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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Science • अध्याय 1
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

पादपों में पोषण (Nutrition in Plants)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) कक्षा 7 विज्ञान का प्रथम अध्याय "पादपों में पोषण" (Nutrition in Plants) पृथ्वी पर जीवन के पोषण चक्र का मूल आधार है। इस अध्याय में सजीवों में पोषण की आवश्यकता, स्वपोषण, प्रकाश-संश्लेषण की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली, विभिन्न विषमपोषी विधियाँ (परजीवी, कीटभक्षी, मृतजीवी), सहजीवी संबंध तथा मिट्टी में पोषक तत्वों के पुनर्भरण का विस्तृत और प्रमाणित अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

🔬 क्या आपने कभी सोचा है?

🌱 एक छोटा-सा पौधा धीरे-धीरे विशाल वृक्ष कैसे बन जाता है? पौधों को हम खाना खाते हुए नहीं देखते, फिर भी वे जीवित कैसे रहते हैं?

🍃 पत्तियाँ हमेशा हरी क्यों दिखाई देती हैं और सूर्य के प्रकाश का पौधों के भोजन से क्या सीधा संबंध है?

🌵 और यदि पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, तो घटपर्णी (Pitcher Plant) जैसे विचित्र पौधे कीटों को क्यों पकड़कर पचा जाते हैं?

इन सभी रोचक व मौलिक वैज्ञानिक प्रश्नों के उत्तर हमें पादपों में पोषण (Nutrition in Plants) के अध्ययन से मिलते हैं। पौधे केवल अपना भोजन ही नहीं बनाते, बल्कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी के समस्त जीव-जगत के भोजन व प्राणवायु (ऑक्सीजन) का आधार हैं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

हम प्रतिदिन चावल, गेहूँ, दाल, फल और सब्जियाँ खाते हैं जो सीधे पौधों से प्राप्त होती हैं। यहाँ तक कि दूध, अंडे या मांसाहारी भोजन भी अंततः पौधों पर ही निर्भर है, क्योंकि सभी शाकाहारी पशु पौधों को खाते हैं। हरे पौधों में यह अद्वितीय प्राकृतिक क्षमता है कि वे सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर भोजन बना सकते हैं। इस अध्याय को समझकर आप खाद्य जाल, पौधों की जैविक क्रियाओं, मिट्टी की उर्वरता और जीवों की परस्पर निर्भरता को गहराई से समझ सकेंगे।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पौधे सजीव हैं और वृद्धि व जैविक क्रियाओं के लिए उन्हें निरंतर पोषण की आवश्यकता होती है।
  • पौधे के मुख्य अंग जड़, तना और पत्तियाँ हैं।
  • जड़ें मिट्टी से जल तथा आवश्यक खनिज लवण अवशोषित करती हैं।
  • सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का एकमात्र और सर्वप्रमुख प्राकृतिक स्रोत है।
  • प्रकृति में पौधे और जन्तु भोजन व आवास के लिए परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पोषण (Nutrition) का वैज्ञानिक अर्थ और जीवन में इसका महत्व समझा सकेंगे।
  • स्वपोषी (Autotroph) और विषमपोषी (Heterotroph) में सुस्पष्ट अंतर बता सकेंगे।
  • प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) के लिए आवश्यक 4 मुख्य कारकों (सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, CO₂, जल) की भूमिका स्पष्ट कर सकेंगे।
  • पत्तियों में रंध्र (Stomata) की संरचना तथा गैसों के विनिमय की प्रक्रिया का वर्णन कर सकेंगे।
  • पत्ती में स्टार्च (मण्ड) की उपस्थिति हेतु आयोडीन परीक्षण की विधि व परिणाम समझा सकेंगे।
  • परजीवी (Cuscuta), कीटभक्षी (Pitcher Plant) और मृतजीवी (Fungi) पोषण के उदाहरण व अंतर पहचान सकेंगे।
  • सहजीविता (Symbiosis) को लाइकेन (Lichen) और राइजोबियम (Rhizobium) के उदाहरणों सहित सिद्ध कर सकेंगे।
  • फसलों द्वारा मिट्टी से अवशोषित पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति (Replenishment of Soil) के तरीके समझ सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पोषण क्या है एवं इसके मुख्य प्रक...
2 2. हरे पौधे भोजन कैसे बनाते हैं? —...
3 3. प्रकाश-संश्लेषण की चरणबद्ध कार्य...
4 4. पत्तियों की विशेष संरचना: रंध्र...
5 5. स्टार्च का संचयन एवं प्रयोगशाला...
6 6. क्या केवल पत्तियाँ ही प्रकाश-संश...
7 7. विषमपोषी पोषण: परजीवी पादप — अमर...
8 8. कीटभक्षी पादप: घटपर्णी (Insectiv...
9 9. मृतजीवी पोषण: कवक एवं फफूँद (Sap...
10 10. सहजीवी संबंध: लाइकेन एवं राइजोब...
11 11. मिट्टी में पोषक तत्वों की पुनःप...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पोषण क्या है एवं इसके मुख्य प्रकार (What is Nutrition & Modes of Nutrition)

