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JAC • Class 7 • Science • Ch 11
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Light

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) कक्षा 7 विज्ञान का एकादश अध्याय "प्रकाश" (Light) प्रकाशिकी (Optics) के मूलभूत नियमों का विस्तृत व वैज्ञानिक अध्ययन है। इसमें प्रकाश का सरल रेखीय गमन, समतल दर्पण में परावर्तन व पार्श्व परावर्तन (Lateral Inversion), गोलीय दर्पण (अवतल एवं उत्तल दर्पण के उपयोग व प्रतिबिंब प्रकृति), लेंस (उत्तल व अवतल लेंस द्वारा प्रकाश का अभिसरण व अपसरण), तथा सूर्य के श्वेत प्रकाश का सात रंगों (VIBGYOR) में विक्षेपण, इंद्रधनुष और न्यूटन की डिस्क का संपूर्ण शिक्षण शामिल है।

🌈 क्या आपने कभी सोचा है?

🚑 एम्बुलेंस (AMBULANCE) गाड़ी के आगे के बोनट पर अक्षर हमेशा उल्टे क्यों लिखे होते हैं, सीधे क्यों नहीं लिखे जाते?

🪞 दाँतों के डॉक्टर मरीज के मुँह के छोटे से कीड़े वाले दाँत को देखने के लिए जिस छोटे से शीशे का इस्तेमाल करते हैं, उसमें दाँत इतना बड़ा और साफ कैसे दिखाई देता है?

🚗 कार और मोटरसाइकिल के साइड मिरर पर "OBJECTS IN THE MIRROR ARE CLOSER THAN THEY APPEAR" क्यों लिखा होता है, और इसमें पीछे की इतनी बड़ी सड़क और दर्जनों गाड़ियाँ एक छोटे शीशे में कैसे समा जाती हैं?

🌧️ बारिश के बाद नीले आसमान में सात खूबसूरत रंगों वाला विशाल इंद्रधनुष कैसे धनुष की तरह तन जाता है, जबकि सूर्य की धूप तो पूरी तरह सफेद दिखाई देती है?

Why This Chapter Matters

प्रकाश हमारे दृश्य ब्रह्मांड की आँख है। बिना प्रकाश और परावर्तन के नियमों के न तो हम अपनी आँखों से दुनिया को देख सकते थे, न ही दृष्टि दोष सुधारने वाले चश्मे बन पाते। सूक्ष्मदर्शी (Microscope) जिसने डॉक्टरों को जानलेवा बैक्टीरिया-वायरस देखने में सक्षम बनाया, दूरबीन (Telescope) जिससे हमने चाँद-तारों की खोज की, हमारे मोबाइल और कैमरों के लेंस, तथा गाड़ियों की सुरक्षित ड्राइविंग के लिए साइड मिरर—सब कुछ गोलीय दर्पण और लेंस के प्रकाशिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। इस अध्याय की मजबूत समझ भौतिक विज्ञान की नींव है।

Before You Begin (Prerequisites)

