1.1 गैल्वेनिक सेल एवं डेनियल सेल की संरचना
गैल्वेनिक (या वोल्टीय) सेल एक ऐसी युक्ति है जिसमें स्वतःप्रवर्तित रेडॉक्स अभिक्रिया की रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित होती है। इसका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण डेनियल सेल है:
- ऐनोड (ऋणात्मक ध्रुव - Left): जिंक की छड़ $\text{ZnSO}_4$ विलयन में डूबी होती है। यहाँ ऑक्सीकरण होता है:
$$\mathbf{\text{Zn}(s) \longrightarrow \text{Zn}^{2+}(aq) + 2e^-} \quad (\text{ऑक्सीकरण अर्ध-सेल})$$ - कैथोड (धनात्मक ध्रुव - Right): कॉपर की छड़ $\text{CuSO}_4$ विलयन में डूबी होती है। यहाँ अपचयन होता है:
$$\mathbf{\text{Cu}^{2+}(aq) + 2e^- \longrightarrow \text{Cu}(s)} \quad (\text{अपचयन अर्ध-सेल})$$ - संपूर्ण सेल अभिक्रिया: $\mathbf{\text{Zn}(s) + \text{Cu}^{2+}(aq) \longrightarrow \text{Zn}^{2+}(aq) + \text{Cu}(s)}$
- सेल निरूपण: $\mathbf{\text{Zn}(s) \mid \text{Zn}^{2+}(aq) \parallel \text{Cu}^{2+}(aq) \mid \text{Cu}(s)}$
(याद रखने का सूत्र: LOAN = Left, Oxidation, Anode, Negative)
1.2 लवण सेतु (Salt Bridge) के प्रमुख कार्य
- यह दोनों अर्ध-सेल विलयनों के मध्य आंतरिक परिपथ को पूर्ण करता है।
- यह दोनों विलयनों की विद्युत उदासीनता (Electrical Neutrality) को बनाए रखता है। इसमें अक्रिय विद्युत-अपघट्य (जैसे $\text{KCl}, \text{KNO}_3$ या $\text{NH}_4\text{NO}_3$) अगर-अगर जेल में भरा होता है।
- यह द्रव-द्रव संधि विभव (Liquid Junction Potential) को न्यूनतम करता है।