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CBSE • कक्षा XII • Chemistry • अध्याय 9
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

ऐमीन (Amines)

ऐमीन ($R-NH_2, R_2NH, R_3N$) अमोनिया ($NH_3$) के कार्बनिक व्युत्पन्न हैं, जिनका निर्माण अमोनिया के हाइड्रोजन परमाणुओं के एल्किल अथवा एरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापन से होता है। नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone Pair) के कारण ऐमीन लुईस क्षार तथा नाभिकरागी दोनों की भांति व्यवहार करते हैं। अध्याय का केंद्रीय सैद्धांतिक स्तंभ ऐमीनों का क्षारीय स्वभाव (Basicity of Amines) है। गैसीय प्रावस्था में क्षारीयता का क्रम शुद्ध प्रेरणिक प्रभाव ($+I$) द्वारा $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ > NH_3$ होता है, किंतु जलीय माध्यम में प्रेरणिक प्रभाव, विलायक-योजन ऊर्जा (हाइड्रोजन आबंधन) तथा त्रिविम बाधा के संयुक्त प्रभाव से यह क्रम मैथिल समूह हेतु $2^\circ > 1^\circ > 3^\circ > NH_3$ तथा एथिल समूह हेतु $2^\circ > 3^\circ > 1^\circ > NH_3$ हो जाता है। ऐरोमैटिक ऐमीन (एनिलीन) नाइट्रोजन के लोन पेयर के बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में व्यस्त होने के कारण एलिफैटिक ऐमीन व अमोनिया दोनों से बहुत दुर्बल क्षार होते हैं। ऐमीन निर्माण की विशिष्ट विधियों में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण (केवल शुद्ध $1^\circ$ एलिफैटिक ऐमीन) तथा एक कार्बन कम वाला ऐमीन बनाने वाली हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण अभिक्रिया ($R-CONH_2 + Br_2 + 4KOH \rightarrow R-NH_2$) शामिल हैं। प्राथमिक ऐमीनों की पहचान हेतु कार्बिलऐमीन परीक्षण (दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड) तथा प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक ऐमीनों में विभेद हेतु हिंसबर्ग अभिकर्मक ($C_6H_5SO_2Cl$) का परीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंत में, ऐरीनडाइऐजोनियम लवण ($Ar-N_2^+ Cl^-$) का संश्लेषण (डाइऐजोटीकरण) तथा उनके द्वारा विभिन्न ऐरोमैटिक यौगिकों के संश्लेषण (सैन्डमायर, गाटरमान, युग्मन अभिक्रियाएं Coupling Reactions) का गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

मछली की तीखी गंध से लेकर वस्त्रों को रंगने वाले चटकदार एजो-डाई तक का सफर!

