से लगभग 4 दिन छोटी होती है।

3. कक्षा-तल पर 66½° अक्षीय झुकाव एवं ध्रुवतारे की ओर संरेखण

Foundation पृथ्वी अपनी जिस काल्पनिक धुरी पर घूर्णन करती है, उसे पृथ्वी का अक्ष (Earth's Axis) कहते हैं। इसके दो सिरे उत्तरी ध्रुव (90°N) और दक्षिणी ध्रुव (90°S) कहलाते हैं। पृथ्वी अपने कक्षा-तल पर लंबवत (सीधी) खड़ी होकर नहीं घूमती, बल्कि एक निश्चित कोण पर झुकी हुई है।

Scientific Phenomenon पृथ्वी का अक्ष अपने कक्षा-तल (Orbital Plane) के साथ सदैव 66½° का कोण बनाता है। कक्षा-तल पर खींचे गए लंब (Perpendicular) के साथ पृथ्वी के अक्ष का झुकाव कोण 23½° होता है (क्योंकि 90° - 66½° = 23½°)।

Mechanism परिक्रमण के दौरान पृथ्वी के अक्ष का यह झुकाव कभी नहीं बदलता। अंतरिक्ष में पृथ्वी का अक्ष अपनी पूर्व स्थिति के पूर्णतः समानांतर (Parallelism of Axis) रहता है। साथ ही, पृथ्वी का उत्तरी अक्ष निरंतर आकाश में एक निश्चित तारे—ध्रुवतारे (Polaris / Pole Star) की दिशा में ही इंगित रहता है।

Analysis इस स्थायी 66½° झुकाव और समानांतरता के कारण ही वर्ष के 6 महीने उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका रहता है (जहाँ किरणें लंबवत पड़ती हैं, दिन बड़े होते हैं और ग्रीष्म ऋतु होती है), जबकि दक्षिणी गोलार्ध सूर्य से दूर रहता है। वर्ष के शेष 6 महीने दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुक जाता है (जहाँ ग्रीष्म ऋतु होती है) और उत्तरी गोलार्ध सूर्य से दूर हट जाता है (जहाँ शीत ऋतु होती है)।

Application यदि पृथ्वी का अक्ष बिल्कुल सीधा (90° लंबवत) होता, तो पूरे वर्ष पृथ्वी के हर स्थान पर दिन और रात बराबर (12-12 घंटे) होते और पृथ्वी पर कभी कोई ऋतु परिवर्तन नहीं होता! सर्वत्र स्थायी मौसम बना रहता।

4. सूर्य की आभासी वार्षिक गति (रविमार्ग): विषुव एवं संक्रांति

Foundation यद्यपि सूर्य स्थिर है और पृथ्वी उसकी परिक्रमा करती है, किंतु पृथ्वी से देखने पर ऐसा आभास होता है कि सूर्य आकाश में वर्ष भर एक निश्चित मार्ग पर गति कर रहा है। सूर्य के इस आभासी वार्षिक पथ को रविमार्ग (Ecliptic) तथा इस संचलन को सूर्य की आभासी वार्षिक गति कहते हैं।

Scientific Phenomenon सूर्य की आभासी स्थिति कर्क रेखा (23½°N) और मकर रेखा (23½°S) के बीच दो छह-मासिक चक्रों में बदलती है:

  • उत्तरायण (Uttarayan): 22 दिसंबर से 21 जून तक सूर्य उत्तर की ओर अग्रसर होता है। 21 जून को कर्क रेखा पर पहुँचने पर उत्तरायण पूर्ण होता है।
  • दक्षिणायन (Dakshinayan): 21 जून से 22 दिसंबर तक सूर्य दक्षिण की ओर अग्रसर होता है। 22 दिसंबर को मकर रेखा पर पहुँचने पर दक्षिणायन पूर्ण होता है।

Mechanism ऋतु चक्र की चार सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय तिथियाँ:

  1. 21 मार्च — वसंत विषुव (Vernal Equinox): इस दिन सूर्य भूमध्य रेखा (0°) पर लंबवत चमकता है। प्रकाश-वृत्त सभी अक्षांशों को बराबर भागों में बांटता है, जिससे पूरे विश्व में दिन और रात बराबर (12 घंटे दिन, 12 घंटे रात) होते हैं। उत्तरी गोलार्ध में वसंत और दक्षिणी गोलार्ध में शरद ऋतु होती है।
  2. 21 जून — कर्क संक्रांति (Summer Solstice): इस दिन सूर्य कर्क रेखा (23½°N) पर लंबवत चमकता है। उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। आर्कटिक वृत्त (66½°N) में 24 घंटे का दिन रहता है। उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म तथा दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु होती है।
  3. 23 सितंबर — शरद विषुव (Autumnal Equinox): इस दिन सूर्य पुनः भूमध्य रेखा (0°) पर लंबवत चमकता है। सर्वत्र पुनः 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होते हैं। उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में वसंत ऋतु होती है।
  4. 22 दिसंबर — मकर संक्रांति (Winter Solstice): इस दिन सूर्य मकर रेखा (23½°S) पर लंबवत चमकता है। दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन और ग्रीष्म ऋतु होती है; जबकि उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन और शीत ऋतु होती है। अंटार्कटिक वृत्त में 24 घंटे दिन रहता है।

Analysis 'विषुव' का अर्थ है दिन-रात की समानता। 'Solstice' का अर्थ है 'सूर्य का ठहरना'—क्योंकि इन तिथियों पर सूर्य अपनी चरम सीमा पर पहुँचकर दिशा बदलने से पहले क्षण भर के लिए स्थिर प्रतीत होता है।

Application जब 25 दिसंबर को हम स्वेटर पहनकर कड़ाके की ठंड में क्रिसमस मनाते हैं, तब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में चिलचिलाती गर्मी होती है और लोग समुद्र तट पर क्रिसमस का आनंद लेते हैं!

5. आपतन कोण, मध्यरात्रि का सूर्य एवं ध्रुवीय ज्योति (अरोरा)

Foundation किसी स्थान पर धरातल कितना गर्म होगा, यह दो मुख्य कारकों पर निर्भर करता है: (1) सूर्य की किरणों का आपतन कोण (Angle of Incidence) तथा (2) दिन की समयावधि। आने वाले इस सौर ताप को सूर्यातप (Insolation - Incoming Solar Radiation) कहा जाता है।

Scientific Phenomenon किरणों के आपतन कोण के दो रूप होते हैं:

  • सीधी / लंबवत किरणें (Vertical Rays - 90°): जब किरणें सीधी पड़ती हैं, तो कम क्षेत्रफल पर केंद्रित होती हैं और वायुमंडल की पतली परत से गुजरती हैं। अतः कम ताप नष्ट होता है और तीव्र गर्मी पैदा होती है (उष्णकटिबंध एवं ग्रीष्मकाल)।
  • तिरछी किरणें (Slanting / Oblique Rays - <90°): जब किरणें तिरछी पड़ती हैं, तो वे बड़े क्षेत्रफल में फैल जाती हैं और वायुमंडल की मोटी परत से होकर गुजरती हैं, जिससे अवशोषण व प्रकीर्णन में अधिकांश ताप नष्ट हो जाता है और अत्यंत मंद गर्मी मिलती है (ध्रुवीय क्षेत्र एवं शीतकाल)।

Mechanism ध्रुवीय क्षेत्रों की तीन अद्भुत परिघटनाएं:

  1. मध्यरात्रि के सूर्य का देश (Land of the Midnight Sun): नॉर्वे का उत्तरी बंदरगाह हैमरफेस्ट (Hammerfest, 70°39'N) आर्कटिक वृत्त में स्थित है। यहाँ मई के मध्य से जुलाई के अंत तक लगभग ढाई महीने तक आधी रात को भी सूर्य अस्त नहीं होता और क्षितिज पर चमकता रहता है। अतः नॉर्वे को 'मध्यरात्रि के सूर्य का देश' कहा जाता है।
  2. ध्रुवों पर 6 माह दिन एवं 6 माह रात: 21 मार्च से 23 सितंबर तक उत्तरी ध्रुव पर लगातार 6 महीने का दिन रहता है और दक्षिणी ध्रुव पर लगातार 6 महीने की रात रहती है। 23 सितंबर से 21 मार्च तक दक्षिणी ध्रुव पर 6 माह दिन और उत्तरी ध्रुव पर 6 माह रात रहती है।
  3. ध्रुवीय ज्योति (Aurora): 6 महीने की घोर ध्रुवीय रात्रि के दौरान ऊपरी वायुमंडल (आयनमंडल) में सौर पवनों के आवेशित कणों के गैस अणुओं से टकराने पर रंग-बिरंगे प्रकाश की अद्भुत छटा दिखाई देती है। इसे उत्तरी ध्रुव पर सुमेरु ज्योति (Aurora Borealis) तथा दक्षिणी ध्रुव पर कुमेरु ज्योति (Aurora Australis) कहते हैं।