  • प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है जो हमारी आँखों में दृष्टि की संवेदना उत्पन्न करता है।
  • दीप्त वस्तुएं (सूर्य, जलती मोमबत्ती, बल्ब) स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करती हैं; अदीप्त वस्तुएं (किताब, चंद्रमा, दर्पण) दूसरों के प्रकाश को परावर्तित करती हैं।
  • पारदर्शी माध्यम से प्रकाश आर-पार निकल जाता है, अपारदर्शी वस्तुएं प्रकाश को रोककर छाया (Shadow) बनाती हैं।
  • पॉलिश की हुई चमकदार सतह दर्पण का कार्य करती है।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • प्रकाश के सरल रेखीय गमन (सीधी रेखा में चलने) को प्रायोगिक रूप से सिद्ध कर सकेंगे।
  • समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की 5 मुख्य विशेषताओं (सीधा, आभासी, समान आकार, समान दूरी, पार्श्व परावर्तन) की व्याख्या कर सकेंगे।
  • पार्श्व परावर्तन (Lateral Inversion) और एम्बुलेंस के अक्षरों के वैज्ञानिक कारण को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • गोलीय दर्पणों—अवतल (Concave) एवं उत्तल (Convex)—की संरचना, फोकस, प्रतिबिंब प्रकृति तथा दैनिक उपयोगों में विभेद कर सकेंगे।
  • उत्तल लेंस (अभिसारी) और अवतल लेंस (अपसारी) द्वारा प्रकाश किरणों के मुड़ने के व्यवहार को आरेख द्वारा समझ सकेंगे।
  • वास्तविक प्रतिबिंब (पर्दे पर प्राप्त) और आभासी प्रतिबिंब (पर्दे पर अप्राप्य) में अंतर कर सकेंगे।
  • प्रिज्म द्वारा सूर्य के श्वेत प्रकाश के 7 रंगों (VIBGYOR) में वर्ण-विक्षेपण, इंद्रधनुष बनने की प्रक्रिया तथा न्यूटन की डिस्क का वैज्ञानिक प्रदर्शन कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. प्रकाश का सरल रेखीय गमन एवं समतल...
2 2. गोलीय दर्पण: अवतल बनाम उत्तल दर्...
3 3. लेंस द्वारा प्रकाश का अपवर्तन: उ...
4 4. सूर्य का श्वेत प्रकाश: वर्ण-विक्...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. प्रकाश का सरल रेखीय गमन एवं समतल दर्पण में परावर्तन

(A) प्रकाश का सरल रेखीय गमन (Rectilinear Propagation):

प्रकाश सदैव एक सीधी रेखा (सरल रेखा) में गमन करता है।

  • प्रयोग: जब हम एक सीधे रबर पाइप से जलती हुई मोमबत्ती की लौ को देखते हैं, तो लौ स्पष्ट दिखाई देती है। किंतु जैसे ही पाइप को थोड़ा सा मोड़ दिया जाता है, मोमबत्ती की लौ दिखना पूरी तरह बंद हो जाती है। यह सिद्ध करता है कि प्रकाश मुड़कर नहीं चल सकता।
(B) समतल दर्पण में परावर्तन के लक्षण:

जब किसी पॉलिशदार चमकदार सतह पर प्रकाश पड़ता है, तो वह दिशा बदलकर वापस लौटता है, जिसे परावर्तन (Reflection) कहते हैं। समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब के 5 विशिष्ट लक्षण होते हैं:

  1. सीधा (Erect): मोमबत्ती की लौ ऊपर की ओर ही दिखाई देती है (सिर ऊपर, पैर नीचे)।
  2. समान आकार (Same Size): प्रतिबिंब का आकार वस्तु (बिंब) के बिल्कुल बराबर होता है।
  3. समान दूरी (Equidistant): दर्पण के पीछे प्रतिबिंब उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के आगे रखी होती है।
  4. आभासी (Virtual): इस प्रतिबिंब को किसी पर्दे (Screen) पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  5. पार्श्व परावर्तन (Lateral Inversion): दर्पण में देखने पर बिंब का बायाँ भाग प्रतिबिंब का दायाँ भाग दिखाई देता है, और बिंब का दायाँ भाग बायाँ दिखाई देता है।
एम्बुलेंस का रहस्य: रोगी वाहन (Ambulance) के आगे अक्षरों को उल्टे क्रम में लिखा जाता है ताकि आगे चल रहे वाहन चालक जब अपने रियर-व्यू मिरर में देखें, तो पार्श्व परावर्तन के कारण उन्हें शब्द सीधा AMBULANCE दिखाई दे और वे तुरंत रास्ता दे सकें।

2. गोलीय दर्पण: अवतल बनाम उत्तल दर्पण (Spherical Mirrors)

यदि किसी खोखले कांच के गोले को काटकर उसके एक पृष्ठ पर चांदी/पारे की पॉलिश कर दी जाए, तो बनने वाला दर्पण गोलीय दर्पण (Spherical Mirror) कहलाता है। स्टेनलेस स्टील के नए चम्मच का अंदरूनी धंसा हुआ भाग अवतल दर्पण और बाहरी उभरा हुआ भाग उत्तल दर्पण की तरह कार्य करता है।

🔵 अवतल दर्पण (Concave Mirror)

इसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर धंसा होता है।

  • प्रतिबिंब प्रकृति: दूर रखी वस्तु का वास्तविक व उल्टा प्रतिबिंब बनाता है। किंतु जब वस्तु दर्पण के अत्यंत निकट (ध्रुव व फोकस के बीच) लाई जाती है, तो यह आभासी, सीधा और बहुत बड़ा (आवर्धित) प्रतिबिंब बनाता है।
  • प्रमुख उपयोग:
    1. दंत चिकित्सकों द्वारा दाँतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने में।
    2. टॉर्च, सर्चलाइट और कारों की हेडलाइट के परावर्तक में (समानांतर तीव्र प्रकाश पुंज हेतु)।
    3. शेविंग दर्पण तथा सौर भट्टियों (Solar Furnaces) में।
🔴 उत्तल दर्पण (Convex Mirror)

इसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है।

  • प्रतिबिंब प्रकृति: वस्तु चाहे जहाँ भी रखी हो, यह सदैव सीधा, आभासी और वस्तु से छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
  • विस्तृत दृष्टि क्षेत्र (Wide Field of View): बाहर उभरा होने के कारण यह पीछे के बहुत बड़े सड़क क्षेत्र को समेट लेता है।
  • प्रमुख उपयोग:
    1. वाहनों के पश्च-दृश्य दर्पण (Side / Rear-view Mirror) के रूप में ताकि चालक पीछे से आ रहे पूरे ट्रैफिक को देख सके।
    2. सुपरमार्केट और तीखे मोड़ों (Blind Corners) पर सुरक्षा दर्पण।

3. लेंस द्वारा प्रकाश का अपवर्तन: उत्तल एवं अवतल लेंस (Lenses)

लेंस पारदर्शी माध्यम का टुकड़ा होता है जिसके दोनों पृष्ठ गोलीय होते हैं। प्रकाश जब लेंस से गुजरता है, तो वह मुड़ जाता है (अपवर्तन):

तुलना का बिंदुउत्तल लेंस (Convex Lens)अवतल लेंस (Concave Lens)
आकार व स्पर्शबीच में मोटा तथा किनारों पर पतला।बीच में पतला तथा किनारों पर मोटा।
प्रकाश पर प्रभावअभिसारी लेंस (Converging): समांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर सिकोड़/केंद्रित करता है।अपसारी लेंस (Diverging): समांतर प्रकाश किरणों को बाहर की ओर फैला देता है।
प्रतिबिंब की प्रकृतिवास्तविक व उल्टा; किंतु बहुत पास लाने पर आभासी, सीधा व आवर्धित (बड़ा)।सदैव आभासी, सीधा तथा आकार में छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
प्रमुख उपयोगआवर्धक लेंस (हस्त लेंस), सूक्ष्मदर्शी, दूरदर्शक, कैमरा, पढ़ने वाले चश्मे।निकट दृष्टि दोष निवारण के चश्मे, फ्लैशलाइट, पीपहोल (दरवाजे का लेंस)।

4. सूर्य का श्वेत प्रकाश: वर्ण-विक्षेपण, इंद्रधनुष एवं न्यूटन की डिस्क

क्या सूर्य का प्रकाश वास्तव में केवल सफेद है? 1665 ईस्वी में महान वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन ने एक कांच के त्रिकोणीय प्रिज्म (Prism) की सहायता से सिद्ध किया कि सूर्य का प्रकाश वास्तव में सात रंगों का मिश्रण है।

(A) वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light):

जब सूर्य की श्वेत प्रकाश किरण किसी कांच के प्रिज्म से गुजरती है, तो वह अपने घटक सात रंगों के बैंड में विभाजित हो जाती है। इस परिघटना को प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।

सात रंगों का क्रम (नीचे से ऊपर): V - I - B - G - Y - O - R (बैजानीहपीनाला)
Violet (बैंगनी), Indigo (जामुनी), Blue (नीला), Green (हरा), Yellow (पीला), Orange (नारंगी), Red (लाल)
(B) इंद्रधनुष का बनना (Formation of Rainbow):