1. अवधारणा एवं परिभाषा

सभी सजीवों को जीवित रहने, चलने, पढ़ने, खेलने, शारीरिक वृद्धि तथा क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए ऊर्जा और कच्चे पदार्थों की आवश्यकता होती है।

पोषण (Nutrition): सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने तथा शरीर द्वारा उसके उपयोग करने की संपूर्ण प्रक्रिया को पोषण कहते हैं।

भोजन के वे घटक जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक हैं, पोषक तत्व (Nutrients) कहलाते हैं—जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज लवण।

2. पोषण की दो प्रमुख विधियाँ
तुलना का आधारस्वपोषी पोषण (Autotrophic)विषमपोषी पोषण (Heterotrophic)
शब्द व्युत्पत्ति Auto = स्वयं (Self) + Trophos = पोषण Heteros = विषम/अन्य (Other) + Trophos = पोषण
भोजन का निर्माण सरल अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
प्रमुख उदाहरण हरे पौधे, नीले-हरे शैवाल (Cyanobacteria)। मानव, समस्त जंतु, अमरबेल, कवक।

2. हरे पौधे भोजन कैसे बनाते हैं? — प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis)

1. शब्द का अर्थ एवं परिभाषा

हरे पौधे अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं, इसलिए वे स्वपोषी (Autotrophs) हैं। भोजन निर्माण की इस जैव-रासायनिक प्रक्रिया को प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) कहते हैं:

  • Photo: प्रकाश (Light)
  • Synthesis: निर्माण करना या जोड़ना (To combine / put together)

पत्तियों को पौधे की खाद्य फैक्ट्रियाँ (Food Factories) कहा जाता है क्योंकि भोजन निर्माण का अधिकांश कार्य पत्तियों में संपन्न होता है।

2. चार अनिवार्य घटक (4 Essential Raw Materials)
  1. सूर्य का प्रकाश (Sunlight): यह पौधे को भोजन पकाने के लिए आवश्यक सौर ऊर्जा प्रदान करता है।
  2. क्लोरोफिल (Chlorophyll): पत्तियों की कोशिकाओं में पाया जाने वाला हरा वर्णक, जो सौर ऊर्जा को अवशोषित व संग्रहित करता है।
  3. कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$): वायुमंडल से पत्तियों के सूक्ष्म छिद्रों (रंध्रों) द्वारा ग्रहण की जाती है।
  4. जल एवं खनिज ($H_2O$): जड़ों द्वारा मिट्टी से अवशोषित होकर जाइलम वाहिकाओं द्वारा पत्तियों तक पहुँचते हैं।
3. प्रकाश-संश्लेषण का रासायनिक समीकरण
$$6CO_2 + 6H_2O \xrightarrow[\text{क्लोरोफिल}]{\text{सूर्य का प्रकाश}} C_6H_{12}O_6 \text{ (ग्लूकोज)} + 6O_2 \uparrow$$
कार्बन डाइऑक्साइड + जल $\to$ कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) + ऑक्सीजन गैस

3. प्रकाश-संश्लेषण की चरणबद्ध कार्यप्रणाली (Step-by-Step Mechanism)

चरण 1: जड़ें मिट्टी के कणों के बीच उपस्थित जल एवं घुले हुए खनिज लवणों को अवशोषित करती हैं।

