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CBSE • कक्षा XII • Chemistry • अध्याय 10
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

जैव-अणु (Biomolecules)

जैव-अणु (Biomolecules) वे जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जो सजीवों के शरीर का निर्माण करते हैं, उनकी वृद्धि, पोषण, प्रजनन एवं समस्त जैव-रासायनिक प्रक्रमों का संचालन करते हैं। अध्याय में मुख्य रूप से चार प्रमुख जैव-अणुओं—कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल एवं विटामिन का आण्विक एवं संरचनात्मक स्तर पर अध्ययन किया जाता है। कार्बोहाइड्रेटों में ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) की विवृत श्रृंखला (Open Chain) एवं चक्रीय हेमीऐसीटल संरचना (हावर्थ प्रक्षेप सूत्र, $\alpha$-D-ग्लूकोज तथा $\beta$-D-ग्लूकोज), परिवर्ती ध्रुवण घूर्णन (Mutarotation), डाइसैकेराइडों (सुक्रोस, माल्टोस, लैक्टोस) में ग्लाइकोसिडिक आबंध (Glycosidic Linkage) तथा सुक्रोस के जल-अपघटन से उत्पन्न होने वाली अपवृत्त शर्करा (Invert Sugar) का विशद वर्णन है। प्रोटीनों का निर्माण 20 विभिन्न $\alpha$-ऐमीनो अम्लों के पेप्टाइड आबंध ($-CO-NH-$) द्वारा परस्पर जुड़ने से होता है। ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी (Zwitterion) प्रकृति दर्शाते हैं। प्रोटीन की प्राथमिक, द्वितीयक ($\alpha$-हेलिक्स एवं $\beta$-प्लीटेड शीट), तृतीयक एवं चतुष्क संरचनाओं तथा ऊष्मा या अम्ल द्वारा होने वाले प्रोटीन के विकृतीकरण (Denaturation of Proteins) का आण्विक आधार समझाया गया है। न्यूक्लिक अम्लों के अंतर्गत $DNA$ तथा $RNA$ की रासायनिक संरचना (पेन्टोस शर्करा, फॉस्फेट समूह तथा नाइट्रोजनी क्षारक: $A, T, G, C, U$), फॉस्फोडाइएस्टर आबंध, तथा वाटसन-क्रिक का $DNA$ का द्विकुंडलिनी मॉडल (Double Helix) समाहित है। अंत में, जल में विलेय ($B, C$) तथा वसा में विलेय ($A, D, E, K$) विटामिनों के स्रोत एवं हीनताजन्य रोगों (Deficiency Diseases) का सार प्रस्तुत किया गया है।

केवल 4 अक्षरों (A, T, G, C) में लिखा गया आपके पूरे जीवन का 2 मीटर लंबा कोड!

क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर की प्रत्येक सूक्ष्मतम कोशिका (Cell) के नाभिक में लगभग 2 मीटर लंबा $DNA$ अणु सिमटकर बैठा है? और यदि आपके पूरे शरीर के सभी $DNA$ धागों को एक सिरे से जोड़ दिया जाए, तो वह पृथ्वी से सूर्य तक जाकर सैकड़ों बार वापस आ सकता है! इस अविश्वसनीय जैविक कंप्यूटर में आपकी आँखों के रंग, लंबाई और आवाज से लेकर हर गुण का कोड केवल 4 रासायनिक क्षारकों—एडेनिन ($A$), थाइमिन ($T$), ग्वानिन ($G$) और साइटोसिन ($C$) के क्रम में सुरक्षित है! और क्या आप जानते हैं कि जब आप अंडा उबालते हैं, तो तरल जर्दी ठोस क्यों बन जाती है? वह कोई जादू नहीं, बल्कि 'प्रोटीन का विकृतीकरण' (Denaturation) है! निर्जीव रासायनिक अणुओं से मिलकर सजीव चेतना कैसे धड़कती है? आइए समझें 'जैव-अणु' के इस अद्भुत रहस्य को!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में 'जैव-अणु' इकाई से 6 अंकों के सैद्धांतिक एवं संकल्पनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं: 1. ग्लूकोज की रासायनिक संरचना के प्रमाण: $HI$ द्वारा गर्म करने पर $n$-हेक्सेन बनना, ब्रोमीन जल द्वारा ग्लूकोनिक अम्ल, तथा $HNO_3$ द्वारा सैकैरिक अम्ल बनना। 2. ग्लाइकोसिडिक आबंध एवं पेप्टाइड आबंध की परिभाषा व उदाहरण। 3. अपवृत्त शर्करा (Invert Sugar) क्या है? सुक्रोस के जल-अपघटन पर ध्रुवण घूर्णन का चिह्न (+ से -) क्यों बदलता है? 4. ऐमीनो अम्लों की ज्विटर आयन (Zwitterion) संरचना एवं सम-विभव बिंदु (Isoelectric Point)। 5. प्रोटीन का विकृतीकरण (Denaturation): विकृतीकरण में कौन-सी संरचनाएं नष्ट होती हैं और कौन-सी अप्रभावित रहती हैं? 6. $DNA$ तथा $RNA$ में 4 प्रमुख संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अंतर। 7. विटामिनों का वर्गीकरण (वसा में विलेय vs जल में विलेय) तथा उनकी कमी से होने वाले रोग।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कायरल कार्बन एवं प्रकाशिक समावयवता ($D$ एवं $L$ विन्यास)।
  • हाइड्रोजन आबंधन एवं एस्टर/एमाइड आबंध निर्माण।
  • अम्ल-क्षार उदासीनीकरण अभिक्रियाएं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ग्लूकोज एवं फ्रक्टोज की विवृत एवं हावर्थ चक्रीय संरचनाओं का आरेखन करना।
  • अपचायी एवं अनपचायी शर्कराओं में अंतर तथा अपवृत्त शर्करा की अवधारणा स्पष्ट करना।
  • ऐमीनो अम्लों के ज्विटर आयन स्वरूप एवं उभयधर्मी प्रकृति की व्याख्या करना।
  • प्रोटीन की प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक संरचनाओं तथा विकृतीकरण के प्रभाव को समझाना।
  • $DNA$ एवं $RNA$ के रासायनिक संघटन, चारगाफ नियम एवं द्विकुंडलिनी संरचना का निरूपण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. कार्बोहाइड्रेट: ग्लूकोज की संरचन...
2 2. प्रोटीन: ऐमीनो अम्ल, पेप्टाइड आब...
3 3. न्यूक्लिक अम्ल: $DNA$ बनाम $RNA$...
4 4. विटामिन: वर्गीकरण, स्रोत एवं हीन...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. कार्बोहाइड्रेट: ग्लूकोज की संरचना एवं अपवृत्त शर्करा

