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CBSE • कक्षा XII • Chemistry • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

विलयन (Solutions)

विलयन दो या दो से अधिक घटकों का समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) होते हैं जिसमें प्रत्येक भाग का संघटन एवं गुणधर्म सर्वत्र एकसमान रहता है। प्रस्तुत अध्याय में विलयनों की सांद्रता को विभिन्न गणितीय पैमानों—द्रव्यमान प्रतिशत ($w/w\%$), मोल-अंश ($x$), मोलरता ($M$) तथा ताप-स्वतंत्र मोललता ($m$) में व्यक्त करने की विधियों का गहन अध्ययन किया जाता है। द्रवों में गैसों की विलेयता को नियंत्रित करने वाला हेनरी का नियम ($p = K_H x$) जलीय जीवों के जीवन, गोताखोरी एवं सोडा बोतलों की भौतिक रसायन समझाता है, जबकि वाष्पशील द्रवों के द्व्यंगी विलयनों का अध्ययन राउल्ट के नियम ($p_i = p_i^\circ x_i$) द्वारा किया जाता है। राउल्ट नियम से विचलनों के आधार पर आदर्श विलयन ($\Delta H = 0, \Delta V = 0$) तथा अनादर्श विलयनों (धनात्मक व ऋणात्मक विचलन, स्थिरक्वाथी मिश्रण Azeotropes) का आण्विक बलों के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है। अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण खंड अणुसंख्य गुणधर्म (Colligative Properties) है—जो विलेय की प्रकृति पर नहीं बल्कि केवल कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं: (1) वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure), (2) क्वथनांक का उन्नयन ($\Delta T_b = i K_b m$), (3) हिमांक का अवनमन ($\Delta T_f = i K_f m$), तथा (4) परासरण दाब ($\pi = i C R T$)। अंत में, विद्युत-अपघट्यों के वियोजन (Dissociation) अथवा संयोजन (Association) के कारण उत्पन्न होने वाले असामान्य आण्विक द्रव्यमानों को यथार्थ करने हेतु वान्ट हॉफ गुणांक ($i$) एवं वियोजन की मात्रा ($\alpha = \frac{i-1}{n-1}$) का विस्तृत गणितीय व प्रायोगिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

सर्दियों में बर्फीली सड़कों पर नमक क्यों छिड़का जाता है और गहरे समंदर के गोताखोर हीलियम क्यों ले जाते हैं?

हिमालय या यूरोप की हाड़ कंपा देने वाली सर्दियों में जब सड़कें बर्फ से पूरी तरह ढक जाती हैं, तो भारी ट्रकों से सड़क पर साधारण नमक या $\text{CaCl}_2$ क्यों फेंका जाता है? क्या नमक बर्फ को पिघलाने के लिए गर्म करता है? बिल्कुल नहीं! यह तो 'हिमांक के अवनमन' का विशुद्ध रासायनिक जादू है जो पानी के जमने के तापमान को $0^\circ\text{C}$ से घटाकर $-10^\circ\text{C}$ कर देता है! और क्या आपने कभी सोचा है कि गहरे समुद्र में उतरने वाले स्कूबा डाइवर्स अपने ऑक्सीजन सिलिंडरों में नाइट्रोजन के बजाय हीलियम गैस क्यों मिलाते हैं? क्योंकि यदि वे ऐसा न करें, तो समुद्र की गहराइयों में अत्यधिक दाब पर रक्त में घुली नाइट्रोजन ऊपर आते ही नसों में घातक बुलबुले बना देगी जिससे जानलेवा 'बेंड्स' (Bends) रोग हो सकता है—जिसे केवल 'हेनरी का नियम' ही समझा सकता है! विलयन केवल रसायनों का घोल नहीं, बल्कि जीवन रक्षक प्रक्रमों का आधार है। आइए समझें इसके मूलभूत सिद्धांत!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान बोर्ड परीक्षा में 'विलयन' इकाई से 7 अंकों के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं। मोललता एवं मोलरता की परिभाषा, ताप पर निर्भरता, हेनरी का नियम, $K_H$ का भौतिक अर्थ एवं गोताखोरी/जलीय जीवन में अनुप्रयोग, राउल्ट का नियम एवं आदर्श तथा अनादर्श विलयनों में अंतराण्विक बलों के आधार पर तुलना (एसीटोन + क्लोरोफॉर्म, एथेनॉल + एसीटोन), स्थिरक्वाथी मिश्रण (Azeotropes), चारों अणुसंख्य गुणधर्मों के गणितीय निगमन एवं अज्ञात विलेय का आण्विक द्रव्यमान ($M_2$) ज्ञात करने के आंकिक प्रश्न, तथा वान्ट हॉफ गुणांक ($i$), वियोजन की मात्रा ($\alpha$) एवं असामान्य अणुभार पर आधारित 3-अंकीय व 5-अंकीय आंकिक प्रश्न बोर्ड परीक्षा में प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • मोल संकल्पना (Mole Concept): मोल = भार / अणुभार ($n = w/M$)।
  • डाल्टन का आंशिक दाब का नियम ($P = p_A + p_B$)।
  • द्रव-वाष्प साम्यावस्था एवं वाष्पीकरण की ऊष्मा।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विलयन की सांद्रता को मोलरता, मोललता तथा मोल-अंश में यथार्थता से परिकलित करना।
  • हेनरी के नियम की व्याख्या करना एवं $K_H$ के मान का विलेयता व ताप पर प्रभाव स्पष्ट करना।
  • राउल्ट के नियम के आधार पर आदर्श तथा धनात्मक/ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले अनादर्श विलयनों का विभेदन करना।
  • क्वथनांक उन्नयन, हिमांक अवनमन एवं परासरण दाब के सूत्रों द्वारा अज्ञात विलेय का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करना।
  • वान्ट हॉफ गुणांक ($i$) के अनुप्रयोग द्वारा वियोजन एवं संयोजन की मात्रा ($\alpha$) का सटीक आंकिक परिकलन करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की...
2 2. गैसों की विलेयता एवं हेनरी का नि...
3 3. वाष्प दाब, राउल्ट का नियम एवं आद...
4 4. अणुसंख्य गुणधर्म एवं आण्विक द्रव...
5 5. असामान्य मोलर द्रव्यमान एवं वान्...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ

1.1 सांद्रता की इकाइयाँ एवं तुलनात्मक विश्लेषण

विलयन के प्रति एकांक आयतन अथवा विलायक के निश्चित द्रव्यमान में उपस्थित विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता (Concentration) कहते हैं:

  • द्रव्यमान प्रतिशत (Mass % - $w/w$): $100\text{ g}$ विलयन में उपस्थित विलेय का ग्राम में द्रव्यमान:
    $$\text{Mass }\% = \frac{w_B}{w_A + w_B} \times 100$$
  • मोल-अंश (Mole Fraction - $x$): किसी घटक के मोलों की संख्या और विलयन के कुल मोलों का अनुपात:
    $$x_A = \frac{n_A}{n_A + n_B}, \quad x_B = \frac{n_B}{n_A + n_B}, \quad \mathbf{x_A + x_B = 1}$$यह एक विमाहीन राशि है तथा ताप पर निर्भर नहीं करती।
  • मोलरता (Molarity - $M$): $1\text{ L}$ ($1000\text{ mL}$) विलयन में घुले विलेय के मोलों की संख्या:
    $$M = \frac{n_B}{V_{\text{L}}} = \frac{w_B \times 1000}{M_B \times V_{\text{mL}}} \quad [\text{इकाई: }\text{mol L}^{-1}]$$
    सावधानी: चूँकि आयतन ताप पर निर्भर करता है ($V \propto T$), अतः ताप बदलने पर मोलरता बदल जाती है!
  • मोललता (Molality - $m$): $1\text{ kg}$ ($1000\text{ g}$) विलायक में घुले विलेय के मोलों की संख्या:
    $$m = \frac{n_B}{w_{A\text{ (kg)}}} = \frac{w_B \times 1000}{M_B \times w_{A\text{ (g)}}} \quad [\text{इकाई: }\text{mol kg}^{-1}]$$
    विशेष लाभ: द्रव्यमान ताप पर निर्भर नहीं करता, अतः मोललता ताप से स्वतंत्र होती है और भौतिक रसायन में मोलरता से श्रेष्ठ मानी जाती है।
  • पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm): अत्यंत तनु विलयनों (जैसे जल में प्रदूषण) हेतु:
    $$\text{ppm} = \frac{w_B}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 10^6$$

2. गैसों की विलेयता एवं हेनरी का नियम (Henry's Law)

2.1 हेनरी का नियम (Henry's Law)

कथन: स्थिर ताप पर, किसी विलायक के निश्चित आयतन में घुली गैस का द्रव्यमान (या गैस का आंशिक वाष्प दाब) विलयन की सतह पर उपस्थित गैस के आंशिक दाब (या मोल-अंश) के समानुपाती होता है।

$$\mathbf{p = K_H \cdot x}$$
जहाँ $p$ = साम्यावस्था में गैस का आंशिक दाब,
$x$ = विलयन में गैस का मोल-अंश,
$K_H$ = हेनरी नियम स्थिरांक (Henry's Law Constant)।

2.2 $K_H$ की महत्वपूर्ण विशेषताएं

  1. $K_H$ का मान गैस की प्रकृति तथा विलायक पर निर्भर करता है।
  2. समान दाब पर, जिस गैस हेतु $K_H$ का मान जितना अधिक होगा, द्रव में उसकी विलेयता ($x$) उतनी ही कम होगी ($x = p / K_H$)!
  3. ताप बढ़ाने पर $K_H$ का मान बढ़ता है, जिसके कारण गैसों की विलेयता घटती है।
    व्यावहारिक परिणाम: यही कारण है कि गर्म जल की तुलना में ठंडे जल में जलीय जीव (जैसे मछलियां) अधिक सहज एवं सुरक्षित महसूस करते हैं, क्योंकि ठंडे जल में घुली ऑक्सीजन अधिक मात्रा में उपलब्ध रहती है।

2.3 हेनरी नियम के प्रमुख अनुप्रयोग

  • शीतल पेयों (Soda Water) में: $\text{CO}_2$ की विलेयता बढ़ाने के लिए बोतलों को उच्च दाब पर सील किया जाता है।
  • गहरे समुद्र में गोताखोर (Scuba Divers): गहरे समुद्र में उच्च दाब पर रक्त में $\text{N}_2$ अधिक घुल जाती है। जब गोताखोर सतह पर आते हैं, तो दाब घटने से $\text{N}_2$ के बुलबुले नसों में रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर अत्यंत कष्टकारी रोग 'बेंड्स' (Bends) उत्पन्न करते हैं। इससे बचने हेतु श्वसन सिलिंडर में $11.7\%\text{ He}, 56.2\%\text{ N}_2, 32.1\%\text{ O}_2$ का तनु मिश्रण प्रयुक्त होता है (हीलियम की रक्त में विलेयता नगण्य होती है)।
  • उच्च तुंगता (High Altitude) पर एनोक्सिया (Anoxia): पर्वतों पर वायु का आंशिक दाब कम होने से रक्त में $\text{O}_2$ की सांद्रता घट जाती है जिससे पर्वतारोहियों में कमजोरी और सोचने-समझने की क्षमता क्षीण हो जाती है।

