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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Science • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

प्राणियों में पोषण (Nutrition in Animals)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) कक्षा 7 विज्ञान का द्वितीय अध्याय "प्राणियों में पोषण" (Nutrition in Animals) मानव एवं अन्य सजीवों में भोजन के अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण और निष्कासन की संपूर्ण जैव-रासायनिक कार्यप्रणाली का प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें मानव पाचन तंत्र, दाँतों के प्रकार, आमाशयिक पाचन, छोटी आंत के रसांकुर, घास खाने वाले रोमंथियों (जुगाली करने वाले) में सेल्यूलोस पाचन तथा एककोशिकीय जीव अमीबा में पोषण का गहन विवरण शामिल है।

🔬 क्या आपने कभी सोचा है?

🍞 जब हम सूखी रोटी या उबले चावल को बिना सब्जी के कुछ देर तक चबाते रहते हैं, तो वह अचानक मीठी क्यों लगने लगती है?

🐮 आपने गाय या भैंस को खाली बैठे हुए भी लगातार मुंह चलाते (जुगाली करते) देखा होगा, जबकि उनके सामने कोई चारा नहीं होता! वे ऐसा क्यों करती हैं और क्या मनुष्य भी गाय की तरह हरी घास खाकर जीवित रह सकता है?

🧪 हमारे पेट (आमाशय) में लोहे की कील गला देने वाला तेज हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) बनता है, फिर वह हमारे अपने ही पेट की नाजुक चमड़ी को क्यों नहीं जलाता?

🦠 और एक तालाब की बूँद में रहने वाला बिना हाथ-पैर, बिना आँख और बिना मुंह वाला सूक्ष्मजीव—अमीबा (Amoeba)—अपने भोजन को कैसे पकड़ता और पचाता है?

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पौधे तो धूप में अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं, किंतु मनुष्य सहित सभी जंतु विषमपोषी (Heterotrophs) हैं। हम जो जटिल भोजन (रोटी, दाल, दूध) खाते हैं, हमारा शरीर उसे सीधे रक्त में नहीं घोल सकता। कोशिकाओं तक ऊर्जा पहुँचाने के लिए इस जटिल भोजन को सरल अणुओं में तोड़ना पड़ता है। यह अध्याय हमारे शरीर के सबसे बड़े रासायनिक कारखाने—पाचन तंत्र—की कार्यप्रणाली, दाँतों के स्वास्थ्य, दस्त/ORS के महत्व, और पशुधन में सेल्यूलोस पाचन के वैज्ञानिक रहस्यों को समझाता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • भोजन के मुख्य घटक कार्बोहाइड्रेट, वसा (Fats), प्रोटीन, खनिज लवण और विटामिन हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन जटिल अघुलनशील अणु हैं, जिन्हें रक्त में सोखने के लिए सरल अणुओं (ग्लूकोज, अमीनो अम्ल) में बदलना पड़ता है।
  • जंतु विषमपोषी हैं और भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों या अन्य जंतुओं पर निर्भर रहते हैं।
  • सजीवों को ऊर्जा प्राप्त करने और शारीरिक वृद्धि के लिए निरंतर पोषण की आवश्यकता होती है।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • प्राणी पोषण के 5 क्रमिक चरणों (अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण, निष्कासन) की सटीक व्याख्या कर सकेंगे।
  • मानव पाचन तंत्र के सभी अंगों (मुख, ग्रसिका, आमाशय, क्षुद्रांत्र, वृहदांत्र, यकृत, अग्न्याशय) की संरचना और पाचक रसों का कार्य बता सकेंगे।
  • दाँतों के 4 प्रकारों (कृंतक, रदनक, अग्र-चवर्णक, चवर्णक) और दंत-क्षय (Tooth Decay) के कारणों की पहचान कर सकेंगे।
  • प्रयोग द्वारा सिद्ध कर सकेंगे कि लार (Saliva) स्टार्च को पचाकर मीठी शर्करा में बदल देती है।
  • क्षुद्रांत्र के रसांकुरों (Villi) की संरचना और भोजन अवशोषण में उनकी भूमिका का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • स्पष्ट कर सकेंगे कि जुगाली करने वाले पशु (रोमंथी / Ruminants) सेल्यूलोस कैसे पचाते हैं और मनुष्य घास क्यों नहीं पचा सकता।
  • अमीबा में कूटपादों (Pseudopodia) द्वारा भोजन अंतर्ग्रहण और खाद्य धानी (Food Vacuole) में पाचन का सचित्र वर्णन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. प्राणी पोषण एवं इसके 5 मुख्य चरण...
2 2. भोजन ग्रहण करने की विभिन्न विधिय...
3 3. मुख एवं दाँतों के प्रकार (Teeth:...
4 4. जीभ, स्वाद कलिकाएँ एवं लार की क्...
5 5. ग्रसिका एवं आमाशय में पाचन (Oeso...
6 6. क्षुद्रांत्र (छोटी आंत), यकृत एव...
7 7. रसांकुर / दीर्घरॉम द्वारा अवशोषण...
8 8. वृहदांत्र, जल अवशोषण एवं निष्कास...
9 9. घास खाने वाले जंतुओं (रोमंथी / R...
10 10. एककोशिकीय जीव अमीबा में संभरण ए...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. प्राणी पोषण एवं इसके 5 मुख्य चरण (Animal Nutrition & Its 5 Stages)