कार्बोहाइड्रेटों की आधुनिक परिभाषा:

कार्बोहाइड्रेट प्रकाशिक सक्रिय पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड अथवा पॉलिहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं, अथवा वे पदार्थ होते हैं जो जल-अपघटन पर ऐसे एकक देते हैं।

ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) की खुली श्रृंखला संरचना के रासायनिक प्रमाण:

  1. $HI$ के साथ लंबे समय तक गर्म करने पर: $n$-हेक्सेन बनती है, जो सिद्ध करता है कि ग्लूकोज के सभी 6 कार्बन परमाणु एक सीधी असंसाखित श्रृंखला में जुड़े हैं:

$$C_6H_{12}O_6 + HI \xrightarrow{\Delta} CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3 \quad (n\text{-हेक्सेन})$$

  1. हाइड्रॉक्सिलएमीन ($NH_2OH$) तथा $HCN$ से क्रिया: ऑक्सिम तथा सायनोहाइड्रिन बनाता है, जो कार्बोनिल समूह ($>C=O$) की उपस्थिति सिद्ध करता है।
  2. ब्रोमीन जल (दुर्बल ऑक्सीकारक) द्वारा ऑक्सीकरण: केवल 6 कार्बन वाला मोनोकार्बोक्सिलिक अम्ल—ग्लूकोनिक अम्ल बनता है, जो सिद्ध करता है कि कार्बोनिल समूह एक ऐल्डिहाइड समूह ($-CHO$) है।
  3. एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया: ग्लूकोज पेन्टा-एसीटेट बनाता है, जो 5 भिन्न कार्बनों पर 5 हाइड्रॉक्सिल समूहों ($-OH$) की उपस्थिति सिद्ध करता है।
  4. सांद्र $HNO_3$ द्वारा ऑक्सीकरण: डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल सैकैरिक अम्ल ($HOOC-(CHOH)_4-COOH$) बनता है, जो एक प्राथमिक ऐल्कोहॉलिक समूह ($-CH_2OH$) की उपस्थिति सिद्ध करता है।

ग्लूकोज की चक्रीय संरचना एवं हावर्थ प्रक्षेप:

ग्लूकोज $C_1$ के $-CHO$ समूह तथा $C_5$ के $-OH$ समूह के मध्य अंतःआण्विक हेमीऐसीटल बनाकर 6-सदस्यीय चक्रीय वलय (ग्लूकोपाइरानोज) बनाता है।

  • एनोमर (Anomers): $C_1$ (एनोमेरी कार्बन) पर $-OH$ समूह के विन्यास में भिन्नता के कारण दो रूप बनते हैं:
    • $\alpha$-D-(+)-ग्लूकोपाइरानोज: $C_1$ पर $-OH$ नीचे की ओर (हावर्थ में)।
    • $\beta$-D-(+)-ग्लूकोपाइरानोज: $C_1$ पर $-OH$ ऊपर की ओर।
  • परिवर्ती ध्रुवण घूर्णन (Mutarotation): जब $\alpha$-रूप ($+112^\circ$) अथवा $\beta$-रूप ($+19^\circ$) के क्रिस्टलों को जल में घोला जाता है, तो विशिष्ट घूर्णन समय के साथ स्वतः परिवर्तित होकर एक स्थिर साम्यावस्था मान $+52.7^\circ$ पर स्थिर हो जाता है।

