1967 का चुनाव स्वतंत्र भारत के इतिहास का पहला चुनाव था जो जवाहरलाल नेहरू के बिना लड़ा गया था। देश उस समय गंभीर आर्थिक संकट, सूखे, महंगाई और खाद्यान्न कमी से जूझ रहा था।
1967 के चुनाव के चौंकाने वाले परिणाम ('राजनीतिक भूकंप'):
- कांग्रेस केंद्र (लोकसभा) में बहुत कम बहुमत से जीत पाई (520 में से 283 सीटें)। इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल के आधे मंत्री और दिग्गज नेता (जैसे के. कामराज, एस. के. पाटिल, अतुल्य घोष) चुनाव हार गए।
- 9 राज्यों में कांग्रेस की हार: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, केरल और मद्रास (तमिलनाडु)। मद्रास में द्रमुक (DMK) ने पूर्ण बहुमत की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।
- संविद सरकारें (SVD - संयुक्त विधायक दल): विपक्षी दलों ने मिलकर गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकारें बनाईं।
हरियाणा के विधायक गया लाल ने एक ही पखवाड़े में तीन बार पार्टियाँ बदलीं। चुनाव जीतने के बाद निजी स्वार्थ या मंत्री पद के लालच में अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने की इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए बाद में 1985 में 52वां संविधान संशोधन (दल-बदल विरोधी कानून) लाया गया।