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CBSE • कक्षा XII • Chemistry • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

वैद्युतरसायन (Electrochemistry)

वैद्युतरसायन रासायनिक ऊर्जा तथा विद्युत ऊर्जा के पारस्परिक रूपांतरण और उन स्वतःप्रवर्तित रेडॉक्स अभिक्रियाओं का अध्ययन है जिनसे विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है, तथा गैर-स्वतःप्रवर्तित रासायनिक परिवर्तनों को संपन्न कराने हेतु विद्युत धारा के अनुप्रयोग का विज्ञान है। प्रस्तुत अध्याय में गैल्वेनिक सेल (जैसे डेनियल सेल), मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) एवं विद्युत-रासायनिक श्रेणी का विशद निरूपण किया गया है। किसी भी सांद्रता तथा ताप पर इलेक्ट्रोड व सेल विभव के यथार्थ परिकलन हेतु नर्नस्ट समीकरण ($E_{\text{cell}} = E^\circ - \frac{0.0591}{n}\log Q$), साम्य स्थिरांक ($K_c$) एवं गिब्स मुक्त ऊर्जा ($\Delta G^\circ = -nFE^\circ$) के अंतर्संबंधों का गहन गणितीय अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। विद्युत-अपघटनी चालकता खंड में प्रतिरोध, विशिष्ट चालकता ($\kappa$), सेल स्थिरांक ($G^*$) एवं मोलर चालकता ($\Lambda_m$) पर तनुता का प्रभाव स्पष्ट किया गया है—विशेषकर यह संकल्पना कि तनुता बढ़ाने पर प्रति एकांक आयतन आयनों की संख्या घटने के कारण $\kappa$ घटती है जबकि $\Lambda_m$ बढ़ती है। दुर्बल विद्युत-अपघट्यों की सीमांत मोलर चालकता ($\Lambda_m^\circ$) तथा वियोजन की मात्रा ($\alpha = \Lambda_m / \Lambda_m^\circ$) ज्ञात करने हेतु कोलराउश का नियम प्रतिपादित किया गया है। अंत में, फैराडे के वैद्युत-अपघटन के नियम ($w = Z I t$), व्यावसायिक बैटरियां (लेड संचायक सेल की चार्जिंग/डिस्चार्जिंग), भविष्य के ऊर्जा स्रोत $\text{H}_2-\text{O}_2$ ईंधन सेल तथा लोहे में जंग लगने की वैद्युतरासायनिक क्रियाविधि व संक्षारण निवारण की विधियों का संपूर्ण बोर्ड-उन्मुख संकलन किया गया है।

आपकी जेब में रखा स्मार्टफोन और समुद्र में तैरते विशालकाय लोहे के जहाज कैसे जीवित रहते हैं?

जब आप अपने फोन को चार्जर में लगाते हैं, तो आप वास्तव में फोन की लिथियम-आयन बैटरी में रासायनिक ऊर्जा को जबरन विपरीत दिशा में धकेल रहे होते हैं—और जब चार्जर हटाते हैं, तो वही रासायनिक अभिक्रिया स्वतः होकर विद्युत धारा का प्रवाह शुरू कर देती है! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि समुद्र के खारे पानी में तैरते हजारों टन वजनी लोहे के जहाजों को जंग खाकर डूबने से कौन बचाता है? जहाज की पेंदी में जस्ते (Zinc) या मैग्नीशियम के छोटे-छोटे टुकड़े वेल्ड कर दिए जाते हैं। लोहा अपनी रक्षा के लिए इन 'बलिदानी ऐनोडों' (Sacrificial Anodes) को पहले संक्षारित होने देता है! यह सब कुछ नियंत्रित होता है वैद्युतरसायन के एक सरल सिद्धांत से—मानक अपचयन विभव ($E^\circ$)! आइए जानें इस क्रांतिकारी विज्ञान को।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान बोर्ड परीक्षा में 'वैद्युतरसायन' 8 अंकों का सर्वाधिक अधिभार वाला अध्याय है। नर्नस्ट समीकरण पर आधारित सेल विभव ($E_{\text{cell}}$) व $\Delta G^\circ$ के 3-अंकीय व 5-अंकीय आंकिक प्रश्न, विशिष्ट चालकता ($\kappa$) एवं मोलर चालकता ($\Lambda_m$) पर तनुता के प्रभाव की सैद्धांतिक व्याख्या, कोलराउश का नियम एवं स्वतंत्र आयनों के अभिगमन के अनुप्रयोग (जैसे $\text{CH}_3\text{COOH}$ का $\Lambda_m^\circ$ व $K_a$ निकालना), फैराडे के प्रथम नियम पर निक्षेपित धातु के द्रव्यमान की गणना, तथा लेड-स्टोरेज बैटरी की आवेशन/निरावेशन अभिक्रियाएं एवं $\text{H}_2-\text{O}_2$ ईंधन सेल का महत्व प्रतिवर्ष परीक्षा में अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • रेडॉक्स अभिक्रियाएं (ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन त्याग, अपचयन = इलेक्ट्रॉन ग्रहण)।
  • ओम का नियम ($V = IR$) एवं विद्युत धारा ($I = q/t$)।
  • गिब्स मुक्त ऊर्जा एवं स्वतःप्रवर्तिता की शर्त ($\Delta G < 0$)।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • डेनियल सेल का प्रतीक निरूपण करना तथा ऐनोड, कैथोड व लवण सेतु (Salt Bridge) के कार्यों की व्याख्या करना।
  • नर्नस्ट समीकरण का उपयोग कर विभिन्न सांद्रताओं पर सेल विभव ($E_{\text{cell}}$), साम्य स्थिरांक ($K_c$) तथा $\Delta G^\circ$ की गणना करना।
  • विशिष्ट चालकता एवं मोलर चालकता पर तनुता के प्रभाव को आयनों की संख्या व गतिशीलता के आधार पर स्पष्ट करना।
  • कोलराउश के नियम द्वारा दुर्बल विद्युत-अपघट्यों के सीमांत मानों एवं वियोजन की मात्रा ($\alpha$) का परिकलन करना।
  • फैराडे के विद्युत-अपघटन नियमों, लेड संचायक बैटरी के सेल समीकरणों एवं $\text{H}_2-\text{O}_2$ ईंधन सेल की कार्यप्रणाली का निरूपण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. गैल्वेनिक सेल, इलेक्ट्रोड विभव ए...
2 2. नर्नस्ट समीकरण एवं ऊष्मागतिकीय स...
3 3. वैद्युत-अपघटनी चालकता एवं कोलराउ...
4 4. फैराडे के नियम, व्यावसायिक सेल ए...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. गैल्वेनिक सेल, इलेक्ट्रोड विभव एवं डेनियल सेल