3. वाष्प दाब, राउल्ट का नियम एवं आदर्श-अनादर्श विलयन

3.1 राउल्ट का नियम (Raoult's Law)

वाष्पशील द्रवों के विलयन हेतु: किसी निश्चित ताप पर, विलयन में उपस्थित प्रत्येक वाष्पशील घटक का आंशिक वाष्प दाब ($p_i$) उस शुद्ध घटक के वाष्प दाब ($p_i^\circ$) तथा विलयन में उसके मोल-अंश ($x_i$) के गुणनफल के बराबर होता है:

$$\mathbf{p_A = p_A^\circ x_A} \quad \text{तथा} \quad \mathbf{p_B = p_B^\circ x_B}$$कुल वाष्प दाब (डाल्टन नियमानुसार): $\mathbf{p_{\text{total}} = p_A + p_B = p_A^\circ x_A + p_B^\circ x_B = p_A^\circ + (p_B^\circ - p_A^\circ)x_B}$।
अवाष्पशील विलेय हेतु: यदि विलेय $B$ अवाष्पशील ($p_B = 0$) हो, तो विलयन का वाष्प दाब केवल विलायक के कारण होता है: $\mathbf{p = p_A^\circ x_A}$।

3.2 आदर्श एवं अनादर्श विलयन (Ideal & Non-Ideal Solutions)

लक्षणआदर्श विलयन (Ideal)धनात्मक विचलन (Positive)ऋणात्मक विचलन (Negative)
राउल्ट नियमसभी सांद्रताओं पर पालन:
$p_A = p_A^\circ x_A, p_B = p_B^\circ x_B$
वाष्प दाब अधिक होता है:
$p_A > p_A^\circ x_A, p_B > p_B^\circ x_B$
वाष्प दाब कम होता है:
$p_A < p_A^\circ x_A, p_B < p_B^\circ x_B$
आण्विक आकर्षण$A-B \approx A-A$ एवं $B-B$$A-B$ आकर्षण दुर्बल होता है$A-B$ आकर्षण प्रबल होता है (H-बंध)
एंथैल्पी परिवर्तन ($\Delta_{\text{mix}} H$)$\mathbf{\Delta H = 0}$ (न ऊष्मा ली, न दी)$\mathbf{\Delta H > 0}$ (ऊष्माशोषी)$\mathbf{\Delta H < 0}$ (ऊष्माक्षेपी)
आयतन परिवर्तन ($\Delta_{\text{mix}} V$)$\mathbf{\Delta V = 0}$ (आयतन स्थिर)$\mathbf{\Delta V > 0}$ (प्रसार)$\mathbf{\Delta V < 0}$ (संकुचन)
प्रमुख उदाहरण• बेन्जीन + टॉलूईन
• $n$-हेक्सेन + $n$-हेप्टेन
• ब्रोमोएथेन + क्लोरोएथेन
• एथेनॉल + एसीटोन
• $\text{CS}_2$ + एसीटोन
• एथेनॉल + जल
• क्लोरोफॉर्म + एसीटोन (प्रबल H-बंध)
• फीनॉल + ऐनिलीन
• $\text{HNO}_3$ + जल ($68\%$)
स्थिरक्वाथी (Azeotrope)नहीं बनातेन्यूनतम क्वथनांकी ($95\%$ एथेनॉल)अधिकतम क्वथनांकी ($68\%\text{ HNO}_3$)

4. अणुसंख्य गुणधर्म एवं आण्विक द्रव्यमान का निर्धारण

अणुसंख्य गुणधर्म (Colligative Properties)

तनु विलयनों के वे भौतिक गुण जो विलयन में उपस्थित विलेय के कणों (अणुओं या आयनों) की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी रासायनिक प्रकृति पर, अणुसंख्य गुणधर्म कहलाते हैं। ये चार प्रकार के होते हैं:

1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (RLVP)

विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब घट जाता है। आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल-अंश ($x_B$) के बराबर होता है:
$$\mathbf{\frac{p_A^\circ - p_A}{p_A^\circ} = x_B = \frac{n_B}{n_A + n_B} \approx \frac{w_B \cdot M_A}{M_B \cdot w_A}} \implies \mathbf{M_B = \frac{w_B \cdot M_A \cdot p_A^\circ}{(p_A^\circ - p_A) \cdot w_A}}$$

2. क्वथनांक का उन्नयन (Elevation in Boiling Point - $\Delta T_b$)

अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन का क्वथनांक शुद्ध विलायक के क्वथनांक ($T_b^\circ$) से बढ़ जाता है:
$$\mathbf{\Delta T_b = T_b - T_b^\circ = K_b \cdot m = \frac{K_b \times w_B \times 1000}{M_B \times w_A}}$$
जहाँ $K_b$ = मोलल उन्नयन स्थिरांक / क्वथनांकमापी स्थिरांक (Ebullioscopic Constant)।
परिभाषा: $1\text{ mol}$ अवाष्पशील विलेय को $1\text{ kg}$ विलायक में घोलने पर क्वथनांक में होने वाली वृद्धि $K_b$ कहलाती है (इकाई: $\text{K kg mol}^{-1}$; जल हेतु $K_b = 0.52\text{ K kg mol}^{-1}$)।
अज्ञात अणुभार: $\mathbf{M_B = \frac{1000 \times K_b \times w_B}{\Delta T_b \times w_A}}$।

