Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Hindi (हिन्दी)
झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Science • अध्याय 4
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) कक्षा 7 विज्ञान का चतुर्थ अध्याय "अम्ल, क्षारक और लवण" (Acids, Bases and Salts) पदार्थों के रासायनिक वर्गीकरण का आधारभूत पाठ है। इसमें प्राकृतिक एवं खनिज अम्ल, क्षारक, प्राकृतिक सूचक (लिटमस, हल्दी, गुड़हल) व फिनॉल्फ्थलीन, उदासीनीकरण अभिक्रिया तथा दैनिक जीवन में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों (एसिडिटी, चींटी का डंक, मृदा उपचार) का सविस्तार वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया गया है।

🔬 क्या आपने कभी सोचा है?

🍋 जब हम नींबू का रस चखते हैं तो वह खट्टा लगता है, जबकि नहाने का साबुन मुंह में जाने पर कड़वा और चिपचिपा क्यों लगता है?

👕 सफेद कमीज पर जब सब्जी या दाल की हल्दी का पीला दाग लग जाता है और उस पर साबुन घिसा जाता है, तो वह पीला दाग अचानक लाल-भूरा क्यों हो जाता है?

🐜 लाल चींटी जब हमें काटती है तो तेज जलन क्यों होती है, और उस पर मीठा सोडा (बेकिंग सोडा) लगाने से दर्द में तुरंत आराम क्यों मिल जाता है?

🧪 बिना चखे हम कैसे पता लगा सकते हैं कि कोई रंगहीन तरल पीने योग्य पानी है या फिर खतरनाक तेजाब?

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

अम्ल, क्षारक और लवण केवल प्रयोगशाला के रसायन नहीं हैं; ये हमारी रसोई, स्वास्थ्य, खेती और पर्यावरण के अंग-अंग में समाए हैं। हमारे पेट की अम्लता (Acidity) से लेकर झारखंड के खेतों की मिट्टी की उर्वरता, धातुओं की सफाई, कारखानों के अपशिष्ट का शुद्धिकरण और टूथपेस्ट का निर्माण—सब कुछ अम्ल-क्षारक के रासायनिक संतुलन (Neutralization) पर निर्भर करता है। इस अध्याय को समझकर आप रसायनों की प्रकृति और उनके सुरक्षित व्यावहारिक उपयोग में पारंगत हो सकेंगे।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • हम विभिन्न खाद्य पदार्थों को उनके स्वाद (खट्टा, मीठा, कड़वा, नमकीन) से पहचानते हैं।
  • सभी रसायनों को चखकर देखना अत्यंत खतरनाक हो सकता है (कुछ रसायन विषैले और दाहक होते हैं)।
  • पदार्थ आपस में क्रिया करके नए गुणधर्म वाले पदार्थ बनाते हैं (रासायनिक परिवर्तन)।
  • पौधों और जंतुओं में कई प्रकार के प्राकृतिक कार्बनिक यौगिक पाए जाते हैं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • अम्ल (Acid) और क्षारक (Base) के भौतिक व रासायनिक गुणों में स्पष्ट अंतर कर सकेंगे।
  • प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले विभिन्न कार्बनिक अम्लों (एसिटिक, साइट्रिक, टार्टरिक, लैक्टिक आदि) की पहचान कर सकेंगे।
  • सूचक (Indicator) की परिभाषा देकर लिटमस, हल्दी, गुड़हल और फिनॉल्फ्थलीन के रंग परिवर्तन का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण ($HCl + NaOH \rightarrow NaCl + H_2O$) लिख सकेंगे।
  • दैनिक जीवन में उदासीनीकरण के 4 मुख्य अनुप्रयोगों (अपच, चींटी का डंक, मृदा उपचार, कारखानों का कचरा) के वैज्ञानिक कारण स्पष्ट कर सकेंगे।
  • अम्लीय वर्षा (Acid Rain) के कारण और स्मारकों व पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभावों की व्याख्या कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अम्ल एवं क्षारक: स्वाद और रासायन...
2 2. सूचक: प्राकृतिक एवं रासायनिक सूच...
3 3. उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutraliza...
4 4. दैनिक जीवन में उदासीनीकरण के 4 प...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अम्ल एवं क्षारक: स्वाद और रासायनिक प्रकृति (Acids & Bases)