क्या आपने कभी ताजी मछली के बाजार से गुजरते समय आने वाली उस विशिष्ट तीखी गंध को महसूस किया है? वह गंध किसी सड़न की नहीं, बल्कि निम्न एलिफैटिक ऐमीनों (विशेषकर ट्राइमेथिलएमीन) की प्राकृतिक वाष्पशीलता का परिणाम है! और आपके पसंदीदा चटक लाल, नारंगी और पीले वस्त्रों पर जो पक्के रंग (Dyes) चढ़े होते हैं, वे प्रयोगशाला में कैसे तैयार होते हैं? वे एनिलीन से बनने वाले 'डाइऐजोनियम लवणों' की फीनॉल व नेफ्थॉल के साथ होने वाली सुंदर 'युग्मन अभिक्रियाओं' (Azo Coupling) की ही देन हैं! नाइट्रोजन का एक छोटा सा लोन पेयर जैविक न्यूरोट्रांसमीटर (एड्रेनालिन, डोपामाइन) से लेकर औद्योगिक रंगों तक जीवन के कितने रूप गढ़ता है? आइए समझें ऐमीन के इस अद्भुत रसायन में!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE बोर्ड परीक्षा में 'ऐमीन' इकाई से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं: 1. जलीय विलयन में ऐमीनों की क्षारीयता का क्रम (मैथिल व एथिल प्रतिस्थापियों के लिए $pK_b$ मानों के आधार पर वैज्ञानिक व्याख्या)। 2. एनिलीन, अमोनिया व ऐल्किल ऐमीन की क्षारीयता की तुलना (एनिलीन के अनुनाद द्वारा लोन पेयर का विस्थानीकरण)। 3. नेम रिएक्शंस (Name Reactions): हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण, गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण, कार्बिलऐमीन अभिक्रिया तथा सैन्डमायर अभिक्रिया। 4. हिंसबर्ग परीक्षण ($C_6H_5SO_2Cl$): प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में विभेद। 5. डाइऐजोनियम लवणों की युग्मन अभिक्रियाएं: फीनॉल व एनिलीन के साथ रंजक (Azo Dyes) निर्माण।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • नाइट्रोजन की त्रिकोणीय पिरैमिडी ज्यामिति एवं लोन पेयर।
  • लुईस क्षार संकल्पना (इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति)।
  • अनुनादी संरचनाएं एवं विलायक-योजन (Solvation) ऊर्जा।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ऐमीनों का $1^\circ, 2^\circ, 3^\circ$ वर्गीकरण एवं गैब्रिएल व हॉफमान विधियों द्वारा निर्माण करना।
  • गैसीय एवं जलीय प्रावस्थाओं में ऐमीनों के क्षारीय सामर्थ्य की सटीक वैज्ञानिक व्याख्या करना।
  • कार्बिलऐमीन तथा हिंसबर्ग परीक्षणों द्वारा ऐमीनों की कोटि का विभेद करना।
  • डाइऐजोनियम लवणों के निर्माण (डाइऐजोटीकरण) की शर्तें व क्रियाविधि लिखना।
  • डाइऐजोनियम लवणों से क्लोरो, ब्रोमो, आयोडो, साइनो एवं एजो-रंजकों का सफल संश्लेषण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. ऐमीनों का निर्माण: गैब्रिएल थैलि...
2 2. ऐमीनों का क्षारीय स्वभाव (गैसीय...
3 3. ऐमीनों के विभेदक परीक्षण: कार्बि...
4 4. ऐरीनडाइऐजोनियम लवण एवं संश्लेषण...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. ऐमीनों का निर्माण: गैब्रिएल थैलिमाइड व हॉफमान निम्नीकरण

1. गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis):

यह केवल प्राथमिक एलिफैटिक ऐमीन ($1^\circ$) के निर्माण की सर्वश्रेष्ठ विधि है:

  • थैलिमाइड की क्रिया एल्कोहॉलिक $KOH$ से कराने पर पोटैशियम थैलिमाइड बनता है, जो एल्किल हैलाइड ($R-X$) के साथ $S_N2$ प्रतिस्थापन द्वारा N-एल्किल थैलिमाइड देता है।
  • इसका क्षारीय जल-अपघटन करने पर शुद्ध प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है:

$$\text{Phthalimide} \xrightarrow{KOH} \text{Potassium Phthalimide} \xrightarrow{R-X} \text{N-Alkyl Phthalimide} \xrightarrow{NaOH / H_2O} R-NH_2 + \text{Sodium Phthalate}$$

  • महत्वपूर्ण सीमा: ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन (जैसे एनिलीन) इस विधि से नहीं बनाई जा सकती, क्योंकि एरिल हैलाइड ($Ar-X$) अनुनाद के कारण थैलिमाइड ऋणायन के साथ $S_N2$ नाभिकरागी प्रतिस्थापन नहीं दर्शाते!

2. हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण (Hoffmann Bromamide Degradation):

जब किसी प्राथमिक ऐमाइड ($R-CONH_2$) को ब्रोमीन ($Br_2$) तथा जलीय अथवा एल्कोहॉलिक $KOH$ के साथ गर्म किया जाता है, तो अभिकारक से एक कार्बन कम वाला प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है:

$$R-CONH_2 + Br_2 + 4KOH \xrightarrow{\Delta} R-NH_2 + K_2CO_3 + 2KBr + 2H_2O$$

उदाहरण: एसीटामाइड ($CH_3CONH_2$) से मेथिलएमीन ($CH_3NH_2$) तथा बेंजैमाइड ($C_6H_5CONH_2$) से एनिलीन ($C_6H_5NH_2$) प्राप्त होती है।

3. नाइट्रो यौगिकों तथा नाइट्राइलों का अपचयन:

  • नाइट्रो यौगिक: $R-NO_2 + 6[H] \xrightarrow{Fe / HCl} R-NH_2 + 2H_2O$ (लोहा व $HCl$ सर्वोत्तम उत्प्रेरक है)।
  • नाइट्राइल (सायनाइड): $R-C\equiv N + 4[H] \xrightarrow{H_2 / Ni} R-CH_2-NH_2$ (मेन्डियस अभिक्रिया)।