पाचन (Digestion): जटिल एवं अघुलनशील खाद्य पदार्थों को यांत्रिक (चबाने) एवं रासायनिक (पाचक रसों) क्रियाओं द्वारा सरल एवं घुलनशील पदार्थों में तोड़े जाने के प्रक्रम को पाचन कहते हैं।

सभी प्राणियों में पोषण निम्नलिखित 5 क्रमिक चरणों में संपन्न होता है:

  1. अंतर्ग्रहण (Ingestion): भोजन को शरीर के अंदर ग्रहण करने (खाने) की क्रिया।
  2. पाचन (Digestion): जटिल भोजन को पाचक एंजाइमों द्वारा सरल अणुओं (ग्लूकोज, अमीनो अम्ल) में तोड़ना।
  3. अवशोषण (Absorption): पचे हुए तरल पोषक तत्वों का आंत की दीवारों से होकर रक्त वाहिकाओं में मिलना।
  4. स्वांगीकरण (Assimilation): अवशोषित पोषक तत्वों का कोशिकाओं द्वारा शारीरिक वृद्धि, ऊतक मरम्मत एवं ऊर्जा निर्माण में उपयोग।
  5. निष्कासन / बहिःक्षेपण (Egestion): अपचित अखाद्य अपशिष्ट (मल) को शरीर से बाहर त्यागना।
💡 महत्वपूर्ण अंतर: निष्कासन (Egestion) आहार नाल से अपचित भोजन (मल) को बाहर निकालना है, जबकि उत्सर्जन (Excretion) कोशिकाओं के उपापचयी रासायनिक कचरे (मूत्र/पसीना) को बाहर निकालना है।

2. भोजन ग्रहण करने की विभिन्न विधियाँ (Modes of Taking Food)

विभिन्न जीवों में भोजन पकड़ने और ग्रहण करने की विशेष शारीरिक विधियाँ होती हैं:

  • मधुमक्खी एवं हमिंग बर्ड: फूलों का मकरंद (Nectar) चूसते (Sucking) हैं।
  • घोंघा (Snail): पत्तियों और काई को खुरचकर (Scraping) खाता है।
  • चींटी (Ant): भोजन के बारीक कणों को जबड़ों से चबाती (Chewing) है।
  • चील व बाज: शिकार को पंजों से पकड़कर फाड़ते हैं और निगल (Swallowing) जाते हैं।
  • मच्छर व जूँ: त्वचा भेदकर रक्त चूसते हैं।
  • तितली: लंबी नली से फूलों के रस को साइफन द्वारा खींचती है।
⭐ तारा मछली (Starfish) का अद्भुत भोजन: कठोर कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के खोल वाले जीवों को खाते समय तारा मछली अपने मुंह से अपना ही आमाशय (पेट) बाहर निकाल लेती है! आमाशय शिकार के कोमल अंगों को वहीं बाहर पचाकर तरल बना देता है, फिर वह आमाशय को वापस पेट में खींच लेती है!