अपवृत्त शर्करा (Invert Sugar):

सुक्रोस ($C_{12}H_{22}O_{11}$) दक्षिणावर्ती (Dextrorotatory, $+66.5^\circ$) होता है।

  • जल-अपघटन पर यह समान अणु D-(+)-ग्लूकोज ($+52.7^\circ$) तथा D-(-)-फ्रक्टोज ($-92.4^\circ$) देता है:

$$C_{12}H_{22}O_{11} + H_2O \xrightarrow{H^+} \underset{\text{D-(+)-ग्लूकोज (+52.7°)}}{C_6H_{12}O_6} + \underset{\text{D-(-)-फ्रक्टोज (-92.4°)}}{C_6H_{12}O_6}$$

  • चूँकि फ्रक्टोज का वामावर्ती घूर्णन ($-92.4^\circ$) ग्लूकोज के दक्षिणावर्ती घूर्णन ($+52.7^\circ$) से अधिक शक्तिशाली है, अतः जल-अपघटन के पश्चात समस्त परिणामी मिश्रण वामावर्ती (Laevorotatory) हो जाता है!
  • ध्रुवण घूर्णन का चिह्न दक्षिणावर्ती (+) से वामावर्ती (-) में उलट जाने (Inversion) के कारण इस जल-अपघटित मिश्रण को अपवृत्त शर्करा कहते हैं।

2. प्रोटीन: ऐमीनो अम्ल, पेप्टाइड आबंध एवं विकृतीकरण

ऐमीनो अम्ल एवं ज्विटर आयन (Zwitterion):

ऐमीनो अम्लों में एक ही कार्बन पर क्षारीय ऐमीनो समूह ($-NH_2$) तथा अम्लीय कार्बोक्सिल समूह ($-COOH$) दोनों उपस्थित होते हैं:

$$R-CH(NH_2)-COOH$$

  • ज्विटर आयन रूप: जलीय विलयन में कार्बोक्सिल समूह प्रोटॉन ($H^+$) त्यागता है और ऐमीनो समूह उस प्रोटॉन को ग्रहण कर लेता है। इसके फलस्वरूप एक द्विध्रुवीय आंतरिक लवण बनता है जिस पर धनावेश व ऋणावेश दोनों होते हैं:

$$R-CH(NH_3^+)-COO^- \quad (\text{Zwitterion - विद्युत उदासीन})$$

  • इसी ज्विटर आयन स्वरूप के कारण ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी (Amphoteric) होते हैं (अम्ल व क्षार दोनों से क्रिया करते हैं) तथा उच्च गलनांक वाले क्रिस्टलीय ठोस होते हैं।
  • सम-विभव बिंदु (Isoelectric Point): वह विशिष्ट $pH$ मान जिस पर ऐमीनो अम्ल का ज्विटर आयन विद्युत क्षेत्र में न तो एनोड की ओर और न ही कैथोड की ओर गमन करता है।

पेप्टाइड आबंध (Peptide Linkage):

दो ऐमीनो अम्ल अणुओं के मध्य एक के $-COOH$ समूह तथा दूसरे के $-NH_2$ समूह के बीच जल ($H_2O$) के निष्कासन से बनने वाला एमाइड आबंध पेप्टाइड आबंध ($-CO-NH-$) कहलाता है:

$$H_2N-CH(R_1)-COOH + H_2N-CH(R_2)-COOH \rightarrow H_2N-CH(R_1)-\mathbf{CO-NH}-CH(R_2)-COOH + H_2O$$

प्रोटीन की संरचना के स्तर:

  1. प्राथमिक संरचना (Primary Structure): पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में ऐमीनो अम्लों का विशिष्ट अनुक्रम (Sequence)। यह सहसंयोजी पेप्टाइड आबंधों द्वारा निर्धारित होती है।
  2. द्वितीयक संरचना (Secondary Structure): हाइड्रोजन आबंधन द्वारा पॉलिपेप्टाइड का कुंडलन:
    • $\alpha$-हेलिक्स ($\u0007lpha$-Helix): एक ही श्रृंखला में अंतःआण्विक H-आबंध (जैसे किरेटिन - बाल, ऊन)।
    • $\beta$-प्लीटेड शीट ($\beta$-Pleated Sheet): समानांतर श्रृंखलाओं के मध्य अंतर-आण्विक H-आबंध (जैसे रेशम का फाइब्रोइन)।
  3. तृतीयक संरचना (Tertiary Structure): द्वितीयक संरचना का त्रिविम वलन (Folding), जिससे गोलीय (Globular) तथा रेशेदार (Fibrous) प्रोटीन बनते हैं।
  4. चतुष्क संरचना (Quaternary Structure): दो या अधिक पॉलिपेप्टाइड उप-इकाइयों की स्थानिक व्यवस्था (जैसे हीमोग्लोबिन)।