अम्ल (Acids): वे पदार्थ जो स्वाद में खट्टे (Sour) होते हैं और नीले लिटमस को लाल कर देते हैं, अम्ल कहलाते हैं। इनकी रासायनिक प्रकृति अम्लीय (Acidic) होती है। शब्द "Acid" की उत्पत्ति लैटिन शब्द "Acere" से हुई है जिसका अर्थ खट्टा होता है।

प्राकृतिक पदार्थों में पाए जाने वाले मुख्य अम्ल:

स्रोत (खाद्य पदार्थ)पाया जाने वाला अम्लस्रोत (खाद्य पदार्थ)पाया जाने वाला अम्ल
सिरका (Vinegar)एसिटिक अम्ल (Acetic Acid)दही (Curd)लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid)
संतरा, नींबूसाइट्रिक अम्ल (Citric Acid)पालक (Spinach)ऑक्जेलिक अम्ल (Oxalic Acid)
चींटी का डंकफॉर्मिक / मेथेनोइक अम्लआंवला, खट्टे फलएस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन C)
इमली, कच्चा आम, अंगूरटार्टरिक अम्ल (Tartaric Acid)सेब (Apple)मैलिक अम्ल (Malic Acid)

क्षारक (Bases): वे पदार्थ जो स्वाद में कड़वे (Bitter) होते हैं, स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने (Soapy feel) लगते हैं और लाल लिटमस को नीला कर देते हैं, क्षारक कहलाते हैं। जल में घुलनशील क्षारकों को क्षार (Alkali) कहते हैं।

दैनिक जीवन के प्रमुख क्षारक: चूने का पानी (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड), साबुन का घोल (सोडियम/पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड), मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड), खिड़की साफ करने का मार्जक (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड)।

2. सूचक: प्राकृतिक एवं रासायनिक सूचक (Indicators)

सूचक (Indicators): हम किसी अज्ञात रसायन को छू या चखकर नहीं देख सकते क्योंकि वह घातक हो सकता है। कोई पदार्थ अम्लीय है या क्षारकीय, इसका परीक्षण करने के लिए प्रयुक्त विशेष पदार्थों को सूचक कहते हैं। ये अम्लीय और क्षारकीय माध्यम में अपना रंग बदल देते हैं।

(A) लिटमस (Litmus) — सबसे सामान्य प्राकृतिक सूचक:

यह लाइकेन (Lichen) से निष्कर्षित किया जाता है। आसुत (शुद्ध) जल में इसका रंग हल्का बैंगनी (माव) होता है।

  • अम्लीय विलयन में $\rightarrow$ लाल (Red) हो जाता है। (ट्रिक: अम्ल नीले को लाल करता है)
  • क्षारकीय विलयन में $\rightarrow$ नीला (Blue) हो जाता है। (ट्रिक: क्षारक लाल को नीला करता है)
  • यह लाल और नीले कागज की पट्टियों (लिटमस पेपर) के रूप में उपलब्ध होता है।
(B) हल्दी (Turmeric) — घरेलू सूचक:
  • अम्लीय एवं उदासीन विलयन में $\rightarrow$ पीला ही रहता है।
  • क्षारकीय विलयन (जैसे साबुन का पानी, चूने का पानी) में $\rightarrow$ गहरा लाल-भूरा (Reddish-brown) हो जाता है। इसी कारण सफेद कमीज पर लगा हल्दी का दाग साबुन से धोने पर लाल हो जाता है!
(C) गुड़हल की पंखुड़ियाँ (China Rose Indicator):
  • अम्लीय विलयन को $\rightarrow$ गहरा गुलाबी / मजेंटा (Magenta) कर देता है।
  • क्षारकीय विलयन को $\rightarrow$ हरा (Green) कर देता है।
(D) फिनॉल्फ्थलीन (Phenolphthalein) — रासायनिक संश्लेषित सूचक:
  • अम्लीय और उदासीन माध्यम में $\rightarrow$ रंगहीन (Colorless) रहता है।
  • क्षारकीय माध्यम में $\rightarrow$ गुलाबी (Pink) हो जाता है।

3. उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction)

उदासीनीकरण (Neutralization): जब किसी अम्ल और क्षारक को उचित अनुपात में मिलाया जाता है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को पूर्णतः नष्ट कर देते हैं। किसी अम्ल और क्षारक के बीच होने वाली यह अभिक्रिया उदासीनीकरण कहलाती है।

इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप लवण (Salt) और जल ($H_2O$) का निर्माण होता है और साथ ही प्रचुर मात्रा में ऊष्मा (Heat) मुक्त होती है (तापमान बढ़ जाता है):

$$\text{अम्ल (Acid)} + \text{क्षारक (Base)} \longrightarrow \text{लवण (Salt)} + \text{जल (Water)} + \text{ऊष्मा (Heat)}$$

