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ICSE • कक्षा 8 • Hindi • अध्याय 5
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

योग दिवस

आईसीएसई कक्षा 8 हिन्दी के अंतर्गत "योग दिवस" भारतीय ऋषि-परंपरा की अमूल्य थाती "योग", उसके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक व आध्यात्मिक लाभों तथा 21 जून को विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" के वैश्विक महत्व पर आधारित एक अत्यंत उपादेय, समसामयिक एवं प्रेरणाप्रद निबंधात्मक अध्याय है। महर्षि पतंजलि द्वारा प्रणीत "अष्टांग योग" (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) मानव जीवन को तनावमुक्त, निरोगी और संतुलित बनाने का समग्र विज्ञान है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत के प्रस्ताव को 177 देशों का ऐतिहासिक समर्थन प्राप्त हुआ और 21 जून 2015 से प्रतिवर्ष समूचे विश्व में योग दिवस का भव्य आयोजन प्रारंभ हुआ। 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन (ग्रीष्म संक्रांति) होता है, जो प्रकृति में प्रकाश और ऊर्जा का प्रतीक है। प्रस्तुत अध्ययन सामग्री में योग का अर्थ, अष्टांग योग के आठ अंग, प्रमुख आसनों व प्राणायामों की विधि व लाभ, आधुनिक जीवन में योग की प्रासंगिकता तथा परीक्षा-उपयोगी प्रश्नोत्तरों का सांगोपांग विश्लेषण किया गया है।

किस प्रकार प्राचीन भारत की पांच हजार वर्ष पुरानी ऋषि-साधना ने संयुक्त राष्ट्र संघ के 177 देशों को एक साथ योग-चटाई पर लाकर खड़ा कर दिया?

आज की आपाधापी भरी, तनावग्रस्त और मशीनी जीवनशैली में मनुष्य के पास सब कुछ है—धन, वैभव, गैजेट्स, सुख-सुविधाएं—किंतु यदि कुछ खो गया है, तो वह है आंतरिक शांति और मानसिक संतुलन! विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी स्वीकार करता है कि आधुनिक जीवन की अधिकांश बीमारियाँ (तनाव, अनिद्रा, हृदय रोग, रक्तचाप) मन के असंतुलन से उपजती हैं। ऐसे समय में भारत ने विश्व को शांति और आरोग्य का सबसे अनमोल उपहार दिया: YOGA (योग)! संस्कृत की "युज्" धातु से बना यह शब्द आत्मा का परमात्मा से, और शरीर का मन से मिलन कराता है। 21 जून 2015 को जब दुनिया भर के करोड़ों लोगों ने राजपथ से लेकर टाइम्स स्क्वायर तक एक साथ प्राणायाम की सांस ली, तो यह सिद्ध हो गया कि योग किसी एक धर्म या जाति का नहीं, बल्कि समूची मानवता का कल्याणकारी विज्ञान है! आइए, योग के चमत्कारी विज्ञान को गहराई से समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह पाठ विद्यार्थियों में शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक एकाग्रता, तनाव-प्रबंधन तथा भारत की प्राचीन वैज्ञानिक व आध्यात्मिक धरोहर के प्रति गौरव का भाव जाग्रत करता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • स्वास्थ्य एवं व्यायाम का सामान्य महत्व।
  • प्रमुख सरल आसनों (ताड़ासन, वज्रासन, सूर्य नमस्कार) से परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • योग की परिभाषा एवं महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग के आठ अंगों को समझना।
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व वैश्विक महत्व को जानना।
  • प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी) और विभिन्न आसनों के शारीरिक लाभों का विश्लेषण करना।
  • विद्यार्थी जीवन में एकाग्रता और स्मृति संवर्धन हेतु योग के व्यावहारिक प्रयोग को अपनाना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. योग का अर्थ एवं महर्षि पतंजलि का...
2 2. 21 जून: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. योग का अर्थ एवं महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग

सिद्धांत
A. योग की व्युत्पत्ति एवं परिभाषा:

'योग' शब्द संस्कृत की 'युज्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है—जोड़ना, युक्त होना या एकाकार होना। महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में योग की कालजयी परिभाषा दी है:

"योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" ⇔ चित्त (मन) की वृत्तियों (भटकावों) का निरोध (नियंत्रण) ही योग है।
B. अष्टांग योग के आठ सोपान:
  1. यम (सामाजिक नैतिकता): अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह।
  2. नियम (व्यक्तिगत अनुशासन): शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर-प्रणिधान।
  3. आसन (स्थिरता): "स्थिरसुखमासनम्" (शरीर की सुखपूर्वक स्थिर मुद्रा)।
  4. प्राणायाम (श्वास-नियंत्रण): प्राणवायु का नियमन व विस्तार।
  5. प्रत्याहार (इंद्रिय-निग्रह): इंद्रियों को बाह्य विषयों से भीतर की ओर मोड़ना।
  6. धारणा (एकाग्रता): मन को किसी एक ध्येय पर केंद्रित करना।
  7. ध्यान (सतत चिंतन): एकाग्रता का निरंतर प्रवाह।
  8. समाधि (परमानंद): ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय का एकाकार हो जाना।

2. 21 जून: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
वैश्विक मान्यता:
  • सितंबर 2014 में भारत के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा।
  • 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 177 देशों के अभूतपूर्व सह-प्रायोजन से यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।
  • 21 जून ही क्यों? 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन (ग्रीष्म संक्रांति) होता है। इसके बाद सूर्य दक्षिणायन की ओर प्रस्थान करता है, जो भारतीय योग परंपरा में साधना और ज्ञान के संचरण का अत्यंत पावन समय माना जाता है।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

पतंजलि योग परिभाषा
"योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" [पतंजलि योगसूत्र 1.2]
मन की चंचलता पर नियंत्रण ही योग का चरम लक्ष्य है।

हिन्दी: अष्टांग योग के आठ अंग एवं योग दिवस की रूपरेखा

योग दिवस: अष्टांग योग के आठ सोपान एवं वैश्विक स्वास्थ्य महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग 1. यम (नैतिक आचरण: सत्य, अहिंसा) 2. नियम (आत्म-शुद्धि: शौच, संतोष) 3. आसन (शारीरिक स्वास्थ्य व स्थिरता) 4. प्राणायाम (श्वास-प्रश्वास का नियमन) 5. प्रत्याहार • 6. धारणा • 7. ध्यान • 8. समाधि "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" (चित्त का नियंत्रण) 21 जून: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस • 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्ताव • 177 देशों का ऐतिहासिक समर्थन • 21 जून: वर्ष का सबसे लंबा दिन (संक्रांति) विद्यार्थियों हेतु लाभ: • मानसिक तनाव से मुक्ति • एकाग्रता में वृद्धि • स्मरण-शक्ति का विकास • सकारात्मक ऊर्जा योगः कर्मसु कौशलम् • शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान ही योग है

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
योग संस्कृत की "युज्" धातु से बना है, जिसका अर्थ जुड़ना या एकाकार होना है।
मुख्य बिंदु 2
महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों पर नियंत्रण पाना ही योग है।
मुख्य बिंदु 3
अष्टांग योग के आठ अंग हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि।
मुख्य बिंदु 4
प्रतिवर्ष 21 जून को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
मुख्य बिंदु 5
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के योग प्रस्ताव को 177 देशों का समर्थन मिला था।
मुख्य बिंदु 6
21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है, जो प्रकाश और चेतना का प्रतीक है।
मुख्य बिंदु 7
प्राणायाम श्वास-प्रश्वास की गति को नियंत्रित कर फेफड़ों और मस्तिष्क को शुद्ध करता है।
मुख्य बिंदु 8
योग केवल शारीरिक कसरत नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा का संपूर्ण परिष्कार है।
मुख्य बिंदु 9
नियमित योगाभ्यास से विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
मुख्य बिंदु 10
योग भारत की ओर से विश्व शांति और निरोगी जीवन के लिए दिया गया सर्वोत्तम उपहार है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
महर्षि पतंजलि के अनुसार योग की क्या परिभाषा है? "योग" शब्द किस धातु से बना है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: • परिभाषा: महर्षि पतंजलि ने अपने ग्रंथ 'योगसूत्र' में योग की परिभाषा देते हुए कहा है:
"योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः"

अर्थात् मन (चित्त) के विचारों और चंचल वृत्तियों को वश में करना तथा एकाग्र करना ही योग है।
• व्युत्पत्ति: "योग" शब्द संस्कृत की "युज्" धातु से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है—जोड़ना, मिलाना या एकाकार होना (शरीर का मन से और आत्मा का परमात्मा से मिलन)।
संस्कृत की "युज्" धातु से बना है; परिभाषा: "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" (चित्त की वृत्तियों का निरोध)।
2
अष्टांग योग के आठ अंगों के नाम क्रमानुसार लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग के आठ सोपान निम्नलिखित हैं:
1. यम (सामाजिक नैतिकता व अहिंसा)
2. नियम (व्यक्तिगत अनुशासन व स्वच्छता)
3. आसन (शारीरिक स्थिरता व स्वास्थ्य)
4. प्राणायाम (श्वास-प्रश्वास का नियमन)
5. प्रत्याहार (इंद्रियों पर नियंत्रण)
6. धारणा (मन को किसी एक बिंदु पर टिकाना)
7. ध्यान (सतत चिंतन व एकाग्रता)
8. समाधि (परम आनंद व आत्म-साक्षात्कार)।


यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि।
3
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कब मनाया जाता है और इसे 21 जून को ही मनाने का क्या वैज्ञानिक व दार्शनिक कारण है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

• तिथि: प्रतिवर्ष 21 जून को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
• 21 जून को चुनने का कारण:
1. ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice): 21 जून उत्तरी गोलार्ध का वर्ष में सबसे लंबा दिन होता है, जिस दिन पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश सर्वाधिक समय तक रहता है। यह दिन प्रकृति में ऊर्जा, प्रकाश और दीर्घायु का प्रतीक है।
2. दक्षिणायन संक्रांति: भारतीय परंपरा के अनुसार इस दिन के बाद सूर्य दक्षिणायन होता है, जो आध्यात्मिक साधना और ज्ञान प्राप्त करने हेतु अत्यंत अनुकूल काल माना गया है।


21 जून को मनाया जाता है; यह उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन है और ऊर्जा व प्रकाश का प्रतीक है।
4
विद्यार्थी जीवन में प्राणायाम और योगासनों के नियमित अभ्यास से क्या लाभ होते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. स्मरण शक्ति एवं एकाग्रता: अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम से मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पढ़ाई में ध्यान और याददाश्त तेज होती है।
    2. तनाव व परीक्षा-भय से मुक्ति: योग तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जिससे अवसाद और परीक्षा के तनाव से मुक्ति मिलती है।
    3. शारीरिक स्फूर्ति व लचीलापन: ताड़ासन, वृक्षासन और सूर्य नमस्कार रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हैं, कद बढ़ाते हैं और आलस्य को भगाकर ऊर्जावान बनाए रखते हैं।

एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है, परीक्षा का तनाव दूर होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।
5
संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव कब और कितने देशों के समर्थन से पारित हुआ?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की महासभा में भारत द्वारा 21 जून को योग दिवस घोषित करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव 11 दिसंबर 2014 को पारित हुआ। इस प्रस्ताव को विश्व के 177 देशों ने सह-प्रायोजक (co-sponsor) बनकर अपना ऐतिहासिक समर्थन दिया, जो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में किसी भी सामान्य प्रस्ताव के लिए एक नया विश्व रिकॉर्ड था। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया।


11 दिसंबर 2014 को पारित हुआ; 177 देशों का ऐतिहासिक समर्थन मिला; प्रथम आयोजन 21 जून 2015।
6
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने योग की क्या परिभाषा दी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने योग के व्यावहारिक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा है:
"योगः कर्मसु कौशलम्"

अर्थात् कार्यों को कुशलतापूर्वक और अनासक्त भाव (कर्तव्यनिष्ठा) से करना ही सच्चा योग है। उन्होंने यह भी कहा: *"समत्वं योग उच्यते"* (सुख-दुख, लाभ-हानि में समभाव बने रहना ही योग है)।
"योगः कर्मसु कौशलम्" (कर्मों में कुशलता ही योग है) और "समत्वं योग उच्यते"।
7
निम्नलिखित शब्दों के संधि-विच्छेद कीजिए: (क) प्राणायाम, (ख) अंतर्राष्ट्रीय, (ग) एकाग्रता।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

• (क) प्राणायाम: प्राण $+$ आयाम (दीर्घ स्वर संधि)
• (ख) अंतर्राष्ट्रीय: अन्तः $+$ राष्ट्रीय (विसर्ग संधि) / अन्तर $+$ राष्ट्रीय
• (ग) एकाग्रता: एक $+$ अग्र $+$ ता (प्रत्यय)।


प्राण + आयाम; अन्तः + राष्ट्रीय।
8
"योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है।" इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

शारीरिक व्यायाम केवल मांसपेशियों और बाह्य शरीर को बलिष्ठ बनाता है। इसके विपरीत, योग एक सर्वांगीण जीवन-पद्धति और आध्यात्मिक विज्ञान है। योग शरीर (आसन), प्राण (प्राणायाम), मन (प्रत्याहार) और बुद्धि (ध्यान) को एक साथ साधता है। यह मनुष्य को आंतरिक शांति, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक आनंद की ओर ले जाता है, अतः योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि समग्र जीवन-दर्शन है।


व्यायाम केवल शरीर को साधता है; योग शरीर, प्राण, मन और आत्मा का सर्वांगीण संतुलन स्थापित करता है।
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