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JAC • Class 7 • Science • Ch 8
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Reproduction in Plants

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) कक्षा 7 विज्ञान का अष्टम अध्याय "पादपों में जनन" (Reproduction in Plants) वनस्पति जगत में जीवन की निरंतरता की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली का प्रामाणिक अध्ययन है। इसमें अलैंगिक जनन (कायिक प्रवर्धन, मुकुलन, खंडन, बीजाणु निर्माण), लैंगिक जनन, पुष्प के जनन अंग (पुंकेसर व स्त्रीकेसर), स्व-परागण व पर-परागण, निषेचन, फल व बीज का विकास तथा प्रकृति में बीज प्रकीर्णन की अनुकूलन विधियों का विस्तृत विवरण शामिल है।

🔬 क्या आपने कभी सोचा है?

🥔 आलू की सब्जी बनाने से पहले जब हम आलू पर छोटे-छोटे गड्ढे (आँखें) देखते हैं, तो गीली मिट्टी में दबाने पर उसी गड्ढे से नया आलू का पौधा कैसे उग जाता है?

🍃 अजूबा (ब्रायोफिल्लम / पत्थरचट्टा) की केवल एक हरी पत्ती को जमीन पर रख देने पर उसकी पत्ती के किनारों से दर्जनों नन्हे पौधे कैसे फूट पड़ते हैं?

🐝 रंग-बिरंगी तितलियाँ और मधुमक्खियाँ फूलों पर बैठकर उनका मीठा रस चूसती हैं, किंतु क्या आप जानते हैं कि ऐसा करके वे वास्तव में फूलों में फल बनने में सबसे बड़ी मदद कर रही होती हैं?

🥥 समुद्र में तैरता हुआ नारियल का सूखा गोला हजारों किलोमीटर दूर किसी नए टापू पर पहुँचकर हरा-भरा नारियल का पेड़ कैसे बन जाता है?

Why This Chapter Matters

यदि पौधे अपनी संतान उत्पन्न करना बंद कर दें, तो कुछ ही वर्षों में पृथ्वी से धान, गेहूँ, आम, फल, सब्जियाँ और लकड़ी सब कुछ समाप्त हो जाएगी। कृषि क्रांति और खाद्य सुरक्षा की नींव पौधों के जनन विज्ञान पर टिकी है। गुलाब की कलम लगाने से लेकर संकर बीजों (Hybrid Seeds) के उत्पादन, सेब-आम की बागवानी और वनों के प्राकृतिक विस्तार तक—सब कुछ परागण और जनन की समझ से ही संभव हुआ है। इस अध्याय को समझकर आप प्रकृति की सृजन शक्ति और पादप प्रजनन के वैज्ञानिक नियमों से परिचित हो सकेंगे।

Before You Begin (Prerequisites)

  • सजीव अपने जैसी संतान उत्पन्न करते हैं, जिसे जनन (Reproduction) कहते हैं।
  • पौधे के दो मुख्य भाग होते हैं: कायिक अंग (जड़, तना, पत्ती) और जनन अंग (पुष्प / फूल)।
  • निषेचन के लिए नर और मादा युग्मकों का मिलना आवश्यक होता है।
  • पौधे बीजों के द्वारा नई पीढ़ियों को जन्म देते हैं।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • अलैंगिक जनन (Asexual) और लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) में सुस्पष्ट अंतर कर सकेंगे।
  • कायिक प्रवर्धन की विधियों—कलम, आलू की आँख, ब्रायोफिल्लम की पत्ती—का प्रायोगिक वर्णन कर सकेंगे।
  • मुकुलन (यीस्ट), खंडन (स्पाइरोगाइरा) और बीजाणु निर्माण (कवक/फर्न) की सचित्र व्याख्या कर सकेंगे।
  • पुष्प के नर अंग (पुंकेसर: परागकोश व तंतु) और मादा अंग (स्त्रीकेसर: वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय) की संरचना पहचान सकेंगे।
  • स्व-परागण (Self-Pollination) और पर-परागण (Cross-Pollination) में भेद कर सकेंगे।
  • परागण से निषेचन ($Zygote$) और अंडाशय से फल व बीजांड से बीज बनने के चरण समझा सकेंगे।
  • हवा, जल, जंतुओं और विस्फोटन द्वारा बीज प्रकीर्णन (Seed Dispersal) के अनुकूलनों का वर्गीकरण कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. पादपों में जनन के प्रकार: अलैंगि...
2 2. अलैंगिक जनन की 4 विधियाँ (Method...
3 3. पुष्प: पौधों का लैंगिक जनन अंग (...
4 4. परागण, निषेचन एवं फल निर्माण (Po...
5 5. बीज प्रकीर्णन: प्रकृति का फैलाव...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. पादपों में जनन के प्रकार: अलैंगिक बनाम लैंगिक (Modes of Reproduction)

