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JAC • Class 7 • Science • Ch 6
Estimated Time: 45 Mins
Study Progress: In Progress

Respiration in Organisms

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) कक्षा 7 विज्ञान का षष्ठम अध्याय "जीवों में श्वसन" (Respiration in Organisms) सजीवों में ऊर्जा उत्पादन की जैविक कार्यप्रणाली का वैज्ञानिक अध्ययन है। इसमें कोशिकीय श्वसन, वायवीय बनाम अवायवीय श्वसन (किण्वन व पेशीय ऐंठन), मानव श्वसन तंत्र (डायफ्राम व फेफड़े), विभिन्न जीवों (कॉकरोच, केंचुआ, मछली) में श्वसन अंग तथा पादपों की जड़ों व पत्तियों में श्वसन का विस्तृत प्रामाणिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

🔬 क्या आपने कभी सोचा है?

🏃‍♂️ जब हम 100 मीटर की तेज दौड़ लगाते हैं या फुटबॉल खेलते हैं, तो हमारी सांसें अचानक इतनी तेज-तेज क्यों चलने लगती हैं?

🦵 अचानक बहुत भारी व्यायाम या दौड़ने के बाद पैरों की पिंडलियों में असहनीय दर्द और ऐंठन (Cramps) क्यों होने लगती है, और गर्म पानी से नहाने पर आराम क्यों मिलता है?

🐟 मछली दिन-रात पानी में डूबी रहती है, फिर भी वह पानी के अंदर सांस कैसे लेती है, जबकि मनुष्य पानी में डूबने पर सांस क्यों नहीं ले पाता?

🪱 बरसात में केंचुआ जमीन से बाहर क्यों निकल आता है और गमले में जरूरत से ज्यादा पानी भर देने पर पौधा सूखकर क्यों मर जाता है?

Why This Chapter Matters

हम चाहे भोजन कितना भी पौष्टिक क्यों न खा लें, यदि हमारे शरीर की कोशिकाओं में श्वसन की प्रक्रिया न हो, तो उस भोजन से ऊर्जा की एक भी बूंद नहीं मिल सकती। श्वसन ही वह रासायनिक इंजन है जो कोशिकाओं में ग्लूकोज को जलाकर जीवन के हर कार्य (चलना, बोलना, दिल धड़कना) के लिए शक्ति प्रदान करता है। इस अध्याय को समझकर आप फेफड़ों के स्वास्थ्य, प्राणायाम, खिलाड़ियों में पेशीय थकान, जलीय व स्थलीय जीवों के अनुकूलन और पादपों की जड़ प्रणाली के वैज्ञानिक रहस्यों को समझ सकेंगे।

Before You Begin (Prerequisites)

  • सभी सजीव कोशिकाओं (Cells) के बने होते हैं।
  • पाचन के उपरांत भोजन ग्लूकोज के रूप में रक्त द्वारा कोशिकाओं तक पहुँचता है।
  • हवा में 21% ऑक्सीजन और 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है।
  • सजीवों को ऊर्जा मुक्त करने के लिए ऑक्सीजन की निरंतर आवश्यकता होती है।

What You Will Learn (Core Objectives)

  • कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) की परिभाषा देकर वायवीय (Aerobic) और अवायवीय (Anaerobic) श्वसन में अंतर कर सकेंगे।
  • यीस्ट में किण्वन (Fermentation) और मानव पेशियों में लैक्टिक अम्ल बनने व ऐंठन (Cramps) के वैज्ञानिक कारणों की व्याख्या कर सकेंगे।
  • अंतःश्वसन (Inhalation) और उच्छ्वसन (Exhalation) के दौरान पसलियों और डायफ्राम की गति का कार्यशील मॉडल समझा सकेंगे।
  • प्रयोग द्वारा सिद्ध कर सकेंगे कि उच्छ्वसित वायु में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) उपस्थित होती है।
  • कॉकरोच (श्वास रंध्र व वातक), केंचुआ (नम त्वचा), मछली (गलफड़े/क्लोम) और मेंढक के श्वसन अंगों का तुलनात्मक विश्लेषण कर सकेंगे।
  • पादपों में पत्तियों के रंध्रों और जड़ों के मूलरोमों द्वारा श्वसन प्रक्रिया का वर्णन कर सकेंगे।

Chapter Roadmap & Progression

1 1. हम श्वसन क्यों करते हैं? कोशिकीय...
2 2. हमारी पेशियों में अवायवीय श्वसन...
3 3. साँस लेना: अंतःश्वसन, उच्छ्वसन ए...
4 4. अन्य जंतुओं में श्वसन (Respirati...
5 5. पादपों में श्वसन (Respiration in...