1.1 गैल्वेनिक सेल एवं डेनियल सेल की संरचना

गैल्वेनिक (या वोल्टीय) सेल एक ऐसी युक्ति है जिसमें स्वतःप्रवर्तित रेडॉक्स अभिक्रिया की रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित होती है। इसका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण डेनियल सेल है:

  • ऐनोड (ऋणात्मक ध्रुव - Left): जिंक की छड़ $\text{ZnSO}_4$ विलयन में डूबी होती है। यहाँ ऑक्सीकरण होता है:
    $$\mathbf{\text{Zn}(s) \longrightarrow \text{Zn}^{2+}(aq) + 2e^-} \quad (\text{ऑक्सीकरण अर्ध-सेल})$$
  • कैथोड (धनात्मक ध्रुव - Right): कॉपर की छड़ $\text{CuSO}_4$ विलयन में डूबी होती है। यहाँ अपचयन होता है:
    $$\mathbf{\text{Cu}^{2+}(aq) + 2e^- \longrightarrow \text{Cu}(s)} \quad (\text{अपचयन अर्ध-सेल})$$
  • संपूर्ण सेल अभिक्रिया: $\mathbf{\text{Zn}(s) + \text{Cu}^{2+}(aq) \longrightarrow \text{Zn}^{2+}(aq) + \text{Cu}(s)}$
  • सेल निरूपण: $\mathbf{\text{Zn}(s) \mid \text{Zn}^{2+}(aq) \parallel \text{Cu}^{2+}(aq) \mid \text{Cu}(s)}$
    (याद रखने का सूत्र: LOAN = Left, Oxidation, Anode, Negative)

1.2 लवण सेतु (Salt Bridge) के प्रमुख कार्य

  1. यह दोनों अर्ध-सेल विलयनों के मध्य आंतरिक परिपथ को पूर्ण करता है।
  2. यह दोनों विलयनों की विद्युत उदासीनता (Electrical Neutrality) को बनाए रखता है। इसमें अक्रिय विद्युत-अपघट्य (जैसे $\text{KCl}, \text{KNO}_3$ या $\text{NH}_4\text{NO}_3$) अगर-अगर जेल में भरा होता है।
  3. यह द्रव-द्रव संधि विभव (Liquid Junction Potential) को न्यूनतम करता है।

2. नर्नस्ट समीकरण एवं ऊष्मागतिकीय संबंध

2.1 मानक इलेक्ट्रोड विभव एवं नर्नस्ट समीकरण

मानक परिस्थितियों ($298\text{ K}, 1\text{ bar}$ दाब, $1\text{ M}$ सांद्रता) पर सेल विभव:
$$\mathbf{E_{\text{cell}}^\circ = E_{\text{cathode}}^\circ - E_{\text{anode}}^\circ = E_{\text{Right}}^\circ - E_{\text{Left}}^\circ}$$डेनियल सेल हेतु: $E_{\text{cell}}^\circ = 0.34\text{ V} - (-0.76\text{ V}) = \mathbf{1.10\text{ V}}$।

किसी भी अन्य सांद्रता पर इलेक्ट्रोड एवं सेल विभव ज्ञात करने हेतु नर्नस्ट समीकरण (Nernst Equation) प्रयुक्त होता है:
सामान्य अभिक्रिया हेतु: $aA + bB \xrightarrow{n e^-} cC + dD$
$$E_{\text{cell}} = E_{\text{cell}}^\circ - \frac{RT}{nF} \ln Q = E_{\text{cell}}^\circ - \frac{2.303 RT}{nF} \log_{10} Q$$
कमरे के ताप $T = 298\text{ K}$ पर ($R=8.314\text{ J K}^{-1}\text{mol}^{-1}, F=96487\text{ C mol}^{-1}$):

$$\mathbf{E_{\text{cell}} = E_{\text{cell}}^\circ - \frac{0.0591}{n} \log_{10} \frac{[C]^c [D]^d}{[A]^a [B]^b}}$$
जहाँ $n$ = अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों के मोलों की संख्या है।