Analysis उत्तरी ध्रुव पर ग्रीष्मकाल में लगातार 6 महीने सूर्य चमकने पर भी बर्फ क्यों नहीं पिघलती? क्योंकि किरणें अत्यधिक तिरछी होती हैं और धवल बर्फ आने वाले सौर ताप का लगभग 80-85% भाग अंतरिक्ष में परावर्तित कर देती है (उच्च एल्बिडो प्रभाव - High Albedo Effect)।

Application आपतन कोण के आधार पर ही पृथ्वी को तीन ताप कटिबंधों में बांटा गया है: उष्ण कटिबंध (0° से 23½°), शीतोष्ण कटिबंध (23½° से 66½°), तथा शीत कटिबंध (66½° से 90°)।

महत्वपूर्ण भौगोलिक अवधारणाएँ, नियम एवं निर्देशांक

परिक्रमण गति एवं अधिवर्ष (Leap Year) सूत्र
कक्षीय वेग ~30 किमी/सेकंड (1,07,000 किमी/घंटा)
परिक्रमण अवधि 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (~365¼ दिन)
सामान्य वर्ष 365 दिन (अतिरिक्त ~6 घंटे संचित)
अधिवर्ष (Leap Year) 366 दिन (फरवरी 29 दिन; शताब्दी वर्ष 400 से विभाज्य)
प्रत्येक 4 वर्ष में अतिरिक्त 1 दिन जोड़कर पंचांग व ऋतुओं में संतुलन रखा जाता है।
उपसौर बनाम अपसौर निर्देशांक
उपसौर (Perihelion) — 3 जनवरी न्यूनतम दूरी: 14.7 करोड़ किमी (अधिकतम वेग: 30.3 किमी/सेकंड)
अपसौर (Aphelion) — 4 जुलाई अधिकतम दूरी: 15.2 करोड़ किमी (न्यूनतम वेग: 29.3 किमी/सेकंड)
औसत दूरी 14.96 करोड़ किमी (1 AU)
वैज्ञानिक नियम दूरी का अंतर ऋतु परिवर्तन नहीं करता; अक्षीय झुकाव ही ऋतुएं बनाता है!
दीर्घवृत्ताकार कक्षा के एक केंद्र पर सूर्य के स्थित होने के कारण दूरी बदलती है।
पृथ्वी का अक्षीय झुकाव एवं ध्रुवतारे की दिशा
कक्षा-तल के साथ कोण 66½° (स्थायी एवं अपरिवर्तनीय झुकाव)
लंब के साथ कोण 23½° (अक्ष की समानांतरता)
ध्रुवतारे की ओर संरेखण उत्तरी अक्ष सदैव आकाश में ध्रुवतारे (Polaris) की ओर इंगित रहता है
कक्षा की परिधि लगभग 96 करोड़ किमी
यदि अक्ष लंबवत (90°) होता, तो पृथ्वी पर कभी ऋतु परिवर्तन नहीं होता।
विषुव एवं संक्रांति समय-सारणी
21 मार्च — वसंत विषुव भूमध्य रेखा (0°) पर लंबवत किरणें • सर्वत्र 12 घंटे दिन / 12 घंटे रात
21 जून — कर्क संक्रांति कर्क रेखा (23½°N) पर लंबवत किरणें • उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन
23 सितंबर — शरद विषुव भूमध्य रेखा (0°) पर लंबवत किरणें • सर्वत्र समान दिन-रात
22 दिसंबर — मकर संक्रांति मकर रेखा (23½°S) पर लंबवत किरणें • उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन
विषुव पर दिन-रात बराबर होते हैं; संक्रांति पर दिन-रात की लंबाई में चरम अंतर होता है।
सूर्य की आभासी वार्षिक गति (रविमार्ग)
रविमार्ग (Ecliptic) आकाश में सूर्य के परिभ्रमण का आभासी वृत्ताकार पथ
उत्तरायण (Uttarayan) 22 दिसंबर से 21 जून (सूर्य का उत्तर की ओर आभासी संचलन)
दक्षिणायन (Dakshinayan) 21 जून से 22 दिसंबर (सूर्य का दक्षिण की ओर आभासी संचलन)
सीमाएं 23½° उत्तर (कर्क रेखा) से 23½° दक्षिण (मकर रेखा) तक
पृथ्वी के परिक्रमण व अक्षीय झुकाव के कारण धरातल से सूर्य गतिमान प्रतीत होता है।
आपतन कोण, मध्यरात्रि सूर्य एवं ध्रुवीय ज्योति
लंबवत किरणें (90°) कम क्षेत्र • वायुमंडल की पतली परत • तीव्र गर्मी (ग्रीष्मकाल)
तिरछी किरणें (<90°) अधिक क्षेत्र • वायुमंडल की मोटी परत • मंद गर्मी (शीतकाल)
मध्यरात्रि का सूर्य हैमरफेस्ट, नॉर्वे (मई-जुलाई आधी रात को भी सूर्य दृश्यमान)
ध्रुवीय ज्योति (Aurora) सुमेरु ज्योति (उत्तर) एवं कुमेरु ज्योति (दक्षिण)
ध्रुवों पर 6 माह दिन रहने पर भी अत्यधिक तिरछी किरणों व एल्बिडो के कारण बर्फ नहीं पिघलती।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के निकटतम (उपसौर) होने के बाद भी उत्तरी गोलार्ध में कड़ाके की ठंड क्यों पड़ती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. दूरी का नगण्य प्रभाव:
उपसौर (3 जनवरी - 14.7 करोड़ किमी) और अपसौर (4 जुलाई - 15.2 करोड़ किमी) के बीच केवल 50 लाख किमी (3%) का अंतर होता है। यह अल्प अंतर जलवायु में बड़ा बदलाव लाने में असमर्थ है।

