1.1 समुच्चयों का कार्तीय गुणन (Cartesian Product of Sets):
गणित में किसी भी संबंध की उत्पत्ति दो समुच्चयों के कार्तीय गुणन से होती है। यदि $A$ और $B$ दो अरिक्त (Non-empty) समुच्चय हैं, तो $A$ के प्रत्येक अवयव को $B$ के प्रत्येक अवयव के साथ क्रमित रूप से मिलाने पर प्राप्त होने वाले सभी क्रमित युग्मों (Ordered Pairs) का समुच्चय, $A$ और $B$ का कार्तीय गुणन (Cartesian Product) कहलाता है। इसे प्रतीकात्मक रूप से $A \times B$ द्वारा निरूपित किया जाता है:
क्रमित युग्मों की समानता (Equality of Ordered Pairs): दो क्रमित युग्म $(a_1, b_1)$ और $(a_2, b_2)$ केवल और केवल तभी समान होते हैं जब उनके संगत प्रथम और द्वितीय घटक परस्पर बराबर हों:
$$(a_1, b_1) = (a_2, b_2) \iff a_1 = a_2 \quad \text{तथा} \quad b_1 = b_2$$
| गुणधर्म / सूत्र | गणितीय व्यंजक | महत्वपूर्ण निष्कर्ष एवं उदाहरण |
|---|---|---|
| कार्तीय गुणन की कार्डिनैलिटी | यदि $n(A) = p$ तथा $n(B) = q$, तो $$n(A \times B) = n(A) \times n(B) = p \cdot q$$ | यदि $A = \{1, 2\}$ ($p=2$) और $B = \{a, b, c\}$ ($q=3$), तो $n(A \times B) = 6$। |
| अक्रमविनिमेयता | $$A \times B \neq B \times A \quad (A \neq B)$$ | $(1, a) \in A \times B$ परंतु $(1, a) \notin B \times A$; क्योंकि $(a, 1) \in B \times A$। |
| रिक्त समुच्चय से गुणन | $$A \times \emptyset = \emptyset \times A = \emptyset$$ | यदि किसी एक समुच्चय में कोई अवयव नहीं है, तो कोई क्रमित युग्म नहीं बन सकता। |
| स्वयं से गुणन ($A \times A$) | $$n(A \times A) = [n(A)]^2 = n^2$$ | $A$ पर किसी भी द्विआधारी संबंध की आधारभूत पृष्ठभूमि। |
1.2 संबंध की औपचारिक एवं वैज्ञानिक परिभाषा (Formal Definition of Relation)
समुच्चय $A$ से समुच्चय $B$ में कोई संबंध (Relation) $R$, कार्तीय गुणन $A \times B$ का कोई भी उपसमुच्चय (Subset) होता है:
यदि $(a, b) \in R$, तो हम कहते हैं कि "अवयव $a$, संबंध $R$ द्वारा अवयव $b$ से संबंधित है", और इसे संकेतन में $\mathbf{aRb}$ लिखा जाता है। यदि $(a, b) \notin R$, तो हम कहते हैं कि $a$ का संबंध $b$ से नहीं है, और इसे $\mathbf{a \not\!R b}$ लिखते हैं।
समुच्चय $A$ पर संबंध (Relation on a Set $A$): यदि संबंध के दोनों समुच्चय समान हों ($A = B$), तो $A \times A$ के किसी भी उपसमुच्चय $R$ को "समुच्चय $A$ पर एक संबंध" (Relation on set $A$) कहा जाता है।
यदि समुच्चय $A$ में $p$ अवयव हों ($n(A) = p$) तथा समुच्चय $B$ में $q$ अवयव हों ($n(B) = q$), तो कार्तीय गुणन $A \times B$ में कुल $p \times q$ अवयव होंगे।
चूंकि किसी समुच्चय $X$ के कुल उपसमुच्चयों की संख्या $2^{n(X)}$ होती है, अतः $A \times B$ के कुल उपसमुच्चयों की संख्या $2^{pq}$ होगी।
अतः $A$ से $B$ में कुल संभव संबंधों की संख्या $= \mathbf{2^{p \cdot q}} = \mathbf{2^{n(A) \cdot n(B)}}$ होती है।
विशेष स्थिति: समुच्चय $A$ (जहाँ $n(A) = n$) पर कुल संबंधों की संख्या $= \mathbf{2^{n^2}}$ होती है। उदाहरणार्थ, यदि $n(A) = 3$, तो कुल संबंध $= 2^{3^2} = 2^9 = 512$ होंगे!
1.3 संबंध का प्रांत, सह-प्रांत एवं परिसर (Domain, Co-domain and Range)
- प्रांत (Domain): संबंध $R$ के सभी क्रमित युग्मों के प्रथम घटकों (First Coordinates) का समुच्चय, $R$ का प्रांत कहलाता है:
$$\text{Domain}(R) = \{a \in A : \exists b \in B \text{ सच दैट } (a, b) \in R\} \subseteq A$$ - परिसर (Range): संबंध $R$ के सभी क्रमित युग्मों के द्वितीय घटकों (Second Coordinates) का समुच्चय, $R$ का परिसर कहलाता है:
$$\text{Range}(R) = \{b \in B : \exists a \in A \text{ सच दैट } (a, b) \in R\} \subseteq B$$ - सह-प्रांत (Co-domain): संपूर्ण समुच्चय $B$ को संबंध $R$ का सह-प्रांत कहा जाता है।
अत्यंत महत्वपूर्ण निष्कर्ष: $\mathbf{\text{Range}(R) \subseteq \text{Co-domain}(R)}$। परिसर सदैव सह-प्रांत का उपसमुच्चय होता है, यह आवश्यक नहीं कि वह सह-प्रांत के बराबर ही हो।
1.4 संबंधों के तीन प्राथमिक/विशेष प्रकार (Trivial & Identity Relations)
1. रिक्त संबंध (Empty Relation)
समुच्चय $A$ पर कोई संबंध $R$ रिक्त संबंध कहलाता है यदि $A$ का कोई भी अवयव $A$ के किसी भी अवयव से संबंधित न हो, अर्थात्:
$$R = \emptyset \subseteq A \times A$$
उदाहरण: बालकों के विद्यालय में $R = \{(a, b) : a, b \text{ की बहन है}\} = \emptyset$।
2. सार्वत्रिक संबंध (Universal Relation)
समुच्चय $A$ पर कोई संबंध $R$ सार्वत्रिक संबंध कहलाता है यदि $A$ का प्रत्येक अवयव $A$ के सभी अवयवों से संबंधित हो, अर्थात्:
$$R = A \times A$$
उदाहरण: मनुष्यों के समुच्चय में $R = \{(a, b) : |\text{ऊँचाई}(a) - \text{ऊँचाई}(b)| < 5\text{ मीटर}\} = A \times A$।
3. तत्समक संबंध (Identity Relation)
समुच्चय $A$ पर संबंध $I_A$ तत्समक संबंध कहलाता है यदि $A$ का प्रत्येक अवयव केवल और केवल स्वयं से संबंधित हो:
$$I_A = \{(a, a) : \forall a \in A\}$$
यदि $A = \{1, 2\}$, तो $I_A = \{(1, 1), (2, 2)\}$। इसमें कोई अन्य युग्म नहीं आ सकता।
नोट: रिक्त संबंध $(\emptyset)$ तथा सार्वत्रिक संबंध $(A \times A)$ को सामूहिक रूप से तुच्छ संबंध (Trivial Relations) कहा जाता है।