3. मुख एवं दाँतों के प्रकार (Teeth: Types & Functions)

वयस्क मनुष्य के मुख में कुल 32 दाँत होते हैं (ऊपरी जबड़े में 16, निचले जबड़े में 16)। दाँतों के 4 विशिष्ट प्रकार हैं:

दाँत का प्रकारकुल संख्याआकार व स्थानप्रमुख कार्य
कृंतक (Incisors)8 (4+4)सामने के चपटे दाँतकाटना एवं कुतरना (Cutting)
रदनक (Canines)4 (2+2)कृंतक के बगल के नुकीले दाँतचीरना एवं फाड़ना (Piercing & Tearing)
अग्र-चवर्णक (Premolars)8 (4+4)रदनक के पीछे चपटी सतह वालेकुचलना एवं चबाना (Chewing)
चवर्णक (Molars)12 (6+6)सबसे पीछे चौड़ी दाढ़ेंबारीक पीसना (Grinding)

दूध के दाँत बनाम स्थायी दाँत: शैशवावस्था में निकलने वाले 20 दाँत 6 से 8 वर्ष की आयु तक गिर जाते हैं (दूध के दाँत)। इनके स्थान पर जीवन भर रहने वाले 32 स्थायी दाँत निकलते हैं।

दंत-क्षय (Tooth Decay): दाँतों में फंसी शर्करा पर जब बैक्टीरिया क्रिया करते हैं, तो अम्ल (Acid) बनता है जो दाँत की सुरक्षात्मक कठोर परत इनेमल (Enamel) को गला देता है।

4. जीभ, स्वाद कलिकाएँ एवं लार की क्रिया (Tongue, Taste Buds & Saliva)

जीभ के कार्य: भोजन में लार मिलाना, निगलने में सहायता, शब्दों का स्पष्ट उच्चारण और विभिन्न स्वादों की पहचान।

स्वाद कलिकाएँ (Taste Buds): जीभ के विभिन्न भागों पर 4 प्राथमिक स्वाद होते हैं: मीठा (अग्र भाग), नमकीन (अग्र-किनारे), खट्टा (पश्च-किनारे), और कड़वा (पश्च भाग)।

लार का रासायनिक पाचन: लार में लार एमाइलेज (Salivary Amylase / टायलिन) एंजाइम होता है, जो फीके अघुलनशील मंड (स्टार्च) को मीठी सरल शर्करा (माल्टोज) में तोड़ देता है:

$$\text{स्टार्च (Starch - फीका)} \xrightarrow{\text{लार एमाइलेज (Saliva)}} \text{माल्टोज शर्करा (Maltose - मीठी)}$$

प्रयोग (Activity): दो परखनलियों में उबले चावल लें (A में सादे उबले चावल, B में 3 मिनट चबाए हुए चावल)। दोनों में आयोडीन डालने पर A का रंग गहरा नीला-काला हो जाता है (स्टार्च उपस्थित), जबकि B में लार द्वारा स्टार्च पच जाने के कारण नीला रंग नहीं आता।

5. ग्रसिका एवं आमाशय में पाचन (Oesophagus & Stomach Digestion)

ग्रसिका (Oesophagus): लगभग 25 सेमी लंबी नली जिसमें कोई पाचक रस नहीं बनता। इसकी पेशियों की तरंग जैसी लयबद्ध गति (क्रमाकुंचन / Peristalsis) भोजन को नीचे आमाशय में धकेलती है। उल्टी के समय प्रतिलोम क्रमाकुंचन (Reverse Peristalsis) होता है।

आमाशय (Stomach): आहार नाल का सबसे चौड़ा, मोटी भित्ति वाला J-आकार का थैला जहाँ भोजन 3–4 घंटे तक मथा जाता है। आमाशय की भीतरी दीवार से जठर रस (Gastric Juice) निकलता है जिसके 3 घटक हैं:

  • श्लेष्मल (Mucous): आमाशय की भीतरी दीवार को तेज हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के संक्षारण से बचाता है।
  • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$): भोजन के साथ आए जीवाणुओं को नष्ट करता है तथा पाचक एंजाइम के कार्य हेतु तीव्र अम्लीय माध्यम ($pH \approx 1.5 - 2$) बनाता है।
  • पाचक रस (पेप्सिन / Pepsin): अम्लीय माध्यम में जटिल प्रोटीन को सरल पेप्टाइड्स/पेप्टोन में तोड़ता है।
ऐतिहासिक तथ्य: सन् 1822 में गोली से घायल सैनिक एलेक्सिस सेंट मार्टिन के पेट के खुले छेद के माध्यम से अमेरिकी डॉक्टर विलियम ब्यूमोंट ने पहली बार आमाशय के वास्तविक पाचन और जठर रस की खोज की थी।