प्रोटीन का विकृतीकरण (Denaturation of Proteins):

जब किसी प्राकृतिक प्रोटीन को भौतिक परिवर्तनों (ताप में वृद्धि) अथवा रासायनिक परिवर्तनों ($pH$ में परिवर्तन) के अधीन किया जाता है, तो हाइड्रोजन आबंध टूट जाते हैं और कुंडलियां खुल जाती हैं।

  • इसके फलस्वरूप प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता (Biological Activity) खो देता है।
  • अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु: विकृतीकरण के दौरान द्वितीयक ($2^\circ$) एवं तृतीयक ($3^\circ$) संरचनाएं नष्ट हो जाती हैं, किंतु प्राथमिक संरचना (पेप्टाइड आबंधों का क्रम) पूरी तरह अप्रभावित रहती है!
  • दैनिक उदाहरण: (1) अंडे को उबालने पर अंडे की सफेद जर्दी (एल्बुमिन) का स्कंदन होना, (2) दूध से दही का जमना (लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया द्वारा लैक्टिक अम्ल बनने से $pH$ घटना)।

3. न्यूक्लिक अम्ल: $DNA$ बनाम $RNA$ एवं द्विकुंडलिनी मॉडल

न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइडों के बहुलक (Polynucleotides) हैं, जो आनुवंशिक सूचनाओं के भंडारण, संचरण तथा प्रोटीन संश्लेषण के लिए उत्तरदायी हैं।

न्यूक्लियोटाइड के 3 घटक:

  1. पेन्टोस शर्करा: $DNA$ में $\beta$-D-2-डिऑक्सीराइबोज तथा $RNA$ में $\beta$-D-राइबोज शर्करा होती है।
  2. फॉस्फोरिक अम्ल ($H_3PO_4$): शर्करा के $C_5'$ तथा $C_3'$ के मध्य फॉस्फोडाइएस्टर आबंध (Phosphodiester linkage) बनाता है।
  3. नाइट्रोजनी क्षारक:
    • प्यूरीन (Purines): एडेनिन ($A$) तथा ग्वानिन ($G$) [दोनों में उपस्थित]।
    • पिरिमिडीन (Pyrimidines): साइटोसिन ($C$) [दोनों में], थाइमिन ($T$) [केवल DNA में], तथा यूरेसिल ($U$) [केवल RNA में]।

$DNA$ बनाम $RNA$ तुलनात्मक सारणी:

लक्षण $DNA$ (डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) $RNA$ (राइबोन्यूक्लिक अम्ल)
शर्करा $\beta$-D-2-डिऑक्सीराइबोज (Oxygen at C2 missing) $\beta$-D-राइबोज
पिरिमिडीन क्षारक साइटोसिन ($C$) तथा थाइमिन ($T$) साइटोसिन ($C$) तथा यूरेसिल ($U$)
संरचना द्विकुंडलिनी (Double-stranded Helix) एकल रज्जुक (Single-stranded)
मुख्य कार्य आनुवंशिक सूचनाओं का स्थायी संचरण (Heredity) प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण एवं संचालन
चारगाफ नियम लागू होता है ($A = T$ तथा $G \equiv C$) लागू नहीं होता (एकल रज्जुक होने के कारण)

वाटसन एवं क्रिक का $DNA$ द्विकुंडलिनी मॉडल:

  1. $DNA$ अणु दो प्रति-समानांतर (Antiparallel, एक $5' \rightarrow 3'$ तथा दूसरा $3' \rightarrow 5'$) पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बना होता है जो एक केंद्रीय अक्ष के चारों ओर दाईं ओर कुंडलित होती हैं।
  2. शर्करा-फॉस्फेट श्रृंखला बाहर रीढ़ (Backbone) बनाती है और नाइट्रोजनी क्षारक अंदर की ओर व्यवस्थित होते हैं।
  3. दो रज्जुकों के पूरक क्षारक विशिष्ट हाइड्रोजन आबंधों द्वारा जुड़े होते हैं:
    • एडेनिन ($A$) और थाइमिन ($T$) के मध्य 2 हाइड्रोजन आबंध ($A = T$)
    • ग्वानिन ($G$) और साइटोसिन ($C$) के मध्य 3 हाइड्रोजन आबंध ($G \equiv C$)