2. अक्षीय झुकाव व आपतन कोण का प्रभाव:
पृथ्वी का अक्ष 66½° झुका होने के कारण जनवरी में उत्तरी गोलार्ध सूर्य से विपरीत दिशा में झुका रहता है। इससे:
• सूर्य की किरणें अत्यंत तिरछी पड़ती हैं, जिससे ऊष्मा बड़े क्षेत्र में फैलकर क्षीण हो जाती है।
• दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं; अतः दिन में मिली अल्प ऊष्मा लंबी रातों में अंतरिक्ष में विकिरित हो जाती है।
अतः निकट दूरी के बावजूद उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु होती है।
उदाहरण 2
अधिवर्ष (Leap Year) क्यों बनाया जाता है? 2000 एक लीप ईयर था, किंतु 1900 और 2100 लीप ईयर क्यों नहीं हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. लीप ईयर का कारण:
पृथ्वी को परिक्रमण में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (~365¼ दिन) लगते हैं। कैलेंडर में 365 दिन गिने जाने से प्रति वर्ष लगभग 6 घंटे छूट जाते हैं। 4 वर्षों में यह अंतर 24 घंटे (1 दिन) बन जाता है, जिसे फरवरी में जोड़कर 366 दिन का लीप ईयर बनता है।