2.2 साम्य स्थिरांक ($K_c$) एवं गिब्स मुक्त ऊर्जा ($\Delta G^\circ$) से संबंध

  1. साम्यावस्था पर: $E_{\text{cell}} = 0$ तथा $Q = K_c$:
    $$0 = E_{\text{cell}}^\circ - \frac{0.0591}{n} \log K_c \implies \mathbf{E_{\text{cell}}^\circ = \frac{0.0591}{n} \log_{10} K_c} \implies \mathbf{\log_{10} K_c = \frac{n E_{\text{cell}}^\circ}{0.0591}}$$
  2. गिब्स ऊर्जा परिवर्तन ($\Delta G$):
    सेल द्वारा किया गया वैद्युत कार्य $= n F E_{\text{cell}}$ = मुक्त ऊर्जा में कमी ($-\Delta G$):
    $$\mathbf{\Delta G = -n F E_{\text{cell}}} \quad \text{तथा मानक अवस्था में:} \quad \mathbf{\Delta G^\circ = -n F E_{\text{cell}}^\circ}$$स्वतःप्रवर्तिता की शर्त: सेल अभिक्रिया स्वतः होने के लिए $E_{\text{cell}} > 0$ तथा $\Delta G < 0$ होना अनिवार्य है।

3. वैद्युत-अपघटनी चालकता एवं कोलराउश का नियम

3.1 चालकता की मूलभूत परिभाषाएँ

  • विशिष्ट चालकता या चालकता (Conductivity - $\kappa$): $1\text{ cm}^3$ ($1\text{ m}^3$) विलयन की चालकता विशिष्ट चालकता कहलाती है:
    $$\kappa = \frac{1}{\rho} = \frac{1}{R} \cdot \frac{l}{A} = G \cdot G^* \quad [\text{इकाई: }\text{S cm}^{-1} \text{ या } \Omega^{-1}\text{cm}^{-1}]$$
    जहाँ $G^* = l/A$ को सेल स्थिरांक (Cell Constant) कहते हैं (इकाई: $\text{cm}^{-1}$)।
  • मोलर चालकता (Molar Conductivity - $\Lambda_m$): वह चालकता जो $1\text{ मोल}$ विद्युत-अपघट्य युक्त विलयन द्वारा उत्पन्न की जाती है जब इलेक्ट्रोड $1\text{ cm}$ दूरी पर हों:
    $$\mathbf{\Lambda_m = \frac{\kappa \times 1000}{M}} \quad [\text{इकाई: }\text{S cm}^2 \text{ mol}^{-1}]$$

3.2 तनुता का चालकता पर प्रभाव (सर्वाधिक महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न)

1. विशिष्ट चालकता ($\kappa$) तनुता बढ़ाने पर घटती है: क्योंकि तनु करने पर प्रति एकांक आयतन ($1\text{ mL}$) में विद्युत धारा ले जाने वाले आयनों की संख्या घट जाती है।

2. मोलर चालकता ($\Lambda_m$) तनुता बढ़ाने पर बढ़ती है: क्योंकि तनुता बढ़ाने पर उस कुल आयतन ($V$) में अत्यधिक वृद्धि होती है जिसमें $1\text{ मोल}$ विद्युत-अपघट्य उपस्थित होता है ($\Lambda_m = \kappa \times V$); आयतन में होने वाली वृद्धि $\kappa$ में होने वाली कमी से कहीं अधिक प्रभावी होती है।

3.3 कोलराउश का नियम (Kohlrausch's Law)

कथन: अनंत तनुता पर (जब वियोजन पूर्ण हो तथा अंतरा-आयनिक आकर्षण नगण्य हो), किसी विद्युत-अपघट्य की सीमांत मोलर चालकता ($\Lambda_m^\circ$) उसके धनायनों तथा ऋणायनों की व्यक्तिगत सीमांत मोलर चालकताओं के योग के बराबर होती है:

$$\mathbf{\Lambda_m^\circ = \nu_+ \lambda_+^\circ + \nu_- \lambda_-^\circ}$$उदा. $\Lambda_m^\circ(\text{NaCl}) = \lambda^\circ(\text{Na}^+) + \lambda^\circ(\text{Cl}^-)$
$\Lambda_m^\circ(\text{MgCl}_2) = \lambda^\circ(\text{Mg}^{2+}) + 2\lambda^\circ(\text{Cl}^-)$

कोलराउश नियम के प्रमुख अनुप्रयोग:
  1. दुर्बल विद्युत-अपघट्य की $\Lambda_m^\circ$ का परिकलन: दुर्बल अपघट्य जैसे $\text{CH}_3\text{COOH}$ का मान सीधे ग्राफ से नहीं मिल सकता। प्रबल अपघट्यों के मान जोड़-घटाकर इसे ज्ञात किया जाता है:
    $$\Lambda_m^\circ(\text{CH}_3\text{COOH}) = \Lambda_m^\circ(\text{CH}_3\text{COONa}) + \Lambda_m^\circ(\text{HCl}) - \Lambda_m^\circ(\text{NaCl})$$
  2. वियोजन की मात्रा ($\alpha$) ज्ञात करना: $\mathbf{\alpha = \frac{\Lambda_m}{\Lambda_m^\circ}}$
  3. वियोजन स्थिरांक ($K_a$) ज्ञात करना: $\mathbf{K_a = \frac{c \alpha^2}{1 - \alpha} = \frac{c (\Lambda_m / \Lambda_m^\circ)^2}{1 - (\Lambda_m / \Lambda_m^\circ)}}$