3. हिमांक का अवनमन (Depression in Freezing Point - $\Delta T_f$)

अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक के हिमांक ($T_f^\circ$) से कम हो जाता है:
$$\mathbf{\Delta T_f = T_f^\circ - T_f = K_f \cdot m = \frac{K_f \times w_B \times 1000}{M_B \times w_A}}$$
जहाँ $K_f$ = मोलल अवनमन स्थिरांक / हिमांकमापी स्थिरांक (Cryoscopic Constant) (जल हेतु $K_f = 1.86\text{ K kg mol}^{-1}$)।
अज्ञात अणुभार: $\mathbf{M_B = \frac{1000 \times K_f \times w_B}{\Delta T_f \times w_A}}$।

4. परासरण एवं परासरण दाब (Osmotic Pressure - $\pi$)

परासरण (Osmosis): विलायक के अणुओं का स्वतः अर्धपारगम्य झिल्ली (SPM) से होकर कम सांद्रता (शुद्ध विलायक) से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर प्रवाह।
परासरण दाब ($\pi$): वह अतिरिक्त बाह्य दाब जो विलयन पर लगाने से विलायक का SPM से होकर प्रवाह ठीक रुक जाए:
$$\mathbf{\pi = C R T = \frac{n_B}{V} R T = \frac{w_B R T}{M_B V}} \implies \mathbf{M_B = \frac{w_B R T}{\pi V}}$$
प्रोटीनों एवं बहुलकों के अणुभार निर्धारण हेतु परासरण दाब सर्वोत्तम विधि है, क्योंकि यह कमरे के ताप पर मापा जा सकता है और अति-तनु विलयनों हेतु भी $\pi$ का मान पर्याप्त बड़ा होता है।
• समपरासरी (Isotonic): $\pi_1 = \pi_2$ ($0.9\%\text{ NaCl}$ रक्त कोशिकाओं के समपरासरी होता है)।
• प्रतिलोम परासरण (Reverse Osmosis - RO): जब विलयन पर परासरण दाब से अधिक बाह्य दाब ($P > \pi$) लगाया जाता है, तो विलायक विलयन से शुद्ध विलायक की ओर प्रवाहित होने लगता है। इसका उपयोग समुद्री जल के अलवणीकरण (Desalination) एवं जल शोधन में होता है।

5. असामान्य मोलर द्रव्यमान एवं वान्ट हॉफ गुणांक (Van't Hoff Factor)

5.1 वान्ट हॉफ गुणांक ($i$) की संकल्पना

जब विलेय विलायक में घुलकर वियोजित (Dissociate) अथवा संयोजित (Associate) होता है, तो कणों की वास्तविक संख्या सैद्धांतिक संख्या से भिन्न हो जाती है जिससे प्रेक्षित अणुसंख्य गुणधर्म असामान्य प्राप्त होते हैं। इस विसंगति को दूर करने हेतु वान्ट हॉफ ने गुणांक $i$ प्रतिपादित किया:

$$\mathbf{i = \frac{\text{प्रेक्षित अणुसंख्य गुणधर्म}}{\text{सामान्य (सैद्धांतिक) अणुसंख्य गुणधर्म}} = \frac{\text{सामान्य मोलर द्रव्यमान}}{\text{असामान्य (प्रेक्षित) मोलर द्रव्यमान}} = \frac{\text{कणों की कुल संख्या (वियोजन/संयोजन पश्चात)}}{\text{कणों की प्रारंभिक संख्या}}}$$

5.2 वियोजन एवं संयोजन की मात्रा (Degree of Dissociation & Association)

  1. वियोजन (Dissociation - जैसे वैद्युत-अपघट्य $\text{NaCl}, \text{CaCl}_2$):
    कणों की संख्या बढ़ती है $\implies \mathbf{i > 1}$, तथा प्रेक्षित अणुभार सामान्य से कम प्राप्त होता है।
    यदि 1 अणु वियोजित होकर $n$ आयन देता है तथा वियोजन की मात्रा $\alpha$ हो:
    $$A_n \rightleftharpoons n A \implies i = 1 + (n - 1)\alpha \implies \mathbf{\alpha = \frac{i - 1}{n - 1}}$$उदा. $\text{NaCl}$ हेतु $n=2 \implies i = 1 + \alpha$; पूर्ण वियोजन पर $\alpha=1, i=2$।
  2. संयोजन (Association - जैसे बेन्जीन में ऐसीटिक अम्ल का द्विलकीकरण Dimerization):
    कणों की संख्या घटती है $\implies \mathbf{i < 1}$, तथा प्रेक्षित अणुभार सामान्य से अधिक (दोगुना) प्राप्त होता है।
    यदि $n$ अणु मिलकर एक बृहद् अणु बनाते हैं तथा संयोजन की मात्रा $\alpha$ हो:
    $$n A \rightleftharpoons A_n \implies i = 1 + \left(\frac{1}{n} - 1\right)\alpha \implies \mathbf{\alpha = \frac{1 - i}{1 - 1/n}}$$उदा. ऐसीटिक अम्ल बेन्जीन में द्विलक ($n=2$) बनाता है: $2\text{CH}_3\text{COOH} \rightleftharpoons (\text{CH}_3\text{COOH})_2$।