जनन वह जैविक प्रक्रम है जिसके द्वारा सजीव अपने जैसे नए जीव (संतति) को जन्म देते हैं। पौधों में जनन दो मुख्य विधियों द्वारा होता है:

तुलना का आधारअलैंगिक जनन (Asexual)लैंगिक जनन (Sexual)
जनकों की संख्याकेवल एक जनक (Single Parent)।दो जनक (नर एवं मादा जनन अंग)।
बीजों की आवश्यकताबीजों के बिना नए पौधे बनते हैं।बीजों के द्वारा नए पौधे उत्पन्न होते हैं।
युग्मक संलयनयुग्मक और निषेचन नहीं होता।नर और मादा युग्मकों का संलयन (निषेचन) अनिवार्य है।
संतति की समानतानया पौधा जनक का पूर्णतः क्लोन (सटीक प्रतिलिपि) होता है।संतान में दोनों जनकों के गुण होते हैं (विभिन्नताएँ)।
उदाहरणआलू, गुलाब, गन्ना, ब्रायोफिल्लम, यीस्ट।सरसों, आम, मटर, मक्का, धान, गेहूँ।

2. अलैंगिक जनन की 4 विधियाँ (Methods of Asexual Reproduction)

(A) कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation):

जब पौधे के किसी कायिक अंग—जैसे जड़, तना, पत्ती या कली—से एक नया पौधा तैयार होता है, तो इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं:

  • तने की कलम (Stem Cutting): गुलाब, चंपा या गन्ने के तने की एक गांठ (Node) सहित शाखा काटकर मिट्टी में लगाने से नया पौधा तैयार होता है।
  • आलू की आँखें (Buds of Potato): आलू एक भूमिगत रूपांतरित तना है। आलू पर उपस्थित गड्ढों (आँखों) को काटकर नम मिट्टी में दबाने से नए पौधे उगते हैं। इसी प्रकार अदरक और हल्दी में प्रकंद (Rhizome) से पौधे उगते हैं।
  • पत्तियों द्वारा (ब्रायोफिल्लम / अजूबा): ब्रायोफिल्लम की पत्ती के किनारों के खांचों में कलिकाएं होती हैं। जब पत्ती नम मिट्टी पर गिरती है, तो प्रत्येक कली से नया पौधा बन जाता है।
  • जड़ों द्वारा: शकरकंद और डहेलिया की कंदिल जड़ें नए पौधे उत्पन्न करती हैं।
(B) मुकुलन (Budding in Yeast):

यीस्ट कोशिका से एक छोटा बल्ब जैसा उभार बाहर निकलता है जिसे मुकुल (Bud) कहते हैं। केंद्रक विभाजित होकर मुकुल में जाता है, मुकुल बढ़कर जनक कोशिका से अलग हो जाता है और स्वतंत्र यीस्ट बन जाता है।

(C) खंडन (Fragmentation in Algae):

तालाबों में पाई जाने वाली हरी शैवाल स्पाइरोगाइरा (Spirogyra) जल और पोषक तत्व पाकर तेजी से वृद्धि करती है और दो या अधिक टुकड़ों (खंडों) में टूट जाती है। प्रत्येक खंड वृद्धि करके नया शैवाल बन जाता है।

(D) बीजाणु निर्माण (Spore Formation):

कवक (फफूंद), फर्न और मॉस में बीजाणुधानी के भीतर सूक्ष्म बीजाणु (Spores) बनते हैं। प्रत्येक बीजाणु पर प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए एक कठोर सुरक्षात्मक कवच होता है। अनुकूल परिस्थितियाँ (नमी व ताप) मिलते ही बीजाणु अंकुरित होकर नया जीव बना लेते हैं।

3. पुष्प: पौधों का लैंगिक जनन अंग (Flower Anatomy)

पुष्प पौधे का जनन अंग है। पुष्प के मुख्य 4 भाग होते हैं: बाह्यदल (हरे पत्ते), दल (रंग-बिरंगी पंखुड़ियाँ), पुंकेसर और स्त्रीकेसर।