वर्षा के ठीक बाद जब आकाश में सूर्य चमकता है, तो हवा में लटकी अनगिनत नन्ही वर्षा की बूंदें प्राकृतिक प्रिज्म की तरह कार्य करती हैं। जब सूर्य का प्रकाश इन बूंदों में प्रवेश करता है, तो वह अपवर्तित और विक्षेपित होकर सात रंगों का एक विशाल वक्र चाप बनाता है जिसे इंद्रधनुष कहते हैं। इंद्रधनुष सदैव सूर्य की विपरीत दिशा में ही दिखाई देता है।

(C) न्यूटन की डिस्क (Newton Disc):

लगभग 10 सेमी व्यास की एक वृत्ताकार गत्ते की डिस्क को सात बराबर खंडों में बांटकर उन पर इंद्रधनुष के सातों रंग पेंट किए जाते हैं। जब इस डिस्क को उसके केंद्र पर लगी धुरी से तेजी से घुमाया जाता है, तो आंखों की दृष्टि-निर्बंधता (Persistence of Vision) के कारण सातों रंग आपस में मिल जाते हैं और पूरी डिस्क श्वेत (सफेद) दिखाई देने लगती है!

Key Formulas, Reactions & Definitions

प्रकाश परावर्तन नियम
आपतन कोण (∠i) = परावर्तन कोण (∠r)
समतल व गोलीय दर्पण दोनों पर लागू
समतल दर्पण दूरी नियम
दर्पण से बिंब की दूरी = दर्पण से प्रतिबिंब की दूरी
u = v
वर्ण-विक्षेपण स्पेक्ट्रम
VIBGYOR (Violet → Red)
बैंगनी रंग सबसे अधिक, लाल सबसे कम मुड़ता है
प्रतिबिंब वर्गीकरण
वास्तविक (पर्दे पर प्राप्त, उल्टा) | आभासी (पर्दे पर अप्राप्य, सीधा)
मूल प्रकाशिक भेद

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
Q1 (संख्यात्मक - समतल दर्पण दूरी): डेविड समतल दर्पण में अपना प्रतिबिंब देख रहा है। दर्पण तथा उसके प्रतिबिंब के बीच की दूरी 4 मीटर है। यदि वह दर्पण की ओर 1 मीटर आगे बढ़ता है, तो डेविड और उसके प्रतिबिंब के बीच की दूरी क्या होगी?
Step-by-Step Solution:
हल:
प्रारंभ में दर्पण और प्रतिबिंब के बीच दूरी = $4\text{ मीटर}$
समतल दर्पण के नियम अनुसार: दर्पण से बिंब (डेविड) की दूरी = दर्पण से प्रतिबिंब की दूरी = $4 / 2 = 2\text{ मीटर}$ नहीं, बल्कि जब दर्पण और प्रतिबिंब की दूरी 4 मीटर है, तो डेविड दर्पण से 4 मीटर दूर खड़ा था!
जब डेविड दर्पण की ओर 1 मीटर आगे बढ़ता है:
दर्पण से डेविड की नई दूरी = $4 - 1 = 3\text{ मीटर}$
अतः दर्पण के पीछे प्रतिबिंब की नई दूरी भी = $3\text{ मीटर}$ होगी।
इसलिए, डेविड और उसके नए प्रतिबिंब के बीच कुल दूरी = $3\text{ m} + 3\text{ m} = \mathbf{6 \text{ मीटर}}$ होगी।
Example 2
Q2 (अवधारणा - वास्तविक बनाम आभासी): वास्तविक प्रतिबिंब और आभासी प्रतिबिंब में तीन मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image)आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image)
1. इसे पर्दे (Screen) पर प्राप्त किया जा सकता है।1. इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
2. यह सदैव उल्टा (Inverted) बनता है।2. यह सदैव सीधा (Erect) बनता है।
3. यह अवतल दर्पण तथा उत्तल लेंस द्वारा बनाया जाता है।3. समतल दर्पण, उत्तल दर्पण तथा अवतल लेंस द्वारा बनाया जाता है।
Example 3
Q3 (अनुप्रयोग - दर्पण चयन): वाहनों के पश्च-दृश्य दर्पण (Side Mirror) के रूप में उत्तल दर्पण का ही उपयोग क्यों किया जाता है? समतल दर्पण का क्यों नहीं?
Step-by-Step Solution:

उत्तर:
वाहनों के साइड मिरर के रूप में उत्तल दर्पण (Convex Mirror) के उपयोग के दो मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं:
1. उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
2. बाहर की ओर उभरा होने के कारण उत्तल दर्पण का दृष्टि क्षेत्र (Field of View) अत्यंत विस्तृत होता है। इससे ड्राइवर अपने छोटे से दर्पण में पीछे की पूरी चौड़ी सड़क और दूर तक आ रहे कई वाहनों को एक साथ स्पष्ट देख पाता है, जो समतल दर्पण से संभव नहीं है।

Example 4
Q4 (प्रायोगिक कारण): जब सूर्य के प्रकाश में किसी उत्तल लेंस को कागज के एक टुकड़े पर केंद्रित किया जाता है, तो कुछ समय बाद कागज से धुआं निकलने लगता है और वह जल उठता है, क्यों?
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
उत्तल लेंस एक अभिसारी लेंस (Converging Lens) होता है। जब सूर्य की समानांतर प्रकाश किरणें उत्तल लेंस पर आपतित होती हैं, तो लेंस उन सभी किरणों और उनके साथ आने वाली विशाल ऊष्मा ऊर्जा को कागज पर एक अत्यंत सूक्ष्म बिंदु (फोकस) पर केंद्रित कर देता है। इस बिंदु पर अत्यधिक ऊष्मा एकत्रित होने से तापमान कागज के ज्वलन ताप तक पहुँच जाता है और कागज जलने लगता है।
Example 5
Q5 (उच्च स्तरीय चिंतन): न्यूटन की डिस्क को तेजी से घुमाने पर वह रंग-बिरंगी दिखने के बजाय सफेद क्यों दिखाई देती है?
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
हमारी मानव आँख के रेटिना पर किसी भी दृश्य की संवेदना लगभग सेकंड के $1/16$वें हिस्से ($0.06$ सेकंड) तक बनी रहती है, जिसे दृष्टि-निर्बंधता (Persistence of Vision) कहते हैं। जब सातों रंगों वाली डिस्क बहुत तीव्र गति से घूमती है, तो सभी सातों रंगों की संवेदनाएं रेटिना पर एक-दूसरे के ऊपर तेजी से अतिव्याप्त (Overlap) हो जाती हैं। चूंकि सूर्य का श्वेत प्रकाश इन्हीं सात रंगों का योग है, अतः हमारा मस्तिष्क इन सातों रंगों के संयुक्त प्रभाव को श्वेत (सफेद) प्रकाश के रूप में अनुभव करता है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

समतल दर्पण में उल्टे प्रतिबिंब को उल्टा समझना।

Scientific Reality & Correction

समतल दर्पण में प्रतिबिंब कभी सिर के बल उल्टा (Inverted) नहीं बनता, वह सदैव सीधा (Erect) होता है; केवल दायाँ-बायाँ बदलता है जिसे पार्श्व परावर्तन (Lateral Inversion) कहते हैं।

Common Misconception

अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण के उपयोगों को आपस में मिला देना।

Scientific Reality & Correction

याद रखें: अवतल दर्पण चीजों को बड़ा (Zoom) करके दिखाता है (दाँत डॉक्टर, शेविंग, हेडलाइट), जबकि उत्तल दर्पण चीजों को छोटा करके बड़े क्षेत्र को दिखाता है (गाड़ी का साइड मिरर)।

Common Misconception

उत्तल लेंस को अपसारी और अवतल लेंस को अभिसारी समझ लेना।

Scientific Reality & Correction

उत्तल लेंस किरणों को सिकोड़ता है (अभिसारी / Converging), जबकि अवतल लेंस किरणों को फैलाता है (अपसारी / Diverging)।

Visual Learning & Conceptual Map

प्रकाशिकी का संपूर्ण वर्गीकरण चक्र (Optics Classification)
समतल दर्पण (पार्श्व परावर्तन) ➔ अवतल दर्पण (आवर्धित/दंत चिकित्सक) ➔ उत्तल दर्पण (विस्तृत दृष्टि/साइड मिरर) ➔ लेंस (उत्तल-अभिसारी / अवतल-अपसारी) ➔ वर्ण-विक्षेपण (VIBGYOR व इंद्रधनुष)