6. क्षुद्रांत्र (छोटी आंत), यकृत एवं अग्न्याशय (Small Intestine, Liver & Pancreas)

क्षुद्रांत्र (Small Intestine): आहार नाल का सबसे लंबा भाग (लगभग 7.5 मीटर लंबी कुंडलित नली)। यहाँ भोजन का संपूर्ण पाचन और अवशोषण होता है। इसमें दो मुख्य ग्रंथियों के रस मिलते हैं:

  1. यकृत (Liver) एवं पित्त रस: यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो पित्त रस (Bile Juice) बनाती है। यह रस पित्ताशय (Gall Bladder) में संचित रहता है। पित्त रस अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है तथा वसा की बड़ी गोलिकाओं को सूक्ष्म बूंदों में तोड़ता है (वसा का पायसीकरण / Emulsification)।
  2. अग्न्याशय (Pancreas): आमाशय के नीचे स्थित क्रीम रंग की पत्तीनुमा ग्रंथि जो अग्न्याशयी रस स्रावित करती है। इसमें ट्रिप्सिन (प्रोटीन पाचक), एमाइलेज (कार्बोहाइड्रेट पाचक) और लाइपेज (वसा पाचक) एंजाइम होते हैं।

आंत्र रस द्वारा पाचन की पूर्णता:

• कार्बोहाइड्रेट $\longrightarrow$ ग्लूकोज (सरल शर्करा)
• वसा $\longrightarrow$ वसा अम्ल (Fatty Acids) + ग्लिसरॉल (Glycerol)
• प्रोटीन $\longrightarrow$ अमीनो अम्ल (Amino Acids)

7. रसांकुर / दीर्घरॉम द्वारा अवशोषण (Absorption by Villi)

रसांकुर (Villi): क्षुद्रांत्र की आंतरिक भित्ति पर लाखों उंगलीनुमा उभरी हुई सूक्ष्म संरचनाएँ पाई जाती हैं जिन्हें रसांकुर (दीर्घरॉम / Villi) कहते हैं।

अवशोषण की कार्यप्रणाली:

  • विशाल पृष्ठीय क्षेत्रफल: रसांकुर आंत के भीतरी क्षेत्रफल को सैकड़ों गुना (लगभग 250 वर्ग मीटर) बढ़ा देते हैं, जिससे भोजन का अवशोषण अत्यंत तीव्र गति से होता है।
  • रक्त केशिकाओं का जाल: प्रत्येक रसांकुर के नीचे अत्यंत पतली रक्त वाहिकाओं (Capillaries) का जाल होता है। पचा हुआ ग्लूकोज और अमीनो अम्ल विसरण द्वारा सीधे रक्त में अवशोषित हो जाते हैं।
  • लैक्टियल (Lacteal): रसांकुर के केंद्र में स्थित लसीका वाहिनी वसा अम्ल और ग्लिसरॉल का अवशोषण करती है।

स्वांगीकरण (Assimilation): रक्त परिसंचरण द्वारा ये पोषक तत्व शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचते हैं, जहाँ ग्लूकोज ऑक्सीजन से टूटकर $ATP$ ऊर्जा बनाता है और अमीनो अम्ल नई कोशिकाओं का निर्माण करते हैं।

8. वृहदांत्र, जल अवशोषण एवं निष्कासन (Large Intestine & Egestion)

वृहदांत्र (Large Intestine): लगभग 1.5 मीटर लंबी एवं क्षुद्रांत्र से अधिक चौड़ी नली।

मुख्य कार्य: वृहदांत्र में कोई पाचन नहीं होता। इसका एकमात्र कार्य अपचित अखाद्य अपशिष्ट में से अतिरिक्त जल एवं कुछ लवणों का अवशोषण करना है।

निष्कासन (Egestion): जल सोख लिए जाने के बाद अर्ध-ठोस अपशिष्ट मलाशय (Rectum) में मल के रूप में जमा होता है और समय-समय पर गुदा (Anus) द्वारा शरीर से बाहर त्याग दिया जाता है।

🚨 दस्त (Diarrhoea) एवं ORS का जीवनरक्षक महत्व: संक्रमण या अपच के कारण शरीर से अत्यधिक जल व लवण बाहर बह जाने को निर्जलीकरण (Dehydration) कहते हैं। इससे बचाव के लिए तुरंत जीवन रक्षक घोल (ORS)—उबले पानी में चुटकी भर नमक और चीनी—पिलाना चाहिए।

