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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा XII • Political Science • अध्याय 11
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

एक दल के प्रभुत्व का दौर (Era of One-Party Dominance)

झारखण्ड बोर्ड (JAC) कक्षा 12 राजनीति विज्ञान का एकादश अध्याय "एक दल के प्रभुत्व का दौर" (Era of One-Party Dominance) 1952 के प्रथम आम चुनाव की ऐतिहासिक सफलता, सुकुमार सेन (प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1952, 1957 और 1962 के आम चुनावों में एकछत्र दबदबे, कांग्रेस के एक 'सतरंगी सामाजिक व वैचारिक गठबंधन' के रूप में स्वरूप, 1957 में केरल में पहली कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना (अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग) तथा प्रमुख विपक्षी दलों (सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय जनसंघ, CPI, स्वतंत्र पार्टी) के उद्भव का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है।

🗳️ क्या आप जानते हैं: 1952 में जब भारत में 17 करोड़ अनपढ़ लोगों ने पहली बार वोट डाला, तो दुनिया भर के अखबारों ने इसे 'इतिहास का सबसे बड़ा जुआ' क्यों कहा था?

अंग्रेजों का मानना था कि भारत जैसा गरीब और अशिक्षित देश कभी लोकतंत्र नहीं चला सकता। एक ब्रिटिश संपादक ने यहाँ तक लिख दिया था कि 'नेहरू अपने जीते जी भारत में लोकतंत्र की नाकामी देखकर पछताएंगे!' लेकिन भारत के प्रथम चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने मतपेटियों पर चुनाव चिन्ह चिपकाकर और घर-घर जाकर 17.32 करोड़ मतदाताओं की सूची बनाई, जिसमें 85% निरक्षर थे। जब चुनाव हुए तो पूरी दुनिया दंग रह गई—भारत ने साबित कर दिया कि लोकतंत्र केवल अमीर और गोरे देशों की बपौती नहीं है! लेकिन पहले तीन आम चुनावों में कांग्रेस का ऐसा एकतरफा दबदबा क्यों रहा? विपक्षी पार्टियां उस समय कैसे काम करती थीं? आइए इस अध्याय में स्वतंत्र भारत के चुनावी इतिहास को समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

भारत की दलीय व्यवस्था, चुनावी प्रक्रियाओं, गठबंधन राजनीति की जड़ों और वर्तमान राजनीतिक दलों की वैचारिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए यह अध्याय मौलिक है। बोर्ड परीक्षा में 1952 के पहले आम चुनाव की चुनौतियाँ, कांग्रेस के प्रभुत्व के कारण और प्रमुख विपक्षी दलों (जनसंघ, सोशलिस्ट, स्वतंत्र पार्टी) की नीतियों पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • 26 जनवरी 1950 को लागू भारतीय संविधान और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की केंद्रीय भूमिका।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • 1952 के प्रथम आम चुनाव के आयोजन में चुनाव आयोग के समक्ष आई अभूतपूर्व चुनौतियों की व्याख्या कर सकेंगे।
  • 1952, 1957 और 1962 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी के एकछत्र प्रभुत्व के बहुआयामी कारणों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • कांग्रेस को एक 'सामाजिक और वैचारिक सतरंगी गठबंधन' (Social & Ideological Coalition) के रूप में प्रमाणित कर सकेंगे।
  • 1957 में केरल में कम्युनिस्ट सरकार बनने और 1959 में केंद्र द्वारा उसे बर्खास्त करने की समीक्षा कर सकेंगे।
  • सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय जनसंघ (BJS), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और स्वतंत्र पार्टी के मुख्य सिद्धांतों की तुलना कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. प्रथम आम चुनाव 1952: लोकतंत्र का...
2 2. पहले तीन चुनावों में कांग्रेस का...
3 3. प्रमुख विपक्षी दल एवं केरल में स...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. प्रथम आम चुनाव 1952: लोकतंत्र का ऐतिहासिक परीक्षण (First General Elections 1952)

पृष्ठभूमि: जनवरी 1950 में भारत के चुनाव आयोग का गठन हुआ और सुकुमार सेन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त बने। अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 तक देश में पहला आम चुनाव संपन्न हुआ।

