कार्बोहाइड्रेटों की आधुनिक परिभाषा:
कार्बोहाइड्रेट प्रकाशिक सक्रिय पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड अथवा पॉलिहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं, अथवा वे पदार्थ होते हैं जो जल-अपघटन पर ऐसे एकक देते हैं।
ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) की खुली श्रृंखला संरचना के रासायनिक प्रमाण:
- $HI$ के साथ लंबे समय तक गर्म करने पर: $n$-हेक्सेन बनती है, जो सिद्ध करता है कि ग्लूकोज के सभी 6 कार्बन परमाणु एक सीधी असंसाखित श्रृंखला में जुड़े हैं:
$$C_6H_{12}O_6 + HI \xrightarrow{\Delta} CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3 \quad (n\text{-हेक्सेन})$$
- हाइड्रॉक्सिलएमीन ($NH_2OH$) तथा $HCN$ से क्रिया: ऑक्सिम तथा सायनोहाइड्रिन बनाता है, जो कार्बोनिल समूह ($>C=O$) की उपस्थिति सिद्ध करता है।
- ब्रोमीन जल (दुर्बल ऑक्सीकारक) द्वारा ऑक्सीकरण: केवल 6 कार्बन वाला मोनोकार्बोक्सिलिक अम्ल—ग्लूकोनिक अम्ल बनता है, जो सिद्ध करता है कि कार्बोनिल समूह एक ऐल्डिहाइड समूह ($-CHO$) है।
- एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया: ग्लूकोज पेन्टा-एसीटेट बनाता है, जो 5 भिन्न कार्बनों पर 5 हाइड्रॉक्सिल समूहों ($-OH$) की उपस्थिति सिद्ध करता है।
- सांद्र $HNO_3$ द्वारा ऑक्सीकरण: डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल सैकैरिक अम्ल ($HOOC-(CHOH)_4-COOH$) बनता है, जो एक प्राथमिक ऐल्कोहॉलिक समूह ($-CH_2OH$) की उपस्थिति सिद्ध करता है।
ग्लूकोज की चक्रीय संरचना एवं हावर्थ प्रक्षेप:
ग्लूकोज $C_1$ के $-CHO$ समूह तथा $C_5$ के $-OH$ समूह के मध्य अंतःआण्विक हेमीऐसीटल बनाकर 6-सदस्यीय चक्रीय वलय (ग्लूकोपाइरानोज) बनाता है।
- एनोमर (Anomers): $C_1$ (एनोमेरी कार्बन) पर $-OH$ समूह के विन्यास में भिन्नता के कारण दो रूप बनते हैं:
- $\alpha$-D-(+)-ग्लूकोपाइरानोज: $C_1$ पर $-OH$ नीचे की ओर (हावर्थ में)।
- $\beta$-D-(+)-ग्लूकोपाइरानोज: $C_1$ पर $-OH$ ऊपर की ओर।
- परिवर्ती ध्रुवण घूर्णन (Mutarotation): जब $\alpha$-रूप ($+112^\circ$) अथवा $\beta$-रूप ($+19^\circ$) के क्रिस्टलों को जल में घोला जाता है, तो विशिष्ट घूर्णन समय के साथ स्वतः परिवर्तित होकर एक स्थिर साम्यावस्था मान $+52.7^\circ$ पर स्थिर हो जाता है।
अपवृत्त शर्करा (Invert Sugar):
सुक्रोस ($C_{12}H_{22}O_{11}$) दक्षिणावर्ती (Dextrorotatory, $+66.5^\circ$) होता है।
- जल-अपघटन पर यह समान अणु D-(+)-ग्लूकोज ($+52.7^\circ$) तथा D-(-)-फ्रक्टोज ($-92.4^\circ$) देता है:
$$C_{12}H_{22}O_{11} + H_2O \xrightarrow{H^+} \underset{\text{D-(+)-ग्लूकोज (+52.7°)}}{C_6H_{12}O_6} + \underset{\text{D-(-)-फ्रक्टोज (-92.4°)}}{C_6H_{12}O_6}$$
- चूँकि फ्रक्टोज का वामावर्ती घूर्णन ($-92.4^\circ$) ग्लूकोज के दक्षिणावर्ती घूर्णन ($+52.7^\circ$) से अधिक शक्तिशाली है, अतः जल-अपघटन के पश्चात समस्त परिणामी मिश्रण वामावर्ती (Laevorotatory) हो जाता है!
- ध्रुवण घूर्णन का चिह्न दक्षिणावर्ती (+) से वामावर्ती (-) में उलट जाने (Inversion) के कारण इस जल-अपघटित मिश्रण को अपवृत्त शर्करा कहते हैं।