9. घास खाने वाले जंतुओं (रोमंथी / Ruminants) में पाचन

गाय, भैंस, बकरी और हिरण जैसे शाकाहारी पशुओं को रोमंथी (Ruminants) कहते हैं। घास में पौधों की कोशिका भित्ति का कठोर सेल्यूलोस (Cellulose) होता है जिसे साधारण आमाशय नहीं पचा सकता।

रोमंथन (जुगाली) की चरणबद्ध प्रक्रिया:

  1. त्वरित निगलना: पशु घास को बिना चबाए तेजी से निगलकर आमाशय के पहले विशाल कक्ष—रुमेन (Rumen)—में संचित कर लेते हैं।
  2. जुगाल (Cud): रुमेन में भोजन आंशिक रूप से पचता है, जिसे जुगाल (Cud) कहते हैं।
  3. जुगाली करना (Rumination): विश्राम के समय यह जुगाल छोटे गोलों के रूप में मुंह में वापस आता है और पशु इसे घंटों चबाता रहता है।
  4. सेल्यूलोस का पाचन: छोटी व बड़ी आंत के बीच स्थित बड़ी थैली अंधनाल (Caecum) और रुमेन में पाए जाने वाले विशिष्ट सहजीवी सेल्यूलोस-पाचक जीवाणु सेल्यूलोस को किण्वित करके पचाते हैं।
❓ मनुष्य घास क्यों नहीं पचा सकता? मनुष्य के पाचन तंत्र में न तो सेल्यूलोस-पाचक सेल्यूलेज एंजाइम बनता है और न ही अंधनाल में सेल्यूलोस-पाचक जीवाणु पाए जाते हैं। अतः मनुष्य के लिए घास अपचनीय है।

10. एककोशिकीय जीव अमीबा में संभरण एवं पाचन (Nutrition in Amoeba)

अमीबा (Amoeba): तालाबों के ताजे जल में रहने वाला एककोशिकीय सूक्ष्मदर्शीय जीव, जिसकी कोई निश्चित आकृति नहीं होती।

पाचन के 5 चरण:

  1. कूटपाद / पादाभ (Pseudopodia): खाद्य कण का आभास होते ही अमीबा उंगली जैसे अस्थायी प्रवर्ध (झूठे पैर) निकालता है और भोजन को चारों ओर से घेर लेता है।
  2. खाद्य धानी (Food Vacuole): भोजन घिरकर एक जल भरे बुलबुले जैसी खाद्य धानी (अस्थाई पेट) में बंद हो जाता है।
  3. पाचन (Digestion): कोशिकाद्रव्य से पाचक रस खाद्य धानी में स्रावित होकर भोजन को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं।
  4. अवशोषण व स्वांगीकरण: पचा हुआ भोजन सीधे कोशिकाद्रव्य में विसरित होकर अमीबा की वृद्धि और जनन में प्रयुक्त होता है।
  5. निष्कासन (Egestion): अपचित अपशिष्ट खाद्य धानी द्वारा कोशिका झिल्ली के किनारे लाकर बाहर पानी में फेंक दिया जाता है।

निष्कर्ष: चाहे प्राणी बहुकोशिकीय मानव हो या एककोशिकीय अमीबा, पाचन का मूल सिद्धांत हमेशा जटिल भोजन को सरल अणुओं में तोड़ना ही रहता है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