4. विटामिन: वर्गीकरण, स्रोत एवं हीनताजन्य रोग

विटामिन वे आवश्यक कार्बनिक यौगिक हैं जो हमारे आहार में सूक्ष्म मात्रा में आवश्यक होते हैं, क्योंकि हमारा शरीर अधिकांश विटामिनों का संश्लेषण स्वयं नहीं कर सकता (विटामिन D को छोड़कर)।

विलेयता के आधार पर वर्गीकरण:

  1. वसा में विलेय विटामिन (Fat-Soluble Vitamins - A, D, E, K):
    • ये वसा तथा तेलों में विलेय होते हैं किंतु जल में अविलेय होते हैं।
    • ये यकृत (Liver) तथा वसा ऊतकों (Adipose tissue) में संगृहीत रहते हैं, अतः इनकी अत्यधिक मात्रा हानिकारक (हाइपरविटामिनोसिस) हो सकती है।
  2. जल में विलेय विटामिन (Water-Soluble Vitamins - B-कॉम्प्लेक्स एवं C):
    • ये जल में विलेय होते हैं और मूत्र के साथ शरीर से उत्सर्जित होते रहते हैं।
    • अतः इन्हें नियमित रूप से दैनिक आहार में लेना अनिवार्य है (विटामिन $B_{12}$ अपवाद है जो यकृत में संचित रहता है)।

प्रमुख विटामिनों की सारणी:

विटामिन रासायनिक नाम मुख्य स्रोत हीनताजन्य रोग (Deficiency Disease)
विटामिन A रेटिनॉल गाजर, मक्खन, दूध, मछली का तेल रतौंधी (Night blindness), जीरोफ्थैल्मिया
विटामिन B₁ थायमिन खमीर, दूध, दालें, साबुत अनाज बेरी-बेरी (Beriberi - तंत्रिका तंत्र की दुर्बलता)
विटामिन B₁₂ सायनोकोबालामिन माँस, मछली, अंडा, दूध प्रणाशी रक्ताल्पता (Pernicious Anaemia)
विटामिन C एस्कॉर्बिक अम्ल आँवला, नींबू, संतरा, हरी मिर्च स्कर्वी (Scurvy - मसूड़ों से खून आना)
विटामिन D कैल्सिफेरॉल सूर्य का प्रकाश, मछली यकृत तेल रिकेट्स (Rickets - बच्चों में कमजोर मुड़ी हड्डियां)
विटामिन E टोकोफेरॉल अंकुरित गेहूँ तेल, सूरजमुखी तेल मांसपेशियों की दुर्बलता, जनन क्षमता में कमी
विटामिन K फाइलोक्विनोन हरी पत्तेदार सब्जियां रक्त का थक्का जमने में देरी (रक्तस्राव)

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

चारगाफ नियम (DNA)
[A] = [T] (2 H-आबंध) तथा [G] = [C] (3 H-आबंध); प्यूरीनों की कुल मात्रा = पिरिमिडीनों की कुल मात्रा ([A]+[G] = [T]+[C])।
अपवृत्त शर्करा (Invert Sugar) घूर्णन
सुक्रोस (+66.5°) + H2O -> D-(+)-ग्लूकोज (+52.7°) + D-(-)-फ्रक्टोज (-92.4°); परिणामी मिश्रण = वामावर्ती (-)।
ऐमीनो अम्ल ज्विटर आयन साम्यावस्था
अम्लीय माध्यम (कम pH): R-CH(NH3+)-COOH (धनायन, कैथोड की ओर); क्षारीय माध्यम (उच्च pH): R-CH(NH2)-COO- (ऋणायन, एनोड की ओर); सम-विभव बिंदु: विद्युत उदासीन।
विटामिन विलेयता वर्गीकरण
वसा में विलेय: A, D, E, K (यकृत में संचित); जल में विलेय: B-कॉम्प्लेक्स एवं C (नियमित दैनिक आपूर्ति आवश्यक, मूत्र से निष्कासित)।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
ग्लूकोज की खुली श्रृंखला संरचना के पक्ष में कोई चार रासायनिक प्रमाण समीकरण सहित लिखिए। (CBSE Board 5 Marks Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) की विवृत श्रृंखला संरचना के चार प्रमुख रासायनिक प्रमाण निम्नलिखित हैं:

  1. सभी 6 कार्बनों की सीधी श्रृंखला का प्रमाण: ग्लूकोज को हाइड्रोजन आयोडाइड ($HI$) और लाल फॉस्फोरस के साथ लंबे समय तक गर्म करने पर यह $n$-हेक्सेन बनाता है, जो सिद्ध करता है कि ग्लूकोज के सभी 6 कार्बन परमाणु एक सीधी असंसाखित श्रृंखला में जुड़े हैं:

$$C_6H_{12}O_6 + 14HI \xrightarrow{\text{Red } P, \Delta} CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3 (n\text{-हेक्सेन}) + 7I_2 + 6H_2O$$