5.3 वान्ट हॉफ गुणांक युक्त संशोधित सूत्र

  • वाष्प दाब अवनमन: $\frac{p_A^\circ - p_A}{p_A^\circ} = \mathbf{i} \cdot x_B$
  • क्वथनांक उन्नयन: $\mathbf{\Delta T_b = i \cdot K_b \cdot m}$
  • हिमांक अवनमन: $\mathbf{\Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m}$
  • परासरण दाब: $\mathbf{\pi = i \cdot C R T}$

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

मोलरता M
M = {w_B × 1000}{M_B × V_{mL}} (ताप पर निर्भर)
मोललता m
m = {w_B × 1000}{M_B × w_{A (g)}} (ताप से स्वतंत्र)
मोल-अंश संबंध
$$x_A + x_B = 1; \quad x_B = \frac{n_B}{n_A + n_B}$$
हेनरी का नियम
p = K_H · x (K_H ⇒ विलेयता x )
राउल्ट का नियम
$$p_A = p_A^\circ x_A; \quad p_{\text{total}} = p_A^\circ x_A + p_B^\circ x_B$$
वाष्प दाब आपेक्षिक अवनमन
$$\frac{p_A^\circ - p_A}{p_A^\circ} = i \cdot x_B = i \frac{w_B M_A}{M_B w_A}$$
क्वथनांक उन्नयन ΔTb
T_b = i · K_b · m (जल: K_b = 0.52 K kg mol^{-1})
हिमांक अवनमन ΔTf
T_f = i · K_f · m (जल: K_f = 1.86 K kg mol^{-1})
परासरण दाब π
$$\pi = i \cdot C R T = i \frac{w_B R T}{M_B V}$$
वान्ट हॉफ गुणांक i
i = {प्रेक्षित गुण}{सैद्धांतिक गुण} = {M_{सामान्य}}{M_{प्रेक्षित}}
वियोजन की मात्रा α
$$\alpha = \frac{i - 1}{n - 1} \quad (i > 1)$$
संयोजन की मात्रा α
$$\alpha = \frac{1 - i}{1 - 1/n} \quad (i < 1)$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
यदि $20\%\text{ (द्रव्यमान/द्रव्यमान)}$ जलीय $\text{KI}$ विलयन का घनत्व $1.202\text{ g mL}^{-1}$ हो, तो $\text{KI}$ की: (क) मोललता ($m$), (ख) मोलरता ($M$), तथा (ग) मोल-अंश ($x_{\text{KI}}$) की गणना कीजिए। [$\text{KI}$ का मोलर द्रव्यमान $= 166\text{ g mol}^{-1}$, जल का मोलर द्रव्यमान $= 18\text{ g mol}^{-1}$]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
$20\%\text{ (w/w) KI}$ का अर्थ है कि $100\text{ g}$ विलयन में $\text{KI}$ का द्रव्यमान $w_B = 20\text{ g}$ है।
विलायक (जल) का द्रव्यमान $w_A = 100 - 20 = 80\text{ g} = 0.080\text{ kg}$。
$\text{KI}$ के मोल $n_B = \frac{20}{166} = 0.1205\text{ mol}$。

(क) मोललता ($m$):
$$m = \frac{n_B}{w_A\text{ (kg)}} = \frac{0.1205}{0.080} = \mathbf{1.506\text{ mol kg}^{-1} \text{ (या 1.51 m)}}$$
(ख) मोलरता ($M$):
विलयन का आयतन $V = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{घनत्व}} = \frac{100\text{ g}}{1.202\text{ g mL}^{-1}} = 83.195\text{ mL} = 0.0832\text{ L}$。
$$M = \frac{n_B}{V\text{ (L)}} = \frac{0.1205}{0.0832} = \mathbf{1.45\text{ mol L}^{-1} \text{ (या 1.45 M)}}$$
(ग) मोल-अंश ($x_{\text{KI}}$):
जल के मोल $n_A = \frac{80}{18} = 4.444\text{ mol}$。
कुल मोल $n_{\text{total}} = n_B + n_A = 0.1205 + 4.444 = 4.5645\text{ mol}$。
$$x_{\text{KI}} = \frac{n_B}{n_{\text{total}}} = \frac{0.1205}{4.5645} = \mathbf{0.0263}$$
उदाहरण 2
$45\text{ g}$ एथिलीन ग्लाइकॉल ($ ext{C}_2 ext{H}_6 ext{O}_2$) को $600\text{ g}$ जल में मिलाया गया। (क) हिमांक अवनमन ($\Delta T_f$) तथा (ख) विलयन का हिमांक ($T_f$) ज्ञात कीजिए। [जल हेतु $K_f = 1.86\text{ K kg mol}^{-1}$]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
विलेय ($ ext{C}_2 ext{H}_6 ext{O}_2$) का द्रव्यमान $w_B = 45\text{ g}$
विलेय का मोलर द्रव्यमान $M_B = (2 \times 12) + (6 \times 1) + (2 \times 16) = 24 + 6 + 32 = 62\text{ g mol}^{-1}$
विलायक (जल) का द्रव्यमान $w_A = 600\text{ g}$
$K_f = 1.86\text{ K kg mol}^{-1}$

