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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Science • अध्याय 13
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

अपशिष्ट जल की कहानी (Wastewater Story)

झारखण्ड शैक्षणिक परिषद् (JAC) कक्षा 7 विज्ञान का त्रयोदश (अंतिम) अध्याय "अपशिष्ट जल की कहानी" (Wastewater Story) पर्यावरण विज्ञान, जल प्रबंधन तथा सार्वजनिक स्वच्छता का अत्यंत महत्वपूर्ण व जीवनोपयोगी अध्ययन है। इसमें सीवेज (वाहित मल) के संघटन, वाहित मल उपचार संयंत्र (WWTP) की संपूर्ण भौतिक, जैविक व रासायनिक चरणबद्ध कार्यप्रणाली, आपंक (Sludge) से बायोगैस निर्माण, जल विसंक्रमण (क्लोरीन/ओजोन), यूकेलिप्टस पौधों की भूमिका, बेहतर गृहस्थी पद्धतियाँ, तथा खुले में शौच मुक्ति व सेप्टिक/वर्मी-कंपोस्टिंग शौचालयों का प्रामाणिक शिक्षण शामिल है।

💧 क्या आपने कभी सोचा है?

🚿 जब आप सुबह हाथ-मुँह धोते हैं, कपड़े धोते हैं, बर्तन माँजते हैं या शौचालय का फ्लश चलाते हैं, तो वह गंदा, झागदार और बदबूदार पानी नाली में बहकर आखिर जाता कहाँ है?

🏭 बड़े-बड़े शहरों में रोजाना बहने वाले करोड़ों लीटर काले-बदबूदार सीवेज के गंदे पानी को आधुनिक संयंत्रों में ऐसा क्या किया जाता है कि कुछ ही घंटों में वह बिल्कुल पारदर्शी, स्वच्छ और रोगाणु-मुक्त पानी में बदल जाता है?

🌿 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के चारों ओर यूकेलिप्टस (सफेदा) के ऊंचे-ऊंचे पेड़ कतारों में क्यों लगाए जाते हैं?

🪱 क्या मानव मल (Toilet Waste) को लाल केंचुओं (Redworms) की मदद से बिना किसी दुर्गंध के खेत की सबसे कीमती जैविक खाद (Vermicompost) में बदला जा सकता है?

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

स्वच्छ पेयजल जीवन का मौलिक अधिकार है, किंतु दुनिया भर में हर साल लाखों बच्चे केवल दूषित जल पीने और अस्वच्छता के कारण हैजा, पेचिश और टाइफाइड जैसी जानलेवा बीमारियों के शिकार होते हैं। भारत सरकार के "स्वच्छ भारत अभियान" और जल संरक्षण की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को साकार करने के लिए अपशिष्ट जल का सुरक्षित शोधन और विवेकपूर्ण उपयोग अनिवार्य है। यह अध्याय केवल विज्ञान नहीं सिखाता, बल्कि छात्रों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाकर जल संरक्षण और बेहतर स्वच्छता आदतों का संकल्प देता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • जल एक अनमोल प्राकृतिक संसाधन है और पृथ्वी पर पीने योग्य मीठा जल बहुत सीमित (1% से भी कम) है।
  • जल में घुलनशील और अघुलनशील अशुद्धियाँ मिलकर उसे प्रदूषित बनाती हैं।
  • दूषित जल में हानिकारक रोगाणु (जीवाणु, प्रोटोजोआ, वायरस) पनपते हैं जो संक्रामक बीमारियाँ फैलाते हैं।
  • सूक्ष्मजीव (जीवाणु) कार्बनिक कचरे को सड़ाकर नष्ट करने की प्राकृतिक क्षमता रखते हैं।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • अपशिष्ट जल (Wastewater) और सीवेज (वाहित मल) के घटकों (निलंबित ठोस, कार्बनिक व अकार्बनिक अशुद्धियाँ, रोगाणु) का वर्गीकरण कर सकेंगे।
  • वाहित मल उपचार संयंत्र (WWTP) के सभी 7 चरणों (बार स्क्रीन, ग्रिट चैंबर, प्राथमिक क्लेरिफायर, आपंक डाइजेस्टर, वातन टंकी, द्वितीयक अवसादन, विसंक्रमण) का सचित्र वर्णन कर सकेंगे।
  • वायवीय जीवाणुओं (Aerobic) और अवायवीय जीवाणुओं (Anaerobic) द्वारा अपशिष्ट शोधन में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • सक्रियित आपंक (Activated Sludge) और बायोगैस उत्पादन की वैज्ञानिक विधि को समझ सकेंगे।
  • जल विसंक्रमण में क्लोरीन (Chlorine) और ओजोन (Ozone) के रासायनिक महत्व को बता सकेंगे।
  • अपशिष्ट जल शोधन में यूकेलिप्टस वृक्षों की भूमिका की व्याख्या कर सकेंगे।
  • नालियों को जाम होने और प्रदूषण से बचाने के लिए 4 प्रमुख "बेहतर गृहस्थी पद्धतियों" को दैनिक जीवन में अपना सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अपशिष्ट जल एवं सीवेज का वैज्ञानि...
2 2. वाहित मल उपचार संयंत्र (WWTP) के...
3 3. बेहतर गृहस्थी पद्धतियां: नालियों...
4 4. स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं वैकल्पिक...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अपशिष्ट जल एवं सीवेज का वैज्ञानिक संघटन (Sewage Composition)