Complete Concept Guide (100% Curriculum Coverage)

1. हम श्वसन क्यों करते हैं? कोशिकीय श्वसन (Why Respire & Cellular Respiration)

शरीर की प्रत्येक कोशिका को पोषण, उत्सर्जन और जनन जैसे कार्यों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। भोजन में संचित यह ऊर्जा केवल श्वसन के दौरान ही मुक्त होती है।

कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration): कोशिका के भीतर ऑक्सीजन का उपयोग करके भोजन (ग्लूकोज) के रासायनिक विखंडन द्वारा ऊर्जा मुक्त होने के प्रक्रम को कोशिकीय श्वसन कहते हैं। यह सभी सजीवों की कोशिकाओं में निरंतर चलता है।

श्वसन के दो मुख्य प्रकार:

(A) वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration):

जब ग्लूकोज का विखंडन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, तो इसे वायवीय श्वसन कहते हैं। इसमें ग्लूकोज पूर्णतः कार्बन डाइऑक्साइड और जल में टूटता है तथा प्रचुर ऊर्जा मुक्त होती है:

$$\mathbf{C_6H_{12}O_6\text{ (ग्लूकोज)} + 6O_2\text{ (ऑक्सीजन)} \longrightarrow 6CO_2 + 6H_2O + \text{ऊर्जा (38 ATP)}}$$
(B) अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration):

जब भोजन का विखंडन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, तो इसे अवायवीय श्वसन कहते हैं। ऐसे जीवों को अवायवीय जीव (Anaerobes) कहते हैं।

1. यीस्ट में किण्वन (Fermentation in Yeast): यीस्ट एककोशिकीय कवक है जो ऑक्सीजन के बिना श्वसन करता है और एथिल अल्कोहॉल तथा $CO_2$ बनाता है:

$$\text{ग्लूकोज} \xrightarrow{\text{ऑक्सीजन के बिना (यीस्ट)}} \text{एल्कोहॉल (एथेनॉल)} + CO_2 + \text{ऊर्जा (कम)}$$

इसी कारण यीस्ट का उपयोग शराब, बीयर, और ब्रेड बनाने (आटे को फुलाने) में किया जाता है।

2. हमारी पेशियों में अवायवीय श्वसन एवं ऐंठन (Cramps in Muscles)

सामान्यतः हमारी पेशी कोशिकाएं वायवीय श्वसन करती हैं। किंतु जब हम तेज दौड़ते हैं, भारी वजन उठाते हैं या देर तक साइकिल चलाते हैं, तो पेशियों को भारी मात्रा में ऊर्जा चाहिए होती है। रक्त संचार उस गति से ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर पाता।

अतः ऊर्जा की तात्कालिक मांग को पूरा करने के लिए पेशी कोशिकाएं कुछ समय के लिए ऑक्सीजन की कमी में अवायवीय श्वसन करने लगती हैं:

$$\text{ग्लूकोज} \xrightarrow{\text{ऑक्सीजन की कमी (पेशियाँ)}} \mathbf{\text{लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid)}} + \text{ऊर्जा}$$

पेशीय ऐंठन (Cramps) का कारण: ग्लूकोज के अपूर्ण विखंडन से बना लैक्टिक अम्ल जब पेशियों में जमा (Accumulate) हो जाता है, तो तीव्र दर्द और ऐंठन होने लगती है।