4. फैराडे के नियम, व्यावसायिक सेल एवं ईंधन सेल

4.1 फैराडे के वैद्युत-अपघटन के नियम

  • प्रथम नियम: वैद्युत-अपघटन में किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त या निक्षेपित पदार्थ का द्रव्यमान ($w$) प्रवाहित विद्युत आवेश ($Q$) के समानुपाती होता है:
    $$w \propto Q \implies \mathbf{w = Z \cdot Q = Z \cdot I \cdot t}$$
    जहाँ $Z$ = वैद्युतरासायनिक तुल्यांक (Electrochemical Equivalent); $Z = \frac{E}{96500} = \frac{M}{n \times 96500}$।
    अतः $\mathbf{w = \frac{M \cdot I \cdot t}{n \times 96500}}$ ($1\text{ Faraday} = 96487 \approx 96500\text{ C}$ = $1\text{ मोल } e^-$ का आवेश)।
  • द्वितीय नियम: यदि श्रेणीक्रम में जुड़े विभिन्न अपघट्यों में समान विद्युत मात्रा प्रवाहित की जाए, तो मुक्त पदार्थों के द्रव्यमान उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों ($E$) के समानुपाती होते हैं: $\mathbf{\frac{w_1}{w_2} = \frac{E_1}{E_2}}$।

4.2 बैटरियां (व्यावसायिक सेल)

सेल का प्रकारऐनोड व कैथोडसेल अभिक्रिया / मुख्य बिंदु
शुष्क सेल (Dry Cell / लेक्लांशी)ऐनोड: जस्ते का पात्र ($\text{Zn}$)
कैथोड: कार्बन (ग्रेफाइट) छड़ $\text{MnO}_2 + \text{C}$ से घिरी
विभव $\approx 1.5\text{ V}$; यह प्राथमिक सेल है (पुनः चार्ज नहीं हो सकता)।
लेड संचायक बैटरी (Lead Storage Battery)ऐनोड: लेड ($\text{Pb}$)
कैथोड: $\text{PbO}_2$ की पट्टिका
अपघट्य: $38\%\text{ H}_2\text{SO}_4$
निरावेशन (Discharging):
ऐनोड: $\text{Pb} + \text{SO}_4^{2-} \to \text{PbSO}_4 + 2e^-$
कैथोड: $\text{PbO}_2 + \text{SO}_4^{2-} + 4\text{H}^+ + 2e^- \to \text{PbSO}_4 + 2\text{H}_2\text{O}$
कुल: $\mathbf{\text{Pb} + \text{PbO}_2 + 2\text{H}_2\text{SO}_4 \to 2\text{PbSO}_4 + 2\text{H}_2\text{O}}$
आवेशन (Charging): बाह्य स्रोत जोड़ने पर यह अभिक्रिया बिल्कुल विपरीत हो जाती है।
$\text{H}_2-\text{O}_2$ ईंधन सेल (Fuel Cell)ऐनोड: $\text{H}_2(g)$ पोरस कार्बन इलेक्ट्रोड
कैथोड: $\text{O}_2(g)$ पोरस कार्बन इलेक्ट्रोड
अपघट्य: सान्द्र जलीय $\text{KOH}$
कुल अभिक्रिया: $\mathbf{2\text{H}_2(g) + \text{O}_2(g) \to 2\text{H}_2\text{O}(l)}$
लाभ: उच्च दक्षता ($70\%$), प्रदूषण मुक्त, निरंतर विद्युत आपूर्ति, अपोलो अंतरिक्ष यान में प्रयुक्त।

4.3 संक्षारण (Corrosion) - लोहे पर जंग लगना

संक्षारण एक वैद्युतरासायनिक परिघटना है। लोहे की सतह पर अशुद्ध स्थान ऐनोड का कार्य करता है जहाँ लोहा ऑक्सीकृत होता है:
ऐनोड: $2\text{Fe}(s) \longrightarrow 2\text{Fe}^{2+} + 4e^-$ ($E^\circ = -0.44\text{ V}$)
कैथोड: $\text{O}_2(g) + 4\text{H}^+ + 4e^- \longrightarrow 2\text{H}_2\text{O}$ ($E^\circ = 1.23\text{ V}$)
$\text{Fe}^{2+}$ आयन वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा जल-योजित फेरिक ऑक्साइड में बदल जाते हैं जिसे जंग (Rust - $\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$) कहते हैं।
रोकथाम: गैल्वनीकरण (जिंक की परत चढ़ाना), उत्सर्ग कैथोडिक रक्षण (मैग्नीशियम या जिंक ब्लॉक जोड़ना)।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