🔵 पुंकेसर (Stamen) — नर जनन अंग

इसके दो भाग होते हैं: 1. तंतु (Filament - पतला डंठल) और 2. परागकोश (Anther - ऊपरी थैली)। परागकोश में पीले रंग के बारीक परागकण (Pollen Grains) बनते हैं जो नर युग्मक (Male Gametes) उत्पन्न करते हैं।

🔴 स्त्रीकेसर (Pistil / Carpel) — मादा जनन अंग

इसके 3 भाग होते हैं: 1. वर्तिकाग्र (Stigma - चिपचिपा शीर्ष), 2. वर्तिका (Style - मध्य नली), और 3. अंडाशय (Ovary - फूला हुआ निचला आधार)। अंडाशय के भीतर बीजांड (Ovules) होते हैं, जिनमें मादा युग्मक (अंड / Egg) बनता है।

एकलिंगी बनाम द्विलिंगी पुष्प: जिन फूलों में केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर होता है, उन्हें एकलिंगी पुष्प कहते हैं (जैसे मक्का, पपीता, ककड़ी)। जिन फूलों में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों उपस्थित होते हैं, उन्हें द्विलिंगी पुष्प कहते हैं (जैसे सरसों, गुलाब, गुड़हल)।

4. परागण, निषेचन एवं फल निर्माण (Pollination & Fertilization)

परागण (Pollination): परागकणों का परागकोश से निकलकर स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र पर पहुँचने की प्रक्रिया को परागण कहते हैं।

  • स्व-परागण (Self-Pollination): यदि परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
  • पर-परागण (Cross-Pollination): यदि परागकण उसी प्रजाति के किसी दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर हवा, जल या कीटों/तितलियों द्वारा पहुँचते हैं।

निषेचन (Fertilization): वर्तिकाग्र पर परागकण अंकुरित होकर एक लंबी पराग नली (Pollen Tube) बनाता है जो वर्तिका से होती हुई अंडाशय के बीजांड में प्रवेश करती है।

$$\mathbf{\text{नर युग्मक (परागकण)}} + \mathbf{\text{मादा युग्मक (अंड कोशिका)}} \xrightarrow{\text{संलयन (निषेचन)}} \mathbf{\text{युग्मनज (Zygote)}} \longrightarrow \text{भ्रूण (Embryo)}$$

फल एवं बीज का विकास: निषेचन के बाद पुष्प की पंखुड़ियाँ, पुंकेसर सब सूखकर गिर जाते हैं:

  • अंडाशय (Ovary): पककर रसीला या सूखा फल (Fruit) बन जाता है।
  • बीजांड (Ovule): विकसित होकर सुरक्षात्मक आवरण युक्त बीज (Seed) बन जाता है, जिसके भीतर नन्हा भ्रूण छिपा रहता है।

5. बीज प्रकीर्णन: प्रकृति का फैलाव तंत्र (Seed Dispersal)

बीज प्रकीर्णन (Seed Dispersal): बीजों और फलों का हवा, पानी और जंतुओं द्वारा अपने मूल जनक पौधे से दूर-दूर के स्थानों तक फैलने की प्रक्रिया को बीज प्रकीर्णन कहते हैं।

प्रकीर्णन क्यों अनिवार्य है? यदि किसी पेड़ के सारे बीज उसी के नीचे गिर जाएं, तो उन नन्हे पौधों में धूप, पानी, खनिज और स्थान के लिए इतना भयंकर संघर्ष (प्रतिस्पर्धा) होगा कि उनमें से कोई भी स्वस्थ पौधा नहीं बन पाएगा।

प्रकीर्णन की 4 प्राकृतिक विधियाँ एवं अनुकूलन:

माध्यमबीजों के विशेष अनुकूलनप्रमुख उदाहरण
पवन (हवा) द्वारापंख जैसी संरचनाएं, अत्यंत हल्के और रोएँदार बालसहजन (ड्रमस्टिक), मेपल, मदार (आक), सूरजमुखी, घास।
जल द्वारास्पंजी या रेशेदार आवरण जो पानी में तैर सकेनारियल, कमल।
जंतुओं द्वाराकांटेदार बीज जिन पर हुक जैसी संरचनाएं होती हैं जो पशुओं के रोएँ या कपड़ों से चिपक जाती हैंजैंथियम (गोखरू), यूरेना।
झटके से फटने द्वारा (विस्फोटन)फल सूखने पर अचानक तेज धमाके से फटते हैं और बीज दूर छिटक जाते हैंअरंडी (Castor), बालसम (गुलमेंहदी), मटर।