2. ऐमीनों का क्षारीय स्वभाव (गैसीय बनाम जलीय माध्यम)

ऐमीन नाइट्रोजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone Pair) के कारण प्रोटॉन ($H^+$) ग्रहण कर सकते हैं, अतः ये लुईस क्षार होते हैं:

$$R-NH_2 + H_2O \rightleftharpoons R-NH_3^+ + OH^-$$

(क) गैसीय प्रावस्था में क्षारीयता क्रम:

गैसीय अवस्था में विलायक नहीं होता, अतः क्षारीयता केवल एल्किल समूहों के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव ($+I$) पर निर्भर करती है। $+I$ प्रभाव नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है:

$$\mathbf{3^\circ \text{ ऐमीन} > 2^\circ \text{ ऐमीन} > 1^\circ \text{ ऐमीन} > NH_3}$$

(ख) जलीय विलयन में क्षारीयता क्रम (अत्यंत महत्वपूर्ण):

जलीय विलयन में तीन कारक एक साथ कार्य करते हैं:

  1. प्रेरणिक प्रभाव ($+I$): $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$ (इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है)।
  2. विलायक-योजन प्रभाव (Solvation / H-bonding): प्रोटॉनीकरण के बाद बना धनायन ($R-NH_3^+$) जल के अणुओं के साथ जितने अधिक हाइड्रोजन आबंध बनाएगा, उतना अधिक स्थायी होगा:

$$R-NH_3^+ (3\; H\text{-आबंध}) > R_2NH_2^+ (2\; H\text{-आबंध}) > R_3NH^+ (1\; H\text{-आबंध})$$

(अतः विलायक-योजन के आधार पर क्रम: $1^\circ > 2^\circ > 3^\circ$)। 3. त्रिविम बाधा (Steric Hindrance): बड़े एल्किल समूह प्रोटॉन के आक्रमण तथा जल द्वारा विलायक-योजन में बाधा डालते हैं।

इन तीनों प्रतिस्पर्धी कारकों के संतुलित प्रभाव से वास्तविक प्रायोगिक क्रम निम्नलिखित होता है:

  • मैथिल ($CH_3$) प्रतिस्थापियों के लिए:

$$(CH_3)_2NH > CH_3NH_2 > (CH_3)_3N > NH_3 \quad \mathbf{(2^\circ > 1^\circ > 3^\circ > NH_3)}$$

  • एथिल ($C_2H_5$) प्रतिस्थापियों के लिए:

$$(C_2H_5)_2NH > (C_2H_5)_3N > C_2H_5NH_2 > NH_3 \quad \mathbf{(2^\circ > 3^\circ > 1^\circ > NH_3)}$$

(ग) एनिलीन (ऐरोमैटिक ऐमीन) का दुर्बल क्षारीय स्वभाव:

एनिलीन ($C_6H_5NH_2$) अमोनिया तथा एलिफैटिक ऐमीनों से लगभग $10^6$ गुना दुर्बल क्षार है ($pK_b = 9.38$ जबकि मेथिलएमीन का $pK_b = 3.38$)।

  • कारण: एनिलीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के $\pi$-इलेक्ट्रॉनों के साथ अनुनाद में विस्थानिकृत (delocalised) हो जाता है। अतः प्रोटॉन को दान करने के लिए नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व अत्यंत कम उपलब्ध रहता है!

3. ऐमीनों के विभेदक परीक्षण: कार्बिलऐमीन व हिंसबर्ग

1. कार्बिलऐमीन परीक्षण (Carbylamine Test / Isocyanide Test):

  • शर्त: यह परीक्षण केवल प्राथमिक ऐमीन ($1^\circ$) देते हैं (चाहे एलिफैटिक हों या ऐरोमैटिक)। द्वितीयक व तृतीयक ऐमीन यह परीक्षण नहीं देते!
  • जब प्राथमिक ऐमीन को क्लोरोफॉर्म ($CHCl_3$) तथा एल्कोहॉलिक $KOH$ के साथ गर्म किया जाता है, तो असहनीय अत्यधिक दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड (कार्बिलऐमीन) बनता है:

$$R-NH_2 + CHCl_3 + 3KOH \xrightarrow{\Delta} \underset{\text{आइसोसायनाइड (तीव्र दुर्गंध)}}{R-N\equiv C} + 3KCl + 3H_2O$$

$$C_6H_5NH_2 + CHCl_3 + 3KOH \xrightarrow{\Delta} C_6H_5-NC (\text{फेनिल आइसोसायनाइड}) + 3KCl + 3H_2O$$