मानक सेल विभव E°cell
$$E_{\text{cell}}^\circ = E_{\text{cathode}}^\circ - E_{\text{anode}}^\circ = E_{\text{Right}}^\circ - E_{\text{Left}}^\circ$$
नर्नस्ट समीकरण (298 K)
E_{cell} = E_{cell}^ - {0.0591}{n} _{10} {[उत्पाद]}{[अभिकारक]}
साम्य स्थिरांक Kc संबंध
$$\log_{10} K_c = \frac{n \cdot E_{\text{cell}}^\circ}{0.0591}$$
मानक गिब्स मुक्त ऊर्जा ΔG°
$$\Delta G^\circ = -n F E_{\text{cell}}^\circ \quad (F = 96500\text{ C mol}^{-1})$$
विशिष्ट चालकता κ
= {1}{R} · {l}{A} = G · G^* (G^* = सेल स्थिरांक)
मोलर चालकता Λm
$$\Lambda_m = \frac{\kappa \times 1000}{M} \quad [\text{S cm}^2 \text{ mol}^{-1}]$$
कोलराउश का नियम
$$\Lambda_m^\circ = \nu_+ \lambda_+^\circ + \nu_- \lambda_-^\circ$$
वियोजन की मात्रा α
$$\alpha = \frac{\Lambda_m}{\Lambda_m^\circ}$$
वियोजन स्थिरांक Ka
$$K_a = \frac{c \alpha^2}{1 - \alpha} = \frac{c (\Lambda_m)^2}{\Lambda_m^\circ (\Lambda_m^\circ - \Lambda_m)}$$
फैराडे का प्रथम नियम
$$w = Z \cdot I \cdot t = \frac{M \cdot I \cdot t}{n \times 96500}$$
फैराडे का द्वितीय नियम
$$\frac{w_1}{w_2} = \frac{E_1}{E_2}$$
जंग का रासायनिक सूत्र
Fe_2O_3 · xH_2O (जल-योजित फेरिक ऑक्साइड)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
निम्नलिखित सेल के $298\text{ K}$ पर विद्युत वाहक बल (EMF) की गणना कीजिए:
$\text{Mg}(s) \mid \text{Mg}^{2+}(0.001\text{ M}) \parallel \text{Cu}^{2+}(0.0001\text{ M}) \mid \text{Cu}(s)$
[दिया है: $E^\circ(\text{Mg}^{2+}/\text{Mg}) = -2.37\text{ V}$, $E^\circ(\text{Cu}^{2+}/\text{Cu}) = +0.34\text{ V}$]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. सेल अभिक्रिया एवं $n$ का मान:
ऐनोड: $\text{Mg}(s) \to \text{Mg}^{2+}(aq) + 2e^-$
कैथोड: $\text{Cu}^{2+}(aq) + 2e^- \to \text{Cu}(s)$
कुल अभिक्रिया: $\text{Mg}(s) + \text{Cu}^{2+}(aq) \to \text{Mg}^{2+}(aq) + \text{Cu}(s)$
स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $n = 2$。

2. मानक सेल विभव ($E_{\text{cell}}^\circ$) की गणना:
$$E_{\text{cell}}^\circ = E_{\text{cathode}}^\circ - E_{\text{anode}}^\circ = 0.34\text{ V} - (-2.37\text{ V}) = \mathbf{2.71\text{ V}}$$
3. नर्नस्ट समीकरण का अनुप्रयोग:
$$E_{\text{cell}} = E_{\text{cell}}^\circ - \frac{0.0591}{n} \log_{10} \frac{[\text{Mg}^{2+}]}{[\text{Cu}^{2+}]}$$
$$E_{\text{cell}} = 2.71 - \frac{0.0591}{2} \log_{10} \left(\frac{10^{-3}}{10^{-4}}\right)$$
$$E_{\text{cell}} = 2.71 - 0.02955 \log_{10}(10) = 2.71 - 0.02955(1) = \mathbf{2.68\text{ V}}$$
उत्तर: सेल का EMF $\mathbf{2.68\text{ V}}$ है।
उदाहरण 2
एक सेल जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है:
$2\text{Fe}^{3+}(aq) + 2\text{I}^-(aq) \longrightarrow 2\text{Fe}^{2+}(aq) + \text{I}_2(s)$
का $298\text{ K}$ ताप पर $E_{\text{cell}}^\circ = 0.236\text{ V}$ है। सेल अभिक्रिया की मानक गिब्स ऊर्जा ($\Delta_r G^\circ$) तथा साम्य स्थिरांक ($K_c$) का परिकलन कीजिए। [$1\text{ F} = 96500\text{ C mol}^{-1}$]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1. अभिक्रिया में $n$ का निर्धारण:
$2\text{Fe}^{3+} + 2e^- \to 2\text{Fe}^{2+}$ तथा $2\text{I}^- \to \text{I}_2 + 2e^-$
अतः $n = 2$。