चुनौती का क्षेत्रकठिनाई का विवरणसमाधान का नवाचार
मतदाता सूची17.32 करोड़ मतदाता थे, जिनमें 40 लाख महिलाओं के नाम 'फलाने की पत्नी/बेटी' दर्ज थे।चुनाव आयुक्त ने इन सूचियों को रद्द कर महिलाओं के मूल नाम दर्ज करवाए।
व्यापक निरक्षरताकेवल 15% मतदाता साक्षर थे; वे उम्मीदवारों का नाम नहीं पढ़ सकते थे।प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अलग मतपेटी रखी गई जिस पर उसका चुनाव चिन्ह चिपकाया गया।
विशाल भौगोलिक दायरादुर्गम पहाड़ियों, जंगलों और नदियों के पार मतदान केंद्र बनाना।3 लाख से अधिक अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित कर निष्पक्ष चुनाव कराए।

2. पहले तीन चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व (Congress Dominance: 1952, 1957, 1962)

पहले तीन आम चुनावों (1952, 1957, 1962) में कांग्रेस ने केंद्र (लोकसभा) और लगभग सभी राज्यों की विधानसभाओं में भारी बहुमत हासिल किया:

  • 1952: 489 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस ने 364 सीटें जीतीं। (दूसरे नंबर पर CPI को मात्र 16 सीटें मिलीं)।
  • 1957: 494 में से 371 सीटें जीतीं।
  • 1962: 494 में से 361 सीटें जीतीं।
🏆 कांग्रेस के एकछत्र प्रभुत्व के 4 मुख्य कारण:
  1. स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक विरासत: जनता कांग्रेस को आजादी दिलाने वाली पार्टी के रूप में देखती थी।
  2. अद्वितीय करिश्माई नेतृत्व: पंडित जवाहरलाल नेहरू का राष्ट्रव्यापी करिश्मा और जनप्रियता।
  3. सुदृढ़ संगठनात्मक तंत्र: कांग्रेस का संगठन गांव-गांव तक पहले से ही फैला हुआ था।
  4. सतरंगी गठबंधन (Rainbow Coalition): कांग्रेस ने दक्षिणपंथी, वामपंथी, पूंजीपतियों, किसानों, मजदूरों और विभिन्न जातियों-धर्मों के परस्पर विरोधी गुटों को अपने भीतर समाहित कर रखा था। अंदरूनी गुटबाजी इसकी कमजोरी नहीं बल्कि संतुलन की ताकत थी।

3. प्रमुख विपक्षी दल एवं केरल में साम्यवादी सरकार (Opposition Parties & Kerala 1957)

1957 में केरल में पहली कम्युनिस्ट सरकार:

  • 1957 के विधानसभा चुनाव में केरल में ई. एम. एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने सरकार बनाई। यह विश्व इतिहास में लोकतांत्रिक चुनाव जीतकर सत्ता में आने वाली पहली कम्युनिस्ट सरकार थी।
  • 1959 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग करते हुए इस चुनी हुई कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया, जो राष्ट्रपति शासन का पहला बड़ा विवादित प्रयोग था।
विपक्षी दलप्रमुख नेतामूल विचारधारा / नीतियां
सोशलिस्ट पार्टी (1948)जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देवलोकतांत्रिक समाजवाद; कांग्रेस के पूंजीवादी झुकाव की आलोचना।
भारतीय जनसंघ (1951)डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय'एक देश, एक राष्ट्र, एक संस्कृति'; अखंड भारत; हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना; परमाणु बम निर्माण की वकालत। (वर्तमान BJP की पूर्ववर्ती)।
स्वतंत्र पार्टी (1959)सी. राजगोपालाचारी, के. एम. मुंशी, मीनू मसानीमुक्त बाजार, निजी संपत्ति, लाइसेंस-परमिट राज की समाप्ति और अमेरिका से घनिष्ठता।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI)ए. के. गोपालन, एस. ए. डांगे, पी. सी. जोशीमार्क्सवादी साम्यवाद, सर्वहारा क्रांति; 1964 में CPI और CPI(M) में विभाजित।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