2. शताब्दी वर्ष का 400 वाला नियम:
छूटा हुआ समय ठीक 6 घंटे नहीं बल्कि 11 मिनट 14 सेकंड कम होता है। प्रत्येक 4 वर्ष में लगभग 45 मिनट अधिक जुड़ जाते हैं, जो 400 वर्षों में लगभग 3 अतिरिक्त दिनों के बराबर हो जाते हैं।
अतः नियम है कि शताब्दी वर्ष 400 से पूर्णतः विभाज्य होना चाहिए।
• 2000 को 400 से भाग दिया जा सकता है ($2000 \div 400 = 5$), अतः 2000 लीप ईयर था।
• 1900 और 2100 को 400 से भाग नहीं दिया जा सकता ($1900 \div 400 = 4.75$), अतः ये सामान्य 365 दिन के वर्ष हैं।
उदाहरण 3
21 जून (कर्क संक्रांति) एवं 22 दिसंबर (मकर संक्रांति) के बीच दिन-रात की स्थिति की तुलना करें। ऑस्ट्रेलिया में गर्मी में क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. 21 जून बनाम 22 दिसंबर:
• 21 जून: सूर्य कर्क रेखा (23½°N) पर लंबवत होता है। उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन और ग्रीष्म ऋतु होती है। आर्कटिक वृत्त में 24 घंटे दिन रहता है।
• 22 दिसंबर: सूर्य मकर रेखा (23½°S) पर लंबवत होता है। दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन और ग्रीष्म ऋतु होती है। उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन और शीत ऋतु होती है।

2. ऑस्ट्रेलिया में गर्मी में क्रिसमस:
ऑस्ट्रेलिया दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है। 25 दिसंबर को मकर संक्रांति के प्रभाव से दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है, जहाँ सीधी किरणें और लंबे दिन होते हैं। अतः ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर में ग्रीष्म ऋतु होती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कई छात्र सोचते हैं कि पृथ्वी जब सूर्य के पास आती है तो गर्मी होती है और जब दूर जाती है तो सर्दी होती है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: ऋतु परिवर्तन सूर्य की दूरी से नहीं होता। 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के निकटतम होती है, फिर भी हमारे यहाँ शीत ऋतु होती है। ऋतु परिवर्तन का असली कारण पृथ्वी का 66½° अक्षीय झुकाव और किरणों का आपतन कोण है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह गलत धारणा कि 4 से कटने वाला प्रत्येक वर्ष लीप ईयर होता है, अतः 1900 और 2100 भी लीप ईयर होंगे।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: जिन वर्षों के अंत में 00 होता है (शताब्दी वर्ष), उन्हें 400 से विभाजित होना अनिवार्य है। 1900 और 2100 चार से तो कटते हैं किंतु 400 से नहीं, अतः वे सामान्य वर्ष हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विषुव (Equinox) और संक्रांति (Solstice) की अवधारणाओं में भ्रम।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: विषुव (21 मार्च व 23 सितंबर) पर भूमध्य रेखा पर सीधी किरणें पड़ती हैं और दुनिया भर में दिन-रात बराबर (12-12 घंटे) होते हैं। जबकि संक्रांति (21 जून व 22 दिसंबर) पर दिन-रात की लंबाई में अधिकतम अंतर होता है।