घरों, उद्योगों, अस्पतालों, होटलों और कृषि क्षेत्रों से उपयोग के बाद नालियों में बहने वाला गंदा, मैला और झागदार जल अपशिष्ट जल (Wastewater) कहलाता है।

सीवेज (Sewage / वाहित मल):

सीवेज घरों और सार्वजनिक भवनों से निकलने वाला एक जटिल तरल अपशिष्ट (Liquid Waste) है। इसमें लगभग 99% जल और 1% हानिकारक अशुद्धियाँ होती हैं, जिन्हें संदूषक (Contaminants) कहते हैं:

संदूषक का प्रकारप्रमुख घटक व उदाहरण
कार्बनिक अशुद्धियाँ (Organic)मानव मल, पशु अपशिष्ट, तेल व वसा, यूरिया (मूत्र), कीटनाशक, फलों व सब्जियों का कचरा।
अकार्बनिक अशुद्धियाँ (Inorganic)नाइट्रेट, फॉस्फेट, धातुएं, प्लास्टिक के कण तथा नमक।
पोषक तत्व (Nutrients)फास्फोरस और नाइट्रोजन (जो जल में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि का कारण बनते हैं)।
जीवाणु व रोगाणु (Pathogens)विब्रियो कॉलेरी (हैजा कारक), साल्मोनेला टाइफी (टाइफाइड कारक), पेचिश फैलाने वाले प्रोटोजोआ।

सीवर और सीवरेज: घरों से गंदा पानी ले जाने वाले भूमिगत पाइपों को सीवर (Sewer) कहते हैं, और इन पाइपों के पूरे भूमिगत नेटवर्क को सीवरेज (Sewerage / मल-व्यवस्था) कहते हैं, जो अपशिष्ट को शोधन संयंत्र तक पहुँचाता है।

2. वाहित मल उपचार संयंत्र (WWTP) के 7 चरणबद्ध प्रक्रम

वाहित मल उपचार संयंत्र (Wastewater Treatment Plant — WWTP) में भौतिक, जैविक और रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा अपशिष्ट जल से सभी हानिकारक संदूषकों को अलग किया जाता है:

  1. चरण 1: शलाका छन्ने (Bar Screens): अपशिष्ट जल को सलाखों (वर्टिकल बार्स) से बनी छलनी से गुजारा जाता है। इससे बड़े आकार के कचरे—जैसे कपड़े के चिथड़े, प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बे, नैपकिन, डंडियाँ—छनकर अलग हो जाते हैं।
  2. चरण 2: ग्रिट और बालू पृथक्करण (Grit & Sand Removal Tank): जल को एक चौड़ी टंकी में बहुत धीमी गति से प्रवाहित किया जाता है। गति कम होने से भारी बालू, कंकड़ और पत्थर के टुकड़े तली में बैठ जाते हैं।
  3. चरण 3: प्राथमिक स्पष्टीकरण टंकी (Primary Clarifier): जल को एक बड़ी गोलाकार टंकी में कई घंटों तक शांत रखा जाता है। तली में भारी ठोस मल बैठ जाता है जिसे आपंक (Sludge) कहते हैं, इसे खुरचनी (Scraper) से अलग कर लिया जाता है। ऊपर तैरने वाले तेल और ग्रीस को स्किमर (Skimmer) से हटा दिया जाता है। अब प्राप्त जल स्पष्टीकृत जल (Clarified Water) कहलाता है।
  4. चरण 4: अवायवीय आपंक पाचन (Anaerobic Digester): प्राथमिक टंकी से निकाले गए आपंक को एक बंद टंकी में डाला जाता है जहाँ अवायवीय जीवाणु (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में) इसका अपघटन करते हैं। इस प्रक्रिया में प्रचुर मात्रा में बायोगैस (Biogas) बनती है, जिसका उपयोग ईंधन और विद्युत ऊर्जा उत्पादन में होता है। बचा हुआ सूखा आपंक उत्तम जैविक खाद बनता है।
  5. चरण 5: वातन टंकी (Aeration Tank): स्पष्टीकृत जल में शक्तिशाली कंप्रेसर द्वारा हवा फूंकी जाती है। प्रचुर ऑक्सीजन पाकर वायवीय जीवाणु (Aerobic Bacteria) तेजी से वृद्धि करते हैं और जल में बचे हुए मानव मल, साबुन, भोजन के कणों और कार्बनिक पदार्थों को खाकर समाप्त कर देते हैं।
  6. चरण 6: द्वितीयक अवसादन टंकी (Secondary Settling Tank): कई घंटों बाद जीवाणु सूक्ष्म थक्कों के रूप में तली में बैठ जाते हैं जिसे सक्रियित आपंक (Activated Sludge) कहते हैं (इसमें 97% जल होता है)। ऊपर का स्वच्छ जल पूरी तरह पारदर्शी हो जाता है।
  7. चरण 7: रासायनिक विसंक्रमण (Disinfection): जल को प्राकृतिक जलाशयों में छोड़ने से पहले उसमें बचे हुए हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए क्लोरीन (Chlorine) गैस/गोलियाँ या ओजोन ($O_3$) गैस प्रवाहित की जाती है।

3. बेहतर गृहस्थी पद्धतियां: नालियों की सुरक्षा (Better Housekeeping)

हम अपने घर के स्तर पर ही अपशिष्ट जल की मात्रा और उसकी विषाक्तता को बहुत कम कर सकते हैं। इसके लिए 4 स्वर्णिम नियम अवश्य अपनाने चाहिए:

❌ 1. तेल और घी को नाली में कभी न बहाएं

खाना पकाने के तेल और वसा नालियों की पाइपों में जमकर कठोर हो जाते हैं और पाइप को पूरी तरह चोक (जाम) कर देते हैं। खुले नालों में ये मिट्टी के छिद्रों को बंद कर देते हैं जिससे पानी जमीन में नहीं रिस पाता। इन्हें सदैव कचरा डिब्बे में डालें।

❌ 2. रसायन, पेंट और दवाएं सिंक में न डालें

पेंट, विलायक (थिनर), कीटनाशक, मोटर ऑयल और एक्सपायर्ड दवाएं जहरीली होती हैं। ये सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में जल को साफ करने वाले जीवनोपयोगी जीवाणुओं को मार डालती हैं, जिससे शोधन प्रक्रिया ठप हो जाती है।

❌ 3. ठोस कचरा नाली में न बहाएं

प्रयुक्त चाय की पत्ती, बचे हुए खाद्य पदार्थ, हड्डियाँ, रूई, सैनिटरी टॉवेल और पॉलीथिन को कभी कमोड या नाली में न डालें। ये ऑक्सीजन के प्रवाह को रोकते हैं और नालियों को अवरुद्ध करते हैं।

🌿 4. यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ों का रोपण

सीवेज शोधन तालाबों के किनारों पर यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए जाते हैं। ये पेड़ गंदे अपशिष्ट जल को तीव्र गति से अवशोषित कर लेते हैं और अपने पत्तों द्वारा शुद्ध जलवाष्प (वाष्पोत्सर्जन) के रूप में वायुमंडल में छोड़ते हैं, जिससे भूमिगत जल स्वच्छ रहता है।

4. स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं वैकल्पिक ऑन-साइट शौचालय व्यवस्था

