A. योग की व्युत्पत्ति एवं परिभाषा:
'योग' शब्द संस्कृत की 'युज्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है—जोड़ना, युक्त होना या एकाकार होना। महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में योग की कालजयी परिभाषा दी है:
B. अष्टांग योग के आठ सोपान:
- यम (सामाजिक नैतिकता): अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह।
- नियम (व्यक्तिगत अनुशासन): शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर-प्रणिधान।
- आसन (स्थिरता): "स्थिरसुखमासनम्" (शरीर की सुखपूर्वक स्थिर मुद्रा)।
- प्राणायाम (श्वास-नियंत्रण): प्राणवायु का नियमन व विस्तार।
- प्रत्याहार (इंद्रिय-निग्रह): इंद्रियों को बाह्य विषयों से भीतर की ओर मोड़ना।
- धारणा (एकाग्रता): मन को किसी एक ध्येय पर केंद्रित करना।
- ध्यान (सतत चिंतन): एकाग्रता का निरंतर प्रवाह।
- समाधि (परमानंद): ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय का एकाकार हो जाना।