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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Political Science • अध्याय 14
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियां और पुनर्स्थापना (Challenges to and Restoration of the Congress System)

झारखण्ड बोर्ड (JAC) कक्षा 12 राजनीति विज्ञान का चतुर्दश अध्याय "कांग्रेस प्रणाली की चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना" (Challenges to and Restoration of the Congress System) 1964 में पं. नेहरू के निधन के बाद राजनीतिक उत्तराधिकार (लाल बहादुर शास्त्री एवं इंदिरा गांधी), 1967 के चौथे आम चुनाव के ऐतिहासिक झटके ('राजनीतिक भूकंप' - Political Earthquake), गैर-कांग्रेसवाद (डॉ. राममनोहर लोहिया), 'आया राम गया राम' व दल-बदल (Defection) की राजनीति, सिंडिकेट (Syndicate) बनाम इंदिरा गांधी का टकराव, 1969 का ऐतिहासिक कांग्रेस विभाजन (Congress-O बनाम Congress-R), 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण व प्रिवी पर्स समाप्ति, 1971 का आम चुनाव ('गरीबी हटाओ' का नारा) तथा कांग्रेस प्रणाली की पुनर्स्थापना का व्यापक अध्ययन प्रस्तुत करता है।

👑 क्या आप जानते हैं: 1969 में जब कांग्रेस पार्टी के दिग्गज बुजुर्ग नेताओं (सिंडिकेट) ने इंदिरा गांधी को 'गूंगी गुड़िया' समझकर पार्टी से निकाल दिया, तो उन्होंने कैसे पूरी राजनीति को पलट दिया?

1966 में जब लाल बहादुर शास्त्री के अचानक निधन के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं, तो कांग्रेस के पुराने दिग्गज नेताओं को लगा कि वे एक कमजोर महिला हैं और उनके इशारों पर चलेंगी। समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने उन्हें 'गूंगी गुड़िया' कहा था। लेकिन 1969 के राष्ट्रपति चुनाव में जब सिंडिकेट ने नीलम संजीव रेड्डी को उम्मीदवार बनाया, तो इंदिरा गांधी ने अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार वी. वी. गिरि का खुला समर्थन किया और 'अंतरात्मा की आवाज पर वोट' डालने की अपील कर दी! वी. वी. गिरि जीत गए और कांग्रेस दो फाड़ हो गई! फिर 1971 के चुनाव में जब समूचा विपक्ष 'इंदिरा हटाओ' का नारा दे रहा था, तो इंदिरा ने एक मास्टरस्ट्रोक चला—'गरीबी हटाओ!' और प्रचंड बहुमत से जीतकर इतिहास रच दिया। आइए इस अभूतपूर्व राजनीतिक ड्रामे को समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत में दलीय प्रणाली के विकास, दल-बदल विरोधी कानून, गठबंधन राजनीति के आरंभ, गरीबी उन्मूलन नीतियों और व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीति को समझने के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। बोर्ड परीक्षा में 1967 के चुनाव परिणाम ('राजनीतिक भूकंप'), सिंडिकेट का प्रभाव, 1969 का कांग्रेस विभाजन और 1971 के चुनाव के कारणों पर अनिवार्य प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • 1952-1962 तक कांग्रेस का एकछत्र प्रभुत्व।
  • 1964 में नेहरू का निधन और लाल बहादुर शास्त्री का प्रधानमंत्रित्व।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • नेहरू के बाद राजनीतिक उत्तराधिकार (शास्त्री और इंदिरा गांधी) के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक समाधान को समझ सकेंगे।
  • 1967 के चौथे आम चुनाव को 'राजनीतिक भूकंप' कहे जाने के कारणों (9 राज्यों में संविद सरकारें) की व्याख्या कर सकेंगे।
  • डॉ. राममनोहर लोहिया की 'गैर-कांग्रेसवाद' की रणनीति और 'आया राम, गया राम' (दल-बदल) की परिघटना का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • कांग्रेस के पुराने बुजुर्ग नेताओं के समूह 'सिंडिकेट' (Syndicate) की संरचना और इंदिरा से उनके टकराव को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • 1969 के राष्ट्रपति चुनाव (वी. वी. गिरि बनाम नीलम संजीव रेड्डी) और कांग्रेस के औपचारिक विभाजन के चरणों को रेखांकित कर सकेंगे।
  • 1971 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी की 'गरीबी हटाओ' रणनीति और कांग्रेस की पुनर्स्थापना का मूल्यांकन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. 1967 का चौथा आम चुनाव: राजनीतिक...
2 2. सिंडिकेट बनाम इंदिरा और 1969 का...
3 3. 1971 का चुनाव: 'गरीबी हटाओ' और क...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. 1967 का चौथा आम चुनाव: राजनीतिक भूकंप (Fourth General Election 1967)

1967 का चुनाव स्वतंत्र भारत के इतिहास का पहला चुनाव था जो जवाहरलाल नेहरू के बिना लड़ा गया था। देश उस समय गंभीर आर्थिक संकट, सूखे, महंगाई और खाद्यान्न कमी से जूझ रहा था।