राहत कैसे मिलती है? गर्म पानी से स्नान करने या मालिश करने से शरीर में रक्त संचार बढ़ जाता है। रक्त द्वारा पेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने लगती है, जिससे जमा हुआ लैक्टिक अम्ल पूर्णतः $CO_2$ और जल में टूट जाता है और ऐंठन तुरंत ठीक हो जाती है।

3. साँस लेना: अंतःश्वसन, उच्छ्वसन एवं क्रियाविधि (Breathing Mechanism)

साँस लेना (Breathing): यह एक भौतिक प्रक्रम है जिसमें ऑक्सीजन से भरपूर वायु को अंदर खींचा जाता है (अंतःश्वसन / Inhalation) और कार्बन डाइऑक्साइड से भरपूर वायु को बाहर निकाला जाता है (उच्छ्वसन / Exhalation)।

श्वसन दर (Breathing Rate): कोई व्यक्ति एक मिनट में जितनी बार सांस लेता और छोड़ता है, वह उसकी श्वसन दर कहलाती है। सामान्य विश्राम अवस्था में वयस्क की श्वसन दर 15 से 18 बार प्रति मिनट होती है, जो भारी व्यायाम के समय बढ़कर 25 बार प्रति मिनट तक हो सकती है।

मानव में श्वास क्रियाविधि (डायफ्राम और पसलियाँ):

चरणपसलियों की गतिडायफ्राम की गतिवक्ष गुहा का आयतन व प्रभाव
अंतःश्वसन (सांस अंदर लेना) ऊपर और बाहर की ओर नीचे की ओर गति करता है (चपटा होता है) वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है, फेफड़ों में वायुदाब घटता है और बाहरी वायु फेफड़ों में भर जाती है।
उच्छ्वसन (सांस बाहर छोड़ना) नीचे और अंदर की ओर ऊपर अपनी पूर्व गुंबदाकार स्थिति में आता है वक्ष गुहा का आयतन घटता है, फेफड़ों पर दबाव पड़ता है और वायु बाहर धकेल दी जाती है।

उच्छ्वसित वायु में $CO_2$ का परीक्षण (क्रियाकलाप): एक परखनली में ताजा चूने का पानी लें। एक प्लास्टिक की स्ट्रा से उसमें धीरे-धीरे फूंक मारें। कुछ ही पलों में चूने का पानी दूधिया हो जाता है। यह सिद्ध करता है कि हमारे द्वारा बाहर निकाली जाने वाली सांस में प्रचुर मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2 pprox 4.4\%$) उपस्थित होती है।

4. अन्य जंतुओं में श्वसन (Respiration in Other Animals)

विभिन्न जंतुओं में उनके आवास के अनुसार विशेष श्वसन अंग पाए जाते हैं:

  • कॉकरोच (तिलचट्टा) एवं कीट: इनके शरीर के पार्श्व (बगल) भागों में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें श्वास रंध्र (Spiracles) कहते हैं। गैसों के विनिमय के लिए शरीर के भीतर वायु नलियों का एक जाल बिछा होता है जिसे श्वास प्रणाल या वातक (Tracheae) कहते हैं। ऑक्सीजन सीधे ऊतकों तक पहुँचती है।
  • केंचुआ (Earthworm): केंचुए में कोई फेफड़े नहीं होते। यह अपनी नम और श्लेष्मी त्वचा (Moist Skin)** द्वारा सीधे गैसों का विसरण करता है। इसीलिए छूने पर केंचुए की त्वचा हमेशा गीली और लसलसी लगती है।
  • मछली (Fish): मछलियाँ जल में रहती हैं। जल में घुली ऑक्सीजन को ग्रहण करने के लिए उनके सिर के दोनों ओर गलफड़े (क्लोम / Gills)** पाए जाते हैं। गिल्स में रक्त केशिकाओं का घना जाल होता है, जो बहते हुए पानी से ऑक्सीजन सोखकर $CO_2$ को पानी में छोड़ देते हैं।
  • मेंढक (Frog): मेंढक उभयचर है। जल में यह अपनी नम त्वचा द्वारा सांस लेता है, जबकि थल पर यह मनुष्य की तरह फेफड़ों** द्वारा सांस लेता है।

5. पादपों में श्वसन (Respiration in Plants)

