Foundation मध्यकाल में (13वीं से 18वीं शताब्दी) कृषि के विस्तार, अतिरिक्त उत्पादन और आंतरिक व विदेशी व्यापार के विकास के परिणामस्वरूप भारत में अभूतपूर्व नगरीकरण हुआ। मध्यकालीन शहर केवल घनी आबादी वाले स्थल नहीं थे, बल्कि वे राजनीतिक सत्ता, सांस्कृतिक गतिविधियों और व्यापार के प्रमुख केंद्र थे। इतिहासकारों के अनुसार इन नगरों को उनके मुख्य कार्य के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है: प्रशासनिक नगर, तीर्थ या धार्मिक नगर, तथा व्यापारिक एवं बंदरगाह नगर।
Chronology सल्तनत काल में कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश के समय दिल्ली को राजनीतिक राजधानी बनाया गया। अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोल हमलों से सुरक्षा हेतु सीरी नगर तथा गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलकाबाद की स्थापना की। मुगल काल में 16वीं शताब्दी में आगरा और फतेहपुर सीकरी प्रमुख सत्ता केंद्र बने, तथा 17वीं सदी में शाहजहाँ ने यमुना तट पर शाहजहानाबाद का निर्माण कर मध्यकालीन नगर योजना को नया आयाम दिया।
Mechanism नगरों का वर्गीकरण एवं कार्यप्रणाली:
- प्रशासनिक नगर (Administrative Capitals): दिल्ली, आगरा, फतेहपुर सीकरी, लाहौर और दौलताबाद। यहाँ सुल्तान या बादशाह, राजदरबार, सेना और अभिजात वर्ग (उमरा) रहते थे। उनकी विलासिता और सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर से व्यापारी और दस्तकार यहाँ खिंचे चले आते थे।
- धार्मिक एवं तीर्थ नगर (Pilgrimage Centers): वाराणसी, मथुरा, पुरी, कांचीपुरम और अजमेर (ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह)। लाखों तीर्थयात्रियों के आगमन के कारण इन धार्मिक स्थलों के इर्द-गिर्द सरायों, बाजारों और हस्तशिल्प की विशाल व्यापारिक गतिविधियां विकसित हुईं।
- व्यापारिक व बंदरगाह नगर (Commercial Ports & Emporiums): पश्चिमी तट पर सूरत, कैम्बे (खंभात) और कालीकट; पूर्वी तट पर मसूलीपट्टनम; तथा बंगाल में सप्तग्राम और हुगली। सूरत को ‘बाब-उल-मक्का’ (मक्का का प्रवेश द्वार) कहा जाता था, क्योंकि हज यात्री और पश्चिम एशिया जाने वाले व्यापारिक जहाज यहीं से रवाना होते थे।
Synthesis कई शहर बहुउद्देशीय थे। उदाहरण के लिए, अजमेर पहले चौहानों की राजनीतिक राजधानी था, लेकिन सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह बनने के बाद यह एक अखिल भारतीय धार्मिक और व्यापारिक केंद्र में बदल गया।
Impact मध्यकालीन नगर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से गहरे जुड़े थे। गाँवों से अन्न और कच्चा माल शहरों में आता था, और शहरों में तैयार दस्तकारी उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारी मुनाफे पर बिकते थे।