Key Formulas, Reactions & Definitions

निषेचन मूल समीकरण
नर युग्मक (Sperm) + मादा युग्मक (Ovum) → युग्मनज (Zygote)
द्विगुणित भ्रूण निर्माण
फल का उद्गम
परिपक्व अंडाशय (Ripe Ovary) → फल (Fruit)
आम, सेब, संतरा
बीज का उद्गम
निषेचित बीजांड (Fertilized Ovule) → बीज (Seed)
सुरक्षात्मक आवरण
परागण के प्रकार
स्व-परागण (एक ही पुष्प) | पर-परागण (भिन्न पुष्प/पौधा)
हवा, जल, कीट माध्यम

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
Q1 (प्रत्यास्मरण): अलैंगिक एवं लैंगिक जनन में दो मुख्य अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
1. अलैंगिक जनन: इसमें केवल एक जनक की आवश्यकता होती है और बिना बीजों के नए पौधे बनते हैं (उदा. गुलाब की कलम, आलू)।
2. लैंगिक जनन: इसमें दो जनकों (नर व मादा) के युग्मकों का संलयन होता है और बीजों के माध्यम से नई संतति उत्पन्न होती है (उदा. सरसों, मक्का)।
Example 2
Q2 (अवधारणा): एकलिंगी और द्विलिंगी पुष्प क्या हैं? प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
1. एकलिंगी पुष्प (Unisexual): जिन पुष्पों में केवल पुंकेसर (नर अंग) या केवल स्त्रीकेसर (मादा अंग) उपस्थित होता है (उदा. पपीता, मक्का, ककड़ी)।
2. द्विलिंगी पुष्प (Bisexual): जिन पुष्पों में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों एक साथ उपस्थित होते हैं (उदा. सरसों, गुलाब, गुड़हल)।
Example 3
Q3 (अनुप्रयोग): यदि किसी बगीचे के सभी फूलों से तितलियों और मधुमक्खियों को पूरी तरह भगा दिया जाए, तो पौधों के फलों के उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Step-by-Step Solution:
उत्तर: तितलियाँ और मधुमक्खियाँ सबसे प्रमुख परागणकर्ता (Pollinators) हैं। जब वे रस चूसने के लिए फूलों पर बैठती हैं, तो परागकण उनके पैरों और पंखों पर चिपककर दूसरे फूलों के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं (पर-परागण)। यदि वे नहीं होंगी, तो परागण की दर बहुत गिर जाएगी, निषेचन नहीं हो सकेगा और पौधों में फल व बीज बनना लगभग बंद हो जाएगा।
Example 4
Q4 (कारण व प्रभाव): प्रकृति में बीज प्रकीर्णन (Seed Dispersal) क्यों आवश्यक है? यदि किसी वृक्ष के सभी बीज उसी के ठीक नीचे गिर जाएँ तो क्या होगा?
Step-by-Step Solution:
उत्तर: यदि किसी वृक्ष के सारे बीज उसी के नीचे गिरेंगे, तो उगने वाले सैकड़ों नन्हे पौधों को पर्याप्त धूप, जल, खनिज लवण और फैलने का स्थान नहीं मिलेगा। इस भीषण आंतरिक प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकांश पौधे कमजोर होकर सूख जाएँगे। बीज प्रकीर्णन बीजों को दूर-दूर फैलाकर नए आवासों में उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करता है।
Example 5
Q5 (उच्च स्तरीय चिंतन): निषेचन के पश्चात पुष्प के विभिन्न भागों (पंखुड़ियाँ, अंडाशय, बीजांड) में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?
Step-by-Step Solution:
उत्तर: निषेचन के पश्चात:
1. बाह्यदल, पंखुड़ियाँ, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र प्रायः सूखकर गिर जाते हैं।
2. अंडाशय (Ovary) तेजी से फूलकर और परिपक्व होकर फल (Fruit) बन जाता है।
3. बीजांड (Ovules) कठोर सुरक्षात्मक आवरण वाले बीज (Seeds) में बदल जाते हैं, जिनके अंदर भ्रूण सुरक्षित रहता है।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

परागण (Pollination) और निषेचन (Fertilization) को एक ही क्रिया मानना।

Scientific Reality & Correction

परागण केवल परागकणों का वर्तिकाग्र तक पहुँचना (भौतिक स्थानांतरण) है, जबकि निषेचन नर और मादा युग्मकों के आपस में मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाने की वास्तविक रासायनिक-जैविक क्रिया है।