2. मानक गिब्स मुक्त ऊर्जा ($\Delta_r G^\circ$):
$$\Delta_r G^\circ = -n F E_{\text{cell}}^\circ = -2 \times 96500 \times 0.236 = -45548\text{ J mol}^{-1} = \mathbf{-45.55\text{ kJ mol}^{-1}}$$
3. साम्य स्थिरांक ($K_c$) की गणना:
$$\log_{10} K_c = \frac{n E_{\text{cell}}^\circ}{0.0591} = \frac{2 \times 0.236}{0.0591} = \frac{0.472}{0.0591} = 7.9864$$
$$K_c = \text{antilog}(7.9864) = \mathbf{9.69 \times 10^7}$$
उत्तर: $\Delta_r G^\circ = \mathbf{-45.55\text{ kJ mol}^{-1}}$ तथा $K_c = \mathbf{9.69 \times 10^7}$।
उदाहरण 3
$0.05\text{ mol L}^{-1} \text{ NaOH}$ विलयन के कॉलम का विद्युत प्रतिरोध $5.55 \times 10^3\text{ }\Omega$ है। इसका व्यास $1\text{ cm}$ एवं लंबाई $50\text{ cm}$ है। इसकी प्रतिरोधकता, चालकता तथा मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
सांद्रता $M = 0.05\text{ mol L}^{-1}$
त्रिज्या $r = \frac{d}{2} = \frac{1}{2} = 0.5\text{ cm}$
अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $A = \pi r^2 = 3.1416 \times (0.5)^2 = 0.7854\text{ cm}^2$
लंबाई $l = 50\text{ cm}$, प्रतिरोध $R = 5.55 \times 10^3\text{ }\Omega$

1. प्रतिरोधकता ($\rho$):
$$\rho = \frac{R \cdot A}{l} = \frac{5.55 \times 10^3 \times 0.7854}{50} = \mathbf{87.18\text{ }\Omega\text{ cm}}$$
2. विशिष्ट चालकता ($\kappa$):
$$\kappa = \frac{1}{\rho} = \frac{1}{87.18} = \mathbf{0.01147\text{ S cm}^{-1} \text{ (या } 1.147 \times 10^{-2}\text{ S cm}^{-1})}$$
3. मोलर चालकता ($\Lambda_m$):
$$\Lambda_m = \frac{\kappa \times 1000}{M} = \frac{0.01147 \times 1000}{0.05} = \mathbf{229.4\text{ S cm}^2\text{ mol}^{-1}}$$
उदाहरण 4
अनंत तनुता पर $\text{NaCl}, \text{HCl}$ तथा $\text{CH}_3\text{COONa}$ के लिए सीमांत मोलर चालकताएँ क्रमशः $126.4, 425.9$ तथा $91.0\text{ S cm}^2\text{ mol}^{-1}$ हैं। ऐसीटिक अम्ल ($\text{CH}_3\text{COOH}$) के लिए $\Lambda_m^\circ$ का परिकलन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
कोलराउश के नियमानुसार:
$$\Lambda_m^\circ(\text{CH}_3\text{COOH}) = \lambda^\circ(\text{CH}_3\text{COO}^-) + \lambda^\circ(\text{H}^+)$$
दिए गए मानों से:
(1) $\Lambda_m^\circ(\text{CH}_3\text{COONa}) = \lambda^\circ(\text{CH}_3\text{COO}^-) + \lambda^\circ(\text{Na}^+) = 91.0$
(2) $\Lambda_m^\circ(\text{HCl}) = \lambda^\circ(\text{H}^+) + \lambda^\circ(\text{Cl}^-) = 425.9$
(3) $\Lambda_m^\circ(\text{NaCl}) = \lambda^\circ(\text{Na}^+) + \lambda^\circ(\text{Cl}^-) = 126.4$

समीकरण (1) और (2) को जोड़कर समीकरण (3) घटाने पर:
$$\Lambda_m^\circ(\text{CH}_3\text{COOH}) = \Lambda_m^\circ(\text{CH}_3\text{COONa}) + \Lambda_m^\circ(\text{HCl}) - \Lambda_m^\circ(\text{NaCl})$$
$$\Lambda_m^\circ(\text{CH}_3\text{COOH}) = 91.0 + 425.9 - 126.4 = 516.9 - 126.4 = \mathbf{390.5\text{ S cm}^2\text{ mol}^{-1}}$$
उत्तर: ऐसीटिक अम्ल के लिए सीमांत मोलर चालकता $\mathbf{390.5\text{ S cm}^2\text{ mol}^{-1}}$ है।
उदाहरण 5
कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के विलयन को $1.5\text{ A}$ की धारा से $10\text{ मिनट}$ तक वैद्युत-अपघटित किया गया। कैथोड पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान क्या होगा? [$\text{Cu}$ का मोलर द्रव्यमान $= 63.5\text{ g mol}^{-1}$]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
दिया है:
धारा $I = 1.5\text{ A}$
समय $t = 10\text{ मिनट} = 10 \times 60 = 600\text{ सेकंड}$
प्रवाहित कुल आवेश $Q = I \times t = 1.5 \times 600 = 900\text{ C}$

इलेक्ट्रोड अभिक्रिया:
$$\text{Cu}^{2+} + 2e^- \longrightarrow \text{Cu}(s)$$
$1\text{ मोल Cu } (63.5\text{ g})$ निक्षेपित करने हेतु आवश्यक आवेश $= 2 \times 96500\text{ C} = 193000\text{ C}$。

निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान ($w$):
$$w = \frac{M \times Q}{n \times 96500} = \frac{63.5 \times 900}{2 \times 96500} = \frac{57150}{193000} = \mathbf{0.296\text{ g}}$$
उत्तर: कैथोड पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान $\mathbf{0.296\text{ g}}$ है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नर्नस्ट समीकरण में ऐनोड और कैथोड के आयनों के अनुपात को उल्टा लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नर्नस्ट समीकरण में $\log$ के आगे सदैव $\frac{[\text{उत्पाद}]}{[\text{अभिकारक}]}$ (अर्थात $\frac{[\text{ऐनोड आयन}]}{[\text{कैथोड आयन}]}$) लिखा जाता है। ठोस पदार्थों की सांद्रता को 1 माना जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

तनुता बढ़ाने पर विशिष्ट चालकता ($\kappa$) और मोलर चालकता ($\Lambda_m$) दोनों को बढ़ता मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

तनुता बढ़ाने पर प्रति $\text{cm}^3$ आयनों की संख्या कम होने के कारण विशिष्ट चालकता ($\kappa$) सदैव घटती है, जबकि मोलर चालकता ($\Lambda_m$) सदैव बढ़ती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

फैराडे के नियम में समय को मिनट या घंटे में सीधे गुणा कर देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

$Q = I \times t$ सूत्र में समय ($t$) को सदैव सेकंड में परिवर्तित करना अनिवार्य है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मानक सेल विभव सूत्र में दोनों विभवों को ऑक्सीकरण विभव ले लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

IUPAC परिपाटी अनुसार सभी इलेक्ट्रोड विभव अपचयन विभव होते हैं, अतः $E_{\text{cell}}^\circ = E_{\text{cathode}}^\circ - E_{\text{anode}}^\circ$ (Right minus Left) का ही प्रयोग करें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

लवण सेतु में किसी भी लवण को प्रयुक्त मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

लवण सेतु में केवल ऐसे लवण (जैसे $\text{KCl}, \text{KNO}_3$) प्रयुक्त होते हैं जिनमें धनायन और ऋणायन की आयनिक गतिशीलता (Ionic Mobility) लगभग बराबर हो।