Jan 1950
भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना; सुकुमार सेन प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त।
1951-52
भारत का प्रथम ऐतिहासिक आम चुनाव (लोकसभा की 489 सीटें)।
1957
केरल में ई. एम. एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व में विश्व की पहली लोकतांत्रिक कम्युनिस्ट सरकार।
1959
सी. राजगोपालाचारी द्वारा 'स्वतंत्र पार्टी' की स्थापना; केरल सरकार पर अनुच्छेद 356 लागू।
1951
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
कांग्रेस को एक 'सामाजिक और वैचारिक गठबंधन' क्यों कहा जाता है? विस्तार से समझाइए। (JAC Board 5 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कांग्रेस की स्थापना 1885 में एक अभिजात वर्ग के दबाव समूह के रूप में हुई थी, परंतु महात्मा गांधी के नेतृत्व में यह एक जनांदोलन बनी:
1. सामाजिक गठबंधन: इसमें किसान, जमींदार, उद्योगपति, शहरी मजदूर, अगड़ी और पिछड़ी जातियां, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी वर्गों के लोग शामिल थे।
2. वैचारिक गठबंधन: कांग्रेस में घोर दक्षिणपंथी, शांतिवादी, उदारवादी और क्रांतिकारी वामपंथी सभी विचारधाराओं के लोग एक साथ काम करते थे।
3. सहनशीलता और संतुलन: पार्टी के भीतर विभिन्न 'गुटों' (Factions) में मतभेद होने पर भी नेता पार्टी छोड़कर नहीं जाते थे, बल्कि अंदर रहकर ही मध्यस्थता और समझौते से फैसले होते थे। इस सर्वसमावेशी चरित्र के कारण इसे 'सतरंगी गठबंधन' कहा जाता है।
उदाहरण 2
1952 के प्रथम आम चुनाव में चुनाव आयोग को किन दो प्रमुख कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? (JAC Board 3 Marks)
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
1. व्यापक निरक्षरता: 17 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 85% अनपढ़ थे, जिसके समाधान के लिए प्रत्येक उम्मीदवार की अलग मतपेटी पर विशिष्ट चुनाव चिन्ह चिपकाने की नई पद्धति अपनाई गई।
2. दोषपूर्ण मतदाता सूचियां: पहली सूची में लगभग 40 लाख महिलाओं के व्यक्तिगत नाम दर्ज नहीं थे (उन्हें 'फलाने की पत्नी/बेटी' लिखा गया था), जिन्हें चुनाव आयुक्त ने रद्द कर पुनः नाम दर्ज कराए।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत के एकदलीय प्रभुत्व (One-Party Dominance) को चीन या रूस की एकदलीय तानाशाही जैसा समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत में एकदलीय प्रभुत्व लोकतांत्रिक बहुदलीय प्रणाली के तहत स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से जनता के समर्थन पर आधारित था, न कि किसी तानाशाही कानून द्वारा।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारतीय जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी की विचारधारा को एक समान मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

जनसंघ का मुख्य जोर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद ('एक राष्ट्र, एक संस्कृति') और अखंड भारत पर था, जबकि स्वतंत्र पार्टी का मुख्य जोर पूंजीवादी मुक्त बाजार और राज्य नियंत्रण की समाप्ति पर था।
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कक्षा 12 Political Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: शीतयुद्ध काल (The Cold War Era) अध्याय 2: दो ध्रुवीयता का अंत (The End of Bipolarity) अध्याय 3: विश्व राजनीति में अमेरिकी आधिपत्य (US Hegemony in World Politics) अध्याय 4: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र (Alternative Centres of Power) अध्याय 5: समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) अध्याय 6: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations) अध्याय 7: समकालीन विश्व में सुरक्षा (Security in the Contemporary World) अध्याय 8: पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन (Environment and Natural Resources) अध्याय 9: वैश्वीकरण (Globalisation) (Globalisation) अध्याय 10: राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ (Challenges of Nation Building) अध्याय 11: एक दल के प्रभुत्व का दौर (Era of One-Party Dominance) अध्याय 12: नियोजित विकास की राजनीति (Politics of Planned Development) अध्याय 13: भारत के विदेश संबंध (India's External Relations) अध्याय 14: कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियां और पुनर्स्थापना (Challenges to and Restoration of the Congress System) अध्याय 15: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (The Crisis of Democratic Order) अध्याय 16: क्षेत्रीय आकांक्षाएं (Regional Aspirations) अध्याय 17: भारतीय राजनीति: नए बदलाव (Recent Developments in Indian Politics)

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