2. हिंसबर्ग परीक्षण (Hinsberg's Test - $1^\circ, 2^\circ, 3^\circ$ में विभेद):

हिंसबर्ग अभिकर्मक = बेंजीनसल्फोनाइल क्लोराइड ($C_6H_5SO_2Cl$):

  1. प्राथमिक ऐमीन ($1^\circ$): अभिक्रिया कर $N$-एल्किलबेंजीनसल्फोनामाइड बनाती है। नाइट्रोजन पर अम्लीय हाइड्रोजन उपस्थित होने के कारण यह जलीय $KOH$ में विलेय हो जाती है:

$$R-NH_2 + C_6H_5SO_2Cl \rightarrow C_6H_5SO_2NHR + HCl \xrightarrow{KOH} \text{विलेय}$$

  1. द्वितीयक ऐमीन ($2^\circ$): अभिक्रिया कर $N,N$-डाइएल्किलबेंजीनसल्फोनामाइड बनाती है। नाइट्रोजन पर कोई अम्लीय हाइड्रोजन न होने के कारण यह जलीय $KOH$ में अविलेय रहती है:

$$R_2NH + C_6H_5SO_2Cl \rightarrow C_6H_5SO_2NR_2 + HCl \xrightarrow{KOH} \text{अविलेय}$$

  1. तृतीयक ऐमीन ($3^\circ$): नाइट्रोजन पर कोई हाइड्रोजन न होने के कारण यह हिंसबर्ग अभिकर्मक से अभिक्रिया ही नहीं करती।

4. ऐरीनडाइऐजोनियम लवण एवं संश्लेषण में उपयोग

डाइऐजोटीकरण (Diazotisation):

जब एनिलीन को हिम-शीतल तापमान ($273-278\text{ K}$ या $0-5^\circ\text{C}$) पर सोडियम नाइट्राइट ($NaNO_2$) तथा तनु $HCl$ के साथ अभिकृत किया जाता है, तो बेंजीनडाइऐजोनियम क्लोराइड बनता है:

$$C_6H_5NH_2 + NaNO_2 + 2HCl \xrightarrow{0-5^\circ\text{C}} \underset{\text{बेंजीनडाइऐजोनियम क्लोराइड}}{C_6H_5N_2^+ Cl^-} + NaCl + 2H_2O$$

डाइऐजोनियम लवणों की प्रमुख अभिक्रियाएं:

  1. सैन्डमायर अभिक्रिया (Sandmeyer Reaction):

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- \xrightarrow{CuCl / HCl} C_6H_5Cl + N_2\uparrow$$

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- \xrightarrow{CuBr / HBr} C_6H_5Br + N_2\uparrow$$

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- \xrightarrow{CuCN / KCN} C_6H_5CN + N_2\uparrow$$

  1. गाटरमान अभिक्रिया (Gattermann Reaction): तांबे के चूर्ण ($Cu$ powder) की उपस्थिति में: $C_6H_5N_2^+ Cl^- \xrightarrow{Cu / HCl} C_6H_5Cl + N_2\uparrow$
  2. आयोडोबेंजीन का निर्माण: केवल $KI$ के साथ गर्म करने पर: $C_6H_5N_2^+ Cl^- + KI \rightarrow C_6H_5I + KCl + N_2\uparrow$
  3. बेंजीन में अपचयन: $C_6H_5N_2^+ Cl^- + H_3PO_2 + H_2O \rightarrow C_6H_6 + H_3PO_3 + HCl + N_2\uparrow$
  4. युग्मन अभिक्रियाएं (Coupling Reactions - एजो रंजक निर्माण):
    • फीनॉल के साथ (दुर्बल क्षारीय माध्यम $\text{pH } 9-10$):

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- + C_6H_5OH \xrightarrow{OH^-} \underset{\text{p-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन (नारंगी रंजक)}}{C_6H_5-N=N-C_6H_4(OH)} + Cl^- + H_2O$$

  • एनिलीन के साथ (दुर्बल अम्लीय माध्यम $\text{pH } 4-5$):