चरण 2: तने में मौजूद विशेष संवहनी नलिकाओं (Vessels) के द्वारा जल ऊपर पत्तियों तक पहुँचाया जाता है।

चरण 3: पत्तियों की निचली व ऊपरी सतह पर उपस्थित रंध्र (Stomata) वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड गैस ग्रहण करते हैं।

चरण 4: पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट में उपस्थित क्लोरोफिल सौर ऊर्जा के फोटॉनों को पकड़ लेता है।

चरण 5: सौर ऊर्जा की सहायता से जल के अणु टूटते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलकर कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण करते हैं।

चरण 6: इस अभिक्रिया के उप-उत्पाद (By-product) के रूप में शुद्ध ऑक्सीजन ($O_2$) गैस बनती है, जो रंध्रों द्वारा वायुमंडल में मुक्त कर दी जाती है।

4. पत्तियों की विशेष संरचना: रंध्र एवं द्वार कोशिकाएँ (Stomata & Guard Cells)

पत्तियों की बाह्यत्वचा (Epidermis) पर अति सूक्ष्म छिद्र होते हैं जिन्हें रंध्र (Stomata / स्टोमेटा) कहते हैं।

  • द्वार कोशिकाएँ (Guard Cells): प्रत्येक रंध्र दो गुर्दे के आकार (किडनी-बीन शेप्ड) की कोशिकाओं से घिरा होता है। जब इनमें जल भरता है तो ये फूलकर छिद्र को खोल देती हैं, और जल की कमी होने पर सिकुड़कर छिद्र को बंद कर देती हैं।
  • रंध्रों के कार्य:
    1. प्रकाश-संश्लेषण एवं श्वसन के लिए गैसों ($CO_2$ और $O_2$) का विनिमय करना।
    2. वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा अतिरिक्त जल को वाष्प रूप में बाहर निकालना, जिससे पौधे का तापमान नियंत्रित रहता है।
⚠️ परीक्षक का जाल (Examiner Trap): पौधे मिट्टी से बना-बनाया भोजन नहीं खींचते! जड़ें केवल जल और खनिज लवण अवशोषित करती हैं। भोजन का निर्माण केवल पत्तियों/हरे भागों में होता है।

5. स्टार्च का संचयन एवं प्रयोगशाला परीक्षण (Food Storage & Starch Iodine Test)

प्रकाश-संश्लेषण में सबसे पहले सरल कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज बनता है। पौधा अपनी तात्कालिक ऊर्जा आवश्यकताओं के बाद बचे हुए अतिरिक्त ग्लूकोज को जटिल कार्बोहाइड्रेट यानी स्टार्च (मण्ड / Starch) के रूप में पत्तियों, तनों, फलों व जड़ों में संग्रहित कर लेता है।

प्रयोगशाला गतिविधि: पत्ती में स्टार्च की जाँच (Iodine Test)
  1. पौधे की एक हरी पत्ती को पहले उबलते पानी में कुछ मिनट उबालें ताकि कोशिका भित्ति कोमल हो जाए।
  2. इसके बाद पत्ती को एल्कोहॉल (स्पिरिट) से भरे बीकर में रखकर वाटर बाथ में तब तक गर्म करें जब तक उसका सारा हरा क्लोरोफिल धुल न जाए और पत्ती रंगहीन न हो जाए।
  3. पत्ती को ठंडे पानी से धोकर पेट्री डिश में फैलाएँ और उस पर तनु आयोडीन विलयन (Dilute Iodine Solution) की कुछ बूँदें डालें।
  4. अवलोकन: पत्ती का रंग तुरंत गहरा नीला-काला (Blue-Black) हो जाता है।
  5. निष्कर्ष: आयोडीन केवल स्टार्च के साथ ही नीला-काला रंग देता है। यह प्रमाणित करता है कि प्रकाश-संश्लेषण के परिणामस्वरूप पत्ती में स्टार्च बना है।

6. क्या केवल पत्तियाँ ही प्रकाश-संश्लेषण करती हैं? (Photosynthesis in Non-Leaf Parts)

सामान्यतः पत्तियाँ मुख्य खाद्य फैक्ट्री हैं, परंतु पौधे का कोई भी हरा भाग जिसमें क्लोरोफिल मौजूद हो, प्रकाश-संश्लेषण कर सकता है:

  • मरुस्थलीय पौधे (जैसे कैक्टस / नागफनी): वाष्पोत्सर्जन से जल हानि रोकने के लिए पत्तियाँ काँटों (शूलों) में रूपांतरित हो जाती हैं। अतः भोजन बनाने का संपूर्ण कार्य उनका हरा, गूदेदार तना करता है।
  • विभिन्न रंगों वाली पत्तियाँ (लाल, भूरी, पीली): इन पत्तियों में भी क्लोरोफिल प्रचुर मात्रा में उपस्थित होता है, परंतु लाल या भूरे रंग के अन्य वर्णक (Carotenoids / Anthocyanins) हरे रंग को ढँक लेते हैं। ये पत्तियाँ भी सामान्य रूप से प्रकाश-संश्लेषण करती हैं।
  • जलीय शैवाल (Algae): पोखरों व गंदे पानी पर तैरने वाली हरी काई (शैवाल) में भी क्लोरोफिल होता है और वे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा स्वयं पोषित होते हैं।

7. विषमपोषी पोषण: परजीवी पादप — अमरबेल (Parasitic Nutrition: Cuscuta)

कुछ पौधों में क्लोरोफिल नहीं पाया जाता, अतः वे अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। वे पोषण के लिए दूसरे जीवित पौधों पर निर्भर रहते हैं।

अमरबेल (Cuscuta / Dodder):

आपने वृक्षों के तनों पर पीले रंग की धागे जैसी कुंडलित शाखाएँ लिपटी देखी होंगी। यह अमरबेल है।

  • पोषक (Host): वह सजीव वृक्ष या पौधा जिस पर अमरबेल चढ़ती है और जिससे पोषण चूसती है, उसे होस्ट (पोषक) कहते हैं।
  • परजीवी (Parasite): अमरबेल अपने विशेष चूषक अंगों (Haustoria) को पोषक वृक्ष के ऊतकों में धँसाकर बना-बनाया तैयार भोजन सोख लेती है। इससे अमरबेल को लाभ होता है परंतु पोषक वृक्ष कमजोर हो जाता है।

8. कीटभक्षी पादप: घटपर्णी (Insectivorous Plants: Pitcher Plant)

कुछ पौधे कीटों को पकड़ते हैं और उनका पाचन करके पोषण प्राप्त करते हैं। इन्हें कीटभक्षी पौधे (Insectivorous Plants) कहते हैं, जैसे घटपर्णी (Pitcher Plant), वीनस फ्लाईट्रैप (Venus Flytrap) और ड्रोसेरा (Drosera)।

घटपर्णी (Pitcher Plant) की कार्यविधि:

घटपर्णी में पत्ती का अगला सिरा एक घड़े (Pitcher) के रूप में रूपांतरित हो जाता है और पत्ती का शीर्ष घड़े का ढक्कन बनाता है।

  • घड़े के अंदर नीचे की ओर झुके हुए तीखे रोम होते हैं और पाचक रस भरा होता है।
  • जैसे ही कोई कीट घड़े के मुख पर बैठता है, वह फिसलकर अंदर गिर जाता है और ढक्कन बंद हो जाता है।
  • कीट रोमों में फँस जाता है और घड़े की दीवारों से स्रावित पाचक रसों द्वारा उसका पाचन हो जाता है।
⚠️ अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा (Conceptual Clarity):
क्या घटपर्णी इसलिए कीड़े खाता है क्योंकि वह खाना नहीं बना सकता? कदापि नहीं!
घटपर्णी हरा होता है और उसमें क्लोरोफिल उपस्थित होता है; वह प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट बनाता है। परंतु यह दलदली मिट्टी में उगता है जहाँ नाइट्रोजन की अत्यधिक कमी होती है। अतः केवल नाइट्रोजन की पूर्ति हेतु यह कीटों का भक्षण करता है।

9. मृतजीवी पोषण: कवक एवं फफूँद (Saprotrophic Nutrition: Fungi)

बरसात के दिनों में आपने सड़ी-गली लकड़ी या नम जमीन पर छतरी जैसी आकृतियाँ उगी देखी होंगी, जिन्हें मशरूम (छत्रक) कहते हैं। इसी प्रकार बासी नम ब्रेड पर रोएँदार फफूँद उग जाती है।