प्रमाणित रासायनिक समीकरण:

$$\mathbf{HCl\text{ (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)} + NaOH\text{ (सोडियम हाइड्रॉक्साइड)} \longrightarrow NaCl\text{ (सोडियम क्लोराइड - साधारण नमक)} + H_2O\text{ (जल)} + \text{ऊष्मा}}$$

लवण की प्रकृति: निर्मित लवण उदासीन, अम्लीय या क्षारकीय हो सकता है। जब प्रबल अम्ल और प्रबल क्षारक मिलते हैं तो उदासीन लवण बनता है जिसका लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

4. दैनिक जीवन में उदासीनीकरण के 4 प्रमुख अनुप्रयोग (Neutralization in Everyday Life)

उदासीनीकरण केवल प्रयोगशाला की रासायनिक अभिक्रिया नहीं है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में स्वास्थ्य और खेती की कई समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान है:

  1. अपच एवं पेट की अम्लता (Indigestion / Acidity):
    हमारे आमाशय में भोजन पचाने के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) बनता है। किंतु अनियमित खान-पान या तनाव से जब आमाशय में अम्ल की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, तो सीने में जलन और दर्द होता है जिसे एसिडिटी कहते हैं। इसके उपचार के लिए हम प्रतिअम्ल (Antacid)—जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया [मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड - $Mg(OH)_2$]—लेते हैं। यह दुर्बल क्षारक पेट के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके तुरंत राहत देता है।
  2. चींटी का डंक (Ants Sting):
    जब चींटी या मधुमक्खी काटती है, तो वह त्वचा के भीतर फॉर्मिक अम्ल (Formic Acid) छोड़ देती है जिससे तेज जलन और सूजन होती है। डंक के स्थान पर खाने का सोडा (बेकिंग सोडा / सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) या कैलामाइन विलयन (जिसमें जिंक कार्बोनेट होता है) मलने से अम्ल उदासीन हो जाता है और दर्द समाप्त हो जाता है।
  3. मृदा उपचार (Soil Treatment in Agriculture):
    रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी कभी बहुत अम्लीय या कभी बहुत क्षारकीय हो जाती है। जब मिट्टी अत्यधिक अम्लीय हो, तो उसमें बुझा हुआ चूना [कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड - $Ca(OH)_2$] या बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) मिलाया जाता है। यदि मिट्टी अत्यधिक क्षारकीय हो, तो उसमें सड़े-गले जैव पदार्थ (खाद/कंपोस्ट) मिलाए जाते हैं, जो अम्ल छोड़कर मिट्टी को उदासीन बना देते हैं।
  4. कारखानों का अपशिष्ट (Factory Wastes):
    अनेक उद्योगों और कारखानों के तरल अपशिष्ट में खतरनाक अम्ल घुले होते हैं। यदि इसे सीधे नदियों और झीलों में बहा दिया जाए, तो अम्लता के कारण मछलियाँ और जलीय जीव मर जाएँगे। अतः नदियों में विसर्जित करने से पहले कारखानों के कचरे में क्षारकीय पदार्थ मिलाकर उसे पूर्णतः उदासीन किया जाता है।
⚠️ अम्लीय वर्षा (Acid Rain): हवा में वाहनों और कारखानों से निकलने वाले प्रदूषक—सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($NO_2$) और $CO_2$—वर्षा की बूंदों में घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल और कार्बोनिक अम्ल बनाते हैं। यह अम्लीय वर्षा ताजमहल जैसी ऐतिहासिक इमारतों, वनों, फसलों और जलीय जीवन को भारी क्षति पहुँचाती है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

उदासीनीकरण सामान्य सूत्र
अम्ल + क्षारक → लवण + जल + ऊष्मा
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
उदासीनीकरण रासायनिक समीकरण
HCl + NaOH → NaCl + H₂O
नमक (NaCl) का निर्माण
अम्लता (Acidity) निवारण
HCl (आमाशय अम्ल) + Mg(OH)₂ (प्रतिअम्ल) → MgCl₂ + 2H₂O
मिल्क ऑफ मैग्नीशिया
चींटी डंक निवारण
फॉर्मिक अम्ल + बेकिंग सोडा (NaHCO₃) → उदासीन लवण
जलन से राहत