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
प्रकाश सदैव सीधी (सरल) रेखा में गमन करता है।
Takeaway 2
चमकदार पॉलिशदार सतह से टकराकर प्रकाश का लौटना परावर्तन (Reflection) कहलाता है।
Takeaway 3
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सीधा, आभासी, वस्तु के समान आकार का और समान दूरी पर होता है।
Takeaway 4
समतल दर्पण में पार्श्व परावर्तन (Lateral Inversion) होता है जिसमें दायाँ भाग बायाँ दिखाई देता है।
Takeaway 5
अवतल दर्पण वास्तविक व उल्टा प्रतिबिंब बनाता है; वस्तु बहुत पास होने पर आभासी, सीधा व बड़ा प्रतिबिंब बनाता है (दंत चिकित्सक, हेडलाइट)।
Takeaway 6
उत्तल दर्पण सदैव सीधा, आभासी और छोटा प्रतिबिंब बनाता है और इसका दृष्टि क्षेत्र व्यापक होता है (वाहनों के साइड मिरर)।
Takeaway 7
वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है, आभासी प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
Takeaway 8
उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और किरणों को अभिसरित (केंद्रित) करता है (आवर्धक लेंस)।
Takeaway 9
अवतल लेंस बीच में पतला होता है और किरणों को अपसारित (फैलाता) करता है।
Takeaway 10
सूर्य का श्वेत प्रकाश सात रंगों (VIBGYOR) का मिश्रण है; प्रिज्म द्वारा रंगों का अलग होना वर्ण-विक्षेपण कहलाता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
प्रकाश के सरल रेखीय गमन को सिद्ध करने वाला एक सरल प्रयोग बताइए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: एक सीधे पाइप से देखने पर जलती हुई मोमबत्ती की लौ स्पष्ट दिखाई देती है, किंतु पाइप को बीच से थोड़ा सा मोड़ देने पर लौ दिखना बंद हो जाती है। यह सिद्ध करता है कि प्रकाश केवल सीधी रेखा में चलता है।
2
समतल दर्पण में पार्श्व परावर्तन (Lateral Inversion) क्या है? इसका एक व्यावहारिक उदाहरण दें।
Reveal Answer & Explanation
Answer: समतल दर्पण में किसी वस्तु का बायाँ भाग दाईं ओर तथा दायाँ भाग बाईं ओर दिखाई देने की घटना को पार्श्व परावर्तन कहते हैं। उदाहरण: एम्बुलेंस के आगे AMBULANCE अक्षरों का उल्टा लिखा जाना ताकि आगे वाले वाहनों के शीशे में सीधा दिखे।
3
अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण में कोई दो मुख्य अंतर लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer:
  1. अवतल दर्पण का परावर्तक पृष्ठ अंदर धंसा होता है जबकि उत्तल दर्पण का बाहर उभरा होता है। 2. अवतल दर्पण निकट रखी वस्तु का बड़ा (आवर्धित) प्रतिबिंब बनाता है (दंत चिकित्सक उपयोग), जबकि उत्तल दर्पण सदैव छोटा प्रतिबिंब और विस्तृत दृष्टि क्षेत्र प्रदान करता है (साइड मिरर उपयोग)।

4
उत्तल लेंस और अवतल लेंस में प्रकाश किरणों के व्यवहार में क्या अंतर है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: उत्तल लेंस अभिसारी (Converging) होता है जो अपने पर पड़ने वाली समानांतर किरणों को एक बिंदु (फोकस) पर सिकोड़ देता है। अवतल लेंस अपसारी (Diverging) होता है जो किरणों को बाहर की ओर फैला देता है।
5
प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) किसे कहते हैं? इसके सात रंगों का क्रम लिखिए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: कांच के प्रिज्म से गुजरने पर सूर्य के श्वेत प्रकाश का अपने घटक सात रंगों में विभाजित हो जाना वर्ण-विक्षेपण कहलाता है। सात रंगों का क्रम (नीचे से ऊपर) VIBGYOR है: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।
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