मृतजीवी पोषण (Saprotrophic Nutrition): पोषण की वह विधि जिसमें जीव अपना पोषण मृत एवं सड़ते हुए जैविक पदार्थों के घुले हुए पोषक तत्वों से प्राप्त करते हैं। ऐसे जीवों को मृतजीवी (Saprotrophs) कहते हैं।

पाचन क्रिया: कवक मृत व सड़ी-गली वस्तुओं की सतह पर पाचक रस (Digestive Juices) स्रावित करते हैं। ये रस जटिल पदार्थों को तरल विलयन में बदल देते हैं, जिसे कवक आसानी से अवशोषित कर लेते हैं।

10. सहजीवी संबंध: लाइकेन एवं राइजोबियम (Symbiosis: Lichen & Rhizobium)

जब दो भिन्न-भिन्न जातियों के जीव एक साथ रहते हैं तथा अपना आवास (Shelter) एवं पोषक तत्व (Nutrients) परस्पर एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं, तो इस साझेदारी को सहजीवी संबंध (Symbiosis / Mutualism) कहते हैं।

1. लाइकेन (Lichen):

लाइकेन में एक शैवाल (Alga) और एक कवक (Fungus) साथ-साथ रहते हैं:

  • शैवाल: इसमें क्लोरोफिल होता है, अतः यह प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाकर कवक को देता है।
  • कवक: शैवाल को रहने के लिए सुरक्षित आवास, जल तथा खनिज लवण उपलब्ध कराता है।
2. दलहनी पौधे + राइजोबियम:

चना, मटर, मूँग, सेम आदि दलहनी पौधों की जड़ों की ग्रंथियों (Root Nodules) में राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु रहता है:

  • राइजोबियम: वायुमंडलीय गैसीय नाइट्रोजन को विलेय नाइट्रेट्स में बदलकर पौधे को देता है।
  • पौधा: बदले में राइजोबियम को तैयार भोजन और सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है।

11. मिट्टी में पोषक तत्वों की पुनःपूर्ति (Replenishment of Nutrients in Soil)

फसलें और पेड़-पौधे लगातार मिट्टी से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम जैसे प्रमुख खनिजों को अवशोषित करते रहते हैं। यदि वर्षों तक फसलें उगाई जाएँ, तो मिट्टी में इन पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है।

इस कमी को पूरा करने के लिए दो प्रमुख उपाय किए जाते हैं:

  1. खाद एवं रासायनिक उर्वरक (Manure & Fertilizers): किसान मिट्टी में यूरिया, एनपीके (NPK: Nitrogen, Phosphorus, Potassium) युक्त खाद मिलाते हैं।
  2. दलहनी फसलों का चक्रीकरण (Crop Rotation): किसान मुख्य अनाज की फसल के बाद खेत में दलहनी फसलें उगाते हैं। राइजोबियम जीवाणु की सहायता से मिट्टी में नाइट्रोजन की प्राकृतिक पूर्ति हो जाती है, जिससे रासायनिक खादों की आवश्यकता नहीं पड़ती।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रकाश-संश्लेषण समीकरण
6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
सूर्य का प्रकाश व क्लोरोफिल अनिवार्य
स्टार्च का आयोडीन परीक्षण
स्टार्च + आयोडीन → नीला-काला रंग
भोजन निर्माण का प्रत्यक्ष प्रमाण
लाइकेन (Lichen)
शैवाल (भोजन) + कवक (आश्रय/जल)
परस्पर लाभकारी सहजीवन
राइजोबियम जीवाणु
N₂ गैस → विलेय नाइट्रेट्स
दलहनी पौधों की जड़ों में उपस्थित