पौधे भी सजीव हैं और वे भी अन्य जीवों की भाँति जीवित रहने के लिए दिन और रात निरंतर श्वसन करते हैं। श्वसन में वे भी ऑक्सीजन लेते हैं और $CO_2$ छोड़ते हैं।

पत्तियों में श्वसन: पत्तियों की सतह पर उपस्थित रंध्र (Stomata) द्वारा गैसों का विनिमय विसरण द्वारा होता है।

जड़ों में श्वसन: पौधों की जड़ें भी जीवित कोशिकाओं से बनी हैं और उन्हें ऊर्जा चाहिए। जड़ें मिट्टी के कणों के बीच उपस्थित खाली स्थानों (Air spaces) में फंसी वायु से अपने मूलरोमों (Root hairs) द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करती हैं।

🌱 गमले में जलभराव (Waterlogging) का खतरा: यदि किसी गमले में लगातार जरूरत से ज्यादा पानी भरा रहे, तो मिट्टी के कणों के बीच की हवा बाहर निकल जाती है और पानी भर जाता है। जड़ों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे जड़ें सड़ जाती हैं और पौधा मर जाता है।

Key Formulas, Reactions & Definitions

वायवीय कोशिकीय श्वसन
C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा (38 ATP)
ऑक्सीजन की उपस्थिति में
यीस्ट में किण्वन (अवायवीय)
ग्लूकोज → एथिल अल्कोहॉल + CO₂ + ऊर्जा
बेकरी एवं शराब उद्योग
पेशियों में अवायवीय श्वसन
ग्लूकोज → लैक्टिक अम्ल + ऊर्जा
दौड़ते समय ऐंठन का कारण
श्वसन गैस संघटन
अंतःश्वसन: 21% O₂, 0.04% CO₂ | उच्छ्वसन: 16.4% O₂, 4.4% CO₂
गैसीय विनिमय अनुपात

Conceptual Solved Examples & Case Studies

Example 1
Q1 (प्रत्यास्मरण): वायवीय एवं अवायवीय श्वसन में दो प्रमुख अंतर समीकरण सहित लिखिए।
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
1. वायवीय श्वसन: यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है और ग्लूकोज पूर्णतः $CO_2$ व जल में टूटकर प्रचुर ऊर्जा देता है ($C_6H_{12}O_6 + 6O_2 \rightarrow 6CO_2 + 6H_2O + \text{ऊर्जा}$)।
2. अवायवीय श्वसन: यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है और कम ऊर्जा के साथ अल्कोहॉल या लैक्टिक अम्ल बनता है।
Example 2
Q2 (अवधारणा): भारी दौड़ या कसरत के बाद पैरों की पेशियों में ऐंठन (Cramps) क्यों होती है? गर्म पानी से सिकाई करने पर तुरंत आराम क्यों मिलता है?
Step-by-Step Solution:
उत्तर: भारी दौड़ के समय पेशियों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिससे अवायवीय श्वसन द्वारा लैक्टिक अम्ल बन जाता है। लैक्टिक अम्ल के जमाव से ऐंठन होती है। गर्म पानी से सिकाई करने पर रक्त संचार बढ़ जाता है, जिससे पेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और लैक्टिक अम्ल $CO_2$ और जल में विखंडित हो जाता है, जिससे दर्द ठीक हो जाता है।
Example 3
Q3 (अनुप्रयोग): सांस लेते समय (अंतःश्वसन) और सांस छोड़ते समय (उच्छ्वसन) डायफ्राम और पसलियों में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
1. अंतःश्वसन: पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर गति करती हैं और डायफ्राम नीचे की ओर चपटा होता है, जिससे वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है और हवा फेफड़ों में भर जाती है।
2. उच्छ्वसन: पसलियाँ नीचे और अंदर आती हैं और डायफ्राम ऊपर अपनी पूर्व स्थिति में आ जाता है, जिससे वक्ष गुहा सिकुड़ती है और हवा बाहर निकल जाती है।
Example 4
Q4 (कारण व प्रभाव): यदि किसी गमले में लगे पौधे को दिन-रात पानी से लबालब भरकर रखा जाए, तो कुछ दिनों बाद वह पौधा पीला पड़कर सूख क्यों जाता है?
Step-by-Step Solution:
उत्तर: पौधों की जड़ें मिट्टी के कणों के बीच की वायु से मूलरोमों द्वारा ऑक्सीजन लेकर श्वसन करती हैं। लगातार जलभराव से मिट्टी के छिद्रों से हवा बाहर निकल जाती है और वहाँ केवल पानी भर जाता है। ऑक्सीजन के अभाव में जड़ें श्वसन नहीं कर पातीं, जिससे उनकी कोशिकाएं सड़ने लगती हैं और पौधा सूखकर मर जाता है।
Example 5
Q5 (उच्च स्तरीय चिंतन): केंचुआ और मछली दोनों फेफड़ों के बिना सांस लेते हैं। दोनों के श्वसन अंगों की संरचना और कार्यप्रणाली में तुलना कीजिए।
Step-by-Step Solution:
उत्तर:
1. केंचुआ: इसमें कोई विशिष्ट श्वसन अंग नहीं होता। यह अपनी पतली, नम और श्लेष्मी त्वचा से वायुमंडलीय ऑक्सीजन का सीधा विसरण करता है। त्वचा के सूखते ही केंचुआ मर जाता है।
2. मछली: इसमें जल में सांस लेने के लिए विशिष्ट अंग गलफड़े (क्लोम/Gills) होते हैं। जब पानी गलफड़ों के ऊपर से बहता है, तो गलफड़ों की रक्त केशिकाएं जल में घुली ऑक्सीजन को सोख लेती हैं और $CO_2$ को पानी में मुक्त कर देती हैं। मछली हवा में सांस नहीं ले सकती क्योंकि हवा में गलफड़े आपस में चिपक जाते हैं।