1967 के चुनाव के चौंकाने वाले परिणाम ('राजनीतिक भूकंप'):

  • कांग्रेस केंद्र (लोकसभा) में बहुत कम बहुमत से जीत पाई (520 में से 283 सीटें)। इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल के आधे मंत्री और दिग्गज नेता (जैसे के. कामराज, एस. के. पाटिल, अतुल्य घोष) चुनाव हार गए।
  • 9 राज्यों में कांग्रेस की हार: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, केरल और मद्रास (तमिलनाडु)। मद्रास में द्रमुक (DMK) ने पूर्ण बहुमत की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।
  • संविद सरकारें (SVD - संयुक्त विधायक दल): विपक्षी दलों ने मिलकर गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकारें बनाईं।
🏃 'आया राम, गया राम' (दल-बदल - Defection):
हरियाणा के विधायक गया लाल ने एक ही पखवाड़े में तीन बार पार्टियाँ बदलीं। चुनाव जीतने के बाद निजी स्वार्थ या मंत्री पद के लालच में अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने की इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए बाद में 1985 में 52वां संविधान संशोधन (दल-बदल विरोधी कानून) लाया गया।

2. सिंडिकेट बनाम इंदिरा और 1969 का ऐतिहासिक विभाजन (Syndicate vs Indira & 1969 Split)

सिंडिकेट (Syndicate): कांग्रेस के भीतर शक्तिशाली, अनुभवी और गैर-हिंदी भाषी दिग्गज बुजुर्ग नेताओं का एक अनौपचारिक समूह था (प्रमुख नेता: के. कामराज, एस. के. पाटिल, एन. संजीव रेड्डी, अतुल्य घोष, एस. निजलिंगप्पा)।

विवाद का चरणइंदिरा गांधी के प्रगतिशील कदमसिंडिकेट की प्रतिक्रिया / परिणाम
10 सूत्रीय कार्यक्रम (1967)14 प्रमुख निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स (राजाओं के भत्ते) की समाप्ति, बीमा का राष्ट्रीयकरण और शहरी संपत्ति सीमा।दक्षिणपंथी झुकाव वाले सिंडिकेट नेताओं (विशेषकर मोरारजी देसाई) ने इन वामपंथी नीतियों का कड़ा विरोध किया।
1969 का राष्ट्रपति चुनावराष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद सिंडिकेट ने नीलम संजीव रेड्डी को उम्मीदवार बनाया। इंदिरा ने तत्कालीन उपराष्ट्रपति वी. वी. गिरि को निर्दलीय उतारा और 'अंतरात्मा की आवाज' पर मतदान की अपील की।वी. वी. गिरि ऐतिहासिक रूप से चुनाव जीत गए। कांग्रेस अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने इंदिरा गांधी को पार्टी से निष्कासित कर दिया।

कांग्रेस का दो दलों में विभाजन (1969):

  • Congress (O) - संगठन (Organisation): सिंडिकेट के नेतृत्व वाली पुरानी दक्षिणपंथी कांग्रेस।
  • Congress (R) - रिक्विजिशनिस्ट्स (Requisitionists): इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली नई समाजवादी व वामपंथी कांग्रेस।

3. 1971 का चुनाव: 'गरीबी हटाओ' और कांग्रेस की पुनर्स्थापना (1971 Election & Restoration)

दिसंबर 1970 में इंदिरा गांधी की अल्पमत सरकार ने लोकसभा भंग कर मध्यावधि चुनाव (फरवरी 1971) की सिफारिश की।

चुनावी मोर्चागठबंधन / दलमुख्य चुनावी नारा
ग्रैंड अलायंस (Grand Alliance)सभी प्रमुख गैर-कांग्रेसी विपक्षी दल (Congress-O, जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी, SSP, PSP)'इंदिरा हटाओ' (Remove Indira)
इंदिरा की कांग्रेस + CPICongress (R) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी'गरीबी हटाओ' (Remove Poverty)

ऐतिहासिक परिणाम: इंदिरा गांधी की कांग्रेस(R) और CPI गठबंधन ने लोकसभा की 518 में से 375 सीटें जीतीं (अकेले कांग्रेस को 352 सीटें मिलीं)। सिंडिकेट की कांग्रेस(O) मात्र 16 सीटों पर सिमट गई।

✨ कांग्रेस प्रणाली की पुनर्स्थापना: दिसंबर 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय ने इंदिरा गांधी की लोकप्रियता को शिखर पर पहुंचा दिया। उन्होंने पुरानी कांग्रेस को केवल पुनर्स्थापित नहीं किया, बल्कि उसे पूरी तरह नए सिरे से गढ़ा—जो अब पूरी तरह उनके सर्वोच्च नेतृत्व और गरीबों-वंचितों के प्रत्यक्ष समर्थन पर आधारित थी।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