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- + C_6H_5NH_2 \xrightarrow{H^+} \underset{\text{p-एमीनोएजोबेंजीन (पीला रंजक)}}{C_6H_5-N=N-C_6H_4(NH_2)} + Cl^- + H_2O$$

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

ऐमीनों का क्षारीयता क्रम
गैसीय: 3° > 2° > 1° > NH3; जलीय (मैथिल): (CH3)2NH > CH3NH2 > (CH3)3N > NH3 (2° > 1° > 3°); जलीय (एथिल): (C2H5)2NH > (C2H5)3N > C2H5NH2 > NH3 (2° > 3° > 1°); ऐरोमैटिक: एलिफैटिक ऐमीन > NH3 > एनिलीन।
हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण
R-CONH2 + Br2 + 4KOH -> R-NH2 + K2CO3 + 2KBr + 2H2O (उत्पाद में अभिकारक से ठीक एक कार्बन कम होता है)।
कार्बिलऐमीन एवं हिंसबर्ग परीक्षण
कार्बिलऐमीन: 1° ऐमीन + CHCl3 + 3KOH -> R-NC (अत्यंत दुर्गंध) + 3KCl + 3H2O; हिंसबर्ग: 1° ऐमीन सल्फोनामाइड KOH में विलेय; 2° ऐमीन सल्फोनामाइड KOH में अविलेय; 3° अभिक्रिया नहीं करता।
डाइऐजोटीकरण एवं एजो युग्मन
डाइऐजोटीकरण: C6H5NH2 + NaNO2 + 2HCl (0-5°C) -> C6H5N2+Cl-; युग्मन: फीनॉल से p-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन (नारंगी रंजक); एनिलीन से p-एमीनोएजोबेंजीन (पीला रंजक)।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
जलीय विलयन में ऐमीनों की क्षारीयता के क्रम की व्याख्या कीजिए। मेथिल प्रतिस्थापित ऐमीनों में $(CH_3)_2NH$ का क्षारीय सामर्थ्य $(CH_3)_3N$ से अधिक क्यों होता है? (CBSE Board 5 Marks Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. जलीय विलयन में क्षारीयता के निर्धारक कारक: जलीय विलयन में किसी ऐमीन का क्षारीय सामर्थ्य केवल एक कारक पर नहीं, बल्कि निम्नलिखित तीन प्रतिस्पर्धी कारकों के संयुक्त प्रभाव पर निर्भर करता है: (i) प्रेरणिक प्रभाव ($+I$ effect): एल्किल समूह ($R$) इलेक्ट्रॉन-दाता होते हैं, जो नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं और प्रोटॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ाते हैं। इस आधार पर क्रम $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ > NH_3$ होना चाहिए। (ii) विलायक-योजन प्रभाव (Solvation effect): प्रोटॉन ग्रहण करने के पश्चात बना धनायन ($R_nNH_{4-n}^+$) जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंधन द्वारा विलायक-योजित होकर स्थायी होता है। जितने अधिक हाइड्रोजन होंगे, उतना अधिक स्थायित्व होगा ($1^\circ > 2^\circ > 3^\circ$)। (iii) त्रिविम बाधा (Steric Hindrance): बड़े एल्किल समूह प्रोटॉन के प्रवेश तथा जल के अणुओं द्वारा हाइड्रोजन आबंधन बनाने में बाधा डालते हैं ($1^\circ < 2^\circ < 3^\circ$ त्रिविम बाधा बढ़ती है)।

2. $(CH_3)_2NH$ का $(CH_3)_3N$ से अधिक क्षारीय होने का कारण: तृतीयक एमीन $(CH_3)_3N$ में यद्यपि तीन मैथिल समूहों का $+I$ प्रभाव अधिकतम होता है, किंतु इसके प्रोटॉनीकृत रूप $(CH_3)_3NH^+$ में केवल एक हाइड्रोजन होने से जल के साथ केवल एक हाइड्रोजन आबंध बन पाता है और तीन मैथिल समूह भारी त्रिविम बाधा उत्पन्न करते हैं, जिससे इसका जलयोजन स्थायित्व बहुत घट जाता है। इसके विपरीत द्वितीयक एमीन $(CH_3)_2NH$ में $+I$ प्रभाव भी पर्याप्त होता है और इसके धनायन $(CH_3)_2NH_2^+$ में दो हाइड्रोजन होने से विलायक-योजन स्थायित्व भी उच्च रहता है तथा त्रिविम बाधा भी कम होती है। अतः जलीय विलयन में डाईमेथिलएमीन, ट्राईमेथिलएमीन से अधिक क्षारीय होता है ($2^\circ > 1^\circ > 3^\circ$)।