Common Misconceptions & Examiner Traps

Common Misconception

साँस लेने (Breathing) और श्वसन (Respiration) को एक ही प्रक्रिया मानना।

Scientific Reality & Correction

साँस लेना फेफड़ों द्वारा गैसों का केवल अंदर-बाहर आदान-प्रदान (भौतिक क्रिया) है, जबकि श्वसन प्रत्येक कोशिका के भीतर ग्लूकोज को तोड़कर ऊर्जा बनाने की रासायनिक क्रिया है।

Common Misconception

यह समझना कि उच्छ्वसन में हम शुद्ध 100% कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ते हैं।

Scientific Reality & Correction

उच्छ्वसन की हवा में केवल 4.4% कार्बन डाइऑक्साइड होती है, जबकि अब भी 16.4% ऑक्सीजन और 78% नाइट्रोजन उपस्थित रहती है।

Common Misconception

यह मानना कि पौधे केवल प्रकाश-संश्लेषण करते हैं और श्वसन नहीं करते।

Scientific Reality & Correction

पौधे सजीव हैं और वे 24 घंटे लगातार श्वसन करते हैं। श्वसन में वे भी ऑक्सीजन ही लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड ही छोड़ते हैं।

Visual Learning & Conceptual Map

कोशिकीय श्वसन के मार्ग (Cellular Respiration Pathways)
🟢 वायवीय (Aerobic)
ऑक्सीजन के साथ → CO₂ + जल + अत्यधिक ऊर्जा (38 ATP) [मानव/पादप कोशिकाएं]
🟡 अवायवीय: किण्वन
ऑक्सीजन के बिना (यीस्ट) → अल्कोहॉल + CO₂ + कम ऊर्जा (2 ATP)
🔴 अवायवीय: पेशी ऐंठन
ऑक्सीजन की कमी (दौड़ते समय) → लैक्टिक अम्ल + ऐंठन