1967
चौथा आम चुनाव - 9 राज्यों में कांग्रेस की पराजय ('राजनीतिक भूकंप')।
1969
14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण; राष्ट्रपति चुनाव में वी. वी. गिरि की विजय; कांग्रेस का औपचारिक विभाजन।
1971
पांचवां लोकसभा चुनाव - इंदिरा गांधी का 'गरीबी हटाओ' नारा और 375 सीटों के साथ प्रचंड विजय।
1971
26वां संविधान संशोधन - देशी रियासतों के राजाओं का 'प्रिवी पर्स' (Privy Purse) हमेशा के लिए समाप्त।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
1967 के चौथे आम चुनाव के परिणामों को 'राजनीतिक भूकंप' (Political Earthquake) की संज्ञा क्यों दी जाती है? (JAC Board 5 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: 1967 के चुनाव ने स्वतंत्रता के बाद से चले आ रहे कांग्रेस के एकछत्र प्रभुत्व को हिलाकर रख दिया, जिसके निम्नलिखित कारण थे:
1. केंद्र में बहुमत में भारी कमी: पहली बार केंद्र में कांग्रेस की सीटें और वोट प्रतिशत नाटकीय रूप से घट गए (520 में से मात्र 283 सीटें)।
2. दिग्गज नेताओं की शर्मनाक हार: कांग्रेस अध्यक्ष के. कामराज, एस. के. पाटिल और अतुल्य घोष जैसे शक्तिशाली सिंडिकेट नेता चुनाव हार गए।
3. 9 राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें: देश के 9 राज्यों (यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, मद्रास, केरल, पंजाब, आदि) में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। मद्रास में द्रमुक ने पहली बार पूर्ण बहुमत की गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।
4. संविद सरकारों और दल-बदल का दौर: क्षेत्रीय दलों और विपक्षी गठबंधनों (संविद) का उदय हुआ और 'आया राम, गया राम' की राजनीति शुरू हुई।
उदाहरण 2
1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के किन्हीं तीन मुख्य कारणों की व्याख्या कीजिए। (JAC Board 3 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
1. सिंडिकेट बनाम इंदिरा गांधी का शक्ति संघर्ष: सिंडिकेट के बुजुर्ग नेता सरकार पर नियंत्रण रखना चाहते थे, जबकि इंदिरा गांधी स्वतंत्र निर्णय लेना चाहती थीं।
2. वैचारिक मतभेद: इंदिरा गांधी ने 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण और प्रिवी पर्स समाप्ति जैसी समाजवादी नीतियां लागू कीं, जिनका मोरारजी देसाई और सिंडिकेट ने विरोध किया।
3. 1969 का राष्ट्रपति चुनाव: इंदिरा गांधी ने आधिकारिक पार्टी प्रत्याशी नीलम संजीव रेड्डी के विरुद्ध निर्दलीय वी. वी. गिरि का समर्थन कर उन्हें विजयी बनाया, जिससे पार्टी टूट गई।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

Congress (O) और Congress (R) में भ्रमित होना कि इंदिरा गांधी का गुट कौन सा था।

सही वैज्ञानिक तथ्य

याद रखें: Congress (R) = Requisitionists (इंदिरा गांधी की असली नई कांग्रेस) और Congress (O) = Organisation (सिंडिकेट की पुरानी कांग्रेस)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रिवी पर्स (Privy Purse) को केवल राजाओं की निजी तिजोरी समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रिवी पर्स वह संवैधानिक विशेष भत्ता था जो 1947 में भारत में विलय के समय देशी राजाओं को जीवन भर देने का आश्वासन दिया गया था, जिसे 1971 में 26वें संशोधन द्वारा इंदिरा गांधी ने समाप्त किया।
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कक्षा 12 Political Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: शीतयुद्ध काल (The Cold War Era) अध्याय 2: दो ध्रुवीयता का अंत (The End of Bipolarity) अध्याय 3: विश्व राजनीति में अमेरिकी आधिपत्य (US Hegemony in World Politics) अध्याय 4: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र (Alternative Centres of Power) अध्याय 5: समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) अध्याय 6: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations) अध्याय 7: समकालीन विश्व में सुरक्षा (Security in the Contemporary World) अध्याय 8: पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन (Environment and Natural Resources) अध्याय 9: वैश्वीकरण (Globalisation) (Globalisation) अध्याय 10: राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ (Challenges of Nation Building) अध्याय 11: एक दल के प्रभुत्व का दौर (Era of One-Party Dominance) अध्याय 12: नियोजित विकास की राजनीति (Politics of Planned Development) अध्याय 13: भारत के विदेश संबंध (India's External Relations) अध्याय 14: कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियां और पुनर्स्थापना (Challenges to and Restoration of the Congress System) अध्याय 15: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (The Crisis of Democratic Order) अध्याय 16: क्षेत्रीय आकांक्षाएं (Regional Aspirations) अध्याय 17: भारतीय राजनीति: नए बदलाव (Recent Developments in Indian Politics)

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