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
Q1 (प्रत्यास्मरण): हरे पौधों को स्वपोषी क्यों कहा जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा, क्लोरोफिल, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं। वे भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर नहीं रहते, इसलिए उन्हें स्वपोषी (Autotrophs) कहा जाता है।
उदाहरण 2
Q2 (अवधारणा): प्रकाश-संश्लेषण में पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल की क्या भूमिका है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: क्लोरोफिल एक हरा वर्णक है जो सूर्य के प्रकाश की विकिरण ऊर्जा (Radiant Energy) को अवशोषित व संग्रहित करता है। यह ऊर्जा जल के अणुओं को तोड़कर कार्बन डाइऑक्साइड से कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) के रासायनिक संश्लेषण में प्रयुक्त होती है।
उदाहरण 3
Q3 (अनुप्रयोग): यदि किसी गमले में लगे पौधे को पर्याप्त जल और हवा मिले परंतु उसे 10 दिनों तक अंधेरे कमरे में रखा जाए, तो क्या होगा?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: पौधे में प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाएगी क्योंकि भोजन निर्माण हेतु सूर्य का प्रकाश ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है। पत्ती में पहले से संचित स्टार्च समाप्त हो जाएगा और अंततः पौधा पीला पड़कर मुरझा जाएगा।
उदाहरण 4
Q4 (तर्कपूर्ण विचार): घटपर्णी (Pitcher Plant) कीटों को पकड़ता है। क्या इसका अर्थ है कि वह प्रकाश-संश्लेषण नहीं करता? सकारण स्पष्ट करें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: नहीं, घटपर्णी एक हरा पौधा है जिसमें क्लोरोफिल उपस्थित होता है और वह प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना कार्बोहाइड्रेट भोजन स्वयं बनाता है। चूँकि वह दलदली मिट्टी में उगता है जहाँ नाइट्रोजन पोषक तत्व का अभाव होता है, अतः केवल नाइट्रोजन की विशेष पूर्ति के लिए वह कीटों को पकड़कर उनका पाचन करता है।
उदाहरण 5
Q5 (तुलनात्मक विश्लेषण): अमरबेल (Cuscuta) और कवक (Fungus) दोनों दूसरे स्रोतों से पोषण प्राप्त करते हैं, फिर दोनों की पोषण विधि में क्या मौलिक अंतर है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
  • अमरबेल (परजीवी / Parasite): यह एक जीवित पोषक वृक्ष (Living Host) से तैयार पोषण प्राप्त करती है और पोषक को नुकसान पहुँचाती है।
  • कवक (मृतजीवी / Saprotroph): यह मृत, निर्जीव एवं सड़ते हुए जैविक पदार्थों (Dead & Decaying Matter) पर पाचक रस छोड़कर घुले हुए पोषक तत्वों को अवशोषित करता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भ्रम: पौधों की जड़ें मिट्टी से पका-पकाया भोजन खींचती हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वास्तविकता: जड़ें मिट्टी से केवल जल और अकार्बनिक खनिज लवण अवशोषित करती हैं। भोजन का वास्तविक निर्माण केवल पत्तियों में सौर ऊर्जा द्वारा होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भ्रम: कीटभक्षी पौधे मांसाहारी जंतुओं की तरह पूरी तरह विषमपोषी होते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वास्तविकता: कीटभक्षी पौधे हरे होते हैं और प्रकाश-संश्लेषण करते हैं। वे केवल नाइट्रोजन खनिज की कमी पूरी करने हेतु कीट खाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भ्रम: अमरबेल और मशरूम दोनों एक ही प्रकार का पोषण करते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

वास्तविकता: अमरबेल परजीवी (जीवित पौधे से भोजन) है, जबकि मशरूम मृतजीवी (सड़ी-गली वस्तुओं से भोजन) है।

प्रकाश-संश्लेषण एवं पादप पोषण चक्र (Photosynthesis & Plant Nutrition Flow)

पौधों में पोषण एवं प्रकाश-संश्लेषण का प्राकृतिक चक्र

सूर्य की ऊर्जा $\to$ रासायनिक ऊर्जा (कार्बोहाइड्रेट) $\to$ जीवन चक्र
1. सौर ऊर्जा
सूर्य का प्रकाश क्लोरोफिल द्वारा अवशोषित
2. कच्चे पदार्थ
रंध्रों से CO₂ + जड़ों से जल एवं खनिज
3. संश्लेषण
ग्लूकोज निर्माण व अतिरिक्त स्टार्च संचय
4. प्राणवायु मुक्ति
शुद्ध ऑक्सीजन (O₂) वायुमंडल में विसर्जित
5. अन्य पोषण विधियाँ
अमरबेल, घटपर्णी, कवक व सहजीवन