उदाहरण 2
रासायनिक समीकरण सहित समझाइए: (i) हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण अभिक्रिया (ii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण (iii) कार्बिलऐमीन परीक्षण
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: (i) हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण: जब किसी प्राथमिक ऐमाइड को ब्रोमीन तथा सांद्र जलीय $KOH$ के साथ गर्म किया जाता है, तो कार्बोनिल कार्बन कार्बोनेट के रूप में निकल जाता है और एक कार्बन कम वाला प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है:

$$CH_3-CONH_2 (\text{एसीटामाइड}) + Br_2 + 4KOH \xrightarrow{\Delta} CH_3-NH_2 (\text{मेथिलएमीन}) + K_2CO_3 + 2KBr + 2H_2O$$

(ii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण: थैलिमाइड की क्रिया एल्कोहॉलिक $KOH$ से कराकर पोटैशियम थैलिमाइड बनाते हैं, जिसे एथिल ब्रोमाइड से अभिकृत कराने पर N-एथिल थैलिमाइड बनता है। क्षारीय जल-अपघटन द्वारा शुद्ध एथिलएमीन प्राप्त होता है:

$$C_6H_4(CO)_2NH \xrightarrow{KOH} C_6H_4(CO)_2N^-K^+ \xrightarrow{C_2H_5Br} C_6H_4(CO)_2N-C_2H_5 \xrightarrow{NaOH/H_2O} C_2H_5NH_2 + C_6H_4(COONa)_2$$

(iii) कार्बिलऐमीन परीक्षण: किसी प्राथमिक ऐमीन (जैसे एनिलीन) को क्लोरोफॉर्म तथा एल्कोहॉलिक $KOH$ के साथ गर्म करने पर अत्यंत तीखी व असहनीय दुर्गंधयुक्त फेनिल आइसोसायनाइड (कार्बिलऐमीन) बनता है:

$$C_6H_5NH_2 + CHCl_3 + 3KOH \xrightarrow{\Delta} C_6H_5-N\equiv C (\text{फेनिल आइसोसायनाइड}) + 3KCl + 3H_2O$$

उदाहरण 3
एनिलीन, साइक्लोहेक्सिलएमीन की तुलना में दुर्बल क्षार क्यों है? अनुनादी संरचनाओं द्वारा स्पष्ट कीजिए। (CBSE Board High-Yield Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: एनिलीन ($C_6H_5NH_2$) साइक्लोहेक्सिलएमीन की तुलना में अत्यधिक दुर्बल क्षार है। इसके दो वैज्ञानिक कारण हैं:

  1. नाइट्रोजन के लोन पेयर का अनुनाद: एनिलीन में नाइट्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair) सीधे बेंजीन वलय के साथ संयुग्मन में होता है। अनुनादी संरचनाओं में यह इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के ऑर्थो और पैरा स्थानों पर विस्थानिकृत (delocalise) हो जाता है। अतः प्रोटॉन ($H^+$) को ग्रहण करने के लिए नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बहुत कम उपलब्ध रहता है।
  2. एनिलीनियम आयन का कम स्थायित्व: जब एनिलीन प्रोटॉन ग्रहण कर एनिलीनियम आयन ($C_6H_5NH_3^+$) बनाती है, तो इसमें केवल 2 अनुनादी संरचनाएं संभव होती हैं, जबकि मूल एनिलीन में 5 अनुनादी संरचनाएं होती हैं। अतः प्रोटॉनीकरण से स्थायित्व घटता है।
  3. साइक्लोहेक्सिलएमीन: इसमें कोई बेंजीन वलय नहीं है (यह एलिफैटिक ऐमीन है)। नाइट्रोजन का लोन पेयर स्थानीयकृत (Localized) रहता है और साइक्लोहेक्सिल वलय का $+I$ प्रभाव नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को और बढ़ाता है। अतः यह सुगमता से प्रोटॉन ग्रहण कर लेता है।
उदाहरण 4
हिंसबर्ग अभिकर्मक क्या है? इसके द्वारा प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों के मिश्रण को कैसे अलग/पहचाना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: हिंसबर्ग अभिकर्मक: बेंजीनसल्फोनाइल क्लोराइड ($C_6H_5SO_2Cl$) को हिंसबर्ग अभिकर्मक कहते हैं।