पृथ्वी का परिक्रमण एवं ऋतुचक्र संरचना

पृथ्वी का परिक्रमण एवं ऋतुचक्र संरचना पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 भूगोल (हमारी पृथ्वी) • अध्याय 1 1. परिक्रमण गति एवं अक्षीय झुकाव • दीर्घवृत्ताकार कक्षा: 96 करोड़ किमी परिपथ; परिक्रमण वेग लगभग 30 किमी/सेकंड (1,07,000 किमी/घंटा) • परिक्रमण अवधि: 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (~365¼ दिन); प्रत्येक 4 वर्ष में अधिवर्ष (Leap Year) • अक्षीय झुकाव: पृथ्वी का अक्ष कक्षा-तल के साथ 66½° का कोण (लम्ब के साथ 23½° का कोण) बनाता है • ध्रुवतारे की ओर दिशा: पृथ्वी का उत्तरी अक्ष निरंतर ध्रुवतारे (Polaris) की ओर संकेत करता है 🌍 दीर्घवृत्ताकार कक्षा • 66½° स्थायी झुकाव • 365¼ दिन 2. उपसौर एवं अपसौर (सूर्य-पृथ्वी दूरी में परिवर्तन) • उपसौर (Perihelion) — 3 जनवरी: सूर्य से न्यूनतम दूरी (लगभग 14.70 करोड़ किमी / 147M km) • अपसौर (Aphelion) — 4 जुलाई: सूर्य से अधिकतम दूरी (लगभग 15.20 करोड़ किमी / 152M km) • औसत दूरी: लगभग 14.96 करोड़ किमी (1 खगोलीय इकाई / 1 AU) • वैज्ञानिक तथ्य: दूरी का अंतर ऋतु परिवर्तन का मुख्य कारण नहीं है; अक्षीय झुकाव ही ऋतुएं बनाता है! ☀️ 3 जनवरी (उपसौर - 14.7 करोड़ किमी) बनाम 4 जुलाई (अपसौर - 15.2 करोड़ किमी) 3. विषुव एवं संक्रांति (ऋतु परिवर्तन का चक्र) • 21 मार्च: वसंत विषुव (Vernal Equinox) — भूमध्य रेखा (0°) पर लंबवत किरणें; सर्वत्र 12 घंटे दिन/रात • 21 जून: कर्क संक्रांति (Summer Solstice) — कर्क रेखा (23½°N) पर लंबवत किरणें; उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन • 23 सितंबर: शरद विषुव (Autumnal Equinox) — भूमध्य रेखा पर पुनः लंबवत किरणें; सर्वत्र समान दिन-रात • 22 दिसंबर: मकर संक्रांति (Winter Solstice) — मकर रेखा (23½°S) पर लंबवत किरणें; उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन 🍂 विषुव (21 मार्च / 23 सितंबर) • संक्रांति (21 जून / 22 दिसंबर) 4. सूर्य की किरणों का कोण एवं ध्रुवीय परिघटनाएं • आपतन कोण: सीधी किरणें कम क्षेत्र में अधिक ताप देती हैं; तिरछी किरणें अधिक क्षेत्र में फैलकर कम ताप देती हैं • मध्यरात्रि का सूर्य: नॉर्वे के हैमरफेस्ट बंदरगाह पर ग्रीष्म ऋतु में आधी रात को भी सूर्य चमकता है • ध्रुवों पर 6 माह दिन व 6 माह रात: उत्तरी ध्रुव पर 21 मार्च से 23 सितंबर तक निरंतर प्रकाश रहता है • ध्रुवीय ज्योति (Aurora): ध्रुवीय रात्रि में सुमेरु ज्योति (Borealis) एवं कुमेरु ज्योति (Australis) का मनोहारी दृश्य 🌌 किरणों का आपतन कोण • मध्यरात्रि का सूर्य • ध्रुवीय ज्योति TARGETEXAMS • WBBSE कक्षा 7 भूगोल (हमारी पृथ्वी)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
पृथ्वी का कक्षीय परिक्रमण वेग लगभग 30 किमी/सेकंड तथा कुल कक्षा लगभग 96 करोड़ किमी लंबी है।
मुख्य बिंदु 2
सूर्य की एक पूरी परिक्रमा करने में पृथ्वी को 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (~365¼ दिन) का समय लगता है।
मुख्य बिंदु 3
अतिरिक्त 6 घंटों को संतुलित करने के लिए प्रत्येक 4 वर्ष में 366 दिनों का अधिवर्ष (Leap Year) बनता है; शताब्दी वर्ष 400 से विभाज्य होने चाहिए।
मुख्य बिंदु 4
दीर्घवृत्ताकार कक्षा के कारण 3 जनवरी को उपसौर (14.7 करोड़ किमी) तथा 4 जुलाई को अपसौर (15.2 करोड़ किमी) की स्थिति होती है।
मुख्य बिंदु 5
पृथ्वी का अक्ष कक्षा-तल के साथ 66½° तथा लंब के साथ 23½° का स्थायी कोण बनाकर सदैव ध्रुवतारे की ओर संरेखित रहता है।
मुख्य बिंदु 6
21 मार्च (वसंत विषुव) एवं 23 सितंबर (शरद विषुव) को सर्वत्र 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होती है।