  1. कार्बोनिल समूह ($>C=O$) की उपस्थिति का प्रमाण: ग्लूकोज हाइड्रॉक्सिलएमीन ($NH_2OH$) के साथ क्रिया कर ऑक्सिम बनाता है तथा $HCN$ के साथ सायनोहाइड्रिन बनाता है, जो इसमें कार्बोनिल समूह की उपस्थिति सिद्ध करता है:

$$CHO-(CHOH)_4-CH_2OH + NH_2OH \rightarrow CH=N-OH-(CHOH)_4-CH_2OH (\text{ग्लूकोक्सिम}) + H_2O$$

  1. ऐल्डिहाइड समूह ($-CHO$) की पुष्टि: ग्लूकोज ब्रोमीन जल जैसे दुर्बल ऑक्सीकारक द्वारा ऑक्सीकृत होकर समान 6 कार्बन वाला मोनोकार्बोक्सिलिक अम्ल—ग्लूकोनिक अम्ल बनाता है। चूंकि ब्रोमीन जल केवल ऐल्डिहाइड को ऑक्सीकृत करता है (कीटोन को नहीं), अतः यह सिद्ध होता है कि कार्बोनिल समूह एक ऐल्डिहाइड समूह ($-CHO$) है:

$$CHO-(CHOH)_4-CH_2OH + [O] \xrightarrow{Br_2 / H_2O} COOH-(CHOH)_4-CH_2OH (\text{ग्लूकोनिक अम्ल})$$

  1. पाँच हाइड्रॉक्सिल समूहों ($-OH$) की उपस्थिति: ग्लूकोज एसीटिक एनहाइड्राइड के साथ क्रिया कर ग्लूकोज पेन्टा-एसीटेट बनाता है। यह सिद्ध करता है कि ग्लूकोज में पाँच $-OH$ समूह उपस्थित हैं और चूंकि यह एक स्थायी यौगिक है, अतः ये पाँचों $-OH$ समूह पाँच भिन्न कार्बन परमाणुओं से जुड़े हैं:

$$C_6H_{12}O_6 + 5(CH_3CO)_2O \rightarrow \text{ग्लूकोज पेन्टा-एसीटेट} + 5CH_3COOH$$

उदाहरण 2
अपवृत्त शर्करा (Invert Sugar) क्या है? सुक्रोस के जल-अपघटन से बनने वाले उत्पादों के ध्रुवण घूर्णन के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (CBSE Board High-Yield Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: 1. सुक्रोस की मूल प्रकृति: साधारण चीनी या सुक्रोस ($C_{12}H_{22}O_{11}$) एक डाइसैकेराइड है जो प्रकाशिक सक्रिय तथा दक्षिणावर्ती (Dextrorotatory, +) होता है। इसका विशिष्ट घूर्णन मान $+66.5^\circ$ होता है।

2. जल-अपघटन एवं उत्पादों का घूर्णन: तनु खनिज अम्ल या 'इन्वर्टेस' (Invertase) एंजाइम की उपस्थिति में सुक्रोस का जल-अपघटन कराने पर समान मोलर अनुपात में D-(+)-ग्लूकोज तथा D-(-)-फ्रक्टोज का मिश्रण प्राप्त होता है:

$$C_{12}H_{22}O_{11} (\text{सुक्रोस, } +66.5^\circ) + H_2O \xrightarrow{H^+} \underset{\text{D-(+)-ग्लूकोज (+52.7°)}}{C_6H_{12}O_6} + \underset{\text{D-(-)-फ्रक्टोज (-92.4°)}}{C_6H_{12}O_6}$$

3. घूर्णन का व्युत्क्रमण (Inversion): जल-अपघटन के उपरांत बनने वाले D-(-)-फ्रक्टोज का वामावर्ती घूर्णन ($-92.4^\circ$) D-(+)-ग्लूकोज के दक्षिणावर्ती घूर्णन ($+52.7^\circ$) से परिमाण में बहुत अधिक होता है। इसके परिणामस्वरूप जल-अपघटन के पश्चात संपूर्ण मिश्रण वामावर्ती (Laevorotatory, -) हो जाता है।

चूंकि जल-अपघटन के दौरान प्रकाशिक घूर्णन का चिह्न दक्षिणावर्ती (+) से बदलकर वामावर्ती (-) हो जाता है (अर्थात् घूर्णन की दिशा उलट जाती है), अतः इस अभिक्रिया को शर्करा का अपवर्तन (Inversion of Sugar) तथा प्राप्त जल-अपघटित मिश्रण को अपवृत्त शर्करा (Invert Sugar) कहते हैं।