पहचान एवं विभेद की विधि:

  1. प्राथमिक ऐमीन ($1^\circ$): हिंसबर्ग अभिकर्मक से क्रिया करके $N$-एल्किलबेंजीनसल्फोनामाइड बनाती है। इसमें नाइट्रोजन पर एक अम्लीय हाइड्रोजन ($H$) उपस्थित होता है, जिसके कारण यह जलीय $KOH$ में घुलकर पारदर्शी विलयन बनाती है। इस विलयन में अम्ल मिलाने पर यह पुनः अवक्षेपित हो जाती है:

$$R-NH_2 + C_6H_5SO_2Cl \rightarrow C_6H_5SO_2NHR + HCl \xrightarrow{KOH} \text{विलेय (Soluble)}$$

  1. द्वितीयक ऐमीन ($2^\circ$): अभिक्रिया करके $N,N$-डाइएल्किलबेंजीनसल्फोनामाइड बनाती है। इसमें नाइट्रोजन पर कोई अम्लीय हाइड्रोजन शेष नहीं रहता, अतः यह जलीय $KOH$ में अविलेय (Insoluble) रहती है:

$$R_2NH + C_6H_5SO_2Cl \rightarrow C_6H_5SO_2NR_2 + HCl \xrightarrow{KOH} \text{अविलेय}$$

  1. तृतीयक ऐमीन ($3^\circ$): नाइट्रोजन पर कोई प्रतिस्थापनीय हाइड्रोजन न होने के कारण यह हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करती और मिश्रण में अपरिवर्तित रहती है।
उदाहरण 5
डाइऐजोटीकरण क्या है? बेंजीनडाइऐजोनियम क्लोराइड से निम्नलिखित कैसे प्राप्त करेंगे? (i) क्लोरोबेंजीन (सैन्डमायर अभिक्रिया द्वारा) (ii) आयोडोबेंजीन (iii) p-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन (नारंगी रंजक)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: डाइऐजोटीकरण: प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन (एनिलीन) की $0-5^\circ\text{C}$ ($273-278\text{ K}$) तापमान पर सोडियम नाइट्राइट ($NaNO_2$) तथा तनु खनिज अम्ल ($HCl$) के साथ अभिक्रिया द्वारा ऐरीनडाइऐजोनियम लवण बनाने की विधि को डाइऐजोटीकरण कहते हैं:

$$C_6H_5NH_2 + NaNO_2 + 2HCl \xrightarrow{0-5^\circ\text{C}} C_6H_5N_2^+ Cl^- + NaCl + 2H_2O$$

रूपांतरण: (i) क्लोरोबेंजीन (सैन्डमायर अभिक्रिया): बेंजीनडाइऐजोनियम क्लोराइड को क्यूप्रस क्लोराइड व $HCl$ ($CuCl/HCl$) के साथ गर्म करने पर नाइट्रोजन गैस निकलती है और क्लोरोबेंजीन बनती है:

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- \xrightarrow{CuCl / HCl} C_6H_5Cl + N_2\uparrow$$

(ii) आयोडोबेंजीन: बेंजीनडाइऐजोनियम क्लोराइड के जलीय विलयन को पोटैशियम आयोडाइड ($KI$) के साथ गर्म करने पर आयोडोबेंजीन प्राप्त होती है:

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- + KI \rightarrow C_6H_5I + KCl + N_2\uparrow$$

(iii) p-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन (युग्मन अभिक्रिया): दुर्बल क्षारीय माध्यम ($\text{pH } 9-10$) में हिम-शीतल बेंजीनडाइऐजोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया फीनॉल के साथ कराने पर एक चमकदार नारंगी रंग का एजो रंजक बनता है:

$$C_6H_5N_2^+ Cl^- + C_6H_5OH \xrightarrow{OH^-} C_6H_5-N=N-C_6H_4(OH) + Cl^- + H_2O$$

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा एनिलीन का निर्माण करना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

क्लोरोबेंजीन अनुनाद के कारण थैलिमाइड ऋणायन से $S_N2$ प्रतिस्थापन नहीं करती, अतः एनिलीन इस विधि से कभी नहीं बनाई जा सकती।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