Common Misconception

यह समझना कि कायिक प्रवर्धन केवल प्रयोगशाला या नर्सरी में ही संभव है।

Scientific Reality & Correction

कायिक प्रवर्धन प्रकृति में स्वाभाविक रूप से होता है (उदा. घास की गांठे जमीन पर फैलना, आलू की आँखों से स्वतः अंकुरण, ब्रायोफिल्लम की पत्ती से जंगल में पौधे उगना)।

Common Misconception

नारियल के रेशेदार फल को खाने वाला हिस्सा समझना।

Scientific Reality & Correction

नारियल का रेशेदार आवरण बीज को पानी में तैरने में मदद करने वाला प्रकीर्णन अनुकूलन है; वास्तविक बीज और उसका भ्रूणपोष (पानी व मलाई) कठोर खोल के भीतर होता है।

Visual Learning & Conceptual Map

पादप लैंगिक जनन जीवन चक्र (Plant Life Cycle)
पुष्प (पुंकेसर + स्त्रीकेसर) ➔ परागण (Pollination) ➔ निषेचन (युग्मनज निर्माण) ➔ फल व बीज (Fruit & Seed) ➔ बीज प्रकीर्णन व अंकुरण

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
जनन द्वारा जीव अपनी संतति उत्पन्न करते हैं; पौधों में अलैंगिक और लैंगिक दो विधियों से जनन होता है।
Takeaway 2
अलैंगिक जनन में बिना बीजों के नए पौधे बनते हैं; प्रमुख विधियाँ हैं: कायिक प्रवर्धन, मुकुलन, खंडन और बीजाणु निर्माण।
Takeaway 3
कायिक प्रवर्धन में जड़ (शकरकंद), तना (गुलाब, आलू) या पत्ती (ब्रायोफिल्लम) से नया पौधा बनता है।
Takeaway 4
यीस्ट मुकुलन द्वारा और शैवाल (स्पाइरोगाइरा) खंडन द्वारा अलैंगिक जनन करते हैं।
Takeaway 5
पुष्प पौधे का लैंगिक जनन अंग है; पुंकेसर नर अंग (परागकण उत्पन्न करता है) और स्त्रीकेसर मादा अंग (अंड कोशिका उत्पन्न करता है) है।
Takeaway 6
परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण परागण कहलाता है (स्व-परागण या पर-परागण)।
Takeaway 7
नर और मादा युग्मकों का संलयन निषेचन (Fertilization) कहलाता है जिससे युग्मनज (Zygote) बनता है।
Takeaway 8
निषेचन के बाद अंडाशय फल में और बीजांड बीज में बदल जाते हैं।
Takeaway 9
बीज प्रकीर्णन हवा (पंखदार बीज), जल (नारियल), जंतुओं (कांटेदार गोखरू) और विस्फोटन द्वारा होता है।
Takeaway 10
प्रकीर्णन पौधों में धूप, जल और खनिजों के लिए प्रतिस्पर्धा को कम करके उनके व्यापक प्रसार को सुनिश्चित करता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
ब्रायोफिल्लम (अजूबा) में कायिक प्रवर्धन किस अंग द्वारा होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: ब्रायोफिल्लम (पत्थरचट्टा) में कायिक प्रवर्धन उसकी पत्तियों के किनारों के खांचों में उपस्थित कलिकाओं (Buds) द्वारा होता है।
2
स्व-परागण और पर-परागण में क्या अंतर है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: स्व-परागण में परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं। पर-परागण में परागकण हवा, जल या कीटों द्वारा उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित होते हैं।
3
निषेचन (Fertilization) किसे कहते हैं? इसके फलस्वरूप क्या बनता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: नर युग्मक (परागकण) और मादा युग्मक (अंड कोशिका) के परस्पर संलयन को निषेचन कहते हैं। इसके फलस्वरूप एक द्विगुणित कोशिका बनती है जिसे युग्मनज (Zygote) कहते हैं, जो आगे भ्रूण बनता है।
4
निषेचन के पश्चात अंडाशय और बीजांड किसमें परिवर्तित हो जाते हैं?
Reveal Answer & Explanation
Answer: निषेचन के पश्चात परिपक्व अंडाशय (Ovary) फल बन जाता है और बीजांड (Ovule) बीज में बदल जाता है।
5
हवा द्वारा प्रकीर्णित होने वाले बीजों के दो विशिष्ट लक्षण बताइए।
Reveal Answer & Explanation
Answer: हवा द्वारा उड़ने वाले बीज अत्यंत हल्के होते हैं और उन पर पंख जैसी संरचनाएं (जैसे ड्रमस्टिक, मेपल) या बारीक रोएँदार बाल (जैसे मदार/आक) पाए जाते हैं।
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