मुख्य बिंदु 7
21 जून (कर्क संक्रांति) को उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन तथा 22 दिसंबर (मकर संक्रांति) को सबसे छोटा दिन होता है।
मुख्य बिंदु 8
नॉर्वे के हैमरफेस्ट को 'मध्यरात्रि के सूर्य का देश' कहते हैं; ध्रुवों पर 6 माह दिन व 6 माह रात रहती है तथा अरोरा (ध्रुवीय ज्योति) उत्पन्न होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. अधिवर्ष (Leap Year) किसे कहते हैं? कोई शताब्दी वर्ष लीप ईयर है या नहीं, यह कैसे ज्ञात किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथ्वी का परिक्रमण काल 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड होता है। कैलेंडर में 365 दिन गिने जाने से प्रति वर्ष लगभग 6 घंटे छूट जाते हैं। इस अंतर को पूरा करने के लिए प्रत्येक 4 वर्ष में फरवरी माह में 1 दिन जोड़कर 366 दिन का वर्ष बनाया जाता है, जिसे अधिवर्ष (Leap Year) कहते हैं। शताब्दी वर्षों के लीप ईयर होने के लिए उन्हें 400 से पूर्णतः विभाजित होना आवश्यक है (जैसे 2000 लीप ईयर था, किंतु 1900 नहीं)।
365¼ दिन, 4 वर्ष में 1 दिन और 400 से विभाज्यता का नियम लिखें।
2
2. उपसौर एवं अपसौर में दो मुख्य अंतर बताइए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1) तिथि एवं दूरी: 3 जनवरी को उपसौर में दूरी न्यूनतम (14.7 करोड़ किमी) होती है; जबकि 4 जुलाई को अपसौर में दूरी अधिकतम (15.2 करोड़ किमी) होती है।
2) कक्षीय वेग: उपसौर में पृथ्वी का वेग बढ़कर 30.3 किमी/सेकंड हो जाता है, जबकि अपसौर में घटकर 29.3 किमी/सेकंड रह जाता है।
3 जनवरी व 4 जुलाई तथा 14.7 करोड़ व 15.2 करोड़ किमी याद रखें।
3
3. पृथ्वी का अक्ष कक्षा-तल के साथ कितने डिग्री का कोण बनाता है? यह झुकाव ऋतु परिवर्तन में कैसे सहायक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पृथ्वी का अक्ष कक्षा-तल के साथ सदैव 66½° का कोण (और लंब के साथ 23½° का कोण) बनाता है। इस झुकाव के कारण वर्ष के 6 माह उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता है (सीधी किरणें, लंबे दिन, ग्रीष्मकाल) और शेष 6 माह दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता है (दक्षिणी में ग्रीष्म व उत्तरी में शीतकाल)।
66½° कोण तथा दोनों गोलार्धों का बारी-बारी से सूर्य की ओर झुकना समझाएं।
4
4. वसंत विषुव और शरद विषुव किन तिथियों को होते हैं? इन दिनों दिन-रात की स्थिति क्या होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 21 मार्च को वसंत विषुव (Vernal Equinox) तथा 23 सितंबर को शरद विषुव (Autumnal Equinox) होता है। इन दोनों तिथियों पर सूर्य भूमध्य रेखा पर लंबवत चमकता है, जिससे विश्व भर में दिन और रात बराबर—अर्थात 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होते हैं।
21 मार्च व 23 सितंबर तथा सर्वत्र 12 घंटे दिन व 12 घंटे रात याद रखें।
5
5. 'मध्यरात्रि के सूर्य का देश' किसे और क्यों कहते हैं? ध्रुवीय ज्योति क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नॉर्वे के हैमरफेस्ट बंदरगाह को 'मध्यरात्रि के सूर्य का देश' कहते हैं क्योंकि आर्कटिक वृत्त में होने के कारण मई से जुलाई तक आधी रात को भी सूर्य अस्त नहीं होता। ध्रुवीय रात्रि में आयनमंडल में सौर कणों के टकराने से आकाश में दिखने वाले रंग-बिरंगे प्रकाश को ध्रुवीय ज्योति (सुमेरु ज्योति व कुमेरु ज्योति) कहते हैं।
नॉर्वे का हैमरफेस्ट बंदरगाह तथा अरोरा का कारण लिखें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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