(क) हिमांक अवनमन ($\Delta T_f$):
सूत्र: $\Delta T_f = \frac{1000 \times K_f \times w_B}{M_B \times w_A}$
$$\Delta T_f = \frac{1000 \times 1.86 \times 45}{62 \times 600} = \frac{83700}{37200} = \mathbf{2.25\text{ K}}$$
(ख) विलयन का हिमांक ($T_f$):
शुद्ध जल का हिमांक $T_f^\circ = 273.15\text{ K}$ ($0^\circ\text{C}$)
$$T_f = T_f^\circ - \Delta T_f = 273.15 - 2.25 = \mathbf{270.90\text{ K}} \quad (\text{या } -2.25^\circ\text{C})$$
उदाहरण 3
एक प्रोटीन के $200\text{ cm}^3$ जलीय विलयन में $1.26\text{ g}$ प्रोटीन है। $300\text{ K}$ पर इस विलयन का परासरण दाब $2.57 \times 10^{-3}\text{ bar}$ पाया गया। प्रोटीन के मोलर द्रव्यमान की गणना कीजिए। [$R = 0.083\text{ L bar mol}^{-1}\text{ K}^{-1}$]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
विलेय (प्रोटीन) का द्रव्यमान $w_B = 1.26\text{ g}$
विलयन का आयतन $V = 200\text{ cm}^3 = 200\text{ mL} = 0.200\text{ L}$
ताप $T = 300\text{ K}$
परासरण दाब $\pi = 2.57 \times 10^{-3}\text{ bar}$
गैस स्थिरांक $R = 0.083\text{ L bar mol}^{-1}\text{ K}^{-1}$

सूत्र:
$$\pi = \frac{w_B R T}{M_B V} \implies M_B = \frac{w_B R T}{\pi V}$$
गणना:
$$M_B = \frac{1.26 \times 0.083 \times 300}{2.57 \times 10^{-3} \times 0.200}$$
$$M_B = \frac{31.374}{0.000514} = \mathbf{61,038.9\text{ g mol}^{-1}} \approx \mathbf{61,039\text{ g mol}^{-1}}$$
उत्तर: प्रोटीन का मोलर द्रव्यमान लगभग $\mathbf{61,039\text{ g mol}^{-1}}$ है।
उदाहरण 4
राउल्ट के नियम के आधार पर धनात्मक विचलन तथा ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले अनादर्श विलयनों में तुलना कीजिए। प्रत्येक का एक उपयुक्त उदाहरण दीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
धनात्मक एवं ऋणात्मक विचलन में तुलनात्मक अंतर:

लक्षणधनात्मक विचलन (Positive Deviation)ऋणात्मक विचलन (Negative Deviation)
वाष्प दाब संबंधकुल वाष्प दाब राउल्ट नियम से अधिक होता है:
$p_A > p_A^\circ x_A, p_B > p_B^\circ x_B$
कुल वाष्प दाब राउल्ट नियम से कम होता है:
$p_A < p_A^\circ x_A, p_B < p_B^\circ x_B$
आण्विक आकर्षण बलविलेय-विलायक ($A-B$) आकर्षण बल शुद्ध घटकों ($A-A$ व $B-B$) से दुर्बल होता है।विलेय-विलायक ($A-B$) आकर्षण बल शुद्ध घटकों से प्रबल होता है (नया H-बंध बनना)।
मिश्रण एंथैल्पी ($\Delta H$)$\mathbf{\Delta_{\text{mix}} H > 0}$ (ऊष्माशोषी प्रक्रम)$\mathbf{\Delta_{\text{mix}} H < 0}$ (ऊष्माक्षेपी प्रक्रम)
मिश्रण आयतन ($\Delta V$)$\mathbf{\Delta_{\text{mix}} V > 0}$ (आयतन बढ़ता है)$\mathbf{\Delta_{\text{mix}} V < 0}$ (आयतन घटता है)
स्थिरक्वाथी का प्रकारन्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी बनाते हैं।अधिकतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी बनाते हैं।
उदाहरणएथेनॉल + एसीटोन (एसीटोन डालने पर एथेनॉल के हाइड्रोजन बंध टूटते हैं)।क्लोरोफॉर्म + एसीटोन (दोनों के मध्य नया प्रबल हाइड्रोजन बंध $\text{Cl}_3\text{C-H}\cdots\text{O}=\text{C}(\text{CH}_3)_2$ बनता है)।
उदाहरण 5
$2.0\text{ g}$ बेन्जोइक अम्ल ($ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{COOH}$) को $25\text{ g}$ बेन्जीन में घोलने पर हिमांक में $1.62\text{ K}$ का अवनमन होता है। यदि बेन्जोइक अम्ल विलयन में द्विलक (Dimer) बनाता है, तो अम्ल के संयोजन की प्रतिशत मात्रा ($\alpha$) ज्ञात कीजिए। [बेन्जीन हेतु $K_f = 4.9\text{ K kg mol}^{-1}$, बेन्जोइक अम्ल का सैद्धांतिक मोलर द्रव्यमान $= 122\text{ g mol}^{-1}$]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
$w_B = 2.0\text{ g}$, $w_A = 25\text{ g}$, $\Delta T_f = 1.62\text{ K}$, $K_f = 4.9\text{ K kg mol}^{-1}$
सैद्धांतिक मोलर द्रव्यमान $M_{\text{normal}} = 122\text{ g mol}^{-1}$