उदाहरण 3
ऐमीनो अम्लों के संदर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए: (i) पेप्टाइड आबंध (Peptide Linkage) (ii) ज्विटर आयन (Zwitterion) (iii) प्रोटीन का विकृतीकरण (Denaturation of Protein)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: (i) पेप्टाइड आबंध: दो या दो से अधिक $\alpha$-ऐमीनो अम्लों के परस्पर जुड़ने पर एक अणु के कार्बोक्सिल समूह ($-COOH$) तथा दूसरे अणु के ऐमीनो समूह ($-NH_2$) के मध्य जल ($H_2O$) के विलोपन से बनने वाला एमाइड आबंध पेप्टाइड आबंध ($-CO-NH-$) कहलाता है। यह प्रोटीन की प्राथमिक संरचना की रीढ़ है।

(ii) ज्विटर आयन: जलीय विलयन में ऐमीनो अम्ल के कार्बोक्सिल समूह से प्रोटॉन ($H^+$) निकलकर ऐमीनो समूह पर स्थानांतरित हो जाता है, जिससे एक ही अणु के भीतर धनावेश ($-NH_3^+$) तथा ऋणावेश ($-COO^-$) दोनों उत्पन्न हो जाते हैं। इस आंतरिक द्विध्रुवीय विद्युत-उदासीन आयन को ज्विटर आयन कहते हैं। इसी कारण ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी व्यवहार दर्शाते हैं।

(iii) प्रोटीन का विकृतीकरण: जब किसी प्राकृतिक प्रोटीन को ऊष्मा (ताप), अम्ल, क्षार अथवा भारी धातु लवणों के संपर्क में लाया जाता है, तो उसकी द्वितीयक ($2^\circ$) एवं तृतीयक ($3^\circ$) संरचनाएं हाइड्रोजन आबंधों के टूटने के कारण विकृत हो जाती हैं और प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता खो देता है। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं (उदा. अंडे को उबालने पर एल्बुमिन का जमना)। विकृतीकरण में प्राथमिक संरचना अपरिवर्तित रहती है।

उदाहरण 4
$DNA$ तथा $RNA$ के मध्य कोई चार प्रमुख संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अंतर लिखिए। (CBSE Board Most Expected Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: $DNA$ तथा $RNA$ में चार प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:

  1. पेन्टोस शर्करा में अंतर: $DNA$ में $\beta$-D-2-डिऑक्सीराइबोज शर्करा होती है (जिसके कार्बन-2 पर ऑक्सीजन परमाणु अनुपस्थित होता है), जबकि $RNA$ में $\beta$-D-राइबोज शर्करा होती है।
  2. पिरिमिडीन नाइट्रोजनी क्षारक में अंतर: $DNA$ में पिरिमिडीन क्षारक के रूप में साइटोसिन ($C$) तथा थाइमिन ($T$) पाए जाते हैं, जबकि $RNA$ में साइटोसिन ($C$) तथा थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल ($U$) पाया जाता है।
  3. आण्विक संरचना (कुंडलनी): $DNA$ दो प्रति-समानांतर पॉलिन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बनी द्विकुंडलिनी (Double Helix) संरचना होती है, जबकि $RNA$ सामान्यतः एक एकल रज्जुक (Single Stranded) अणु होता है।
  4. जैविक कार्य: $DNA$ सजीवों में आनुवंशिक गुणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचाने (Heredity) का कार्य करता है, जबकि $RNA$ का मुख्य कार्य कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण करना है।
उदाहरण 5
विटामिनों का वर्गीकरण उनकी विलेयता के आधार पर कीजिए। निम्नलिखित विटामिनों की कमी से होने वाले रोगों के नाम लिखिए: (i) विटामिन A, (ii) विटामिन C, (iii) विटामिन D, (iv) विटामिन B₁₂।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: विटामिनों का वर्गीकरण:

  1. वसा में विलेय विटामिन: वे विटामिन जो वसा एवं तेलों में घुलनशील होते हैं किंतु जल में अविलेय होते हैं। ये यकृत तथा एडिपोज (वसा) ऊतकों में संगृहीत रहते हैं। उदाहरण: विटामिन A, D, E तथा K।
  2. जल में विलेय विटामिन: वे विटामिन जो जल में घुलनशील होते हैं। ये शरीर में संगृहीत नहीं हो पाते (विटामिन $B_{12}$ अपवाद है) और मूत्र द्वारा उत्सर्जित हो जाते हैं, अतः इन्हें नियमित आहार में लेना आवश्यक है। उदाहरण: विटामिन B-कॉम्प्लेक्स तथा विटामिन C।

हीनताजन्य रोग: (i) विटामिन A की कमी से: रतौंधी (Night blindness) तथा जीरोफ्थैल्मिया (आँख की कॉर्निया का सूखना)। (ii) विटामिन C की कमी से: स्कर्वी (Scurvy) (मसूड़ों से खून आना, घाव देर से भरना)। (iii) विटामिन D की कमी से: रिकेट्स (Rickets) (बच्चों में हड्डियों का मुड़ना व कमजोर होना) तथा बड़ों में ऑस्टियोमलेशिया। (iv) विटामिन B₁₂ की कमी से: प्रणाशी रक्ताल्पता (Pernicious Anaemia) (रक्त में लाल रुधिर कणिकाओं RBC की भारी कमी)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रोटीन के विकृतीकरण में प्राथमिक संरचना को भी नष्ट मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