वैद्युतरसायन: गैल्वेनिक सेल, नर्नस्ट समीकरण एवं चालकता

वैद्युतरसायन (Electrochemistry): गैल्वेनिक सेल, नर्नस्ट समीकरण व चालकता1. डेनियल व गैल्वेनिक सेलLOAN सिद्धांत व लवण सेतु• ऐनोड (-) Zn | Zn²⁺ (Left):Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ (ऑक्सीकरण)• कैथोड (+) Cu²⁺ | Cu (Right):Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu (अपचयन)• E°cell = E°cath - E°anod= 0.34 - (-0.76) = 1.10 V• लवण सेतु (Salt Bridge):KCl / KNO₃ जेल; परिपथ पूर्णविद्युत उदासीनता बनाए रखना2. नर्नस्ट समीकरण व ΔG°Nernst Eqn & Kc• नर्नस्ट समीकरण (298 K):E_cell = E°_cell - (0.0591/n) log Q• साम्यावस्था पर (E=0):log Kc = (n · E°cell) / 0.0591• गिब्स मुक्त ऊर्जा:ΔG° = -n F E°cellस्वतःप्रवर्तिता: E > 0, ΔG < 0• फैराडे नियम:w = Z·I·t = (M·I·t)/(n·96500)3. चालकता व कोलराउशConductance & Kohlrausch• विशिष्ट चालकता (κ):κ = (1/R) · (l/A) = G · G*तनुता ↑ ⇒ κ ↓ (आयन/cm³ घटते)• मोलर चालकता (Λm):Λm = (κ × 1000) / M; तनुता ↑ ⇒ Λm ↑• कोलराउश नियम:Λm° = ν₊λ₊° + ν₋λ₋°वियोजन α = Λm / Λm°ईंधन सेल: 2H₂ + O₂ → 2H₂Oवैद्युतरसायन के मुख्य परीक्षा सूत्र व अवधारणाएं (Golden Chemistry Capsule)नर्नस्ट समीकरण:E_cell = E° - (0.0591/n) log([उत्पाद]/[अभिकारक]); साम्य पर log Kc = nE°/0.0591; ΔG° = -nFE°।चालकता व तनुता:तनु करने पर κ घटती है (प्रति cm³ आयन कम) किंतु Λm बढ़ती है (कुल आयतन प्रसार अधिक प्रभावी)।कोलराउश व बैटरी:दुर्बल अपघट्य हेतु Λm° व α = Λm/Λm°; लेड बैटरी में H₂SO₄ अपघट्य; H₂-O₂ सेल 70% प्रदूषण-मुक्त।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
गैल्वेनिक सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है; ऐनोड पर ऑक्सीकरण (-) तथा कैथोड पर अपचयन (+) होता है।
मुख्य बिंदु 2
लवण सेतु परिपथ पूर्ण करता है तथा दोनों अर्ध-सेलों में विद्युत उदासीनता बनाए रखता है।
मुख्य बिंदु 3
मानक सेल विभव E°cell = E°cathode - E°anode; डेनियल सेल हेतु E°cell = 1.10 V।
मुख्य बिंदु 4
नर्नस्ट समीकरण: E_cell = E°cell - (0.0591 / n) log([उत्पाद]/[अभिकारक]); 298 K पर विभव की सटीक गणना करता है।
मुख्य बिंदु 5
साम्य स्थिरांक log Kc = n E°cell / 0.0591 तथा मानक गिब्स मुक्त ऊर्जा ΔG° = -n F E°cell।
मुख्य बिंदु 6
विशिष्ट चालकता κ = (1/R) · (l/A); तनुता बढ़ाने पर κ घटती है क्योंकि प्रति एकांक आयतन आयनों की संख्या घट जाती है।
मुख्य बिंदु 7
मोलर चालकता Λm = (κ × 1000) / M; तनुता बढ़ाने पर Λm बढ़ती है।
मुख्य बिंदु 8
कोलराउश नियम: अनंत तनुता पर विद्युत-अपघट्य की मोलर चालकता उसके आयनों की सीमांत चालकताओं का योग होती है (Λm° = ν₊λ₊° + ν₋λ₋°)।
मुख्य बिंदु 9
वियोजन की मात्रा α = Λm / Λm° तथा वियोजन स्थिरांक Ka = c α² / (1 - α)।
मुख्य बिंदु 10
फैराडे का प्रथम नियम w = Z I t = (M I t)/(n · 96500); लेड संचायक बैटरी द्वितीयक सेल है तथा H₂-O₂ ईंधन सेल 70% कुशल है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
तनुता बढ़ाने पर किसी विद्युत-अपघटनी विलयन की विशिष्ट चालकता (κ) घटती है परंतु मोलर चालकता (Λm) क्यों बढ़ती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: विशिष्ट चालकता विलयन के 1 cm³ आयतन में उपस्थित आयनों की चालकता होती है। तनु करने पर प्रति एकांक आयतन में विद्युत धारा ले जाने वाले आयनों की संख्या घट जाती है, अतः κ घटती है। इसके विपरीत, मोलर चालकता (Λm = κ × V) उस कुल आयतन V में उपस्थित 1 मोल आयनों की चालकता है। तनुता बढ़ाने पर आयतन V में होने वाली वृद्धि κ में होने वाली कमी से कहीं अधिक प्रभावी होती है, अतः Λm बढ़ती है।
2
लवण सेतु (Salt Bridge) क्या है और किसी गैल्वेनिक सेल में इसके दो मुख्य कार्य क्या हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लवण सेतु U-आकार की एक कांच की नली होती है जिसमें अक्रिय विद्युत-अपघट्य (जैसे KCl, KNO₃) का अगर-अगर जेल में बना अर्ध-ठोस पेस्ट भरा होता है। इसके दो मुख्य कार्य हैं: (1) यह दोनों अर्ध-सेल विलयनों के मध्य आयनों का प्रवाह कराकर आंतरिक विद्युत परिपथ को पूर्ण करता है, तथा (2) यह दोनों विलयनों में आयनों के संचय को रोककर विद्युत उदासीनता (Electrical Neutrality) बनाए रखता है।
3
कोलराउश के नियम का कथन लिखिए तथा बताइए कि इसकी सहायता से ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH) की सीमांत मोलर चालकता कैसे ज्ञात की जाती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कोलराउश के नियमानुसार: अनंत तनुता पर किसी विद्युत-अपघट्य की सीमांत मोलर चालकता (Λm°) उसके सभी धनायनों तथा ऋणायनों की सीमांत आयनिक मोलर चालकताओं के योग के बराबर होती है। ऐसीटिक अम्ल एक दुर्बल विद्युत-अपघट्य है, अतः इसकी सीमांत मोलर चालकता प्रबल विद्युत-अपघट्यों (CH₃COONa, HCl, NaCl) की सहायता से ज्ञात की जाती है: Λm°(CH₃COOH) = Λm°(CH₃COONa) + Λm°(HCl) - Λm°(NaCl)।
4
लोहे को संक्षारित (जंग लगने) से बचाने के लिए 'कैथोडिक रक्षण' (Cathodic Protection) विधि किस प्रकार कार्य करती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कैथोडिक रक्षण में लोहे की संरचना (जैसे भूमिगत पाइप या जहाज का पेंदा) को लोहे से अधिक सक्रिय धातु जैसे मैग्नीशियम (Mg) या जस्ते (Zn) के ब्लॉक से तार द्वारा जोड़ दिया जाता है। चूंकि Mg या Zn का ऑक्सीकरण विभव लोहे से अधिक होता है, अतः वे ऐनोड बनकर स्वयं ऑक्सीकृत (बलिदान) होते रहते हैं और इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं, जबकि लोहा कैथोड बनकर संक्षारण से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
5
H₂-O₂ ईंधन सेल को सामान्य ताप-विद्युत संयंत्रों की तुलना में श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ईंधन सेल में ईंधन (H₂) के दहन की रासायनिक ऊर्जा सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है, जिससे इसकी दक्षता लगभग 70% तक होती है (जबकि ताप संयंत्रों की दक्षता केवल 40% होती है)। इसके अतिरिक्त, इसका एकमात्र उप-उत्पाद जल (H₂O) होता है, अतः यह पूर्णतः प्रदूषण-मुक्त (Eco-friendly) होता है और अंतरिक्ष यात्रियों हेतु पीने के पानी के रूप में भी प्रयुक्त होता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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