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
Q1 (प्रत्यास्मरण): लिटमस विलयन किस जीव से प्राप्त होता है और अम्लीय व क्षारकीय माध्यम में इसका रंग कैसा हो जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: लिटमस प्राकृतिक रूप से लाइकेन (Lichen) से निष्कर्षित किया जाता है। आसुत जल में इसका रंग बैंगनी होता है। अम्लीय माध्यम में यह लाल हो जाता है और क्षारकीय माध्यम में यह नीला हो जाता है।
उदाहरण 2
Q2 (अवधारणा): सफेद कमीज पर लगे हल्दी के पीले दाग पर जब साबुन लगाया जाता है, तो वह लाल क्यों हो जाता है? पानी से अच्छी तरह धोने पर वह फिर पीला क्यों हो जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है जो क्षारकीय माध्यम में लाल-भूरा रंग देती है। साबुन का स्वभाव क्षारकीय (Basic) होता है, इसलिए साबुन लगते ही हल्दी का पीला दाग लाल हो जाता है। जब कपड़े को ढेर सारे पानी से धोया जाता है, तो साबुन धुलकर निकल जाता है और माध्यम पुनः उदासीन हो जाता है, जिससे हल्दी अपने मूल पीले रंग में वापस आ जाती है।
उदाहरण 3
Q3 (अनुप्रयोग): किसी व्यक्ति को पेट में गंभीर एसिडिटी होने पर उसे नींबू पानी पीने के बजाय मिल्क ऑफ मैग्नीशिया की खुराक क्यों दी जाती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: एसिडिटी आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अधिकता के कारण होती है। नींबू के रस में पहले से ही साइट्रिक अम्ल होता है, अतः नींबू पानी पीने से पेट की अम्लता और बढ़ जाएगी। इसके विपरीत, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया एक दुर्बल क्षारक [मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड] है, जो आमाशय के अतिरिक्त अम्ल के साथ उदासीनीकरण अभिक्रिया करके उसे शांत कर देता है और दर्द से राहत दिलाता है।
उदाहरण 4
Q4 (कारण व प्रभाव): किसानों को अपने खेत की मिट्टी में रासायनिक उर्वरक डालते समय समय-समय पर चूना या कंपोस्ट खाद मिलाने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की pH बदल जाती है और वह अत्यधिक अम्लीय या क्षारकीय हो जाती है, जिससे फसल की जड़ें पोषक तत्व नहीं सोख पातीं। मिट्टी अम्लीय होने पर उसमें क्षारक (चूना) मिलाया जाता है और क्षारकीय होने पर अम्लीय कंपोस्ट खाद मिलाई जाती है ताकि मिट्टी का pH उदासीन बना रहे और भरपूर फसल हो सके।
उदाहरण 5
Q5 (उच्च स्तरीय चिंतन): आपके पास तीन परखनलियाँ हैं—एक में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, दूसरी में सोडियम हाइड्रॉक्साइड और तीसरी में आसुत जल है। आपको केवल लाल लिटमस पेपर दिया गया है। आप तीनों की अलग-अलग पहचान कैसे करेंगे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
1. लाल लिटमस को तीनों परखनलियों के घोल में बारी-बारी से डुबोएँ। जिस परखनली में लाल लिटमस नीला हो जाए, वह निश्चित रूप से सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षारक) है।
2. अब इस नीले हो चुके लिटमस पत्र को निकाल लें।
3. इस नीले लिटमस को शेष दो परखनलियों में डुबोएँ। जिस घोल में नीला लिटमस पुनः लाल हो जाए, वह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है।
4. तीसरी परखनली, जिसका न तो लाल लिटमस पर और न ही नीले लिटमस पर कोई प्रभाव पड़ता है, वह आसुत जल (उदासीन) है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सभी अम्लों को खतरनाक और अखाद्य समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

केवल खनिज अम्ल (जैसे सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल) संक्षारक और खतरनाक होते हैं। प्राकृतिक कार्बनिक अम्ल (जैसे दही में लैक्टिक अम्ल, नींबू में साइट्रिक अम्ल, इमली में टार्टरिक अम्ल) खाद्य होते हैं और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मानना कि उदासीनीकरण में हमेशा पानी ठंडा हो जाता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

उदासीनीकरण एक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया है। जब अम्ल और क्षारक मिलते हैं, तो ऊष्मा मुक्त होती है और परखनली का तापमान बढ़ जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

हल्दी को सभी माध्यमों में रंग बदलने वाला सूचक मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