अस्वच्छता और दूषित पेयजल अनेक गंभीर जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) की जड़ हैं। खुले में शौच करने से मक्खियाँ और वर्षा का पानी रोगाणुओं को सीधे हमारे कुओं, चापाकलों और भोजन तक पहुँचा देते हैं।

वैकल्पिक ऑन-साइट वाहित मल निपटान प्रणालियाँ:
  • सेप्टिक टैंक (Septic Tank): जहाँ सीवरेज लाइन नहीं होती, वहाँ कंक्रीट का भूमिगत सेप्टिक टैंक बनाया जाता है जिसमें अवायवीय जीवाणु मल को अपघटित करते हैं और तरल जल मिट्टी में रिस जाता है (अस्पतालों, ग्रामीण मकानों हेतु उपयुक्त)।
  • बायोगैस संयंत्र से जुड़े शौचालय: मानव मल सीधे बायोगैस संयंत्र में गिरता है जहाँ से उत्पन्न गैस से घर की रसोई चलती है।
  • वर्मी-प्रोसेसिंग शौचालय (Vermicomposting Toilets): भारत में परीक्षित एक क्रांतिकारी शौचालय मॉडल जिसमें मानव मल को गड्ढे में केंचुओं (Redworms) द्वारा उपचारित किया जाता है। केंचुए कुछ ही महीनों में संपूर्ण मल को बिना किसी दुर्गंध या मक्खी के उच्च कोटि की वर्मी-केक्स (Vermicompost खाद) में बदल देते हैं, जो खेतों के लिए अत्यंत उपजाऊ होती है।

महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र, अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

सीवेज का संघटन अनुपात
99% जल + 1% ठोस संदूषक (कार्बनिक, अकार्बनिक, रोगाणु)
तरल अपशिष्ट की प्रकृति
आपंक से बायोगैस
आपंक (Sludge) + अवायवीय जीवाणु → बायोगैस (CH4 + CO2) + जैविक खाद
ऊर्जा व खाद निर्माण
रासायनिक विसंक्रमण
जल + Cl2 (क्लोरीन) या O3 (ओजोन) → रोगाणु-मुक्त सुरक्षित जल
जीवाणु व विषाणु विनाश
सक्रियित आपंक संघटन
लगभग 97% जल + 3% सक्रिय वायवीय जीवाणु थक्के
पुनर्चक्रण योग्य

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
Q1 (प्रक्रिया स्पष्टीकरण): वाहित मल उपचार संयंत्र (WWTP) में "शलाका छन्ने" (Bar Screens) और "ग्रिट चैंबर" का क्या कार्य है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1. शलाका छन्ने (Bar Screens): यह सलाखों से बनी एक मजबूत जाली होती है जो सीवेज में बहकर आने वाले बड़े अघुलनशील तैरते कचरे—जैसे कपड़े के चिथड़े, प्लास्टिक बैग, बोतलें, डंडे, डिब्बे—को रोककर अलग कर देती है ताकि आगे की पाइप और पंप जाम न हों।
2. ग्रिट और बालू पृथक्करण टंकी (Grit Chamber): इसमें पानी को बहुत धीमी गति से चलाया जाता है जिससे जल में मिले भारी अकार्बनिक कण जैसे कंकड़, पत्थर, बालू और ग्रिट गुरुत्वाकर्षण के कारण तली में बैठ जाते हैं और जल से अलग हो जाते हैं।

उदाहरण 2
Q2 (अवधारणा - वायवीय बनाम अवायवीय): WWTP में आपंक (Sludge) का उपचार और वातन टंकी (Aeration Tank) का उपचार किन भिन्न-भिन्न जीवाणुओं द्वारा होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
उपचार का भागप्रयुक्त जीवाणुकार्यप्रणाली व उत्पाद
आपंक डाइजेस्टरअवायवीय जीवाणु (Anaerobic) — ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्य करते हैं।ठोस मल (Sludge) को सड़ाकर बायोगैस (ईंधन) और खाद बनाते हैं।
वातन टंकी (Aeration)वायवीय जीवाणु (Aerobic) — प्रचुर ऑक्सीजन की उपस्थिति में कार्य करते हैं।जल में घुले साबुन, भोजन के कण और मानव मल को खाकर जल को स्वच्छ करते हैं।
उदाहरण 3
Q3 (कारण व प्रभाव): खाना पकाने के तेल और घी को सीधे रसोई के सिंक या नाली में क्यों नहीं बहाना चाहिए?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
वैज्ञानिक व व्यावहारिक कारण:
1. तेल और वसा ठंडे होने पर पाइपों की आंतरिक दीवारों पर चिपककर कठोर परत बना लेते हैं, जिससे नालियों की जल निकासी बाधित होती है और पाइप पूरी तरह चोक (जाम) हो जाते हैं।
2. खुले नालों में बहने पर तेल मिट्टी के अत्यंत सूक्ष्म छिद्रों को चिकनाई से बंद कर देता है, जिससे वर्षा का पानी मिट्टी में नहीं रिस पाता और जलभराव व दुर्गंध की समस्या पैदा होती है। इसलिए तेल-घी को हमेशा कूड़ेदान में डालना चाहिए।

