(क) ऐल्कीनों से निर्माण:
- अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन (Acid-Catalysed Hydration - मार्कोनीकॉफ नियम): तनु $H_2SO_4$ की उपस्थिति में ऐल्कीन पर जल का योग मार्कोनीकॉफ नियमानुसार होता है (मध्यवर्ती कार्बोधनायन बनता है):
$$CH_3-CH=CH_2 + H_2O \xrightarrow{H^+} CH_3-CH(OH)-CH_3 \quad (\text{प्रोपेन-2-ऑल})$$
- हाइड्रोबोरोनन-ऑक्सीकरण (Hydroboration-Oxidation - एन्टी-मार्कोनीकॉफ योग): डाइबोरेन ($B_2H_6$) से क्रिया के पश्चात क्षारीय हाइड्रोजन परॉक्साइड ($H_2O_2/OH^-$) द्वारा ऑक्सीकरण कराने पर प्राथमिक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है:
$$CH_3-CH=CH_2 \xrightarrow{(i)\; BH_3\cdot THF \quad (ii)\; H_2O_2, OH^-} CH_3-CH_2-CH_2-OH \quad (\text{प्रोपेन-1-ऑल})$$
(ख) ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक ($RMgX$) द्वारा कार्बोनिल से:
- फॉर्मेल्डिहाइड ($HCHO$) + $RMgX$: $\rightarrow$ प्राथमिक ऐल्कोहॉल ($1^\circ$)
- अन्य ऐल्डिहाइड ($R'CHO$) + $RMgX$: $\rightarrow$ द्वितीयक ऐल्कोहॉल ($2^\circ$)
- कीटोन ($R'_2CO$) + $RMgX$: $\rightarrow$ तृतीयक ऐल्कोहॉल ($3^\circ$)
$1^\circ, 2^\circ, 3^\circ$ ऐल्कोहॉलों में विभेद: ल्युकास परीक्षण (Lucas Test):
ल्युकास अभिकर्मक = सांद्र $HCl$ + निर्जल $ZnCl_2$। यह ऐल्कोहॉल को अविलेय ऐल्किल क्लोराइड में बदलता है जिससे विलयन में धुंधलापन (Turbidity) आता है:
- तृतीयक ऐल्कोहॉल ($3^\circ$): ल्युकास अभिकर्मक मिलाते ही तुरंत (Instantaneous) धुंधलापन उत्पन्न होता है (स्थायी $3^\circ$ कार्बोधनायन बनने के कारण)।
- द्वितीयक ऐल्कोहॉल ($2^\circ$): लगभग 5 मिनट बाद कमरे के ताप पर धुंधलापन आता है।
- प्राथमिक ऐल्कोहॉल ($1^\circ$): कमरे के ताप पर कोई धुंधलापन नहीं आता; केवल गर्म करने पर ही धुंधलापन दिखाई देता है।