1. प्रायोगिक (असामान्य) मोलर द्रव्यमान ($M_{\text{exp}}$) की गणना:
$$M_{\text{exp}} = \frac{1000 \times K_f \times w_B}{\Delta T_f \times w_A} = \frac{1000 \times 4.9 \times 2.0}{1.62 \times 25} = \frac{9800}{40.5} = \mathbf{241.98\text{ g mol}^{-1}}$$
2. वान्ट हॉफ गुणांक ($i$) की गणना:
$$i = \frac{M_{\text{normal}}}{M_{\text{exp}}} = \frac{122}{241.98} = \mathbf{0.504}$$$$
3. संयोजन की मात्रा ($\alpha$) की गणना:
चूंकि बेन्जोइक अम्ल द्विलक बनाता है ($2\text{C}_6 ext{H}_5\text{COOH} \rightleftharpoons (\text{C}_6\text{H}_5\text{COOH})_2$), अतः $n = 2$。
सूत्र: $\alpha = \frac{1 - i}{1 - 1/n} = \frac{1 - 0.504}{1 - 1/2} = \frac{0.496}{0.5} = \mathbf{0.992}$

अतः संयोजन की प्रतिशत मात्रा = $0.992 \times 100 = \mathbf{99.2\%}$।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ताप बदलने पर मोललता को भी परिवर्तित मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मोललता द्रव्यमान पर आधारित होती है ($m = n_B / w_A\text{ (kg)}$), और द्रव्यमान ताप से स्वतंत्र होता है। केवल आयतन पर आधारित राशियाँ (जैसे मोलरता $M$) ताप पर निर्भर करती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हेनरी स्थिरांक ($K_H$) अधिक होने पर विलेयता अधिक मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वास्तव में $p = K_H x \implies x = p / K_H$; अतः $K_H$ का मान जितना अधिक होगा, गैस की विलेयता ($x$) उतनी ही कम होगी।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

वैद्युत-अपघट्यों के आंकिक प्रश्नों में वान्ट हॉफ गुणांक ($i$) को भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जब भी विलेय $\text{NaCl}, \text{CaCl}_2$ या $\text{K}_2\text{SO}_4$ जैसा आयनिक यौगिक हो, तो $\Delta T_b = i K_b m$ तथा $\Delta T_f = i K_f m$ का ही प्रयोग करें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आपेक्षिक वाष्प दाब अवनमन में $\frac{p_A^\circ - p_A}{p_A}$ लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आपेक्षिक अवनमन शुद्ध विलायक के वाष्प दाब के सापेक्ष होता है, अतः हर (Denominator) में सर्वदा $p_A^\circ$ होगा: $\frac{p_A^\circ - p_A}{p_A^\circ} = x_B$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

समपरासरी विलयनों में केवल सांद्रता देखकर निर्णय लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

समपरासरी विलयन वे हैं जिनका परासरण दाब समान हो ($\pi_1 = \pi_2 \implies i_1 C_1 = i_2 C_2$); इसमें वान्ट हॉफ गुणांक $i$ को सम्मिलित करना अनिवार्य है।