उदाहरण 4
Q4 (पर्यावरणीय समाधान): अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों के आसपास यूकेलिप्टस (सफेदा) के वृक्ष लगाना क्यों अत्यंत लाभकारी माना जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
यूकेलिप्टस वृक्षों की जल अवशोषण क्षमता असाधारण रूप से तीव्र होती है:
1. ये पेड़ सीवेज और अपशिष्ट जल के सभी अतिरिक्त गंदे पानी को अपनी गहरी जड़ों से बहुत तेजी से सोख लेते हैं।
2. पेड़ इस गंदे पानी में उपस्थित कार्बनिक पोषक तत्वों को अपनी वृद्धि के लिए उपयोग कर लेते हैं।
3. इसके पश्चात पेड़ वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा बिल्कुल शुद्ध जलवाष्प को वायुमंडल में छोड़ते हैं, जिससे बिना किसी रासायनिक खर्च के अपशिष्ट जल का प्राकृतिक शोधन हो जाता है।

उदाहरण 5
Q5 (आधुनिक नवाचार): वर्मी-प्रोसेसिंग शौचालय (Vermicomposting Toilet) क्या है और यह ग्रामीण भारत के लिए किस प्रकार वरदान है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
वर्मी-प्रोसेसिंग शौचालय एक पर्यावरण-अनुकूल और जल-बचत तकनीक है जिसमें मानव मल को एक विशेष गड्ढे में डाला जाता है जहाँ लाल केंचुए (Redworms) उपस्थित होते हैं:
1. केंचुए मानव मल को पूरी तरह खाकर बिना किसी दुर्गंध या मक्खी-मच्छर के विशुद्ध जैविक खाद (Vermicompost Cakes) में बदल देते हैं।
2. इसमें बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है और किसी महंगे सीवरेज नेटवर्क की जरूरत नहीं होती।
3. यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच से मुक्ति और खेतों के लिए बहुमूल्य खाद उपलब्ध कराने का दोहरा लाभ देती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सीवेज (वाहित मल) को केवल साधारण गंदा पानी समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सीवेज केवल गंदा पानी नहीं है, बल्कि यह 99% जल में घुले और निलंबित घातक रोगाणुओं (हैजा, टाइफाइड जीवाणु), विषैले रसायनों और कार्बनिक अपशिष्टों का एक अत्यंत संक्रामक तरल घोल है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पुराने पेंट, कीटनाशक और दवाइयों को नाली में फ्लश कर देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ये रसायन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में पानी को साफ करने वाले मित्र जीवाणुओं (Microbes) को मार देते हैं, जिससे शोधन प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो जाती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सक्रियित आपंक (Activated Sludge) को सूखा कचरा समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सक्रियित आपंक में लगभग 97% जल होता है और इसमें अत्यधिक मात्रा में सक्रिय वायवीय सूक्ष्मजीव होते हैं, जिन्हें सुखाकर खाद बनाई जाती है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