Chapter Summary & 10 Key Takeaways

Takeaway 1
कोशिका के भीतर भोजन (ग्लूकोज) के विखंडन से ऊर्जा मुक्त होने का प्रक्रम कोशिकीय श्वसन कहलाता है।
Takeaway 2
ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाला श्वसन वायवीय (Aerobic) और अनुपस्थिति में होने वाला अवायवीय (Anaerobic) कहलाता है।
Takeaway 3
यीस्ट में अवायवीय श्वसन से अल्कोहॉल और CO₂ बनते हैं, जिसे किण्वन (Fermentation) कहते हैं।
Takeaway 4
तीव्र दौड़ या व्यायाम के समय पेशियों में ऑक्सीजन की कमी से लैक्टिक अम्ल बनता है, जिससे पेशियों में ऐंठन (Cramps) होती है।
Takeaway 5
साँस लेना एक भौतिक क्रिया है; विश्राम अवस्था में वयस्क की सामान्य श्वसन दर 15 से 18 बार प्रति मिनट होती है।
Takeaway 6
अंतःश्वसन में पसलियाँ ऊपर-बाहर और डायफ्राम नीचे गति करता है; उच्छ्वसन में पसलियाँ नीचे-अंदर और डायफ्राम ऊपर आता है।
Takeaway 7
उच्छ्वसित वायु में लगभग 4.4% CO₂ होती है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
Takeaway 8
कॉकरोच श्वास रंध्रों व वातक नलियों से, केंचुआ नम त्वचा से, मछली गलफड़ों (गिल्स) से और मेंढक फेफड़ों व त्वचा दोनों से श्वसन करते हैं।
Takeaway 9
पादपों की पत्तियाँ रंध्रों द्वारा और जड़ें मिट्टी के कणों के बीच की वायु से मूलरोमों द्वारा ऑक्सीजन अवशोषित करती हैं।
Takeaway 10
गमले में अत्यधिक जलभराव होने से जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और पौधा सड़कर नष्ट हो जाता है।

Check Your Understanding (Diagnostic Practice Questions)

Diagnostic questions testing core conceptual clarity. Answers are hidden initially — solve each problem first, then click to reveal the step-by-step verified solution.

1
कोशिकीय श्वसन किसे कहते हैं और यह शरीर में कहाँ संपन्न होता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: कोशिकाओं के भीतर ऑक्सीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति में ग्लूकोज के विखंडन द्वारा रासायनिक ऊर्जा मुक्त होने के प्रक्रम को कोशिकीय श्वसन कहते हैं। यह शरीर की प्रत्येक जीवित कोशिका के माइटोकॉन्ड्रिया व कोशिकाद्रव्य में संपन्न होता है।
2
दौड़ते समय पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन क्यों होती है और गर्म पानी की मालिश से आराम क्यों मिलता है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: दौड़ते समय ऑक्सीजन की कमी से पेशियों में लैक्टिक अम्ल बन जाता है जिसके जमाव से ऐंठन होती है। मालिश या गर्म पानी से रक्त संचार तेज होता है और प्रचुर ऑक्सीजन मिलने से लैक्टिक अम्ल CO₂ व जल में टूट जाता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है।
3
मछली पानी के भीतर सांस कैसे लेती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: मछली के सिर के दोनों ओर गलफड़े (Gills) होते हैं जिनमें रक्त केशिकाओं का घना जाल होता है। जब पानी मुंह से होकर गलफड़ों से गुजरता है, तो गलफड़े जल में घुली ऑक्सीजन को रक्त में अवशोषित कर लेते हैं और CO₂ को बाहर निकाल देते हैं।
4
केंचुए की त्वचा हमेशा नम और चिपचिपी क्यों रहती है?
Reveal Answer & Explanation
Answer: केंचुए में फेफड़े नहीं होते। वह अपनी नम त्वचा के माध्यम से ही गैसीय विनिमय करता है। त्वचा के नम रहने पर ही वायुमंडलीय ऑक्सीजन घुलकर रक्त वाहिकाओं में विसरित हो सकती है।
5
उच्छ्वसन की वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति कैसे प्रमाणित करेंगे?
Reveal Answer & Explanation
Answer: एक परखनली में ताजा चूने का पानी लेकर उसमें स्ट्रा से फूंक मारने पर चूने का पानी दूधिया (Milky) हो जाता है। यह प्रमाणित करता है कि बाहर निकाली गई सांस में कार्बन डाइऑक्साइड उपस्थित है।
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