लार द्वारा मंड पाचन
मंड (Starch) → एमाइलेज (Saliva) → माल्टोज शर्करा
मुख गुहिका में संपन्न
आमाशयिक प्रोटीन पाचन
प्रोटीन → पेप्सिन + HCl अम्ल → सरल पेप्टाइड्स
अम्लीय माध्यम (pH 1.5 - 2)
वसा का पायसीकरण
जटिल वसा → पित्त लवण (Bile) → सूक्ष्म वसा बूंदें
यकृत का पित्त रस
अंतिम आंत्र रस पाचन
कार्बोहाइड्रेट → ग्लूकोज | वसा → वसा अम्ल | प्रोटीन → अमीनो अम्ल
क्षुद्रांत्र (Small Intestine)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
Q1 (प्रत्यास्मरण): मानव मुख में पाए जाने वाले चारों प्रकार के दाँतों के नाम और कुल संख्या लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: वयस्क मनुष्य में कुल 32 दाँत होते हैं:
1. कृंतक (Incisors) = 8 (काटने वाले)
2. रदनक (Canines) = 4 (चीरने-फाड़ने वाले)
3. अग्र-चवर्णक (Premolars) = 8 (चबाने वाले)
4. चवर्णक (Molars) = 12 (बारीक पीसने वाले)।
उदाहरण 2
Q2 (अवधारणा): यद्यपि यकृत के पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता, फिर भी यह पाचन के लिए अनिवार्य क्यों है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: इसके दो अनिवार्य वैज्ञानिक कारण हैं:
1. वसा का पायसीकरण: यह वसा की बड़ी गोलिकाओं को सूक्ष्म बूंदों में तोड़ता है ताकि लाइपेज एंजाइम उन पर क्रिया कर सके।
2. क्षारीय माध्यम: यह आमाशय से आए तीव्र अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है, जिसके बिना अग्न्याशयी एंजाइम कार्य नहीं कर सकते।
उदाहरण 3
Q3 (अनुप्रयोग): सूखी रोटी को 2-3 मिनट तक लगातार चबाने पर वह मीठी क्यों लगने लगती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: रोटी में फीका जटिल कार्बोहाइड्रेट (मंड/स्टार्च) होता है। जब हम इसे देर तक चबाते हैं, तो लार ग्रंथियों से निकली लार में उपस्थित लार एमाइलेज एंजाइम मंड को रासायनिक रूप से तोड़कर मीठी सरल शर्करा (माल्टोज) में बदल देता है।
उदाहरण 4
Q4 (कारण व प्रभाव): छोटी आंत की भीतरी भित्ति पर उपस्थित रसांकुर (Villi) भोजन अवशोषण में कैसे सहायता करते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: रसांकुर उंगली जैसे लाखों उभार हैं जो छोटी आंत के भीतरी क्षेत्रफल को सैकड़ों गुना (लगभग 250 वर्ग मीटर) बढ़ा देते हैं। इनकी पतली दीवार के नीचे रक्त केशिकाओं का घना जाल होता है, जिससे पचा हुआ भोजन तीव्र गति से विसरित होकर रक्त में मिल जाता है।
उदाहरण 5
Q5 (उच्च स्तरीय चिंतन): गाय हरी घास और भूसा खाकर स्वस्थ रहती है, किंतु मनुष्य घास खाकर जीवित क्यों नहीं रह सकता?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: घास में पौधों की कठोर कोशिका भित्ति का सेल्यूलोस (Cellulose) होता है। गाय के आमाशय के रुमेन तथा अंधनाल (Caecum) में विशिष्ट सहजीवी सेल्यूलोस-पाचक जीवाणु पाए जाते हैं जो सेल्यूलेज एंजाइम बनाकर सेल्यूलोस को पचा देते हैं। मनुष्य के पाचन तंत्र में न तो सेल्यूलेज एंजाइम बनता है और न ही ये जीवाणु होते हैं, अतः मनुष्य घास नहीं पचा सकता।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

निष्कासन (Egestion) और उत्सर्जन (Excretion) को एक ही समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

निष्कासन आहार नाल से बिना पचे भोजन (मल) को बाहर निकालना है, जबकि उत्सर्जन कोशिकाओं के रासायनिक कचरे (मूत्र/पसीना) को गुर्दे द्वारा बाहर निकालना है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि भोजन का मुख्य पाचन आमाशय (पेट) में समाप्त हो जाता है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आमाशय में केवल प्रोटीन का आंशिक पाचन होता है। भोजन का वास्तविक संपूर्ण पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण छोटी आंत (क्षुद्रांत्र) में पूरा होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बड़ी आंत को छोटी आंत से अधिक लंबी समझना क्योंकि नाम "बड़ी" आंत है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

छोटी आंत (क्षुद्रांत्र) लंबाई में लगभग 7.5 मीटर लंबी होती है, जबकि बड़ी आंत (वृहदांत्र) केवल 1.5 मीटर लंबी होती है। नाम चौड़ाई (व्यास) के आधार पर रखा गया है, लंबाई पर नहीं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