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
पोषण का महत्व: भोजन प्राप्त करने और उसका शरीर द्वारा उपयोग करने की प्रक्रिया पोषण है। इससे ऊर्जा, शारीरिक वृद्धि और मरम्मत संभव होती है।
मुख्य बिंदु 2
स्वपोषी पौधे: हरे पौधे सूर्य के प्रकाश, क्लोरोफिल, जल और $CO_2$ की मदद से भोजन स्वयं बनाते हैं, इसलिए वे स्वपोषी हैं।
मुख्य बिंदु 3
प्रकाश-संश्लेषण: पत्तियों में संपन्न रासायनिक क्रिया जिसमें $6CO_2 + 6H_2O \to C_6H_{12}O_6 + 6O_2$ समीकरण द्वारा कार्बोहाइड्रेट और ऑक्सीजन बनते हैं।
मुख्य बिंदु 4
रंध्र एवं द्वार कोशिकाएँ: पत्तियों की सतह पर उपस्थित रंध्र गैसों के विनिमय और वाष्पोत्सर्जन का नियमन करते हैं।
मुख्य बिंदु 5
स्टार्च संचयन: पत्ती में अतिरिक्त भोजन स्टार्च के रूप में जमा होता है, जिसे आयोडीन की नीली-काली प्रतिक्रिया से परखा जाता है।
मुख्य बिंदु 6
परजीवी पोषण: अमरबेल (Cuscuta) में क्लोरोफिल नहीं होता; यह जीवित पोषक (Host) से भोजन चूसने वाला परजीवी है।
मुख्य बिंदु 7
कीटभक्षी पौधे: घटपर्णी (Pitcher Plant) प्रकाश-संश्लेषण करने के साथ-साथ नाइट्रोजन की कमी पूरी करने हेतु कीटों का भक्षण करता है।
मुख्य बिंदु 8
मृतजीवी पोषण: कवक (Fungi) व मशरूम मृत व सड़ी-गली वस्तुओं पर पाचक रस स्रावित कर घुला हुआ पोषण अवशोषित करते हैं।
मुख्य बिंदु 9
सहजीविता: लाइकेन (शैवाल + कवक) और दलहनी पौधे + राइजोबियम परस्पर लाभकारी सहजीवन के प्रमुख उदाहरण हैं।
मुख्य बिंदु 10
मिट्टी में पुनर्भरण: खाद, उर्वरकों और दलहनी फसलों के चक्रीकरण (Crop Rotation) द्वारा मिट्टी में नाइट्रोजन व अन्य खनिजों की पुनः पूर्ति होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
हरे पौधों को स्वपोषी क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं। इसलिए उन्हें स्वपोषी कहा जाता है।
Auto = Self, Trophos = Nutrition
2
प्रकाश-संश्लेषण में क्लोरोफिल की क्या भूमिका है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को ग्रहण करने में सहायता करता है। इस ऊर्जा का उपयोग पौधा भोजन निर्माण की प्रक्रिया में करता है।
3
एक पौधे को जल और कार्बन डाइऑक्साइड पर्याप्त मात्रा में मिल रहे हैं, लेकिन उसे लंबे समय तक प्रकाश नहीं मिलता। उसके भोजन निर्माण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: भोजन निर्माण प्रभावित और बंद हो जाएगा क्योंकि प्रकाश-संश्लेषण की अभिक्रिया के लिए प्रकाश ऊर्जा अनिवार्य उत्प्रेरक है।
4
Pitcher Plant कीट पकड़ता है। क्या इसका अर्थ है कि वह प्रकाश-संश्लेषण नहीं करता? कारण सहित उत्तर दें।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नहीं। Pitcher Plant में क्लोरोफिल होता है और वह प्रकाश-संश्लेषण कर सकता है। वह दलदली मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पूरा करने हेतु कीटों को पकड़ता है।
5
Cuscuta (अमरबेल) और कवक दोनों दूसरे स्रोत से पोषण प्राप्त करते हैं। फिर दोनों के पोषण में क्या अंतर है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: Cuscuta एक जीवित host से पोषण प्राप्त करने वाला परजीवी (Parasite) है, जबकि कवक मृत और सड़ते जैविक पदार्थों से पोषण प्राप्त करने वाला मृतजीवी (Saprotroph) है।
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