विलयन: अणुसंख्य गुणधर्म, राउल्ट नियम एवं वान्ट हॉफ गुणांक

विलयन (Solutions): सांद्रता, राउल्ट नियम, अणुसंख्य गुण व वान्ट हॉफ गुणांक1. सांद्रता व हेनरी नियमविलेयता व गैस नियम• मोललता (m) ताप-स्वतंत्र:m = (w_B × 1000)/(M_B × w_A)• मोलरता (M) ताप-निर्भर• हेनरी नियम: p = K_H · xK_H ↑ ⇒ विलेयता x ↓ताप ↑ ⇒ K_H ↑ ⇒ O₂ विलेयता ↓• गोताखोरी अनुप्रयोग:बेंड्स से बचाव हेतु He तनुकरणठंडे जल में मछलियां अधिक सुरक्षित2. राउल्ट नियम व विचलनआदर्श व अनादर्श विलयन• राउल्ट: p_i = p_i° · x_i• आदर्श विलयन:ΔH=0, ΔV=0 (बेन्जीन+टॉलूईन)• धनात्मक विचलन:A-B दुर्बल; ΔH>0, ΔV>0 (एथेनॉल+एसीटोन)• ऋणात्मक विचलन:A-B प्रबल (H-बंध); ΔH<0, ΔV<0उदा. क्लोरोफॉर्म + एसीटोनस्थिरक्वाथी (Azeotropes) निर्माण3. अणुसंख्य गुण व वान्ट हॉफColligative Properties & i• 4 अणुसंख्य गुणधर्म:1. RLVP: Δp/p° = i · x_B2. क्वथनांक उन्नयन: ΔTb = i·Kb·m3. हिमांक अवनमन: ΔTf = i·Kf·m4. परासरण दाब: π = i·CRT• वान्ट हॉफ गुणांक (i):वियोजन i>1; α = (i-1)/(n-1)संयोजन i<1; α = (1-i)/(1-1/n)RO: समुद्री जल अलवणीकरणविलयन के मुख्य परीक्षा सूत्र व अवधारणाएं (Golden Chemistry Capsule)हेनरी का नियम:p = K_H · x; उच्च ताप पर K_H बढ़ता है जिससे विलेयता घटती है; बेंड्स बचाव हेतु हीलियम प्रयुक्त।राउल्ट विचलन:क्लोरोफॉर्म + एसीटोन = ऋणात्मक विचलन (नया H-बंध); एथेनॉल + एसीटोन = धनात्मक विचलन।अणुसंख्य गुण:कणों की संख्या पर निर्भर; वान्ट हॉफ i से संशोधित; परासरण दाब बहुलकों के मोलर द्रव्यमान हेतु श्रेष्ठ।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
मोललता (m) प्रति किग्रा विलायक में विलेय के मोल हैं, जो द्रव्यमान आधारित होने के कारण ताप से स्वतंत्र है।
मुख्य बिंदु 2
हेनरी नियम: p = K_H · x; स्थिर ताप पर गैस का आंशिक दाब उसके मोल-अंश के समानुपाती होता है।
मुख्य बिंदु 3
ताप बढ़ाने पर K_H बढ़ता है तथा विलेयता घटती है, अतः जलीय जीव ठंडे जल में अधिक सहज रहते हैं।
मुख्य बिंदु 4
राउल्ट नियम: वाष्पशील द्रवों हेतु p_A = p_A° x_A; अवाष्पशील विलेय हेतु p = p_A° x_A।
मुख्य बिंदु 5
आदर्श विलयन में ΔH_mix = 0, ΔV_mix = 0 एवं A-B आकर्षण A-A व B-B के समतुल्य होता है।
मुख्य बिंदु 6
धनात्मक विचलन में A-B दुर्बल (ΔH>0, ΔV>0; एथेनॉल+एसीटोन); ऋणात्मक में A-B प्रबल (ΔH<0, ΔV<0; क्लोरोफॉर्म+एसीटोन)।
मुख्य बिंदु 7
अणुसंख्य गुण केवल विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं: RLVP, ΔTb = i Kb m, ΔTf = i Kf m, π = i CRT।
मुख्य बिंदु 8
प्रोटीनों एवं बहुलकों के मोलर द्रव्यमान निर्धारण हेतु परासरण दाब (π) सर्वाधिक उपयुक्त विधि है।
मुख्य बिंदु 9
वान्ट हॉफ गुणांक: i = सामान्य मोलर द्रव्यमान / प्रेक्षित मोलर द्रव्यमान; वियोजन में i > 1, संयोजन में i < 1।
मुख्य बिंदु 10
वियोजन की मात्रा α = (i - 1)/(n - 1); संयोजन की मात्रा α = (1 - i)/(1 - 1/n)।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मोलरता (M) की तुलना में मोललता (m) को विलयन की सांद्रता व्यक्त करने के लिए श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मोलरता विलयन के आयतन पर निर्भर करती है, और चूँकि आयतन ताप के साथ बदलता है (V ∝ T), अतः ताप बदलने पर मोलरता बदल जाती है। इसके विपरीत, मोललता विलायक के द्रव्यमान पर आधारित होती है (m = n_B / w_A(kg)), और द्रव्यमान ताप से सर्वथा स्वतंत्र होता है। इसलिए मोललता अधिक यथार्थ व श्रेष्ठ मानी जाती है।
2
जलीय जीव गर्म जल की तुलना में ठंडे जल में अधिक सहज और सुरक्षित क्यों रहते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हेनरी के नियमानुसार, ताप बढ़ाने पर हेनरी स्थिरांक (K_H) का मान बढ़ता है जिससे जल में ऑक्सीजन की विलेयता (x) घट जाती है। ठंडे जल का तापमान कम होने के कारण उसमें घुलित ऑक्सीजन की सांद्रता अधिक होती है, जो जलीय जीवों के श्वसन हेतु सुलभ रहती है।
3
एसीटोन और क्लोरोफॉर्म का मिश्रण मिलाने पर राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन क्यों प्रदर्शित करता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) और एसीटोन (CH₃COCH₃) के मध्य एक नया और अत्यधिक प्रबल अंतराण्विक हाइड्रोजन बंध बन जाता है। इस कारण विलेय-विलायक (A-B) आकर्षण बल शुद्ध घटकों के आकर्षण से अधिक प्रबल हो जाता है, जिससे अणुओं के वाष्प में बदलने की प्रवृत्ति घट जाती है और कुल वाष्प दाब कम (ऋणात्मक विचलन) हो जाता है।
4
प्रोटीनों और बहुलकों (Polymers) के मोलर द्रव्यमान निर्धारण के लिए परासरण दाब को अन्य अणुसंख्य गुणधर्मों से श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उच्च मोलर द्रव्यमान वाले बहुलकों के तनु विलयनों हेतु हिमांक अवनमन या क्वथनांक उन्नयन का मान इतना सूक्ष्म होता है कि उसे परिशुद्धता से मापना कठिन होता है, तथा उच्च ताप पर प्रोटीन विकृत हो सकते हैं। परासरण दाब को कमरे के सामान्य ताप पर मापा जा सकता है और अति-तनु विलयनों हेतु भी π का मान पर्याप्त बड़ा और आसानी से मापनीय होता है।
5
यदि 0.1 M NaCl विलयन तथा 0.1 M ग्लूकोज विलयन हों, तो किसका हिमांक अवनमन अधिक होगा और क्यों?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 0.1 M NaCl विलयन का हिमांक अवनमन अधिक (लगभग दोगुना) होगा। ग्लूकोज एक अन-अपघट्य है (i = 1), जबकि NaCl एक प्रबल वैद्युत-अपघट्य है जो जल में वियोजित होकर 2 आयन (Na⁺ + Cl⁻) देता है (i ≈ 2)। चूंकि हिमांक अवनमन कणों की संख्या पर निर्भर करता है (ΔT_f = i K_f m), अतः NaCl विलयन में कणों की संख्या दोगुनी होने से हिमांक अवनमन अधिक होगा।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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