मानव पाचन तंत्र एवं भोजन का प्रवाह चक्र (Human Digestion Pathway)
1. मुख (दाँत + लार एमाइलेज) ➔ 2. ग्रसिका (क्रमाकुंचन) ➔ 3. आमाशय (HCl + पेप्सिन) ➔ 4. क्षुद्रांत्र (पित्त + अग्न्याशय + रसांकुर) ➔ 5. वृहदांत्र (जल अवशोषण) ➔ 6. गुदा (मल त्याग)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
प्राणी पोषण के 5 क्रमिक चरण हैं: अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण और निष्कासन।
मुख्य बिंदु 2
जटिल अघुलनशील खाद्य पदार्थों को सरल घुलनशील अणुओं में तोड़ना पाचन कहलाता है।
मुख्य बिंदु 3
वयस्क मनुष्य में 32 दाँत होते हैं: 8 कृंतक (काटने वाले), 4 रदनक (चीरने वाले), 8 अग्र-चवर्णक और 12 चवर्णक (पीसने वाले)।
मुख्य बिंदु 4
लार का एमाइलेज एंजाइम मंड (स्टार्च) को मीठी शर्करा (माल्टोज) में तोड़ता है।
मुख्य बिंदु 5
ग्रसिका में कोई पाचक रस नहीं होता; भोजन क्रमाकुंचन (Peristalsis) गति से आमाशय में पहुँचता है।
मुख्य बिंदु 6
आमाशय में श्लेष्मल (भित्ति सुरक्षा), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (जीवाणुनाशक व अम्लीय माध्यम) और पेप्सिन (प्रोटीन पाचन) कार्य करते हैं।
मुख्य बिंदु 7
यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो पित्त रस बनाकर पित्ताशय में रखती है; यह वसा का पायसीकरण (Emulsification) करता है।
मुख्य बिंदु 8
क्षुद्रांत्र (7.5 मीटर) में पाचन पूरा होता है: कार्बोहाइड्रेट → ग्लूकोज, वसा → वसा अम्ल/ग्लिसरॉल, और प्रोटीन → अमीनो अम्ल।
मुख्य बिंदु 9
क्षुद्रांत्र के लाखों उंगलीनुमा रसांकुर (Villi) अवशोषण सतह को कई सौ गुना बढ़ाकर पचे भोजन का तीव्र अवशोषण करते हैं।
मुख्य बिंदु 10
रोमंथी (गाय-भैंस) रुमेन में जुगाल संचित कर जुगाली करते हैं और अंधनाल के जीवाणुओं द्वारा सेल्यूलोस पचाते हैं; अमीबा कूटपादों से खाद्य धानी में पाचन करता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मानव मुख में पाए जाने वाले चारों प्रकार के दाँतों के नाम और उनके विशिष्ट कार्य क्या हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कृंतक (काटना व कुतरना), रदनक (चीरना व फाड़ना), अग्र-चवर्णक (कुचलना व चबाना), और चवर्णक (बारीक पीसना)। वयस्क में कुल संख्या 32 होती है।
2
यकृत द्वारा स्रावित पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता, फिर भी यह पाचन के लिए अनिवार्य क्यों है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पित्त रस वसा की बड़ी गोलिकाओं को सूक्ष्म बूंदों में तोड़ता है (पायसीकरण / Emulsification) तथा आमाशय से आए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है ताकि अग्न्याशयी एंजाइम कार्य कर सकें।
3
उबले चावल को 3 मिनट तक चबाने पर वह मीठा क्यों लगने लगता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लार में उपस्थित लार एमाइलेज एंजाइम चावल के फीके मंड (स्टार्च) को रासायनिक रूप से तोड़कर मीठी शर्करा (माल्टोज) में बदल देता है।
4
क्षुद्रांत्र (छोटी आंत) की भीतरी दीवार पर उपस्थित रसांकुर (Villi) की क्या उपयोगिता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: रसांकुर छोटी आंत के आंतरिक पृष्ठीय क्षेत्रफल को कई सौ गुना बढ़ाकर पचे हुए पोषक तत्वों के तीव्र अवशोषण को संभव बनाते हैं।
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गाय घास (सेल्यूलोस) आसानी से पचा लेती है, किंतु मनुष्य घास क्यों नहीं पचा सकता?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: गाय के रुमेन और अंधनाल में सेल्यूलोस-पाचक सहजीवी जीवाणु होते हैं जो सेल्यूलेज एंजाइम बनाते हैं। मनुष्य में न तो यह एंजाइम बनता है और न ही ये जीवाणु पाए जाते हैं।
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