विकृतीकरण में केवल द्वितीयक ($2^\circ$) और तृतीयक ($3^\circ$) संरचनाएं नष्ट होती हैं; प्राथमिक संरचना (पेप्टाइड आबंधों का क्रम) दृढ़ सहसंयोजी आबंध होने के कारण पूर्णतः सुरक्षित रहती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

DNA में यूरेसिल या RNA में थाइमिन लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

थाइमिन ($T$) केवल DNA में पाया जाता है; RNA में थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल ($U$) उपस्थित होता है।

जैव-अणु: ग्लूकोज चक्रीय संरचना, प्रोटीन विकृतीकरण एवं DNA मॉडल

कार्बोहाइड्रेट एवं ग्लूकोज • ग्लूकोज: C₆H₁₂O₆ (एल्डोहेक्सोस) • α व β एनोमर (हावर्थ चक्रीय वलय) • Mutarotation: +52.7° साम्यावस्था • Invert Sugar: सुक्रोस (+ से - उलट जाना) • ग्लाइकोसिडिक आबंध द्वारा बहुलक सजीवों की प्राथमिक ऊर्जा का स्रोत प्रोटीन एवं विकृतीकरण • α-ऐमीनो अम्ल: ज्विटर आयन (उभयधर्मी) • पेप्टाइड आबंध (-CO-NH-) द्वारा संयोजन • संरचना स्तर: 1°, 2° (हेलिक्स), 3°, 4° • विकृतीकरण: 2° व 3° नष्ट, 1° सुरक्षित • उदाहरण: अंडे का उबलना, दूध से दही शरीर निर्माण एवं एंजाइम क्रियाएं न्यूक्लिक अम्ल व विटामिन • DNA: द्विकुंडलिनी (A=T, G≡C) • RNA: एकल रज्जुक, थाइमिन → यूरेसिल • फॉस्फोडाइएस्टर आबंध • वसा में विलेय: A, D, E, K • जल में विलेय: B, C (स्कर्वी, बेरी-बेरी) आनुवंशिकता एवं स्वास्थ्य का विज्ञान

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
ग्लूकोज HI से गर्म करने पर n-हेक्सेन, ब्रोमीन जल से ग्लूकोनिक अम्ल तथा HNO₃ से सैकैरिक अम्ल बनाता है।
मुख्य बिंदु 2
ग्लूकोज C₁ और C₅ के मध्य अंतःआण्विक हेमीऐसीटल बनाकर α व β एनोमर बनाता है जो म्यूटारोटेशन दर्शाते हैं।
मुख्य बिंदु 3
सुक्रोस के जल-अपघटन से बनने वाले मिश्रण का ध्रुवण घूर्णन + से - हो जाने के कारण इसे अपवृत्त शर्करा कहते हैं।
मुख्य बिंदु 4
ऐमीनो अम्ल ज्विटर आयन आंतरिक लवण बनाकर उभयधर्मी व्यवहार व उच्च गलनांक दर्शाते हैं।
मुख्य बिंदु 5
पेप्टाइड आबंध (-CO-NH-) दो ऐमीनो अम्लों के मध्य जल के निष्कासन से बनता है।
मुख्य बिंदु 6
प्रोटीन के विकृतीकरण में द्वितीयक व तृतीयक संरचनाएं नष्ट होती हैं, किंतु प्राथमिक संरचना अक्षुण्ण रहती है।
मुख्य बिंदु 7
DNA द्विकुंडलिनी में A और T के मध्य 2 हाइड्रोजन आबंध तथा G और C के मध्य 3 हाइड्रोजन आबंध होते हैं।
मुख्य बिंदु 8
DNA में डिऑक्सीराइबोज व थाइमिन तथा RNA में राइबोज व यूरेसिल होता है।
मुख्य बिंदु 9
विटामिन A, D, E, K वसा में विलेय हैं (यकृत में संचित), जबकि B व C जल में विलेय हैं।
मुख्य बिंदु 10
विटामिन C की कमी से स्कर्वी, D से रिकेट्स, A से रतौंधी तथा B₁₂ से प्रणाशी रक्ताल्पता होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
सुक्रोस के जल-अपघटन से प्राप्त मिश्रण को 'अपवृत्त शर्करा' क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
2
प्रोटीन के विकृतीकरण (Denaturation) के दौरान कौन-सी संरचना अप्रभावित रहती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
3
DNA में थाइमिन (T) के साथ 2 हाइड्रोजन आबंध द्वारा कौन सा क्षारक जुड़ता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
4
निम्नलिखित में से कौन सा विटामिन जल में विलेय है और शरीर में संचित नहीं रहता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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