हल्दी केवल क्षारकीय माध्यम में रंग बदलकर लाल-भूरा होती है। अम्लीय और उदासीन माध्यम में इसका रंग हमेशा पीला ही रहता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

सूचकों का रंग परिवर्तन चार्ट (Indicator Color Changes)
लिटमस (Litmus)
अम्ल: लाल | क्षारक: नीला
हल्दी (Turmeric)
अम्ल: पीला | क्षारक: लाल-भूरा
गुड़हल (China Rose)
अम्ल: मजेंटा | क्षारक: हरा
फिनॉल्फ्थलीन
अम्ल: रंगहीन | क्षारक: गुलाबी

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस को लाल करते हैं; सिरका, नींबू, इमली, दही में प्राकृतिक अम्ल होते हैं।
मुख्य बिंदु 2
क्षारक स्वाद में कड़वे और स्पर्श में साबुन जैसे चिकने होते हैं और लाल लिटमस को नीला करते हैं; साबुन, चूने का पानी क्षारक हैं।
मुख्य बिंदु 3
अम्लीय या क्षारकीय प्रकृति की सुरक्षित पहचान के लिए प्रयुक्त पदार्थ सूचक (Indicators) कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु 4
लिटमस लाइकेन से प्राप्त होता है (अम्ल में लाल, क्षारक में नीला)।
मुख्य बिंदु 5
हल्दी क्षारक में लाल-भूरा रंग देती है; गुड़हल का रस अम्ल में गहरा गुलाबी (मजेंटा) और क्षारक में हरा रंग देता है।
मुख्य बिंदु 6
फिनॉल्फ्थलीन अम्ल में रंगहीन और क्षारक में गुलाबी होता है।
मुख्य बिंदु 7
अम्ल और क्षारक के परस्पर मिलकर लवण और जल बनाने तथा ऊष्मा मुक्त करने की क्रिया उदासीनीकरण कहलाती है।
मुख्य बिंदु 8
रासायनिक समीकरण: HCl + NaOH → NaCl + H₂O + ऊष्मा।
मुख्य बिंदु 9
पेट की एसिडिटी में प्रतिअम्ल (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) और चींटी के डंक में बेकिंग सोडा का उपयोग उदासीनीकरण पर आधारित है।
मुख्य बिंदु 10
अम्लीय मिट्टी में चूना और क्षारकीय मिट्टी में कंपोस्ट खाद मिलाकर भूमि की उर्वरता और pH को संतुलित रखा जाता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
अम्ल और क्षारक के दो-दो मुख्य भौतिक गुण लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अम्ल: स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस को लाल करते हैं। क्षारक: स्वाद में कड़वे होते हैं, स्पर्श में साबुन जैसे चिकने होते हैं और लाल लिटमस को नीला करते हैं।
2
उदासीनीकरण अभिक्रिया किसे कहते हैं? एक संतुलित रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: किसी अम्ल और क्षारक के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया जिससे लवण और जल बनते हैं तथा ऊष्मा मुक्त होती है, उदासीनीकरण कहलाती है। समीकरण: HCl + NaOH → NaCl + H₂O + ऊष्मा।
3
चींटी के काटने पर त्वचा पर बेकिंग सोडा या कैलामाइन विलयन क्यों मला जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: चींटी काटने पर त्वचा में फॉर्मिक अम्ल छोड़ती है। बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) या कैलामाइन विलयन (जिंक कार्बोनेट) क्षारकीय होते हैं जो अम्ल को उदासीन करके जलन और दर्द से तुरंत राहत दिलाते हैं।
4
हल्दी के दाग पर साबुन लगाने से वह लाल क्यों हो जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है। साबुन का स्वभाव क्षारकीय होता है। हल्दी क्षारकीय माध्यम के संपर्क में आते ही रासायनिक क्रिया द्वारा पीले रंग से लाल-भूरे रंग में बदल जाती है।
5
कारखानों के अम्लीय अपशिष्ट को नदियों में बहाने से पहले उपचारित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यदि अम्लीय कचरे को सीधे नदियों में बहाया जाए तो जल अत्यधिक अम्लीय हो जाएगा जिससे मछलियाँ और अन्य जलीय जीव मर जाएँगे। अतः क्षारकीय पदार्थ मिलाकर उसे उदासीन करने के बाद ही विसर्जित किया जाता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts) में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।

STAY UPDATED

Get the Latest Updates

New test series, syllabus updates, exam notifications and more.

Syllabus
Updates
Exam
Alerts
Study
Resources