वाहित मल उपचार संयंत्र (WWTP) का संपूर्ण शोधन चक्र
1. शलाका छन्ने (ठोस कचरा) ➔ 2. ग्रिट व बालू पृथक्करण ➔ 3. प्राथमिक क्लेरिफायर (आपंक) ➔ 4. वातन टंकी (वायवीय जीवाणु) ➔ 5. विसंक्रमण (क्लोरीन/ओजोन)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
उपयोग के पश्चात नालियों में बहने वाला गंदा झागदार जल अपशिष्ट जल कहलाता है; घरों व भवनों से निकलने वाला तरल अपशिष्ट सीवेज कहलाता है।
मुख्य बिंदु 2
सीवेज में निलंबित ठोस, कार्बनिक व अकार्बनिक अशुद्धियाँ, पोषक तत्व तथा हैजा-टाइफाइड फैलाने वाले रोगाणु होते हैं।
मुख्य बिंदु 3
वाहित मल उपचार संयंत्र (WWTP) भौतिक, जैविक और रासायनिक प्रक्रमों द्वारा जल का शोधन करता है।
मुख्य बिंदु 4
शलाका छन्ने बड़े तैरते कचरे को रोकते हैं और ग्रिट चैंबर में बालू व कंकड़ नीचे बैठ जाते हैं।
मुख्य बिंदु 5
प्राथमिक क्लेरिफायर में तली में बैठा ठोस मल आपंक (Sludge) कहलाता है जिसे अवायवीय जीवाणुओं द्वारा बायोगैस में बदला जाता है।
मुख्य बिंदु 6
वातन टंकी (Aeration Tank) में हवा छोड़े जाने पर वायवीय जीवाणु तेजी से पनपते हैं और बचे हुए कार्बनिक अपशिष्ट को खा जाते हैं।
मुख्य बिंदु 7
शोधित जल को जलाशयों में छोड़ने से पूर्व रोगाणुओं को मारने हेतु क्लोरीन या ओजोन से विसंक्रमित किया जाता है।
मुख्य बिंदु 8
नालियों को जाम होने से बचाने के लिए खाना पकाने का तेल, रसायन, पेंट, दवाएं और ठोस कचरा कभी नाली में न बहाएं।
मुख्य बिंदु 9
यूकेलिप्टस के पेड़ अपशिष्ट जल को तेजी से अवशोषित कर वाष्पोत्सर्जन द्वारा शुद्ध जलवाष्प छोड़ते हैं।
मुख्य बिंदु 10
स्वच्छता की कमी से जलजनित रोग फैलते हैं; ऑन-साइट सेप्टिक टैंक और केंचुओं वाले वर्मी-शौचालय सुरक्षित अपशिष्ट निपटान के बेहतरीन विकल्प हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
सीवेज (वाहित मल) किसे कहते हैं? इसमें कौन-कौन से रोगाणु पाए जाते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: घरों, उद्योगों और अस्पतालों से निकलने वाले तरल अपशिष्ट को सीवेज कहते हैं। इसमें हैजा फैलाने वाले जीवाणु (विब्रियो कॉलेरी), टाइफाइड फैलाने वाले (साल्मोनेला टाइफी) और पेचिश फैलाने वाले रोगाणु पाए जाते हैं।
2
WWTP में "आपंक" (Sludge) क्या है और इससे बायोगैस कैसे बनती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्राथमिक अवसादन टंकी की तली में बैठने वाले ठोस कार्बनिक मल को आपंक कहते हैं। इसे अवायवीय डाइजेस्टर में भेजा जाता है जहाँ अवायवीय जीवाणु इसका अपघटन करके बायोगैस और खाद बनाते हैं।
3
शोधित जल को नदियों में छोड़ने से पहले क्लोरीन या ओजोन क्यों मिलाई जाती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जल को रोगाणु-मुक्त (Disinfected) बनाने के लिए क्लोरीन या ओजोन मिलाई जाती है, ताकि जल में बचे हुए हानिकारक सूक्ष्मजीव और कीटाणु पूरी तरह नष्ट हो जाएं।
4
नालियों की सुरक्षा के लिए कोई दो बेहतर गृहस्थी पद्धतियाँ (Housekeeping practices) लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. खाद्य तेल और घी को नाली में न बहाएं (पाइप जाम होने से रोकें)। 2. पेंट, कीटनाशक और दवाएं सिंक में न डालें (ताकि शोधन करने वाले मित्र जीवाणु न मरें)।

5
वर्मी-प्रोसेसिंग शौचालय में केंचुओं की क्या भूमिका होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वर्मी-प्रोसेसिंग शौचालय में लाल केंचुए (Redworms) मानव मल को खाकर पूरी तरह अपघटित कर देते हैं और उसे बिना दुर्गंध वाली उच्च गुणवत्ता युक्त जैविक खाद (वर्मी-कंपोस्ट) में बदल देते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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