मंडल आयोग (द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग): 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार द्वारा बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल (B.P. Mandal) की अध्यक्षता में गठित हुआ। इसने 1980 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
| सिफारिशें / निष्कर्ष | विवरण |
| OBC की पहचान | आयोग ने पाया कि देश की कुल आबादी का लगभग 52% भाग 'अन्य पिछड़ा वर्ग' (OBC) है, जो सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ा है। |
| 27% आरक्षण | केंद्र सरकार की नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में OBC के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की गई। |
| इंदिरा साहनी वाद (1992) | सुप्रीम कोर्ट ने 27% आरक्षण को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया, परंतु 'क्रीमी लेयर' (सम्पन्न पिछड़े वर्ग) को बाहर रखने और कुल आरक्षण सीमा 50% तय करने का निर्देश दिया। |
कांशीराम और बहुजन समाज पार्टी (BSP): 1984 में कांशीराम ने 'बामसेफ' (BAMCEF - 1978) और 'डीएस-4' (DS-4) के आधार पर बसपा का गठन किया जिसने दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों (बहुजन) को सत्ता की चाबी दिलाने की राजनीति की (मायावती 1995 में पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं)।