जलीय विलयन में क्षारीयता क्रम को केवल प्रेरणिक प्रभाव के आधार पर $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$ लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जलीय विलयन में विलायक-योजन व त्रिविम बाधा के कारण क्रम मैथिल में $2^\circ > 1^\circ > 3^\circ$ तथा एथिल में $2^\circ > 3^\circ > 1^\circ$ होता है।

ऐमीन: क्षारीय सामर्थ्य, हिंसबर्ग विभेद व डाइऐजोनियम युग्मन

ऐमीनों का क्षारीय स्वभाव • गैसीय: 3° > 2° > 1° > NH₃ • जलीय (CH₃): 2° > 1° > 3° > NH₃ • जलीय (C₂H₅): 2° > 3° > 1° > NH₃ • कारक: +I, H-आबंधन, त्रिविम बाधा • एनिलीन: अनुनाद से दुर्बल क्षार तीन कारकों का संतुलित परिणाम नेम रिएक्शंस व विभेदक परीक्षण • Carbylamine: 1° ऐमीन → R-NC दुर्गंध • Hinsberg (1°): सल्फोनामाइड KOH विलेय • Hinsberg (2°): सल्फोनामाइड KOH अविलेय • Hoffmann: R-CONH₂ → R-NH₂ (-1 C) • Gabriel: केवल 1° एलिफैटिक ऐमीन प्राथमिक ऐमीनों की विशिष्ट पहचान डाइऐजोनियम लवण व एजो रंजक • डाइऐजोटीकरण: 0 - 5°C पर NaNO₂/HCl • Sandmeyer: CuCl/CuBr से हैलोबेंजीन • KI से आयोडोबेंजीन निर्माण • फीनॉल से युग्मन → नारंगी रंजक • एनिलीन से युग्मन → पीला रंजक रंग उद्योग का मूल आधार

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा केवल प्राथमिक एलिफैटिक ऐमीन बनती है; एनिलीन इससे नहीं बन सकती।
मुख्य बिंदु 2
हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण में ऐमाइड से एक कार्बन कम वाला प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु 3
गैसीय अवस्था में क्षारीयता क्रम 3° > 2° > 1° > NH₃ होता है।
मुख्य बिंदु 4
जलीय विलयन में मैथिल ऐमीन का क्रम 2° > 1° > 3° > NH₃ तथा एथिल ऐमीन का क्रम 2° > 3° > 1° > NH₃ होता है।
मुख्य बिंदु 5
एनिलीन में लोन पेयर के अनुनाद विस्थानीकरण के कारण यह अमोनिया से भी अत्यधिक दुर्बल क्षार है।
मुख्य बिंदु 6
कार्बिलऐमीन परीक्षण केवल प्राथमिक ऐमीन (एलिफैटिक व ऐरोमैटिक) देते हैं, जिसमें तीव्र दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड बनता है।
मुख्य बिंदु 7
हिंसबर्ग अभिकर्मक (बेंजीनसल्फोनाइल क्लोराइड) द्वारा 1° ऐमीन का सल्फोनामाइड KOH में विलेय तथा 2° का अविलेय होता है।
मुख्य बिंदु 8
एनिलीन 0-5°C पर NaNO₂ व HCl से क्रिया कर बेंजीनडाइऐजोनियम क्लोराइड (C₆H₅N₂⁺Cl⁻) बनाती है।
मुख्य बिंदु 9
सैन्डमायर अभिक्रिया (CuCl/CuBr/CuCN) द्वारा डाइऐजोनियम से क्लोरो, ब्रोमो व साइनोबेंजीन बनते हैं।
मुख्य बिंदु 10
डाइऐजोनियम लवण फीनॉल के साथ नारंगी एजो रंजक तथा एनिलीन के साथ पीला एजो रंजक बनाते हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
जलीय विलयन में निम्नलिखित में से कौन सा ऐमीन सर्वाधिक क्षारीय है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
2
हॉफमान ब्रोमेमाइड निम्नीकरण अभिक्रिया में प्रोपेनामाइड (CH₃CH₂CONH₂) से कौन सा ऐमीन बनेगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
3
हिंसबर्ग अभिकर्मक (C₆H₅SO₂Cl) के साथ कौन सी ऐमीन कोई अभिक्रिया नहीं दर्शाती?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
4
गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा निम्नलिखित में से किसे नहीं बनाया जा सकता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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